श्री गणेश सहस्रनाम:
1. गणेश्वर
ॐ गणेश्वराय नमः।
अर्थ: समस्त गणों और शक्तियों के परम स्वामी।
भावार्थ: भगवान गणेश का यह नाम उनके सर्वोच्च अधिपति स्वरूप का स्मरण कराता है।
2. गणक्रीड
ॐ गणक्रीडाय नमः।
अर्थ: गणों के साथ आनंदपूर्वक क्रीड़ा करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के सहज, आनंदमय और प्रसन्न स्वरूप को दर्शाता है।
3. गणनाथ
ॐ गणनाथाय नमः।
अर्थ: सभी गणों के स्वामी।
भावार्थ: भगवान गणेश अपने दिव्य गणों का मार्गदर्शन करने वाले नाथ माने जाते हैं।
4. गणाधिप
ॐ गणाधिपाय नमः।
अर्थ: गणों के अधिपति और प्रमुख।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की नेतृत्वकारी और संरक्षक शक्ति को प्रकट करता है।
5. एकदंष्ट्र
ॐ एकदंष्ट्राय नमः।
अर्थ: एक दाँत वाले भगवान।
भावार्थ: एकदंत स्वरूप गणेशजी की विशिष्ट पहचान और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।
6. वक्रतुण्ड
ॐ वक्रतुण्डाय नमः।
अर्थ: घुमावदार सूँड वाले।
भावार्थ: वक्रतुण्ड रूप भगवान गणेश की अद्भुत दिव्य आकृति और विघ्नों पर विजय का स्मरण कराता है।
7. गजवक्त्र
ॐ गजवक्त्राय नमः।
अर्थ: हाथी के समान मुख वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के गजानन स्वरूप की महिमा को प्रकट करता है।
8. महोदर
ॐ महोदराय नमः।
अर्थ: विशाल उदर वाले।
भावार्थ: उनका विशाल उदर धैर्य, सहनशीलता और समस्त अनुभवों को समाहित करने की क्षमता का प्रतीक माना जाता है।
9. लम्बोदर
ॐ लम्बोदराय नमः।
अर्थ: बड़े और लंबे उदर वाले।
भावार्थ: लम्बोदर स्वरूप गणेशजी की प्रसिद्ध और मंगलमयी आकृति को दर्शाता है।
10. धूम्रवर्ण
ॐ धूम्रवर्णाय नमः।
अर्थ: धुएँ के समान वर्ण वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के एक गंभीर और रहस्यमय दिव्य स्वरूप की ओर संकेत करता है।
11. विकट
ॐ विकटाय नमः।
अर्थ: अद्भुत और विशाल स्वरूप वाले।
भावार्थ: भगवान गणेश का विकट रूप कठिन परिस्थितियों और बड़े विघ्नों पर विजय का प्रतीक है।
12. विघ्ननाशक
ॐ विघ्ननाशकाय नमः।
अर्थ: बाधाओं को दूर करने वाले।
भावार्थ: किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेशजी का स्मरण इसी कारण किया जाता है कि वे मार्ग की रुकावटों को दूर करने वाले देवता माने जाते हैं।
13. सुमुख
ॐ सुमुखाय नमः।
अर्थ: सुंदर और प्रसन्न मुख वाले।
भावार्थ: सुमुख नाम भगवान गणेश के सौम्य, मंगलकारी और प्रसन्न स्वरूप को दर्शाता है।
14. दुर्मुख
ॐ दुर्मुखाय नमः।
अर्थ: प्रभावशाली और प्रचंड मुख वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के उस रूप को दर्शाता है जो अधर्म और नकारात्मक शक्तियों के सामने कठोर हो जाता है।
15. बुद्ध
ॐ बुद्धाय नमः।
अर्थ: बुद्धिमान और ज्ञान से संपन्न।
भावार्थ: गणेशजी को विवेक, ज्ञान और सूझ-बूझ का देवता माना जाता है।
16. विघ्नराज
ॐ विघ्नराजाय नमः।
अर्थ: विघ्नों के अधिपति।
भावार्थ: गणेशजी बाधाओं को नियंत्रित करने और भक्तों के मार्ग को सुगम बनाने वाले माने जाते हैं।
17. गजानन
ॐ गजाननाय नमः।
अर्थ: हाथी के समान मुख वाले।
भावार्थ: गजानन नाम भगवान गणेश की सबसे प्रसिद्ध पहचान में से एक है और बुद्धि तथा सामर्थ्य का स्मरण कराता है।
18. भीम
ॐ भीमाय नमः।
अर्थ: अत्यंत प्रभावशाली और शक्तिशाली।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की प्रचंड शक्ति और दुष्ट शक्तियों के सामने उनके तेज को दर्शाता है।
19. प्रमोद
ॐ प्रमोदाय नमः।
अर्थ: आनंद और प्रसन्नता देने वाले।
भावार्थ: गणेशजी का स्मरण मन में उत्साह, आनंद और शुभ भाव उत्पन्न करने वाला माना जाता है।
20. आमोद
ॐ आमोदाय नमः।
अर्थ: आनंदमय और प्रसन्न रहने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के हर्षपूर्ण और मंगलकारी स्वरूप का प्रतीक है।
21. सुरानन्द
ॐ सुरानन्दाय नमः।
अर्थ: देवताओं को आनंद देने वाले।
भावार्थ: भगवान गणेश का दिव्य स्वरूप देवगणों के लिए भी आनंद और मंगल का कारण माना गया है।
22. मदोत्कट
ॐ मदोत्कटाय नमः।
अर्थ: अत्यंत प्रभावशाली और प्रबल तेज वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के असाधारण तेज और प्रचंड सामर्थ्य को प्रकट करता है।
23. हेरम्ब
ॐ हेरम्बाय नमः।
अर्थ: निर्बलों के रक्षक।
भावार्थ: हेरम्ब स्वरूप गणेशजी करुणा, संरक्षण और आश्रय देने वाली शक्ति के प्रतीक हैं।
24. शम्बर
ॐ शम्बराय नमः।
अर्थ: विशेष दिव्य स्वरूप में स्थित रहने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की व्यापक और रहस्यमयी सत्ता की ओर संकेत करता है।
25. शम्भु
ॐ शम्भवे नमः।
अर्थ: कल्याण और आनंद प्रदान करने वाले।
भावार्थ: गणेशजी अपने भक्तों के जीवन में मंगल और सुख का संचार करने वाले माने जाते हैं।
26. लम्बकर्ण
ॐ लम्बकर्णाय नमः।
अर्थ: लंबे और विशाल कानों वाले।
भावार्थ: उनके बड़े कान धैर्यपूर्वक सबकी बात सुनने और विवेक से ग्रहण करने का प्रतीक माने जाते हैं।
27. महाबल
ॐ महाबलाय नमः।
अर्थ: महान शक्ति से संपन्न।
भावार्थ: गणेशजी का महाबल स्वरूप उनके अद्भुत सामर्थ्य और रक्षक शक्ति को दर्शाता है।
28. नन्दन
ॐ नन्दनाय नमः।
अर्थ: आनंद देने वाले और सदैव प्रसन्न रहने वाले।
भावार्थ: यह नाम भगवान गणेश के प्रसन्नचित्त और आनंदमय स्वरूप को प्रकट करता है।
29. अलम्पट
ॐ अलम्पटाय नमः।
अर्थ: अलौकिक सौंदर्य और आकर्षण से युक्त।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की दिव्य शोभा और मनोहर स्वरूप का स्मरण कराता है।
30. अभीरु
ॐ अभीरवे नमः।
अर्थ: निर्भय और निडर।
भावार्थ: गणेशजी का यह नाम भक्तों को साहस और भय से मुक्त रहने की प्रेरणा देता है।
31. मेघनाद
ॐ मेघनादाय नमः।
अर्थ: मेघों जैसी गंभीर ध्वनि वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के प्रभावशाली और गूंजते हुए दिव्य स्वरूप को दर्शाता है।
32. गणञ्जय
ॐ गणञ्जयाय नमः।
अर्थ: विजय प्राप्त करने वाले।
भावार्थ: गणेशजी का यह नाम अधर्म और नकारात्मक शक्तियों पर विजय का स्मरण कराता है।
33. विनायक
ॐ विनायकाय नमः।
अर्थ: श्रेष्ठ मार्गदर्शक और प्रमुख नायक।
भावार्थ: विनायक नाम गणेशजी के नेतृत्व और शुभ कार्यों के आरंभकर्ता स्वरूप को प्रकट करता है।
34. विरूपाक्ष
ॐ विरूपाक्षाय नमः।
अर्थ: अद्भुत और सामान्य से भिन्न नेत्रों वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की दिव्य दृष्टि और व्यापक चेतना का प्रतीक है।
35. धीरशूर
ॐ धीरशूराय नमः।
अर्थ: धैर्यवान और महान वीर।
भावार्थ: गणेशजी का यह स्वरूप साहस के साथ विवेक और धैर्य का महत्व बताता है।
36. वरप्रद
ॐ वरप्रदाय नमः।
अर्थ: वरदान देने वाले।
भावार्थ: भक्त श्रद्धा से गणेशजी की आराधना करके अपनी शुभ इच्छाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।
37. महागणपति
ॐ महागणपतये नमः।
अर्थ: महान गणपति और सर्वशक्तिमान अधिपति।
भावार्थ: महागणपति स्वरूप गणेशजी की व्यापक शक्ति और दिव्य ऐश्वर्य को दर्शाता है।
38. बुद्धिप्रिय
ॐ बुद्धिप्रियाय नमः।
अर्थ: बुद्धि और ज्ञान को प्रिय मानने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को विवेक, अध्ययन और ज्ञान से जोड़ता है।
39. क्षिप्रप्रसादन
ॐ क्षिप्रप्रसादनाय नमः।
अर्थ: शीघ्र प्रसन्न होकर कृपा करने वाले।
भावार्थ: भक्तों की सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होकर गणेशजी शीघ्र अनुग्रह करने वाले देवता माने जाते हैं।
40. रुद्रप्रिय
ॐ रुद्रप्रियाय नमः।
अर्थ: भगवान रुद्र को प्रिय।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी और भगवान शिव के गहरे दिव्य संबंध को स्मरण कराता है।
41. गणाध्यक्ष
ॐ गणाध्यक्षाय नमः।
अर्थ: गणों के अध्यक्ष और संरक्षक।
भावार्थ: गणेशजी अपने दिव्य गणों का संचालन और संरक्षण करने वाले अधिपति माने जाते हैं।
42. उमापुत्र
ॐ उमापुत्राय नमः।
अर्थ: माता उमा के पुत्र।
भावार्थ: यह नाम भगवान गणेश को माता पार्वती के प्रिय पुत्र के रूप में स्मरण कराता है।
43. अघनाशन
ॐ अघनाशनाय नमः।
अर्थ: पाप और दुष्कर्मों का नाश करने वाले।
भावार्थ: श्रद्धा से गणेशजी की उपासना मनुष्य को सदाचार और शुभ कर्मों की ओर प्रेरित करती है।
44. कुमारगुरु
ॐ कुमारगुरवे नमः।
अर्थ: कुमार अर्थात् कार्तिकेय के गुरु।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के ज्ञान और आध्यात्मिक श्रेष्ठता को दर्शाता है।
45. ईशानपुत्र
ॐ ईशानपुत्राय नमः।
अर्थ: भगवान ईशान अर्थात् शिव के पुत्र।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के शिव-पुत्र स्वरूप का स्मरण कराता है।
46. मूषकवाहन
ॐ मूषकवाहनाय नमः।
अर्थ: मूषक को वाहन के रूप में धारण करने वाले।
भावार्थ: गणेशजी का मूषक वाहन उनके विशिष्ट और प्रतीकात्मक स्वरूप की पहचान है।
47. सिद्धिप्रिय
ॐ सिद्धिप्रियाय नमः।
अर्थ: सिद्धि को प्रिय मानने वाले और सिद्धि देने वाले।
भावार्थ: गणेशजी की उपासना सफलता, साधना और शुभ उपलब्धियों की कामना से की जाती है।
48. सिद्धिपति
ॐ सिद्धिपतये नमः।
अर्थ: सिद्धियों के स्वामी।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की आध्यात्मिक और दिव्य सिद्धियों पर अधिपति स्वरूप को दर्शाता है।
49. सिद्धि
ॐ सिद्धये नमः।
अर्थ: स्वयं पूर्णता और सिद्धि का स्वरूप।
भावार्थ: गणेशजी को साधना के सफल परिणाम और पूर्णता की दिव्य शक्ति से जोड़ा जाता है।
50. सिद्धिविनायक
ॐ सिद्धिविनायकाय नमः।
अर्थ: सिद्धि और सफलता प्रदान करने वाले विनायक।
भावार्थ: किसी कार्य की सफलता और शुभ फल के लिए सिद्धिविनायक की आराधना विशेष श्रद्धा से की जाती है।
51. अविघ्न
ॐ अविघ्नाय नमः।
अर्थ: जिनके मार्ग में विघ्न नहीं और जो विघ्नों को दूर करते हैं।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की विघ्नहरण शक्ति को दर्शाता है।
52. तुम्बरु
ॐ तुम्बुरवे नमः।
अर्थ: दिव्य संगीत और वाद्य से प्रसन्न होने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के संगीतप्रिय और आनंदमय स्वरूप का स्मरण कराता है।
53. सिंहवाहन
ॐ सिंहवाहनाय नमः।
अर्थ: सिंह को वाहन रूप में धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के एक विशेष दिव्य रूप की ओर संकेत करता है, जिसमें सिंह शक्ति और साहस का प्रतीक है।
54. मोहिनीप्रिय
ॐ मोहिनीप्रियाय नमः।
अर्थ: मोहिनी स्वरूप को प्रिय मानने वाले।
भावार्थ: यह नाम भगवान की विभिन्न दिव्य शक्तियों और स्वरूपों के प्रति गणेशजी के संबंध को दर्शाता है।
55. कटङ्कट
ॐ कटङ्कटाय नमः।
अर्थ: अज्ञान और भ्रम को दूर करने वाले।
भावार्थ: गणेशजी का यह नाम भीतर के अंधकार को हटाकर विवेक का प्रकाश जगाने का संकेत देता है।
56. राजपुत्र
ॐ राजपुत्राय नमः।
अर्थ: राजा के पुत्र के रूप में प्रतिष्ठित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के एक विशिष्ट पौराणिक स्वरूप और राजकीय सम्मान को स्मरण कराता है।
57. शालक
ॐ शालकाय नमः।
अर्थ: शांत और संयमित रहने वाले।
भावार्थ: यह नाम मन को स्थिर रखने और संयमित आचरण की प्रेरणा देता है।
58. सम्मित
ॐ सम्मिताय नमः।
अर्थ: संतुलित और उचित स्वरूप वाले।
भावार्थ: गणेशजी का यह नाम संतुलन, सामंजस्य और उचित व्यवस्था की भावना को प्रकट करता है।
59. अमित
ॐ अमिताय नमः।
अर्थ: जिनकी सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती।
