सिद्ध सम्पुट मन्त्र
श्री दुर्गा सप्तशती में अनेक ऐसे मन्त्र मिलते हैं जिनका प्रयोग विभिन्न कामनाओं और उद्देश्यों के लिए किया जाता है। परंपरा में इन्हें सिद्ध सम्पुट मन्त्र कहा जाता है। इन मन्त्रों को दुर्गा सप्तशती के विधिवत् पाठ में सम्पुट के रूप में प्रयोग करने की परंपरा बताई गई है। इनमें अधिकांश मन्त्र देवी माहात्म्य के ही श्लोकों से लिए गए हैं, जबकि कुछ मन्त्र अन्य स्तोत्रों अथवा परंपरागत पाठों में भी मिलते हैं।
यहाँ दुर्गा सप्तशती के प्रमुख सिद्ध सम्पुट मन्त्र उनके पारंपरिक प्रयोजन के अनुसार दिए जा रहे हैं। प्रत्येक मन्त्र के साथ सरल हिन्दी अर्थ भी दिया गया है, ताकि पाठक उसके भाव को समझकर श्रद्धापूर्वक पाठ कर सके।
1. सामूहिक कल्याण के लिए
देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या।
तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥
हिन्दी अर्थ:
जिन देवी ने अपनी आत्मशक्ति से इस सम्पूर्ण जगत् को व्याप्त कर रखा है और जो समस्त देवताओं की शक्तियों के समूहस्वरूप हैं, उन सभी देवताओं और महर्षियों द्वारा पूजित अम्बिका को हम भक्तिपूर्वक नमन करते हैं। वे देवी हम सबके लिए मंगल और कल्याण प्रदान करें।
2. विश्व के अशुभ तथा भय के विनाश के लिए
यस्याः प्रभावमतुलं भगवाननन्तो ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तुमलं बलं च।
सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु॥
हिन्दी अर्थ:
जिन देवी के अतुलनीय प्रभाव और सामर्थ्य का वर्णन भगवान अनन्त, ब्रह्मा और भगवान शिव भी पूर्ण रूप से नहीं कर सकते, वे चण्डिका सम्पूर्ण जगत् की रक्षा करने तथा अशुभ और भय का नाश करने की प्रेरणा प्रदान करें।
3. विश्व की रक्षा के लिए
या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः।
श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥
हिन्दी अर्थ:
जो देवी पुण्यात्माओं के घर में लक्ष्मी के रूप में, पापियों के हृदय में अलक्ष्मी के रूप में, विवेकी मनुष्यों में बुद्धि के रूप में, सज्जनों में श्रद्धा तथा श्रेष्ठ कुलों में लज्जा के रूप में विद्यमान रहती हैं, उन देवी को हम नमन करते हैं। हे देवी! आप सम्पूर्ण विश्व की रक्षा करें।
4. विश्व के अभ्युदय के लिए
विश्वेश्वरि त्वं परिपासि विश्वं विश्वात्मिका धारयसीति विश्वम्।
विश्वेशवन्द्या भवती भवन्ति विश्वाश्रया ये त्वयि भक्तिनम्राः॥
हिन्दी अर्थ:
हे विश्वेश्वरी! आप सम्पूर्ण विश्व की रक्षा करती हैं और विश्वात्मिका होकर उसे धारण करती हैं। जो भक्त आपके सामने श्रद्धापूर्वक नतमस्तक होते हैं, वे आपके आश्रय से कल्याण और उन्नति प्राप्त करते हैं।
5. विश्वव्यापी विपत्तियों के नाश के लिए
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥
हिन्दी अर्थ:
हे देवी! शरण में आए हुए दुःखी प्राणियों के कष्ट दूर करने वाली माता, हम पर प्रसन्न हों। हे सम्पूर्ण विश्व की ईश्वरी! आप चराचर जगत् की स्वामिनी हैं, इसलिए सम्पूर्ण विश्व की रक्षा करें।
6. विश्व के पाप-ताप निवारण के लिए
देवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीतेर्नित्यं यथासुरवधादधुनैव सद्यः।
पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्च महोपसर्गान्॥
हिन्दी अर्थ:
