श्री कार्तिकेय जी की आरती (भगवान कार्तिकेय / स्कंद जी)
भगवान कार्तिकेय जी को स्कंद, षण्मुख, मुरुगन और सुब्रह्मण्य के नाम से भी जाना जाता है। वे भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र तथा देवताओं के सेनापति माने जाते हैं। उनका वाहन मोर है और उनके हाथ में शक्ति अस्त्र सुशोभित होता है। भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान कार्तिकेय जी की आरती करके उनकी वंदना करते हैं।
यहाँ पढ़ें श्री कार्तिकेय जी की आरती के हिंदी बोल (Kartikeya Ji Ki Aarti Lyrics) और जानें उनके मंत्र, पूजा विधि तथा उनसे जुड़े सामान्य प्रश्नों के उत्तर।
!! श्री कार्तिकेय जी की आरती !!
जय कार्तिकेय स्वामी, जय कार्तिकेय स्वामी,
जय षण्मुख देवा, जय षण्मुख देवा।
जय जय कार्तिकेय स्वामी॥
तुम शिव शंकर के सुत हो, पार्वती के दुलारे,
देवों के सेनापति, संकट हरन हमारे।
जय जय कार्तिकेय स्वामी॥
मोर वाहन शोभित, हाथ शक्ति धारी,
छः मुख तेजोमय, रूप अति न्यारी।
जय जय कार्तिकेय स्वामी॥
तारकासुर संहारी, दुष्ट दलन कर्ता,
भक्तों के हितकारी, दुख हरण करता।
जय जय कार्तिकेय स्वामी॥
ज्ञान और वीरता के, तुम हो भंडारी,
भक्ति भाव से जो ध्यावे, पावे कृपा तुम्हारी।
जय जय कार्तिकेय स्वामी॥
बाल रूप मनोहर, करुणा के सागर,
शरण पड़े जो तेरी, कटे उसके सागर।
जय जय कार्तिकेय स्वामी॥
जय कार्तिकेय स्वामी, जय कार्तिकेय स्वामी,
जय षण्मुख देवा, जय षण्मुख देवा।
जय जय कार्तिकेय स्वामी॥
भगवान कार्तिकेय जी का मंत्र
भगवान कार्तिकेय जी की उपासना के लिए भक्त उनके नाम का मंत्र जप सकते हैं।
ॐ स्कन्दाय नमः॥
एक अन्य प्रचलित नाम-मंत्र है:
ॐ सुब्रह्मण्याय नमः॥
भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार शांत मन से मंत्र का जाप कर सकते हैं।
भगवान कार्तिकेय जी की पूजा विधि
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को साफ करें।
- भगवान कार्तिकेय जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- श्रद्धापूर्वक पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें।
- भगवान का स्मरण करते हुए मंत्र का जाप करें।
- श्री कार्तिकेय जी की आरती गाएँ और अंत में अपनी प्रार्थना अर्पित करें।
पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, भक्ति और मन की पवित्रता है। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार भी पूजा कर सकते हैं।
भगवान कार्तिकेय जी की माता का नाम क्या है?
भगवान कार्तिकेय जी की माता का नाम माता पार्वती है और उनके पिता भगवान शिव हैं। उन्हें शिव-पार्वती के पुत्र तथा देवताओं का सेनापति माना जाता है। भगवान कार्तिकेय के छह मुख होने के कारण उनका एक प्रसिद्ध नाम षण्मुख भी है। दक्षिण भारत में वे भगवान मुरुगन के नाम से विशेष रूप से पूजे जाते हैं।
भगवान कार्तिकेय जी की आरती का महत्व
भगवान कार्तिकेय जी को साहस, वीरता, ज्ञान और विजय का प्रतीक माना जाता है। उनकी आरती के माध्यम से भक्त उनके प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करते हैं। आरती गाते समय भक्त भगवान से सद्बुद्धि, आत्मबल और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति देने की प्रार्थना करते हैं।
निष्कर्ष
श्री कार्तिकेय जी की आरती भगवान स्कंद के प्रति भक्ति और श्रद्धा व्यक्त करने का एक माध्यम है। पूजा के समय आरती गाकर और उनके मंत्र का जाप करके भक्त भगवान का स्मरण करते हैं। भगवान कार्तिकेय सभी को साहस, विवेक और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें।
श्री कार्तिकेय जी की आरती PDF डाउनलोड करें
यदि आप श्री कार्तिकेय जी की आरती को अपने मोबाइल में सुरक्षित रखना चाहते हैं या पूजा के समय पढ़ने के लिए प्रिंट निकालना चाहते हैं, तो आरती की PDF उपयोगी हो सकती है। इसमें भगवान कार्तिकेय जी की आरती के बोल व्यवस्थित रूप में रखे जा सकते हैं, ताकि आप आसानी से आरती पढ़ सकें।
PDF को डाउनलोड करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि उसमें आरती के सभी बोल सही क्रम में और स्पष्ट अक्षरों में दिए गए हों।
श्री कार्तिकेय जी की आरती PDF: नीचे दिए गए PDF लिंक या बटन से आरती पढ़ें और डाउनलोड करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. भगवान कार्तिकेय जी की आरती कौन-सी है?
भगवान कार्तिकेय जी की आरती का आरंभ इन पंक्तियों से होता है—“जय कार्तिकेय स्वामी, जय कार्तिकेय स्वामी, जय षण्मुख देवा, जय षण्मुख देवा।”
2. कार्तिकेय जी का मंत्र क्या है?
भगवान कार्तिकेय जी के नाम का एक प्रचलित मंत्र है—“ॐ स्कन्दाय नमः॥” भक्त श्रद्धापूर्वक इसका जाप कर सकते हैं।
3. भगवान कार्तिकेय की माता का नाम क्या है?
भगवान कार्तिकेय की माता माता पार्वती और पिता भगवान शिव हैं।
4. भगवान कार्तिकेय को किन नामों से जाना जाता है?
भगवान कार्तिकेय को स्कंद, षण्मुख, मुरुगन और सुब्रह्मण्य जैसे नामों से भी जाना जाता है।
5. भगवान कार्तिकेय जी की आरती कब करनी चाहिए?
भक्त अपनी दैनिक पूजा के समय या भगवान कार्तिकेय की विशेष पूजा के अवसर पर आरती कर सकते हैं। पूजा का समय परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
