श्री गणेश जी की आरती भगवान गणपति बप्पा की पूजा का एक महत्वपूर्ण और पावन भाग मानी जाती है। सनातन धर्म में भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य देवता और विघ्नहर्ता कहा गया है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य, पूजा, यज्ञ या मांगलिक कार्य की शुरुआत उनके स्मरण और आरती से की जाती है। श्रद्धा और भक्ति के साथ श्री गणेश जी की आरती करने से जीवन के विघ्न दूर होने, बुद्धि, विवेक, सुख-समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होने की धार्मिक मान्यता है। विशेष रूप से बुधवार, गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी तथा अन्य शुभ अवसरों पर श्री गणेश जी की आरती का पाठ और गायन अत्यंत शुभ एवं मंगलकारी माना जाता है।
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
श्री गणेश जी की आरती: लिरिक्स, महत्व और सरल पूजा विधि
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान श्री गणेश की आराधना से होती है। श्री गणेश जी की आरती का गान करने से न केवल कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, बल्कि घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है। यदि आप भी अपने जीवन में रिद्धि-सिद्धि और सौभाग्य चाहते हैं, तो प्रतिदिन विघ्नहर्ता की इस पावन आरती का पाठ अवश्य करें।
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अपनी भक्ति और मानसिक शांति के लिए प्रतिदिन श्री गणेश जी की आरती (Shri Ganesh Ji Ki Aarti) पूरी श्रद्धा के साथ करें।
श्री गणेश जी की आरती का महत्व
भगवान श्री गणेश को ‘विघ्नहर्ता’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है दुखों और बाधाओं को हरने वाले। शास्त्रों के अनुसार गणेश जी बुद्धि और विवेक के देवता हैं। उनकी आरती करने से व्यक्ति को सही निर्णय लेने की शक्ति मिलती है। आरती का नियमित पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और नकारात्मकता दूर होती है।
श्री गणेश जी की आरती करने के लाभ
विघ्न और बाधाएँ दूर होती हैं
गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है। उनकी आरती करने से कामों में आने वाली बाधाएँ धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।
बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि
गणेश जी बुद्धि और विवेक के देवता हैं। उनकी आरती करने से मन शांत रहता है और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
घर में सुख-समृद्धि आती है
नियमित आरती से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
मन को शांति मिलती है
आरती करने से मन एकाग्र होता है और मानसिक तनाव कम होता है।
नए कार्यों में सफलता
किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा और आरती करने की परंपरा है, जिससे कार्य सफल होने की संभावना बढ़ती है।
नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
आरती के दीपक और मंत्रों की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
श्री गणेश जी की आरती करने की विधि (Step-by-Step)
स्नान करके शुद्ध होकर पूजा करें
सबसे पहले सुबह या शाम स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें।
पूजा स्थान को साफ करें
पूजा स्थान को साफ करें और वहाँ गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
दीपक और धूप जलाएं
एक घी या तेल का दीपक और धूप/अगरबत्ती जलाएं।
गणेश जी को भोग अर्पित करें
गणेश जी को मोदक, लड्डू या गुड़ का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है।
आरती की थाली तैयार करें आरती की थाली में ये चीजें रखें:
• घी का दीपक
• कपूर
• फूल
• अक्षत (चावल)
• घंटी
आरती गाएं और दीपक घुमाएं
अब आरती की थाली लेकर भगवान के सामने दीपक को गोल-गोल घुमाते हुए आरती गाएं।
सबसे प्रसिद्ध आरती है —
“जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा…”
अंत में प्रार्थना करें
आरती के बाद हाथ जोड़कर भगवान से अपनी मनोकामना कहें और आशीर्वाद मांगें।
भक्ति संदेश
“जहाँ गणेश की छाया है, वहाँ खुशियों की माया है।
विघ्न सारे टल जाते हैं, जब बप्पा का नाम ध्याया है।”