हे देवी! हम पर प्रसन्न होकर हमारी शत्रुओं से उत्पन्न भय से निरंतर रक्षा करें। जिस प्रकार आपने असुरों का विनाश किया है, उसी प्रकार सम्पूर्ण जगत् के पापों को शीघ्र शांत करें तथा पापकर्मों के परिणामस्वरूप उत्पन्न बड़े-बड़े उपद्रवों का निवारण करें।
7. विपत्ति-नाश के लिए
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
हिन्दी अर्थ:
हे देवी नारायणी! आप शरण में आए हुए दीन और दुःखी प्राणियों की रक्षा करने में तत्पर रहती हैं तथा सभी के कष्टों को दूर करती हैं। आपको बार-बार प्रणाम है।
8. विपत्ति-नाश और शुभ की प्राप्ति के लिए
करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः॥
हिन्दी अर्थ:
वह ईश्वरी देवी हमारे लिए शुभ और कल्याण का कारण बनें तथा सभी विपत्तियों और अशुभ परिस्थितियों का नाश करें।
9. भय-नाश के लिए
(क) सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥
हिन्दी अर्थ:
हे देवी दुर्गे! आप सभी स्वरूपों में विद्यमान, सबकी ईश्वरी और समस्त शक्तियों से युक्त हैं। हमें सभी प्रकार के भय से बचाइए। आपको प्रणाम है।
(ख) एतत्ते वदनं सौम्यं लोचनत्रयभूषितम्।
पातु नः सर्वभीतिभ्यः कात्यायनि नमोऽस्तु ते॥
हिन्दी अर्थ:
हे कात्यायनी! आपके तीन नेत्रों से सुशोभित इस सौम्य मुख का स्मरण हमें सभी प्रकार के भय से रक्षा प्रदान करे। आपको नमन है।
(ग) ज्वालाकरालमत्युग्रमशेषासुरसूदनम्।
त्रिशूलं पातु नो भीतेर्भद्रकालि नमोऽस्तु ते॥
हिन्दी अर्थ:
हे भद्रकाली! आपका अत्यंत उग्र और ज्वालामय त्रिशूल समस्त असुरों का संहार करने वाला है। वही त्रिशूल हमें सभी प्रकार के भय से सुरक्षित रखे।
10. पाप-नाश के लिए
हिनस्ति दैत्यतेजांसि स्वनेनापूर्य या जगत्।
सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्योऽनः सुतानिव॥
हिन्दी अर्थ:
हे देवी! आपकी वह घंटा जिसकी ध्वनि से सम्पूर्ण जगत् भर जाता है और जो दैत्यों के तेज का नाश करती है, वह माता के समान हमारी पापों से रक्षा करे।
11. रोग-नाश के लिए
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥
हिन्दी अर्थ:
हे देवी! प्रसन्न होने पर आप सभी रोगों का नाश करती हैं और अप्रसन्न होने पर मनुष्य की सभी इच्छाओं में बाधा डाल सकती हैं। जो लोग आपकी शरण में आते हैं, वे विपत्तियों से सुरक्षित रहते हैं और आपके आश्रय को प्राप्त होते हैं।
12. महामारी-नाश के लिए
जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥
हिन्दी अर्थ:
हे देवी! आप जयन्ती, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा और धात्री आदि अनेक स्वरूपों में पूजित हैं। आपको स्वाहा और स्वधा स्वरूप में भी नमन है।
13. आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
हिन्दी अर्थ:
हे देवी! मुझे सौभाग्य, आरोग्य और परम सुख प्रदान करें। मुझे सुंदरता और सद्गुणों से युक्त रूप दें, विजय प्रदान करें, यश दें और मेरे शत्रुओं का नाश करें।
14. सुलक्षणा पत्नी की प्राप्ति के लिए
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥
हिन्दी अर्थ:
हे देवी! ऐसी मनोरम और सद्गुणों से युक्त पत्नी प्रदान करें, जो मन के अनुकूल आचरण करने वाली हो तथा इस कठिन संसार-सागर से पार कराने में सहायक हो और श्रेष्ठ कुल में उत्पन्न हुई हो।
15. बाधा-शान्ति के लिए
सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥
हिन्दी अर्थ:
हे तीनों लोकों की परमेश्वरी देवी! जैसे आप सभी प्रकार की बाधाओं को शांत करती हैं, वैसे ही हमारी बाधाओं को भी दूर करें और हमारे विरोधियों का विनाश करें।
