श्री सूर्य देव जी की आरती का संपूर्ण पाठ
भगवान सूर्य देव को प्रकाश, ऊर्जा और जीवन का आधार माना जाता है। हिंदू धर्म में सूर्य उपासना का विशेष महत्व है। भक्त प्रातःकाल सूर्य देव को जल अर्पित करके उनकी पूजा करते हैं और श्रद्धापूर्वक आरती गाते हैं।
यहाँ श्री सूर्य देव की आरती “जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन” का पाठ दिया गया है।
॥ आरती श्री सूर्य जी ॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन – तिमिर – निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
सप्त-अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दुःखहारी, सुखकारी, मानस-मल-हारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
सुर – मुनि – भूसुर – वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
सकल – सुकर्म – प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व-विलोचन मोचन, भव-बन्धन भारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
कमल-समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत साहज हरतअति मनसिज-संतापा॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
नेत्र-व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा-हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान-मोह सब, तत्त्वज्ञान दीजै॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
सूर्य देव जी की आरती का सरल भावार्थ
पहला पद: हे कश्यप ऋषि और माता अदिति के पुत्र सूर्य देव! आपकी जय हो। आप तीनों लोकों के अंधकार को दूर करते हैं और भक्तों के हृदय को शीतलता प्रदान करने वाले हैं।
दूसरा पद: हे सूर्य देव! आप सात घोड़ों वाले रथ पर विराजमान हैं। आप दुःख दूर करने, सुख प्रदान करने और मन की बुराइयों को मिटाने वाले हैं।
तीसरा पद: देवता, ऋषि और विद्वान आपकी वंदना करते हैं। हे दिवाकर! आप पापों का नाश करने वाले और अपनी दिव्य किरणों से संसार को प्रकाशित करने वाले हैं।
चौथा पद: हे सविता! आप शुभ कर्मों की प्रेरणा देने वाले और कल्याणकारी हैं। आप समस्त संसार को प्रकाशित करते हैं। भक्त आपसे सांसारिक बंधनों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।
पाँचवाँ पद: आपकी किरणों से कमल खिलते हैं। आप तीन प्रकार के तापों को दूर करने वाले माने जाते हैं। भक्त आपकी सेवा करके मन के संताप से मुक्ति की कामना करते हैं।
छठा पद: हे सूर्य देव! इस पद में नेत्रों के कष्ट और धरती की पीड़ा दूर करने की प्रार्थना की गई है। आप संसार के कल्याण और वर्षा से संबंधित प्राकृतिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सातवाँ पद: हे करुणामय सूर्य देव! हम पर कृपा कीजिए। हमारे अज्ञान और मोह को दूर करके हमें सत्य को समझने वाला ज्ञान प्रदान कीजिए।
सूर्य देव जी की आरती का महत्व
सूर्य देव को हिंदू धर्म में प्रत्यक्ष देवता माना जाता है, क्योंकि उनका प्रकाश संसार को दिखाई देता है और पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है। सूर्य उपासना में कृतज्ञता, अनुशासन, सकारात्मकता और ज्ञान की कामना का भाव जुड़ा है।
आरती में भक्त सूर्य देव की महिमा का गुणगान करते हैं और उनसे दुःख दूर करने, मन को निर्मल बनाने तथा अज्ञान मिटाकर ज्ञान प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।
सूर्य देव की आरती कब करनी चाहिए?
सूर्य देव की आरती प्रातःकाल पूजा के समय की जा सकती है। रविवार को सूर्य उपासना का विशेष प्रचलन है। रथ सप्तमी, मकर संक्रांति और छठ जैसे अवसरों पर भी सूर्य देव की आराधना की जाती है।
भक्त अपनी दैनिक पूजा में भी सूर्य देव की आरती शामिल कर सकते हैं।
सूर्य देव की पूजा कैसे करें?
- प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- सूर्य देव के दर्शन करके श्रद्धानुसार जल अर्पित करें।
- सूर्य देव को पुष्प अर्पित करें और प्रणाम करें।
- सुरक्षित स्थान पर दीपक जलाकर सूर्य देव की आरती गाएँ।
- अंत में परिवार के कल्याण, सद्बुद्धि और सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
पूजा की विधि में क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है। अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. सूर्य देव जी की आरती की शुरुआत किन शब्दों से होती है?
इस आरती की शुरुआत “जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन” से होती है।
2. सूर्य देव की आरती किस दिन करनी चाहिए?
सूर्य देव की आरती प्रतिदिन की जा सकती है। रविवार को उनकी पूजा और उपासना का विशेष महत्व माना जाता है।
3. सूर्य देव को जल कब चढ़ाना चाहिए?
परंपरागत रूप से सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। जल अर्पित करते समय अपनी सुविधा और सुरक्षा का ध्यान रखें।
4. क्या सूर्य देव की आरती प्रतिदिन पढ़ सकते हैं?
हाँ, भक्त अपनी दैनिक पूजा में सूर्य देव की आरती पढ़ सकते हैं। इसके लिए किसी विशेष पर्व की प्रतीक्षा करना आवश्यक नहीं है।
5. सूर्य देव की आरती में उनसे क्या प्रार्थना की जाती है?
आरती में सूर्य देव से कृपा, दुःखों से मुक्ति, अज्ञान दूर करने और तत्त्वज्ञान प्रदान करने की प्रार्थना की जाती है।
निष्कर्ष
श्री सूर्य देव जी की आरती भगवान सूर्य के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का एक भक्तिमय माध्यम है। भक्त “जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन” का पाठ करके सूर्य देव की महिमा का स्मरण करते हैं और जीवन में ज्ञान, सद्बुद्धि तथा मंगल की कामना करते हैं।
जय सूर्य नारायण!