भावार्थ: भगवान गणेश की महिमा और शक्ति को असीम मानने का भाव इस नाम में निहित है।
60. कूष्माण्डसामसम्भूति
ॐ कूष्माण्डसामसम्भूतये नमः।
अर्थ: दिव्य वैदिक सत्ता से संबंधित विशेष स्वरूप वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के गूढ़ वैदिक और आध्यात्मिक स्वरूप की ओर संकेत करता है।
61. दुर्जय
ॐ दुर्जयाय नमः।
अर्थ: जिन्हें जीत पाना अत्यंत कठिन है।
भावार्थ: गणेशजी की शक्ति और संरक्षण के सामने विघ्नकारी शक्तियाँ टिक नहीं पातीं—यह भाव इस नाम में है।
62. धूर्जय
ॐ धूर्जयाय नमः।
अर्थ: दुष्ट और विरोधी शक्तियों पर विजय पाने वाले।
भावार्थ: यह नाम भगवान गणेश के रक्षक और विजयी स्वरूप को दर्शाता है।
63. जय
ॐ जयाय नमः।
अर्थ: सदैव विजय का स्वरूप।
भावार्थ: गणेशजी का स्मरण शुभ कार्यों में सफलता और सकारात्मक शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
64. भूपति
ॐ भूपतये नमः।
अर्थ: पृथ्वी और लोकों के स्वामी।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की व्यापक सत्ता और संरक्षणकारी स्वरूप को प्रकट करता है।
65. भुवनपति
ॐ भुवनपतये नमः।
अर्थ: समस्त भुवनों के अधिपति।
भावार्थ: गणेशजी की दिव्य सत्ता केवल एक स्थान तक सीमित नहीं, बल्कि समस्त लोकों में व्याप्त मानी जाती है।
66. भूतानां पति
ॐ भूतानां पतये नमः।
अर्थ: समस्त प्राणियों और तत्वों के स्वामी।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की सर्वव्यापक और संरक्षणकारी शक्ति का स्मरण कराता है।
67. अव्यय
ॐ अव्ययाय नमः।
अर्थ: जो कभी क्षीण या नष्ट नहीं होते।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की शाश्वत और अविनाशी सत्ता को दर्शाता है।
68. विश्वकर्ता
ॐ विश्वकर्त्रे नमः।
अर्थ: विश्व की रचना करने वाली दिव्य शक्ति।
भावार्थ: गणेशजी के इस नाम में उन्हें सृष्टि की व्यापक रचनात्मक शक्ति से जोड़ा गया है।
69. विश्वमुख
ॐ विश्वमुखाय नमः।
अर्थ: जिनका स्वरूप समस्त विश्व में मुखरित है।
भावार्थ: यह नाम भगवान के सर्वव्यापी स्वरूप का स्मरण कराता है।
70. विश्वरूप
ॐ विश्वरूपाय नमः।
अर्थ: जिनका स्वरूप संपूर्ण विश्व के समान व्यापक है।
भावार्थ: विश्वरूप गणेशजी में समस्त सृष्टि को एक दिव्य सत्ता के रूप में देखने का भाव है।
71. निधि
ॐ निधये नमः।
अर्थ: समस्त संपदा और शुभ निधियों के आधार।
भावार्थ: गणेशजी को भौतिक ही नहीं, बल्कि ज्ञान और सद्गुणों की संपदा से भी जोड़ा जाता है।
72. घृणि
ॐ घृणये नमः।
अर्थ: प्रकाश और तेज से युक्त।
भावार्थ: यह नाम सूर्य के समान प्रकाशमान और तेजस्वी दिव्य सत्ता की ओर संकेत करता है।
73. कवि
ॐ कवये नमः।
अर्थ: दूरदर्शी ज्ञानी और मनीषी।
भावार्थ: गणेशजी का कवि स्वरूप ज्ञान, चिंतन और गहरी दृष्टि का प्रतीक है।
74. कवीनामृषभ
ॐ कवीनामृषभाय नमः।
अर्थ: ज्ञानी और कवियों में श्रेष्ठ।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की प्रखर बुद्धि और विवेकपूर्ण दृष्टि की महिमा बताता है।
75. ब्रह्मण्य
ॐ ब्रह्मण्याय नमः।
अर्थ: ब्रह्मविद्या और वैदिक ज्ञान के संरक्षक।
भावार्थ: गणेशजी का यह नाम ज्ञान, धर्म और आध्यात्मिक परंपरा के संरक्षण से जुड़ा है।
76. ब्रह्मणस्पति
ॐ ब्रह्मणस्पतये नमः।
अर्थ: वाणी और ज्ञान के अधिपति।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के बुद्धि, वाणी और मंत्रशक्ति से जुड़े स्वरूप को प्रकट करता है।
77. ज्येष्ठराज
ॐ ज्येष्ठराजाय नमः।
अर्थ: श्रेष्ठ और अग्रणी राजा।
भावार्थ: गणेशजी को देवताओं में अग्रपूज्य और सम्मानित स्थान प्राप्त होने का भाव इस नाम में है।
78. निधिपति
ॐ निधिपतये नमः।
अर्थ: समस्त निधियों के स्वामी।
भावार्थ: यह नाम धन, संपदा और शुभ ऐश्वर्य पर गणेशजी की अधिपत्य भावना को दर्शाता है।
79. निधिप्रियपतिप्रिय
ॐ निधिप्रियपतिप्रियाय नमः।
अर्थ: निधियों के स्वामी को भी प्रिय लगने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के ऐसे पूज्य स्वरूप को दर्शाता है जिन्हें धन और ऐश्वर्य के अधिपति भी सम्मान देते हैं।
80. हिरण्मयपुरान्तःस्थ
ॐ हिरण्मयपुरान्तःस्थाय नमः।
अर्थ: दिव्य स्वर्णमय लोक में स्थित रहने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के सूक्ष्म और दिव्य लोकों से जुड़े स्वरूप का स्मरण कराता है।
81. सूर्यमण्डलमध्यग
ॐ सूर्यमण्डलमध्यगाय नमः।
अर्थ: सूर्य मंडल के मध्य स्थित रहने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को दिव्य प्रकाश, चेतना और तेज से जोड़ता है।
82. कराहतिविध्वस्तसिन्धुसलिल
ॐ कराहतिविध्वस्तसिन्धुसलिलाय नमः।
अर्थ: अपनी दिव्य शक्ति से समुद्र के जल को भी प्रभावित करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की अद्भुत और असाधारण सामर्थ्य का प्रतीकात्मक वर्णन करता है।
83. पूषदन्तभित्
ॐ पूषदन्तभिदे नमः।
अर्थ: पूषा के दाँत को खंडित करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी से जुड़ी प्राचीन पौराणिक कथा और उनके प्रचंड स्वरूप का स्मरण कराता है।
84. उमाङ्ककेलिकुतुकी
ॐ उमाङ्ककेलिकुतुकिने नमः।
अर्थ: माता उमा की गोद में आनंदपूर्वक क्रीड़ा करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के बालरूप और माता पार्वती के साथ उनके स्नेहपूर्ण संबंध को दर्शाता है।
85. मुक्तिद
ॐ मुक्तिदाय नमः।
अर्थ: मुक्ति प्रदान करने वाले।
भावार्थ: गणेशजी की आराधना केवल सांसारिक सफलता ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति की कामना से भी की जाती है।
86. कुलपालन
ॐ कुलपालनाय नमः।
अर्थ: कुल और परिवार की रक्षा करने वाले।
भावार्थ: यह नाम परिवार में सुख, मंगल और संरक्षण की कामना से गणेशजी के स्मरण को दर्शाता है।
87. किरीटी
ॐ किरीटिने नमः।
अर्थ: मुकुट धारण करने वाले।
भावार्थ: मुकुट गणेशजी के गौरव, प्रतिष्ठा और दिव्य राजसत्ता का प्रतीक है।
88. कुण्डली
ॐ कुण्डलिने नमः।
अर्थ: कुण्डल धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के अलंकारयुक्त और सुंदर दिव्य स्वरूप को प्रकट करता है।
89. हारी
ॐ हारिणे नमः।
अर्थ: हार धारण करने वाले।
भावार्थ: भगवान गणेश का यह नाम उनके आभूषणों से सुशोभित मंगलमय रूप का स्मरण कराता है।
90. वनमाली
ॐ वनमालिने नमः।
अर्थ: वनफूलों की माला धारण करने वाले।
भावार्थ: पुष्पमाला से सुशोभित गणेशजी का स्वरूप सरलता और प्राकृतिक सौंदर्य का भाव जगाता है।
91. मनोमय
ॐ मनोमयाय नमः।
अर्थ: मन और चेतना में व्याप्त।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की सूक्ष्म उपस्थिति और मन से जुड़े दिव्य स्वरूप को दर्शाता है।
92. वैमुख्यहतदैत्यश्री
ॐ वैमुख्यहतदैत्यश्रिये नमः।
अर्थ: विमुख और अधर्मी शक्तियों का वैभव नष्ट करने वाले।
भावार्थ: गणेशजी का यह नाम धर्म से दूर जाने वाली नकारात्मक शक्तियों के अंत का प्रतीक है।
93. पादाहतिजितक्षिति
ॐ पादाहतिजितक्षितये नमः।
अर्थ: अपने चरणों के प्रभाव से पृथ्वी के अहंकार को जीतने वाले।
भावार्थ: यह नाम विनम्रता और दिव्य शक्ति के सामने अहंकार के समाप्त होने का संदेश देता है।
94. सद्योजातस्वर्णमुञ्जमेखली
ॐ सद्योजातस्वर्णमुञ्जमेखलिने नमः।
अर्थ: स्वर्ण और मुंज से बनी मेखला धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विशेष अलंकारयुक्त दिव्य स्वरूप का वर्णन करता है।
95. दुर्निमित्तहृत्
ॐ दुर्निमित्तहृते नमः।
अर्थ: अशुभ संकेतों को दूर करने वाले।
भावार्थ: गणेशजी का स्मरण शुभता और सकारात्मकता की भावना को मजबूत करता है।
96. दुःस्वप्नहृत्
ॐ दुःस्वप्नहृते नमः।
अर्थ: बुरे स्वप्नों और उनसे उत्पन्न भय को दूर करने वाले।
भावार्थ: भक्त गणेशजी को भय और अशांति से रक्षा करने वाले देवता के रूप में स्मरण करते हैं।
97. प्रसहन
ॐ प्रसहनाय नमः।
अर्थ: सहनशील और दोषों को क्षमा करने वाले।
भावार्थ: यह नाम धैर्य, सहनशीलता और करुणा की भावना को प्रकट करता है।
98. गुणी
ॐ गुणिने नमः।
अर्थ: अनेक सद्गुणों से संपन्न।
भावार्थ: गणेशजी का यह नाम ज्ञान, विवेक, करुणा और शक्ति जैसे दिव्य गुणों की ओर संकेत करता है।
99. नादप्रतिष्ठित
ॐ नादप्रतिष्ठिताय नमः।
अर्थ: दिव्य नाद में प्रतिष्ठित रहने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को संगीत, मंत्र और आध्यात्मिक ध्वनि से जोड़ता है।
100. सुरूप
ॐ सुरूपाय नमः।
अर्थ: सुंदर और मनोहर स्वरूप वाले।
भावार्थ: गणेशजी का दिव्य रूप भक्तों के मन में प्रेम, शांति और श्रद्धा उत्पन्न करता है।
101. सर्वनेत्राधिवास
ॐ सर्वनेत्राधिवासाय नमः।
अर्थ: सभी दृष्टियों और नेत्रों में निवास करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की सर्वव्यापक चेतना का प्रतीक है।
102. वीरासनाश्रय
ॐ वीरासनाश्रयाय नमः।
अर्थ: वीरासन में स्थित रहने वाले।
भावार्थ: यह नाम स्थिरता, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की भावना जगाता है।
103. पीताम्बर
ॐ पीताम्बराय नमः।
अर्थ: पीले वस्त्र धारण करने वाले।
भावार्थ: पीताम्बर रूप गणेशजी के उज्ज्वल, मंगलमय और दिव्य स्वरूप को दर्शाता है।
104. खण्डरद
ॐ खण्डरदाय नमः।
अर्थ: जिनका एक दाँत खंडित है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के एकदंत स्वरूप और उससे जुड़ी पौराणिक पहचान को दर्शाता है।
105. खण्डेन्दुकृतशेखर
ॐ खण्डेन्दुकृतशेखराय नमः।
अर्थ: मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने वाले।
भावार्थ: अर्धचंद्र से सुशोभित गणेशजी का यह स्वरूप उनके शिव-परिवार से जुड़े दिव्य रूप को प्रकट करता है।
106. चित्राङ्कश्यामदशन
ॐ चित्राङ्कश्यामदशनाय नमः।
अर्थ: विविध आभा वाले दाँतों से युक्त।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विलक्षण और अलौकिक शारीरिक स्वरूप का वर्णन करता है।
107. भालचन्द्र
ॐ भालचन्द्राय नमः।
अर्थ: मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले।
भावार्थ: भालचंद्र नाम गणेशजी के शांत, शीतल और दिव्य स्वरूप का स्मरण कराता है।
108. चतुर्भुज
ॐ चतुर्भुजाय नमः।
अर्थ: चार भुजाओं वाले।
भावार्थ: चार भुजाएँ गणेशजी की विविध दिव्य शक्तियों और कार्यों का प्रतीक मानी जाती हैं।
109. योगाधिप
ॐ योगाधिपाय नमः।
अर्थ: योग और साधना के अधिपति।
भावार्थ: गणेशजी का यह रूप आत्मसंयम, ध्यान और आध्यात्मिक साधना से जुड़ा है।
110. तारकस्थ
ॐ तारकस्थाय नमः।
अर्थ: तारक मंत्र में स्थित रहने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की मंत्रमय और आध्यात्मिक सत्ता का स्मरण कराता है।
111. पुरुष
ॐ पुरुषाय नमः।
अर्थ: परम चेतन पुरुष स्वरूप।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को व्यापक चेतना और दिव्य पुरुष सत्ता से जोड़ता है।
112. गजकर्णक
ॐ गजकर्णकाय नमः।
अर्थ: हाथी के समान विशाल कान वाले।
भावार्थ: उनके विशाल कान ध्यानपूर्वक सुनने और ज्ञान ग्रहण करने की भावना का प्रतीक माने जाते हैं।
113. गणाधिराज
ॐ गणाधिराजाय नमः।
अर्थ: गणों के सर्वोच्च राजा।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के परम नेतृत्व और अधिपति स्वरूप को प्रकट करता है।
114. विजयस्थिर
ॐ विजयस्थिराय नमः।
अर्थ: स्थायी विजय से युक्त।
भावार्थ: गणेशजी का यह नाम निरंतर सफलता और दृढ़ प्रयास की प्रेरणा देता है।
115. गजपतिर्ध्वजी
ॐ गजपतिर्ध्वजिने नमः।