16. सर्वविध अभ्युदय के लिए
ते सम्मता जनपदेषु धनानि तेषां तेषां यशांसि न च सीदति धर्मवर्गः।
धन्यास्त एव निभृतात्मजभृत्यदारा येषां सदाभ्युदयदा भवती प्रसन्ना॥
हिन्दी अर्थ:
जिन लोगों पर देवी प्रसन्न रहती हैं, वे अपने समाज और प्रदेश में सम्मानित होते हैं। उनके पास धन रहता है, उनका यश कम नहीं होता और धर्म की उन्नति बनी रहती है। ऐसे लोग धन्य हैं, जिनके परिवार, संतान और सेवक सुखपूर्वक रहते हैं तथा जिनके जीवन में देवी निरंतर अभ्युदय प्रदान करती हैं।
17. दारिद्र्य, दुःख आदि के नाश के लिए
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः
स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽर्द्रचित्ता॥
हिन्दी अर्थ:
हे दुर्गे! आपका स्मरण करने से आप सभी प्राणियों का भय दूर कर देती हैं और स्वस्थ एवं प्रसन्न मन से आपका स्मरण करने वालों को अत्यंत शुभ बुद्धि प्रदान करती हैं। दारिद्र्य, दुःख और भय को दूर करने वाली तथा सबका उपकार करने के लिए सदा करुणामयी रहने वाली आपके अतिरिक्त दूसरी कौन देवी है?
18. रक्षा पाने के लिए
शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।
घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च॥
हिन्दी अर्थ:
हे देवी अम्बिके! अपने त्रिशूल से हमारी रक्षा करें और अपनी तलवार से हमारी रक्षा करें। अपनी घंटा की ध्वनि तथा धनुष की प्रत्यंचा की टंकार से भी हमारी रक्षा करें।
19. समस्त विद्याओं और स्त्रियों में मातृभाव की प्राप्ति के लिए
विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु।
त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुतिः स्तव्यपरा परोक्तिः॥
हिन्दी अर्थ:
हे देवी! संसार में जितनी भी विद्याएँ हैं, वे सभी आपके ही विभिन्न रूप हैं और संसार की सभी स्त्रियाँ भी आपके ही स्वरूप की अभिव्यक्तियाँ हैं। हे अम्बिके! यह सम्पूर्ण जगत् आपसे ही परिपूर्ण है। ऐसी स्थिति में आपकी स्तुति करने के लिए इससे बढ़कर और क्या कहा जा सकता है?
20. सब प्रकार के कल्याण के लिए
सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
हिन्दी अर्थ:
हे देवी नारायणी! आप सभी मंगलों में सबसे मंगलमयी, कल्याणस्वरूपा और सभी पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली हैं। हे शरण देने वाली त्र्यम्बके गौरी! आपको बार-बार प्रणाम है।
21. शक्ति-प्राप्ति के लिए
सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि।
गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥
हिन्दी अर्थ:
हे सनातनी नारायणी! आप सृष्टि, स्थिति और प्रलय की मूल शक्ति हैं। आप तीनों गुणों का आधार तथा गुणमयी शक्ति हैं। आपको नमन है।
22. प्रसन्नता की प्राप्ति के लिए
प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि।
त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव॥
हिन्दी अर्थ:
हे देवी! आप सम्पूर्ण विश्व के दुःखों को दूर करने वाली हैं। आपकी शरण में आए हुए भक्तों पर प्रसन्न हों। तीनों लोकों के निवासियों द्वारा पूजित हे देवी! सभी लोकों को वर प्रदान करने वाली बनें।
23. विविध उपद्रवों से बचने के लिए
रक्षांसि यत्रोग्रविषाश्च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र।
दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्वम्॥
