Shri Salasar Balaji Aarti

श्री सालासर बालाजी की आरती | Shri Salasar Balaji Aarti Lyrics in Hindi

श्री सालासर बालाजी की आरती हनुमान जी के भक्तों द्वारा श्रद्धा और भक्ति के साथ गाई जाती है। “जयति जय जय बजरंग बाला, कृपा कर सालासर वाला” इस आरती की प्रमुख पंक्ति है। इस लेख में श्री सालासर बालाजी की आरती के हिंदी पाठ, English transliteration, पूजा विधि, आरती करने का समय, भोग और इससे जुड़े सामान्य प्रश्नों की जानकारी दी गई है।

श्री सालासर बालाजी की आरती का महत्व

श्री सालासर बालाजी को भगवान हनुमान का स्वरूप मानकर पूजा जाता है। राजस्थान के सालासर धाम में स्थित बालाजी मंदिर हनुमान भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

भक्त मंगलवार, शनिवार और अन्य शुभ अवसरों पर बालाजी की पूजा तथा आरती करते हैं। आरती के माध्यम से भक्त हनुमान जी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं और परिवार की सुख-शांति, साहस तथा संकटों का सामना करने की शक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, सच्चे मन से हनुमान जी का स्मरण करने से भक्त को मानसिक बल और आत्मविश्वास मिलता है।

