श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
श्री राम स्तुति भगवान श्रीराम की महिमा, करुणा, सुंदर स्वरूप और दिव्य गुणों का वर्णन करने वाली प्रसिद्ध भक्तिपूर्ण रचना है। गोस्वामी तुलसीदास जी की इस लोकप्रिय स्तुति को श्रद्धालु पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और आरती के समय भी गाते हैं।
भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। उनका जीवन सत्य, धर्म, करुणा, त्याग और कर्तव्य पालन की प्रेरणा देता है। यहाँ पढ़ें श्री राम स्तुति का प्रचलित पाँच पदों वाला पाठ।
॥ आरती श्री रामचन्द्रजी ॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन, कंज मुख करकंज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचिनौमि जनक सुतावरम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥
भजु दीनबंधु दिनेशदानव दैत्य वंश निकन्दनम्।
रघुनन्द आनन्द कन्द कौशलचन्द्र दशरथ नन्द्नम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥
सिर मुकुट कुंडल तिलकचारू उदारु अंग विभूषणम्।
आजानुभुज शर चाप-धर, संग्राम जित खरदूषणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥
इति वदति तुलसीदास, शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम हृदय कंज निवास कुरु, कामादि खल दल गंजनम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥
मन जाहि राचेऊ मिलहिसो वर सहज सुन्दर सांवरो।
करुणा निधान सुजानशील सनेह जानत रावरो॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥
एहि भाँति गौरी असीससुन सिय हित हिय हरषित अली।
तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनिमुदित मन मन्दिर चली॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥
श्री राम स्तुति का सरल भावार्थ
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन, कंज मुख करकंज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥
सरल भावार्थ: हे मन! कृपा करने वाले भगवान श्रीराम का भजन करो। वे संसार के भयानक दुखों और भय को दूर करने वाले हैं। उनके नेत्र कमल के समान सुंदर हैं, मुख कमल जैसा मनोहर है, हाथ कमल के समान सुंदर हैं और उनके चरण लाल कमल के समान सुशोभित हैं।
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचिनौमि जनक सुतावरम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥
सरल भावार्थ: भगवान श्रीराम का सौंदर्य असंख्य कामदेवों से भी अधिक मनोहर है। उनका श्याम वर्ण नए नीले बादल के समान सुंदर है और उनके पीले वस्त्र बिजली की चमक जैसे प्रतीत होते हैं। वे माता सीता के प्रिय पति हैं। ऐसे पवित्र और सुंदर भगवान श्रीराम को मैं प्रणाम करता हूँ।
भजु दीनबंधु दिनेशदानव दैत्य वंश निकन्दनम्।
रघुनन्द आनन्द कन्द कौशलचन्द्र दशरथ नन्द्नम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥
सरल भावार्थ: भगवान श्रीराम दीन-दुखियों के सहायक और संसार को प्रकाश देने वाले हैं। वे दानवों और दैत्यों के वंश का नाश करने वाले हैं। वे रघुकुल को आनंद देने वाले, सुख के मूल, कौशल देश के चंद्रमा के समान शोभायमान और राजा दशरथ के प्रिय पुत्र हैं।
सिर मुकुट कुंडल तिलकचारू उदारु अंग विभूषणम्।
आजानुभुज शर चाप-धर, संग्राम जित खरदूषणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥
सरल भावार्थ: भगवान श्रीराम के सिर पर मुकुट, कानों में कुंडल, माथे पर सुंदर तिलक और शरीर पर दिव्य आभूषण सुशोभित हैं। उनकी भुजाएँ घुटनों तक लंबी हैं और वे धनुष-बाण धारण करते हैं। उन्होंने युद्ध में खर और दूषण जैसे राक्षसों को पराजित किया था।
इति वदति तुलसीदास, शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम हृदय कंज निवास कुरु, कामादि खल दल गंजनम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥
सरल भावार्थ: गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि भगवान श्रीराम भगवान शंकर, शेषनाग और मुनियों के मन को आनंदित करने वाले हैं। हे प्रभु! आप मेरे हृदय रूपी कमल में निवास करें और काम, क्रोध आदि बुरे विकारों का नाश करें।