हिन्दी अर्थ:
जहाँ राक्षस हों, भयंकर विषैले सर्प हों, शत्रु और डाकुओं के दल हों, जहाँ जंगल की अग्नि हो अथवा समुद्र के बीच संकट हो, वहाँ भी आप स्थित होकर संसार की रक्षा करती हैं।
24. बाधामुक्त होकर धन, धान्य और संतान की प्राप्ति के लिए
सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥
हिन्दी अर्थ:
देवी कहती हैं कि मेरे प्रसाद से मनुष्य सभी बाधाओं से मुक्त होकर धन, धान्य और संतान से सम्पन्न होगा। इसमें कोई संदेह नहीं है।
25. भुक्ति और मुक्ति की प्राप्ति के लिए
विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
हिन्दी अर्थ:
हे देवी! मेरा कल्याण करें और मुझे परम समृद्धि प्रदान करें। मुझे उत्तम रूप और सद्गुण दें, विजय तथा यश प्रदान करें और मेरे शत्रुओं का नाश करें।
26. पाप-नाश तथा भक्ति की प्राप्ति के लिए
नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
हिन्दी अर्थ:
हे चण्डिके! आप सभी पापों और दुःखों को दूर करने वाली हैं। आपके सामने भक्तिपूर्वक नमन करने वाले भक्त को उत्तम रूप, विजय और यश प्रदान करें तथा उसके शत्रुओं का नाश करें।
27. स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति के लिए
सर्वभूता यदा देवी स्वर्गमुक्तिप्रदायिनी।
त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तयः॥
हिन्दी अर्थ:
हे देवी! आप सभी प्राणियों के लिए स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करने वाली हैं। जब आपकी स्तुति की जाती है, तब आपकी महिमा का वर्णन करने के लिए इससे बढ़कर और कौन-से श्रेष्ठ वचन हो सकते हैं?
28. स्वर्ग और मुक्ति के लिए
सर्वस्य बुद्धिरूपेण जनस्य हृदि संस्थिते।
स्वर्गापवर्गदे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
हिन्दी अर्थ:
हे देवी नारायणी! आप सभी मनुष्यों के हृदय में बुद्धि के रूप में स्थित हैं। आप स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करने वाली हैं। आपको बार-बार प्रणाम है।
29. मोक्ष की प्राप्ति के लिए
त्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या
विश्वस्य बीजं परमासि माया।
सम्मोहितं देवि समस्तमेतत्
त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतुः॥
हिन्दी अर्थ:
हे देवी! आप अनंत पराक्रम वाली वैष्णवी शक्ति हैं। आप सम्पूर्ण विश्व की मूल कारणस्वरूप माया हैं। आपके कारण यह सम्पूर्ण जगत् मोह में पड़ा हुआ है। जब आप प्रसन्न होती हैं, तब आप ही संसार में मुक्ति का कारण बनती हैं।
30. स्वप्न में सिद्धि-असिद्धि जानने के लिए
दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थसाधिके।
मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय॥
हिन्दी अर्थ:
हे देवी दुर्गे! आप सभी कामनाओं और उद्देश्यों को सिद्ध करने वाली हैं। आपको नमन है। मुझे स्वप्न में यह प्रदर्शित करें कि मेरा कार्य सिद्ध होगा अथवा असिद्ध।
देवीमयी
सिद्ध सम्पुट मन्त्रों की सूची के बाद देवीमयी नाम से यह स्तुति भी परंपरागत रूप से मिलती है। इसका भाव देवी को सम्पूर्ण शब्द, रूप और जगत् में अनुभव करने से संबंधित है। उपलब्ध पाठ में इसे आचार्य अभिनवगुप्त से सम्बद्ध किया गया है।
तव च का किल न स्तुतिरम्बिके! सकलशब्दमयी किल ते तनुः।
निखिलमूर्तिषु मे भवदन्वयो मनसिजासु बहिःप्रसरासु च॥
हिन्दी अर्थ:
