श्री जगन्नाथ जी की आरती भगवान जगन्नाथ के भक्तों द्वारा श्रद्धा और भक्ति के साथ गाई जाती है। यदि आप श्री जगन्नाथ जी की आरती हिंदी में, उसके पूरे बोल, English lyrics और सरल भावार्थ खोज रहे हैं, तो यहाँ आपको एक ही जगह पर आरती का पाठ, पूजा करने की विधि, आरती का उचित समय और इससे जुड़े सामान्य प्रश्नों के उत्तर मिलेंगे।
॥ श्री जगन्नाथ जी की आरती ॥
ॐ जय जगन्नाथ हरे, स्वामी! जय जगन्नाथ हरे।
भक्तन के हितकारी, भक्तन के हितकारी, कष्ट सदा ही टरे॥
ॐ जय जगन्नाथ हरे॥
रत्न सिंहासन सुंदर, धुर-धुर छवि छाई।
सुर-मुनि जन की मोहन, सुर-मुनि जन की मोहन, सबकी सुध बिसराई॥
ॐ जय जगन्नाथ हरे॥
ब्रह्मादिक शिव नारद, करत स्तुति भारी।
भक्तन की पीड़ा हरने, भक्तन की पीड़ा हरने, महिमा है तुम्हारी॥
ॐ जय जगन्नाथ हरे॥
कमल नयन चतुर्भुज, पीतांबर सोहे।
गरुड़ वाहन पर बैठे, गरुड़ वाहन पर बैठे, देखत मन मोहे॥
ॐ जय जगन्नाथ हरे॥
जगन्नाथ स्वामी जी की, आरती जो कोई गावै।
प्रेम सहित मन भावे, प्रेम सहित मन भावे, वांछित फल पावै॥
ॐ जय जगन्नाथ हरे॥
Shri Jagannath Ji Ki Aarti Lyrics in English
नीचे श्री जगन्नाथ जी की आरती के बोल अंग्रेज़ी अक्षरों में दिए गए हैं, ताकि हिंदी न पढ़ पाने वाले भक्त भी उनका उच्चारण कर सकें।
Om Jai Jagannath Hare, Swami! Jai Jagannath Hare.
Bhaktan Ke Hitkari, Bhaktan Ke Hitkari, Kasht Sada Hi Tare.
Om Jai Jagannath Hare.
Ratna Singhasan Sundar, Dhur-Dhur Chhavi Chhayi.
Sur-Muni Jan Ki Mohan, Sur-Muni Jan Ki Mohan, Sabki Sudh Bisrayi.
Om Jai Jagannath Hare.
Brahmadik Shiv Narad, Karat Stuti Bhari.
Bhaktan Ki Peeda Harne, Bhaktan Ki Peeda Harne, Mahima Hai Tumhari.
Om Jai Jagannath Hare.
Kamal Nayan Chaturbhuj, Pitambar Sohe.
Garud Vahan Par Baithe, Garud Vahan Par Baithe, Dekhat Man Mohe.
Om Jai Jagannath Hare.
Jagannath Swami Ji Ki, Aarti Jo Koi Gave.
Prem Sahit Man Bhave, Prem Sahit Man Bhave, Vanchhit Phal Pave.
Om Jai Jagannath Hare.
श्री जगन्नाथ जी की आरती का सरल भावार्थ
पहला पद
इस पद में भगवान जगन्नाथ की जय-जयकार की गई है। भक्त उन्हें अपने हितों का ध्यान रखने वाला और कष्टों से रक्षा करने वाला मानकर उनकी स्तुति करते हैं।
दूसरा पद
इस पद में भगवान के सुंदर सिंहासन और मन को आकर्षित करने वाली दिव्य छवि का वर्णन है। भगवान के दर्शन में भक्त इतने भावविभोर हो जाते हैं कि उन्हें दूसरी बातों का ध्यान नहीं रहता।
तीसरा पद
इस पद में ब्रह्मा, शिव और नारद जैसे पूजनीय देवताओं द्वारा भगवान की स्तुति का वर्णन किया गया है। भक्त भगवान जगन्नाथ की महिमा का गुणगान करते हुए उनसे पीड़ा दूर करने की प्रार्थना करते हैं।
चौथा पद
इस पद में भगवान के कमल जैसे नेत्रों, चतुर्भुज स्वरूप और पीतांबर का वर्णन है। गरुड़ वाहन पर विराजमान भगवान की मनमोहक छवि भक्तों के हृदय में भक्ति जगाती है।
पाँचवाँ पद
अंतिम पद में कहा गया है कि जो भक्त प्रेम और श्रद्धा से भगवान जगन्नाथ की आरती गाता है, वह उनसे अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करता है।
श्री जगन्नाथ जी की आरती PDF डाउनलोड करें
यदि आप श्री जगन्नाथ जी की आरती PDF अपने मोबाइल में सेव करके रखना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए डाउनलोड विकल्प का उपयोग कर सकते हैं। PDF में आरती का पाठ होने से आप भगवान जगन्नाथ जी की पूजा, दैनिक आरती और विशेष अवसरों पर इसे आसानी से पढ़ सकते हैं।
श्री जगन्नाथ जी की आरती PDF डाउनलोड करें:
PDF डाउनलोड करने के बाद आप इसे अपने मोबाइल में सेव कर सकते हैं या आवश्यकता होने पर प्रिंट निकालकर पूजा के समय पढ़ सकते हैं।
श्री जगन्नाथ जी की आरती का महत्व
भगवान जगन्नाथ हिंदू धर्म में भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण से संबंधित पूजनीय स्वरूप हैं। ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के कारण उनकी विशेष धार्मिक पहचान है।
आरती के माध्यम से भक्त भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा, प्रेम और समर्पण व्यक्त करते हैं। आरती गाते समय भगवान के स्वरूप का ध्यान करना और मन को पूजा में लगाना महत्वपूर्ण माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धापूर्वक भगवान की आराधना करने से मन को शांति और भक्ति की प्रेरणा मिलती है। आरती के फल से जुड़ी मान्यताएँ आस्था पर आधारित हैं।
श्री जगन्नाथ जी की आरती कब करनी चाहिए?