॥ श्री सालासर बालाजी की आरती ॥

जयति जय जय बजरंग बाला,
कृपा कर सालासर वाला। ॥ टेक ॥

चैत सुदी पूनम को जन्मे,
अंजनी पवन ख़ुशी मन में।

प्रकट भय सुर वानर तन में,
विदित यस विक्रम त्रिभुवन में।

दूध पीवत स्तन मात के,
नजर गई नभ ओर।

तब जननी की गोद से पहुंचे,
उदयाचल पर भोर।

अरुण फल लखि रवि मुख डाला।
॥ कृपा कर सालासर वाला ॥ 1 ॥

तिमिर भूमण्डल में छाई,
चिबुक पर इन्द्र बज बाए।

तभी से हनुमत कहलाए,
द्वय हनुमान नाम पाये।

उस अवसर में रुक गयो,
पवन सर्व उन्चास।

इधर हो गयो अन्धकार,
उत रुक्यो विश्व को श्वास।

भये ब्रह्मादिक बेहाला।
॥ कृपा कर सालासर वाला ॥ 2 ॥

देव सब आये तुम्हारे आगे,
सकल मिल विनय करन लागे।

पवन कू भी लाए सागे,
क्रोध सब पवन तना भागे।

सभी देवता वर दियो,
अरज करी कर जोड़।

सुनके सबकी अरज गरज,
लखि दिया रवि को छोड़।

हो गया जगमें उजियाला।
॥ कृपा कर सालासर वाला ॥ 3 ॥

रहे सुग्रीव पास जाई,
आ गये बनमें रघुराई।

हरिरावणसीतामाई,
विकलफिरतेदोनों भाई।

विप्ररूप धरि राम को,
कहा आप सब हाल।

कपि पति से करवाई मित्रता,
मार दिया कपि बाल।

दुःख सुग्रीव तना टाला।
॥ कृपा कर सालासर वाला ॥ 4 ॥

आज्ञा ले रघुपति की धाया,
लंक में सिन्धु लाँघ आया।

हाल सीता का लख पाया,
मुद्रिका दे बनफल खाया।

बन विध्वंस दशकंध सुत,
वध कर लंक जलाया।

चूड़ामणि सन्देश त्रिया का,
दिया राम को आय।

हुए खुश त्रिभुवन भूपाला।
॥ कृपा कर सालासर वाला ॥ 5 ॥

जोड़ कपि दल रघुवर चाला,
कटक हित सिन्धु बांध डाला।

युद्ध रच दीन्हा विकराला,
कियो राक्षस कुल पैमाला।

लक्ष्मण को शक्ति लगी,
लायौ गिरी उठाय।

देई संजीवन लखन जियाये,
रघुवर हर्ष सवाय।

गरब सब रावन का गाला।
॥ कृपा कर सालासर वाला ॥ 6 ॥

रची अहिरावन ने माया,
सोवते राम लखन लाया।

बने वहाँ देवी की काया,
करने को अपना चित चाया।

अहिरावन रावन हत्यौ,
फेर हाथ को हाथ।

मन्त्र विभीषण पाय आप को,
हो गयो लंका नाथ।

खुल गया करमा का ताला।
॥ कृपा कर सालासर वाला ॥ 7 ॥

अयोध्या राम राज्य कीना,
आपको दास बना लीना।

अतुल बल घृत सिन्दूर दीना,
लसत तन रूप रंग भीना।

चिरंजीव प्रभु ने कियो,
जग में दियो पुजाय।

जो कोई निश्चय कर के ध्यावै,
ताकी करो सहाय।

कष्ट सब भक्तन का टाला।
॥ कृपा कर सालासर वाला ॥ 8 ॥

भक्तजन चरण कमल सेवे,
जात आय सालासर देवे।

ध्वजा नारियल भोग देवे,
मनोरथ सिद्धि कर लेवे।

कारज सारो भक्त के,
सदा करो कल्यान।

विप्र निवासी लक्ष्मणगढ़ के,
बालकृष्ण धर ध्यान।

नाम की जपे सदा माला,
कृपा कर सालासर।
॥ 9 ॥

Shri Salasar Balaji Aarti Lyrics in English

Shri Salasar Balaji Ki Aarti

Jaiyati Jai Jai Bajrang Bala,
Kripa Kar Salasar Wala. ॥ Tek ॥

Chait Sudi Poonam Ko Janme,
Anjani Pavan Khushi Man Mein.

Prakat Bhay Sur Vanar Tan Mein,
Vidit Yas Vikram Tribhuvan Mein.

Doodh Peevat Stan Maat Ke,
Nazar Gayi Nabh Or.

Tab Janani Ki God Se Pahunche,
Udayachal Par Bhor.

Arun Phal Lakhi Ravi Mukh Dala.
॥ Kripa Kar Salasar Wala ॥ 1 ॥

Timir Bhumandal Mein Chhai,
Chibuk Par Indra Baj Baaye.

Tabhi Se Hanumat Kahlaye,
Dway Hanuman Naam Paaye.

Us Avasar Mein Ruk Gayo,
Pavan Sarv Unchaas.

Idhar Ho Gayo Andhkaar,
Ut Rukyo Vishva Ko Shwaas.

Bhaye Brahmadik Behaala.
॥ Kripa Kar Salasar Wala ॥ 2 ॥

Dev Sab Aaye Tumhare Aage,
Sakal Mil Vinay Karan Laage.

Pavan Ku Bhi Laaye Saage,
Krodh Sab Pavan Tana Bhaage.

Sabhi Devta Var Diyo,
Araj Kari Kar Jod.

Sunke Sabki Araj Garaj,
Lakh Diya Ravi Ko Chhod.

Ho Gaya Jag Mein Ujiyala.
॥ Kripa Kar Salasar Wala ॥ 3 ॥

Rahe Sugreev Paas Jaai,
Aa Gaye Ban Mein Raghurai.

Hariravan Sita Mai,
Vikal Phirte Donon Bhai.

Vipra Roop Dhari Ram Ko,
Kaha Aap Sab Haal.

Kapi Pati Se Karwai Mitrata,
Maar Diya Kapi Baal.

Dukh Sugreev Tana Taala.
॥ Kripa Kar Salasar Wala ॥ 4 ॥

Aagya Le Raghupati Ki Dhaaya,
Lank Mein Sindhu Laangh Aaya.

Haal Sita Ka Lakh Paaya,
Mudrika De Banphal Khaya.