हे अम्बिके! संसार में ऐसा कौन-सा शब्द या वाणी है जो आपकी स्तुति नहीं है? आपका स्वरूप तो समस्त शब्दों से बना हुआ है। मेरे मन में उत्पन्न होने वाले विचारों से लेकर बाहर दिखाई देने वाले सभी रूपों में अब मुझे आपके ही स्वरूप का संबंध दिखाई देने लगा है।
इति विचिन्त्य शिवे! शमिताशिवे! जगति जातमयत्नवशादिदम्।
स्तुतिजपार्चनचिन्तनवर्जिता न खलु काचन कालकलास्ति मे॥
हिन्दी अर्थ:
हे कल्याणस्वरूपिणी शिवे! हे सभी अमंगलों को शांत करने वाली देवी! इस भाव का चिंतन करने पर मुझे ऐसा अनुभव होता है कि इस जगत् में सहज रूप से मेरा कोई भी क्षण आपकी स्तुति, जप, पूजा या ध्यान से रहित नहीं है। संसार के प्रत्येक कार्य और अनुभव में आपकी ही उपस्थिति का भाव बना रहता है।
सिद्ध सम्पुट मन्त्रों का महत्व
दुर्गा सप्तशती के इन सिद्ध सम्पुट मन्त्रों में देवी के विभिन्न स्वरूपों की प्रार्थना की गई है। किसी में भय और विपत्ति से रक्षा की कामना है, किसी में आरोग्य और सौभाग्य की, तो किसी में ज्ञान, शक्ति, भक्ति, समृद्धि और मोक्ष की प्रार्थना की गई है।
इन मन्त्रों का प्रयोग केवल इच्छा-पूर्ति के साधन के रूप में देखने के बजाय देवी के प्रति श्रद्धा, शरणागति और आत्मसमर्पण के भाव से करना अधिक उचित है। विशेष रूप से सम्पुट लगाकर दुर्गा सप्तशती का विधिवत् पाठ करने की परंपरा में पाठ-विधि, उच्चारण और क्रम का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है।
निष्कर्ष
सिद्ध सम्पुट मन्त्र दुर्गा सप्तशती की साधना-परंपरा का महत्वपूर्ण भाग हैं। इन मन्त्रों में माता दुर्गा से लोककल्याण, भय और विपत्ति से रक्षा, रोगों से मुक्ति, बाधाओं की शान्ति, आरोग्य, सौभाग्य, शक्ति, भक्ति तथा मोक्ष की प्रार्थना की गई है।
भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार इन मन्त्रों का पाठ कर सकते हैं। सम्पुट सहित दुर्गा सप्तशती का विशेष अनुष्ठान करने वाले साधकों के लिए योग्य आचार्य से विधि और पाठक्रम की जानकारी लेना उचित रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सिद्ध सम्पुट मन्त्र क्या होते हैं?
दुर्गा सप्तशती के कुछ चयनित मन्त्रों को विशेष उद्देश्य से पाठ में सम्पुट के रूप में प्रयोग करने की परंपरा है। ऐसे मन्त्रों को सिद्ध सम्पुट मन्त्र कहा जाता है।
सिद्ध सम्पुट मन्त्रों का पाठ किसके लिए किया जाता है?
इनमें अलग-अलग मन्त्रों का संबंध सामूहिक कल्याण, भय-निवारण, विपत्ति-नाश, आरोग्य, बाधा-शान्ति, शक्ति, भक्ति, समृद्धि और मोक्ष जैसे विभिन्न उद्देश्यों से बताया गया है।
क्या सभी 30 सिद्ध सम्पुट मन्त्रों का एक साथ पाठ करना आवश्यक है?
नहीं। परंपरा में अलग-अलग उद्देश्य के अनुसार संबंधित मन्त्र का चयन किया जाता है। सम्पुट लगाकर दुर्गा सप्तशती का विशेष पाठ करना हो तो निर्धारित विधि और क्रम का पालन करना चाहिए।
क्या सिद्ध सम्पुट मन्त्र दुर्गा सप्तशती के ही श्लोक हैं?
इनमें अधिकांश मन्त्र देवी माहात्म्य या दुर्गा सप्तशती के श्लोकों से लिए गए हैं, जबकि परंपरागत सूची में कुछ अन्य स्रोतों से जुड़े मन्त्र भी मिलते हैं।
क्या इन मन्त्रों का पाठ केवल नवरात्रि में किया जा सकता है?
ऐसा आवश्यक नहीं है। दुर्गा उपासना में इन मन्त्रों का पाठ अन्य समय भी परंपरा और साधना-विधि के अनुसार किया जाता है। विशेष अनुष्ठान के लिए अपनी परंपरा के आचार्य की विधि का पालन करना उचित है।
