विश्वकर्मा जी की आरती (Vishwakarma Aarti)

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भगवान विश्वकर्मा जी की आरती

विश्वकर्मा जी की आरती (Vishwakarma Aarti)

भगवान विश्वकर्मा जी की आरती (Vishwakarma Ji Ki Aarti) हिंदू धर्म में विशेष श्रद्धा के साथ गाई जाती है। भगवान विश्वकर्मा को दिव्य शिल्पकार और निर्माण कला का देवता माना जाता है। विश्वकर्मा पूजा के दिन कारखानों, दुकानों, कार्यशालाओं, कार्यालयों और घरों में भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। पूजा के बाद “ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा” आरती गाकर भगवान का आशीर्वाद मांगा जाता है।

इस लेख में आपको श्री विश्वकर्मा जी की आरती के संपूर्ण बोल, विश्वकर्मा पूजा की सामग्री, पूजा विधि, मंत्र, पूजा का महत्व, भगवान विश्वकर्मा की कथा और आरती से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों के जवाब मिलेंगे।

॥ भगवान विश्वकर्मा की आरती ॥

ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक स्तुति धर्मा॥ 1॥

ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।

आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया॥ 2॥

ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥ 3॥

ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।

रोगग्रस्त राजा ने जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर, दूर दुःख कीना॥ 4॥

ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।

जब रथकार दंपति, तुम्हारी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी॥ 5॥

ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।

एकानन, चतुरानन, पंचानन राजे।
द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे॥ 6॥

ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जाए, अटल शांति पावे॥ 7॥

ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।

श्री विश्वकर्मा जी की आरती जो कोई जन गावे।
कहत गजानंद स्वामी, सुख-संपत्ति पावे॥ 8॥

ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा॥

Vishwakarma Aarti Lyrics in English

यहां श्री विश्वकर्मा जी की आरती के बोल अंग्रेजी अक्षरों में दिए गए हैं, ताकि हिंदी पढ़ने में कठिनाई होने पर भी भक्त आरती का पाठ कर सकें।

Lord Vishwakarma Aarti

Om Jai Shri Vishwakarma, Prabhu Jai Shri Vishwakarma.
Sakal Srishti Ke Karta, Rakshak Stuti Dharma॥ 1॥

Om Jai Shri Vishwakarma, Prabhu Jai Shri Vishwakarma.

Aadi Srishti Mein Vidhi Ko, Shruti Updesh Diya.
Jeev Maatra Ka Jag Mein, Gyaan Vikas Kiya॥ 2॥

Om Jai Shri Vishwakarma, Prabhu Jai Shri Vishwakarma.

Rishi Angira Ne Tap Se, Shanti Nahin Paai.
Dhyaan Kiya Jab Prabhu Ka, Sakal Siddhi Aai॥ 3॥

Om Jai Shri Vishwakarma, Prabhu Jai Shri Vishwakarma.

Roggrast Raja Ne Jab Aashray Leena.
Sankat Mochan Bankar, Door Dukh Keena॥ 4॥

Om Jai Shri Vishwakarma, Prabhu Jai Shri Vishwakarma.

Jab Rathkaar Dampati, Tumhari Ter Kari.
Sunkar Deen Prarthana, Vipatti Hari Sagari॥ 5॥

Om Jai Shri Vishwakarma, Prabhu Jai Shri Vishwakarma.

Ekaanan, Chaturaanan, Panchaanan Raaje.
Dvibhuj, Chaturbhuj, Dashbhuj, Sakal Roop Saaje॥ 6॥

Om Jai Shri Vishwakarma, Prabhu Jai Shri Vishwakarma.

Dhyaan Dhare Jab Pad Ka, Sakal Siddhi Aave.
Man Duvidha Mit Jaaye, Atal Shaanti Paave॥ 7॥

Om Jai Shri Vishwakarma, Prabhu Jai Shri Vishwakarma.

Shri Vishwakarma Ji Ki Aarti Jo Koi Jan Gaave.
Kahat Gajaanand Swami, Sukh-Sampatti Paave॥ 8॥

Om Jai Shri Vishwakarma, Prabhu Jai Shri Vishwakarma॥

भगवान विश्वकर्मा कौन हैं?