अर्थ: गजचिह्न वाले ध्वज से सुशोभित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के गौरवपूर्ण और विजयी स्वरूप की ओर संकेत करता है।
116. देवदेव
ॐ देवदेवाय नमः।
अर्थ: देवताओं के भी देव।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की उच्चतम दिव्य प्रतिष्ठा और देवताओं द्वारा पूज्य स्वरूप को दर्शाता है।
117. स्मरप्राणदीपक
ॐ स्मरप्राणदीपकाय नमः।
अर्थ: स्मर अर्थात् कामदेव के जीवन में पुनः प्रकाश जगाने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी से जुड़ी एक पौराणिक मान्यता और उनकी जीवनदायिनी शक्ति को दर्शाता है।
118. वायुकीलक
ॐ वायुकीलकाय नमः।
अर्थ: जीवनदायी वायु और प्राणशक्ति के संरक्षक।
भावार्थ: यह नाम जीवन, गति और प्राणशक्ति से जुड़े गणेशजी के दिव्य स्वरूप का संकेत देता है।
119. विपश्चिद्वरद
ॐ विपश्चिद्वरदाय नमः।
अर्थ: ज्ञानी विपश्चित् को वर प्रदान करने वाले।
भावार्थ: यह नाम भगवान गणेश की वरदानी और भक्तवत्सल शक्ति को प्रकट करता है।
120. नादोन्नादभिन्नबलाहक
ॐ नादोन्नादभिन्नबलाहकाय नमः।
अर्थ: जिनकी प्रचंड ध्वनि मेघों के समूह को भी प्रभावित करे।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की अद्भुत शक्ति और प्रभावशाली नाद का प्रतीकात्मक वर्णन है।
121. वराहरदन
ॐ वराहरदनाय नमः।
अर्थ: सुंदर और विशिष्ट दंत वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के दाँत की विशेषता और उनके अद्भुत रूप का स्मरण कराता है।
122. मृत्युञ्जय
ॐ मृत्युञ्जयाय नमः।
अर्थ: मृत्यु पर विजय पाने वाले।
भावार्थ: यह नाम भय से ऊपर उठने और अमर आध्यात्मिक चेतना की ओर संकेत करता है।
123. व्याघ्राजिनाम्बर
ॐ व्याघ्राजिनाम्बराय नमः।
अर्थ: व्याघ्रचर्म धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के तपस्वी और शक्तिशाली दिव्य स्वरूप को दर्शाता है।
124. इच्छाशक्तिधर
ॐ इच्छाशक्तिधराय नमः।
अर्थ: दिव्य इच्छाशक्ति को धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम मन और इच्छाओं पर नियंत्रण तथा संकल्प की शक्ति का प्रतीक है।
125. देवत्राता
ॐ देवत्रात्रे नमः।
अर्थ: देवताओं की रक्षा करने वाले।
भावार्थ: गणेशजी का यह स्वरूप संकट के समय संरक्षण और सहायता देने वाली शक्ति को दर्शाता है।
126. दैत्यविमर्दन
ॐ दैत्यविमर्दनाय नमः।
अर्थ: दैत्य और आसुरी शक्तियों का दमन करने वाले।
भावार्थ: यह नाम धर्म की रक्षा और नकारात्मक शक्तियों पर विजय का प्रतीक है।
127. शम्भुवक्त्रोद्भव
ॐ शम्भुवक्त्रोद्भवाय नमः।
अर्थ: शम्भु के मुख से प्रकट होने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के शिव से जुड़े दिव्य और रहस्यमय स्वरूप का स्मरण कराता है।
128. शम्भुकोपहा
ॐ शम्भुकोपघ्ने नमः।
अर्थ: भगवान शम्भु के क्रोध को शांत करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की शांति स्थापित करने वाली शक्ति और शिव से उनके गहरे संबंध को दर्शाता है।
129. शम्भुहास्यभू
ॐ शम्भुहास्यभुवे नमः।
अर्थ: शम्भु के हास्य और आनंद से संबंधित दिव्य स्वरूप।
भावार्थ: यह नाम शिव और गणेशजी के स्नेहपूर्ण पारिवारिक संबंध का भाव जगाता है।
130. शम्भुतेजस्
ॐ शम्भुतेजसे नमः।
अर्थ: शिव के समान दिव्य तेज से युक्त।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के भीतर स्थित प्रचंड आध्यात्मिक प्रकाश और शक्ति को दर्शाता है।
131. शिवाशोकहारी
ॐ शिवाशोकहारिणे नमः।
अर्थ: शिवा अर्थात् माता पार्वती के दुःख को दूर करने वाले।
भावार्थ: यह नाम माता-पुत्र के प्रेम और गणेशजी के सांत्वना देने वाले स्वरूप को प्रकट करता है।
132. गौरीसुखावह
ॐ गौरीसुखावहाय नमः।
अर्थ: माता गौरी को सुख और आनंद देने वाले।
भावार्थ: गणेशजी माता पार्वती के प्रिय पुत्र के रूप में मातृभक्ति और स्नेह के प्रतीक हैं।
133. उमाङ्गमलज
ॐ उमाङ्गमलजाय नमः।
अर्थ: उमा के अंग से प्रकट होने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की माता पार्वती से जुड़ी दिव्य उत्पत्ति की ओर संकेत करता है।
134. गौरीतेजोभू
ॐ गौरीतेजोभुवे नमः।
अर्थ: गौरी के दिव्य तेज से उत्पन्न।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को माता पार्वती की शक्ति और मातृऊर्जा से जोड़ता है।
135. स्वर्धुनीभव
ॐ स्वर्धुनीभवाय नमः।
अर्थ: स्वर्गीय नदी गंगा से संबंधित दिव्य स्वरूप वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी और पवित्र गंगा से जुड़े दिव्य संबंध की ओर संकेत करता है।
136. यज्ञकाय
ॐ यज्ञकायाय नमः।
अर्थ: जिनका स्वरूप स्वयं यज्ञ के समान पवित्र है।
भावार्थ: यह नाम त्याग, समर्पण और पवित्र कर्म की भावना को प्रकट करता है।
137. महानाद
ॐ महानादाय नमः।
अर्थ: महान और प्रभावशाली नाद वाले।
भावार्थ: गणेशजी का महानाद स्वरूप मंत्र, संगीत और दिव्य ध्वनि की शक्ति का स्मरण कराता है।
138. गिरिवर्ष्मा
ॐ गिरिवर्ष्मणे नमः।
अर्थ: पर्वत के समान विशाल देह वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की विशालता, स्थिरता और अचल शक्ति का प्रतीक है।
139. शुभानन
ॐ शुभाननाय नमः।
अर्थ: मंगलमय मुख वाले।
भावार्थ: शुभानन गणेशजी का ऐसा स्वरूप है जिसका स्मरण शुभता और प्रसन्नता का भाव जगाता है।
140. सर्वात्मा
ॐ सर्वात्मने नमः।
अर्थ: सभी प्राणियों में आत्मरूप से विद्यमान।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की सर्वव्यापक चेतना और एकत्व की भावना को दर्शाता है।
141. सर्वदेवात्मा
ॐ सर्वदेवात्मने नमः।
अर्थ: सभी देवताओं में व्याप्त दिव्य आत्मतत्त्व।
भावार्थ: यह नाम विभिन्न देवस्वरूपों में एक ही परम दिव्य चेतना को देखने का भाव देता है।
142. ब्रह्ममूर्धा
ॐ ब्रह्ममूर्ध्ने नमः।
अर्थ: ब्रह्मतत्त्व से संबंधित दिव्य मस्तक वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के ब्रह्मांडीय और ज्ञानमय स्वरूप की ओर संकेत करता है।
143. ककुप्श्रुति
ॐ ककुप्श्रुतये नमः।
अर्थ: जिनकी श्रवण शक्ति सभी दिशाओं तक व्याप्त है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की सर्वदिशाओं में व्याप्त चेतना और दिव्य श्रवण का प्रतीक है।
144. ब्रह्माण्डकुम्भ
ॐ ब्रह्माण्डकुम्भाय नमः।
अर्थ: जिनका स्वरूप ब्रह्मांड को धारण करने वाला विशाल पात्र जैसा है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की विराट और ब्रह्मांडमय सत्ता का वर्णन करता है।
145. चिद्व्योमभाल
ॐ चिद्व्योमभालाय नमः।
अर्थ: चेतना और आकाश के समान विशाल मस्तक वाले।
भावार्थ: यह नाम ज्ञान की असीमता और गणेशजी की विराट चेतना का प्रतीक है।
146. सत्यशिरोरुह
ॐ सत्यशिरोरुहाय नमः।
अर्थ: सत्य को अपने स्वरूप का आधार बनाने वाले।
भावार्थ: यह नाम सत्य, ज्ञान और पवित्रता को गणेशजी के दिव्य स्वरूप से जोड़ता है।
147. जगज्जन्मलयोन्मेषनिमेष
ॐ जगज्जन्मलयोन्मेषनिमेषाय नमः।
अर्थ: जिनकी दिव्य चेतना में सृष्टि का प्रकट होना और विलीन होना निहित है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विराट ब्रह्मांडीय स्वरूप और सृजन-विलय की शक्ति को दर्शाता है।
148. अग्न्यर्कसोमदृक्
ॐ अग्न्यर्कसोमदृशे नमः।
अर्थ: अग्नि, सूर्य और चंद्रमा के समान दिव्य नेत्रों वाले।
भावार्थ: यह नाम प्रकाश, ऊर्जा और शीतलता—तीनों दिव्य शक्तियों को एक साथ दर्शाता है।
149. गिरीन्द्रैकरद
ॐ गिरीन्द्रैकरदाय नमः।
अर्थ: महान पर्वत के समान दृढ़ दंत वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की अचल शक्ति और अद्भुत स्वरूप का स्मरण कराता है।
150. धर्माधर्मोष्ठ
ॐ धर्माधर्मोष्ठाय नमः।
अर्थ: जिनके स्वरूप में धर्म और अधर्म दोनों का विवेचन निहित है।
भावार्थ: यह नाम मनुष्य को धर्म और अधर्म के अंतर को समझने की प्रेरणा देता है।
151. सामबृंहित
ॐ सामबृंहिताय नमः।
अर्थ: सामवेद की मधुरता से युक्त।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के स्वर, संगीत और वैदिक ज्ञान से जुड़े रूप को दर्शाता है।
152. ग्रहर्क्षदशन
ॐ ग्रहर्क्षदशनाय नमः।
अर्थ: जिनके विराट स्वरूप में ग्रह और नक्षत्र भी समाहित हैं।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के ब्रह्मांडव्यापी स्वरूप का प्रतीकात्मक वर्णन है।
153. वाणीजिह्व
ॐ वाणीजिह्वाय नमः।
अर्थ: जिनकी जिह्वा वाणी और ज्ञान की शक्ति का प्रतीक है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को वाणी, मंत्र और ज्ञान से जोड़ता है।
154. वासवनासिक
ॐ वासवनासिकाय नमः।
अर्थ: जिनके विराट स्वरूप में इंद्रतत्त्व नासिका के समान प्रतिष्ठित है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के ब्रह्मांडीय रूप की कल्पना को प्रकट करता है।
155. कुलाचलांस
ॐ कुलाचलांसाय नमः।
अर्थ: पर्वतों के समान विशाल कंधों वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की स्थिरता, शक्ति और विराट देह का प्रतीक है।
156. सोमार्कघण्ट
ॐ सोमार्कघण्टाय नमः।
अर्थ: सूर्य और चंद्र के दिव्य प्रभाव से युक्त।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के प्रकाश और शीतलता से संयुक्त दिव्य स्वरूप का संकेत देता है।
157. रुद्रशिरोधर
ॐ रुद्रशिरोधराय नमः।
अर्थ: रुद्रतत्त्व को मस्तक पर धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के शिव से जुड़े शक्तिशाली और आध्यात्मिक स्वरूप को दर्शाता है।
158. नदीनदभुज
ॐ नदीनदभुजाय नमः।
अर्थ: नदियों के समान विस्तृत भुजाओं वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विराट स्वरूप और प्रकृति से उनके दिव्य संबंध को प्रकट करता है।
159. सर्पाङ्गुलीक
ॐ सर्पाङ्गुलीकाय नमः।
अर्थ: सर्पों को अंगुलियों के अलंकार के रूप में धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के रहस्यमय, शक्तिशाली और अलंकारयुक्त स्वरूप का वर्णन करता है।
160. तारकानख
ॐ तारकानखाय नमः।
अर्थ: तारों के समान चमकते नख वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विराट और आकाशमय स्वरूप की कल्पना कराता है।
161. भ्रूमध्यसंस्थितकर
ॐ भ्रूमध्यसंस्थितकराय नमः।
अर्थ: भ्रूमध्य में स्थित दिव्य सूँड वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की एकाग्रता, ध्यान और सूक्ष्म चेतना से जुड़ा भाव प्रस्तुत करता है।
162. ब्रह्मविद्यामदोत्कट
ॐ ब्रह्मविद्यामदोत्कटाय नमः।
अर्थ: ब्रह्मविद्या और महान ज्ञान से अत्यंत समृद्ध।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को उच्च आध्यात्मिक ज्ञान और प्रखर बुद्धि का स्वरूप मानता है।
163. व्योमनाभ
ॐ व्योमनाभये नमः।
अर्थ: जिनकी नाभि आकाश के समान व्यापक है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विराट ब्रह्मांडीय स्वरूप को दर्शाता है।
164. श्रीहृदय
ॐ श्रीहृदयाय नमः।
अर्थ: जिनके हृदय में श्री और दिव्य ज्ञान का निवास है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को समृद्धि, ज्ञान और मंगल का आधार मानने की भावना प्रकट करता है।
165. मेरुपृष्ठ
ॐ मेरुपृष्ठाय नमः।
अर्थ: मेरु पर्वत के समान दृढ़ पृष्ठभाग वाले।
भावार्थ: यह नाम अचलता, स्थिरता और विराट शक्ति का प्रतीक है।
166. अर्णवोदर
ॐ अर्णवोदराय नमः।
अर्थ: समुद्र के समान विशाल उदर वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के अनंत और विराट स्वरूप की कल्पना को दर्शाता है।