Ban Vidhvans Dashkandh Sut,
Vadh Kar Lank Jalaya.

Chudamani Sandesh Triya Ka,
Diya Ram Ko Aay.

Hue Khush Tribhuvan Bhoopala.
॥ Kripa Kar Salasar Wala ॥ 5 ॥

Jod Kapi Dal Raghuwar Chala,
Katak Hit Sindhu Baandh Daala.

Yuddh Rach Deenha Vikraala,
Kiyo Rakshas Kul Paimaala.

Lakshman Ko Shakti Lagi,
Laayo Giri Uthaay.

Dei Sanjeevan Lakhan Jiyaaye,
Raghuwar Harsh Savaay.

Garab Sab Ravan Ka Gaala.
॥ Kripa Kar Salasar Wala ॥ 6 ॥

Rachi Ahiravan Ne Maya,
Sovte Ram Lakhan Laaya.

Bane Wahan Devi Ki Kaya,
Karne Ko Apna Chit Chaya.

Ahiravan Ravan Hatyao,
Pher Haath Ko Haath.

Mantra Vibhishan Paay Aap Ko,
Ho Gayo Lanka Naath.

Khul Gaya Karma Ka Taala.
॥ Kripa Kar Salasar Wala ॥ 7 ॥

Ayodhya Ram Rajya Keena,
Aapko Daas Bana Leena.

Atul Bal Ghrit Sindoor Deena,
Lasat Tan Roop Rang Bheena.

Chiranjeev Prabhu Ne Kiyo,
Jag Mein Diyo Pujay.

Jo Koi Nishchay Kar Ke Dhyavai,
Taaki Karo Sahaay.

Kasht Sab Bhaktan Ka Taala.
॥ Kripa Kar Salasar Wala ॥ 8 ॥

Bhaktjan Charan Kamal Seve,
Jaat Aay Salasar Deve.

Dhwaja Nariyal Bhog Deve,
Manorath Siddhi Kar Leve.

Karaj Saaro Bhakt Ke,
Sada Karo Kalyaan.

Vipra Nivasi Lakshmangarh Ke,
Balkrishna Dhar Dhyaan.

Naam Ki Jape Sada Maala,
Kripa Kar Salasar.
॥ 9 ॥

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श्री सालासर बालाजी की पूजा और आरती विधि

श्री सालासर बालाजी की पूजा घर पर भी श्रद्धापूर्वक की जा सकती है। पूजा के लिए किसी जटिल विधि का पालन करना आवश्यक नहीं है। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा करें।

  1. स्नान और स्वच्छता: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा का स्थान साफ करें।
  2. बालाजी के दर्शन: श्री सालासर बालाजी की तस्वीर या प्रतिमा के सामने बैठें।
  3. दीपक जलाएँ: घी या तेल का दीपक जलाएँ और धूप-अगरबत्ती अर्पित करें।
  4. पूजा सामग्री चढ़ाएँ: अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार पुष्प, सिंदूर, फल, मिठाई या बूंदी का भोग अर्पित करें।
  5. आरती का पाठ करें: श्रद्धापूर्वक श्री सालासर बालाजी की पूरी आरती गाएँ या पढ़ें।
  6. प्रार्थना करें: परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य, साहस और कल्याण के लिए प्रार्थना करें।
  7. प्रसाद बाँटें: पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बाँटें।

श्री सालासर बालाजी की आरती कब करनी चाहिए?

श्री सालासर बालाजी की आरती सुबह या शाम पूजा के समय की जा सकती है। बहुत से भक्त मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की विशेष पूजा करते हैं। हनुमान जयंती और अन्य धार्मिक अवसरों पर भी बालाजी की आरती की जाती है।

आरती के लिए कोई एक समय सभी भक्तों पर अनिवार्य नहीं है। मंदिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालु मंदिर की निर्धारित आरती के समय का पालन कर सकते हैं।

सालासर बालाजी को क्या भोग लगाएँ?

