श्री सप्तश्लोकी दुर्गा
सप्तश्लोकी दुर्गा में भगवान शिव देवी से कलियुग में कार्यसिद्धि के उपाय के बारे में पूछते हैं और देवी उन्हें सात श्लोकों में अम्बास्तुति का उपदेश देती हैं। ये सात श्लोक श्री दुर्गा सप्तशती के ग्यारहवें अध्याय में आने वाली देवी-स्तुति के श्लोकों से संबंधित हैं।
अथ सप्तश्लोकी दुर्गा
शिव उवाच—
देवि त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्यविधायिनी।
कलौ हि कार्यसिद्ध्यर्थमुपायं ब्रूहि यत्नतः॥
देव्युवाच—
शृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्टसाधनम्।
मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बास्तुतिः प्रकाश्यते॥
विनियोग
ॐ अस्य श्रीदुर्गासप्तश्लोकीस्तोत्रमन्त्रस्य नारायण ऋषिः,
अनुष्टुप् छन्दः, श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवताः,
श्रीदुर्गाप्रीत्यर्थं सप्तश्लोकीदुर्गापाठे विनियोगः।
श्री सप्तश्लोकी दुर्गा पाठ
ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा।
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥ १ ॥
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः
स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता॥ २ ॥
सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ ३ ॥
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ ४ ॥
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥ ५ ॥
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥ ६ ॥
सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥ ७ ॥
सप्तश्लोकी दुर्गा का सरल अर्थ
शिवजी बोले—
हे देवि! आप भक्तों के लिए सहज ही प्राप्त होने वाली और सभी कार्यों को पूर्ण करने वाली हैं। कलियुग में कार्यसिद्धि के लिए कौन-सा उपाय करना चाहिए, वह कृपापूर्वक बताइए।
देवी ने कहा—
हे देव! सुनिए, मैं कलियुग में सभी अभीष्ट की प्राप्ति का साधन बताती हूँ। आपके प्रति अपने स्नेह के कारण मैं अम्बा की इस स्तुति को प्रकट कर रही हूँ।
विनियोग का अर्थ:
इस दुर्गा सप्तश्लोकी स्तोत्र-मंत्र के ऋषि नारायण हैं, छंद अनुष्टुप् है तथा श्री महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती इसकी देवता हैं। श्री दुर्गा की प्रसन्नता के लिए सप्तश्लोकी दुर्गा के पाठ में इसका विनियोग किया जाता है।
श्लोक १ का अर्थ:
वे भगवती महामाया देवी ज्ञानियों के चित्त को भी अपनी माया से आकर्षित करके मोह में डाल देती हैं।
श्लोक २ का अर्थ:
हे दुर्गे! आपका स्मरण करने पर आप सभी प्राणियों का भय दूर कर देती हैं और स्वस्थ मन से आपका स्मरण करने पर शुभ बुद्धि प्रदान करती हैं। दुःख, दरिद्रता और भय को दूर करने वाली देवी! आपके अतिरिक्त ऐसा कौन है, जिसका चित्त सबका उपकार करने के लिए सदा दयालु रहता हो?
श्लोक ३ का अर्थ:
हे नारायणी! आप सभी मंगलों में मंगलस्वरूपा, कल्याणमयी, सभी पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरण देने वाली, तीन नेत्रों वाली और गौरी हैं। आपको नमस्कार है।
श्लोक ४ का अर्थ:
हे नारायणी देवी! शरण में आए हुए दीन और पीड़ित लोगों की रक्षा के लिए तत्पर रहने वाली तथा सभी की पीड़ा दूर करने वाली देवी! आपको नमस्कार है।
श्लोक ५ का अर्थ:
हे दुर्गे देवी! आप सभी स्वरूपों में विद्यमान, सभी की अधीश्वरी और सभी शक्तियों से संपन्न हैं। हमें सभी भयों से बचाइए। आपको नमस्कार है।
श्लोक ६ का अर्थ:
हे देवी! प्रसन्न होने पर आप सभी रोगों का नाश करती हैं और रुष्ट होने पर सभी अभीष्ट कामनाओं का नाश करती हैं। जो लोग आपकी शरण में रहते हैं, वे विपत्ति में नहीं पड़ते और आपकी शरण में आए हुए लोग दूसरों को भी आश्रय देने वाले बन जाते हैं।
श्लोक ७ का अर्थ:
हे तीनों लोकों की अखिलेश्वरी देवी! आप इसी प्रकार सभी बाधाओं को शांत करें और हमारे शत्रुओं का नाश करें।
॥ श्रीसप्तश्लोकी दुर्गा सम्पूर्ण ॥
निष्कर्ष
श्री सप्तश्लोकी दुर्गा माँ भगवती की सात श्लोकों वाली स्तुति है, जिसमें देवी के विभिन्न स्वरूपों का स्मरण करते हुए उनकी शरण और कृपा की प्रार्थना की गई है। इसके श्लोकों में देवी को सर्वमंगलमयी, शरणागतों की रक्षा करने वाली और समस्त शक्तियों से युक्त बताया गया है।
भक्त नवरात्रि के दिनों में विशेष रूप से माँ दुर्गा की उपासना के दौरान सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ करते हैं। इसके अलावा अपनी श्रद्धा और पारिवारिक या गुरु-परंपरा के अनुसार अन्य दिनों में भी इसका पाठ किया जा सकता है। पाठ करते समय श्लोकों का सही उच्चारण, श्रद्धा और एकाग्रता रखना उचित माना जाता है।
सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ माँ भगवती के स्मरण और स्तुति का सरल माध्यम है। भक्त अपनी परंपरा के अनुसार इसका पाठ करके माँ दुर्गा का ध्यान और प्रार्थना कर सकते हैं।
सप्तश्लोकी दुर्गा FAQ
सप्तश्लोकी दुर्गा क्या है?
सप्तश्लोकी दुर्गा माँ भगवती की सात श्लोकों वाली स्तुति है। इसमें देवी के विभिन्न स्वरूपों और उनकी महिमा का वर्णन करते हुए देवी से रक्षा और कल्याण की प्रार्थना की गई है।
सप्तश्लोकी दुर्गा में कितने श्लोक हैं?
सप्तश्लोकी दुर्गा में सात मुख्य श्लोक हैं। इन्हीं सात श्लोकों के कारण इसे सप्तश्लोकी दुर्गा कहा जाता है।
सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ कब करना चाहिए?
सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ नवरात्रि में माँ दुर्गा की उपासना के दौरान विशेष रूप से किया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार अन्य दिनों में भी इसका पाठ कर सकते हैं।
क्या सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ रोज किया जा सकता है?
हाँ, भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार सप्तश्लोकी दुर्गा का नियमित पाठ कर सकते हैं। यदि किसी विशेष संकल्प, अनुष्ठान या साधना के लिए पाठ किया जा रहा हो, तो संबंधित विधि गुरु या योग्य आचार्य से समझना उचित है।
सप्तश्लोकी दुर्गा और दुर्गा सप्तशती में क्या अंतर है?
सप्तश्लोकी दुर्गा सात श्लोकों की देवी स्तुति है, जबकि दुर्गा सप्तशती एक विस्तृत देवी उपासना ग्रंथ है जिसमें कुल 13 अध्याय हैं। दोनों का पाठ देवी भगवती की उपासना से संबंधित है, लेकिन दोनों अलग-अलग पाठ हैं।
क्या सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ नवरात्रि के अलावा किया जा सकता है?
हाँ, इसका पाठ केवल नवरात्रि तक सीमित नहीं है। भक्त अपनी श्रद्धा और अपनी पारिवारिक या गुरु-परंपरा के अनुसार अन्य दिनों में भी माँ दुर्गा की स्तुति के रूप में इसका पाठ कर सकते हैं।
सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ कैसे करें?
स्वच्छ स्थान पर बैठकर माँ दुर्गा का स्मरण करते हुए श्रद्धा और एकाग्रता से सातों श्लोकों का पाठ किया जा सकता है। यदि आपकी कोई निश्चित पारिवारिक या गुरु-परंपरा की पूजा-विधि है, तो उसी के अनुसार पाठ करना उचित है।
सप्तश्लोकी दुर्गा में किसकी स्तुति की गई है?
सप्तश्लोकी दुर्गा में माँ भगवती की स्तुति की गई है। सातों श्लोकों में देवी को विभिन्न नामों और स्वरूपों से संबोधित करते हुए उनकी शरण और कृपा की प्रार्थना की गई है।
क्या सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ नवरात्रि में किया जा सकता है?
हाँ, नवरात्रि में माँ दुर्गा की उपासना के समय सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ किया जाता है। भक्त इसे अपनी पूजा-पद्धति और परंपरा के अनुसार कर सकते हैं।
