श्री गणेश सहस्रनाम स्तोत्र: भगवान गणेश के 1000 पवित्र नाम और उनके अर्थ (Shri Ganesh Sahasranama Stotram)

होम>> श्री गणेश सहस्रनाम स्तोत्र: भगवान गणेश के 1000 पवित्र नाम और उनके अर्थ (Shri Ganesh Sahasranama Stotram)
श्री गणेश सहस्रनाम स्तोत्र में भगवान गणेश का दिव्य स्वरूप

श्री गणेश सहस्रनाम स्तोत्र: भगवान गणेश के 1000 पवित्र नाम और उनके अर्थ (Shri Ganesh Sahasranama Stotram)

श्री गणेश सहस्रनाम:

 

1. गणेश्वर

ॐ गणेश्वराय नमः।
अर्थ: समस्त गणों और शक्तियों के परम स्वामी।
भावार्थ: भगवान गणेश का यह नाम उनके सर्वोच्च अधिपति स्वरूप का स्मरण कराता है।

2. गणक्रीड

ॐ गणक्रीडाय नमः।
अर्थ: गणों के साथ आनंदपूर्वक क्रीड़ा करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के सहज, आनंदमय और प्रसन्न स्वरूप को दर्शाता है।

3. गणनाथ

ॐ गणनाथाय नमः।
अर्थ: सभी गणों के स्वामी।
भावार्थ: भगवान गणेश अपने दिव्य गणों का मार्गदर्शन करने वाले नाथ माने जाते हैं।

4. गणाधिप

ॐ गणाधिपाय नमः।
अर्थ: गणों के अधिपति और प्रमुख।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की नेतृत्वकारी और संरक्षक शक्ति को प्रकट करता है।

5. एकदंष्ट्र

ॐ एकदंष्ट्राय नमः।
अर्थ: एक दाँत वाले भगवान।
भावार्थ: एकदंत स्वरूप गणेशजी की विशिष्ट पहचान और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।

6. वक्रतुण्ड

ॐ वक्रतुण्डाय नमः।
अर्थ: घुमावदार सूँड वाले।
भावार्थ: वक्रतुण्ड रूप भगवान गणेश की अद्भुत दिव्य आकृति और विघ्नों पर विजय का स्मरण कराता है।

7. गजवक्त्र

ॐ गजवक्त्राय नमः।
अर्थ: हाथी के समान मुख वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के गजानन स्वरूप की महिमा को प्रकट करता है।

8. महोदर

ॐ महोदराय नमः।
अर्थ: विशाल उदर वाले।
भावार्थ: उनका विशाल उदर धैर्य, सहनशीलता और समस्त अनुभवों को समाहित करने की क्षमता का प्रतीक माना जाता है।

9. लम्बोदर

ॐ लम्बोदराय नमः।
अर्थ: बड़े और लंबे उदर वाले।
भावार्थ: लम्बोदर स्वरूप गणेशजी की प्रसिद्ध और मंगलमयी आकृति को दर्शाता है।

10. धूम्रवर्ण

ॐ धूम्रवर्णाय नमः।
अर्थ: धुएँ के समान वर्ण वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के एक गंभीर और रहस्यमय दिव्य स्वरूप की ओर संकेत करता है।

11. विकट

ॐ विकटाय नमः।
अर्थ: अद्भुत और विशाल स्वरूप वाले।
भावार्थ: भगवान गणेश का विकट रूप कठिन परिस्थितियों और बड़े विघ्नों पर विजय का प्रतीक है।

12. विघ्ननाशक

ॐ विघ्ननाशकाय नमः।
अर्थ: बाधाओं को दूर करने वाले।
भावार्थ: किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेशजी का स्मरण इसी कारण किया जाता है कि वे मार्ग की रुकावटों को दूर करने वाले देवता माने जाते हैं।

13. सुमुख

ॐ सुमुखाय नमः।
अर्थ: सुंदर और प्रसन्न मुख वाले।
भावार्थ: सुमुख नाम भगवान गणेश के सौम्य, मंगलकारी और प्रसन्न स्वरूप को दर्शाता है।

14. दुर्मुख

ॐ दुर्मुखाय नमः।
अर्थ: प्रभावशाली और प्रचंड मुख वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के उस रूप को दर्शाता है जो अधर्म और नकारात्मक शक्तियों के सामने कठोर हो जाता है।

15. बुद्ध

ॐ बुद्धाय नमः।
अर्थ: बुद्धिमान और ज्ञान से संपन्न।
भावार्थ: गणेशजी को विवेक, ज्ञान और सूझ-बूझ का देवता माना जाता है।

16. विघ्नराज

ॐ विघ्नराजाय नमः।
अर्थ: विघ्नों के अधिपति।
भावार्थ: गणेशजी बाधाओं को नियंत्रित करने और भक्तों के मार्ग को सुगम बनाने वाले माने जाते हैं।

17. गजानन

ॐ गजाननाय नमः।
अर्थ: हाथी के समान मुख वाले।
भावार्थ: गजानन नाम भगवान गणेश की सबसे प्रसिद्ध पहचान में से एक है और बुद्धि तथा सामर्थ्य का स्मरण कराता है।

18. भीम

ॐ भीमाय नमः।
अर्थ: अत्यंत प्रभावशाली और शक्तिशाली।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की प्रचंड शक्ति और दुष्ट शक्तियों के सामने उनके तेज को दर्शाता है।

19. प्रमोद

ॐ प्रमोदाय नमः।
अर्थ: आनंद और प्रसन्नता देने वाले।
भावार्थ: गणेशजी का स्मरण मन में उत्साह, आनंद और शुभ भाव उत्पन्न करने वाला माना जाता है।

20. आमोद

ॐ आमोदाय नमः।
अर्थ: आनंदमय और प्रसन्न रहने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के हर्षपूर्ण और मंगलकारी स्वरूप का प्रतीक है।

21. सुरानन्द

ॐ सुरानन्दाय नमः।
अर्थ: देवताओं को आनंद देने वाले।
भावार्थ: भगवान गणेश का दिव्य स्वरूप देवगणों के लिए भी आनंद और मंगल का कारण माना गया है।

22. मदोत्कट

ॐ मदोत्कटाय नमः।
अर्थ: अत्यंत प्रभावशाली और प्रबल तेज वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के असाधारण तेज और प्रचंड सामर्थ्य को प्रकट करता है।

23. हेरम्ब

ॐ हेरम्बाय नमः।
अर्थ: निर्बलों के रक्षक।
भावार्थ: हेरम्ब स्वरूप गणेशजी करुणा, संरक्षण और आश्रय देने वाली शक्ति के प्रतीक हैं।

24. शम्बर

ॐ शम्बराय नमः।
अर्थ: विशेष दिव्य स्वरूप में स्थित रहने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की व्यापक और रहस्यमयी सत्ता की ओर संकेत करता है।

25. शम्भु

ॐ शम्भवे नमः।
अर्थ: कल्याण और आनंद प्रदान करने वाले।
भावार्थ: गणेशजी अपने भक्तों के जीवन में मंगल और सुख का संचार करने वाले माने जाते हैं।

26. लम्बकर्ण

ॐ लम्बकर्णाय नमः।
अर्थ: लंबे और विशाल कानों वाले।
भावार्थ: उनके बड़े कान धैर्यपूर्वक सबकी बात सुनने और विवेक से ग्रहण करने का प्रतीक माने जाते हैं।

27. महाबल

ॐ महाबलाय नमः।
अर्थ: महान शक्ति से संपन्न।
भावार्थ: गणेशजी का महाबल स्वरूप उनके अद्भुत सामर्थ्य और रक्षक शक्ति को दर्शाता है।

28. नन्दन

ॐ नन्दनाय नमः।
अर्थ: आनंद देने वाले और सदैव प्रसन्न रहने वाले।
भावार्थ: यह नाम भगवान गणेश के प्रसन्नचित्त और आनंदमय स्वरूप को प्रकट करता है।

29. अलम्पट

ॐ अलम्पटाय नमः।
अर्थ: अलौकिक सौंदर्य और आकर्षण से युक्त।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की दिव्य शोभा और मनोहर स्वरूप का स्मरण कराता है।

30. अभीरु

ॐ अभीरवे नमः।
अर्थ: निर्भय और निडर।
भावार्थ: गणेशजी का यह नाम भक्तों को साहस और भय से मुक्त रहने की प्रेरणा देता है।

31. मेघनाद

ॐ मेघनादाय नमः।
अर्थ: मेघों जैसी गंभीर ध्वनि वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के प्रभावशाली और गूंजते हुए दिव्य स्वरूप को दर्शाता है।

32. गणञ्जय

ॐ गणञ्जयाय नमः।
अर्थ: विजय प्राप्त करने वाले।
भावार्थ: गणेशजी का यह नाम अधर्म और नकारात्मक शक्तियों पर विजय का स्मरण कराता है।

33. विनायक

ॐ विनायकाय नमः।
अर्थ: श्रेष्ठ मार्गदर्शक और प्रमुख नायक।
भावार्थ: विनायक नाम गणेशजी के नेतृत्व और शुभ कार्यों के आरंभकर्ता स्वरूप को प्रकट करता है।

34. विरूपाक्ष

ॐ विरूपाक्षाय नमः।
अर्थ: अद्भुत और सामान्य से भिन्न नेत्रों वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की दिव्य दृष्टि और व्यापक चेतना का प्रतीक है।

35. धीरशूर

ॐ धीरशूराय नमः।
अर्थ: धैर्यवान और महान वीर।
भावार्थ: गणेशजी का यह स्वरूप साहस के साथ विवेक और धैर्य का महत्व बताता है।

36. वरप्रद

ॐ वरप्रदाय नमः।
अर्थ: वरदान देने वाले।
भावार्थ: भक्त श्रद्धा से गणेशजी की आराधना करके अपनी शुभ इच्छाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।

37. महागणपति

ॐ महागणपतये नमः।
अर्थ: महान गणपति और सर्वशक्तिमान अधिपति।
भावार्थ: महागणपति स्वरूप गणेशजी की व्यापक शक्ति और दिव्य ऐश्वर्य को दर्शाता है।

38. बुद्धिप्रिय

ॐ बुद्धिप्रियाय नमः।
अर्थ: बुद्धि और ज्ञान को प्रिय मानने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को विवेक, अध्ययन और ज्ञान से जोड़ता है।

39. क्षिप्रप्रसादन

ॐ क्षिप्रप्रसादनाय नमः।
अर्थ: शीघ्र प्रसन्न होकर कृपा करने वाले।
भावार्थ: भक्तों की सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होकर गणेशजी शीघ्र अनुग्रह करने वाले देवता माने जाते हैं।

40. रुद्रप्रिय

ॐ रुद्रप्रियाय नमः।
अर्थ: भगवान रुद्र को प्रिय।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी और भगवान शिव के गहरे दिव्य संबंध को स्मरण कराता है।

41. गणाध्यक्ष

ॐ गणाध्यक्षाय नमः।
अर्थ: गणों के अध्यक्ष और संरक्षक।
भावार्थ: गणेशजी अपने दिव्य गणों का संचालन और संरक्षण करने वाले अधिपति माने जाते हैं।

42. उमापुत्र

ॐ उमापुत्राय नमः।
अर्थ: माता उमा के पुत्र।
भावार्थ: यह नाम भगवान गणेश को माता पार्वती के प्रिय पुत्र के रूप में स्मरण कराता है।

43. अघनाशन

ॐ अघनाशनाय नमः।
अर्थ: पाप और दुष्कर्मों का नाश करने वाले।
भावार्थ: श्रद्धा से गणेशजी की उपासना मनुष्य को सदाचार और शुभ कर्मों की ओर प्रेरित करती है।

44. कुमारगुरु

ॐ कुमारगुरवे नमः।
अर्थ: कुमार अर्थात् कार्तिकेय के गुरु।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के ज्ञान और आध्यात्मिक श्रेष्ठता को दर्शाता है।

45. ईशानपुत्र

ॐ ईशानपुत्राय नमः।
अर्थ: भगवान ईशान अर्थात् शिव के पुत्र।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के शिव-पुत्र स्वरूप का स्मरण कराता है।

46. मूषकवाहन

ॐ मूषकवाहनाय नमः।
अर्थ: मूषक को वाहन के रूप में धारण करने वाले।
भावार्थ: गणेशजी का मूषक वाहन उनके विशिष्ट और प्रतीकात्मक स्वरूप की पहचान है।

47. सिद्धिप्रिय

ॐ सिद्धिप्रियाय नमः।
अर्थ: सिद्धि को प्रिय मानने वाले और सिद्धि देने वाले।
भावार्थ: गणेशजी की उपासना सफलता, साधना और शुभ उपलब्धियों की कामना से की जाती है।

48. सिद्धिपति

ॐ सिद्धिपतये नमः।
अर्थ: सिद्धियों के स्वामी।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की आध्यात्मिक और दिव्य सिद्धियों पर अधिपति स्वरूप को दर्शाता है।

49. सिद्धि

ॐ सिद्धये नमः।
अर्थ: स्वयं पूर्णता और सिद्धि का स्वरूप।
भावार्थ: गणेशजी को साधना के सफल परिणाम और पूर्णता की दिव्य शक्ति से जोड़ा जाता है।

50. सिद्धिविनायक

ॐ सिद्धिविनायकाय नमः।
अर्थ: सिद्धि और सफलता प्रदान करने वाले विनायक।
भावार्थ: किसी कार्य की सफलता और शुभ फल के लिए सिद्धिविनायक की आराधना विशेष श्रद्धा से की जाती है।

51. अविघ्न

ॐ अविघ्नाय नमः।
अर्थ: जिनके मार्ग में विघ्न नहीं और जो विघ्नों को दूर करते हैं।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की विघ्नहरण शक्ति को दर्शाता है।

52. तुम्बरु

ॐ तुम्बुरवे नमः।
अर्थ: दिव्य संगीत और वाद्य से प्रसन्न होने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के संगीतप्रिय और आनंदमय स्वरूप का स्मरण कराता है।

53. सिंहवाहन

ॐ सिंहवाहनाय नमः।
अर्थ: सिंह को वाहन रूप में धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के एक विशेष दिव्य रूप की ओर संकेत करता है, जिसमें सिंह शक्ति और साहस का प्रतीक है।

54. मोहिनीप्रिय

ॐ मोहिनीप्रियाय नमः।
अर्थ: मोहिनी स्वरूप को प्रिय मानने वाले।
भावार्थ: यह नाम भगवान की विभिन्न दिव्य शक्तियों और स्वरूपों के प्रति गणेशजी के संबंध को दर्शाता है।

55. कटङ्कट

ॐ कटङ्कटाय नमः।
अर्थ: अज्ञान और भ्रम को दूर करने वाले।
भावार्थ: गणेशजी का यह नाम भीतर के अंधकार को हटाकर विवेक का प्रकाश जगाने का संकेत देता है।

56. राजपुत्र

ॐ राजपुत्राय नमः।
अर्थ: राजा के पुत्र के रूप में प्रतिष्ठित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के एक विशिष्ट पौराणिक स्वरूप और राजकीय सम्मान को स्मरण कराता है।

57. शालक

ॐ शालकाय नमः।
अर्थ: शांत और संयमित रहने वाले।
भावार्थ: यह नाम मन को स्थिर रखने और संयमित आचरण की प्रेरणा देता है।

58. सम्मित

ॐ सम्मिताय नमः।
अर्थ: संतुलित और उचित स्वरूप वाले।
भावार्थ: गणेशजी का यह नाम संतुलन, सामंजस्य और उचित व्यवस्था की भावना को प्रकट करता है।

59. अमित

ॐ अमिताय नमः।
अर्थ: जिनकी सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती।
भावार्थ: भगवान गणेश की महिमा और शक्ति को असीम मानने का भाव इस नाम में निहित है।

60. कूष्माण्डसामसम्भूति

ॐ कूष्माण्डसामसम्भूतये नमः।
अर्थ: दिव्य वैदिक सत्ता से संबंधित विशेष स्वरूप वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के गूढ़ वैदिक और आध्यात्मिक स्वरूप की ओर संकेत करता है।

61. दुर्जय

ॐ दुर्जयाय नमः।
अर्थ: जिन्हें जीत पाना अत्यंत कठिन है।
भावार्थ: गणेशजी की शक्ति और संरक्षण के सामने विघ्नकारी शक्तियाँ टिक नहीं पातीं—यह भाव इस नाम में है।

62. धूर्जय

ॐ धूर्जयाय नमः।
अर्थ: दुष्ट और विरोधी शक्तियों पर विजय पाने वाले।
भावार्थ: यह नाम भगवान गणेश के रक्षक और विजयी स्वरूप को दर्शाता है।

63. जय

ॐ जयाय नमः।
अर्थ: सदैव विजय का स्वरूप।
भावार्थ: गणेशजी का स्मरण शुभ कार्यों में सफलता और सकारात्मक शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

64. भूपति

ॐ भूपतये नमः।
अर्थ: पृथ्वी और लोकों के स्वामी।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की व्यापक सत्ता और संरक्षणकारी स्वरूप को प्रकट करता है।

65. भुवनपति

ॐ भुवनपतये नमः।
अर्थ: समस्त भुवनों के अधिपति।
भावार्थ: गणेशजी की दिव्य सत्ता केवल एक स्थान तक सीमित नहीं, बल्कि समस्त लोकों में व्याप्त मानी जाती है।

66. भूतानां पति

ॐ भूतानां पतये नमः।
अर्थ: समस्त प्राणियों और तत्वों के स्वामी।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की सर्वव्यापक और संरक्षणकारी शक्ति का स्मरण कराता है।

67. अव्यय

ॐ अव्ययाय नमः।
अर्थ: जो कभी क्षीण या नष्ट नहीं होते।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की शाश्वत और अविनाशी सत्ता को दर्शाता है।

68. विश्वकर्ता

ॐ विश्वकर्त्रे नमः।
अर्थ: विश्व की रचना करने वाली दिव्य शक्ति।
भावार्थ: गणेशजी के इस नाम में उन्हें सृष्टि की व्यापक रचनात्मक शक्ति से जोड़ा गया है।

69. विश्वमुख

ॐ विश्वमुखाय नमः।
अर्थ: जिनका स्वरूप समस्त विश्व में मुखरित है।
भावार्थ: यह नाम भगवान के सर्वव्यापी स्वरूप का स्मरण कराता है।

70. विश्वरूप

ॐ विश्वरूपाय नमः।
अर्थ: जिनका स्वरूप संपूर्ण विश्व के समान व्यापक है।
भावार्थ: विश्वरूप गणेशजी में समस्त सृष्टि को एक दिव्य सत्ता के रूप में देखने का भाव है।

71. निधि

ॐ निधये नमः।
अर्थ: समस्त संपदा और शुभ निधियों के आधार।
भावार्थ: गणेशजी को भौतिक ही नहीं, बल्कि ज्ञान और सद्गुणों की संपदा से भी जोड़ा जाता है।

72. घृणि

ॐ घृणये नमः।
अर्थ: प्रकाश और तेज से युक्त।
भावार्थ: यह नाम सूर्य के समान प्रकाशमान और तेजस्वी दिव्य सत्ता की ओर संकेत करता है।

73. कवि

ॐ कवये नमः।
अर्थ: दूरदर्शी ज्ञानी और मनीषी।
भावार्थ: गणेशजी का कवि स्वरूप ज्ञान, चिंतन और गहरी दृष्टि का प्रतीक है।

74. कवीनामृषभ

ॐ कवीनामृषभाय नमः।
अर्थ: ज्ञानी और कवियों में श्रेष्ठ।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की प्रखर बुद्धि और विवेकपूर्ण दृष्टि की महिमा बताता है।

75. ब्रह्मण्य

ॐ ब्रह्मण्याय नमः।
अर्थ: ब्रह्मविद्या और वैदिक ज्ञान के संरक्षक।
भावार्थ: गणेशजी का यह नाम ज्ञान, धर्म और आध्यात्मिक परंपरा के संरक्षण से जुड़ा है।

76. ब्रह्मणस्पति

ॐ ब्रह्मणस्पतये नमः।
अर्थ: वाणी और ज्ञान के अधिपति।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के बुद्धि, वाणी और मंत्रशक्ति से जुड़े स्वरूप को प्रकट करता है।

77. ज्येष्ठराज

ॐ ज्येष्ठराजाय नमः।
अर्थ: श्रेष्ठ और अग्रणी राजा।
भावार्थ: गणेशजी को देवताओं में अग्रपूज्य और सम्मानित स्थान प्राप्त होने का भाव इस नाम में है।

78. निधिपति

ॐ निधिपतये नमः।
अर्थ: समस्त निधियों के स्वामी।
भावार्थ: यह नाम धन, संपदा और शुभ ऐश्वर्य पर गणेशजी की अधिपत्य भावना को दर्शाता है।

79. निधिप्रियपतिप्रिय

ॐ निधिप्रियपतिप्रियाय नमः।
अर्थ: निधियों के स्वामी को भी प्रिय लगने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के ऐसे पूज्य स्वरूप को दर्शाता है जिन्हें धन और ऐश्वर्य के अधिपति भी सम्मान देते हैं।

80. हिरण्मयपुरान्तःस्थ

ॐ हिरण्मयपुरान्तःस्थाय नमः।
अर्थ: दिव्य स्वर्णमय लोक में स्थित रहने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के सूक्ष्म और दिव्य लोकों से जुड़े स्वरूप का स्मरण कराता है।

81. सूर्यमण्डलमध्यग

ॐ सूर्यमण्डलमध्यगाय नमः।
अर्थ: सूर्य मंडल के मध्य स्थित रहने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को दिव्य प्रकाश, चेतना और तेज से जोड़ता है।

82. कराहतिविध्वस्तसिन्धुसलिल

ॐ कराहतिविध्वस्तसिन्धुसलिलाय नमः।
अर्थ: अपनी दिव्य शक्ति से समुद्र के जल को भी प्रभावित करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की अद्भुत और असाधारण सामर्थ्य का प्रतीकात्मक वर्णन करता है।

83. पूषदन्तभित्

ॐ पूषदन्तभिदे नमः।
अर्थ: पूषा के दाँत को खंडित करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी से जुड़ी प्राचीन पौराणिक कथा और उनके प्रचंड स्वरूप का स्मरण कराता है।

84. उमाङ्ककेलिकुतुकी

ॐ उमाङ्ककेलिकुतुकिने नमः।
अर्थ: माता उमा की गोद में आनंदपूर्वक क्रीड़ा करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के बालरूप और माता पार्वती के साथ उनके स्नेहपूर्ण संबंध को दर्शाता है।

85. मुक्तिद

ॐ मुक्तिदाय नमः।
अर्थ: मुक्ति प्रदान करने वाले।
भावार्थ: गणेशजी की आराधना केवल सांसारिक सफलता ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति की कामना से भी की जाती है।

86. कुलपालन

ॐ कुलपालनाय नमः।
अर्थ: कुल और परिवार की रक्षा करने वाले।
भावार्थ: यह नाम परिवार में सुख, मंगल और संरक्षण की कामना से गणेशजी के स्मरण को दर्शाता है।

87. किरीटी

ॐ किरीटिने नमः।
अर्थ: मुकुट धारण करने वाले।
भावार्थ: मुकुट गणेशजी के गौरव, प्रतिष्ठा और दिव्य राजसत्ता का प्रतीक है।

88. कुण्डली

ॐ कुण्डलिने नमः।
अर्थ: कुण्डल धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के अलंकारयुक्त और सुंदर दिव्य स्वरूप को प्रकट करता है।

89. हारी

ॐ हारिणे नमः।
अर्थ: हार धारण करने वाले।
भावार्थ: भगवान गणेश का यह नाम उनके आभूषणों से सुशोभित मंगलमय रूप का स्मरण कराता है।

90. वनमाली

ॐ वनमालिने नमः।
अर्थ: वनफूलों की माला धारण करने वाले।
भावार्थ: पुष्पमाला से सुशोभित गणेशजी का स्वरूप सरलता और प्राकृतिक सौंदर्य का भाव जगाता है।

91. मनोमय

ॐ मनोमयाय नमः।
अर्थ: मन और चेतना में व्याप्त।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की सूक्ष्म उपस्थिति और मन से जुड़े दिव्य स्वरूप को दर्शाता है।

92. वैमुख्यहतदैत्यश्री

ॐ वैमुख्यहतदैत्यश्रिये नमः।
अर्थ: विमुख और अधर्मी शक्तियों का वैभव नष्ट करने वाले।
भावार्थ: गणेशजी का यह नाम धर्म से दूर जाने वाली नकारात्मक शक्तियों के अंत का प्रतीक है।

93. पादाहतिजितक्षिति

ॐ पादाहतिजितक्षितये नमः।
अर्थ: अपने चरणों के प्रभाव से पृथ्वी के अहंकार को जीतने वाले।
भावार्थ: यह नाम विनम्रता और दिव्य शक्ति के सामने अहंकार के समाप्त होने का संदेश देता है।

94. सद्योजातस्वर्णमुञ्जमेखली

ॐ सद्योजातस्वर्णमुञ्जमेखलिने नमः।
अर्थ: स्वर्ण और मुंज से बनी मेखला धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विशेष अलंकारयुक्त दिव्य स्वरूप का वर्णन करता है।

95. दुर्निमित्तहृत्

ॐ दुर्निमित्तहृते नमः।
अर्थ: अशुभ संकेतों को दूर करने वाले।
भावार्थ: गणेशजी का स्मरण शुभता और सकारात्मकता की भावना को मजबूत करता है।

96. दुःस्वप्नहृत्

ॐ दुःस्वप्नहृते नमः।
अर्थ: बुरे स्वप्नों और उनसे उत्पन्न भय को दूर करने वाले।
भावार्थ: भक्त गणेशजी को भय और अशांति से रक्षा करने वाले देवता के रूप में स्मरण करते हैं।

97. प्रसहन

ॐ प्रसहनाय नमः।
अर्थ: सहनशील और दोषों को क्षमा करने वाले।
भावार्थ: यह नाम धैर्य, सहनशीलता और करुणा की भावना को प्रकट करता है।

98. गुणी

ॐ गुणिने नमः।
अर्थ: अनेक सद्गुणों से संपन्न।
भावार्थ: गणेशजी का यह नाम ज्ञान, विवेक, करुणा और शक्ति जैसे दिव्य गुणों की ओर संकेत करता है।

99. नादप्रतिष्ठित

ॐ नादप्रतिष्ठिताय नमः।
अर्थ: दिव्य नाद में प्रतिष्ठित रहने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को संगीत, मंत्र और आध्यात्मिक ध्वनि से जोड़ता है।

100. सुरूप

ॐ सुरूपाय नमः।
अर्थ: सुंदर और मनोहर स्वरूप वाले।
भावार्थ: गणेशजी का दिव्य रूप भक्तों के मन में प्रेम, शांति और श्रद्धा उत्पन्न करता है।

101. सर्वनेत्राधिवास

ॐ सर्वनेत्राधिवासाय नमः।
अर्थ: सभी दृष्टियों और नेत्रों में निवास करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की सर्वव्यापक चेतना का प्रतीक है।

102. वीरासनाश्रय

ॐ वीरासनाश्रयाय नमः।
अर्थ: वीरासन में स्थित रहने वाले।
भावार्थ: यह नाम स्थिरता, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की भावना जगाता है।