167. कुक्षिस्थयक्षगन्धर्वरक्षःकिन्नरमानुष
ॐ कुक्षिस्थयक्षगन्धर्वरक्षःकिन्नरमानुषाय नमः।
अर्थ: जिनके विराट स्वरूप में यक्ष, गंधर्व, राक्षस, किन्नर और मनुष्य भी समाहित हैं।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की ऐसी सर्वव्यापक सत्ता को दर्शाता है जिसमें विभिन्न लोक और प्राणी समाए हुए हैं।
168. पृथ्विकटि
ॐ पृथ्विकटये नमः।
अर्थ: जिनकी कमर पृथ्वी के समान व्यापक है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विराट ब्रह्मांडीय शरीर की कल्पना को प्रकट करता है।
169. सृष्टिलिङ्ग
ॐ सृष्टिलिङ्गाय नमः।
अर्थ: सृष्टि के मूल कारण का प्रतीक स्वरूप।
भावार्थ: यह नाम सृजन की दिव्य शक्ति और जीवन की निरंतरता से जुड़ा भाव रखता है।
170. शैलोरु
ॐ शैलोरवे नमः।
अर्थ: पर्वतों के समान मजबूत जंघाओं वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की स्थिरता और विशाल शक्ति को दर्शाता है।
171. दस्रजानुक
ॐ दस्रजानुकाय नमः।
अर्थ: जिनके घुटने दिव्य अश्विनीकुमारों के समान माने गए हैं।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विराट शरीर में देवशक्तियों के प्रतीकात्मक समावेश को दर्शाता है।
172. पातालजङ्घ
ॐ पातालजङ्घाय नमः।
अर्थ: जिनकी जंघाओं में पाताल लोकों की विराटता का भाव है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के सर्वलोकव्यापी स्वरूप की कल्पना को प्रकट करता है।
173. मुनिपात्
ॐ मुनिपदे नमः।
अर्थ: जिनके चरण मुनियों की श्रद्धा से पूजित हैं।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के चरणों की महिमा और ऋषि-मुनियों की श्रद्धा को दर्शाता है।
174. कालाङ्गुष्ठ
ॐ कालाङ्गुष्ठाय नमः।
अर्थ: जिनके चरण में कालतत्त्व का प्रतीक अंगुष्ठ स्थित है।
भावार्थ: यह नाम समय और काल पर स्थित दिव्य सत्ता की ओर संकेत करता है।
175. त्रयीतनु
ॐ त्रयीतनवे नमः।
अर्थ: जिनका स्वरूप तीनों वेदों से जुड़ा हुआ है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को वैदिक ज्ञान और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक मानने की भावना प्रकट करता है।
176. ज्योतिर्मण्डललाङ्गूल
ॐ ज्योतिर्मण्डललाङ्गूलाय नमः।
अर्थ: जिनकी पूँछ का स्वरूप ज्योतिर्मय तारामंडल जैसा माना गया है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विराट और आकाशीय स्वरूप का प्रतीकात्मक वर्णन करता है।
177. हृदयालाननिश्चल
ॐ हृदयालान-निश्चलाय नमः।
अर्थ: भक्तों के हृदय में अचल होकर रहने वाले।
भावार्थ: सच्ची भक्ति में गणेशजी का स्थान मन के भीतर स्थिर श्रद्धा के रूप में माना जाता है।
178. हृत्पद्मकर्णिकाशालिवियत्केलिसरोवर
ॐ हृत्पद्मकर्णिकाशालिवियत्केलिसरोवराय नमः।
अर्थ: भक्तों के हृदय-कमल को अपनी दिव्य क्रीड़ा का स्थान बनाने वाले।
भावार्थ: यह नाम बताता है कि शुद्ध हृदय को भगवान की उपस्थिति का पवित्र स्थान माना जाता है।
179. सद्भक्तध्याननिगड
ॐ सद्भक्तध्याननिगडाय नमः।
अर्थ: सच्चे भक्त के ध्यान से प्रेमपूर्वक बंध जाने वाले।
भावार्थ: गणेशजी की भक्ति में ध्यान और श्रद्धा को विशेष महत्व दिया गया है।
180. पूजावारिनिवारित
ॐ पूजावारिनिवारिताय नमः।
अर्थ: भक्त की पूजा और प्रार्थना से प्रसन्न होने वाले।
भावार्थ: यह नाम भक्त और भगवान के प्रेमपूर्ण संबंध को दर्शाता है।
181. प्रतापी
ॐ प्रतापिने नमः।
अर्थ: महान तेज और पराक्रम वाले।
भावार्थ: गणेशजी का प्रतापी स्वरूप शक्ति, साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक है।
182. कश्यपसुत
ॐ कश्यपसुताय नमः।
अर्थ: कश्यप से संबंधित दिव्य स्वरूप वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की एक विशिष्ट पौराणिक परंपरा से जुड़े स्वरूप का स्मरण कराता है।
183. गणप
ॐ गणपाय नमः।
अर्थ: गणों के रक्षक और अधिपति।
भावार्थ: गणप नाम गणेशजी की मूल पहचान—गणों के स्वामी—को प्रकट करता है।
184. विष्टपी
ॐ विष्टपिने नमः।
अर्थ: समस्त लोकों के आधार।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की व्यापक और विश्वधारक शक्ति को दर्शाता है।
185. बली
ॐ बलिने नमः।
अर्थ: अत्यंत शक्तिशाली।
भावार्थ: गणेशजी की शक्ति केवल बाहरी बल नहीं, बल्कि धैर्य और आत्मबल का भी प्रतीक है।
186. यशस्वी
ॐ यशस्विने नमः।
अर्थ: महान यश और कीर्ति से संपन्न।
भावार्थ: गणेशजी की महिमा देवताओं और भक्तों में व्यापक रूप से पूजित मानी जाती है।
187. धार्मिक
ॐ धार्मिकाय नमः।
अर्थ: धर्म के मार्ग पर स्थित और धर्म की रक्षा करने वाले।
भावार्थ: यह नाम सत्य, सदाचार और शुभ कर्मों की प्रेरणा देता है।
188. स्वोजस्
ॐ स्वोजसे नमः।
अर्थ: अपने भीतर प्रबल ओज और तेज रखने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के प्रभावशाली व्यक्तित्व और दिव्य ऊर्जा को दर्शाता है।
189. प्रथम
ॐ प्रथमाय नमः।
अर्थ: सबसे पहले पूजे जाने वाले।
भावार्थ: किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में गणेशजी की प्रथम पूजा की परंपरा इसी भाव से जुड़ी है।
190. प्रथमेश्वर
ॐ प्रथमेश्वराय नमः।
अर्थ: प्रथम पूज्य ईश्वर।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को शुभ कार्यों के आरंभकर्ता और अग्रपूज्य देवता के रूप में स्मरण कराता है।
191. चिन्तामणिद्वीपपति
ॐ चिन्तामणिद्वीपपतये नमः।
अर्थ: चिंतामणि नामक दिव्य लोक के अधिपति।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के एक रहस्यमय और दिव्य आध्यात्मिक लोक से जुड़े स्वरूप को दर्शाता है।
192. कल्पद्रुमवनालय
ॐ कल्पद्रुमवनालयाय नमः।
अर्थ: कल्पवृक्षों से युक्त दिव्य वन में निवास करने वाले।
भावार्थ: कल्पद्रुम समृद्धि और इच्छापूर्ति का प्रतीक है; यह नाम गणेशजी के दिव्य ऐश्वर्य को दर्शाता है।
193. रत्नमण्डपमध्यस्थ
ॐ रत्नमण्डपमध्यस्थाय नमः।
अर्थ: रत्नों से सजे दिव्य मंडप के मध्य विराजमान।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के राजसी और दिव्य वैभव से युक्त स्वरूप को दर्शाता है।
194. रत्नसिंहासनाश्रय
ॐ रत्नसिंहासनाश्रयाय नमः।
अर्थ: रत्नजड़ित सिंहासन पर विराजमान।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की दिव्य प्रतिष्ठा और ऐश्वर्यपूर्ण स्वरूप का स्मरण कराता है।
195. तीव्राशिरोद्धृतपद
ॐ तीव्राशिरोद्धृतपदाय नमः।
अर्थ: तीव्रा नामक दिव्य शक्ति पर चरण रखने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के शक्ति-स्वरूप और विशेष उपासना परंपरा से जुड़ा है।
196. ज्वालिनीमौलिलालित
ॐ ज्वालिनीमौलिलालिताय नमः।
अर्थ: ज्वालिनी शक्ति द्वारा पूजित और सम्मानित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के तेजस्वी स्वरूप और दिव्य शक्तियों से उनके संबंध को दर्शाता है।
197. नन्दानन्दितपीठश्री
ॐ नन्दानन्दितपीठश्रिये नमः।
अर्थ: नन्दा शक्ति से सुशोभित दिव्य पीठ पर विराजमान।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के शक्ति-संपन्न और आनंदमय आसन का स्मरण कराता है।
198. भोगदाभूषितासन
ॐ भोगदाभूषितासनाय नमः।
अर्थ: भोगदा शक्ति से सुशोभित आसन पर विराजमान।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की समृद्धि और सुख प्रदान करने वाली शक्ति से संबंध को दर्शाता है।
199. सकामदायिनीपीठ
ॐ सकामदायिनीपीठाय नमः।
अर्थ: इच्छाओं की पूर्ति करने वाली शक्ति के पीठ पर स्थित।
भावार्थ: यह नाम भक्तों की शुभ इच्छाओं और उनकी पूर्ति की कामना से जुड़ा दिव्य भाव प्रकट करता है।
200. स्फुरदुग्रासनाश्रय
ॐ स्फुरदुग्रासनाश्रयाय नमः।
अर्थ: प्रभावशाली और उग्र आसन पर विराजमान।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के शक्तिशाली और रक्षक स्वरूप का संकेत देता है।
201. तेजोवतीशिरोरत्न
ॐ तेजोवतीशिरोरत्नाय नमः।
अर्थ: तेजोवती शक्ति के मस्तक-रत्न के समान प्रतिष्ठित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की दिव्य आभा और शक्ति-संपन्न स्वरूप को दर्शाता है।
202. सत्यानित्यावतंसित
ॐ सत्यानित्यावतंसिताय नमः।
अर्थ: सत्य और नित्यत्व से अलंकृत।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के शाश्वत, सत्यस्वरूप और दिव्य आभूषणों से सुशोभित रूप की ओर संकेत करता है।
203. सविघ्ननाशिनीपीठ
ॐ सविघ्ननाशिनीपीठाय नमः।
अर्थ: विघ्ननाशिनी शक्ति के दिव्य पीठ पर स्थित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की विघ्नों को दूर करने वाली शक्ति से जुड़े स्वरूप को प्रकट करता है।
204. सर्वशक्त्यम्बुजाश्रय
ॐ सर्वशक्त्यम्बुजाश्रयाय नमः।
अर्थ: समस्त शक्तियों से युक्त कमल का आश्रय लेने वाले।
भावार्थ: कमल पवित्रता और दिव्यता का प्रतीक है; यह नाम गणेशजी के शक्ति-संपन्न स्वरूप को दर्शाता है।
205. लिपिपद्मासनाधार
ॐ लिपिपद्मासनाधाराय नमः।
अर्थ: अक्षरों से युक्त कमलासन पर प्रतिष्ठित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी को अक्षर, लेखन, विद्या और ज्ञान से जोड़ता है।
206. वह्निधामत्रयाश्रय
ॐ वह्निधामत्रयाश्रयाय नमः।
अर्थ: अग्नि, सूर्य और चंद्र से संबंधित तीन दिव्य तेजों में स्थित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के प्रकाशमय और ब्रह्मांडीय स्वरूप का प्रतीकात्मक वर्णन है।
207. उन्नतप्रपद
ॐ उन्नतप्रपदाय नमः।
अर्थ: उन्नत चरणों वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विशिष्ट शारीरिक स्वरूप का वर्णन करता है।
208. गूढगुल्फ
ॐ गूढगुल्फाय नमः।
अर्थ: जिनके टखने सुडौल और शरीर में सुंदरता से छिपे हुए हैं।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की संतुलित और दिव्य शारीरिक संरचना का वर्णन करता है।
209. संवृतपार्ष्णिक
ॐ संवृतपार्ष्णिकाय नमः।
अर्थ: जिनकी एड़ियाँ और चरण विशेष रूप से सुडौल हैं।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के दिव्य शारीरिक सौंदर्य का सूक्ष्म वर्णन करता है।
210. पीनजङ्घ
ॐ पीनजङ्घाय नमः।
अर्थ: पुष्ट और मांसल जंघाओं वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की स्थिरता और शारीरिक सामर्थ्य को दर्शाता है।
211. श्लिष्टजानु
ॐ श्लिष्टजानवे नमः।
अर्थ: सुगठित घुटनों वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के संतुलित और दिव्य शरीर का वर्णन करता है।
212. स्थूलोरु
ॐ स्थूलोरवे नमः।
अर्थ: मजबूत और विशाल जंघाओं वाले।
भावार्थ: यह नाम स्थिरता और शक्ति से युक्त गणेशजी के स्वरूप को दर्शाता है।
213. प्रोन्नमत्कटि
ॐ प्रोन्नमत्कटये नमः।
अर्थ: उन्नत और सुडौल कटिभाग वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विशिष्ट दिव्य शारीरिक स्वरूप का वर्णन करता है।
214. निम्ननाभि
ॐ निम्ननाभये नमः।
अर्थ: गहरी नाभि वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की पारंपरिक दिव्य शारीरिक विशेषताओं में से एक का वर्णन करता है।
215. स्थूलकुक्षि
ॐ स्थूलकुक्षये नमः।
अर्थ: विशाल उदर वाले।
भावार्थ: स्थूलकुक्षि नाम गणेशजी के प्रसिद्ध लम्बोदर स्वरूप की विशेषता को और स्पष्ट करता है।
216. पीनवक्षा
ॐ पीनवक्षसे नमः।
अर्थ: पुष्ट और मजबूत वक्षस्थल वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की शक्ति और स्थिरता से युक्त देह का वर्णन करता है।
217. बृहद्भुज
ॐ बृहद्भुजाय नमः।
अर्थ: विशाल भुजाओं वाले।
