श्री ब्रह्मा जी की आरती | Shri Brahma Ji Ki Aarti

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श्री ब्रह्मा जी की आरती के लिए कमल पर विराजमान भगवान ब्रह्मा की दिव्य प्रतिमा

श्री ब्रह्मा जी की आरती | Shri Brahma Ji Ki Aarti

श्री ब्रह्मा जी की आरती हिंदी में

श्री ब्रह्मा जी की आरती “पितु मातु सहायक स्वामी सखा” भगवान ब्रह्मा के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने वाली एक प्रचलित आरती है। इसमें भगवान को माता-पिता, स्वामी, मित्र और उन लोगों का सहारा बताया गया है जिनका कोई दूसरा आधार नहीं है। यहाँ पढ़ें श्री ब्रह्मा जी की आरती के हिंदी बोल और English (Roman Hindi) में पूरा पाठ।

श्री ब्रह्मा जी की आरती

पितु मातु सहायक स्वामी सखा, तुम ही एक नाथ हमारे हो।

जिनके कुछ और आधार नहीं, तिनके तुम ही रखवारे हो॥

सब भाँति सदा सुखदायक हो, दुःख निर्गुण नाशन हारे हो।

प्रतिपाल करो सिगरे जग को, अतिशय करुणा उर धारे हो॥

भूले हैं हम तो तुमको, तुम तो हमारी सुधि नहीं बिसारे हो।

उपकारन को कछु अंत नहीं, छिन ही छिन जो विस्तारे हो॥

महाराज महा महिमा तुम्हारी, मुझसे बिरले बुधवारे हो।

शुभ शांति निकेतन प्रेमनिधि, मन मंदिर के उजियारे हो॥

इस जीवन के तुम जीवन हो, इन प्राणन के तुम प्यारे हो।

तुम सों प्रभु पाय ‘प्रताप’ हरि, केहि के अब और सहारे हो॥

॥ इति श्री ब्रह्मा जी की आरती सम्पूर्णम् ॥

Shri Brahma Ji Ki Aarti Lyrics in English

नीचे श्री ब्रह्मा जी की आरती को English alphabet यानी Roman Hindi में दिया गया है, ताकि हिंदी न पढ़ पाने वाले भक्त भी इसे आसानी से पढ़ सकें।

Shri Brahma Ji Ki Aarti

Pitu Matu Sahayak Swami Sakha, Tum Hi Ek Nath Hamare Ho.

Jinke Kachu Aur Adhar Nahin, Tinake Tum Hi Rakhware Ho.

Sab Bhanti Sada Sukhdayak Ho, Dukh Nirgun Nashan Hare Ho.

Pratipal Karo Sigare Jag Ko, Atishay Karuna Ur Dhare Ho.

Bhoole Hain Hum To Tumko, Tum To Hamari Sudhi Nahin Bisare Ho.

Upkaran Ko Kachu Ant Nahin, Chhin Hi Chhin Jo Bistare Ho.

Maharaj Maha Mahima Tumhari, Mujhse Birle Budhware Ho.

Shubh Shanti Niketan Premnidhi, Man Mandir Ke Ujiyare Ho.

Is Jeevan Ke Tum Jeevan Ho, In Pranan Ke Tum Pyare Ho.

Tum Son Prabhu Paye Pratap Hari, Kehi Ke Ab Aur Sahare Ho.

॥ Iti Shri Brahma Ji Ki Aarti Sampurnam ॥

श्री ब्रह्मा जी की आरती का सरल अर्थ

इस आरती में भक्त भगवान ब्रह्मा को अपना माता-पिता, स्वामी, सहायक और मित्र मानकर उनकी शरण ग्रहण करता है। भक्त कहता है कि जिनके पास कोई दूसरा सहारा नहीं है, भगवान ही उनके रक्षक हैं। वह भगवान की करुणा, महिमा और पालन करने वाले स्वरूप की प्रशंसा करता है।

आरती में भक्त अपनी भूल स्वीकार करते हुए भगवान से प्रार्थना करता है कि वे उसे न भूलें और सदैव कृपा बनाए रखें। अंतिम पद में भगवान को जीवन का आधार, प्राणों का प्रिय और मन के मंदिर को प्रकाशित करने वाला बताया गया है।

भगवान ब्रह्मा जी कौन हैं?