103. पीताम्बर

ॐ पीताम्बराय नमः।
अर्थ: पीले वस्त्र धारण करने वाले।
भावार्थ: पीताम्बर रूप गणेशजी के उज्ज्वल, मंगलमय और दिव्य स्वरूप को दर्शाता है।

104. खण्डरद

ॐ खण्डरदाय नमः।
अर्थ: जिनका एक दाँत खंडित है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के एकदंत स्वरूप और उससे जुड़ी पौराणिक पहचान को दर्शाता है।

105. खण्डेन्दुकृतशेखर

ॐ खण्डेन्दुकृतशेखराय नमः।
अर्थ: मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने वाले।
भावार्थ: अर्धचंद्र से सुशोभित गणेशजी का यह स्वरूप उनके शिव-परिवार से जुड़े दिव्य रूप को प्रकट करता है।

106. चित्राङ्कश्यामदशन

ॐ चित्राङ्कश्यामदशनाय नमः।
अर्थ: विविध आभा वाले दाँतों से युक्त।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विलक्षण और अलौकिक शारीरिक स्वरूप का वर्णन करता है।

107. भालचन्द्र

ॐ भालचन्द्राय नमः।
अर्थ: मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले।
भावार्थ: भालचंद्र नाम गणेशजी के शांत, शीतल और दिव्य स्वरूप का स्मरण कराता है।

108. चतुर्भुज

ॐ चतुर्भुजाय नमः।
अर्थ: चार भुजाओं वाले।
भावार्थ: चार भुजाएँ गणेशजी की विविध दिव्य शक्तियों और कार्यों का प्रतीक मानी जाती हैं।

109. योगाधिप

ॐ योगाधिपाय नमः।
अर्थ: योग और साधना के अधिपति।
भावार्थ: गणेशजी का यह रूप आत्मसंयम, ध्यान और आध्यात्मिक साधना से जुड़ा है।

110. तारकस्थ

ॐ तारकस्थाय नमः।
अर्थ: तारक मंत्र में स्थित रहने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की मंत्रमय और आध्यात्मिक सत्ता का स्मरण कराता है।

111. पुरुष

ॐ पुरुषाय नमः।
अर्थ: परम चेतन पुरुष स्वरूप।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को व्यापक चेतना और दिव्य पुरुष सत्ता से जोड़ता है।

112. गजकर्णक

ॐ गजकर्णकाय नमः।
अर्थ: हाथी के समान विशाल कान वाले।
भावार्थ: उनके विशाल कान ध्यानपूर्वक सुनने और ज्ञान ग्रहण करने की भावना का प्रतीक माने जाते हैं।

113. गणाधिराज

ॐ गणाधिराजाय नमः।
अर्थ: गणों के सर्वोच्च राजा।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के परम नेतृत्व और अधिपति स्वरूप को प्रकट करता है।

114. विजयस्थिर

ॐ विजयस्थिराय नमः।
अर्थ: स्थायी विजय से युक्त।
भावार्थ: गणेशजी का यह नाम निरंतर सफलता और दृढ़ प्रयास की प्रेरणा देता है।

115. गजपतिर्ध्वजी

ॐ गजपतिर्ध्वजिने नमः।
अर्थ: गजचिह्न वाले ध्वज से सुशोभित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के गौरवपूर्ण और विजयी स्वरूप की ओर संकेत करता है।

116. देवदेव

ॐ देवदेवाय नमः।
अर्थ: देवताओं के भी देव।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की उच्चतम दिव्य प्रतिष्ठा और देवताओं द्वारा पूज्य स्वरूप को दर्शाता है।

117. स्मरप्राणदीपक

ॐ स्मरप्राणदीपकाय नमः।
अर्थ: स्मर अर्थात् कामदेव के जीवन में पुनः प्रकाश जगाने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी से जुड़ी एक पौराणिक मान्यता और उनकी जीवनदायिनी शक्ति को दर्शाता है।

118. वायुकीलक

ॐ वायुकीलकाय नमः।
अर्थ: जीवनदायी वायु और प्राणशक्ति के संरक्षक।
भावार्थ: यह नाम जीवन, गति और प्राणशक्ति से जुड़े गणेशजी के दिव्य स्वरूप का संकेत देता है।

119. विपश्चिद्वरद

ॐ विपश्चिद्वरदाय नमः।
अर्थ: ज्ञानी विपश्चित् को वर प्रदान करने वाले।
भावार्थ: यह नाम भगवान गणेश की वरदानी और भक्तवत्सल शक्ति को प्रकट करता है।

120. नादोन्नादभिन्नबलाहक

ॐ नादोन्नादभिन्नबलाहकाय नमः।
अर्थ: जिनकी प्रचंड ध्वनि मेघों के समूह को भी प्रभावित करे।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की अद्भुत शक्ति और प्रभावशाली नाद का प्रतीकात्मक वर्णन है।

121. वराहरदन

ॐ वराहरदनाय नमः।
अर्थ: सुंदर और विशिष्ट दंत वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के दाँत की विशेषता और उनके अद्भुत रूप का स्मरण कराता है।

122. मृत्युञ्जय

ॐ मृत्युञ्जयाय नमः।
अर्थ: मृत्यु पर विजय पाने वाले।
भावार्थ: यह नाम भय से ऊपर उठने और अमर आध्यात्मिक चेतना की ओर संकेत करता है।

123. व्याघ्राजिनाम्बर

ॐ व्याघ्राजिनाम्बराय नमः।
अर्थ: व्याघ्रचर्म धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के तपस्वी और शक्तिशाली दिव्य स्वरूप को दर्शाता है।

124. इच्छाशक्तिधर

ॐ इच्छाशक्तिधराय नमः।
अर्थ: दिव्य इच्छाशक्ति को धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम मन और इच्छाओं पर नियंत्रण तथा संकल्प की शक्ति का प्रतीक है।

125. देवत्राता

ॐ देवत्रात्रे नमः।
अर्थ: देवताओं की रक्षा करने वाले।
भावार्थ: गणेशजी का यह स्वरूप संकट के समय संरक्षण और सहायता देने वाली शक्ति को दर्शाता है।

126. दैत्यविमर्दन

ॐ दैत्यविमर्दनाय नमः।
अर्थ: दैत्य और आसुरी शक्तियों का दमन करने वाले।
भावार्थ: यह नाम धर्म की रक्षा और नकारात्मक शक्तियों पर विजय का प्रतीक है।

127. शम्भुवक्त्रोद्भव

ॐ शम्भुवक्त्रोद्भवाय नमः।
अर्थ: शम्भु के मुख से प्रकट होने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के शिव से जुड़े दिव्य और रहस्यमय स्वरूप का स्मरण कराता है।

128. शम्भुकोपहा

ॐ शम्भुकोपघ्ने नमः।
अर्थ: भगवान शम्भु के क्रोध को शांत करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की शांति स्थापित करने वाली शक्ति और शिव से उनके गहरे संबंध को दर्शाता है।

129. शम्भुहास्यभू

ॐ शम्भुहास्यभुवे नमः।
अर्थ: शम्भु के हास्य और आनंद से संबंधित दिव्य स्वरूप।
भावार्थ: यह नाम शिव और गणेशजी के स्नेहपूर्ण पारिवारिक संबंध का भाव जगाता है।

130. शम्भुतेजस्

ॐ शम्भुतेजसे नमः।
अर्थ: शिव के समान दिव्य तेज से युक्त।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के भीतर स्थित प्रचंड आध्यात्मिक प्रकाश और शक्ति को दर्शाता है।

131. शिवाशोकहारी

ॐ शिवाशोकहारिणे नमः।
अर्थ: शिवा अर्थात् माता पार्वती के दुःख को दूर करने वाले।
भावार्थ: यह नाम माता-पुत्र के प्रेम और गणेशजी के सांत्वना देने वाले स्वरूप को प्रकट करता है।

132. गौरीसुखावह

ॐ गौरीसुखावहाय नमः।
अर्थ: माता गौरी को सुख और आनंद देने वाले।
भावार्थ: गणेशजी माता पार्वती के प्रिय पुत्र के रूप में मातृभक्ति और स्नेह के प्रतीक हैं।

133. उमाङ्गमलज

ॐ उमाङ्गमलजाय नमः।
अर्थ: उमा के अंग से प्रकट होने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की माता पार्वती से जुड़ी दिव्य उत्पत्ति की ओर संकेत करता है।

134. गौरीतेजोभू

ॐ गौरीतेजोभुवे नमः।
अर्थ: गौरी के दिव्य तेज से उत्पन्न।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को माता पार्वती की शक्ति और मातृऊर्जा से जोड़ता है।

135. स्वर्धुनीभव

ॐ स्वर्धुनीभवाय नमः।
अर्थ: स्वर्गीय नदी गंगा से संबंधित दिव्य स्वरूप वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी और पवित्र गंगा से जुड़े दिव्य संबंध की ओर संकेत करता है।

136. यज्ञकाय

ॐ यज्ञकायाय नमः।
अर्थ: जिनका स्वरूप स्वयं यज्ञ के समान पवित्र है।
भावार्थ: यह नाम त्याग, समर्पण और पवित्र कर्म की भावना को प्रकट करता है।

137. महानाद

ॐ महानादाय नमः।
अर्थ: महान और प्रभावशाली नाद वाले।
भावार्थ: गणेशजी का महानाद स्वरूप मंत्र, संगीत और दिव्य ध्वनि की शक्ति का स्मरण कराता है।

138. गिरिवर्ष्मा

ॐ गिरिवर्ष्मणे नमः।
अर्थ: पर्वत के समान विशाल देह वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की विशालता, स्थिरता और अचल शक्ति का प्रतीक है।

139. शुभानन

ॐ शुभाननाय नमः।
अर्थ: मंगलमय मुख वाले।
भावार्थ: शुभानन गणेशजी का ऐसा स्वरूप है जिसका स्मरण शुभता और प्रसन्नता का भाव जगाता है।

140. सर्वात्मा

ॐ सर्वात्मने नमः।
अर्थ: सभी प्राणियों में आत्मरूप से विद्यमान।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की सर्वव्यापक चेतना और एकत्व की भावना को दर्शाता है।

141. सर्वदेवात्मा

ॐ सर्वदेवात्मने नमः।
अर्थ: सभी देवताओं में व्याप्त दिव्य आत्मतत्त्व।
भावार्थ: यह नाम विभिन्न देवस्वरूपों में एक ही परम दिव्य चेतना को देखने का भाव देता है।

142. ब्रह्ममूर्धा

ॐ ब्रह्ममूर्ध्ने नमः।
अर्थ: ब्रह्मतत्त्व से संबंधित दिव्य मस्तक वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के ब्रह्मांडीय और ज्ञानमय स्वरूप की ओर संकेत करता है।

143. ककुप्श्रुति

ॐ ककुप्श्रुतये नमः।
अर्थ: जिनकी श्रवण शक्ति सभी दिशाओं तक व्याप्त है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की सर्वदिशाओं में व्याप्त चेतना और दिव्य श्रवण का प्रतीक है।

144. ब्रह्माण्डकुम्भ

ॐ ब्रह्माण्डकुम्भाय नमः।
अर्थ: जिनका स्वरूप ब्रह्मांड को धारण करने वाला विशाल पात्र जैसा है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की विराट और ब्रह्मांडमय सत्ता का वर्णन करता है।

145. चिद्व्योमभाल

ॐ चिद्व्योमभालाय नमः।
अर्थ: चेतना और आकाश के समान विशाल मस्तक वाले।
भावार्थ: यह नाम ज्ञान की असीमता और गणेशजी की विराट चेतना का प्रतीक है।

146. सत्यशिरोरुह

ॐ सत्यशिरोरुहाय नमः।
अर्थ: सत्य को अपने स्वरूप का आधार बनाने वाले।
भावार्थ: यह नाम सत्य, ज्ञान और पवित्रता को गणेशजी के दिव्य स्वरूप से जोड़ता है।

147. जगज्जन्मलयोन्मेषनिमेष

ॐ जगज्जन्मलयोन्मेषनिमेषाय नमः।
अर्थ: जिनकी दिव्य चेतना में सृष्टि का प्रकट होना और विलीन होना निहित है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विराट ब्रह्मांडीय स्वरूप और सृजन-विलय की शक्ति को दर्शाता है।

148. अग्न्यर्कसोमदृक्

ॐ अग्न्यर्कसोमदृशे नमः।
अर्थ: अग्नि, सूर्य और चंद्रमा के समान दिव्य नेत्रों वाले।
भावार्थ: यह नाम प्रकाश, ऊर्जा और शीतलता—तीनों दिव्य शक्तियों को एक साथ दर्शाता है।

149. गिरीन्द्रैकरद

ॐ गिरीन्द्रैकरदाय नमः।
अर्थ: महान पर्वत के समान दृढ़ दंत वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की अचल शक्ति और अद्भुत स्वरूप का स्मरण कराता है।

150. धर्माधर्मोष्ठ

ॐ धर्माधर्मोष्ठाय नमः।
अर्थ: जिनके स्वरूप में धर्म और अधर्म दोनों का विवेचन निहित है।
भावार्थ: यह नाम मनुष्य को धर्म और अधर्म के अंतर को समझने की प्रेरणा देता है।

151. सामबृंहित

ॐ सामबृंहिताय नमः।
अर्थ: सामवेद की मधुरता से युक्त।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के स्वर, संगीत और वैदिक ज्ञान से जुड़े रूप को दर्शाता है।

152. ग्रहर्क्षदशन

ॐ ग्रहर्क्षदशनाय नमः।
अर्थ: जिनके विराट स्वरूप में ग्रह और नक्षत्र भी समाहित हैं।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के ब्रह्मांडव्यापी स्वरूप का प्रतीकात्मक वर्णन है।

153. वाणीजिह्व

ॐ वाणीजिह्वाय नमः।
अर्थ: जिनकी जिह्वा वाणी और ज्ञान की शक्ति का प्रतीक है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को वाणी, मंत्र और ज्ञान से जोड़ता है।

154. वासवनासिक

ॐ वासवनासिकाय नमः।
अर्थ: जिनके विराट स्वरूप में इंद्रतत्त्व नासिका के समान प्रतिष्ठित है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के ब्रह्मांडीय रूप की कल्पना को प्रकट करता है।

155. कुलाचलांस

ॐ कुलाचलांसाय नमः।
अर्थ: पर्वतों के समान विशाल कंधों वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की स्थिरता, शक्ति और विराट देह का प्रतीक है।

156. सोमार्कघण्ट

ॐ सोमार्कघण्टाय नमः।
अर्थ: सूर्य और चंद्र के दिव्य प्रभाव से युक्त।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के प्रकाश और शीतलता से संयुक्त दिव्य स्वरूप का संकेत देता है।

157. रुद्रशिरोधर

ॐ रुद्रशिरोधराय नमः।
अर्थ: रुद्रतत्त्व को मस्तक पर धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के शिव से जुड़े शक्तिशाली और आध्यात्मिक स्वरूप को दर्शाता है।

158. नदीनदभुज

ॐ नदीनदभुजाय नमः।
अर्थ: नदियों के समान विस्तृत भुजाओं वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विराट स्वरूप और प्रकृति से उनके दिव्य संबंध को प्रकट करता है।

159. सर्पाङ्गुलीक

ॐ सर्पाङ्गुलीकाय नमः।
अर्थ: सर्पों को अंगुलियों के अलंकार के रूप में धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के रहस्यमय, शक्तिशाली और अलंकारयुक्त स्वरूप का वर्णन करता है।

160. तारकानख

ॐ तारकानखाय नमः।
अर्थ: तारों के समान चमकते नख वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विराट और आकाशमय स्वरूप की कल्पना कराता है।

161. भ्रूमध्यसंस्थितकर

ॐ भ्रूमध्यसंस्थितकराय नमः।
अर्थ: भ्रूमध्य में स्थित दिव्य सूँड वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की एकाग्रता, ध्यान और सूक्ष्म चेतना से जुड़ा भाव प्रस्तुत करता है।

162. ब्रह्मविद्यामदोत्कट

ॐ ब्रह्मविद्यामदोत्कटाय नमः।
अर्थ: ब्रह्मविद्या और महान ज्ञान से अत्यंत समृद्ध।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को उच्च आध्यात्मिक ज्ञान और प्रखर बुद्धि का स्वरूप मानता है।

163. व्योमनाभ

ॐ व्योमनाभये नमः।
अर्थ: जिनकी नाभि आकाश के समान व्यापक है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विराट ब्रह्मांडीय स्वरूप को दर्शाता है।

164. श्रीहृदय

ॐ श्रीहृदयाय नमः।
अर्थ: जिनके हृदय में श्री और दिव्य ज्ञान का निवास है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को समृद्धि, ज्ञान और मंगल का आधार मानने की भावना प्रकट करता है।

165. मेरुपृष्ठ

ॐ मेरुपृष्ठाय नमः।
अर्थ: मेरु पर्वत के समान दृढ़ पृष्ठभाग वाले।
भावार्थ: यह नाम अचलता, स्थिरता और विराट शक्ति का प्रतीक है।

166. अर्णवोदर

ॐ अर्णवोदराय नमः।
अर्थ: समुद्र के समान विशाल उदर वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के अनंत और विराट स्वरूप की कल्पना को दर्शाता है।

167. कुक्षिस्थयक्षगन्धर्वरक्षःकिन्नरमानुष

ॐ कुक्षिस्थयक्षगन्धर्वरक्षःकिन्नरमानुषाय नमः।
अर्थ: जिनके विराट स्वरूप में यक्ष, गंधर्व, राक्षस, किन्नर और मनुष्य भी समाहित हैं।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की ऐसी सर्वव्यापक सत्ता को दर्शाता है जिसमें विभिन्न लोक और प्राणी समाए हुए हैं।

168. पृथ्विकटि

ॐ पृथ्विकटये नमः।
अर्थ: जिनकी कमर पृथ्वी के समान व्यापक है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विराट ब्रह्मांडीय शरीर की कल्पना को प्रकट करता है।

169. सृष्टिलिङ्ग

ॐ सृष्टिलिङ्गाय नमः।
अर्थ: सृष्टि के मूल कारण का प्रतीक स्वरूप।
भावार्थ: यह नाम सृजन की दिव्य शक्ति और जीवन की निरंतरता से जुड़ा भाव रखता है।

170. शैलोरु

ॐ शैलोरवे नमः।
अर्थ: पर्वतों के समान मजबूत जंघाओं वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की स्थिरता और विशाल शक्ति को दर्शाता है।

171. दस्रजानुक

ॐ दस्रजानुकाय नमः।
अर्थ: जिनके घुटने दिव्य अश्विनीकुमारों के समान माने गए हैं।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विराट शरीर में देवशक्तियों के प्रतीकात्मक समावेश को दर्शाता है।

172. पातालजङ्घ

ॐ पातालजङ्घाय नमः।
अर्थ: जिनकी जंघाओं में पाताल लोकों की विराटता का भाव है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के सर्वलोकव्यापी स्वरूप की कल्पना को प्रकट करता है।

173. मुनिपात्

ॐ मुनिपदे नमः।
अर्थ: जिनके चरण मुनियों की श्रद्धा से पूजित हैं।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के चरणों की महिमा और ऋषि-मुनियों की श्रद्धा को दर्शाता है।

174. कालाङ्गुष्ठ

ॐ कालाङ्गुष्ठाय नमः।
अर्थ: जिनके चरण में कालतत्त्व का प्रतीक अंगुष्ठ स्थित है।
भावार्थ: यह नाम समय और काल पर स्थित दिव्य सत्ता की ओर संकेत करता है।

175. त्रयीतनु

ॐ त्रयीतनवे नमः।
अर्थ: जिनका स्वरूप तीनों वेदों से जुड़ा हुआ है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को वैदिक ज्ञान और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक मानने की भावना प्रकट करता है।

176. ज्योतिर्मण्डललाङ्गूल

ॐ ज्योतिर्मण्डललाङ्गूलाय नमः।
अर्थ: जिनकी पूँछ का स्वरूप ज्योतिर्मय तारामंडल जैसा माना गया है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विराट और आकाशीय स्वरूप का प्रतीकात्मक वर्णन करता है।

177. हृदयालाननिश्चल

ॐ हृदयालान-निश्चलाय नमः।
अर्थ: भक्तों के हृदय में अचल होकर रहने वाले।
भावार्थ: सच्ची भक्ति में गणेशजी का स्थान मन के भीतर स्थिर श्रद्धा के रूप में माना जाता है।

178. हृत्पद्मकर्णिकाशालिवियत्केलिसरोवर

ॐ हृत्पद्मकर्णिकाशालिवियत्केलिसरोवराय नमः।
अर्थ: भक्तों के हृदय-कमल को अपनी दिव्य क्रीड़ा का स्थान बनाने वाले।
भावार्थ: यह नाम बताता है कि शुद्ध हृदय को भगवान की उपस्थिति का पवित्र स्थान माना जाता है।

179. सद्भक्तध्याननिगड

ॐ सद्भक्तध्याननिगडाय नमः।
अर्थ: सच्चे भक्त के ध्यान से प्रेमपूर्वक बंध जाने वाले।
भावार्थ: गणेशजी की भक्ति में ध्यान और श्रद्धा को विशेष महत्व दिया गया है।

180. पूजावारिनिवारित

ॐ पूजावारिनिवारिताय नमः।
अर्थ: भक्त की पूजा और प्रार्थना से प्रसन्न होने वाले।
भावार्थ: यह नाम भक्त और भगवान के प्रेमपूर्ण संबंध को दर्शाता है।

181. प्रतापी

ॐ प्रतापिने नमः।
अर्थ: महान तेज और पराक्रम वाले।
भावार्थ: गणेशजी का प्रतापी स्वरूप शक्ति, साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक है।

182. कश्यपसुत

ॐ कश्यपसुताय नमः।
अर्थ: कश्यप से संबंधित दिव्य स्वरूप वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की एक विशिष्ट पौराणिक परंपरा से जुड़े स्वरूप का स्मरण कराता है।

183. गणप

ॐ गणपाय नमः।
अर्थ: गणों के रक्षक और अधिपति।
भावार्थ: गणप नाम गणेशजी की मूल पहचान—गणों के स्वामी—को प्रकट करता है।

184. विष्टपी

ॐ विष्टपिने नमः।
अर्थ: समस्त लोकों के आधार।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की व्यापक और विश्वधारक शक्ति को दर्शाता है।

185. बली

ॐ बलिने नमः।
अर्थ: अत्यंत शक्तिशाली।
भावार्थ: गणेशजी की शक्ति केवल बाहरी बल नहीं, बल्कि धैर्य और आत्मबल का भी प्रतीक है।

186. यशस्वी

ॐ यशस्विने नमः।
अर्थ: महान यश और कीर्ति से संपन्न।
भावार्थ: गणेशजी की महिमा देवताओं और भक्तों में व्यापक रूप से पूजित मानी जाती है।

187. धार्मिक

ॐ धार्मिकाय नमः।
अर्थ: धर्म के मार्ग पर स्थित और धर्म की रक्षा करने वाले।
भावार्थ: यह नाम सत्य, सदाचार और शुभ कर्मों की प्रेरणा देता है।

188. स्वोजस्

ॐ स्वोजसे नमः।
अर्थ: अपने भीतर प्रबल ओज और तेज रखने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के प्रभावशाली व्यक्तित्व और दिव्य ऊर्जा को दर्शाता है।

189. प्रथम

ॐ प्रथमाय नमः।
अर्थ: सबसे पहले पूजे जाने वाले।
भावार्थ: किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में गणेशजी की प्रथम पूजा की परंपरा इसी भाव से जुड़ी है।

190. प्रथमेश्वर

ॐ प्रथमेश्वराय नमः।
अर्थ: प्रथम पूज्य ईश्वर।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को शुभ कार्यों के आरंभकर्ता और अग्रपूज्य देवता के रूप में स्मरण कराता है।

191. चिन्तामणिद्वीपपति

ॐ चिन्तामणिद्वीपपतये नमः।
अर्थ: चिंतामणि नामक दिव्य लोक के अधिपति।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के एक रहस्यमय और दिव्य आध्यात्मिक लोक से जुड़े स्वरूप को दर्शाता है।

192. कल्पद्रुमवनालय

ॐ कल्पद्रुमवनालयाय नमः।
अर्थ: कल्पवृक्षों से युक्त दिव्य वन में निवास करने वाले।
भावार्थ: कल्पद्रुम समृद्धि और इच्छापूर्ति का प्रतीक है; यह नाम गणेशजी के दिव्य ऐश्वर्य को दर्शाता है।

193. रत्नमण्डपमध्यस्थ

ॐ रत्नमण्डपमध्यस्थाय नमः।
अर्थ: रत्नों से सजे दिव्य मंडप के मध्य विराजमान।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के राजसी और दिव्य वैभव से युक्त स्वरूप को दर्शाता है।

194. रत्नसिंहासनाश्रय

ॐ रत्नसिंहासनाश्रयाय नमः।
अर्थ: रत्नजड़ित सिंहासन पर विराजमान।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की दिव्य प्रतिष्ठा और ऐश्वर्यपूर्ण स्वरूप का स्मरण कराता है।

195. तीव्राशिरोद्धृतपद

ॐ तीव्राशिरोद्धृतपदाय नमः।
अर्थ: तीव्रा नामक दिव्य शक्ति पर चरण रखने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के शक्ति-स्वरूप और विशेष उपासना परंपरा से जुड़ा है।

196. ज्वालिनीमौलिलालित

ॐ ज्वालिनीमौलिलालिताय नमः।
अर्थ: ज्वालिनी शक्ति द्वारा पूजित और सम्मानित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के तेजस्वी स्वरूप और दिव्य शक्तियों से उनके संबंध को दर्शाता है।

197. नन्दानन्दितपीठश्री

ॐ नन्दानन्दितपीठश्रिये नमः।
अर्थ: नन्दा शक्ति से सुशोभित दिव्य पीठ पर विराजमान।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के शक्ति-संपन्न और आनंदमय आसन का स्मरण कराता है।

198. भोगदाभूषितासन

ॐ भोगदाभूषितासनाय नमः।
अर्थ: भोगदा शक्ति से सुशोभित आसन पर विराजमान।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की समृद्धि और सुख प्रदान करने वाली शक्ति से संबंध को दर्शाता है।

199. सकामदायिनीपीठ

ॐ सकामदायिनीपीठाय नमः।
अर्थ: इच्छाओं की पूर्ति करने वाली शक्ति के पीठ पर स्थित।
भावार्थ: यह नाम भक्तों की शुभ इच्छाओं और उनकी पूर्ति की कामना से जुड़ा दिव्य भाव प्रकट करता है।

200. स्फुरदुग्रासनाश्रय

ॐ स्फुरदुग्रासनाश्रयाय नमः।
अर्थ: प्रभावशाली और उग्र आसन पर विराजमान।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के शक्तिशाली और रक्षक स्वरूप का संकेत देता है।

201. तेजोवतीशिरोरत्न

ॐ तेजोवतीशिरोरत्नाय नमः।
अर्थ: तेजोवती शक्ति के मस्तक-रत्न के समान प्रतिष्ठित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की दिव्य आभा और शक्ति-संपन्न स्वरूप को दर्शाता है।

202. सत्यानित्यावतंसित

ॐ सत्यानित्यावतंसिताय नमः।
अर्थ: सत्य और नित्यत्व से अलंकृत।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के शाश्वत, सत्यस्वरूप और दिव्य आभूषणों से सुशोभित रूप की ओर संकेत करता है।