भावार्थ: उनकी बड़ी भुजाएँ व्यापक सामर्थ्य और संरक्षण की भावना का प्रतीक हैं।
218. पीनस्कन्ध
ॐ पीनस्कन्धाय नमः।
अर्थ: मजबूत और चौड़े कंधों वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की शक्ति, स्थिरता और सामर्थ्य को दर्शाता है।
219. कम्बुकण्ठ
ॐ कम्बुकण्ठाय नमः।
अर्थ: शंख के समान सुडौल कंठ वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के सुंदर और विशिष्ट कंठ की दिव्य विशेषता को दर्शाता है।
220. लम्बोष्ठ
ॐ लम्बोष्ठाय नमः।
अर्थ: लंबे और सुडौल होंठ वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विशिष्ट गजानन स्वरूप का शारीरिक वर्णन करता है।
221. लम्बनासिक
ॐ लम्बनासिकाय नमः।
अर्थ: लंबी नासिका अर्थात् सूँड वाले।
भावार्थ: गणेशजी की लंबी सूँड उनके स्वरूप की सबसे प्रमुख और विशिष्ट पहचान है।
222. भग्नवामरद
ॐ भग्नवामरदाय नमः।
अर्थ: जिनका बायाँ दाँत खंडित है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के एकदंत स्वरूप की विशेषता को स्पष्ट करता है।
223. तुङ्गसव्यदन्त
ॐ तुङ्गसव्यदन्ताय नमः।
अर्थ: जिनका एक दाँत ऊँचा और स्पष्ट है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विशिष्ट दंत-विन्यास और एकदंत रूप का वर्णन करता है।
224. महाहनु
ॐ महाहनवे नमः।
अर्थ: विशाल हनु अर्थात् ठोड़ी वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के गजानन स्वरूप की भव्य शारीरिक विशेषता को दर्शाता है।
225. ह्रस्वनेत्रत्रय
ॐ ह्रस्वनेत्रत्रयाय नमः।
अर्थ: तीन छोटे किंतु दिव्य नेत्रों वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की दिव्य दृष्टि और विशिष्ट त्रिनेत्र स्वरूप का संकेत देता है।
226. शूर्पकर्ण
ॐ शूर्पकर्णाय नमः।
अर्थ: सूप के समान बड़े कान वाले।
भावार्थ: विशाल कान गणेशजी के धैर्यपूर्वक सुनने और ज्ञान ग्रहण करने की प्रतीकात्मक शिक्षा देते हैं।
227. निबिडमस्तक
ॐ निबिडमस्तकाय नमः।
अर्थ: दृढ़ और सुदृढ़ मस्तक वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की स्थिर बुद्धि और मजबूत व्यक्तित्व की ओर संकेत करता है।
228. स्तबकाकारकुम्भाग्र
ॐ स्तबकाकारकुम्भाग्राय नमः।
अर्थ: मस्तक का अग्रभाग पुष्पगुच्छ के समान सुंदर।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के अलौकिक और विशिष्ट शारीरिक सौंदर्य का वर्णन करता है।
229. रत्नमौलि
ॐ रत्नमौलये नमः।
अर्थ: रत्नजड़ित मुकुट धारण करने वाले।
भावार्थ: रत्नमौलि रूप गणेशजी की दिव्य शोभा, ऐश्वर्य और राजसी तेज का प्रतीक है।
230. निरङ्कुश
ॐ निरङ्कुशाय नमः।
अर्थ: पूर्ण स्वतंत्र और किसी बाहरी बंधन से परे।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की परम स्वतंत्र दिव्य सत्ता और असीम शक्ति को दर्शाता है।
231. सर्पहारकटीसूत्र
ॐ सर्पहारकटीसूत्राय नमः।
अर्थ: सर्पाकार हार और कटिसूत्र धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के शक्तिशाली और रहस्यमय अलंकारयुक्त स्वरूप को दर्शाता है।
232. सर्पयज्ञोपवीतवान्
ॐ सर्पयज्ञोपवीतवते नमः।
अर्थ: सर्प को यज्ञोपवीत के रूप में धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विशिष्ट और प्रतीकात्मक आभूषणों से युक्त रूप को प्रकट करता है।
233. सर्पकोटीरकटक
ॐ सर्पकोटीरकटकाय नमः।
अर्थ: सर्प को मुकुट और कंगन के रूप में धारण करने वाले।
भावार्थ: यह स्वरूप गणेशजी की शक्ति, निर्भयता और दिव्य वैभव का प्रतीक है।
234. सर्पग्रैवेयकाङ्गद
ॐ सर्पग्रैवेयकाङ्गदाय नमः।
अर्थ: सर्पाकार हार और बाजूबंद धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के अद्भुत और अलौकिक अलंकरण का वर्णन करता है।
235. सर्पकक्ष्योदराबन्ध
ॐ सर्पकक्ष्योदराबन्धाय नमः।
अर्थ: सर्प को कमर के बंधन के रूप में धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के विशेष नागाभूषण और शक्तिशाली स्वरूप का स्मरण कराता है।
236. सर्पराजोत्तरीयक
ॐ सर्पराजोत्तरीयकाय नमः।
अर्थ: नागराज को उत्तरीय के रूप में धारण करने वाले।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की निर्भयता और नागशक्ति पर उनके आधिपत्य का प्रतीक है।
237. रक्त
ॐ रक्ताय नमः।
अर्थ: लाल आभा वाले।
भावार्थ: लाल वर्ण गणेशजी के तेज, ऊर्जा और मंगलमय शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
238. रक्ताम्बरधर
ॐ रक्ताम्बरधराय नमः।
अर्थ: लाल वस्त्र धारण करने वाले।
भावार्थ: लाल वस्त्रों से सुशोभित गणेशजी का रूप ऊर्जा, उत्साह और शुभता का भाव जगाता है।
239. रक्तमाल्यविभूषण
ॐ रक्तमाल्यविभूषणाय नमः।
अर्थ: लाल पुष्पमाला और लाल आभूषणों से सुसज्जित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के तेजस्वी और मंगलकारी स्वरूप का सुंदर वर्णन करता है।
240. रक्तेक्षण
ॐ रक्तेक्षणाय नमः।
अर्थ: लाल आभा वाले नेत्रों से युक्त।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी की प्रचंड ऊर्जा और तेजस्वी दृष्टि का प्रतीक है।
241. रक्तकर
ॐ रक्तकराय नमः।
अर्थ: लाल आभा वाले हाथों से सुशोभित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के तेज और शक्ति से युक्त दिव्य स्वरूप को दर्शाता है।
242. रक्तताल्वोष्ठपल्लव
ॐ रक्तताल्वोष्ठपल्लवाय नमः।
अर्थ: लाल आभा वाले तालु और कोमल होंठों से युक्त।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के मनोहर और दिव्य मुखमंडल का सूक्ष्म वर्णन करता है।
243. श्वेत
ॐ श्वेताय नमः।
अर्थ: श्वेत और निर्मल वर्ण वाले।
भावार्थ: श्वेत रंग शांति, पवित्रता और निर्मल चेतना का प्रतीक माना जाता है।
244. श्वेताम्बरधर
ॐ श्वेताम्बरधराय नमः।
अर्थ: श्वेत वस्त्र धारण करने वाले।
भावार्थ: यह रूप गणेशजी की शांत, पवित्र और सौम्य दिव्य छवि को प्रकट करता है।
245. श्वेतमाल्यविभूषण
ॐ श्वेतमाल्यविभूषणाय नमः।
अर्थ: सफेद पुष्पमाला और आभूषणों से सुशोभित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के शांत और निर्मल स्वरूप का सुंदर चित्र प्रस्तुत करता है।
246. श्वेतातपत्ररुचिर
ॐ श्वेतातपत्ररुचिराय नमः।
अर्थ: श्वेत छत्र से सुशोभित और शोभायमान।
भावार्थ: श्वेत छत्र गणेशजी की राजसी प्रतिष्ठा और दिव्य सम्मान का प्रतीक है।
247. श्वेतचामरवीजित
ॐ श्वेतचामरवीजिताय नमः।
अर्थ: जिनकी श्वेत चँवर से सेवा की जाती है।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के पूजनीय और राजसी दिव्य स्वरूप को दर्शाता है।
248. सर्वावयवसम्पूर्णसर्वलक्षणलक्षित
ॐ सर्वावयवसम्पूर्णसर्वलक्षणलक्षिताय नमः।
अर्थ: सभी अंगों और शुभ लक्षणों से पूर्ण।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के आदर्श, मंगलकारी और पूर्ण दिव्य स्वरूप की कल्पना प्रस्तुत करता है।
249. सर्वाभरणशोभाढ्य
ॐ सर्वाभरणशोभाढ्याय नमः।
अर्थ: सभी प्रकार के आभूषणों से सुशोभित।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के ऐश्वर्यपूर्ण और दिव्य अलंकारयुक्त स्वरूप को दर्शाता है।
250. सर्वशोभासमन्वित
ॐ सर्वशोभासमन्विताय नमः।
अर्थ: हर प्रकार की दिव्य शोभा से युक्त।
भावार्थ: यह नाम गणेशजी के पूर्ण, सुंदर, तेजस्वी और मंगलमय स्वरूप का स्मरण कराता है।
251. सर्वमङ्गलमाङ्गल्य
ॐ सर्वमङ्गलमाङ्गल्याय नमः।
Om Sarvamangalamangalyaya Namah।
जो समस्त मंगलों के लिये मंगलकारी हैं।
252. सर्वकारणकारण
ॐ सर्वकारणकारणाय नमः।
Om Sarvakaranakaranaya Namah।
जो समस्त कारणों के कारण हैं।
253. सर्वदैककर
ॐ सर्वदैककराय नमः।
Om Sarvadaikakaraya Namah।
जो उदार हस्त वाले हैं।
254. शार्ङ्गी
ॐ शार्ङ्गिणे नमः।
Om Sharngine Namah।
जो शार्ङ्गी धनुष धारण करने वाले हैं।
255. बीजापूरी
ॐ बीजापूरिणे नमः।
Om Bijapurine Namah।
जो हाथ में अनार धारण करने वाले हैं।
256. गदाधर
ॐ गदाधराय नमः।
Om Gadadharaya Namah।
जो गदाधारी हैं।
257. इक्षुचापधर
ॐ इक्षुचापधराय नमः।
Om Ikshuchapadharaya Namah।
जो गन्ने का धनुष धारण करने वाले हैं।
258. शूली
ॐ शूलिने नमः।
Om Shuline Namah।
जो त्रिशूल धारण करने वाले हैं।
259. चक्रपाणि
ॐ चक्रपाणये नमः।
Om Chakrapanaye Namah।
जो हाथ में चक्र धारण करने वाले हैं।
260. सरोजभृत्
ॐ सरोजभृते नमः।
Om Sarojabhrite Namah।
जो हाथ में कमल पुष्प धारण करने वाले हैं।
261. पाशी
ॐ पाशिने नमः।
Om Pashine Namah।
जो हाथ में पाश धारण करने वाले हैं।
262. धृतोत्पल
ॐ धृतोत्पलाय नमः।
Om Dhritotpalaya Namah।
जो हाथ में उत्पल अर्थात् नील कमल पुष्प धारण करने वाले हैं।
263. शालीमञ्जरीभृत्
ॐ शालीमञ्जरीभृते नमः।
Om Shalimanjaribhrite Namah।
जो हाथ में धान की बाली धारण करने वाले हैं।
264. स्वदन्तभृत्
ॐ स्वदन्तभृते नमः।
Om Svadantabhrite Namah।
जो हाथ में स्वयं का खण्डित दाँत धारण करने वाले हैं।
265. कल्पवल्लीधर
ॐ कल्पवल्लीधराय नमः।
Om Kalpavallidharaya Namah।
जो हाथ में कल्पलता रखने वाले हैं।
266. विश्वाभयदैककर
ॐ विश्वाभयदैककराय नमः।
Om Vishvabhayadaikakaraya Namah।
जो सम्पूर्ण विश्व में भक्तों का भय नष्ट करने वाले हैं।
267. वशी
ॐ वशिने नमः।
Om Vashine Namah।
जो सम्पूर्ण विश्व को वश में रखने वाले हैं।
268. अक्षमालाधर
ॐ अक्षमालाधराय नमः।
Om Akshamaladharaya Namah।
जो अक्षमाला धारण करने वाले हैं।
269. ज्ञानमुद्रावान्
ॐ ज्ञानमुद्रावते नमः।
Om Jnanamudravate Namah।
जो ज्ञान के सूचक हैं।
270. मुद्गरायुध
ॐ मुद्गरायुधाय नमः।
Om Mudgarayudhaya Namah।
जो मुद्गर को शस्त्र के रूप में धारण करने वाले हैं।
271. पूर्णपात्री
ॐ पूर्णपात्रिणे नमः।
Om Purnapatrine Namah।
जो अमृत से भरे पात्र को धारण करने वाले हैं।
272. कम्बुधर
ॐ कम्बुधराय नमः।
Om Kambudharaya Namah।
जो शंख धारण करने वाले हैं।
273. विधृतालिसमुद्गक
ॐ विधृतालिसमुद्गकाय नमः।
Om Vidhritalisamudgakaya Namah।
जो जिनके गालों पर बहता शहद भ्रमरों को आकर्षित कर रहा है।
274. मातुलिङ्गधर
ॐ मातुलिङ्गधराय नमः।
Om Matulingadharaya Namah।
जिनके हाथ में मातुलिङ्ग फल अर्थात् बिजौरा नींबू है।
275. चूतकलिकाभृत्
ॐ चूतकलिकाभृते नमः।
Om Chutakalikabhrite Namah।
जो आम के पल्लव धारण करने वाले हैं।
276. कुठारवान्
ॐ कुठारवते नमः।
Om Kutharavate Namah।
जो कुठार धारण करने वाले हैं।
277. पुष्करस्थस्वर्णघटीपूर्णरत्नाभिवर्षक
ॐ पुष्करस्थस्वर्णघटीपूर्णरत्नाभिवर्षकाय नमः।
Om Pushkarasthasvarnaghatipurnaratnabhivarshakaya Namah।
जिनके हाथ में रत्नों के स्वर्ण पात्र हैं।
278. भारतीसुन्दरीनाथ
ॐ भारतीसुन्दरीनाथाय नमः।
Om Bharatisundarinathaya Namah।
जो देवी सरस्वती, गौरी एवं लक्ष्मी के साथ विराजमान हैं।
279. विनायकरतिप्रिय
ॐ विनायकरतिप्रियाय नमः।
Om Vinayakaratipriyaya Namah।
जो अपने गणों के साथ खेलने में रुचि रखने वाले हैं।
280. महालक्ष्मीप्रियतम
ॐ महालक्ष्मीप्रियतमाय नमः।
Om Mahalakshmipriyatamaya Namah।
जो महालक्ष्मी के प्रिय हैं।
281. सिद्धलक्ष्मीमनोरम
ॐ सिद्धलक्ष्मीमनोरमाय नमः।
Om Siddhalakshmimanoramaya Namah।
जो सिद्धलक्ष्मी को मोहित करने वाले हैं।
282. रमारमेशपूर्वाङ्ग
ॐ रमारमेशपूर्वाङ्गाय नमः।
Om Ramarameshapurvangaya Namah।
जिनके सम्मुख श्री लक्ष्मी तथा विष्णु जी विराजमान हैं।
283. दक्षिणोमामहेश्वर
ॐ दक्षिणोमामहेश्वराय नमः।
Om Dakshinomamaheshvaraya Namah।