श्री जगन्नाथ जी की आरती सुबह या शाम की पूजा के समय की जा सकती है। भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा और पूजा के क्रम के अनुसार आरती करते हैं।
भगवान जगन्नाथ के विशेष अवसरों, धार्मिक उत्सवों और रथयात्रा के समय भी उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। घर पर आरती करने के लिए किसी विशेष पर्व की प्रतीक्षा करना आवश्यक नहीं है।
श्री जगन्नाथ जी की आरती करने की विधि
- स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा का स्थान साफ करें।
- भगवान जगन्नाथ जी के चित्र या विग्रह को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें।
- श्रद्धानुसार पुष्प, फल या अन्य भोग अर्पित करें।
- दीपक और धूप जलाकर भगवान का ध्यान करें।
- श्रद्धापूर्वक श्री जगन्नाथ जी की आरती गाएँ।
- आरती के बाद हाथ जोड़कर परिवार की सुख-शांति और मंगल की प्रार्थना करें।
- अंत में प्रसाद वितरित करें।
पूजा की सामग्री उपलब्ध न होने पर भी आप श्रद्धापूर्वक भगवान का स्मरण कर सकते हैं। दीपक जलाते समय अग्नि-सुरक्षा का ध्यान रखें।
श्री जगन्नाथ जी कौन हैं?
भगवान जगन्नाथ भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण से संबंधित पूजनीय स्वरूप हैं। ओडिशा के पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। मंदिर की परंपरा में भगवान जगन्नाथ के साथ उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की भी पूजा होती है।
भगवान जगन्नाथ की भक्ति में प्रेम, समर्पण और सेवा का विशेष महत्व है। भक्त उनके दर्शन और पूजा को सौभाग्य मानते हैं।
श्री जगन्नाथ जी की आरती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. श्री जगन्नाथ जी की आरती के बोल क्या हैं?
इस आरती की शुरुआत “ॐ जय जगन्नाथ हरे, स्वामी! जय जगन्नाथ हरे” से होती है। पूरी आरती इस पोस्ट में हिंदी में दी गई है।
2. Shri Jagannath Ji Ki Aarti English में कैसे पढ़ें?
इस पोस्ट में आरती का Roman English transliteration दिया गया है। इसमें हिंदी शब्दों को अंग्रेज़ी अक्षरों में लिखा गया है, ताकि उच्चारण करना आसान हो।
3. श्री जगन्नाथ जी की आरती सुबह करें या शाम को?
आप सुबह या शाम की पूजा के समय आरती कर सकते हैं। अपने घर की पूजा-परंपरा के अनुसार समय निर्धारित करें।
4. क्या श्री जगन्नाथ जी की आरती रोज की जा सकती है?
हाँ, श्रद्धालु अपनी दैनिक पूजा में श्री जगन्नाथ जी की आरती शामिल कर सकते हैं।
5. श्री जगन्नाथ जी की आरती के बाद क्या करना चाहिए?
आरती के बाद भगवान को प्रणाम करें, अपनी प्रार्थना करें और श्रद्धानुसार प्रसाद ग्रहण करें।
6. क्या श्री जगन्नाथ जी और भगवान श्रीकृष्ण एक ही हैं?
हिंदू धार्मिक परंपरा में भगवान जगन्नाथ को भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप माना जाता है। विशेष रूप से पुरी की जगन्नाथ परंपरा में उनका विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।
7. क्या श्री जगन्नाथ जी की आरती के लिए विशेष सामग्री जरूरी है?
आरती के लिए दीपक और श्रद्धा प्रमुख हैं। पुष्प, धूप और भोग अपनी सुविधा तथा पारिवारिक परंपरा के अनुसार अर्पित किए जा सकते हैं।
निष्कर्ष
श्री जगन्नाथ जी की आरती भगवान के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने का सुंदर माध्यम है। यहाँ दिए गए आरती के हिंदी बोल, English transliteration और सरल भावार्थ की सहायता से आप घर पर आसानी से आरती कर सकते हैं।
भगवान श्री जगन्नाथ जी से प्रार्थना है कि सभी के जीवन में शांति, सद्भाव और भक्ति बनी रहे।
जय जगन्नाथ!