203. सविघ्ननाशिनीपीठ

ॐ सविघ्ननाशिनीपीठाय नमः।
अर्थ: विघ्ननाशिनी शक्ति के दिव्य पीठ पर स्थित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की विघ्नों को दूर करने वाली शक्ति से जुड़े स्वरूप को प्रकट करता है।

204. सर्वशक्त्यम्बुजाश्रय

ॐ सर्वशक्त्यम्बुजाश्रयाय नमः।
अर्थ: समस्त शक्तियों से युक्त कमल का आश्रय लेने वाले।
भावार्थ: कमल पवित्रता और दिव्यता का प्रतीक है; यह नाम गणेशजी के शक्ति-संपन्न स्वरूप को दर्शाता है।

205. लिपिपद्मासनाधार

ॐ लिपिपद्मासनाधाराय नमः।
अर्थ: अक्षरों से युक्त कमलासन पर प्रतिष्ठित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को अक्षर, लेखन, विद्या और ज्ञान से जोड़ता है।

206. वह्निधामत्रयाश्रय

ॐ वह्निधामत्रयाश्रयाय नमः।
अर्थ: अग्नि, सूर्य और चंद्र से संबंधित तीन दिव्य तेजों में स्थित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के प्रकाशमय और ब्रह्मांडीय स्वरूप का प्रतीकात्मक वर्णन है।

207. उन्नतप्रपद

ॐ उन्नतप्रपदाय नमः।
अर्थ: उन्नत चरणों वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विशिष्ट शारीरिक स्वरूप का वर्णन करता है।

208. गूढगुल्फ

ॐ गूढगुल्फाय नमः।
अर्थ: जिनके टखने सुडौल और शरीर में सुंदरता से छिपे हुए हैं।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की संतुलित और दिव्य शारीरिक संरचना का वर्णन करता है।

209. संवृतपार्ष्णिक

ॐ संवृतपार्ष्णिकाय नमः।
अर्थ: जिनकी एड़ियाँ और चरण विशेष रूप से सुडौल हैं।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के दिव्य शारीरिक सौंदर्य का सूक्ष्म वर्णन करता है।

210. पीनजङ्घ

ॐ पीनजङ्घाय नमः।
अर्थ: पुष्ट और मांसल जंघाओं वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की स्थिरता और शारीरिक सामर्थ्य को दर्शाता है।

211. श्लिष्टजानु

ॐ श्लिष्टजानवे नमः।
अर्थ: सुगठित घुटनों वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के संतुलित और दिव्य शरीर का वर्णन करता है।

212. स्थूलोरु

ॐ स्थूलोरवे नमः।
अर्थ: मजबूत और विशाल जंघाओं वाले।
भावार्थ: यह नाम स्थिरता और शक्ति से युक्त गणेशजी के स्वरूप को दर्शाता है।

213. प्रोन्नमत्कटि

ॐ प्रोन्नमत्कटये नमः।
अर्थ: उन्नत और सुडौल कटिभाग वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विशिष्ट दिव्य शारीरिक स्वरूप का वर्णन करता है।

214. निम्ननाभि

ॐ निम्ननाभये नमः।
अर्थ: गहरी नाभि वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की पारंपरिक दिव्य शारीरिक विशेषताओं में से एक का वर्णन करता है।

215. स्थूलकुक्षि

ॐ स्थूलकुक्षये नमः।
अर्थ: विशाल उदर वाले।
भावार्थ: स्थूलकुक्षि नाम गणेशजी के प्रसिद्ध लम्बोदर स्वरूप की विशेषता को और स्पष्ट करता है।

216. पीनवक्षा

ॐ पीनवक्षसे नमः।
अर्थ: पुष्ट और मजबूत वक्षस्थल वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की शक्ति और स्थिरता से युक्त देह का वर्णन करता है।

217. बृहद्भुज

ॐ बृहद्भुजाय नमः।
अर्थ: विशाल भुजाओं वाले।
भावार्थ: उनकी बड़ी भुजाएँ व्यापक सामर्थ्य और संरक्षण की भावना का प्रतीक हैं।

218. पीनस्कन्ध

ॐ पीनस्कन्धाय नमः।
अर्थ: मजबूत और चौड़े कंधों वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की शक्ति, स्थिरता और सामर्थ्य को दर्शाता है।

219. कम्बुकण्ठ

ॐ कम्बुकण्ठाय नमः।
अर्थ: शंख के समान सुडौल कंठ वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के सुंदर और विशिष्ट कंठ की दिव्य विशेषता को दर्शाता है।

220. लम्बोष्ठ

ॐ लम्बोष्ठाय नमः।
अर्थ: लंबे और सुडौल होंठ वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विशिष्ट गजानन स्वरूप का शारीरिक वर्णन करता है।

221. लम्बनासिक

ॐ लम्बनासिकाय नमः।
अर्थ: लंबी नासिका अर्थात् सूँड वाले।
भावार्थ: गणेशजी की लंबी सूँड उनके स्वरूप की सबसे प्रमुख और विशिष्ट पहचान है।

222. भग्नवामरद

ॐ भग्नवामरदाय नमः।
अर्थ: जिनका बायाँ दाँत खंडित है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के एकदंत स्वरूप की विशेषता को स्पष्ट करता है।

223. तुङ्गसव्यदन्त

ॐ तुङ्गसव्यदन्ताय नमः।
अर्थ: जिनका एक दाँत ऊँचा और स्पष्ट है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विशिष्ट दंत-विन्यास और एकदंत रूप का वर्णन करता है।

224. महाहनु

ॐ महाहनवे नमः।
अर्थ: विशाल हनु अर्थात् ठोड़ी वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के गजानन स्वरूप की भव्य शारीरिक विशेषता को दर्शाता है।

225. ह्रस्वनेत्रत्रय

ॐ ह्रस्वनेत्रत्रयाय नमः।
अर्थ: तीन छोटे किंतु दिव्य नेत्रों वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की दिव्य दृष्टि और विशिष्ट त्रिनेत्र स्वरूप का संकेत देता है।

226. शूर्पकर्ण

ॐ शूर्पकर्णाय नमः।
अर्थ: सूप के समान बड़े कान वाले।
भावार्थ: विशाल कान गणेशजी के धैर्यपूर्वक सुनने और ज्ञान ग्रहण करने की प्रतीकात्मक शिक्षा देते हैं।

227. निबिडमस्तक

ॐ निबिडमस्तकाय नमः।
अर्थ: दृढ़ और सुदृढ़ मस्तक वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की स्थिर बुद्धि और मजबूत व्यक्तित्व की ओर संकेत करता है।

228. स्तबकाकारकुम्भाग्र

ॐ स्तबकाकारकुम्भाग्राय नमः।
अर्थ: मस्तक का अग्रभाग पुष्पगुच्छ के समान सुंदर।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के अलौकिक और विशिष्ट शारीरिक सौंदर्य का वर्णन करता है।

229. रत्नमौलि

ॐ रत्नमौलये नमः।
अर्थ: रत्नजड़ित मुकुट धारण करने वाले।
भावार्थ: रत्नमौलि रूप गणेशजी की दिव्य शोभा, ऐश्वर्य और राजसी तेज का प्रतीक है।

230. निरङ्कुश

ॐ निरङ्कुशाय नमः।
अर्थ: पूर्ण स्वतंत्र और किसी बाहरी बंधन से परे।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की परम स्वतंत्र दिव्य सत्ता और असीम शक्ति को दर्शाता है।

231. सर्पहारकटीसूत्र

ॐ सर्पहारकटीसूत्राय नमः।
अर्थ: सर्पाकार हार और कटिसूत्र धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के शक्तिशाली और रहस्यमय अलंकारयुक्त स्वरूप को दर्शाता है।

232. सर्पयज्ञोपवीतवान्

ॐ सर्पयज्ञोपवीतवते नमः।
अर्थ: सर्प को यज्ञोपवीत के रूप में धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विशिष्ट और प्रतीकात्मक आभूषणों से युक्त रूप को प्रकट करता है।

233. सर्पकोटीरकटक

ॐ सर्पकोटीरकटकाय नमः।
अर्थ: सर्प को मुकुट और कंगन के रूप में धारण करने वाले।
भावार्थ: यह स्वरूप गणेशजी की शक्ति, निर्भयता और दिव्य वैभव का प्रतीक है।

234. सर्पग्रैवेयकाङ्गद

ॐ सर्पग्रैवेयकाङ्गदाय नमः।
अर्थ: सर्पाकार हार और बाजूबंद धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के अद्भुत और अलौकिक अलंकरण का वर्णन करता है।

235. सर्पकक्ष्योदराबन्ध

ॐ सर्पकक्ष्योदराबन्धाय नमः।
अर्थ: सर्प को कमर के बंधन के रूप में धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विशेष नागाभूषण और शक्तिशाली स्वरूप का स्मरण कराता है।

236. सर्पराजोत्तरीयक

ॐ सर्पराजोत्तरीयकाय नमः।
अर्थ: नागराज को उत्तरीय के रूप में धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की निर्भयता और नागशक्ति पर उनके आधिपत्य का प्रतीक है।

237. रक्त

ॐ रक्ताय नमः।
अर्थ: लाल आभा वाले।
भावार्थ: लाल वर्ण गणेशजी के तेज, ऊर्जा और मंगलमय शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

238. रक्ताम्बरधर

ॐ रक्ताम्बरधराय नमः।
अर्थ: लाल वस्त्र धारण करने वाले।
भावार्थ: लाल वस्त्रों से सुशोभित गणेशजी का रूप ऊर्जा, उत्साह और शुभता का भाव जगाता है।

239. रक्तमाल्यविभूषण

ॐ रक्तमाल्यविभूषणाय नमः।
अर्थ: लाल पुष्पमाला और लाल आभूषणों से सुसज्जित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के तेजस्वी और मंगलकारी स्वरूप का सुंदर वर्णन करता है।

240. रक्तेक्षण

ॐ रक्तेक्षणाय नमः।
अर्थ: लाल आभा वाले नेत्रों से युक्त।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की प्रचंड ऊर्जा और तेजस्वी दृष्टि का प्रतीक है।

241. रक्तकर

ॐ रक्तकराय नमः।
अर्थ: लाल आभा वाले हाथों से सुशोभित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के तेज और शक्ति से युक्त दिव्य स्वरूप को दर्शाता है।

242. रक्तताल्वोष्ठपल्लव

ॐ रक्तताल्वोष्ठपल्लवाय नमः।
अर्थ: लाल आभा वाले तालु और कोमल होंठों से युक्त।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के मनोहर और दिव्य मुखमंडल का सूक्ष्म वर्णन करता है।

243. श्वेत

ॐ श्वेताय नमः।
अर्थ: श्वेत और निर्मल वर्ण वाले।
भावार्थ: श्वेत रंग शांति, पवित्रता और निर्मल चेतना का प्रतीक माना जाता है।

244. श्वेताम्बरधर

ॐ श्वेताम्बरधराय नमः।
अर्थ: श्वेत वस्त्र धारण करने वाले।
भावार्थ: यह रूप गणेशजी की शांत, पवित्र और सौम्य दिव्य छवि को प्रकट करता है।

245. श्वेतमाल्यविभूषण

ॐ श्वेतमाल्यविभूषणाय नमः।
अर्थ: सफेद पुष्पमाला और आभूषणों से सुशोभित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के शांत और निर्मल स्वरूप का सुंदर चित्र प्रस्तुत करता है।

246. श्वेतातपत्ररुचिर

ॐ श्वेतातपत्ररुचिराय नमः।
अर्थ: श्वेत छत्र से सुशोभित और शोभायमान।
भावार्थ: श्वेत छत्र गणेशजी की राजसी प्रतिष्ठा और दिव्य सम्मान का प्रतीक है।

247. श्वेतचामरवीजित

ॐ श्वेतचामरवीजिताय नमः।
अर्थ: जिनकी श्वेत चँवर से सेवा की जाती है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के पूजनीय और राजसी दिव्य स्वरूप को दर्शाता है।

248. सर्वावयवसम्पूर्णसर्वलक्षणलक्षित

ॐ सर्वावयवसम्पूर्णसर्वलक्षणलक्षिताय नमः।
अर्थ: सभी अंगों और शुभ लक्षणों से पूर्ण।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के आदर्श, मंगलकारी और पूर्ण दिव्य स्वरूप की कल्पना प्रस्तुत करता है।

249. सर्वाभरणशोभाढ्य

ॐ सर्वाभरणशोभाढ्याय नमः।
अर्थ: सभी प्रकार के आभूषणों से सुशोभित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के ऐश्वर्यपूर्ण और दिव्य अलंकारयुक्त स्वरूप को दर्शाता है।

250. सर्वशोभासमन्वित

ॐ सर्वशोभासमन्विताय नमः।
अर्थ: हर प्रकार की दिव्य शोभा से युक्त।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के पूर्ण, सुंदर, तेजस्वी और मंगलमय स्वरूप का स्मरण कराता है।

251. सर्वमङ्गलमाङ्गल्य

ॐ सर्वमङ्गलमाङ्गल्याय नमः।
Om Sarvamangalamangalyaya Namah।
जो समस्त मंगलों के लिये मंगलकारी हैं।

252. सर्वकारणकारण

ॐ सर्वकारणकारणाय नमः।
Om Sarvakaranakaranaya Namah।
जो समस्त कारणों के कारण हैं।

253. सर्वदैककर

ॐ सर्वदैककराय नमः।
Om Sarvadaikakaraya Namah।
जो उदार हस्त वाले हैं।

254. शार्ङ्गी

ॐ शार्ङ्गिणे नमः।
Om Sharngine Namah।
जो शार्ङ्गी धनुष धारण करने वाले हैं।

255. बीजापूरी

ॐ बीजापूरिणे नमः।
Om Bijapurine Namah।
जो हाथ में अनार धारण करने वाले हैं।

256. गदाधर

ॐ गदाधराय नमः।
Om Gadadharaya Namah।
जो गदाधारी हैं।

257. इक्षुचापधर

ॐ इक्षुचापधराय नमः।
Om Ikshuchapadharaya Namah।
जो गन्ने का धनुष धारण करने वाले हैं।

258. शूली

ॐ शूलिने नमः।
Om Shuline Namah।
जो त्रिशूल धारण करने वाले हैं।

259. चक्रपाणि

ॐ चक्रपाणये नमः।
Om Chakrapanaye Namah।
जो हाथ में चक्र धारण करने वाले हैं।

260. सरोजभृत्

ॐ सरोजभृते नमः।
Om Sarojabhrite Namah।
जो हाथ में कमल पुष्प धारण करने वाले हैं।

261. पाशी

ॐ पाशिने नमः।
Om Pashine Namah।
जो हाथ में पाश धारण करने वाले हैं।

262. धृतोत्पल

ॐ धृतोत्पलाय नमः।
Om Dhritotpalaya Namah।
जो हाथ में उत्पल अर्थात् नील कमल पुष्प धारण करने वाले हैं।

263. शालीमञ्जरीभृत्

ॐ शालीमञ्जरीभृते नमः।
Om Shalimanjaribhrite Namah।
जो हाथ में धान की बाली धारण करने वाले हैं।

264. स्वदन्तभृत्

ॐ स्वदन्तभृते नमः।
Om Svadantabhrite Namah।
जो हाथ में स्वयं का खण्डित दाँत धारण करने वाले हैं।

265. कल्पवल्लीधर

ॐ कल्पवल्लीधराय नमः।
Om Kalpavallidharaya Namah।
जो हाथ में कल्पलता रखने वाले हैं।

266. विश्वाभयदैककर

ॐ विश्वाभयदैककराय नमः।
Om Vishvabhayadaikakaraya Namah।
जो सम्पूर्ण विश्व में भक्तों का भय नष्ट करने वाले हैं।

267. वशी

ॐ वशिने नमः।
Om Vashine Namah।
जो सम्पूर्ण विश्व को वश में रखने वाले हैं।

268. अक्षमालाधर

ॐ अक्षमालाधराय नमः।
Om Akshamaladharaya Namah।
जो अक्षमाला धारण करने वाले हैं।

269. ज्ञानमुद्रावान्

ॐ ज्ञानमुद्रावते नमः।
Om Jnanamudravate Namah।
जो ज्ञान के सूचक हैं।

270. मुद्गरायुध

ॐ मुद्गरायुधाय नमः।
Om Mudgarayudhaya Namah।
जो मुद्गर को शस्त्र के रूप में धारण करने वाले हैं।

271. पूर्णपात्री

ॐ पूर्णपात्रिणे नमः।
Om Purnapatrine Namah।
जो अमृत से भरे पात्र को धारण करने वाले हैं।

272. कम्बुधर

ॐ कम्बुधराय नमः।
Om Kambudharaya Namah।
जो शंख धारण करने वाले हैं।

273. विधृतालिसमुद्गक

ॐ विधृतालिसमुद्गकाय नमः।
Om Vidhritalisamudgakaya Namah।
जो जिनके गालों पर बहता शहद भ्रमरों को आकर्षित कर रहा है।

274. मातुलिङ्गधर

ॐ मातुलिङ्गधराय नमः।
Om Matulingadharaya Namah।
जिनके हाथ में मातुलिङ्ग फल अर्थात् बिजौरा नींबू है।

275. चूतकलिकाभृत्

ॐ चूतकलिकाभृते नमः।
Om Chutakalikabhrite Namah।
जो आम के पल्लव धारण करने वाले हैं।

276. कुठारवान्

ॐ कुठारवते नमः।
Om Kutharavate Namah।
जो कुठार धारण करने वाले हैं।

277. पुष्करस्थस्वर्णघटीपूर्णरत्नाभिवर्षक

ॐ पुष्करस्थस्वर्णघटीपूर्णरत्नाभिवर्षकाय नमः।
Om Pushkarasthasvarnaghatipurnaratnabhivarshakaya Namah।
जिनके हाथ में रत्नों के स्वर्ण पात्र हैं।

278. भारतीसुन्दरीनाथ

ॐ भारतीसुन्दरीनाथाय नमः।
Om Bharatisundarinathaya Namah।
जो देवी सरस्वती, गौरी एवं लक्ष्मी के साथ विराजमान हैं।

279. विनायकरतिप्रिय

ॐ विनायकरतिप्रियाय नमः।
Om Vinayakaratipriyaya Namah।
जो अपने गणों के साथ खेलने में रुचि रखने वाले हैं।

280. महालक्ष्मीप्रियतम

ॐ महालक्ष्मीप्रियतमाय नमः।
Om Mahalakshmipriyatamaya Namah।
जो महालक्ष्मी के प्रिय हैं।

281. सिद्धलक्ष्मीमनोरम

ॐ सिद्धलक्ष्मीमनोरमाय नमः।
Om Siddhalakshmimanoramaya Namah।
जो सिद्धलक्ष्मी को मोहित करने वाले हैं।

282. रमारमेशपूर्वाङ्ग

ॐ रमारमेशपूर्वाङ्गाय नमः।
Om Ramarameshapurvangaya Namah।
जिनके सम्मुख श्री लक्ष्मी तथा विष्णु जी विराजमान हैं।

283. दक्षिणोमामहेश्वर

ॐ दक्षिणोमामहेश्वराय नमः।
Om Dakshinomamaheshvaraya Namah।
जो देवी उमा और महेश्वर को अपने दक्षिणभाग में स्थापित करने वाले हैं।

284. महीवराहवामाङ्ग

ॐ महीवराहवामाङ्गाय नमः।
Om Mahivarahavamangaya Namah।
जो श्री भूमिदेवी एवं वराह देव को अपने बाएँ भाग या उत्तर दिशा में रखने वाले हैं।

285. रतिकन्दर्पपश्चिम

ॐ रतिकन्दर्पपश्चिमाय नमः।
Om Ratikandarpapashchimaya Namah।
जो रति और कामदेव को अपने पीछे या पश्चिम दिशा में रखने वाले हैं।

286. आमोदप्रमोदजनन

ॐ आमोदप्रमोदजननाय नमः।
Om Amodamodajananaya Namah।
जो आमोद अर्थात् हर्ष को भी हर्ष देने वाले हैं।

287. सप्रमोदप्रमोदन

ॐ सप्रमोदप्रमोदनाय नमः।
Om Sapramodapramodanaya Namah।
जो प्रमोद अर्थात् सुख को भी सुख देने वाले हैं।

288. समेधितसमृद्धिश्री

ॐ समेधितसमृद्धिश्रिये नमः।
Om Samedhitasamriddhishriye Namah।
जो देवी समृद्धि को समृद्धि प्रदान करने वाले हैं।

289. ऋद्धिसिद्धिप्रवर्तक

ॐ ऋद्धिसिद्धिप्रवर्तकाय नमः।
Om Riddhisiddhipravartakaya Namah।
जो ऋद्धि देवी में स्थित सिद्धि के प्रवर्तक हैं।

290. दत्तसौमुख्यसुमुख

ॐ दत्तसौमुख्यसुमुखाय नमः।
Om Dattasaumukhyasumukhaya Namah।
जो सुमुख को सुमुखता प्रदान करने वाले हैं।

291. कान्तिकन्दलिताश्रय

ॐ कान्तिकन्दलिताश्रयाय नमः।
Om Kantikandalitashrayaya Namah।
जो कान्ति देवी के आश्रय स्थान को अंकुरित करने वाले हैं।

292. मदनावत्याश्रिताङ्घ्रि

ॐ मदनावत्याश्रिताङ्घ्रये नमः।
Om Madanavatyashritanghraye Namah।
जो मदनावती देवी द्वारा पूजे जाने वाले हैं।

293. कृत्तदौर्मुख्यदुर्मुख

ॐ कृत्तदौर्मुख्यदुर्मुखाय नमः।
Om Krittadaurmukhyadurmukhaya Namah।
जो दुर्मुख की दुर्मुखता को काट फेंकने वाले हैं।

294. विघ्नसम्पल्लवोपघ्न

ॐ विघ्न-सम्पल्लवोपघ्नाय नमः।
Om Vighna-sampallavopaghnaya Namah।
जो विघ्नों के निवारक हैं।

295. सेवोन्निद्रमदद्रव

ॐ सेवोन्निद्र-मदद्रवाय नमः।
Om Sevonnidra-madadravaya Namah।
जो देवी मदद्रवा द्वारा पूजे जाने वाले हैं।

296. विघ्नकृन्निघ्नचरण

ॐ विघ्नकृन्निघ्नचरणाय नमः।
Om Vighnakrinnighnacharanaya Namah।
विघ्नकृत भक्तिभाव से जिनके चरणों को अपने अधीन करके रखा है।

297. द्राविणीशक्तिसत्कृत

ॐ द्राविणीशक्तिसत्कृताय नमः।
Om Dravinishaktisatkritaya Namah।
जो द्राविणी नामक शक्ति द्वारा सम्मानित हैं।

298. तीव्राप्रसन्ननयन

ॐ तीव्राप्रसन्ननयनाय नमः।
Om Tivraprasannanayanaya Namah।
जो तीव्रा नामक शक्ति के प्रति अत्यन्त प्रसन्न रहते हैं।

299. ज्वालिनीपालितैकदृक्

ॐ ज्वालिनीपालितैकदृशे नमः।
Om Jvalinipalitaikadrishe Namah।
जिनकी मुख्य दृष्टि ज्वालिनी-शक्ति के संरक्षण में संलग्न है।

300. मोहिनीमोहन

ॐ मोहिनीमोहनाय नमः।
Om Mohinimohanaya Namah।
जो मोहिनी शक्ति को भी मोहित करने वाले हैं।

301. भोगदायिनीकान्तिमण्डित

ॐ भोगदायिनीकान्तिमण्डिताय नमः।
Om Bhogadayinikantimanditaya Namah।
जो भोगदायिनी शक्ति की कान्ति से मण्डित चरणपादुका वाले हैं।

302. कामिनीकान्तवक्त्रश्री

ॐ कामिनीकान्तवक्त्रश्रिये नमः।
Om Kaminikantavaktrashriye Namah।
जो कामदायिनी नामक शक्ति के मुख की शोभा को बढ़ाने वाले हैं।

303. अधिष्ठितवसुन्धर

ॐ अधिष्ठितवसुन्धराय नमः।
Om Adhishthitavasundharaya Namah।
जो देवी वसुन्धरा के आधार हैं।

304. वसुन्धरामदोन्नद्धमहाशङ्खनिधिप्रभु

ॐ वसुन्धरामदोन्नद्धमहाशङ्खनिधिप्रभवे नमः।
Om Vasundharamadonnaddhamahashankhanidhiprabhave Namah।
जो पत्नी वसुन्धरा के साथ प्रसन्न रहने वाले महाशंख निधि के स्वामी हैं।

305. नमद्वसुमतीमौलिमहापद्मनिधिप्रभु

ॐ नमद्वसुमतीमौलिमहापद्मनिधिप्रभवे नमः।
Om Namadvasumatimaulimahapadmanidhiprabhave Namah।
जो वसुमती एवं महापद्म द्वारा पूजनीय हैं।

306. सर्वसद्गुरुसंसेव्य

ॐ सर्वसद्गुरुसंसेव्याय नमः।
Om Sarvasadgurusamsevyaya Namah।
जो समस्त गुरुओं द्वारा पूजे जाने वाले हैं।

307. शोचिष्केशहृदाश्रय

ॐ शोचिष्केशहृदाश्रयाय नमः।
Om Shochishkeshahridashrayaya Namah।
जो गार्हपत्य आदि पाँच अग्नियों के हृदय में ध्येयरूप से विराजमान हैं।

308. ईशानमूर्द्धा

ॐ ईशानमूर्ध्ने नमः।
Om Ishanamurdhne Namah।
जो भगवान शंकर के माननीय हैं।

309. देवेन्द्रशिखा

ॐ देवेन्द्रशिखायै नमः।
Om Devendrashikhayai Namah।
जो देवराज इन्द्र के आराध्य हैं।

310. पवननन्दन

ॐ पवननन्दनाय नमः।
Om Pavananandanaya Namah।
जो वायु को आनन्दित करने वाले हैं।

311. अग्रप्रत्यग्रनयन

ॐ अग्रप्रत्यग्रनयनाय नमः।
Om Agrapratyagranayanaya Namah।
जो सूक्ष्म एवं नूतन दृष्टि वाले हैं।

312. दिव्यास्त्रप्रयोगवित्

ॐ दिव्यास्त्राणां प्रयोगविदे नमः।
Om Divyastranam Prayogavide Namah।
जो दिव्य अस्त्रों के प्रयोग को जानने वाले हैं।

313. ऐरावतादिसर्वाशावारणावरणप्रिय

ॐ ऐरावतादिसर्वाशावारणावरणप्रियाय नमः।
Om Airavatadisarvashavaranavaranapriyaya Namah।
जिन्हें खेल-खेल में ऐरावत आदि हाथियों को ढँक लेना प्रिय लगता है।

314. वज्राद्यस्त्रपरिवार

ॐ वज्राद्यस्त्रपरिवाराय नमः।
Om Vajradyastraparivaraya Namah।
जो वज्र आदि अस्त्रों तथा इन्द्र आदि दिक्पालों से आवृत हैं।

315. गणचण्डसमाश्रय

ॐ गणचण्डसमाश्रयाय नमः।
Om Ganachandasamashrayaya Namah।
जो चण्ड आदि गणों को बल प्रदान करने वाले हैं।