जो देवी उमा और महेश्वर को अपने दक्षिणभाग में स्थापित करने वाले हैं।
284. महीवराहवामाङ्ग
ॐ महीवराहवामाङ्गाय नमः।
Om Mahivarahavamangaya Namah।
जो श्री भूमिदेवी एवं वराह देव को अपने बाएँ भाग या उत्तर दिशा में रखने वाले हैं।
285. रतिकन्दर्पपश्चिम
ॐ रतिकन्दर्पपश्चिमाय नमः।
Om Ratikandarpapashchimaya Namah।
जो रति और कामदेव को अपने पीछे या पश्चिम दिशा में रखने वाले हैं।
286. आमोदप्रमोदजनन
ॐ आमोदप्रमोदजननाय नमः।
Om Amodamodajananaya Namah।
जो आमोद अर्थात् हर्ष को भी हर्ष देने वाले हैं।
287. सप्रमोदप्रमोदन
ॐ सप्रमोदप्रमोदनाय नमः।
Om Sapramodapramodanaya Namah।
जो प्रमोद अर्थात् सुख को भी सुख देने वाले हैं।
288. समेधितसमृद्धिश्री
ॐ समेधितसमृद्धिश्रिये नमः।
Om Samedhitasamriddhishriye Namah।
जो देवी समृद्धि को समृद्धि प्रदान करने वाले हैं।
289. ऋद्धिसिद्धिप्रवर्तक
ॐ ऋद्धिसिद्धिप्रवर्तकाय नमः।
Om Riddhisiddhipravartakaya Namah।
जो ऋद्धि देवी में स्थित सिद्धि के प्रवर्तक हैं।
290. दत्तसौमुख्यसुमुख
ॐ दत्तसौमुख्यसुमुखाय नमः।
Om Dattasaumukhyasumukhaya Namah।
जो सुमुख को सुमुखता प्रदान करने वाले हैं।
291. कान्तिकन्दलिताश्रय
ॐ कान्तिकन्दलिताश्रयाय नमः।
Om Kantikandalitashrayaya Namah।
जो कान्ति देवी के आश्रय स्थान को अंकुरित करने वाले हैं।
292. मदनावत्याश्रिताङ्घ्रि
ॐ मदनावत्याश्रिताङ्घ्रये नमः।
Om Madanavatyashritanghraye Namah।
जो मदनावती देवी द्वारा पूजे जाने वाले हैं।
293. कृत्तदौर्मुख्यदुर्मुख
ॐ कृत्तदौर्मुख्यदुर्मुखाय नमः।
Om Krittadaurmukhyadurmukhaya Namah।
जो दुर्मुख की दुर्मुखता को काट फेंकने वाले हैं।
294. विघ्नसम्पल्लवोपघ्न
ॐ विघ्न-सम्पल्लवोपघ्नाय नमः।
Om Vighna-sampallavopaghnaya Namah।
जो विघ्नों के निवारक हैं।
295. सेवोन्निद्रमदद्रव
ॐ सेवोन्निद्र-मदद्रवाय नमः।
Om Sevonnidra-madadravaya Namah।
जो देवी मदद्रवा द्वारा पूजे जाने वाले हैं।
296. विघ्नकृन्निघ्नचरण
ॐ विघ्नकृन्निघ्नचरणाय नमः।
Om Vighnakrinnighnacharanaya Namah।
विघ्नकृत भक्तिभाव से जिनके चरणों को अपने अधीन करके रखा है।
297. द्राविणीशक्तिसत्कृत
ॐ द्राविणीशक्तिसत्कृताय नमः।
Om Dravinishaktisatkritaya Namah।
जो द्राविणी नामक शक्ति द्वारा सम्मानित हैं।
298. तीव्राप्रसन्ननयन
ॐ तीव्राप्रसन्ननयनाय नमः।
Om Tivraprasannanayanaya Namah।
जो तीव्रा नामक शक्ति के प्रति अत्यन्त प्रसन्न रहते हैं।
299. ज्वालिनीपालितैकदृक्
ॐ ज्वालिनीपालितैकदृशे नमः।
Om Jvalinipalitaikadrishe Namah।
जिनकी मुख्य दृष्टि ज्वालिनी-शक्ति के संरक्षण में संलग्न है।
300. मोहिनीमोहन
ॐ मोहिनीमोहनाय नमः।
Om Mohinimohanaya Namah।
जो मोहिनी शक्ति को भी मोहित करने वाले हैं।
301. भोगदायिनीकान्तिमण्डित
ॐ भोगदायिनीकान्तिमण्डिताय नमः।
Om Bhogadayinikantimanditaya Namah।
जो भोगदायिनी शक्ति की कान्ति से मण्डित चरणपादुका वाले हैं।
302. कामिनीकान्तवक्त्रश्री
ॐ कामिनीकान्तवक्त्रश्रिये नमः।
Om Kaminikantavaktrashriye Namah।
जो कामदायिनी नामक शक्ति के मुख की शोभा को बढ़ाने वाले हैं।
303. अधिष्ठितवसुन्धर
ॐ अधिष्ठितवसुन्धराय नमः।
Om Adhishthitavasundharaya Namah।
जो देवी वसुन्धरा के आधार हैं।
304. वसुन्धरामदोन्नद्धमहाशङ्खनिधिप्रभु
ॐ वसुन्धरामदोन्नद्धमहाशङ्खनिधिप्रभवे नमः।
Om Vasundharamadonnaddhamahashankhanidhiprabhave Namah।
जो पत्नी वसुन्धरा के साथ प्रसन्न रहने वाले महाशंख निधि के स्वामी हैं।
305. नमद्वसुमतीमौलिमहापद्मनिधिप्रभु
ॐ नमद्वसुमतीमौलिमहापद्मनिधिप्रभवे नमः।
Om Namadvasumatimaulimahapadmanidhiprabhave Namah।
जो वसुमती एवं महापद्म द्वारा पूजनीय हैं।
306. सर्वसद्गुरुसंसेव्य
ॐ सर्वसद्गुरुसंसेव्याय नमः।
Om Sarvasadgurusamsevyaya Namah।
जो समस्त गुरुओं द्वारा पूजे जाने वाले हैं।
307. शोचिष्केशहृदाश्रय
ॐ शोचिष्केशहृदाश्रयाय नमः।
Om Shochishkeshahridashrayaya Namah।
जो गार्हपत्य आदि पाँच अग्नियों के हृदय में ध्येयरूप से विराजमान हैं।
308. ईशानमूर्द्धा
ॐ ईशानमूर्ध्ने नमः।
Om Ishanamurdhne Namah।
जो भगवान शंकर के माननीय हैं।
309. देवेन्द्रशिखा
ॐ देवेन्द्रशिखायै नमः।
Om Devendrashikhayai Namah।
जो देवराज इन्द्र के आराध्य हैं।
310. पवननन्दन
ॐ पवननन्दनाय नमः।
Om Pavananandanaya Namah।
जो वायु को आनन्दित करने वाले हैं।
311. अग्रप्रत्यग्रनयन
ॐ अग्रप्रत्यग्रनयनाय नमः।
Om Agrapratyagranayanaya Namah।
जो सूक्ष्म एवं नूतन दृष्टि वाले हैं।
312. दिव्यास्त्रप्रयोगवित्
ॐ दिव्यास्त्राणां प्रयोगविदे नमः।
Om Divyastranam Prayogavide Namah।
जो दिव्य अस्त्रों के प्रयोग को जानने वाले हैं।
313. ऐरावतादिसर्वाशावारणावरणप्रिय
ॐ ऐरावतादिसर्वाशावारणावरणप्रियाय नमः।
Om Airavatadisarvashavaranavaranapriyaya Namah।
जिन्हें खेल-खेल में ऐरावत आदि हाथियों को ढँक लेना प्रिय लगता है।
314. वज्राद्यस्त्रपरिवार
ॐ वज्राद्यस्त्रपरिवाराय नमः।
Om Vajradyastraparivaraya Namah।
जो वज्र आदि अस्त्रों तथा इन्द्र आदि दिक्पालों से आवृत हैं।
315. गणचण्डसमाश्रय
ॐ गणचण्डसमाश्रयाय नमः।
Om Ganachandasamashrayaya Namah।
जो चण्ड आदि गणों को बल प्रदान करने वाले हैं।
316. जयाजयापरीवार
ॐ जयाजयापरीवाराय नमः।
Om Jayajayaparivaraya Namah।
जो जया और अजया नामक पीठशक्तियों से घिरे हुए हैं।
317. विजयाविजयावह
ॐ विजयाविजयावहाय नमः।
Om Vijayavijayavahaya Namah।
जो विजया नामक पीठशक्ति को विजय प्रदान करने वाले हैं।
318. अजितार्चितपादाब्ज
ॐ अजितार्चितपादाब्जाय नमः।
Om Ajitarchitapadabjaya Namah।
जिनके चरण कमल अपराजिता शक्ति द्वारा पूजे जाते हैं।
319. नित्यानित्यावतंसित
ॐ नित्यानित्यावतंसिताय नमः।
Om Nityanityavatamsitaya Namah।
नित्या नाम की शक्ति नित्य जिनके चरणकमलों की सेवा में उपस्थित है।
320. विलासिनीकृतोल्लास
ॐ विलासिनीकृतोल्लासाय नमः।
Om Vilasinikritollasaya Namah।
जो विलासिनी की सेवा से प्रसन्न होने वाले हैं।
321. शौण्डीसौन्दर्यमण्डित
ॐ शौण्डीसौन्दर्यमण्डिताय नमः।
Om Shaundisaundaryamanditaya Namah।
जो शौण्डी शक्ति के सौन्दर्य में वृद्धि करने वाले हैं।
322. अनन्तानन्तसुखद
ॐ अनन्तानन्तसुखदाय नमः।
Om Anantanantasukhadaya Namah।
जो अनन्ता नामक शक्ति को अनन्त सुख प्रदान करने वाले हैं।
323. सुमङ्गलसुमङ्गल
ॐ सुमङ्गलसुमङ्गलाय नमः।
Om Sumangalasumangalaya Namah।
जिनके कारण सुमंगल नामक पीठ भी मंगलयुक्त हो जाता है।
324. इच्छाशक्तिज्ञानशक्तिक्रियाशक्तिनिषेवित
ॐ इच्छाशक्तिज्ञानशक्तिक्रियाशक्तिनिषेविताय नमः।
Om Ichchhashaktijnanashaktikriyashaktinishevitaya Namah।
जो इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति एवं क्रियाशक्ति द्वारा सेवित हैं।
325. सुभगासंश्रितपद
ॐ सुभगासंश्रितपदाय नमः।
Om Subhagasamshritapadaya Namah।
जो सुभगा देवी के द्वारा सेवित चरणकमल वाले हैं।
326. ललिताललिताश्रय
ॐ ललिताललिताश्रयाय नमः।
Om Lalitalalitashrayaya Namah।
जो ललिता देवी के मनोरम आश्रय हैं।
327. कामिनीकामन
ॐ कामिनीकामनाय नमः।
Om Kaminikamanaya Namah।
जो कामकला नामक शक्ति की कामना रखने वाले हैं।
328. काममालिनीकेलिलालित
ॐ काममालिनीकेलिलालिताय नमः।
Om Kamamalinikelilalitaya Namah।
जो काममालिनी नामक शक्ति की क्रीडाओं द्वारा प्रसन्न किये गये हैं।
329. सरस्वत्याश्रय
ॐ सरस्वत्याश्रयाय नमः।
Om Sarasvatyashrayaya Namah।
जो देवी सरस्वती के आश्रय हैं।
330. गौरीनन्दन
ॐ गौरीनन्दनाय नमः।
Om Gaurinandanaya Namah।
जो माता पार्वती को आनन्द प्रदान करने वाले हैं।
331. श्रीनिकेतन
ॐ श्रीनिकेतनाय नमः।
Om Shriniketanaya Namah।
जो देवी लक्ष्मी के निवासस्थान हैं।
332. गुरुगुप्तपद
ॐ गुरुगुप्तपदाय नमः।
Om Guruguptapadaya Namah।
जिनके चरण गुरुओं द्वारा आलिङ्गन के कारण ढँके हुए हैं।
333. वाचासिद्ध
ॐ वाचासिद्धाय नमः।
Om Vachasiddhaya Namah।
जिनकी भक्ति से वाक्-सिद्धि प्राप्त होती है।
334. वागीश्वरीपति
ॐ वागीश्वरीपतये नमः।
Om Vagishvaripataye Namah।
जो वागीश्वरी अर्थात् नकुली नामक शक्ति के प्रियतम हैं।
335. नलिनीकामुक
ॐ नलिनीकामुकाय नमः।
Om Nalinikamukaya Namah।
जो नलिनी अर्थात् सुरापगा नामक शक्ति के प्रियतम हैं।
336. वामाराम
ॐ वामारामाय नमः।
Om Vamaramaya Namah।
वामा नामक शक्ति जिनकी प्रिया हैं।
337. ज्येष्ठामनोरम
ॐ ज्येष्ठामनोरमाय नमः।
Om Jyeshthamanoramaya Namah।
ज्येष्ठा नामक शक्ति जिनकी मनोरमा हैं।
338. रौद्रीमुद्रितपादाब्ज
ॐ रौद्रीमुद्रितपादाब्जाय नमः।
Om Raudrimudritapadabjaya Namah।
रौद्री नामक शक्ति जिनके चरणों को अपनी अंजलि में बाँधे रखती हैं।
339. हुंबीज
ॐ हुंबीजाय नमः।
Om Humbijaya Namah।
हुम् जिनका बीज मन्त्र है।
340. तुङ्गशक्तिक
ॐ तुङ्गशक्तिकाय नमः।
Om Tungashaktikaya Namah।
जो अनन्त शक्ति वाले हैं।
341. विश्वादिजननत्राण
ॐ विश्वादिजननत्राणाय नमः।
Om Vishvadijananatranaya Namah।
जो विश्व के आदिभूत हिरण्यगर्भ के जन्म और पालन के कारण हैं।
342. स्वाहाशक्ति
ॐ स्वाहाशक्तये नमः।
Om Svahashaktaye Namah।
साक्षात् स्वाहा जिनकी शक्ति हैं।
343. सकीलक
ॐ सकीलकाय नमः।
Om Sakilakaya Namah।
जो कीलक से युक्त हैं।
344. अमृताब्धिकृतावास
ॐ अमृताब्धिकृतावासाय नमः।
Om Amritabdhikritavasaya Namah।
जो अमृत के सागर में निवास करने वाले हैं।
345. मदघूर्णितलोचन
ॐ मदघूर्णितलोचनाय नमः।
Om Madaghurnitalochanaya Namah।
जो सजल नेत्रों वाले हैं।
346. उच्छिष्टगण
ॐ उच्छिष्टगणाय नमः।
Om Uchchhishtaganaya Namah।
जो उत्कृष्ट और शिष्ट गणों के स्वामी हैं।
347. उच्छिष्टगणेश
ॐ उच्छिष्टगणेशाय नमः।
Om Uchchhishtaganeshaya Namah।
जो सतत मोदक-भक्षण करने वाले हैं।
348. गणनायक
ॐ गणनायकाय नमः।
Om Gananayakaya Namah।
जिनके गणों की गणना भक्तों द्वारा होती रहती है।
349. सार्वकालिकसंसिद्धि
ॐ सार्वकालिकसंसिद्धये नमः।
Om Sarvakalikasamsiddhaye Namah।
जो सर्वदा सिद्धियों से युक्त रहते हैं।
350. नित्यशैव
ॐ नित्यशैवाय नमः।
Om Nityashaivaya Namah।
जो निरन्तर शिव का ध्यान करने वाले हैं।
351. दिगम्बर
ॐ दिगम्बराय नमः।
Om Digambaraya Namah।
जो समस्त दिशाओं को वस्त्र के रूप में धारण करने वाले हैं।
352. अनपाय
ॐ अनपायाय नमः।
Om Anapayaya Namah।
जो अनन्त-अविनाशी हैं।
353. अनन्तदृष्टि
ॐ अनन्तदृष्टये नमः।
Om Anantadrishtaye Namah।
जो असीम ज्ञानशक्ति से सम्पन्न हैं।
354. अप्रमेय
ॐ अप्रमेयाय नमः।
Om Aprameyaya Namah।
जो वाणी, मन एवं ज्ञानेन्द्रियों से अगम्य होने के कारण प्रमाणातीत हैं।
355. अजरामर
ॐ अजरामराय नमः।
Om Ajaramaraya Namah।
जो जरा और मृत्यु से रहित हैं।
356. अनाविल
ॐ अनाविलाय नमः।
Om Anavilaya Namah।
जो अत्यन्त शुद्ध हैं।
357. अप्रतिरथ
ॐ अप्रतिरथाय नमः।
Om Apratirathaya Namah।
जो अतुलनीय हैं।
358. अच्युत
ॐ अच्युताय नमः।
Om Achyutaya Namah।
जो मर्यादा से कभी च्युत अर्थात् विचलित न होने वाले हैं।
359. अमृत
ॐ अमृताय नमः।
Om Amritaya Namah।
जो अमृत के समान हैं।
360. अक्षर
ॐ अक्षराय नमः।
Om Aksharaya Namah।
जो सर्वव्यापी हैं।
361. अप्रतर्क्य
ॐ अप्रतर्क्याय नमः।