भगवान विश्वकर्मा को हिंदू धार्मिक परंपरा में दिव्य वास्तुकार, शिल्पकार और निर्माण कला का देवता माना जाता है। उन्हें सृजन, तकनीकी कौशल, कारीगरी और निर्माण कार्य से जोड़कर पूजा जाता है।

भगवान विश्वकर्मा की पूजा विशेष रूप से उन लोगों के बीच प्रचलित है जिनका कार्य औजारों, मशीनों, निर्माण, इंजीनियरिंग, कारीगरी और उत्पादन से संबंधित है। कारीगर, इंजीनियर, तकनीकी कर्मचारी, बढ़ई, लोहार, शिल्पकार, वाहन मरम्मत करने वाले और विभिन्न उद्योगों में काम करने वाले लोग उनकी आराधना करते हैं।

धार्मिक परंपराओं में भगवान विश्वकर्मा को दिव्य भवनों, वास्तु संरचनाओं और देवताओं के अस्त्र-शस्त्र के निर्माण से भी जोड़ा जाता है। इसी कारण उन्हें दिव्य शिल्पकला का प्रतीक माना जाता है।

विश्वकर्मा पूजा का महत्व

विश्वकर्मा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि अपने काम, कौशल और आजीविका के साधनों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर भी है।

इस दिन भक्त भगवान विश्वकर्मा से अपने कार्यों में कुशलता, सद्बुद्धि, एकाग्रता और उन्नति की प्रार्थना करते हैं।

विश्वकर्मा पूजा के प्रमुख महत्व इस प्रकार हैं:

  • कार्य और कौशल का सम्मान: अपने पेशे, हुनर और मेहनत के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना।
  • औजारों और मशीनों की पूजा: काम में उपयोग होने वाले उपकरणों को साफ करके उनकी पूजा करना।
  • सुरक्षा की प्रार्थना: कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं से बचाव और सावधानी बनाए रखने की कामना करना।
  • उन्नति की कामना: अपने काम में सफलता, अच्छी आजीविका और निरंतर प्रगति के लिए प्रार्थना करना।
  • कृतज्ञता का भाव: अपने काम करने की क्षमता, ज्ञान और साधनों के लिए भगवान के प्रति आभार व्यक्त करना।

पूजा करने का उद्देश्य केवल मनोकामना मांगना नहीं, बल्कि अपने कार्य को ईमानदारी, जिम्मेदारी और सावधानी से करने का संकल्प लेना भी है।

विश्वकर्मा पूजा सामग्री

भगवान विश्वकर्मा की पूजा घर, दुकान, कारखाने या कार्यशाला में अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार की जा सकती है।

पूजा के लिए सामान्यतः निम्नलिखित सामग्री रखी जाती है:

  1. भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र
  2. स्वच्छ कपड़ा और पूजा की चौकी
  3. फूल और फूलों की माला
  4. रोली, कुमकुम और अक्षत
  5. चंदन और हल्दी
  6. धूप और दीपक
  7. घी या तेल और रुई की बत्ती
  8. फल, मिठाई या अन्य नैवेद्य
  9. स्वच्छ जल और पूजा का पात्र
  10. घंटी और आरती की थाली
  11. काम में उपयोग होने वाले औजार या उपकरण
  12. प्रसाद बांटने के लिए आवश्यक सामग्री

सामग्री की सूची स्थानीय परंपरा के अनुसार बदल सकती है। सभी वस्तुओं का होना अनिवार्य नहीं है; श्रद्धा और स्वच्छता के साथ उपलब्ध सामग्री से भी पूजा की जा सकती है।

विश्वकर्मा पूजा की विधि

भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने के लिए नीचे दी गई सामान्य विधि अपनाई जा सकती है।

1. पूजा स्थल की सफाई करें

सबसे पहले घर, दुकान, कारखाने या कार्यशाला की सफाई करें। भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ चौकी पर स्थापित करें।

2. औजारों और मशीनों को साफ करें

काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों, मशीनों और उपकरणों को सुरक्षित तरीके से साफ करें। यदि किसी मशीन की सफाई करनी हो तो पहले उसे बंद करें और आवश्यक सुरक्षा नियमों का पालन करें।

3. भगवान का स्मरण करें

हाथ जोड़कर भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें और पूजा को श्रद्धापूर्वक संपन्न करने का संकल्प लें। मन में अपने कार्य को ईमानदारी और कुशलता से करने का भाव रखें।

4. तिलक और अक्षत अर्पित करें

भगवान के चित्र या प्रतिमा पर अपनी परंपरा के अनुसार चंदन, रोली, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद फूल और माला चढ़ाएं।

5. धूप और दीप जलाएं

भगवान के सामने धूप और दीपक जलाएं। दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें और उसे मशीनों, ज्वलनशील पदार्थों या तेल के पास न रखें।

6. मंत्र का जाप करें

भगवान विश्वकर्मा का स्मरण करते हुए उनके सरल नाम मंत्र का जाप करें:

ॐ विश्वकर्मणे नमः।

इस मंत्र का अर्थ है भगवान विश्वकर्मा को नमन। भक्त अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार इसका जाप कर सकते हैं।

7. नैवेद्य अर्पित करें

भगवान को फल, मिठाई या अपनी परंपरा के अनुसार तैयार नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा की आरती गाएं।