316. जयाजयापरीवार

ॐ जयाजयापरीवाराय नमः।
Om Jayajayaparivaraya Namah।
जो जया और अजया नामक पीठशक्तियों से घिरे हुए हैं।

317. विजयाविजयावह

ॐ विजयाविजयावहाय नमः।
Om Vijayavijayavahaya Namah।
जो विजया नामक पीठशक्ति को विजय प्रदान करने वाले हैं।

318. अजितार्चितपादाब्ज

ॐ अजितार्चितपादाब्जाय नमः।
Om Ajitarchitapadabjaya Namah।
जिनके चरण कमल अपराजिता शक्ति द्वारा पूजे जाते हैं।

319. नित्यानित्यावतंसित

ॐ नित्यानित्यावतंसिताय नमः।
Om Nityanityavatamsitaya Namah।
नित्या नाम की शक्ति नित्य जिनके चरणकमलों की सेवा में उपस्थित है।

320. विलासिनीकृतोल्लास

ॐ विलासिनीकृतोल्लासाय नमः।
Om Vilasinikritollasaya Namah।
जो विलासिनी की सेवा से प्रसन्न होने वाले हैं।

321. शौण्डीसौन्दर्यमण्डित

ॐ शौण्डीसौन्दर्यमण्डिताय नमः।
Om Shaundisaundaryamanditaya Namah।
जो शौण्डी शक्ति के सौन्दर्य में वृद्धि करने वाले हैं।

322. अनन्तानन्तसुखद

ॐ अनन्तानन्तसुखदाय नमः।
Om Anantanantasukhadaya Namah।
जो अनन्ता नामक शक्ति को अनन्त सुख प्रदान करने वाले हैं।

323. सुमङ्गलसुमङ्गल

ॐ सुमङ्गलसुमङ्गलाय नमः।
Om Sumangalasumangalaya Namah।
जिनके कारण सुमंगल नामक पीठ भी मंगलयुक्त हो जाता है।

324. इच्छाशक्तिज्ञानशक्तिक्रियाशक्तिनिषेवित

ॐ इच्छाशक्तिज्ञानशक्तिक्रियाशक्तिनिषेविताय नमः।
Om Ichchhashaktijnanashaktikriyashaktinishevitaya Namah।
जो इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति एवं क्रियाशक्ति द्वारा सेवित हैं।

325. सुभगासंश्रितपद

ॐ सुभगासंश्रितपदाय नमः।
Om Subhagasamshritapadaya Namah।
जो सुभगा देवी के द्वारा सेवित चरणकमल वाले हैं।

326. ललिताललिताश्रय

ॐ ललिताललिताश्रयाय नमः।
Om Lalitalalitashrayaya Namah।
जो ललिता देवी के मनोरम आश्रय हैं।

327. कामिनीकामन

ॐ कामिनीकामनाय नमः।
Om Kaminikamanaya Namah।
जो कामकला नामक शक्ति की कामना रखने वाले हैं।

328. काममालिनीकेलिलालित

ॐ काममालिनीकेलिलालिताय नमः।
Om Kamamalinikelilalitaya Namah।
जो काममालिनी नामक शक्ति की क्रीडाओं द्वारा प्रसन्न किये गये हैं।

329. सरस्वत्याश्रय

ॐ सरस्वत्याश्रयाय नमः।
Om Sarasvatyashrayaya Namah।
जो देवी सरस्वती के आश्रय हैं।

330. गौरीनन्दन

ॐ गौरीनन्दनाय नमः।
Om Gaurinandanaya Namah।
जो माता पार्वती को आनन्द प्रदान करने वाले हैं।

331. श्रीनिकेतन

ॐ श्रीनिकेतनाय नमः।
Om Shriniketanaya Namah।
जो देवी लक्ष्मी के निवासस्थान हैं।

332. गुरुगुप्तपद

ॐ गुरुगुप्तपदाय नमः।
Om Guruguptapadaya Namah।
जिनके चरण गुरुओं द्वारा आलिङ्गन के कारण ढँके हुए हैं।

333. वाचासिद्ध

ॐ वाचासिद्धाय नमः।
Om Vachasiddhaya Namah।
जिनकी भक्ति से वाक्-सिद्धि प्राप्त होती है।

334. वागीश्वरीपति

ॐ वागीश्वरीपतये नमः।
Om Vagishvaripataye Namah।
जो वागीश्वरी अर्थात् नकुली नामक शक्ति के प्रियतम हैं।

335. नलिनीकामुक

ॐ नलिनीकामुकाय नमः।
Om Nalinikamukaya Namah।
जो नलिनी अर्थात् सुरापगा नामक शक्ति के प्रियतम हैं।

336. वामाराम

ॐ वामारामाय नमः।
Om Vamaramaya Namah।
वामा नामक शक्ति जिनकी प्रिया हैं।

337. ज्येष्ठामनोरम

ॐ ज्येष्ठामनोरमाय नमः।
Om Jyeshthamanoramaya Namah।
ज्येष्ठा नामक शक्ति जिनकी मनोरमा हैं।

338. रौद्रीमुद्रितपादाब्ज

ॐ रौद्रीमुद्रितपादाब्जाय नमः।
Om Raudrimudritapadabjaya Namah।
रौद्री नामक शक्ति जिनके चरणों को अपनी अंजलि में बाँधे रखती हैं।

339. हुंबीज

ॐ हुंबीजाय नमः।
Om Humbijaya Namah।
हुम् जिनका बीज मन्त्र है।

340. तुङ्गशक्तिक

ॐ तुङ्गशक्तिकाय नमः।
Om Tungashaktikaya Namah।
जो अनन्त शक्ति वाले हैं।

341. विश्वादिजननत्राण

ॐ विश्वादिजननत्राणाय नमः।
Om Vishvadijananatranaya Namah।
जो विश्व के आदिभूत हिरण्यगर्भ के जन्म और पालन के कारण हैं।

342. स्वाहाशक्ति

ॐ स्वाहाशक्तये नमः।
Om Svahashaktaye Namah।
साक्षात् स्वाहा जिनकी शक्ति हैं।

343. सकीलक

ॐ सकीलकाय नमः।
Om Sakilakaya Namah।
जो कीलक से युक्त हैं।

344. अमृताब्धिकृतावास

ॐ अमृताब्धिकृतावासाय नमः।
Om Amritabdhikritavasaya Namah।
जो अमृत के सागर में निवास करने वाले हैं।

345. मदघूर्णितलोचन

ॐ मदघूर्णितलोचनाय नमः।
Om Madaghurnitalochanaya Namah।
जो सजल नेत्रों वाले हैं।

346. उच्छिष्टगण

ॐ उच्छिष्टगणाय नमः।
Om Uchchhishtaganaya Namah।
जो उत्कृष्ट और शिष्ट गणों के स्वामी हैं।

347. उच्छिष्टगणेश

ॐ उच्छिष्टगणेशाय नमः।
Om Uchchhishtaganeshaya Namah।
जो सतत मोदक-भक्षण करने वाले हैं।

348. गणनायक

ॐ गणनायकाय नमः।
Om Gananayakaya Namah।
जिनके गणों की गणना भक्तों द्वारा होती रहती है।

349. सार्वकालिकसंसिद्धि

ॐ सार्वकालिकसंसिद्धये नमः।
Om Sarvakalikasamsiddhaye Namah।
जो सर्वदा सिद्धियों से युक्त रहते हैं।

350. नित्यशैव

ॐ नित्यशैवाय नमः।
Om Nityashaivaya Namah।
जो निरन्तर शिव का ध्यान करने वाले हैं।

351. दिगम्बर

ॐ दिगम्बराय नमः।
Om Digambaraya Namah।
जो समस्त दिशाओं को वस्त्र के रूप में धारण करने वाले हैं।

352. अनपाय

ॐ अनपायाय नमः।
Om Anapayaya Namah।
जो अनन्त-अविनाशी हैं।

353. अनन्तदृष्टि

ॐ अनन्तदृष्टये नमः।
Om Anantadrishtaye Namah।
जो असीम ज्ञानशक्ति से सम्पन्न हैं।

354. अप्रमेय

ॐ अप्रमेयाय नमः।
Om Aprameyaya Namah।
जो वाणी, मन एवं ज्ञानेन्द्रियों से अगम्य होने के कारण प्रमाणातीत हैं।

355. अजरामर

ॐ अजरामराय नमः।
Om Ajaramaraya Namah।
जो जरा और मृत्यु से रहित हैं।

356. अनाविल

ॐ अनाविलाय नमः।
Om Anavilaya Namah।
जो अत्यन्त शुद्ध हैं।

357. अप्रतिरथ

ॐ अप्रतिरथाय नमः।
Om Apratirathaya Namah।
जो अतुलनीय हैं।

358. अच्युत

ॐ अच्युताय नमः।
Om Achyutaya Namah।
जो मर्यादा से कभी च्युत अर्थात् विचलित न होने वाले हैं।

359. अमृत

ॐ अमृताय नमः।
Om Amritaya Namah।
जो अमृत के समान हैं।

360. अक्षर

ॐ अक्षराय नमः।
Om Aksharaya Namah।
जो सर्वव्यापी हैं।

361. अप्रतर्क्य

ॐ अप्रतर्क्याय नमः।
Om Apratarkyaya Namah।
जिन्हें शब्दों से परिभाषित न किया जा सके।

362. अक्षय

ॐ अक्षयाय नमः।
Om Akshayaya Namah।
जो अजर-अमर हैं।

363. अजय्य

ॐ अजय्याय नमः।
Om Ajayyaya Namah।
जो अजेय हैं।

364. अनाधार

ॐ अनाधाराय नमः।
Om Anadharaya Namah।
जिन्हें किसी आधार की आवश्यकता नहीं है।

365. अनामय

ॐ अनामयाय नमः।
Om Anamayaya Namah।
जो समस्त रोगों से मुक्त हैं।

366. अमल

ॐ अमलाय नमः।
Om Amalaya Namah।
जो मलिनता से रहित हैं।

367. अमोघसिद्धि

ॐ अमोघसिद्धये नमः।
Om Amoghasiddhaye Namah।
जो अचूक सिद्धि वाले हैं।

368. अद्वैत

ॐ अद्वैताय नमः।
Om Advaitaya Namah।
जो स्वयं अद्वैत हैं।

369. अघोर

ॐ अघोराय नमः।
Om Aghoraya Namah।
जो शिव-स्वरूप हैं।

370. अप्रमितानन

ॐ अप्रमिताननाय नमः।
Om Apramitananaya Namah।
जो अनन्त मुख वाले हैं।

371. अनाकार

ॐ अनाकाराय नमः।
Om Anakaraya Namah।
जो आकार रहित अर्थात् निराकार ब्रह्म हैं।

372. अब्धिभूम्यग्निबलघ्न

ॐ अब्धिभूम्यग्निबलघ्नाय नमः।
Om Abdhibhumyagnibalaghnaya Namah।
जो पृथ्वी, समुद्र एवं अग्नि की शक्ति को नष्ट करने वाले हैं।

373. अव्यक्तलक्षण

ॐ अव्यक्तलक्षणाय नमः।
Om Avyaktalakshanaya Namah।
जो सामान्य मानव की बुद्धि द्वारा अभिव्यक्त नहीं हो सकते।

374. आधारपीठ

ॐ आधारपीठाय नमः।
Om Adharapithaya Namah।
जो पृथ्वी से लेकर शिवपर्यन्त छत्तीस आधारभूत तत्त्वों के भी आश्रय हैं।

375. आधार

ॐ आधाराय नमः।
Om Adharaya Namah।
जो विष्णु तथा ब्रह्मा को भी धारण करने वाले हैं।

376. आधाराधेयवर्जित

ॐ आधाराधेयवर्जिताय नमः।
Om Adharadheyavarjitaya Namah।
जो अद्वैत स्वरूप हैं।

377. आखुकेतन

ॐ आखुकेतनाय नमः।
Om Akhuketanaya Namah।
जिनके ध्वज पर मूषक का चिन्ह अंकित है।

378. आशापूरक

ॐ आशापूरकाय नमः।
Om Ashapurakaya Namah।
जो सबकी आशा पूर्ण करने वाले हैं।

379. आखुमहारथ

ॐ आखुमहारथाय नमः।
Om Akhumaharathaya Namah।
जो मूषकरूपी महान् रथ अर्थात् वाहन से युक्त हैं।

380. इक्षुसागरमध्यस्थ

ॐ इक्षुसागरमध्यस्थाय नमः।
Om Ikshusagaramadhyasthaya Namah।
जो गन्ने के रस के सागर के मध्य विराजमान हैं।

381. इक्षुभक्षणलालस

ॐ इक्षुभक्षणलालसाय नमः।
Om Ikshubhakshanalalasaya Namah।
जिन्हें गन्ने का सेवन करना अत्यन्त प्रिय है।

382. इक्षुचापातिरेकश्री

ॐ इक्षुचापातिरेकश्रिये नमः।
Om Ikshuchapatirekashriye Namah।
जो मन्मथ अर्थात् कामदेव से भी अधिक सुन्दर हैं।

383. इक्षुचापनिषेवित

ॐ इक्षुचापनिषेविताय नमः।
Om Ikshuchapanishevitaya Namah।
कामदेव जिनकी पूजा करते हैं।

384. इन्द्रगोपसमानश्री

ॐ इन्द्रगोपसमानश्रिये नमः।
Om Indragopasamanashriye Namah।
जो इन्द्रगोप नामक कीट के समान वर्ण वाले हैं।

385. इन्द्रनीलसमद्युति

ॐ इन्द्रनीलसमद्युतये नमः।
Om Indranilasamadyutaye Namah।
जो नीलमणि के समान श्याम कान्ति वाले हैं।

386. इन्दीवरदलश्याम

ॐ इन्दीवरदलश्यामाय नमः।
Om Indivaradalashyamaya Namah।
जो नीलकमल के समान श्याम वर्ण वाले हैं।

387. इन्दुमण्डलनिर्मल

ॐ इन्दुमण्डलनिर्मलाय नमः।
Om Indumandalanirmalaya Namah।
जो चन्द्रमा के समान गौर कान्ति वाले हैं।

388. इध्मप्रिय

ॐ इध्मप्रियाय नमः।
Om Idhmapriyaya Namah।
जिनको हवन की समिधा प्रिय है।

389. इडाभाग

ॐ इडाभागाय नमः।
Om Idabhagaya Namah।
जो ऋत्विक्, यजमान आदि रूप में यज्ञ में भाग लेने वाले हैं।

390. इराधाम

ॐ इराधाम्ने नमः।
Om Iradhamne Namah।
जिनके धाम में पृथ्वी निवास करती हैं।

391. इन्दिराप्रिय

ॐ इन्दिराप्रियाय नमः।
Om Indirapriyaya Namah।
जो देवी लक्ष्मी को प्रिय हैं।

392. इक्ष्वाकुविघ्नविध्वंसी

ॐ इक्ष्वाकुविघ्नविध्वंसिने नमः।
Om Ikshvakuvighnavidhvamsine Namah।
जो राजा इक्ष्वाकु के विघ्न का नाश करने वाले हैं।

393. इतिकर्तव्यतेप्सित

ॐ इतिकर्तव्यतेप्सिताय नमः।
Om Itikartavyatepsitaya Namah।
जो यजमान की मनोवांछा पूर्ण करने वाले हैं।

394. ईशानमौलि

ॐ ईशानमौलये नमः।
Om Ishanamaulaye Namah।
जो देवों के देव हैं।

395. ईशान

ॐ ईशानाय नमः।
Om Ishanaya Namah।
जो देवों में सर्वश्रेष्ठ हैं।

396. ईशानसुत

ॐ ईशानसुताय नमः।
Om Ishanasutaya Namah।
जो भगवान शङ्कर के पुत्र हैं।

397. ईतिघ्न

ॐ ईतिघ्ने नमः।
Om Itighne Namah।
जो फसल की समस्त प्रकार के रोगों एवं विपदाओं से रक्षा करने वाले हैं।

398. ईषणात्रयकल्पान्त

ॐ ईषणात्रयकल्पान्ताय नमः।
Om Ishanatrayakalpantaya Namah।
जो भौतिक कामनाओं के प्रति वैराग्य उत्पन्न करने वाले हैं।

399. ईहामात्रविवर्जित

ॐ ईहामात्रविवर्जिताय नमः।
Om Ihamatravivarjitaya Namah।
जो समस्त इच्छाओं से रहित हैं।

400. उपेन्द्र

ॐ उपेन्द्राय नमः।
Om Upendraya Namah।
जो कश्यप-अदिति के यहाँ बालक के रूप में अवतरित होने वाले हैं।

401. उडुभृन्मौलि

ॐ उडुभृन्मौलये नमः।
Om Udubhrinmaulaye Namah।
जो अपने मस्तक पर चन्द्रमा धारण करने वाले हैं।

402. उण्डेरकबलिप्रिय

ॐ उण्डेरकबलिप्रियाय नमः।
Om Underakabalipriyaya Namah।
जिन्हें गोल-गोल मिष्टान्न प्रिय हैं।

403. उन्नतानन

ॐ उन्नताननाय नमः।
Om Unnatananaya Namah।
जो ब्रह्मा आदि उत्कृष्ट देवों में चेतना जगाने वाले हैं।

404. उत्तुङ्ग

ॐ उत्तुङ्गाय नमः।
Om Uttungaya Namah।
जो अत्यन्त विशाल देह वाले हैं।

405. उदारत्रिदशाग्रणी

ॐ उदारत्रिदशाग्रण्ये नमः।
Om Udaratridashagranye Namah।
जो उदार देवताओं में सर्वश्रेष्ठ हैं।

406. ऊर्जस्वान्

ॐ ऊर्जस्वते नमः।
Om Urjasvate Namah।
जो असीमित ऊर्जा वाले हैं।

407. ऊष्मलमद

ॐ ऊष्मलमदाय नमः।
Om Ushmalamadaya Namah।
जिनकी देह से गरम मद प्रवाहित होता है।

408. ऊहापोहदुरासद

ॐ ऊहापोहदुरासदाय नमः।
Om Uhapohadurasadaya Namah।
जो समस्त तर्क-वितर्क से परे हैं।

409. ऋग्यजुस्सामसम्भूति

ॐ ऋग्यजुस्सामसम्भूतये नमः।
Om Rigyajussamasambhutaye Namah।
जो ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद को प्रकट करने वाले हैं।

410. ऋद्धिसिद्धिप्रवर्तक

ॐ ऋद्धिसिद्धिप्रवर्तकाय नमः।
Om Riddhisiddhipravartakaya Namah।
जो राज्य-सम्पत्ति तथा अणिमा आदि सिद्धियों को प्रदान करने वाले हैं।

411. ऋजुचित्तैकसुलभ

ॐ ऋजुचित्तैकसुलभाय नमः।
Om Rijuchittaikasulabhaya Namah।
जो सद्गुणी भक्तों को सरलता से प्राप्त होने वाले हैं।

412. ऋणत्रयविमोचक

ॐ ऋणत्रयविमोचकाय नमः।
Om Rinatrayavimochakaya Namah।
जो देव ऋण, ऋषि ऋण तथा पितृ ऋण से मुक्त करने वाले हैं।

413. स्वभक्तलुप्तविघ्न

ॐ स्वभक्तानां लुप्तविघ्नाय नमः।
Om Svabhaktanam Luptavighnaya Namah।
जो अपने भक्तों के समस्त कष्टों का नाश करने वाले हैं।

414. सुरद्विषांलुप्तशक्ति

ॐ सुरद्विषां-लुप्तशक्तये नमः।
Om Suradvisham-luptashaktaye Namah।
जो दैत्यों की शक्ति नष्ट करने वाले हैं।

415. विमुखार्चनलुप्तश्री

ॐ विमुखार्चानां लुप्तश्रिये नमः।
Om Vimukharchanam Luptashriye Namah।
जो अधर्मियों की समृद्धि नष्ट करने वाले हैं।

416. लूताविस्फोटनाशन

ॐ लूताविस्फोटनाशनाय नमः।
Om Lutavisphotanashanaya Namah।
जो विभिन्न रोगों का नाश करने वाले हैं।

417. एकारपीठमध्यस्थ

ॐ एकारपीठमध्यस्थाय नमः।
Om Ekarapithamadhyasthaya Namah।
जो त्रिकोणचक्र के मध्य में विराजमान हैं।

418. एकपादकृतासन

ॐ एकपादकृतासनाय नमः।
Om Ekapadakritasanaya Namah।
जो एक पैर पर खड़े रहने वाले हैं।

419. एजिताखिलदैत्यश्री

ॐ एजिताखिलदैत्यश्रिये नमः।
Om Ejitakhiladaityashriye Namah।
जो दैत्यों की समृद्धि नष्ट करने वाले हैं।

420. एधिताखिलसंश्रय

ॐ एधिताखिलसंश्रयाय नमः।
Om Edhitakhilasamshrayaya Namah।
जो भक्तों के वैभव में वृद्धि करने वाले हैं।

421. ऐश्वर्यनिधि

ॐ ऐश्वर्यनिधये नमः।
Om Aishvaryanidhaye Namah।
जो समस्त ऐश्वर्य के स्वामी हैं।

422. ऐश्वर्य

ॐ ऐश्वर्याय नमः।
Om Aishvaryaya Namah।
जो स्वयं ऐश्वर्य स्वरूप हैं।

423. ऐहिकामुष्मिकप्रद

ॐ ऐहिकामुष्मिकप्रदाय नमः।
Om Aihikamushmikapradaya Namah।
जो लौकिक और पारलौकिक सुख देने वाले हैं।

424. ऐरम्मदसमोन्मेष

ॐ ऐरम्मदसमोन्मेषाय नमः।
Om Airammadasamonmeshaya Namah।
जो विद्युत के समान तेज वाले हैं।

425. ऐरावतनिभानन

ॐ ऐरावतनिभाननाय नमः।
Om Airavatanibhananaya Namah।
जिनका मुख ऐरावत हाथी के समान है।

426. ओङ्कारवाच्य

ॐ ओङ्कारवाच्याय नमः।
Om Onkaravachyaya Namah।
जो ‘ॐ’ मन्त्र के सार हैं।

427. ओङ्कार

ॐ ओङ्काराय नमः।
Om Onkaraya Namah।
जो स्वयं ॐ स्वरूप हैं।

428. ओजस्वान्

ॐ ओजस्वते नमः।
Om Ojasvate Namah।
जो अतुलनीय तेज वाले हैं।

429. ओषधीपति

ॐ ओषधीपतये नमः।
Om Oshadhipataye Namah।
जो औषधियों के अधिपति चन्द्रमा स्वरूप हैं।

430. औदार्यनिधि

ॐ औदार्यनिधये नमः।
Om Audaryanidhaye Namah।
जो भक्तों के प्रति अत्यन्त उदार हैं।

431. औद्धत्यधुर्य

ॐ औद्धत्यधुर्याय नमः।
Om Auddhatyadhuryaya Namah।
जो अपने भक्तों पर कृपा हेतु अत्यन्त उत्कर्षित होते हैं।

432. औन्नत्यनिस्स्वन

ॐ औन्नत्यनिस्स्वनाय नमः।
Om Aunnatyanissvanaya Namah।
जो सबकी अपेक्षा उच्चस्वर से गर्जना करने वाले हैं।

433. सुरनागानामङ्कुश

ॐ सुरनागानामङ्कुशाय नमः।
Om Suranaganamankushaya Namah।
जो तीनों लोकों को नियन्त्रित करने वाले हैं।

434. सुरविद्विषामङ्कुश

ॐ सुरविद्विषामङ्कुशाय नमः।
Om Suravidvishamankushaya Namah।
जो देवताओं और विद्वानों के द्वेषियों को दण्डित करने वाले हैं।

435. अःसमस्तविसर्गान्तपदेषुपरिकीर्तित

ॐ अःसमस्तविसर्गान्तपदेषुपरिकीर्तिताय नमः।
Om Ahsamastavisargantapadeshuparikirtitaya Namah।
सम्पूर्ण वर्णमाला जिनकी स्तुति करती है।

436. कमण्डलुधर

ॐ कमण्डलुधराय नमः।
Om Kamandaludharaya Namah।
जो कमण्डलु धारण करने वाले हैं।

437. कल्प

ॐ कल्पाय नमः।
Om Kalpaya Namah।
जो स्वयं प्रलयस्वरूप हैं।

438. कपर्दी

ॐ कपर्दिने नमः।
Om Kapardine Namah।
जो जटाजूट धारण करने वाले हैं।

439. कलभानन

ॐ कलभाननाय नमः।
Om Kalabhananaya Namah।
जो गजमुख अथवा हाथी के समान मुख वाले हैं।

440. कर्मसाक्षी

ॐ कर्मसाक्षिणे नमः।
Om Karmasakshine Namah।
जो अदृष्ट कर्मों के भी साक्षी हैं।

441. कर्मकर्ता

ॐ कर्मकर्त्रे नमः।
Om Karmakartre Namah।
जो कर्म करने की प्रेरणा देने वाले हैं।

442. कर्माकर्मफलप्रद

ॐ कर्माकर्मफलप्रदाय नमः।
Om Karmakarmaphalapradaya Namah।
जो कर्मानुसार स्वर्ग और मोक्षरूप फल देने वाले हैं।

443. कदम्बगोलकाकार

ॐ कदम्बगोलकाकाराय नमः।
Om Kadambagolakakaraya Namah।
जो कदम्ब-पुष्प के समान गोल आकार वाले हैं।

444. कूष्माण्डगणनायक

ॐ कूष्माण्डगणनायकाय नमः।
Om Kushmandagananayakaya Namah।
जो दुष्ट ग्रहों पर कठोर शासन करने वाले हैं।

445. कारुण्यदेह

ॐ कारुण्यदेहाय नमः।
Om Karunyadehaya Namah।
जो करुणा के सागर हैं।

446. कपिल

ॐ कपिलाय नमः।
Om Kapilaya Namah।
जो कपिल मुनि स्वरूप हैं।

447. कथक

ॐ कथकाय नमः।
Om Kathakaya Namah।
जो सम्प्रदायों के प्रवर्तक हैं।

448. कटिसूत्रभृत्

ॐ कटिसूत्रभृते नमः।
Om Katisutrabhrite Namah।
जो स्वर्ण का कमरबन्ध धारण करने वाले हैं।

449. खर्व

ॐ खर्वाय नमः।
Om Kharvaya Namah।
जो वामन स्वरूप हैं।

450. खड्गप्रिय

ॐ खड्गप्रियाय नमः।
Om Khadgapriyaya Namah।
जिन्हें खड्ग अत्यन्त प्रिय है।

451. खड्गखान्तान्तःस्थ

ॐ खड्गखान्तान्तःस्थाय नमः।
Om Khadgakhantantahsthaya Namah।
जो गकार में विराजमान हैं।

452. खनिर्मल

ॐ खनिर्मलाय नमः।
Om Khanirmalaya Namah।
जो आकाश की भाँति सबमें रहते हुए भी सबसे निर्लिप्त हैं।

453. खल्वाटशृङ्गनिलय

ॐ खल्वाटशृङ्गनिलयाय नमः।
Om Khalvatashringanilayaya Namah।
जो वृक्षविहीन पर्वत के शिखर पर निवास करने वाले हैं।

454. खट्वाङ्गी

ॐ खट्वाङ्गिने नमः।
Om Khatvangine Namah।
जो खट्वाङ्ग नामक अस्त्र धारण करने वाले हैं।