Om Apratarkyaya Namah।
जिन्हें शब्दों से परिभाषित न किया जा सके।
362. अक्षय
ॐ अक्षयाय नमः।
Om Akshayaya Namah।
जो अजर-अमर हैं।
363. अजय्य
ॐ अजय्याय नमः।
Om Ajayyaya Namah।
जो अजेय हैं।
364. अनाधार
ॐ अनाधाराय नमः।
Om Anadharaya Namah।
जिन्हें किसी आधार की आवश्यकता नहीं है।
365. अनामय
ॐ अनामयाय नमः।
Om Anamayaya Namah।
जो समस्त रोगों से मुक्त हैं।
366. अमल
ॐ अमलाय नमः।
Om Amalaya Namah।
जो मलिनता से रहित हैं।
367. अमोघसिद्धि
ॐ अमोघसिद्धये नमः।
Om Amoghasiddhaye Namah।
जो अचूक सिद्धि वाले हैं।
368. अद्वैत
ॐ अद्वैताय नमः।
Om Advaitaya Namah।
जो स्वयं अद्वैत हैं।
369. अघोर
ॐ अघोराय नमः।
Om Aghoraya Namah।
जो शिव-स्वरूप हैं।
370. अप्रमितानन
ॐ अप्रमिताननाय नमः।
Om Apramitananaya Namah।
जो अनन्त मुख वाले हैं।
371. अनाकार
ॐ अनाकाराय नमः।
Om Anakaraya Namah।
जो आकार रहित अर्थात् निराकार ब्रह्म हैं।
372. अब्धिभूम्यग्निबलघ्न
ॐ अब्धिभूम्यग्निबलघ्नाय नमः।
Om Abdhibhumyagnibalaghnaya Namah।
जो पृथ्वी, समुद्र एवं अग्नि की शक्ति को नष्ट करने वाले हैं।
373. अव्यक्तलक्षण
ॐ अव्यक्तलक्षणाय नमः।
Om Avyaktalakshanaya Namah।
जो सामान्य मानव की बुद्धि द्वारा अभिव्यक्त नहीं हो सकते।
374. आधारपीठ
ॐ आधारपीठाय नमः।
Om Adharapithaya Namah।
जो पृथ्वी से लेकर शिवपर्यन्त छत्तीस आधारभूत तत्त्वों के भी आश्रय हैं।
375. आधार
ॐ आधाराय नमः।
Om Adharaya Namah।
जो विष्णु तथा ब्रह्मा को भी धारण करने वाले हैं।
376. आधाराधेयवर्जित
ॐ आधाराधेयवर्जिताय नमः।
Om Adharadheyavarjitaya Namah।
जो अद्वैत स्वरूप हैं।
377. आखुकेतन
ॐ आखुकेतनाय नमः।
Om Akhuketanaya Namah।
जिनके ध्वज पर मूषक का चिन्ह अंकित है।
378. आशापूरक
ॐ आशापूरकाय नमः।
Om Ashapurakaya Namah।
जो सबकी आशा पूर्ण करने वाले हैं।
379. आखुमहारथ
ॐ आखुमहारथाय नमः।
Om Akhumaharathaya Namah।
जो मूषकरूपी महान् रथ अर्थात् वाहन से युक्त हैं।
380. इक्षुसागरमध्यस्थ
ॐ इक्षुसागरमध्यस्थाय नमः।
Om Ikshusagaramadhyasthaya Namah।
जो गन्ने के रस के सागर के मध्य विराजमान हैं।
381. इक्षुभक्षणलालस
ॐ इक्षुभक्षणलालसाय नमः।
Om Ikshubhakshanalalasaya Namah।
जिन्हें गन्ने का सेवन करना अत्यन्त प्रिय है।
382. इक्षुचापातिरेकश्री
ॐ इक्षुचापातिरेकश्रिये नमः।
Om Ikshuchapatirekashriye Namah।
जो मन्मथ अर्थात् कामदेव से भी अधिक सुन्दर हैं।
383. इक्षुचापनिषेवित
ॐ इक्षुचापनिषेविताय नमः।
Om Ikshuchapanishevitaya Namah।
कामदेव जिनकी पूजा करते हैं।
384. इन्द्रगोपसमानश्री
ॐ इन्द्रगोपसमानश्रिये नमः।
Om Indragopasamanashriye Namah।
जो इन्द्रगोप नामक कीट के समान वर्ण वाले हैं।
385. इन्द्रनीलसमद्युति
ॐ इन्द्रनीलसमद्युतये नमः।
Om Indranilasamadyutaye Namah।
जो नीलमणि के समान श्याम कान्ति वाले हैं।
386. इन्दीवरदलश्याम
ॐ इन्दीवरदलश्यामाय नमः।
Om Indivaradalashyamaya Namah।
जो नीलकमल के समान श्याम वर्ण वाले हैं।
387. इन्दुमण्डलनिर्मल
ॐ इन्दुमण्डलनिर्मलाय नमः।
Om Indumandalanirmalaya Namah।
जो चन्द्रमा के समान गौर कान्ति वाले हैं।
388. इध्मप्रिय
ॐ इध्मप्रियाय नमः।
Om Idhmapriyaya Namah।
जिनको हवन की समिधा प्रिय है।
389. इडाभाग
ॐ इडाभागाय नमः।
Om Idabhagaya Namah।
जो ऋत्विक्, यजमान आदि रूप में यज्ञ में भाग लेने वाले हैं।
390. इराधाम
ॐ इराधाम्ने नमः।
Om Iradhamne Namah।
जिनके धाम में पृथ्वी निवास करती हैं।
391. इन्दिराप्रिय
ॐ इन्दिराप्रियाय नमः।
Om Indirapriyaya Namah।
जो देवी लक्ष्मी को प्रिय हैं।
392. इक्ष्वाकुविघ्नविध्वंसी
ॐ इक्ष्वाकुविघ्नविध्वंसिने नमः।
Om Ikshvakuvighnavidhvamsine Namah।
जो राजा इक्ष्वाकु के विघ्न का नाश करने वाले हैं।
393. इतिकर्तव्यतेप्सित
ॐ इतिकर्तव्यतेप्सिताय नमः।
Om Itikartavyatepsitaya Namah।
जो यजमान की मनोवांछा पूर्ण करने वाले हैं।
394. ईशानमौलि
ॐ ईशानमौलये नमः।
Om Ishanamaulaye Namah।
जो देवों के देव हैं।
395. ईशान
ॐ ईशानाय नमः।
Om Ishanaya Namah।
जो देवों में सर्वश्रेष्ठ हैं।
396. ईशानसुत
ॐ ईशानसुताय नमः।
Om Ishanasutaya Namah।
जो भगवान शङ्कर के पुत्र हैं।
397. ईतिघ्न
ॐ ईतिघ्ने नमः।
Om Itighne Namah।
जो फसल की समस्त प्रकार के रोगों एवं विपदाओं से रक्षा करने वाले हैं।
398. ईषणात्रयकल्पान्त
ॐ ईषणात्रयकल्पान्ताय नमः।
Om Ishanatrayakalpantaya Namah।
जो भौतिक कामनाओं के प्रति वैराग्य उत्पन्न करने वाले हैं।
399. ईहामात्रविवर्जित
ॐ ईहामात्रविवर्जिताय नमः।
Om Ihamatravivarjitaya Namah।
जो समस्त इच्छाओं से रहित हैं।
400. उपेन्द्र
ॐ उपेन्द्राय नमः।
Om Upendraya Namah।
जो कश्यप-अदिति के यहाँ बालक के रूप में अवतरित होने वाले हैं।
401. उडुभृन्मौलि
ॐ उडुभृन्मौलये नमः।
Om Udubhrinmaulaye Namah।
जो अपने मस्तक पर चन्द्रमा धारण करने वाले हैं।
402. उण्डेरकबलिप्रिय
ॐ उण्डेरकबलिप्रियाय नमः।
Om Underakabalipriyaya Namah।
जिन्हें गोल-गोल मिष्टान्न प्रिय हैं।
403. उन्नतानन
ॐ उन्नताननाय नमः।
Om Unnatananaya Namah।
जो ब्रह्मा आदि उत्कृष्ट देवों में चेतना जगाने वाले हैं।
404. उत्तुङ्ग
ॐ उत्तुङ्गाय नमः।
Om Uttungaya Namah।
जो अत्यन्त विशाल देह वाले हैं।
405. उदारत्रिदशाग्रणी
ॐ उदारत्रिदशाग्रण्ये नमः।
Om Udaratridashagranye Namah।
जो उदार देवताओं में सर्वश्रेष्ठ हैं।
406. ऊर्जस्वान्
ॐ ऊर्जस्वते नमः।
Om Urjasvate Namah।
जो असीमित ऊर्जा वाले हैं।
407. ऊष्मलमद
ॐ ऊष्मलमदाय नमः।
Om Ushmalamadaya Namah।
जिनकी देह से गरम मद प्रवाहित होता है।
408. ऊहापोहदुरासद
ॐ ऊहापोहदुरासदाय नमः।
Om Uhapohadurasadaya Namah।
जो समस्त तर्क-वितर्क से परे हैं।
409. ऋग्यजुस्सामसम्भूति
ॐ ऋग्यजुस्सामसम्भूतये नमः।
Om Rigyajussamasambhutaye Namah।
जो ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद को प्रकट करने वाले हैं।
410. ऋद्धिसिद्धिप्रवर्तक
ॐ ऋद्धिसिद्धिप्रवर्तकाय नमः।
Om Riddhisiddhipravartakaya Namah।
जो राज्य-सम्पत्ति तथा अणिमा आदि सिद्धियों को प्रदान करने वाले हैं।
411. ऋजुचित्तैकसुलभ
ॐ ऋजुचित्तैकसुलभाय नमः।
Om Rijuchittaikasulabhaya Namah।
जो सद्गुणी भक्तों को सरलता से प्राप्त होने वाले हैं।
412. ऋणत्रयविमोचक
ॐ ऋणत्रयविमोचकाय नमः।
Om Rinatrayavimochakaya Namah।
जो देव ऋण, ऋषि ऋण तथा पितृ ऋण से मुक्त करने वाले हैं।
413. स्वभक्तलुप्तविघ्न
ॐ स्वभक्तानां लुप्तविघ्नाय नमः।
Om Svabhaktanam Luptavighnaya Namah।
जो अपने भक्तों के समस्त कष्टों का नाश करने वाले हैं।
414. सुरद्विषांलुप्तशक्ति
ॐ सुरद्विषां-लुप्तशक्तये नमः।
Om Suradvisham-luptashaktaye Namah।
जो दैत्यों की शक्ति नष्ट करने वाले हैं।
415. विमुखार्चनलुप्तश्री
ॐ विमुखार्चानां लुप्तश्रिये नमः।
Om Vimukharchanam Luptashriye Namah।
जो अधर्मियों की समृद्धि नष्ट करने वाले हैं।
416. लूताविस्फोटनाशन
ॐ लूताविस्फोटनाशनाय नमः।
Om Lutavisphotanashanaya Namah।
जो विभिन्न रोगों का नाश करने वाले हैं।
417. एकारपीठमध्यस्थ
ॐ एकारपीठमध्यस्थाय नमः।
Om Ekarapithamadhyasthaya Namah।
जो त्रिकोणचक्र के मध्य में विराजमान हैं।
418. एकपादकृतासन
ॐ एकपादकृतासनाय नमः।
Om Ekapadakritasanaya Namah।
जो एक पैर पर खड़े रहने वाले हैं।
419. एजिताखिलदैत्यश्री
ॐ एजिताखिलदैत्यश्रिये नमः।
Om Ejitakhiladaityashriye Namah।
जो दैत्यों की समृद्धि नष्ट करने वाले हैं।
420. एधिताखिलसंश्रय
ॐ एधिताखिलसंश्रयाय नमः।
Om Edhitakhilasamshrayaya Namah।
जो भक्तों के वैभव में वृद्धि करने वाले हैं।
421. ऐश्वर्यनिधि
ॐ ऐश्वर्यनिधये नमः।
Om Aishvaryanidhaye Namah।
जो समस्त ऐश्वर्य के स्वामी हैं।
422. ऐश्वर्य
ॐ ऐश्वर्याय नमः।
Om Aishvaryaya Namah।
जो स्वयं ऐश्वर्य स्वरूप हैं।
423. ऐहिकामुष्मिकप्रद
ॐ ऐहिकामुष्मिकप्रदाय नमः।
Om Aihikamushmikapradaya Namah।
जो लौकिक और पारलौकिक सुख देने वाले हैं।
424. ऐरम्मदसमोन्मेष
ॐ ऐरम्मदसमोन्मेषाय नमः।
Om Airammadasamonmeshaya Namah।
जो विद्युत के समान तेज वाले हैं।
425. ऐरावतनिभानन
ॐ ऐरावतनिभाननाय नमः।
Om Airavatanibhananaya Namah।
जिनका मुख ऐरावत हाथी के समान है।
426. ओङ्कारवाच्य
ॐ ओङ्कारवाच्याय नमः।
Om Onkaravachyaya Namah।
जो ‘ॐ’ मन्त्र के सार हैं।
427. ओङ्कार
ॐ ओङ्काराय नमः।
Om Onkaraya Namah।
जो स्वयं ॐ स्वरूप हैं।
428. ओजस्वान्
ॐ ओजस्वते नमः।
Om Ojasvate Namah।
जो अतुलनीय तेज वाले हैं।
429. ओषधीपति
ॐ ओषधीपतये नमः।
Om Oshadhipataye Namah।
जो औषधियों के अधिपति चन्द्रमा स्वरूप हैं।
430. औदार्यनिधि
ॐ औदार्यनिधये नमः।
Om Audaryanidhaye Namah।
जो भक्तों के प्रति अत्यन्त उदार हैं।
431. औद्धत्यधुर्य
ॐ औद्धत्यधुर्याय नमः।
Om Auddhatyadhuryaya Namah।
जो अपने भक्तों पर कृपा हेतु अत्यन्त उत्कर्षित होते हैं।
432. औन्नत्यनिस्स्वन
ॐ औन्नत्यनिस्स्वनाय नमः।
Om Aunnatyanissvanaya Namah।
जो सबकी अपेक्षा उच्चस्वर से गर्जना करने वाले हैं।
433. सुरनागानामङ्कुश
ॐ सुरनागानामङ्कुशाय नमः।
Om Suranaganamankushaya Namah।
जो तीनों लोकों को नियन्त्रित करने वाले हैं।
434. सुरविद्विषामङ्कुश
ॐ सुरविद्विषामङ्कुशाय नमः।
Om Suravidvishamankushaya Namah।
जो देवताओं और विद्वानों के द्वेषियों को दण्डित करने वाले हैं।
435. अःसमस्तविसर्गान्तपदेषुपरिकीर्तित
ॐ अःसमस्तविसर्गान्तपदेषुपरिकीर्तिताय नमः।
Om Ahsamastavisargantapadeshuparikirtitaya Namah।
सम्पूर्ण वर्णमाला जिनकी स्तुति करती है।
436. कमण्डलुधर
ॐ कमण्डलुधराय नमः।
Om Kamandaludharaya Namah।
जो कमण्डलु धारण करने वाले हैं।
437. कल्प
ॐ कल्पाय नमः।
Om Kalpaya Namah।
जो स्वयं प्रलयस्वरूप हैं।
438. कपर्दी
ॐ कपर्दिने नमः।
Om Kapardine Namah।
जो जटाजूट धारण करने वाले हैं।
439. कलभानन
ॐ कलभाननाय नमः।
Om Kalabhananaya Namah।
जो गजमुख अथवा हाथी के समान मुख वाले हैं।
440. कर्मसाक्षी
ॐ कर्मसाक्षिणे नमः।
Om Karmasakshine Namah।
जो अदृष्ट कर्मों के भी साक्षी हैं।
441. कर्मकर्ता
ॐ कर्मकर्त्रे नमः।
Om Karmakartre Namah।
जो कर्म करने की प्रेरणा देने वाले हैं।
442. कर्माकर्मफलप्रद
ॐ कर्माकर्मफलप्रदाय नमः।
Om Karmakarmaphalapradaya Namah।
जो कर्मानुसार स्वर्ग और मोक्षरूप फल देने वाले हैं।
443. कदम्बगोलकाकार
ॐ कदम्बगोलकाकाराय नमः।
Om Kadambagolakakaraya Namah।
जो कदम्ब-पुष्प के समान गोल आकार वाले हैं।
444. कूष्माण्डगणनायक
ॐ कूष्माण्डगणनायकाय नमः।
Om Kushmandagananayakaya Namah।
जो दुष्ट ग्रहों पर कठोर शासन करने वाले हैं।
445. कारुण्यदेह
ॐ कारुण्यदेहाय नमः।
Om Karunyadehaya Namah।
जो करुणा के सागर हैं।
446. कपिल
ॐ कपिलाय नमः।
Om Kapilaya Namah।
जो कपिल मुनि स्वरूप हैं।
447. कथक
ॐ कथकाय नमः।
Om Kathakaya Namah।
जो सम्प्रदायों के प्रवर्तक हैं।
448. कटिसूत्रभृत्
ॐ कटिसूत्रभृते नमः।
Om Katisutrabhrite Namah।
जो स्वर्ण का कमरबन्ध धारण करने वाले हैं।
449. खर्व
ॐ खर्वाय नमः।
Om Kharvaya Namah।
जो वामन स्वरूप हैं।
450. खड्गप्रिय
ॐ खड्गप्रियाय नमः।
Om Khadgapriyaya Namah।
जिन्हें खड्ग अत्यन्त प्रिय है।
451. खड्गखान्तान्तःस्थ