श्री सालासर बालाजी को भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार बूंदी, लड्डू, फल, मिठाई और अन्य सात्त्विक प्रसाद अर्पित करते हैं। ध्वजा और नारियल चढ़ाने की परंपरा भी प्रचलित है।

भोग चढ़ाते समय स्वच्छता रखें और अपनी स्थानीय या पारिवारिक धार्मिक परंपरा का पालन करें। किसी विशेष वस्तु को चढ़ाना सभी भक्तों के लिए अनिवार्य नहीं है।

श्री सालासर बालाजी की आरती पढ़ने का महत्व

श्री सालासर बालाजी की आरती में हनुमान जी के पराक्रम, भगवान श्रीराम के प्रति उनकी भक्ति, माता सीता की खोज, लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी लाने और भक्तों की सहायता करने जैसे प्रसंगों का वर्णन मिलता है।

आरती गाने से भक्त को अपनी आस्था व्यक्त करने और भगवान का स्मरण करने का अवसर मिलता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, हनुमान जी की उपासना साहस, धैर्य और संकटों का सामना करने की प्रेरणा देती है। आरती को श्रद्धा से पढ़ना ही इसका प्रमुख उद्देश्य है।

श्री सालासर बालाजी की आरती से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQ)

1. श्री सालासर बालाजी की आरती के शुरुआती बोल क्या हैं?

श्री सालासर बालाजी की आरती के शुरुआती बोल हैं—“जयति जय जय बजरंग बाला, कृपा कर सालासर वाला।”

2. श्री सालासर बालाजी की आरती कब करनी चाहिए?

सुबह या शाम पूजा के समय आरती कर सकते हैं। मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की विशेष पूजा करने की परंपरा भी प्रचलित है।

3. क्या घर पर सालासर बालाजी की आरती कर सकते हैं?

हाँ, घर पर श्री हनुमान जी या सालासर बालाजी की तस्वीर अथवा प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक आरती कर सकते हैं।

4. सालासर बालाजी की आरती के लिए कौन-सी सामग्री चाहिए?

दीपक, धूप-अगरबत्ती, पुष्प, जल और प्रसाद सामान्य पूजा सामग्री हैं। अपनी परंपरा के अनुसार सिंदूर, बूंदी या लड्डू भी अर्पित कर सकते हैं।

5. क्या श्री सालासर बालाजी की आरती मंगलवार को पढ़ सकते हैं?

हाँ, मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और आरती करना प्रचलित है। भक्त अपनी सुविधानुसार अन्य दिनों में भी आरती कर सकते हैं।

6. श्री सालासर बालाजी की आरती कितनी बार पढ़नी चाहिए?

आरती कितनी बार पढ़नी चाहिए, इसकी कोई सार्वभौमिक अनिवार्यता नहीं है। सामान्यतः पूजा के समय आरती एक बार गाई जाती है। विशेष अनुष्ठान में अपनी परंपरा या गुरु के निर्देशों का पालन करें।

7. श्री सालासर बालाजी की आरती का PDF कहाँ मिलेगा?

इस लेख में आरती का हिंदी पाठ  PDF दिया गया है। 

8. क्या श्री सालासर बालाजी की आरती और हनुमान जी की आरती एक ही हैं?

नहीं, हनुमान जी की अलग-अलग आरतियाँ प्रचलित हैं। “जयति जय जय बजरंग बाला, कृपा कर सालासर वाला” से शुरू होने वाली आरती विशेष रूप से सालासर बालाजी की आरती के नाम से जानी जाती है।

निष्कर्ष

श्री सालासर बालाजी की आरती हनुमान जी के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने का एक भक्तिपूर्ण माध्यम है। आप यहाँ दिए गए हिंदी पाठ या English transliteration की सहायता से पूजा के समय आरती गा सकते हैं। आरती करते समय मन को शांत रखें और श्रद्धापूर्वक बालाजी का स्मरण करें।

जय श्री सालासर बालाजी!

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