455. खदुरासद

ॐ खदुरासदाय नमः।
Om Khadurasadaya Namah।
जो आकाश की भाँति पकड़ में न आ सकने वाले हैं।

456. गुणाढ्य

ॐ गुणाढ्याय नमः।
Om Gunadhyaya Namah।
जो सर्वगुण सम्पन्न हैं।

457. गहन

ॐ गहनाय नमः।
Om Gahanaya Namah।
जो अत्यन्त गूढ़ हैं।

458. गस्थ

ॐ गस्थाय नमः।
Om Gasthaya Namah।
जो ‘ग’ बीजाक्षर में विराजमान हैं।

459. गद्यपद्यसुधार्णव

ॐ गद्यपद्यसुधार्णवाय नमः।
Om Gadyapadyasudharnavaya Namah।
जो गद्य एवं पद्य में काव्यरस रूपी अमृत के सागर हैं।

460. गद्यगानप्रिय

ॐ गद्यगानप्रियाय नमः।
Om Gadyaganapriyaya Namah।
जिन्हें सामवेद का पाठ प्रिय है।

461. गर्ज

ॐ गर्जाय नमः।
Om Garjaya Namah।
जो बादल के समान गर्जना करने वाले हैं।

462. गीतगीर्वाणपूर्वज

ॐ गीतगीर्वाणपूर्वजाय नमः।
Om Gitagirvanapurvajaya Namah।
जो नाद से उत्पन्न गीत तथा नाद के अर्थ से उत्पन्न देवताओं के पूर्वज हैं।

463. गुह्याचाररत

ॐ गुह्याचाररताय नमः।
Om Guhyachararataya Namah।
जो परमात्मा के चिन्तन में लगे साधकों पर सन्तुष्ट रहने वाले हैं।

464. गुह्य

ॐ गुह्याय नमः।
Om Guhyaya Namah।
जो एकान्त में जानने योग्य हैं।

465. गुह्यागमनिरूपित

ॐ गुह्यागमनिरूपिताय नमः।
Om Guhyagamanirupitaya Namah।
जिनकी महिमा वेदों में वर्णित है।

466. गुहाशय

ॐ गुहाशयाय नमः।
Om Guhashayaya Namah।
जो हृदय में शयन करने वाले अन्तर्यामी पुरुष हैं।

467. गुहाब्धिस्थ

ॐ गुहाब्धिस्थाय नमः।
Om Guhabdhisthaya Namah।
जो हृदय रूपी आकाश सागर में स्थित रहने वाले हैं।

468. गुरुगम्य

ॐ गुरुगम्याय नमः।
Om Gurugamyaya Namah।
जिन्हें मात्र गुरु के द्वारा ही जाना जा सकता है।

469. गुरोर्गुरु

ॐ गुरोर्गुरवे नमः।
Om Gurorgurave Namah।
जो गुरुओं के भी गुरु हैं।

470. घण्टाघर्घरिकामाली

ॐ घण्टाघर्घरिकामालिने नमः।
Om Ghantaghargharikamaline Namah।
जो मनोहर शब्द करने वाली घर्घरिका नामक घण्टी की माला धारण करने वाले हैं।

471. घटकुम्भ

ॐ घटकुम्भाय नमः।
Om Ghatakumbhaya Namah।
जो विशाल मस्तक वाले हैं।

472. घटोदर

ॐ घटोदराय नमः।
Om Ghatodaraya Namah।
जो घड़े के समान पेट वाले हैं।

473. चण्ड

ॐ चण्डाय नमः।
Om Chandaya Namah।
जो प्रचण्ड पराक्रमी हैं।

474. चण्डेश्वरसुहृत्

ॐ चण्डेश्वरसुहृदे नमः।
Om Chandeshvarasuhride Namah।
जो भगवान शिव के पार्षद चण्डेश्वर के प्रिय हैं।

475. चण्डीश

ॐ चण्डीशाय नमः।
Om Chandishaya Namah।
जो भगवान शिव और माता पार्वती के प्रिय हैं।

476. चण्डविक्रम

ॐ चण्डविक्रमाय नमः।
Om Chandavikramaya Namah।
जो क्रोधी दुष्टों पर आक्रमण करके उन्हें वश में करने वाले हैं।

477. चराचरपति

ॐ चराचरपतये नमः।
Om Characharapataye Namah।
जो इस सम्पूर्ण जगत के स्वामी हैं।

478. चिन्तामणिचर्वणलालस

ॐ चिन्तामणिचर्वणलालसाय नमः।
Om Chintamanicharvanalalasaya Namah।
जो चिन्तामणि का अभिमान नष्ट करने वाले हैं।

479. छन्द

ॐ छन्दसे नमः।
Om Chhandase Namah।
जो स्वयं वेद के रूप में हैं।

480. छन्दोवपु

ॐ छन्दोवपुषे नमः।
Om Chhandovapushe Namah।
जो वेदों को अपनी देह के रूप में धारण करने वाले हैं।

481. छन्दोदुर्लक्ष्य

ॐ छन्दोदुर्लक्ष्याय नमः।
Om Chhandodurlakshyaya Namah।
वेद भी जिनको पूर्ण रूप से जानने में असमर्थ हैं।

482. छन्दविग्रह

ॐ छन्दविग्रहाय नमः।
Om Chhandavigrahaya Namah।
जो भक्तों की इच्छा के अनुसार अवतार-शरीर धारण करने वाले हैं।

483. जगद्योनि

ॐ जगद्योनये नमः।
Om Jagadyonaye Namah।
जो इस सृष्टि के कारण हैं।

484. जगत्साक्षी

ॐ जगत्साक्षिणे नमः।
Om Jagatsakshine Namah।
जो इस सम्पूर्ण सृष्टि के साक्षी हैं।

485. जगदीश

ॐ जगदीशाय नमः।
Om Jagadishaya Namah।
जो इस सम्पूर्ण सृष्टि के स्वामी हैं।

486. जगन्मय

ॐ जगन्मयाय नमः।
Om Jaganmayaya Namah।
जो स्वयं ही जगत के रूप में विद्यमान हैं।

487. जप

ॐ जपाय नमः।
Om Japaya Namah।
जो मन्त्र के रूप में विद्यमान हैं।

488. जपपर

ॐ जपपराय नमः।
Om Japaparaya Namah।
जो सदैव ध्यान/जप में लीन रहने वाले हैं।

489. जप्य

ॐ जप्याय नमः।
Om Japyaya Namah।
जो जपनीय मन्त्र के स्वरूप हैं।

490. जिह्वासिंहासनप्रभु

ॐ जिह्वासिंहासन-प्रभवे नमः।
Om Jihvasimhasana-prabhave Namah।
जो वाणी अथवा वाक् शक्ति के स्वामी हैं।

491. झलज्झलोल्लसद्दानझङ्कारिभ्रमराकुल

ॐ झलज्झलोल्लसद्दानझङ्कारिभ्रमराकुलाय नमः।
Om Jhalajjhalollasaddanajhankaribhramarakulaya Namah।
जो भ्रमर द्वारा आकर्षित होने वाले हैं।

492. टङ्कारस्फारसंराव

ॐ टङ्कारस्फारसंरावाय नमः।
Om Tankaraspharasamravaya Namah।
जिनके आभूषण टँकार जैसी ध्वनि करने वाले हैं।

493. टङ्कारिमणिनूपुर

ॐ टङ्कारिमणिनूपुराय नमः।
Om Tankarimaninupuraya Namah।
जो छोटे-छोटे नूपरों से सुसज्जित पायल धारण करने वाले हैं।

494. ठद्वयीपल्लवान्तःस्थसर्वमन्त्रैकसिद्धिद

ॐ ठद्वयीपल्लवान्तःस्थसर्वमन्त्रैकसिद्धिदाय नमः।
Om Thadvayipallavantahsthasarvamantraikasiddhidaya Namah।
जो विधिवत पढ़े गये मन्त्रों के एकमात्र सिद्धिदाता हैं।

495. डिण्डिमुण्ड

ॐ डिण्डिमुण्डाय नमः।
Om Dindimundaya Namah।
जो ढ़ोल के समान विशाल मस्तक वाले हैं।

496. डाकिनीश

ॐ डाकिनीशाय नमः।
Om Dakinishaya Namah।
जो योगिनियों के स्वामी हैं।

497. डामर

ॐ डामराय नमः।
Om Damaraya Namah।
जो डामर नामक तन्त्र के समान हैं।

498. डिण्डिमप्रिय

ॐ डिण्डिमप्रियाय नमः।
Om Dindimapriyaya Namah।
जो नगाड़े की ध्वनि से प्रसन्न होने वाले हैं।

499. ढक्कानिनादमुदित

ॐ ढक्कानिनादमुदिताय नमः।
Om Dhakkaninadamuditaya Namah।
जिन्हें ढक्के की ध्वनि अत्यन्त प्रिय है।

500. ढौक

ॐ ढौकाय नमः।
Om Dhaukaya Namah।
जो सब कुछ जानने वाले हैं।

501. ढुण्ढिविनायक

ॐ ढुण्ढिविनायकाय नमः।
Om Dhundhivinayakaya Namah।
जो विघ्न-बाधाओं को दूर करने वाले हैं।

502. तत्त्व परम तत्त्व

ॐ तत्त्वानां परमाय तत्त्वाय नमः।
Om Tattvanam Paramaya Tattvaya Namah।
जो समस्त सिद्धान्तों में सर्वोच्च सिद्धान्त हैं।

503. तत्त्वम्पदनिरूपित

ॐ तत्त्वम्पदनिरूपिताय नमः।
Om Tattvampadanirupitaya Namah।
जो भक्तों को सैद्धान्तिक मार्ग पर चलाने वाले हैं।

504. तारकान्तरसंस्थान

ॐ तारकान्तरसंस्थानाय नमः।
Om Tarakantarasamsthanaya Namah।
जो नेत्रों की पुतलियों में वास करने वाले हैं।

505. तारक

ॐ तारकाय नमः।
Om Tarakaya Namah।
जो भवसागर से तारने वाले हैं।

506. तारकान्तक

ॐ तारकान्तकाय नमः।
Om Tarakantakaya Namah।
जो तारकासुर का संहार करने वाले हैं।

507. स्थाणु

ॐ स्थाणवे नमः।
Om Sthanave Namah।
जो स्थिर हैं।

508. स्थाणुप्रिय

ॐ स्थाणुप्रियाय नमः।
Om Sthanupriyaya Namah।
जो भगवान शिव के प्रिय पुत्र हैं।

509. स्थाता

ॐ स्थात्रे नमः।
Om Sthatre Namah।
जो युद्ध में दृढ़तापूर्वक डटे रहने वाले हैं।

510. स्थावर जङ्गम जगत्

ॐ स्थावराय जङ्गमाय जगते नमः।
Om Sthavaraya Jangamaya Jagate Namah।
जो स्वयं चराचर जगत स्वरूप हैं।

511. दक्षयज्ञप्रमथन

ॐ दक्षयज्ञप्रमथनाय नमः।
Om Dakshayajnapramathanaya Namah।
जो दक्ष प्रजापति के यज्ञ का विध्वंस करने वाले हैं।

512. दाता

ॐ दात्रे नमः।
Om Datre Namah।
जो पतितपावन हैं।

513. दानवमोहन

ॐ दानवमोहनाय नमः।
Om Danavamohanaya Namah।
जो राक्षसों को विवेकहीन करने वाले हैं।

514. दयावान्

ॐ दयावते नमः।
Om Dayavate Namah।
जो अत्यन्त दयावान हैं।

515. दिव्यविभव

ॐ दिव्यविभवाय नमः।
Om Divyavibhavaya Namah।
जो भक्तों को दिव्य वैभव से सम्पन्न करने वाले हैं।

516. दण्डभृत्

ॐ दण्डभृते नमः।
Om Dandabhrite Namah।
जो दण्डनीति का पालन करने वाले हैं।

517. दण्डनायक

ॐ दण्डनायकाय नमः।
Om Dandanayakaya Namah।
जो दण्ड के प्रवर्तक हैं।

518. दन्तप्रभिन्नाभ्रमाल

ॐ दन्तप्रभिन्नाभ्रमालाय नमः।
Om Dantaprabhinnabhramalaya Namah।
जो अपने दाँत के आघात से मेघों को छिन्न-भिन्न कर देने वाले हैं।

519. दैत्यवारणदारण

ॐ दैत्यवारणदारणाय नमः।
Om Daityavaranadaranaya Namah।
जो दानवों को रोकने और उनका अन्त करने वाले हैं।

520. दंष्ट्रालग्नद्विपघट

ॐ दंष्ट्रालग्नद्विपघटाय नमः।
Om Damshtralagnadvipaghataya Namah।
जिनके दाढ़ में शत्रुओं के हाथियों का समूह स्थित है।

521. देवार्थनृगजाकृति

ॐ देवार्थनृगजाकृतये नमः।
Om Devarthanrigajakritaye Namah।
जो देवताओं के कल्याण हेतु मनुष्य और गज की आकृति धारण करने वाले हैं।

522. धनधान्यपति

ॐ धनधान्यपतये नमः।
Om Dhanadhanyapataye Namah।
जो धन-धान्य के अधिपति हैं।

523. धन्य

ॐ धन्याय नमः।
Om Dhanyaya Namah।
जो धन सम्पन्न एवं पुण्यवान हैं।

524. धनद

ॐ धनदाय नमः।
Om Dhanadaya Namah।
जो धन-सम्पत्ति प्रदान करने वाले हैं।

525. धरणीधर

ॐ धरणीधराय नमः।
Om Dharanidharaya Namah।
जो पृथ्वी को धारण करने वाले हैं।

526. ध्यानैकप्रकट

ॐ ध्यानैकप्रकटाय नमः।
Om Dhyanaikaprakataya Namah।
जो एकमात्र ध्यान में ही प्रकट होने वाले हैं।

527. ध्येय

ॐ ध्येयाय नमः।
Om Dhyeyaya Namah।
जो ध्यान से प्राप्त होने वाले हैं।

528. ध्यान

ॐ ध्यानाय नमः।
Om Dhyanaya Namah।
जो स्वयं ध्यानस्वरूप हैं।

529. ध्यानपरायण

ॐ ध्यानपरायणाय नमः।
Om Dhyanaparayanaya Namah।
जो ध्यान में संलग्न रहने वाले हैं।

530. नन्द्य

ॐ नन्द्याय नमः।
Om Nandyaya Namah।
जो सदैव उत्साहित एवं आनन्दित रहने वाले हैं।

531. नन्दिप्रिय

ॐ नन्दिप्रियाय नमः।
Om Nandipriyaya Namah।
जो नन्दिकेश्वर के अत्यन्त प्रिय हैं।

532. नाद

ॐ नादाय नमः।
Om Nadaya Namah।
जो स्वयं नाद स्वरूप हैं।

533. नादमध्यप्रतिष्ठित

ॐ नादमध्यप्रतिष्ठिताय नमः।
Om Nadamadhyapratishthitaya Namah।
जो सङ्गीत एवं वाद्ययन्त्रों के मध्य प्रसन्न रहने वाले हैं।

534. निष्कल

ॐ निष्कलाय नमः।
Om Nishkalaya Namah।
जो अवयव रहित हैं।

535. निर्मल

ॐ निर्मलाय नमः।
Om Nirmalaya Namah।
जो पूर्णतः पवित्र हैं।

536. नित्य

ॐ नित्याय नमः।
Om Nityaya Namah।
जो अनश्वर हैं।

537. नित्यानित्य

ॐ नित्यानित्याय नमः।
Om Nityanityaya Namah।
जो नश्वर-अनश्वर दोनों रूपों को धारण करने वाले हैं।

538. निरामय

ॐ निरामयाय नमः।
Om Niramayaya Namah।
जो अविद्या रूपी महारोग से मुक्त हैं।

539. परं व्योम

ॐ परस्मै व्योम्ने नमः।
Om Parasmai Vyomne Namah।
जो नित्य धामस्वरूप हैं।

540. परं धाम

ॐ परस्मै धाम्ने नमः।
Om Parasmai Dhamne Namah।
जो परम ज्योति हैं।

541. परमात्मा

ॐ परमात्मने नमः।
Om Paramatmane Namah।
जो स्वयं परब्रह्म हैं।

542. परं पद

ॐ परस्मै पदाय नमः।
Om Parasmai Padaya Namah।
जो सर्वोच्च पद पर प्रतिष्ठित हैं।

543. परात्पर

ॐ परात्पराय नमः।
Om Paratparaya Namah।
जो पर अर्थात् भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश से भी उत्कृष्ट हैं।

544. पशुपति

ॐ पशुपतये नमः।
Om Pashupataye Namah।
जो समस्त प्राणियों के पालक हैं।

545. पशुपाशविमोचक

ॐ पशुपाशविमोचकाय नमः।
Om Pashupashavimochakaya Namah।
जो जीवों को विभिन्न बन्धनों से मुक्त करने वाले हैं।

546. पूर्णानन्द

ॐ पूर्णानन्दाय नमः।
Om Purnanandaya Namah।
जो आनन्द की वर्षा करने वाले हैं।

547. परानन्द

ॐ परानन्दाय नमः।
Om Paranandaya Namah।
जो सदैव परम आनन्द प्रदान करने वाले हैं।

548. पुराणपुरुषोत्तम

ॐ पुराणपुरुषोत्तमाय नमः।
Om Puranapurushottamaya Namah।
जो समस्त देवगणों में सर्वोच्च हैं।

549. पद्मप्रसन्ननयन

ॐ पद्मप्रसन्ननयनाय नमः।
Om Padmaprasannanayanaya Namah।
जो खिले हुए कमलपुष्पों के समान प्रसन्न नेत्रों वाले हैं।

550. प्रणताज्ञानमोचन

ॐ प्रणताज्ञानमोचनाय नमः।
Om Pranatajnanamochanaya Namah।
जो भक्त के समस्त अज्ञान का नाश करने वाले हैं।

551. प्रमाणप्रत्ययातीत

ॐ प्रमाणप्रत्ययातीताय नमः।
Om Pramanapratyayatitaya Namah।
जो विभिन्न प्रमाणों की प्रतीति से परे नित्य ज्ञान स्वरूप हैं।

552. प्रणतार्तिनिवारण

ॐ प्रणतार्तिनिवारणाय नमः।
Om Pranatartinivaranaya Namah।
जो भक्तों के कष्ट का निवारण करने वाले हैं।

553. फलहस्त

ॐ फलहस्ताय नमः।
Om Phalahastaya Namah।
जो भक्तों को अविलम्ब फल प्रदान करने वाले हैं।

554. फणिपति

ॐ फणिपतये नमः।
Om Phanipataye Namah।
जो शेष और वासुकि नाग के भी स्वामी हैं।

555. फेत्कार

ॐ फेत्काराय नमः।
Om Phetkaraya Namah।
जो स्वयं तन्त्र स्वरूप हैं।

556. फाणितप्रिय

ॐ फाणितप्रियाय नमः।
Om Phanitapriyaya Namah।
जो गन्ने के रस के प्रेमी हैं।

557. बाणार्चिताङ्घ्रियुगल

ॐ बाणार्चिताङ्घ्रियुगलाय नमः।
Om Banarchitanghriyugalaya Namah।
जिनके चरण कमलों का पूजन बाणासुर करता है।

558. बालकेलिकुतूहली

ॐ बालकेलिकुतूहलिने नमः।
Om Balakelikutuhaline Namah।
जो बाल क्रीड़ा का आनन्द लेने वाले हैं।

559. ब्रह्म

ॐ ब्रह्मणे नमः।
Om Brahmane Namah।
जो स्वयं ब्रह्म स्वरूप हैं।

560. ब्रह्मार्चितपद

ॐ ब्रह्मार्चितपदाय नमः।
Om Brahmarchitapadaya Namah।
जिनके चरण कमलों का पूजन ब्रह्मा जी करते हैं।

561. ब्रह्मचारी

ॐ ब्रह्मचारिणे नमः।
Om Brahmacharine Namah।
जो ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने वाले हैं।

562. बृहस्पति

ॐ बृहस्पतये नमः।
Om Brihaspataye Namah।
जो स्वयं देवगुरु बृहस्पति स्वरूप हैं।

563. बृहत्तम

ॐ बृहत्तमाय नमः।
Om Brihattamaya Namah।
जो अत्यधिक विशालकाय हैं।

564. ब्रह्मपर

ॐ ब्रह्मपराय नमः।
Om Brahmaparaya Namah।
जो ब्रह्मा जी से भी श्रेष्ठ हैं।

565. ब्रह्मण्य

ॐ ब्रह्मण्याय नमः।
Om Brahmanyaya Namah।
जो ब्राह्मणों पर श्रद्धा रखने वाले हैं।

566. ब्रह्मवित्प्रिय

ॐ ब्रह्मवित्प्रियाय नमः।
Om Brahmavitpriyaya Namah।
जो विद्यार्थियों को प्रिय हैं।

567. बृहन्नादाग्र्यचीत्कार

ॐ बृहन्नादाग्र्यचीत्काराय नमः।
Om Brihannadagryachitkaraya Namah।
जो मेघों से भी अधिक उच्चस्वर से गर्जना करने वाले हैं।

568. ब्रह्माण्डावलिमेखल

ॐ ब्रह्माण्डावलिमेखलाय नमः।
Om Brahmandavalimekhalaya Namah।
जो ब्रह्माण्ड को अपनी कटिसूत्र के रूप में धारण करने वाले हैं।

569. भ्रूक्षेपदत्तलक्ष्मीक

ॐ भ्रूक्षेपदत्तलक्ष्मीकाय नमः।
Om Bhrukshepadattalakshmikaya Namah।
जो पलक झपकते ही भक्तों पर धनवर्षा करने वाले हैं।

570. भर्ग

ॐ भर्गाय नमः।
Om Bhargaya Namah।
जो सूर्य के समान तेज वाले हैं।

571. भद्र

ॐ भद्राय नमः।
Om Bhadraya Namah।
जो सर्वोत्तम एवं सभ्य हैं।

572. भयापह

ॐ भयापहाय नमः।
Om Bhayapahaya Namah।
जो भक्तों के ज्ञात-अज्ञात भय नष्ट करने वाले हैं।

573. भगवान्

ॐ भगवते नमः।
Om Bhagavate Namah।
जो षड्विध ऐश्वर्य से सम्पन्न हैं।

574. भक्तिसुलभ

ॐ भक्तिसुलभाय नमः।
Om Bhaktisulabhaya Namah।
जो भक्ति द्वारा सुगमता से प्राप्त किए जा सकते हैं।

575. भूतिद

ॐ भूतिदाय नमः।
Om Bhutidaya Namah।
जो अष्ट सिद्धियों के दाता हैं।

576. भूतिभूषण

ॐ भूतिभूषणाय नमः।
Om Bhutibhushanaya Namah।
जो भस्म धारण करने वाले हैं।

577. भव्य

ॐ भव्याय नमः।
Om Bhavyaya Namah।
जो कल्याणस्वरूप हैं।

578. भूतालय

ॐ भूतालयाय नमः।
Om Bhutalayaya Namah।
जो पञ्चभूत आदि समस्त भूत प्राणियों के आश्रय हैं।

579. भोगदाता

ॐ भोगदात्रे नमः।
Om Bhogadatre Namah।
जो जीवों को कर्मानुसार फल प्रदान करने वाले हैं।

580. भ्रूमध्यगोचर

ॐ भ्रूमध्यगोचराय नमः।
Om Bhrumadhyagocharaya Namah।
जो ध्यान काल में दोनों भौंहों के मध्य अनुभूत होने वाले हैं।

581. मन्त्र

ॐ मन्त्राय नमः।
Om Mantraya Namah।
जो स्वयं मन्त्र स्वरूप हैं।

582. मन्त्रपति

ॐ मन्त्रपतये नमः।
Om Mantrapataye Namah।
जो समस्त मन्त्रणाओं के अधिपति हैं।

583. मन्त्री

ॐ मन्त्रिणे नमः।
Om Mantrine Namah।
जो राज्य सञ्चालन हेतु समस्त मन्त्रशक्ति के अधिष्ठाता हैं।

584. मदमत्तमनोरम

ॐ मदमत्तमनोरमाय नमः।
Om Madamattamanoramaya Namah।
जो आनन्द-उत्साह में लीन हैं।

585. मेखलावान्

ॐ मेखलावते नमः।
Om Mekhalavate Namah।
जो कमरबन्ध धारण करने वाले हैं।

586. मन्दगति

ॐ मन्दगतये नमः।
Om Mandagataye Namah।
जो अल्प बुद्धियों के भी आश्रय दाता हैं।

587. मतिमत्कमलेक्षण

ॐ मतिमत्कमलेक्षणाय नमः।
Om Matimatkamalekshanaya Namah।
जो सद्बुद्धि देने वाले हैं।

588. महाबल

ॐ महाबलाय नमः।
Om Mahabalaya Namah।
जो अत्यन्त बलशाली हैं।

589. महावीर्य

ॐ महावीर्याय नमः।
Om Mahaviryaya Namah।
जो महापराक्रमी एवं साहसी हैं।

590. महाप्राण

ॐ महाप्राणाय नमः।
Om Mahapranaya Namah।
जो समस्त जीवात्माओं के प्राण हैं।

591. महामना

ॐ महामनसे नमः।
Om Mahamanase Namah।
जो श्रेष्ठ विचारों वाले हैं।

592. यज्ञ

ॐ यज्ञाय नमः।
Om Yajnaya Namah।
जो स्वयं यज्ञस्वरूप हैं।

593. यज्ञपति

ॐ यज्ञपतये नमः।
Om Yajnapataye Namah।
जो यज्ञों के स्वामी हैं।

594. यज्ञगोप्ता

ॐ यज्ञगोप्त्रे नमः।
Om Yajnagoptre Namah।
जो यज्ञों के रक्षक हैं।

595. यज्ञफलप्रद

ॐ यज्ञफलप्रदाय नमः।
Om Yajnaphalapradaya Namah।
जो यज्ञों का फल प्रदान करने वाले हैं।

596. यशस्कर

ॐ यशस्कराय नमः।
Om Yashaskaraya Namah।
जो यश एवं प्रसिद्धि प्रदान करने वाले हैं।

597. योगगम्य

ॐ योगगम्याय नमः।
Om Yogagamyaya Namah।
जो योग द्वारा प्राप्त होने वाले हैं।

598. याज्ञिक

ॐ याज्ञिकाय नमः।
Om Yajnikaya Namah।
जो यज्ञकर्ता हैं।

599. याजकप्रिय

ॐ याजकप्रियाय नमः।
Om Yajakapriyaya Namah।
जो यज्ञ कराने वालों के प्रिय हैं।

600. रस

ॐ रसाय नमः।
Om Rasaya Namah।
जो परम आनन्दस्वरूप हैं।

601. रसप्रिय

ॐ रसप्रियाय नमः।
Om Rasapriyaya Namah।
जो मधुर आदि रसों में अधिक प्रीति रखने वाले हैं।

602. रस्य

ॐ रस्याय नमः।
Om Rasyaya Namah।
जो आस्वाद के विषय हैं।

603. रञ्जक

ॐ रञ्जकाय नमः।
Om Ranjakaya Namah।
जो हर्ष एवं आनन्द प्रदान करने वाले हैं।

604. रावणार्चित

ॐ रावणार्चिताय नमः।
Om Ravanarchitaya Namah।
जो रावण द्वारा पूजे जाने वाले हैं।

605. रक्षोरक्षाकर

ॐ रक्षोरक्षाकराय नमः।
Om Rakshorakshakaraya Namah।
जो राक्षसों की जलाकर राख कर देने वाले हैं।