8. आरती करें

आरती की थाली में दीपक लेकर भगवान विश्वकर्मा की आरती श्रद्धापूर्वक गाएं। परिवार के सदस्य, सहकर्मी या कार्यस्थल पर उपस्थित लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

9. प्रसाद बांटें और प्रणाम करें

आरती के बाद भगवान को प्रणाम करें और प्रसाद बांटें। अपने कार्य में सावधानी, ईमानदारी, अनुशासन और सफलता बनाए रखने की प्रार्थना करें।

भगवान विश्वकर्मा का मंत्र

विश्वकर्मा पूजा में भगवान का स्मरण करने के लिए सरल नाम मंत्र का जाप किया जा सकता है।

ॐ विश्वकर्मणे नमः।

इस मंत्र का सामान्य भावार्थ है—भगवान विश्वकर्मा को मेरा नमन।

भक्त पूजा के समय या किसी कार्य की शुरुआत से पहले श्रद्धापूर्वक इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। मंत्र-जाप की कोई विशेष संख्या सभी परंपराओं में अनिवार्य नहीं है।

विश्वकर्मा पूजा में आरती कब करनी चाहिए?

भगवान विश्वकर्मा की आरती सामान्यतः पूजा के मुख्य अनुष्ठानों के बाद की जाती है। जब भगवान को फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर दिया जाए, तब आरती की जा सकती है।

कारखानों और कार्यस्थलों पर पूजा के दौरान कर्मचारी एक साथ आरती गा सकते हैं। घर में पूजा करने वाले लोग भी अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार आरती कर सकते हैं।

यदि पूजा में हवन या कोई विशेष अनुष्ठान शामिल है, तो आरती का क्रम उस अनुष्ठान की परंपरा के अनुसार रखा जा सकता है।

विश्वकर्मा जी की आरती का भावार्थ

भगवान विश्वकर्मा की आरती में उन्हें सृष्टि का रचयिता, ज्ञान और शिल्पकला का प्रेरक तथा भक्तों के संकट दूर करने वाला बताया गया है।

आरती में भगवान के विभिन्न रूपों का स्मरण किया गया है। भक्त उनके चरणों का ध्यान करके शांति, सिद्धि और जीवन में स्थिरता की कामना करते हैं।

आरती का मुख्य संदेश है कि मनुष्य अपने ज्ञान, कौशल और कर्म का सदुपयोग करे तथा अपने कार्य को श्रद्धा और जिम्मेदारी के साथ पूरा करे।

विश्वकर्मा पूजा के दिन किन बातों का ध्यान रखें?

विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर धार्मिक परंपराओं के साथ व्यावहारिक सावधानियों का पालन करना भी जरूरी है।

  • पूजा स्थल और कार्यस्थल को स्वच्छ रखें।
  • मशीनों और औजारों की पूजा से पहले उनकी स्थिति जांचें।
  • चलती हुई मशीन पर तिलक, फूल या अन्य पूजा सामग्री न रखें।
  • मशीनों की सफाई या मरम्मत से पहले उन्हें बंद करके आवश्यक सुरक्षा प्रक्रिया अपनाएं।
  • दीपक और धूप को ज्वलनशील पदार्थों से दूर रखें।
  • कार्यस्थल पर पूजा के कारण सुरक्षा व्यवस्था या आवश्यक कामकाज बाधित न होने दें।
  • पूजा के बाद औजारों और मशीनों का उपयोग सुरक्षित तरीके से करें।

धार्मिक आस्था के साथ सुरक्षा और जिम्मेदारी का ध्यान रखना भी अपने कर्म के प्रति सम्मान का हिस्सा है।

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विश्वकर्मा जी की आरती से जुड़े सवाल-जवाब

1. विश्वकर्मा जी की आरती के बोल क्या हैं?

विश्वकर्मा जी की आरती के बोल “ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा” से शुरू होते हैं। इस लेख में आरती का पूरा पाठ हिंदी में दिया गया है।

2. Vishwakarma Aarti Lyrics Hindi में कैसे पढ़ें?

आप इस पेज पर Vishwakarma Aarti Lyrics Hindi में पढ़ सकते हैं। आरती के सभी पद क्रम से दिए गए हैं, जिन्हें पूजा के समय देखकर गाया जा सकता है।

3. विश्वकर्मा जी की आरती अंग्रेजी में उपलब्ध है?

हां, इस लेख में आरती का Roman Hindi संस्करण भी दिया गया है। इसमें हिंदी के शब्द अंग्रेजी अक्षरों में लिखे गए हैं, ताकि पाठक आसानी से उनका उच्चारण कर सकें।

4. विश्वकर्मा पूजा 2026 में कब थी?