हिंदू धर्म में भगवान ब्रह्मा को सृष्टि की रचना से संबंधित देवता माना जाता है। भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव को सामूहिक रूप से त्रिदेव कहा जाता है। धार्मिक परंपरा में ब्रह्मा जी सृजन, विष्णु जी पालन और शिव जी संहार से संबंधित हैं।

भगवान ब्रह्मा को सामान्यतः चार मुखों और चार वेदों से जुड़े स्वरूप में दर्शाया जाता है। उनकी प्रतिमा में कमल, वेद और कमंडलु जैसे प्रतीक दिखाई दे सकते हैं। पुष्कर, राजस्थान का ब्रह्मा मंदिर भगवान ब्रह्मा से जुड़े प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है।

श्री ब्रह्मा जी की आरती कैसे करें?

  1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को साफ करें।
  2. भगवान ब्रह्मा जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएँ।
  3. श्रद्धानुसार पुष्प, जल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें।
  4. शांत मन से भगवान का स्मरण करें और श्री ब्रह्मा जी की आरती पढ़ें।
  5. अंत में अपनी मनोकामना और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, स्वच्छता और सद्भावना है। पूजा की विधि परिवार की परंपरा और अपनी श्रद्धा के अनुसार रखी जा सकती है।

श्री ब्रह्मा जी की आरती का महत्व

भक्त इस आरती के माध्यम से भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा, कृतज्ञता और समर्पण व्यक्त करते हैं। इसके पद हमें ईश्वर को सहारा मानने, विनम्र रहने और करुणा का भाव रखने की प्रेरणा देते हैं। आरती का पाठ पूजा के समय या अपनी सुविधानुसार श्रद्धापूर्वक किया जा सकता है।

ब्रह्मा जी की आरती PDF कैसे प्राप्त करें?

यदि आप श्री ब्रह्मा जी की आरती को PDF में सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो इस पेज को अपने ब्राउज़र में खोलकर Print (प्रिंट) → Save as PDF विकल्प चुन सकते हैं। इससे आरती का पाठ आपके मोबाइल या कंप्यूटर में सुरक्षित हो जाएगा।

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श्री ब्रह्मा जी की आरती से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQ)

1. श्री ब्रह्मा जी की आरती के बोल क्या हैं?

श्री ब्रह्मा जी की आरती के प्रसिद्ध बोल “पितु मातु सहायक स्वामी सखा, तुम ही एक नाथ हमारे हो” से शुरू होते हैं। इस पेज पर आरती हिंदी और Roman Hindi दोनों में दी गई है।

2. Brahma Ji Ki Aarti Lyrics हिंदी में कहाँ पढ़ सकते हैं?

आप इसी पेज पर Brahma Ji Ki Aarti Lyrics हिंदी में पढ़ सकते हैं। साथ ही इसका Roman Hindi पाठ भी दिया गया है।

3. ब्रह्मा जी की आरती PDF कैसे बनाएँ?

इस पेज को ब्राउज़र में खोलें, Print विकल्प चुनें और प्रिंटर की जगह Save as PDF चुनकर फ़ाइल सेव कर लें।

4. क्या ब्रह्मा जी की आरती और ब्रह्मा विष्णु महेश की आरती एक ही हैं?

नहीं, ये अलग-अलग आरती या स्तुति-पाठ हो सकते हैं। “पितु मातु सहायक स्वामी सखा” भगवान ब्रह्मा जी की एक प्रचलित आरती है। ब्रह्मा-विष्णु-महेश की सामूहिक स्तुति का पाठ अलग हो सकता है।

5. ब्रह्मा जी की आरती कब पढ़ सकते हैं?

आप अपनी पूजा के समय श्रद्धापूर्वक आरती पढ़ सकते हैं। किसी विशेष दिन या समय का पालन करना हो तो अपनी पारिवारिक परंपरा अथवा संबंधित मंदिर की मान्यता का अनुसरण करें।

6. क्या ब्रह्मा जी की आरती का English version भी उपलब्ध है?

हाँ, इस लेख में आरती का Roman Hindi संस्करण दिया गया है। यह अंग्रेज़ी अनुवाद नहीं, बल्कि हिंदी शब्दों को अंग्रेज़ी अक्षरों में लिखने का तरीका है।

निष्कर्ष

श्री ब्रह्मा जी की आरती “पितु मातु सहायक स्वामी सखा” भगवान के प्रति भक्ति और समर्पण का भाव व्यक्त करती है। यहाँ आप श्री ब्रह्मा जी की आरती हिंदी में, Roman Hindi lyrics, सरल अर्थ और पूजा विधि पढ़ सकते हैं। श्रद्धापूर्वक भगवान का स्मरण करें और अपने जीवन में सद्भावना, विनम्रता तथा करुणा बनाए रखें।

॥ जय श्री ब्रह्मा देव ॥

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