606. रत्नगर्भ

ॐ रत्नगर्भाय नमः।
Om Ratnagarbhaya Namah।
जो पृथ्वी के आश्रय हैं।

607. राजसुखप्रद

ॐ राजसुखप्रदाय नमः।
Om Rajasukhapradaya Namah।
जो राजसुख प्रदान करने वाले हैं।

608. लक्ष्य

ॐ लक्ष्याय नमः।
Om Lakshyaya Namah।
जो समस्त प्राणियों के उद्देश्य हैं।

609. लक्ष्यप्रद

ॐ लक्ष्यप्रदाय नमः।
Om Lakshyapradaya Namah।
जो सफलतापूर्वक लक्ष्य प्रदान करने वाले हैं।

610. लक्ष्य

ॐ लक्ष्याय नमः।
Om Lakshyaya Namah।
जो स्वयं परम लक्ष्य हैं।

611. लयस्थ

ॐ लयस्थाय नमः।
Om Layasthaya Namah।
जो प्रलय काल में भी विद्यमान रहने वाले हैं।

612. लड्डुकप्रिय

ॐ लड्डुकप्रियाय नमः।
Om Laddukapriyaya Namah।
जो लड्डुओं से अत्यन्त प्रसन्न रहने वाले हैं।

613. लानप्रिय

ॐ लानप्रियाय नमः।
Om Lanapriyaya Namah।
जो गजशाला में प्रीति रखने वाले हैं।

614. लास्यपर

ॐ लास्यपराय नमः।
Om Lasyaparaya Namah।
जो विलास योग्य परम धाम वाले हैं।

615. लाभकृल्लोकविश्रुत

ॐ लाभकृल्लोकविश्रुताय नमः।
Om Labhakrillokavishrutaya Namah।
जो भक्तों को शीघ्र वर प्रदान करने वाले हैं।

616. वरेण्य

ॐ वरेण्याय नमः।
Om Varenyaya Namah।
जो गणपति भक्त राजा वरेण्य के समान हैं।

617. वह्निवदन

ॐ वह्निवदनाय नमः।
Om Vahnivadanaya Namah।
जो अग्नि के समान तेज धारण करने वाले हैं।

618. वन्द्य

ॐ वन्द्याय नमः।
Om Vandyaya Namah।
जो हम सभी के आराध्य हैं।

619. वेदान्तगोचर

ॐ वेदान्तगोचराय नमः।
Om Vedantagocharaya Namah।
जो उपनिषदों के द्वारा जानने योग्य हैं।

620. विकर्ता

ॐ विकर्त्रे नमः।
Om Vikartre Namah।
जो जन्म आदि छः भावविकारों के प्रवर्तक हैं।

621. विश्वतश्चक्षु

ॐ विश्वतश्चक्षुषे नमः।
Om Vishvatashchakshushe Namah।
जो संसार को अपने नेत्रों के रूप में धारण करने वाले हैं।

622. विधाता

ॐ विधात्रे नमः।
Om Vidhatre Namah।
जो सृष्टि की उत्पत्ति करने वाले हैं।

623. विश्वतोमुख

ॐ विश्वतोमुखाय नमः।
Om Vishvatomukhaya Namah।
जो स्वयं ब्रह्मा स्वरूप में विराजमान हैं।

624. वामदेव

ॐ वामदेवाय नमः।
Om Vamadevaya Namah।
जो स्वयं शिव स्वरूप हैं।

625. विश्वनेता

ॐ विश्वनेत्रे नमः।
Om Vishvanetre Namah।
जो सम्पूर्ण विश्व का नेतृत्व करने वाले हैं।

626. वज्रिवज्रनिवारण

ॐ वज्रिवज्रनिवारणाय नमः।
Om Vajrivajranivaranaya Namah।
जो इन्द्र के वज्र को स्तम्भित करने वाले हैं।

627. विश्वबन्धनविष्कम्भाधार

ॐ विश्वबन्धनविष्कम्भाधाराय नमः।
Om Vishvabandhanavishkambhadharaya Namah।
जो सम्पूर्ण जगत की सृष्टि के आधार के आधार हैं।

628. विश्वेश्वरप्रभु

ॐ विश्वेश्वरप्रभवे नमः।
Om Vishveshvaraprabhave Namah।
जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड और उनके स्वामियों के स्वामी हैं।

629. शब्दब्रह्म

ॐ शब्दब्रह्मणे नमः।
Om Shabdabrahmane Namah।
जो परा नामक वाणी से अतीत नादरूपधारी हैं।

630. शमप्राप्य

ॐ शमप्राप्याय नमः।
Om Shamaprapyaya Namah।
जो मन के निग्रह द्वारा प्राप्त किये जा सकते हैं।

631. शम्भुशक्तिगणेश्वर

ॐ शम्भुशक्तिगणेश्वराय नमः।
Om Shambhushaktiganeshvaraya Namah।
जो शिव एवं शक्ति के गणों के स्वामी हैं।

632. शास्ता

ॐ शास्त्रे नमः।
Om Shastre Namah।
जो शास्ता नामक देवता के स्वरूप हैं।

633. शिखाग्रनिलय

ॐ शिखाग्रनिलयाय नमः।
Om Shikhagranilayaya Namah।
जो शिखा के अग्रभाग में वास करने वाले हैं।

634. शरण्य

ॐ शरण्याय नमः।
Om Sharanyaya Namah।
जो हम सभी के रक्षक हैं।

635. शिखरीश्वर

ॐ शिखरीश्वराय नमः।
Om Shikharishvaraya Namah।
जो हिमालय के समान हैं।

636. षड्ऋतुकुसुमस्रग्वी

ॐ षड्ऋतुकुसुमस्रग्विणे नमः।
Om Shadritukusumasragvine Namah।
जो छहों ऋतुओं में खिलने वाले पुष्पों की मालाओं से सुशोभित हैं।

637. षडाधार

ॐ षडाधाराय नमः।
Om Shadadharaya Namah।
जो छहों चक्रों के आधारभूत मूलाधार चक्र के समान हैं।

638. षडक्षर

ॐ षडक्षराय नमः।
Om Shadaksharaya Namah।
जो छः अक्षरों वाले ‘गणेशाय नमः’ मन्त्र स्वरूप हैं।

639. संसारवैद्य

ॐ संसारवैद्याय नमः।
Om Samsaravaidyaya Namah।
जो समस्त सृष्टि के चिकित्सक हैं।

640. सर्वज्ञ

ॐ सर्वज्ञाय नमः।
Om Sarvajnaya Namah।
जो सब कुछ जानने वाले हैं।

641. सर्वभेषजभेषज

ॐ सर्वभेषजभेषजाय नमः।
Om Sarvabheshajabheshajaya Namah।
जो समस्त औषधियों की औषधि हैं।

642. सृष्टिस्थितिलयक्रीड

ॐ सृष्टिस्थितिलयक्रीडाय नमः।
Om Srishtisthitilayakridaya Namah।
जगत की सृष्टि, पालन तथा उसका संहार करना जिनकी लीलायें हैं।

643. सुरकुञ्जरभेदन

ॐ सुरकुञ्जरभेदनाय नमः।
Om Surakunjarabhedanaya Namah।
जो दानवों से पूजित होकर देवताओं में भेद उत्पन्न करने वाले हैं।

644. सिन्दूरितमहाकुम्भ

ॐ सिन्दूरितमहाकुम्भाय नमः।
Om Sinduritamahakumbhaya Namah।
जो विशाल मस्तक पर सिन्दूर धारण करने वाले हैं।

645. सदसद्व्यक्तिदायक

ॐ सदसद्व्यक्तिदायकाय नमः।
Om Sadasadvyaktidayakaya Namah।
जो भक्तों को सद्बुद्धि प्रदान करने वाले हैं।

646. साक्षी

ॐ साक्षिणे नमः।
Om Sakshine Namah।
जो सृष्टि की समस्त गतिविधियों के साक्षी हैं।

647. समुद्रमथन

ॐ समुद्रमथनाय नमः।
Om Samudramathanaya Namah।
जो समुद्र मन्थन काल में देवताओं द्वारा सर्वप्रथम पूजित हैं।

648. स्वसंवेद्य

ॐ स्वसंवेद्याय नमः।
Om Svasamvedyaya Namah।
जो स्वयं परम ज्योति स्वरूप हैं।

649. स्वदक्षिण

ॐ स्वदक्षिणाय नमः।
Om Svadakshinaya Namah।
जो स्वयं सब कुछ करने में समर्थ हैं।

650. स्वतन्त्र

ॐ स्वतन्त्राय नमः।
Om Svatantraya Namah।
जो स्वतन्त्र हैं।

651. सत्यसङ्कल्प

ॐ सत्यसङ्कल्पाय नमः।
Om Satyasankalpaya Namah।
जो परम सत्य स्वरूप हैं।

652. सामगानरत

ॐ सामगानरताय नमः।
Om Samaganarataya Namah।
जो सामगान में तल्लीन रहने वाले हैं।

653. सुखी

ॐ सुखिने नमः।
Om Sukhine Namah।
जो परम सुखी हैं।

654. हंस

ॐ हंसाय नमः।
Om Hamsaya Namah।
जो सूर्य के समान हैं।

655. हस्तिपिशाचीश

ॐ हस्तिपिशाचीशाय नमः।
Om Hastipishachishaya Namah।
जो हस्तिपिशाचीश नामक नवाक्षर मन्त्र के देवता हैं।

656. हवन

ॐ हवनाय नमः।
Om Havanaya Namah।
जो आहुतिस्वरूप हैं।

657. हव्यकव्यभुक्

ॐ हव्यकव्यभुजे नमः।
Om Havyakavyabhuje Namah।
जो देवताओं और पितरों को दी जाने वाली आहुति ग्रहण करने वाले हैं।

658. हव्य

ॐ हव्याय नमः।
Om Havyaya Namah।
जो हव्य अर्थात् यज्ञ की आहुति के समान हैं।

659. हुतप्रिय

ॐ हुतप्रियाय नमः।
Om Hutapriyaya Namah।
जो यज्ञाहुति में दिये गये द्रव्य के प्रेमी हैं।

660. हर्ष

ॐ हर्षाय नमः।
Om Harshaya Namah।
जो सदैव प्रसन्नचित्त रहने वाले हैं।

661. हृल्लेखामन्त्रमध्यग

ॐ हृल्लेखामन्त्रमध्यगाय नमः।
Om Hrillekhamantramadhyagaya Namah।
जो हृल्लेखा बीज मन्त्र के अर्थात् ह्रीं के मध्य वास करने वाले हैं।

662. क्षेत्राधिप

ॐ क्षेत्राधिपाय नमः।
Om Kshetradhipaya Namah।
जो प्रयाग आदि तीर्थक्षेत्रों के अथवा शरीर आदि के स्वामी हैं।

663. क्षमाभर्ता

ॐ क्षमाभर्त्रे नमः।
Om Kshamabhartre Namah।
जो पृथ्वी के आधार हैं।

664. क्षमापरपरायण

ॐ क्षमापरपरायणाय नमः।
Om Kshamaparaparayanaya Namah।
जो क्षमाशील मुनियों द्वारा प्राप्य हैं।

665. क्षिप्रक्षेमकर

ॐ क्षिप्रक्षेमकराय नमः।
Om Kshiprakshemakaraya Namah।
जो तत्क्षण कल्याण करने वाले हैं।

666. क्षेमानन्द

ॐ क्षेमानन्दाय नमः।
Om Kshemanandaya Namah।
जो मंगलकर एवं आनन्द स्वरूप हैं।

667. क्षोणीसुरद्रुम

ॐ क्षोणीसुरद्रुमाय नमः।
Om Kshonisuradrumaya Namah।
जो पृथ्वी पर कल्पवृक्ष के समान समस्त मनोरथों को पूर्ण करने वाले हैं।

668. धर्मप्रद

ॐ धर्मप्रदाय नमः।
Om Dharmapradaya Namah।
जो धर्म प्रदान करने वाले हैं।

669. अर्थद

ॐ अर्थदाय नमः।
Om Arthadaya Namah।
जो धन-सम्पदा प्रदान करने वाले हैं।

670. कामदाता

ॐ कामदात्रे नमः।
Om Kamadatre Namah।
जो समस्त इच्छाओं की पूर्ति करने वाले हैं।

671. सौभाग्यवर्धन

ॐ सौभाग्यवर्धनाय नमः।
Om Saubhagyavardhanaya Namah।
जो स्त्रियों को सौभाग्य वृद्धि का वर देने वाले हैं।

672. विद्याप्रद

ॐ विद्याप्रदाय नमः।
Om Vidyapradaya Namah।
जो विद्या प्रदान करने वाले हैं।

673. विभवद

ॐ विभवदाय नमः।
Om Vibhavadaya Namah।
जो सम्पत्ति प्रदान करने वाले हैं।

674. भुक्तिमुक्तिफलप्रद

ॐ भुक्तिमुक्तिफलप्रदाय नमः।
Om Bhuktimuktiphalapradaya Namah।
जो सांसारिक सुख एवं मोक्ष प्रदान करने वाले हैं।

675. आभिरूप्यकर

ॐ आभिरूप्यकराय नमः।
Om Abhirupyakaraya Namah।
जो विद्वत्ता और सुन्दरता प्रदान करने वाले हैं।

676. वीरश्रीप्रद

ॐ वीरश्रीप्रदाय नमः।
Om Virashripradaya Namah।
जो लक्ष्मी प्रदान करने वाले हैं।

677. विजयप्रद

ॐ विजयप्रदाय नमः।
Om Vijayapradaya Namah।
जो विजय प्रदान करने वाले हैं।

678. सर्ववश्यकर

ॐ सर्ववश्यकराय नमः।
Om Sarvavashyakaraya Namah।
जो सभी को भक्त के वश में कर देने वाले हैं।

679. गर्भदोषहा

ॐ गर्भदोषघ्ने नमः।
Om Garbhadoshaghne Namah।
जो गर्भ की रक्षा अथवा गर्भपात आदि दोषों को दूर करने वाले हैं।

680. पुत्रपौत्रद

ॐ पुत्रपौत्रदाय नमः।
Om Putrapautradaya Namah।
जो पुत्र और पौत्र प्रदान करने वाले हैं।

681. मेधाद

ॐ मेधादाय नमः।
Om Medhadaya Namah।
जो विशिष्ट बुद्धि प्रदान करने वाले हैं।

682. कीर्तिद

ॐ कीर्तिदाय नमः।
Om Kirtidaya Namah।
जो लोक में प्रसिद्धि प्रदान करने वाले हैं।

683. शोकहारी

ॐ शोकहारिणे नमः।
Om Shokaharine Namah।
जो दुख का नाश करने वाले हैं।

684. दौर्भाग्यनाशन

ॐ दौर्भाग्यनाशनाय नमः।
Om Daurbhagyanashanaya Namah।
जो स्त्रियों के विधवापन आदि दुर्भाग्यसूचक दोषों का नाश करने वाले हैं।

685. प्रतिवादिमुखस्तम्भ

ॐ प्रतिवादिमुखस्तम्भाय नमः।
Om Prativadimukhastambhaya Namah।
जो शत्रुओं का दमन करने वाले हैं।

686. रुष्टचित्तप्रसादन

ॐ रुष्टचित्तप्रसादनाय नमः।
Om Rushtachittaprasadanaya Namah।
जो क्रोधित राजा आदि को शान्त एवं प्रसन्न करने वाले हैं।

687. पराभिचारशमन

ॐ पराभिचारशमनाय नमः।
Om Parabhicharashamanaya Namah।
जो दूसरों द्वारा किये गये मारण, मोहन आदि उपायों को नष्ट करने वाले हैं।

688. दुःखभञ्जनकारक

ॐ दुःखभञ्जनकारकाय नमः।
Om Duhkhabhanjanakarakaya Namah।
जो समस्त दुखों का नाश करने वाले हैं।

689. लव

ॐ लवाय नमः।
Om Lavaya Namah।
जो अति सूक्ष्म हैं।

690. त्रुटि

ॐ त्रुटये नमः।
Om Trutaye Namah।
जो काल गणना के अनुसार एक हजार लव के काल के समान हैं।

691. कला

ॐ कलायै नमः।
Om Kalayai Namah।
जो काल गणना के अनुसार तीस काष्ठाओं के काल के समान हैं।

692. काष्ठा

ॐ काष्ठायै नमः।
Om Kashthayai Namah।
जो काल गणना के अनुसार अठारह निमेष के समान समय वाले हैं।

693. निमेष

ॐ निमेषाय नमः।
Om Nimeshaya Namah।
जो काल गणना के अनुसार तीस तत्पर काल के समान समय वाले हैं।

694. तत्पर

ॐ तत्पराय नमः।
Om Tatparaya Namah।
जो काल गणना के अनुसार सौ त्रुटियों के समय के बराबर हैं।

695. क्षण

ॐ क्षणाय नमः।
Om Kshanaya Namah।
जो काल गणनानुसार क्षण स्वरूप अर्थात् तीस कलाओं के समय के बराबर हैं।

696. घटी

ॐ घट्यै नमः।
Om Ghatyai Namah।
जो काल गणनानुसार घटी स्वरूप अर्थात् छः क्षण के समान समय वाले हैं।

697. मुहूर्त

ॐ मुहूर्ताय नमः।
Om Muhurtaya Namah।
जो काल गणनानुसार दो घटी के समान समय वाले हैं।

698. प्रहर

ॐ प्रहराय नमः।
Om Praharaya Namah।
जो काल गणनानुसार चार मुहूर्त के समय के समान हैं।

699. दिवानक्त

ॐ दिवानक्ताय नमः।
Om Divanaktaya Namah।
जो काल गणनानुसार रात्रि स्वरूप हैं।

700. अहर्निश

ॐ अहर्निशाय नमः।
Om Aharnishaya Namah।
जो काल गणनानुसार दिन और रात के समय के समान समय वाले हैं।

701. पक्ष

ॐ पक्षाय नमः।
Om Pakshaya Namah।
जो पन्द्रह दिन अर्थात् एक पक्ष स्वरूप हैं।

702. मास

ॐ मासाय नमः।
Om Masaya Namah।
जो दो पक्ष अर्थात् एक माह स्वरूप हैं।

703. अयन

ॐ अयनाय नमः।
Om Ayanaya Namah।
जो छः माह अर्थात् एक अयन स्वरूप हैं।

704. वर्ष

ॐ वर्षाय नमः।
Om Varshaya Namah।
जो दो अयन (उत्तरायण और दक्षिणायन) अर्थात् वर्ष स्वरूप हैं।

705. युग

ॐ युगाय नमः।
Om Yugaya Namah।
जो युग स्वरूप अर्थात् बारह हजार दिव्य वर्षों के समान हैं।

706. कल्प

ॐ कल्पाय नमः।
Om Kalpaya Namah।
जो कल्प (ब्रह्मा जी का एक दिन) स्वरूप अर्थात् एक हजार चतुर्युग के समान हैं।

707. महालय

ॐ महालयाय नमः।
Om Mahalayaya Namah।
जो बहत्तर हजार कल्प अर्थात् महाप्रलय (ब्रह्मा जी का भी जब लय हो जाता है) स्वरूप हैं।

708. राशि

ॐ राशये नमः।
Om Rashaye Namah।
जो मेष आदि बारह राशिस्वरूप हैं।

709. तारा

ॐ तारायै नमः।
Om Tarayai Namah।
जो कृत्तिका आदि नक्षत्रस्वरूप हैं।

710. तिथि

ॐ तिथये नमः।
Om Tithaye Namah।
जो पंचाङ्ग में चन्द्रमा की पन्द्रह कलाओं में से एक तिथि स्वरूप हैं।

711. योग

ॐ योगाय नमः।
Om Yogaya Namah।
जो पंचाङ्ग में अमृतसिद्धि एवं आनन्द आदि योग के रूप में विद्यमान हैं।

712. वार

ॐ वाराय नमः।
Om Varaya Namah।
जो सप्ताह के सात वार के स्वरूप में विद्यमान हैं।

713. करण

ॐ करणाय नमः।
Om Karanaya Namah।
जो पंचाङ्ग में बव आदि करण के रूप में विद्यमान हैं।

714. अंशक

ॐ अंशकाय नमः।
Om Amshakaya Namah।
जो ज्योतिष में समस्त अंशों के रूप में रहने वाले हैं।

715. लग्न

ॐ लग्नाय नमः।
Om Lagnaya Namah।
जो ज्योतिष में मेष आदि राशियों के उदय करने वाले लग्नस्वरूप हैं।

716. होरा

ॐ होरायै नमः।
Om Horayai Namah।
जो ज्योतिष में होरा चक्र के रूप में विद्यमान रहने वाले हैं।

717. कालचक्र

ॐ कालचक्राय नमः।
Om Kalachakraya Namah।
जो स्वयं काल के स्वरूप हैं।

718. मेरु

ॐ मेरवे नमः।
Om Merave Namah।
जो मेरु के पर्वत रूप में विद्यमान हैं।

719. सप्तर्षि

ॐ सप्तर्षिभ्यो नमः।
Om Saptarshibhyo Namah।
जो कश्यप आदि सप्तऋषि स्वरूप हैं।

720. ध्रुव

ॐ ध्रुवाय नमः।
Om Dhruvaya Namah।
जो उत्तानपाद के पुत्रस्वरूप हैं।

721. राहु

ॐ राहवे नमः।
Om Rahave Namah।
जो राहु ग्रह स्वरूप हैं।

722. मन्द

ॐ मन्दाय नमः।
Om Mandaya Namah।
जो शनि ग्रह स्वरूप हैं।

723. कवि

ॐ कवये नमः।
Om Kavaye Namah।
जो शुक्र ग्रह स्वरूप हैं।

724. जीव

ॐ जीवाय नमः।
Om Jivaya Namah।
जो बृहस्पति ग्रह स्वरूप हैं।

725. बुध

ॐ बुधाय नमः।
Om Budhaya Namah।
जो बुध ग्रह स्वरूप हैं।

726. भौम

ॐ भौमाय नमः।
Om Bhaumaya Namah।
जो मङ्गल ग्रह स्वरूप हैं।

727. शशी

ॐ शशिने नमः।
Om Shashine Namah।
जो चन्द्र ग्रह स्वरूप हैं।

728. रवि

ॐ रवये नमः।
Om Ravaye Namah।
जो सूर्य ग्रह स्वरूप हैं।

729. काल

ॐ कालाय नमः।
Om Kalaya Namah।
जो जगत का संहार करने वाले हैं।

730. सृष्टि

ॐ सृष्टये नमः।
Om Srishtaye Namah।
जो सृष्टि की रचना करने वाले हैं।

731. स्थिति

ॐ स्थितये नमः।
Om Sthitaye Namah।
जो सृष्टि का पालन करने वाले हैं।

732. विश्व स्थावर जङ्गम

ॐ विश्वस्मै स्थावराय जङ्गमाय नमः।
Om Vishvasmai Sthavaraya Jangamaya Namah।
जो चराचर जगत स्वरूप हैं।

733. भू

ॐ भुवे नमः।
Om Bhuve Namah।
जो पृथ्वी स्वरूप हैं।

734. आप

ॐ अद्भ्यो नमः।
Om Adbhyo Namah।
जो जल स्वरूप हैं।

735. अग्नि

ॐ अग्नये नमः।
Om Agnaye Namah।
जो अग्नि स्वरूप हैं।

736. मरुत्

ॐ मरुते नमः।
Om Marute Namah।
जो वायु स्वरूप हैं।

737. व्योम

ॐ व्योम्ने नमः।
Om Vyomne Namah।
जो आकाश स्वरूप हैं।

738. अहङ्कृति

ॐ अहंकृतये नमः।
Om Ahamkritaye Namah।
जो अहंकार स्वरूप हैं।

739. प्रकृति

ॐ प्रकृतये नमः।
Om Prakritaye Namah।
जो जगत के मूल कारण प्रकृति स्वरूप हैं।

740. पुमान्

ॐ पुंसे नमः।
Om Pumse Namah।
जो पुरुष स्वरूप हैं।

741. ब्रह्मा

ॐ ब्रह्मणे नमः।
Om Brahmane Namah।
जो ब्रह्मा स्वरूप अर्थात् सृष्टि के सृजनकर्ता हैं।

742. विष्णु

ॐ विष्णवे नमः।
Om Vishnave Namah।
जो विष्णु स्वरूप अर्थात् सृष्टि के पालनकर्ता हैं।

743. शिव

ॐ शिवाय नमः।
Om Shivaya Namah।
जो शिव स्वरूप अर्थात् सृष्टि के संहारकर्ता हैं।

744. रुद्र

ॐ रुद्राय नमः।
Om Rudraya Namah।
जो रुद्र स्वरूप हैं।

745. ईश

ॐ ईशाय नमः।
Om Ishaya Namah।
जो ईश्वर स्वरूप हैं।

746. शक्ति

ॐ शक्तये नमः।
Om Shaktaye Namah।
जो शक्ति स्वरूप हैं।

747. सदाशिव

ॐ सदाशिवाय नमः।
Om Sadashivaya Namah।
जो सदैव कल्याण करने वाले हैं।

748. त्रिदश

ॐ त्रिदशेभ्यो नमः।
Om Tridashebhyo Namah।
जो देवगणों के समान हैं।

749. पितृ

ॐ पितृभ्यो नमः।
Om Pitribhyo Namah।
जो पितरों के समान हैं।

750. सिद्ध

ॐ सिद्धेभ्यो नमः।
Om Siddhebhyo Namah।
जो समस्त सिद्धियों के समान हैं।

श्री गणेश सहस्रनाम स्तोत्र — नाम 751 से 999

751. यक्ष

ॐ यक्षेभ्यो नमः।
Om Yakshebhyo Namah।
जो यक्षगणों के समान हैं।

752. रक्ष

ॐ रक्षोभ्यो नमः।
Om Rakshobhyo Namah।
जो राक्षसगणों के समान हैं।

753. किन्नर

ॐ किन्नरेभ्यो नमः।
Om Kinnarebhyo Namah।
जो किन्नरवर्ग के समान हैं।

754. साध्य

ॐ साध्येभ्यो नमः।
Om Sadhyebhyo Namah।
जो साधकजनों के समान हैं।

755. विद्याधर

ॐ विद्याधरेभ्यो नमः।
Om Vidyadharebhyo Namah।
जो विद्याधारण करने वाले गणों के समान हैं।

756. भूत

ॐ भूतेभ्यो नमः।
Om Bhutebhyo Namah।
जो स्वयं भूतगणों के रूप में हैं।

757. मनुष्य

ॐ मनुष्येभ्यो नमः।
Om Manushyebhyo Namah।
जो मनुष्यगणों के रूप में हैं।

758. पशु

ॐ पशुभ्यो नमः।
Om Pashubhyo Namah।
जो पशुगणों के समान हैं।

759. खग

ॐ खगेभ्यो नमः।
Om Khagebhyo Namah।
जो पक्षिगण स्वरूप हैं।

760. समुद्र

ॐ समुद्रेभ्यो नमः।
Om Samudrebhyo Namah।
जो विभिन्न समुद्रों के रूप में विद्यमान हैं।