वर्ष 2026 में विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर, गुरुवार को थी। अगले वर्ष की तिथि और मुहूर्त के लिए संबंधित वर्ष का पंचांग देखना चाहिए।

5. विश्वकर्मा पूजा क्यों मनाई जाती है?

भगवान विश्वकर्मा को दिव्य शिल्पकार और निर्माण कला का देवता माना जाता है। उनकी पूजा के माध्यम से लोग अपने कौशल, औजारों, मशीनों और कार्यस्थल के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं तथा अपने कार्य में उन्नति और सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं।

6. विश्वकर्मा पूजा में किनकी पूजा की जाती है?

इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। इसके साथ ही काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों, मशीनों, उपकरणों और कार्यस्थल की भी पूजा करने की परंपरा है।

7. विश्वकर्मा पूजा की सामग्री क्या है?

सामान्य सामग्री में भगवान का चित्र, फूल, माला, रोली, अक्षत, चंदन, धूप, दीपक, जल, फल, मिठाई और पूजा की थाली शामिल हैं। कार्यस्थल पर इस्तेमाल होने वाले औजारों और उपकरणों को भी पूजा में शामिल किया जा सकता है।

8. भगवान विश्वकर्मा का मुख्य मंत्र क्या है?

भगवान विश्वकर्मा का सरल नाम मंत्र है—ॐ विश्वकर्मणे नमः। भक्त इसका जाप भगवान के स्मरण और पूजा के समय कर सकते हैं।

9. विश्वकर्मा पूजा में आरती कब करनी चाहिए?

सामान्यतः भगवान की पूजा, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करने के बाद आरती की जाती है। विशेष अनुष्ठान होने पर स्थानीय या पारिवारिक पूजा विधि का पालन किया जा सकता है।

10. क्या घर पर विश्वकर्मा पूजा कर सकते हैं?

हां, श्रद्धालु घर में भगवान विश्वकर्मा का चित्र स्थापित करके सामान्य पूजा और आरती कर सकते हैं। पूजा विधि परिवार की परंपरा और उपलब्ध सामग्री के अनुसार रखी जा सकती है।

11. क्या विश्वकर्मा पूजा केवल कारखानों में होती है?

नहीं। कारखानों और कार्यशालाओं में यह पूजा विशेष रूप से प्रचलित है, लेकिन घरों, दुकानों, कार्यालयों और अन्य कार्यस्थलों पर भी भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है।

12. क्या विश्वकर्मा पूजा में मशीनें बंद रखनी चाहिए?

कई प्रतिष्ठानों में पूजा के अवसर पर मशीनों और औजारों का उपयोग कुछ समय के लिए रोककर उनकी पूजा की जाती है। यह स्थानीय परंपरा और कार्यस्थल की व्यवस्था पर निर्भर करता है। किसी भी स्थिति में मशीनों को सुरक्षित तरीके से बंद करना और सुरक्षा नियमों का पालन करना जरूरी है।

13. विश्वकर्मा जी की आरती कितनी बार गानी चाहिए?

आरती गाने की संख्या के लिए कोई एक अनिवार्य नियम सभी परंपराओं में लागू नहीं है। भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा और पूजा विधि के अनुसार आरती गा सकते हैं।

14. विश्वकर्मा पूजा पर क्या दान करना चाहिए?

भक्त अपनी क्षमता और इच्छा के अनुसार जरूरतमंद लोगों की सहायता कर सकते हैं, भोजन करा सकते हैं या उपयोगी वस्तुएं दान कर सकते हैं। दान का स्वरूप व्यक्ति की परिस्थिति और स्थानीय परंपरा पर निर्भर करता है।

15. क्या विश्वकर्मा पूजा के दिन नए औजार खरीद सकते हैं?

नए औजार या उपकरण खरीदना आवश्यक नहीं है। यदि जरूरत हो तो अपनी सुविधा और बजट के अनुसार खरीद सकते हैं। पूजा में पहले से इस्तेमाल होने वाले औजारों की सफाई और सम्मानपूर्वक पूजा भी की जाती है।

16.विश्वकर्मा पूजा कब मनाई जाती है?

विश्वकर्मा पूजा आमतौर पर हर साल 17 सितंबर को मनाई जाती है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा और औजारों व मशीनों की पूजा की जाती है।

निष्कर्ष

भगवान विश्वकर्मा जी की आरती विश्वकर्मा पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दिन भक्त भगवान विश्वकर्मा का स्मरण करके अपने काम, कौशल, औजारों और आजीविका के साधनों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं। आरती के साथ पूजा करते समय स्वच्छता, सुरक्षा और ईमानदारी से काम करने का संकल्प भी लेना चाहिए।

ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा। भगवान विश्वकर्मा सभी को सद्बुद्धि, कुशलता, शांति और अपने कार्यों में उन्नति प्रदान करें।

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