मन जाहि राचेऊ मिलहिसो वर सहज सुन्दर सांवरो।
करुणा निधान सुजानशील सनेह जानत रावरो॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥
सरल भावार्थ: जिस साँवले और सहज सुंदर वर के प्रति मन अनुरक्त हो जाता है, वही उसे प्राप्त हो। भगवान श्रीराम करुणा के भंडार, बुद्धिमान, सद्गुणों से युक्त और प्रेम की भावना को समझने वाले हैं। वे अपने भक्तों के हृदय के भावों को जानते हैं।
एहि भाँति गौरी असीससुन सिय हित हिय हरषित अली।
तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनिमुदित मन मन्दिर चली॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥
सरल भावार्थ: सखियों ने जब माता गौरी का आशीर्वाद सुना, जो सीता जी के हित में था, तो वे हृदय से प्रसन्न हो गईं। इसके बाद माता सीता ने भवानी की बार-बार पूजा की और प्रसन्न मन से अपने महल की ओर चली गईं।
श्री राम स्तुति का महत्व
श्री राम स्तुति का पाठ भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने का एक सुंदर माध्यम है। इसके पद भगवान के दिव्य स्वरूप और गुणों का स्मरण कराते हैं।
- भक्ति और श्रद्धा: स्तुति के माध्यम से भक्त भगवान श्रीराम के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं।
- मन की शांति: एकाग्रता और श्रद्धा से पाठ करने पर मन को शांति का अनुभव हो सकता है।
- सदाचार की प्रेरणा: भगवान श्रीराम का स्मरण सत्य, धर्म और मर्यादा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
- आत्मचिंतन: स्तुति के अंतिम पद में मन के विकारों को दूर करने और हृदय में भगवान का निवास होने की प्रार्थना की गई है।
श्री राम स्तुति का पाठ कब करें?
श्री राम स्तुति का पाठ सुबह या शाम की पूजा के समय किया जा सकता है। श्रीराम नवमी, राम विवाह उत्सव और अन्य धार्मिक अवसरों पर भी श्रद्धालु इसका गायन करते हैं। इसके पाठ के लिए किसी एक निश्चित समय की अनिवार्यता नहीं है। भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधानुसार इसका पाठ कर सकते हैं।
श्री राम स्तुति की सरल पूजा विधि
- स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ करें।
- भगवान श्रीराम के चित्र या प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं।
- भगवान को पुष्प अर्पित करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग लगाएं।
- शांत मन से श्री राम स्तुति का पाठ करें।
- अंत में भगवान श्रीराम से सुख-शांति, सद्बुद्धि और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।
निष्कर्ष
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन भगवान श्रीराम की प्रसिद्ध स्तुति है। इसके पद प्रभु के सौंदर्य, करुणा, पराक्रम और दिव्य गुणों का वर्णन करते हैं। श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करने के साथ भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का प्रयास करना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. श्री राम स्तुति के रचयिता कौन हैं?
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी से संबंधित है और यह उनकी विनयपत्रिका के प्रसिद्ध पदों में गिनी जाती है।
2. श्री राम स्तुति में कितने पद हैं?
यहाँ प्रस्तुत प्रचलित पाठ में पाँच पद हैं। कुछ गायन परंपराओं में इसके साथ सीता जी की गौरी-पूजा से संबंधित अन्य पंक्तियाँ भी गाई जाती हैं।
3. क्या श्री राम स्तुति को आरती के समय गा सकते हैं?
हाँ, श्रद्धालु इसे आरती और भजन-कीर्तन के समय भी गाते हैं। रचना की पहचान मुख्य रूप से भगवान श्रीराम की स्तुति के रूप में है।
4. श्री राम स्तुति का पाठ कब करना चाहिए?
इसका पाठ सुबह, शाम या अपनी सुविधानुसार किसी भी समय श्रद्धापूर्वक किया जा सकता है।
5. श्री राम स्तुति का मुख्य संदेश क्या है?
इसका मुख्य संदेश भगवान श्रीराम का स्मरण करना, उनके गुणों से प्रेरणा लेना और मन के बुरे विकारों को दूर करने की प्रार्थना करना है।