761. सरित्

ॐ सरिद्भ्यो नमः।
Om Saridbhyo Namah।
जो नदियों के रूप में प्रवाहित होते हैं।

762. शैल

ॐ शैलेभ्यो नमः।
Om Shailebhyo Namah।
जो पर्वतों के रूप में विद्यमान हैं।

763. भूत

ॐ भूताय नमः।
Om Bhutaya Namah।
जो भूतकाल स्वरूप हैं।

764. भव्य

ॐ भव्याय नमः।
Om Bhavyaya Namah।
जो भविष्यकाल स्वरूप हैं।

765. भवोद्भव

ॐ भवोद्भवाय नमः।
Om Bhavodbhavaya Namah।
जो जगत की उत्पत्ति के कारण हैं।

766. साङ्ख्य

ॐ साङ्ख्याय नमः।
Om Sankhyaya Namah।
जो कपिल मुनि प्रणीत साङ्ख्य दर्शन स्वरूप हैं।

767. पातञ्जल

ॐ पातञ्जलाय नमः।
Om Patanjalaya Namah।
जो पतञ्जलि मुनि प्रणीत योगसूत्र रूप में विद्यमान हैं।

768. योग

ॐ योगाय नमः।
Om Yogaya Namah।
जो नागराज शेष द्वारा प्रतिपादित योग रूप हैं।

769. पुराण

ॐ पुराणेभ्यो नमः।
Om Puranebhyo Namah।
जो समस्त पुराणों के रूप में हैं।

770. श्रुति

ॐ श्रुत्यै नमः।
Om Shrutyai Namah।
जो स्वयं वेदस्वरूप हैं।

771. स्मृति

ॐ स्मृत्यै नमः।
Om Smrityai Namah।
जो मनुस्मृति आदि धर्मशास्त्र स्वरूप हैं।

772. वेदाङ्ग

ॐ वेदाङ्गेभ्यो नमः।
Om Vedangebhyo Namah।
जो छः वेदाङ्गों के रूप में विराजमान हैं।

773. सदाचार

ॐ सदाचाराय नमः।
Om Sadacharaya Namah।
जो सदाचार संग्रहात्मक ग्रन्थ स्वरूप हैं।

774. मीमांसा

ॐ मीमांसायै नमः।
Om Mimamsayai Namah।
जो जैमिनि मुनि प्रणीत मीमांसा दर्शन के रूप में अवस्थित हैं।

775. न्यायविस्तर

ॐ न्यायविस्तराय नमः।
Om Nyayavistaraya Namah।
जो गौतम मुनि द्वारा वर्णित न्याय दर्शन स्वरूप हैं।

776. आयुर्वेद

ॐ आयुर्वेदाय नमः।
Om Ayurvedaya Namah।
जो आयुर्वेद के रूप में विद्यमान हैं।

777. धनुर्वेद

ॐ धनुर्वेदाय नमः।
Om Dhanurvedaya Namah।
जो स्वयं अस्त्रविद्या अर्थात् धनुर्वेद के रूप में विराजमान हैं।

778. गान्धर्व

ॐ गान्धर्वाय नमः।
Om Gandharvaya Namah।
जो संगीत शास्त्र अर्थात् गन्धर्व वेद स्वरूप हैं।

779. काव्यनाटक

ॐ काव्यनाटकाय नमः।
Om Kavyanatakaya Namah।
जो साहित्य शास्त्र में वर्णित काव्य एवं नाटक के रूप में विद्यमान हैं।

780. वैखानस

ॐ वैखानसाय नमः।
Om Vaikhanasaya Namah।
जो भगवान विष्णु द्वारा कथित वैखानस तन्त्र स्वरूप हैं।

781. भागवत

ॐ भागवताय नमः।
Om Bhagavataya Namah।
जो स्वयं वैष्णवशास्त्र अर्थात् भागवत स्वरूप में अवस्थित हैं।

782. सात्वत

ॐ सात्वताय नमः।
Om Satvataya Namah।
जो सात्वत तन्त्र स्वरूप हैं।

783. पाञ्चरात्रक

ॐ पाञ्चरात्रकाय नमः।
Om Pancharatrakaya Namah।
जो पाञ्चरात्र आगम स्वरूप अर्थात् चारों वैष्णव तन्त्र स्वरूप हैं।

784. शैव

ॐ शैवाय नमः।
Om Shaivaya Namah।
जो शैव तन्त्र हैं।

785. पाशुपत

ॐ पाशुपताय नमः।
Om Pashupataya Namah।
जो पाशुपत शास्त्र हैं।

786. कालामुख

ॐ कालामुखाय नमः।
Om Kalamukhaya Namah।
जो कालामुख नामक प्रसिद्ध तन्त्र अथवा सम्प्रदाय के स्वरूप हैं।

787. भैरवशासन

ॐ भैरवशासनाय नमः।
Om Bhairavashasanaya Namah।
जो भैरव कथित चारों शैव तन्त्र के रूप में विद्यमान हैं।

788. शाक्त

ॐ शाक्ताय नमः।
Om Shaktaya Namah।
जो शक्तितन्त्र हैं।

789. वैनायक

ॐ वैनायकाय नमः।
Om Vainayakaya Namah।
जो विनायकतन्त्र स्वरूप हैं।

790. सौर

ॐ सौराय नमः।
Om Sauraya Namah।
जो भगवान सूर्य द्वारा कथित तन्त्र स्वरूप हैं।

791. जैन

ॐ जैनाय नमः।
Om Jainaya Namah।
जो स्वयं जैन शास्त्र के रूप में विद्यमान हैं।

792. आर्हतसंहिता

ॐ आर्हतसंहितायै नमः।
Om Arhatasamhitayai Namah।
जो आर्हतशास्त्र अर्थात् जैन धर्म के विशिष्ट ग्रन्थ के रूप में अवस्थित हैं।

793. सत्

ॐ सते नमः।
Om Sate Namah।
जो सभी के कारण के रूप में स्थित हैं।

794. असत्

ॐ असते नमः।
Om Asate Namah।
जो सभी के कार्य के रूप में विद्यमान हैं।

795. व्यक्त

ॐ व्यक्ताय नमः।
Om Vyaktaya Namah।
जो कार्य रूप में व्यक्त अर्थात् प्रत्यक्ष हैं।

796. अव्यक्त

ॐ अव्यक्ताय नमः।
Om Avyaktaya Namah।
जो कार्य के कारण रूप में अर्थात् अप्रत्यक्ष हैं।

797. सचेतन

ॐ सचेतनाय नमः।
Om Sachetanaya Namah।
जो सजीव अर्थात् चेतना से युक्त हैं।

798. अचेतन

ॐ अचेतनाय नमः।
Om Achetanaya Namah।
जो निर्जीव अर्थात् चेतना से रहित हैं।

799. बन्ध

ॐ बन्धाय नमः।
Om Bandhaya Namah।
जो स्वयं भ्रमरूपी बन्धन हैं।

800. मोक्ष

ॐ मोक्षाय नमः।
Om Mokshaya Namah।
जो मोक्षस्वरूप हैं।

801. सुख

ॐ सुखाय नमः।
Om Sukhaya Namah।
जो विशुद्ध आनन्द स्वरूप हैं।

802. भोग

ॐ भोगाय नमः।
Om Bhogaya Namah।
जो अनुभव योग्य हैं।

803. अयोग

ॐ अयोगाय नमः।
Om Ayogaya Namah।
जो आसक्ति रहित हैं।

804. सत्य

ॐ सत्याय नमः।
Om Satyaya Namah।
जिनका तीनों कालों में निर्बाध रूप से संचार हैं।

805. अणु

ॐ अणवे नमः।
Om Anave Namah।
जो मन आदि इन्द्रियों के अगोचर हैं।

806. महान्

ॐ महते नमः।
Om Mahate Namah।
जो परम आनन्द स्वरूप हैं।

807. स्वस्ति

ॐ स्वस्तये नमः।
Om Svastaye Namah।
जो कल्याण स्वरूप अथवा सत्ताधारी हैं।

808. हुं

ॐ हुं नमः।
Om Hum Namah।
जो हुं बीज मन्त्र में विद्यमान हैं।

809. फट्

ॐ फट् नमः।
Om Phat Namah।
जो बीज मन्त्र स्वरूप हैं।

810. स्वधा

ॐ स्वधा नमः।
Om Svadha Namah।
जो सर्वशक्तिशाली मन्त्र अथवा श्राद्ध कर्म स्वरूप हैं।

811. स्वाहा

ॐ स्वाहा नमः।
Om Svaha Namah।
जो यज्ञ कर्म स्वरूप हैं।

812. श्रौषट्

ॐ श्रौषट् नमः।
Om Shraushat Namah।
जो श्रौषट् मन्त्र स्वरूप हैं।

813. वौषट्

ॐ वौषट् नमः।
Om Vaushat Namah।
जो वौषट् मन्त्र स्वरूप हैं।

814. वषण्णमः

ॐ वषट् नमः।
Om Vashat Namah।
जो वषट् मन्त्र स्वरूप हैं।

815. नमो नमः

ॐ नमो नमः।
Om Namo Namah।
जो अभिवादन स्वरूप हैं।

816. ज्ञान

ॐ ज्ञानाय नमः।
Om Jnanaya Namah।
जो मोक्षविषयक ज्ञानस्वरूप हैं।

817. विज्ञान

ॐ विज्ञानाय नमः।
Om Vijnanaya Namah।
जो विज्ञान स्वरूप में विद्यमान हैं।

818. आनन्द

ॐ आनन्दाय नमः।
Om Anandaya Namah।
जो आत्मानन्द स्वरूप हैं।

819. बोध

ॐ बोधाय नमः।
Om Bodhaya Namah।
जो अन्तर्बोध स्वरूप अर्थात् अन्तरिन्द्रिय द्वारा जानने योग्य हैं।

820. संविद

ॐ संविदे नमः।
Om Samvide Namah।
जो बाह्य वृत्तियों द्वारा दुष्प्राप्य हैं।

821. शम

ॐ शमाय नमः।
Om Shamaya Namah।
जो मन के निग्रह स्वरूप हैं।

822. यम

ॐ यमाय नमः।
Om Yamaya Namah।
जो इन्द्रियों पर संयम रखने वाले हैं।

823. एक

ॐ एकस्मै नमः।
Om Ekasmai Namah।
जो एकमात्र अद्वितीय ब्रह्म हैं।

824. एकाक्षराधार

ॐ एकाक्षराधाराय नमः।
Om Ekaksharadharaya Namah।
जो एकाक्षर गं बीजमात्र में स्थित रहने वाले हैं।

825. एकाक्षरपरायण

ॐ एकाक्षरपरायणाय नमः।
Om Ekaksharaparayanaya Namah।
जो ॐ एकाक्षर में स्थित रहने वाले हैं।

826. एकाग्रधी

ॐ एकाग्रधिये नमः।
Om Ekagradhiye Namah।
जो अत्यन्त एकाग्र रहने वाले हैं।

827. एकवीर

ॐ एकवीराय नमः।
Om Ekaviraya Namah।
जो सर्वशक्तिमान एकमात्र वीर स्वरूप हैं।

828. एकानेकस्वरूपधृश्

ॐ एकानेकस्वरूपधृषे नमः।
Om Ekanekasvarupadhrishe Namah।
जो एक होते हुए भी अनेक रूपों को धारण करने वाले हैं।

829. द्विरूप

ॐ द्विरूपाय नमः।
Om Dvirupaya Namah।
जो सगुण और निर्गुण दोनों रूपों में स्थित हैं।

830. द्विभुज

ॐ द्विभुजाय नमः।
Om Dvibhujaya Namah।
जो दो भुजाओं वाले हैं।

831. द्व्यक्ष

ॐ द्व्यक्षाय नमः।
Om Dvyakshaya Namah।
जो दो नेत्रों वाले हैं।

832. द्विरद

ॐ द्विरदाय नमः।
Om Dviradaya Namah।
जो दो दाँत वाले अर्थात् गज के रूप में रहने वाले हैं।

833. द्वीपरक्षक

ॐ द्वीपरक्षकाय नमः।
Om Dviparakshakaya Namah।
जो सातों द्वीपों के रक्षक हैं।

834. द्वैमातुर

ॐ द्वैमातुराय नमः।
Om Dvaimaturaya Namah।
जो माता उमा और गङ्गा के पुत्र हैं।

835. द्विवदन

ॐ द्विवदनाय नमः।
Om Dvivadanaya Namah।
जो दो मुख अर्थात् अग्निमुख और गजमुख वाले हैं।

836. द्वन्द्वातीत

ॐ द्वन्द्वातीताय नमः।
Om Dvandvatitaya Namah।
जो शीत उष्ण आदि द्वन्द दुःखों से रहित हैं।

837. द्व्यातिग

ॐ द्वयातिगाय नमः।
Om Dvayatigaya Namah।
जो रजोगुण और तमोगुण से परे हैं।

838. त्रिधामा

ॐ त्रिधाम्ने नमः।
Om Tridhamne Namah।
जो सूर्य, चन्द्र और अग्नि इन तीनों तेजों से युक्त हैं।

839. त्रिकर

ॐ त्रिकराय नमः।
Om Trikaraya Namah।
जो तीनों लोकों के कर्ता हैं।

840. त्रेतात्रिवर्गफलदायक

ॐ त्रेतात्रिवर्गफलदायकाय नमः।
Om Tretatrivargaphaladayakaya Namah।
जो धर्म, अर्थ और काम रूपी फल प्रदान करने वाले हैं।

841. त्रिगुणात्मा

ॐ त्रिगुणात्मने नमः।
Om Trigunatmane Namah।
जो सत्त्व, रज और तम तीनों गुणों से युक्त प्रकृति के आधार हैं।

842. त्रिलोकादि

ॐ त्रिलोकादये नमः।
Om Trilokadaye Namah।
जो तीनों लोकों के आदि कारण हैं।

843. त्रिशक्तीश

ॐ त्रिशक्तीशाय नमः।
Om Trishaktishaya Namah।
जो प्रभुशक्ति, उत्साहशक्ति और मन्त्रशक्ति नामक त्रिशक्तियों के स्वामी हैं।

844. त्रिलोचन

ॐ त्रिलोचनाय नमः।
Om Trilochanaya Namah।
जो तीन नेत्र वाले हैं।

845. चतुर्बाहु

ॐ चतुर्बाहवे नमः।
Om Chaturbahave Namah।
जो चार भुजाओं वाले हैं।

846. चतुर्दन्त

ॐ चतुर्दन्ताय नमः।
Om Chaturdantaya Namah।
जो चार दातों वाले हैं।

847. चतुरात्मा

ॐ चतुरात्मने नमः।
Om Chaturatmane Namah।
जो आत्मा, अन्तरात्मा, ज्ञानात्मा और परमात्मा नामक चार आत्माओं वाले हैं।

848. चतुर्मुख

ॐ चतुर्मुखाय नमः।
Om Chaturmukhaya Namah।
जो चार मुख वाले हैं।

849. चतुर्विधोपायमय

ॐ चतुर्विधोपायमयाय नमः।
Om Chaturvidhopayamayaya Namah।
जो साम, दाम, दण्ड, भेद चार उपायों से उत्पन्न फल के साधक हैं।

850. चतुर्वर्णाश्रमाश्रय

ॐ चतुर्वर्णाश्रमाश्रयाय नमः।
Om Chaturvarnashramashrayaya Namah।
जो चारों वर्णों और चारों आश्रमों के आधार हैं।

851. चतुर्विधवचोवृत्तिपरिवृत्तिप्रवर्तक

ॐ चतुर्विधवचोवृत्तिपरिवृत्तिप्रवर्तकाय नमः।
Om Chaturvidhavachovrittiparivrittipravartakaya Namah।
जो चार प्रकार की वाणी (परा, पश्यन्ति, मध्यमा, बैखरी) के अधिपति हैं।

852. चतुर्थीपूजनप्रीत

ॐ चतुर्थीपूजनप्रीताय नमः।
Om Chaturthipujanapritaya Namah।
जो चतुर्थी पर पूजन से प्रसन्न होने वाले हैं।

853. चतुर्थीतिथिसम्भव

ॐ चतुर्थीतिथिसम्भवाय नमः।
Om Chaturthitithisambhavaya Namah।
जो चतुर्थी तिथि पर प्रकट होने वाले हैं।

854. पञ्चाक्षरात्मा

ॐ पञ्चाक्षरात्मने नमः।
Om Panchaksharatmane Namah।
जो अकार, उकार, मकार, नाद और बिन्दु (पञ्चाक्षर ॐ) में निवास करने वाले हैं।

855. पञ्चात्मा

ॐ पञ्चात्मने नमः।
Om Panchatmane Namah।
जो पञ्चात्मा ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, ईश्वर और सदाशिव इन पाँच विग्रहों से युक्त हैं।

856. पञ्चास्य

ॐ पञ्चास्याय नमः।
Om Panchasyaya Namah।
जो पाँच मुख वाले हैं।

857. पञ्चकृत्यकृत्

ॐ पञ्चकृत्यकृते नमः।
Om Panchakrityakrite Namah।
जो सृष्टि, पालन, संहार, तिरोभाव और अनुग्रह करने वाले हैं।

858. पञ्चाधार

ॐ पञ्चाधाराय नमः।
Om Panchadharaya Namah।
जो प्रकृति के पञ्चतत्वों को धारण करने वाले हैं।

859. पञ्चवर्ण

ॐ पञ्चवर्णाय नमः।
Om Panchavarnaya Namah।
जो पाँच वर्ण वाले हैं।

860. पञ्चाक्षरपरायण

ॐ पञ्चाक्षरपरायणाय नमः।
Om Panchaksharaparayanaya Namah।
जो नित्य शिव पञ्चाक्षर मन्त्र (नमः शिवाय) का जाप करने वाले हैं।

861. पञ्चताल

ॐ पञ्चतालाय नमः।
Om Panchatalaya Namah।
जो पाँच ताल के बराबर शरीरवाले अर्थात् वामनरूपी हैं।

862. पञ्चकर

ॐ पञ्चकराय नमः।
Om Panchakaraya Namah।
जो पाँच हाथों वाले होने के कारण पञ्चकर कहे जाने जाने वाले हैं।

863. पञ्चप्रणवभावित

ॐ पञ्चप्रणवभाविताय नमः।
Om Panchapranavabhavitaya Namah।
जिन्हें पञ्च प्रणव द्वारा अनुभव किया जा सकता है।

864. पञ्चब्रह्ममयस्फूर्ति

ॐ पञ्चब्रह्ममयस्फूर्तये नमः।
Om Panchabrahmamayasphurtaye Namah।
जो सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष और ईश्वर इन पाँच ब्रह्मस्वरूपों की शक्ति से युक्त हैं।

865. पञ्चावरणवारित

ॐ पञ्चावरणवारिताय नमः।
Om Panchavaranavaritaya Namah।
जो अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनन्दमय इन पाँच कोषों से युक्त हैं।

866. पञ्चभक्ष्यप्रिय

ॐ पञ्चभक्ष्यप्रियाय नमः।
Om Panchabhakshyapriyaya Namah।
जो पाँच प्रकार के भक्ष्य पदार्थों के प्रेमी हैं।

867. पञ्चबाण

ॐ पञ्चबाणाय नमः।
Om Panchabanaya Namah।
जो कामेश्वरी उमा और कामेश्वर शिव के पाँच बीजों से युक्त हैं।

868. पञ्चशिवात्मक

ॐ पञ्चशिवात्मकाय नमः।
Om Panchashivatmakaya Namah।
जो शिव के पाँच रूपों में स्थित रहने वाले हैं।

869. षट्कोणपीठ

ॐ षट्कोणपीठाय नमः।
Om Shatkonapithaya Namah।
जो षट्भुज आसन पर विराजमान होने वाले हैं।

870. षट्चक्रधामा

ॐ षट्चक्रधाम्ने नमः।
Om Shatchakradhamne Namah।
जो मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपूर, अनाहत, विशुद्धि एवं आज्ञा इन छः चक्रों में रहने वाले हैं।

871. षड्ग्रन्थिभेदक

ॐ षड्ग्रन्थिभेदकाय नमः।
Om Shadgranthibhedakaya Namah।
जो छः प्रकार की ग्रन्थियों को भेदकर मुक्ति प्रदान करने वाले हैं।

872. षडध्वध्वान्तविध्वंसी

ॐ षडध्वध्वान्तविध्वंसिने नमः।
Om Shadadhvadhvantavidhvamsine Namah।
जो छः प्रकार के अंधकारों को नष्ट करने वाले हैं।

873. षडङ्गुलमहाह्रद

ॐ षडङ्गुलमहाह्रदाय नमः।
Om Shadangulamahahradaya Namah।
जो छः अंगुल गहरे नाभि वाले हैं।

874. षण्मुख

ॐ षण्मुखाय नमः।
Om Shanmukhaya Namah।
जो छः शास्त्रों को मुख में धारण करने वाले हैं।

875. षण्मुखभ्राता

ॐ षण्मुखभ्रात्रे नमः।
Om Shanmukhabhratre Namah।
जो छः मुख वाले कार्तिकेय के भ्राता हैं।

876. षट्शक्तिपरिवारित

ॐ षट्शक्तिपरिवारिताय नमः।
Om Shatshaktiparivaritaya Namah।
जो छः प्रकार की शक्तियों से घिरे हुये हैं।

877. षड्वैरिवर्गविध्वंसी

ॐ षड्वैरिवर्गविध्वंसिने नमः।
Om Shadvairivargavidhvamsine Namah।
जो काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर इन छः शत्रुओं का नाश करने वाले हैं।

878. षडूर्मिभयभञ्जन

ॐ षडूर्मिभयभञ्जनाय नमः।
Om Shadurmibhayabhanjanaya Namah।
जो भूख, प्यास, शोक, मोह, जरा और मृत्यु इन छः ऊर्मियों के भय का निवारण करने वाले हैं।

879. षट्तर्कदूर

ॐ षट्तर्कदूराय नमः।
Om Shattarkaduraya Namah।
जो छः शास्त्रों के परे हैं।

880. षट्कर्मनिरत

ॐ षट्कर्मनिरताय नमः।
Om Shatkarmanirataya Namah।
जो षट्कर्म (यजन, याजन, अध्ययन, अध्यापन, दान, प्रतिग्रह) में लीन हैं।

881. षड्रसाश्रय

ॐ षड्रसाश्रयाय नमः।
Om Shadrasashrayaya Namah।
जो छः रस (मधुर, अम्ल, लवण, कटु, कषाय तथा तिक्त) में स्थित हैं।

882. सप्तपातालचरण

ॐ सप्तपातालचरणाय नमः।
Om Saptapatalacharanaya Namah।
तल, अतल, आदि नीचे के सात लोक जिनके चरणों के आश्रित हैं।

883. सप्तद्वीपोरुमण्डल

ॐ सप्तद्वीपोरुमण्डलाय नमः।
Om Saptadviporumandalaya Namah।
जम्बू आदि सात द्वीप जिनकी जङ्घाओं के रूप में स्थित हैं।

884. सप्तस्वर्लोकमुकुट

ॐ सप्तस्वर्लोकमुकुटाय नमः।
Om Saptasvarlokamukutaya Namah।
जो भू लोक से लेकर गोलोक पर्यन्त सात स्वर्लोक जिनके मुकुट हैं।

885. सप्तसप्तिवरप्रद

ॐ सप्तसप्तिवरप्रदाय नमः।
Om Saptasaptivarapradaya Namah।
जो सूर्य को वर प्रदान करने वाले हैं।

886. सप्ताङ्गराज्यसुखद

ॐ सप्ताङ्गराज्यसुखदाय नमः।
Om Saptangarajyasukhadaya Namah।
जो सप्तांग राज्य सुख प्रदान करने वाले हैं।

887. सप्तर्षिगणमण्डित

ॐ सप्तर्षिगणमण्डिताय नमः।
Om Saptarshiganamanditaya Namah।
जो कश्यप आदि सात ऋषियों तथा गण-देवताओं से सुशोभित हैं।

888. सप्तछन्दोनिधि

ॐ सप्तछन्दोनिधये नमः।
Om Saptachhandonidhaye Namah।
जो गायत्री से लेकर जगती पर्यन्त सात वैदिक छन्दों के आश्रय हैं।

889. सप्तहोता

ॐ सप्तहोत्रे नमः।
Om Saptahotre Namah।
जो होता से लेकर उद्गाता पर्यन्त सात होतृगण स्वरूप हैं।

890. सप्तस्वराश्रय

ॐ सप्तस्वराश्रयाय नमः।
Om Saptasvarashrayaya Namah।
जो सात स्वरों (षड्ज, ऋषभ, गान्धार, मध्यम, पञ्चम, धैवत, निषाद) के आधार हैं।

891. सप्ताब्धिकेलिकासार

ॐ सप्ताब्धिकेलिकासाराय नमः।
Om Saptabdhikelikasaraya Namah।
सातों समुद्र जिनके क्रीड़ा-सरोवर हैं।

892. सप्तमातृनिषेवित

ॐ सप्तमातृनिषेविताय नमः।
Om Saptamatrinishevitaya Namah।
जो ब्राह्मी, माहेश्वरी आदि सात मातृकाओं से सेवित हैं।

893. सप्तच्छन्दोमोदमद

ॐ सप्तच्छन्दोमोदमदाय नमः।
Om Saptachchhandomodamadaya Namah।
जो पथ्य नामक सात छन्दों से उत्पन्न आनन्द में लीन हैं।

894. सप्तच्छन्दोमखप्रभु

ॐ सप्तच्छन्दोमखप्रभवे नमः।
Om Saptachchhandomakhaprabhave Namah।
जो सप्त छन्दों की ऊर्जा के स्रोत हैं।

895. अष्टमूर्तिध्येयमूर्ति

ॐ अष्टमूर्तिध्येयमूर्तये नमः।
Om Ashtamurtidhyeyamurtaye Namah।
जो भगवान् शिव के द्वारा भी पूजनीय हैं।

896. अष्टप्रकृतिकारण

ॐ अष्टप्रकृतिकारणाय नमः।
Om Ashtaprakritikaranaya Namah।
जो पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश, मन, बुद्धि और अहंकार इन आठ प्रकृतियों की उत्पत्ति के कारण हैं।

897. अष्टाङ्गयोगफलभू

ॐ अष्टाङ्गयोगफलभुवे नमः।
Om Ashtangayogaphalabhuve Namah।
जो अष्टाङ्गयोग के माध्यम फल प्रदान करने वाले हैं।

898. अष्टपत्राम्बुजासन

ॐ अष्टपत्राम्बुजासनाय नमः।
Om Ashtapatrambujasanaya Namah।
जो अष्टदल कमल पुष्प के आसन पर विराजमान रहने वाले हैं।

899. अष्टशक्तिसमृद्धिश्री

ॐ अष्टशक्तिसमृद्धिश्रिये नमः।
Om Ashtashaktisamriddhishriye Namah।
जो तीव्रा, ज्वालिनी आदि अष्ट शक्तियों द्वारा पूजित होने के कारण श्रीसम्पन्न हैं।

900. अष्टैश्वर्यप्रदायक

ॐ अष्टैश्वर्यप्रदायकाय नमः।
Om Ashtaishvaryapradayakaya Namah।
जो अणिमा आदि आठ सिद्धियों के दाता हैं।

901. अष्टपीठोपपीठश्री

ॐ अष्टपीठोपपीठश्रिये नमः।
Om Ashtapithopapithashriye Namah।
जो अष्टपीठ एवं उपपीठों को ऐश्वर्य युक्त करने वाले हैं।

902. अष्टमातृसमावृत

ॐ अष्टमातृसमावृताय नमः।
Om Ashtamatrisamavritaya Namah।
सप्त मातृका एवं महालक्ष्मी जिनके आवरण देव के रूप में विराजमान हैं।

903. अष्टभैरवसेव्य

ॐ अष्टभैरवसेव्याय नमः।
Om Ashtabhairavasevyaya Namah।
जो बटुक आदि अष्ट भैरवों द्वारा पूजे जाने वाले हैं।

904. अष्टवसुवन्द्य

ॐ अष्टवसुवन्द्याय नमः।
Om Ashtavasuvandyaya Namah।
जो धर से लेकर प्रभास तक आठ वसुओं द्वारा पूजे जाने वाले हैं।

905. अष्टमूर्तिभृत्

ॐ अष्टमूर्तिभृते नमः।
Om Ashtamurtibhrite Namah।
जो अष्टमूर्ति रूप धारण करने वाले हैं।

906. अष्टचक्रस्फुरन्मूर्ति

ॐ अष्टचक्रस्फुरन्मूर्तये नमः।
Om Ashtachakrasphuranmurtaye Namah।
जो अष्ट चक्र यन्त्र स्वरूप हैं।

907. अष्टद्रव्यहविःप्रिय

ॐ अष्टद्रव्यहविःप्रियाय नमः।
Om Ashtadravyahavihpriyaya Namah।
जो ईख, सत्तू आदि अष्टद्रव्यों से प्रसन्न होने वाले हैं।

908. नवनागासनाध्यासी

ॐ नवनागासनाध्यासिने नमः।
Om Navanagasanadhyasine Namah।
जो वासुकी, तक्षक, कुलक, कर्कोटक आदि नौ नागों के आसन पर बैठने वाले हैं।

909. नवनिध्यनुशासिता

ॐ नवनिध्यनुशासित्रे नमः।
Om Navanidhyanushasitre Namah।
जो नौ निधियों पर शासन करने वाले हैं।

910. नवद्वारपुराधार

ॐ नवद्वारपुराधाराय नमः।
Om Navadvarapuradharaya Namah।
जो नौ द्वारों वाली मानव देह के आधार हैं।

911. नवाधारनिकेतन

ॐ नवाधारनिकेतनाय नमः।
Om Navadharaniketanaya Namah।
जो कुलाकुल, सहस्रार, मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपूर, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा और लम्बिका इन नौ आधारों में निवास करने वाले हैं।

912. नवनारायणस्तुत्य

ॐ नवनारायणस्तुत्याय नमः।
Om Navanarayanastutyaya Namah।
जो धर्म, आदि, अनन्त, बदरी, रूप, शंकर, सुन्दर, लक्ष्मी और साध्य इन नौ नारायणों द्वारा पूजित हैं।

913. नवदुर्गानिषेवित

ॐ नवदुर्गानिषेविताय नमः।
Om Navadurganishevitaya Namah।
नौदुर्गा जिनकी उपासना करती हैं।

914. नवनाथमहानाथ

ॐ नवनाथमहानाथाय नमः।
Om Navanathamahanathaya Namah।
जो नौ नाथों (ज्ञान, प्रकाश, सत्य, आनन्द, विमर्श, स्वभाव, सुभग, प्रतिभ और पूर्ण) के महानाथ हैं।

915. नवनागविभूषण

ॐ नवनागविभूषणाय नमः।
Om Navanagavibhushanaya Namah।
जो कर्कोटक आदि नौ नागों को आभूषण के रूप में धारण करने वाले हैं।

916. नवरत्नविचित्राङ्ग

ॐ नवरत्नविचित्राङ्गाय नमः।
Om Navaratnavichitrangaya Namah।
जो नौ प्रकार के रत्नों से सुशोभित हैं।

917. नवशक्तिशिरोधृत

ॐ नवशक्तिशिरोधृताय नमः।
Om Navashaktishirodhritaya Namah।
नवशक्तियाँ जिन्हें अपने मस्तक पर धारण करती हैं।

918. दशात्मक

ॐ दशात्मकाय नमः।
Om Dashatmakaya Namah।
जो दसों दिशाओं में व्याप्त हैं।

919. दशभुज

ॐ दशभुजाय नमः।
Om Dashabhujaya Namah।
जो दस भुजाओं वाले हैं।

920. दशदिक्पतिवन्दित

ॐ दशदिक्पतिवन्दिताय नमः।
Om Dashadikpativanditaya Namah।
जो इन्द्र आदि दसों दिशाओं के दिक्पालों द्वारा पूजे जाने वाले हैं।

921. दशाध्याय

ॐ दशाध्यायाय नमः।
Om Dashadhyayaya Namah।
जो चार वेद और छः अंगों के अध्येता हैं।

922. दशप्राण

ॐ दशप्राणाय नमः।
Om Dashapranaya Namah।
जो प्राण, अपान, व्यान आदि दस प्रकार के प्राणों से युक्त हैं।

923. दशेन्द्रियनियामक

ॐ दशेन्द्रियनियामकाय नमः।
Om Dashendriyaniyamakaya Namah।
जो पाँच ज्ञानेन्द्रियों एवं पाँच कर्मेन्द्रियों को वश में रखने वाले हैं।

924. दशाक्षरमहामन्त्र

ॐ दशाक्षरमहामन्त्राय नमः।
Om Dashaksharamahamantraya Namah।
जो दस अक्षरवाले (ॐ हस्तिपिशाचिनी हुं स्वाहा) महामन्त्रस्वरूप स्वरूप हैं।

925. दशाशाव्यापिविग्रह

ॐ दशाशाव्यापिविग्रहाय नमः।
Om Dashashavyapivigrahaya Namah।
जो दशों दिशाओं में व्याप्त शरीर वाले हैं।

926. एकादशादि रुद्र स्तुत

ॐ एकदशादिभिः रुद्रैः स्तुताय नमः।
Om Ekadashadibhih Rudraih Stutaya Namah।
जो ग्यारह से लेकर एक हजार तक रुद्रों द्वारा पूजित हैं।

927. एकादशाक्षर

ॐ एकादशाक्षराय नमः।
Om Ekadashaksharaya Namah।
जो ग्यारह अक्षर मन्त्र स्वरूप हैं।

928. द्वादशोद्दण्डदोर्दण्ड

ॐ द्वादशोद्दण्डदोर्दण्डाय नमः।
Om Dvadashoddandadordandaya Namah।
जो बारह भुजाओं वाले दण्डधारी स्वरूप में विराजमान हैं।

929. द्वादशान्तनिकेतन

ॐ द्वादशान्तनिकेतनाय नमः।
Om Dvadashantaniketanaya Namah।
जो ललाट से लेकर ब्रह्मरन्ध्र तक अर्थात् द्वादशान्त में निवास करने हैं।

930. त्रयोदशभिदाभिन्नविश्वेदेवाधिदैवत

ॐ त्रयोदशभिदाभिन्नविश्वेदेवाधिदैवताय नमः।
Om Trayodashabhidabhinnavishvedevadhidaivataya Namah।
जो तेरह विश्वेदेवों के अधिदेवता हैं।

931. चतुर्दशेन्द्रवरद

ॐ चतुर्दशेन्द्रवरदाय नमः।
Om Chaturdashendravaradaya Namah।
जो चौदह प्रकार के इन्द्रों को वर प्रदान करने वाले हैं।

932. चतुर्दशमनुप्रभु

ॐ चतुर्दशमनुप्रभवे नमः।
Om Chaturdashamanuprabhave Namah।
जो चौदह प्रकार के मनुओं के अधिपति हैं।

933. चतुर्दशादिविद्याढ्य

ॐ चतुर्दशादिविद्याढ्याय नमः।
Om Chaturdashadividyadhyaya Namah।
जो चौदह प्रकार की विद्याओं में पारंगत हैं।

934. चतुर्दशजगत्प्रभु

ॐ चतुर्दशजगत्प्रभवे नमः।
Om Chaturdashajagatprabhave Namah।
जो चौदह भुवनों (सप्त ऊर्ध्वलोक एवं सप्त पाताल लोक) के स्वामी हैं।

935. सामपञ्चदश

ॐ सामपञ्चदशाय नमः।
Om Samapanchadashaya Namah।
जो सामवेद के पन्द्रह भागों के रूप में विद्यमान हैं।

936. पञ्चदशीशीतांशुनिर्मल

ॐ पञ्चदशीशीतांशुनिर्मलाय नमः।
Om Panchadashishitamshunirmalaya Namah।
जो पूर्णिमा के चन्द्रमा के समान शीतल एवं निर्मल हैं।

937. षोडशाधारनिलय

ॐ षोडशाधारनिलयाय नमः।
Om Shodashadharanilayaya Namah।
जो मानव शरीर के सोलह आधारों के रूप में स्थित रहने वाले हैं।

938. षोडशस्वरमातृक

ॐ षोडशस्वरमातृकाय नमः।
Om Shodashasvaramatrikaya Namah।
जो सोलह स्वर अक्षर स्वरूप हैं।

939. षोडशान्तपदावास

ॐ षोडशान्तपदावासाय नमः।
Om Shodashantapadavasaya Namah।
जो षोडशान्त (ब्रह्मरन्ध्र अन्तर्गत) में निवास करने वाले हैं।

940. षोडशेन्दुकलात्मक

ॐ षोडशेन्दुकलात्मकाय नमः।
Om Shodashendukalatmakaya Namah।
जो अमृता और मानिनी आदि सोलह कलाओं से युक्त चन्द्र के समान हैं।

941. कलासप्तदशी

ॐ कलासप्तदश्यै नमः।
Om Kalasaptadashyai Namah।
जो त्रिपुरागम में प्रसिद्ध सप्तदशी नामक कलास्वरूप हैं।

942. सप्तदश

ॐ सप्तदशाय नमः।
Om Saptadashaya Namah।
जो सत्रह यज्ञों के स्वरूप हैं।

943. सप्तदशाक्षर

ॐ सप्तदशाक्षराय नमः।
Om Saptadashaksharaya Namah।
जो सत्रह अक्षर वाले मन्त्र में स्थित हैं।

944. अष्टादशद्वीपपति

ॐ अष्टादशद्वीपपतये नमः।
Om Ashtadashadvipapataye Namah।
जो अठारह द्वीपों के अधिपति हैं।

945. अष्टादशपुराणकृत्

ॐ अष्टादशपुराणकृते नमः।
Om Ashtadashapuranakrite Namah।
जो अठारह पुराणों के रचीयता हैं।

946. अष्टादशौषधीसृष्टि

ॐ अष्टादशौषधीसृष्टये नमः।
Om Ashtadashaushadhisrishtaye Namah।
जो अठारह प्रकार की औषधियों के उत्पत्तिकर्ता हैं।

947. अष्टादशविधिस्मृत

ॐ अष्टादशविधिस्मृताय नमः।
Om Ashtadashavidhismritaya Namah।
जो मीमांसा दर्शन द्वारा प्रतिपादित अठारह प्रकार की विधियों के समान हैं।

948. अष्टादशलिपिव्यष्टिसमष्टिज्ञानकोविद

ॐ अष्टादशलिपिव्यष्टिसमष्टिज्ञानकोविदाय नमः।
Om Ashtadashalipivyashtisamashtijnanakovidaya Namah।
जो अठारह प्रकार की लिपियों का ज्ञान रखने वाले हैं।

949. एकविंश पुमान्

ॐ एकविंशाय पुंसे नमः।
Om Ekavimshaya Pumse Namah।
जो पञ्च ज्ञानेन्द्रिय आदि से परे इक्कीसवे तत्त्व हैं।

950. एकविंशत्यङ्गुलिपल्लव

ॐ एकविंशत्यङ्गुलिपल्लवाय नमः।
Om Ekavimshatyangulipallavaya Namah।
जो इक्कीस कोमल अंगुलियों एवं एक सूँड वाले हैं।

951. चतुर्विंशतितत्त्वात्मा

ॐ चतुर्विंशतितत्त्वात्मने नमः।
Om Chaturvimshatitattvatmane Namah।
जो चौबीस तत्व वाले हैं।

952. पञ्चविंशाख्यपूरुष

ॐ पञ्चविंशाख्यपूरुषाय नमः।
Om Panchavimshakhyapurushaya Namah।
जो चौबीस तत्वों से परे पच्चीसवें पुरुष हैं।

953. सप्तविंशतितारेश

ॐ सप्तविंशतितारेशाय नमः।
Om Saptavimshatitareshaya Namah।
जो अश्विनी आदि सत्ताईस नक्षत्रों के स्वामी हैं।

954. सप्तविंशतियोगकृत्

ॐ सप्तविंशतियोगकृते नमः।
Om Saptavimshatiyogakrite Namah।
जो सत्ताईस योगों के कर्ता हैं।

955. द्वात्रिंशद्भैरवाधीश

ॐ द्वात्रिंशद्भैरवाधीशाय नमः।
Om Dvatrimshadbhairavadhishaya Namah।
जो बत्तीस प्रकार के भैरवों के स्वामी हैं।

956. चतुस्त्रिंशन्महाह्रद

ॐ चतुस्त्रिंशन्महाह्रदाय नमः।
Om Chatustrimshanmahahradaya Namah।
जो चौंतीस सरोवरों से भी विशाल सरोवर स्वरूप हैं।

957. षट्त्रिंशत्तत्त्वसम्भूति

ॐ षट्त्रिंशत्तत्त्वसम्भूतये नमः।
Om Shattrimshattattvasambhutaye Namah।
जो छत्तीस तत्वों (सिद्धान्तों) के स्वामी हैं।

958. अष्टात्रिंशत्कलातनु

ॐ अष्टात्रिंशत्कलातनवे नमः।
Om Ashtatrimshatkalatanave Namah।
जो अड़तीस कलाओं से युक्त हैं।

959. नमदेकोनपञ्चाशन्मरुद्वर्गनिरर्गल

ॐ नमदेकोनपञ्चाशन्मरुद्वर्गनिरर्गलाय नमः।
Om Namadekonapanchashanmarudvarganirargalaya Namah।
जो उनचास प्रकार के मरुत गणों के विघ्न दूर करने वाले हैं।

960. पञ्चाशदक्षरश्रेणि

ॐ पञ्चाशदक्षरश्रेण्यै नमः।
Om Panchashadaksharashrenyai Namah।
जो संस्कृत वर्णमाला में पचास अक्षर की श्रृंखला हैं।

961. पञ्चाशद्रुद्रविग्रह

ॐ पञ्चाशद्रुद्रविग्रहाय नमः।
Om Panchashadrudravigrahaya Namah।
जो पचास प्रकार के रुद्रों के रूप में स्थित हैं।

962. पञ्चाशद्विष्णुशक्तीश

ॐ पञ्चाशद्विष्णुशक्तीशाय नमः।
Om Panchashadvishnushaktishaya Namah।
जो पचास प्रकार की विष्णु शक्तियों के स्वामी हैं।

963. पञ्चाशन्मातृकालय

ॐ पञ्चाशन्मातृकालयाय नमः।
Om Panchashanmatrikalayaya Namah।
जो पचास प्रकार के मातृका वर्ण के रूप में स्थित हैं।

964. द्विपञ्चाशद्वपुःश्रेणि

ॐ द्विपञ्चाशद्वपुःश्रेण्यै नमः।
Om Dvipanchashadvapuhshrenyai Namah।
जो लिङ्गपुराण कथित बावन प्रकार की शारीरिक संरचना के स्वामी हैं।

965. त्रिषष्ट्यक्षरसंश्रय

ॐ त्रिषष्ट्यक्षरसंश्रयाय नमः।
Om Trishashtyaksharasamshrayaya Namah।
जो तिरसठ अक्षरों के आधार हैं।

966. चतुष्षष्ट्यर्णनिर्णेता

ॐ चतुष्षष्ट्यर्णनिर्णेत्रे नमः।
Om Chatushshashtyarnanirnetre Namah।
जो चौंसठ अक्षरों के निर्णायक हैं।

967. चतुःषष्टिकलानिधि

ॐ चतुःषष्टिकलानिधये नमः।
Om Chatuhshashtikalanidhaye Namah।
जो चौंसठ कलाओं के ज्ञाता हैं।

968. चतुष्षष्टिमहासिद्धयोगिनीवृन्दवन्दित

ॐ चतुष्षष्टिमहासिद्धयोगिनीवृन्दवन्दिताय नमः।
Om Chatushshashtimahasiddhayoginivrindavanditaya Namah।
जो अक्षोभ्य आदि चौंसठ महासिद्धों और उतनी ही योगिनियों द्वारा पूजित हैं।

969. अष्टषष्टिमहातीर्थक्षेत्रभैरवभावन

ॐ अष्टषष्टिमहातीर्थक्षेत्रभैरवभावनाय नमः।
Om Ashtashashtimahatirthakshetrabhairavabhavanaya Namah।
जो शिव के अड़सठ महतीर्थों में स्थित भैरव द्वारा पूजे जाने वाले हैं।

970. चतुर्नवतिमन्त्रात्मा

ॐ चतुर्नवतिमन्त्रात्मने नमः।
Om Chaturnavatimantratmane Namah।
जो चौरानबे मूल मन्त्रों के रूप में स्थित हैं।

971. षण्णवत्यधिकप्रभु

ॐ षण्णवत्यधिकप्रभवे नमः।
Om Shannavatyadhikaprabhave Namah।
जो तन्त्रराज तन्त्र में वर्णित छियानबे से अधिक देवताओं के अधिपति हैं।

972. शतानन्द

ॐ शतानन्दाय नमः।
Om Shatanandaya Namah।
जो मानुष आदि से सेकड़ों गुना प्रसन्न रहने वाले हैं।

973. शतधृति

ॐ शतधृतये नमः।
Om Shatadhritaye Namah।
जो अनन्त ब्रह्माण्ड को धारण करने वाले हैं।

974. शतपत्रायतेक्षण

ॐ शतपत्रायतेक्षणाय नमः।
Om Shatapatrayatekshanaya Namah।
जो कमल के समान विशाल नयनों वाले हैं।

975. शतानीक

ॐ शतानीकाय नमः।
Om Shatanikaya Namah।
जो अनन्त सैनिकों के स्वामी हैं।

976. शतमख

ॐ शतमखाय नमः।
Om Shatamakhaya Namah।
जो सौ यज्ञों का अनुष्ठान करने वाले इन्द्रस्वरूप हैं।

977. शतधारावरायुध

ॐ शतधारावरायुधाय नमः।
Om Shatadharavarayudhaya Namah।
जो सौ धारों से युक्त तीक्ष्ण वज्र धारण करने वाले हैं।

978. सहस्रपत्रनिलय

ॐ सहस्रपत्रनिलयाय नमः।
Om Sahasrapatranilayaya Namah।
जो सहस्रार चक्र में स्थित रहने वाले हैं।

979. सहस्रफणभूषण

ॐ सहस्रफणभूषणाय नमः।
Om Sahasraphanabhushanaya Namah।
जो सहस्र फन वाले नाग से सुशोभित हैं।

980. सहस्रशीर्षा पुरुष

ॐ सहस्रशीर्ष्णे पुरुषाय नमः।
Om Sahasrashirshne Purushaya Namah।
जो असंख्य मस्तक वाले हैं।

981. सहस्राक्ष

ॐ सहस्राक्षाय नमः।
Om Sahasrakshaya Namah।
जो सहस्र नेत्रों वाले हैं।

982. सहस्रपात्

ॐ सहस्रपदे नमः।
Om Sahasrapade Namah।
जो सहस्र पैरों वाले हैं।

983. सहस्रनामसंस्तुत्य

ॐ सहस्रनामसंस्तुत्याय नमः।
Om Sahasranamasamstutyaya Namah।
जिनकी स्तुति सहस्र नामों द्वारा की जाती है।

984. सहस्राक्षबलापह

ॐ सहस्राक्षबलापहाय नमः।
Om Sahasrakshabalapahaya Namah।
जो इन्द्र के बल को भी विध्वस्त कर देने वाले हैं।

985. दशसहस्रफणिभृत्फणिराजकृतासन

ॐ दशसाहस्रफणिभृत्फणिराजकृतासनाय नमः।
Om Dashasahasraphanibhritphanirajakritasanaya Namah।
जो दस हजार फण धारण करने वाले नागराज वासुकि के ऊपर आसीन हैं।

986. अष्टाशीतिसहस्रौघमहर्षिस्तोत्रयन्त्रित

ॐ अष्टाशीतिसहस्राद्यमहर्षिस्तोत्रयन्त्रिताय नमः।
Om Ashtashitisahasradyamaharshistotrayantritaya Namah।
जो अट्ठासी हजार आद्य महर्षियों की स्तुति एवं श्रद्धा के बन्धन में हैं।

987. लक्षाधीशप्रियाधार

ॐ लक्षाधीशप्रियाधाराय नमः।
Om Lakshadhishapriyadharaya Namah।
जो लक्षपतियों के प्रिय आधार हैं।

988. लक्षाधीशमनोमय

ॐ लक्षाधीशमनोमयाय नमः।
Om Lakshadhishamanomayaya Namah।
जो एकाग्रचित्त एवं सत्पुरुष स्वरूप हैं।

989. चतुर्लक्षजपप्रीत

ॐ चतुर्लक्षजपप्रीताय नमः।
Om Chaturlakshajapapritaya Namah।
जो चार लाख मन्त्र जप द्वारा प्रसन्न होने वाले हैं।

990. चतुर्लक्षप्रकाशित

ॐ चतुर्लक्षप्रकाशिताय नमः।
Om Chaturlakshaprakashitaya Namah।
जो अठारह पुराणों में वर्णित चार लाख श्लोकों द्वारा वर्णित रूप वाले हैं।

991. चतुरशीतिलक्षाणां जीवानां देहसंस्थित

ॐ चतुरशीतिलक्षाणां जीवानां देहसंस्थिताय नमः।
Om Chaturashitilakshanam Jivanam Dehasamsthitaya Namah।
जो चौरासी लाख जीवों के शरीर में विराजमान हैं।

992. कोटिसूर्यप्रतीकाश

ॐ कोटिसूर्यप्रतीकाशाय नमः।
Om Kotisuryapratikashaya Namah।
जो करोड़ों सूर्य के समान तेज वाले हैं।

993. कोटिचन्द्रांशुनिर्मल

ॐ कोटिचन्द्रांशुनिर्मलाय नमः।
Om Kotichandramshunirmalaya Namah।
जो करोड़ों चन्द्रमा के समान निर्मल हैं।

994. शिवाभवाध्युष्टकोटिविनायकधुरन्धर

ॐ शिवाभवाध्युष्टकोटिविनायकधुरन्धराय नमः।
Om Shivabhavadhyushtakotivinayakadhurandharaya Namah।
जो करोड़ो विनायकों का नेतृत्व करने वाले हैं।

995. सप्तकोटिमहामन्त्रमन्त्रितावयवद्युति

ॐ सप्तकोटिमहामन्त्रमन्त्रितावयवद्युतये नमः।
Om Saptakotimahamantramantritavayavadyutaye Namah।
जो सात करोड़ मन्त्रों का तेज धारण करने वाले हैं।

996. त्रयस्त्रिंशत्कोटिसुरश्रेणीप्रणतपादुक

ॐ त्रयस्त्रिंशत्कोटिसुरश्रेणीप्रणतपादुकाय नमः।
Om Trayastrimshatkotisurashrenipranatapadukaya Namah।
तैंतीस कोटि देव जिनकी चरण पादुकाओं को प्रणाम करते हैं।

997. अनन्तनाम

ॐ अनन्तनाम्ने नमः।
Om Anantanamne Namah।
जो अनन्त नामों वाले हैं।

998. अनन्तश्री

ॐ अनन्तश्रिये नमः।
Om Anantashriye Namah।
जो अनन्त विद्या एवं सम्पत्ति वाले हैं।

999.ॐ अनन्तदेवतासेव्याय नमः।

Om Anantadevata-sevyaya Namah।
अर्थ: जो अनन्त देवताओं द्वारा सेवित एवं पूजित हैं।

1000. अनन्तानन्तसौख्यद

ॐ अनन्तानन्तसौख्यदाय नमः।
Om Anantanantasaukhyadaya Namah।
जो अनन्त प्रकार की धन-सम्पदा एवं सुख-सौभाग्य प्रदान करने वाले हैं।

भगवान / God

साईं बाबा मंत्र जाप करते हुए शिरडी साईं बाबा का दिव्य स्वरूप

श्री शिरडी साईं बाबा (Shri Shirdi Sai Baba)​

भगवान और गुरु पर सच्चा विश्वास मनुष्य के जीवन को बदल सकता है। श्री शिरडी साईं बाबा (Shri Shirdi Sai Baba) की शिक्षाएं भी इसी सत्य को दर्शाती हैं। उनका संदेश था कि जीवन में

भगवान श्री हनुमान (Lord Shree Hanuman)​

भगवान श्री हनुमान (Lord Shree Hanuman) सनातन धर्म में भक्ति, निष्ठा और अपार शक्ति के सबसे महान प्रतीकों में माने जाते हैं। Bhakti Margdarshan के अनुसार जब कोई भक्त बिना किसी स्वार्थ और अपेक्षा के

मंदिर (Temple)

वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर

बांके बिहारी मंदिर वृंदावन: इतिहास, कथा, दर्शन समय और महत्व (Banke Bihari Mandir Vrindavan)

वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर का इतिहास, श्री बांके बिहारी जी के प्राकट्य की परंपरा, स्वामी हरिदास जी से संबंध, दर्शन समय और मंदिर की विशेष सेवा-पद्धति विस्तार से जानें।
वृंदावन का प्रेम मंदिर राधा कृष्ण मंदिर

प्रेम मंदिर, वृंदावन: इतिहास, दर्शन समय, राधा-कृष्ण की झांकियां और यात्रा की पूरी जानकारी (Prem Mandir Vrindavan)

प्रेम मंदिर वृंदावन भगवान श्रीराधा-कृष्ण और श्रीसीताराम को समर्पित भव्य मंदिर है। जानिए इसका इतिहास, वास्तुकला, दर्शन समय, कृष्ण लीला की झांकियां और म्यूजिकल एवं डिजिटल फाउंटेन की पूरी जानकारी।
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर महाराष्ट्र

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की अद्भुत कथा: घुश्मा की भक्ति से कैसे प्रकट हुए भगवान शिव? जानिए मंदिर का इतिहास और रहस्य (Grishneshwar Jyotirlinga Mandir)

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में 12वां और अंतिम ज्योतिर्लिंग माना जाता है। जानिए घुश्मा की अद्भुत शिवभक्ति से जुड़ी पौराणिक कथा, मंदिर का इतिहास, अहिल्याबाई होलकर का योगदान, शानदार वास्तुकला, पूजा-पद्धति, दर्शन
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर महाराष्ट्र

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर: भगवान शिव ने क्यों धारण किया भीमाशंकर रूप? जानिए कथा, इतिहास और मंदिर का रहस्य (Bhimashankar Jyotirlinga Mandir)

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है। महाराष्ट्र के सह्याद्री पर्वतों में स्थित इस पवित्र मंदिर से भीमासुर की कथा, प्राचीन इतिहास, सुंदर नागर स्थापत्य, भीमा नदी और प्राकृतिक सौंदर्य

ब्लॉग / Blog

0%
लिंक कॉपी हो गया ✓
Scroll to Top