ॐ खड्गखान्तान्तःस्थाय नमः।
Om Khadgakhantantahsthaya Namah।
जो गकार में विराजमान हैं।
452. खनिर्मल
ॐ खनिर्मलाय नमः।
Om Khanirmalaya Namah।
जो आकाश की भाँति सबमें रहते हुए भी सबसे निर्लिप्त हैं।
453. खल्वाटशृङ्गनिलय
ॐ खल्वाटशृङ्गनिलयाय नमः।
Om Khalvatashringanilayaya Namah।
जो वृक्षविहीन पर्वत के शिखर पर निवास करने वाले हैं।
454. खट्वाङ्गी
ॐ खट्वाङ्गिने नमः।
Om Khatvangine Namah।
जो खट्वाङ्ग नामक अस्त्र धारण करने वाले हैं।
455. खदुरासद
ॐ खदुरासदाय नमः।
Om Khadurasadaya Namah।
जो आकाश की भाँति पकड़ में न आ सकने वाले हैं।
456. गुणाढ्य
ॐ गुणाढ्याय नमः।
Om Gunadhyaya Namah।
जो सर्वगुण सम्पन्न हैं।
457. गहन
ॐ गहनाय नमः।
Om Gahanaya Namah।
जो अत्यन्त गूढ़ हैं।
458. गस्थ
ॐ गस्थाय नमः।
Om Gasthaya Namah।
जो ‘ग’ बीजाक्षर में विराजमान हैं।
459. गद्यपद्यसुधार्णव
ॐ गद्यपद्यसुधार्णवाय नमः।
Om Gadyapadyasudharnavaya Namah।
जो गद्य एवं पद्य में काव्यरस रूपी अमृत के सागर हैं।
460. गद्यगानप्रिय
ॐ गद्यगानप्रियाय नमः।
Om Gadyaganapriyaya Namah।
जिन्हें सामवेद का पाठ प्रिय है।
461. गर्ज
ॐ गर्जाय नमः।
Om Garjaya Namah।
जो बादल के समान गर्जना करने वाले हैं।
462. गीतगीर्वाणपूर्वज
ॐ गीतगीर्वाणपूर्वजाय नमः।
Om Gitagirvanapurvajaya Namah।
जो नाद से उत्पन्न गीत तथा नाद के अर्थ से उत्पन्न देवताओं के पूर्वज हैं।
463. गुह्याचाररत
ॐ गुह्याचाररताय नमः।
Om Guhyachararataya Namah।
जो परमात्मा के चिन्तन में लगे साधकों पर सन्तुष्ट रहने वाले हैं।
464. गुह्य
ॐ गुह्याय नमः।
Om Guhyaya Namah।
जो एकान्त में जानने योग्य हैं।
465. गुह्यागमनिरूपित
ॐ गुह्यागमनिरूपिताय नमः।
Om Guhyagamanirupitaya Namah।
जिनकी महिमा वेदों में वर्णित है।
466. गुहाशय
ॐ गुहाशयाय नमः।
Om Guhashayaya Namah।
जो हृदय में शयन करने वाले अन्तर्यामी पुरुष हैं।
467. गुहाब्धिस्थ
ॐ गुहाब्धिस्थाय नमः।
Om Guhabdhisthaya Namah।
जो हृदय रूपी आकाश सागर में स्थित रहने वाले हैं।
468. गुरुगम्य
ॐ गुरुगम्याय नमः।
Om Gurugamyaya Namah।
जिन्हें मात्र गुरु के द्वारा ही जाना जा सकता है।
469. गुरोर्गुरु
ॐ गुरोर्गुरवे नमः।
Om Gurorgurave Namah।
जो गुरुओं के भी गुरु हैं।
470. घण्टाघर्घरिकामाली
ॐ घण्टाघर्घरिकामालिने नमः।
Om Ghantaghargharikamaline Namah।
जो मनोहर शब्द करने वाली घर्घरिका नामक घण्टी की माला धारण करने वाले हैं।
471. घटकुम्भ
ॐ घटकुम्भाय नमः।
Om Ghatakumbhaya Namah।
जो विशाल मस्तक वाले हैं।
472. घटोदर
ॐ घटोदराय नमः।
Om Ghatodaraya Namah।
जो घड़े के समान पेट वाले हैं।
473. चण्ड
ॐ चण्डाय नमः।
Om Chandaya Namah।
जो प्रचण्ड पराक्रमी हैं।
474. चण्डेश्वरसुहृत्
ॐ चण्डेश्वरसुहृदे नमः।
Om Chandeshvarasuhride Namah।
जो भगवान शिव के पार्षद चण्डेश्वर के प्रिय हैं।
475. चण्डीश
ॐ चण्डीशाय नमः।
Om Chandishaya Namah।
जो भगवान शिव और माता पार्वती के प्रिय हैं।
476. चण्डविक्रम
ॐ चण्डविक्रमाय नमः।
Om Chandavikramaya Namah।
जो क्रोधी दुष्टों पर आक्रमण करके उन्हें वश में करने वाले हैं।
477. चराचरपति
ॐ चराचरपतये नमः।
Om Characharapataye Namah।
जो इस सम्पूर्ण जगत के स्वामी हैं।
478. चिन्तामणिचर्वणलालस
ॐ चिन्तामणिचर्वणलालसाय नमः।
Om Chintamanicharvanalalasaya Namah।
जो चिन्तामणि का अभिमान नष्ट करने वाले हैं।
479. छन्द
ॐ छन्दसे नमः।
Om Chhandase Namah।
जो स्वयं वेद के रूप में हैं।
480. छन्दोवपु
ॐ छन्दोवपुषे नमः।
Om Chhandovapushe Namah।
जो वेदों को अपनी देह के रूप में धारण करने वाले हैं।
481. छन्दोदुर्लक्ष्य
ॐ छन्दोदुर्लक्ष्याय नमः।
Om Chhandodurlakshyaya Namah।
वेद भी जिनको पूर्ण रूप से जानने में असमर्थ हैं।
482. छन्दविग्रह
ॐ छन्दविग्रहाय नमः।
Om Chhandavigrahaya Namah।
जो भक्तों की इच्छा के अनुसार अवतार-शरीर धारण करने वाले हैं।
483. जगद्योनि
ॐ जगद्योनये नमः।
Om Jagadyonaye Namah।
जो इस सृष्टि के कारण हैं।
484. जगत्साक्षी
ॐ जगत्साक्षिणे नमः।
Om Jagatsakshine Namah।
जो इस सम्पूर्ण सृष्टि के साक्षी हैं।
485. जगदीश
ॐ जगदीशाय नमः।
Om Jagadishaya Namah।
जो इस सम्पूर्ण सृष्टि के स्वामी हैं।
486. जगन्मय
ॐ जगन्मयाय नमः।
Om Jaganmayaya Namah।
जो स्वयं ही जगत के रूप में विद्यमान हैं।
487. जप
ॐ जपाय नमः।
Om Japaya Namah।
जो मन्त्र के रूप में विद्यमान हैं।
488. जपपर
ॐ जपपराय नमः।
Om Japaparaya Namah।
जो सदैव ध्यान/जप में लीन रहने वाले हैं।
489. जप्य
ॐ जप्याय नमः।
Om Japyaya Namah।
जो जपनीय मन्त्र के स्वरूप हैं।
490. जिह्वासिंहासनप्रभु
ॐ जिह्वासिंहासन-प्रभवे नमः।
Om Jihvasimhasana-prabhave Namah।
जो वाणी अथवा वाक् शक्ति के स्वामी हैं।
491. झलज्झलोल्लसद्दानझङ्कारिभ्रमराकुल
ॐ झलज्झलोल्लसद्दानझङ्कारिभ्रमराकुलाय नमः।
Om Jhalajjhalollasaddanajhankaribhramarakulaya Namah।
जो भ्रमर द्वारा आकर्षित होने वाले हैं।
492. टङ्कारस्फारसंराव
ॐ टङ्कारस्फारसंरावाय नमः।
Om Tankaraspharasamravaya Namah।
जिनके आभूषण टँकार जैसी ध्वनि करने वाले हैं।
493. टङ्कारिमणिनूपुर
ॐ टङ्कारिमणिनूपुराय नमः।
Om Tankarimaninupuraya Namah।
जो छोटे-छोटे नूपरों से सुसज्जित पायल धारण करने वाले हैं।
494. ठद्वयीपल्लवान्तःस्थसर्वमन्त्रैकसिद्धिद
ॐ ठद्वयीपल्लवान्तःस्थसर्वमन्त्रैकसिद्धिदाय नमः।
Om Thadvayipallavantahsthasarvamantraikasiddhidaya Namah।
जो विधिवत पढ़े गये मन्त्रों के एकमात्र सिद्धिदाता हैं।
495. डिण्डिमुण्ड
ॐ डिण्डिमुण्डाय नमः।
Om Dindimundaya Namah।
जो ढ़ोल के समान विशाल मस्तक वाले हैं।
496. डाकिनीश
ॐ डाकिनीशाय नमः।
Om Dakinishaya Namah।
जो योगिनियों के स्वामी हैं।
497. डामर
ॐ डामराय नमः।
Om Damaraya Namah।
जो डामर नामक तन्त्र के समान हैं।
498. डिण्डिमप्रिय
ॐ डिण्डिमप्रियाय नमः।
Om Dindimapriyaya Namah।
जो नगाड़े की ध्वनि से प्रसन्न होने वाले हैं।
499. ढक्कानिनादमुदित
ॐ ढक्कानिनादमुदिताय नमः।
Om Dhakkaninadamuditaya Namah।
जिन्हें ढक्के की ध्वनि अत्यन्त प्रिय है।
500. ढौक
ॐ ढौकाय नमः।
Om Dhaukaya Namah।
जो सब कुछ जानने वाले हैं।
501. ढुण्ढिविनायक
ॐ ढुण्ढिविनायकाय नमः।
Om Dhundhivinayakaya Namah।
जो विघ्न-बाधाओं को दूर करने वाले हैं।
502. तत्त्व परम तत्त्व
ॐ तत्त्वानां परमाय तत्त्वाय नमः।
Om Tattvanam Paramaya Tattvaya Namah।
जो समस्त सिद्धान्तों में सर्वोच्च सिद्धान्त हैं।
503. तत्त्वम्पदनिरूपित
ॐ तत्त्वम्पदनिरूपिताय नमः।
Om Tattvampadanirupitaya Namah।
जो भक्तों को सैद्धान्तिक मार्ग पर चलाने वाले हैं।
504. तारकान्तरसंस्थान
ॐ तारकान्तरसंस्थानाय नमः।
Om Tarakantarasamsthanaya Namah।
जो नेत्रों की पुतलियों में वास करने वाले हैं।
505. तारक
ॐ तारकाय नमः।
Om Tarakaya Namah।
जो भवसागर से तारने वाले हैं।
506. तारकान्तक
ॐ तारकान्तकाय नमः।
Om Tarakantakaya Namah।
जो तारकासुर का संहार करने वाले हैं।
507. स्थाणु
ॐ स्थाणवे नमः।
Om Sthanave Namah।
जो स्थिर हैं।
508. स्थाणुप्रिय
ॐ स्थाणुप्रियाय नमः।
Om Sthanupriyaya Namah।
जो भगवान शिव के प्रिय पुत्र हैं।
509. स्थाता
ॐ स्थात्रे नमः।
Om Sthatre Namah।
जो युद्ध में दृढ़तापूर्वक डटे रहने वाले हैं।
510. स्थावर जङ्गम जगत्
ॐ स्थावराय जङ्गमाय जगते नमः।
Om Sthavaraya Jangamaya Jagate Namah।
जो स्वयं चराचर जगत स्वरूप हैं।
511. दक्षयज्ञप्रमथन
ॐ दक्षयज्ञप्रमथनाय नमः।
Om Dakshayajnapramathanaya Namah।
जो दक्ष प्रजापति के यज्ञ का विध्वंस करने वाले हैं।
512. दाता
ॐ दात्रे नमः।
Om Datre Namah।
जो पतितपावन हैं।
513. दानवमोहन
ॐ दानवमोहनाय नमः।
Om Danavamohanaya Namah।
जो राक्षसों को विवेकहीन करने वाले हैं।
514. दयावान्
ॐ दयावते नमः।
Om Dayavate Namah।
जो अत्यन्त दयावान हैं।
515. दिव्यविभव
ॐ दिव्यविभवाय नमः।
Om Divyavibhavaya Namah।
जो भक्तों को दिव्य वैभव से सम्पन्न करने वाले हैं।
516. दण्डभृत्
ॐ दण्डभृते नमः।
Om Dandabhrite Namah।
जो दण्डनीति का पालन करने वाले हैं।
517. दण्डनायक
ॐ दण्डनायकाय नमः।
Om Dandanayakaya Namah।
जो दण्ड के प्रवर्तक हैं।
518. दन्तप्रभिन्नाभ्रमाल
ॐ दन्तप्रभिन्नाभ्रमालाय नमः।
Om Dantaprabhinnabhramalaya Namah।
जो अपने दाँत के आघात से मेघों को छिन्न-भिन्न कर देने वाले हैं।
519. दैत्यवारणदारण
ॐ दैत्यवारणदारणाय नमः।
Om Daityavaranadaranaya Namah।
जो दानवों को रोकने और उनका अन्त करने वाले हैं।
520. दंष्ट्रालग्नद्विपघट
ॐ दंष्ट्रालग्नद्विपघटाय नमः।
Om Damshtralagnadvipaghataya Namah।
जिनके दाढ़ में शत्रुओं के हाथियों का समूह स्थित है।
521. देवार्थनृगजाकृति
ॐ देवार्थनृगजाकृतये नमः।
Om Devarthanrigajakritaye Namah।
जो देवताओं के कल्याण हेतु मनुष्य और गज की आकृति धारण करने वाले हैं।
522. धनधान्यपति
ॐ धनधान्यपतये नमः।
Om Dhanadhanyapataye Namah।
जो धन-धान्य के अधिपति हैं।
523. धन्य
ॐ धन्याय नमः।
Om Dhanyaya Namah।
जो धन सम्पन्न एवं पुण्यवान हैं।
524. धनद
ॐ धनदाय नमः।
Om Dhanadaya Namah।
जो धन-सम्पत्ति प्रदान करने वाले हैं।
525. धरणीधर
ॐ धरणीधराय नमः।
Om Dharanidharaya Namah।
जो पृथ्वी को धारण करने वाले हैं।
526. ध्यानैकप्रकट
ॐ ध्यानैकप्रकटाय नमः।
Om Dhyanaikaprakataya Namah।
जो एकमात्र ध्यान में ही प्रकट होने वाले हैं।
527. ध्येय
ॐ ध्येयाय नमः।
Om Dhyeyaya Namah।
जो ध्यान से प्राप्त होने वाले हैं।
528. ध्यान
ॐ ध्यानाय नमः।
Om Dhyanaya Namah।
जो स्वयं ध्यानस्वरूप हैं।
529. ध्यानपरायण
ॐ ध्यानपरायणाय नमः।
Om Dhyanaparayanaya Namah।
जो ध्यान में संलग्न रहने वाले हैं।
530. नन्द्य
ॐ नन्द्याय नमः।
Om Nandyaya Namah।
जो सदैव उत्साहित एवं आनन्दित रहने वाले हैं।
531. नन्दिप्रिय
ॐ नन्दिप्रियाय नमः।
Om Nandipriyaya Namah।
जो नन्दिकेश्वर के अत्यन्त प्रिय हैं।
532. नाद
ॐ नादाय नमः।
Om Nadaya Namah।
जो स्वयं नाद स्वरूप हैं।
533. नादमध्यप्रतिष्ठित
ॐ नादमध्यप्रतिष्ठिताय नमः।
Om Nadamadhyapratishthitaya Namah।
जो सङ्गीत एवं वाद्ययन्त्रों के मध्य प्रसन्न रहने वाले हैं।
534. निष्कल
ॐ निष्कलाय नमः।
Om Nishkalaya Namah।
जो अवयव रहित हैं।
535. निर्मल
ॐ निर्मलाय नमः।
Om Nirmalaya Namah।
जो पूर्णतः पवित्र हैं।
536. नित्य
ॐ नित्याय नमः।
Om Nityaya Namah।
जो अनश्वर हैं।
537. नित्यानित्य
ॐ नित्यानित्याय नमः।
Om Nityanityaya Namah।
जो नश्वर-अनश्वर दोनों रूपों को धारण करने वाले हैं।
538. निरामय
ॐ निरामयाय नमः।
Om Niramayaya Namah।
जो अविद्या रूपी महारोग से मुक्त हैं।
539. परं व्योम
ॐ परस्मै व्योम्ने नमः।
Om Parasmai Vyomne Namah।
जो नित्य धामस्वरूप हैं।
540. परं धाम
ॐ परस्मै धाम्ने नमः।
Om Parasmai Dhamne Namah।
जो परम ज्योति हैं।
541. परमात्मा
ॐ परमात्मने नमः।
Om Paramatmane Namah।
जो स्वयं परब्रह्म हैं।
542. परं पद
ॐ परस्मै पदाय नमः।
Om Parasmai Padaya Namah।
जो सर्वोच्च पद पर प्रतिष्ठित हैं।
543. परात्पर
ॐ परात्पराय नमः।
Om Paratparaya Namah।
जो पर अर्थात् भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश से भी उत्कृष्ट हैं।
544. पशुपति
ॐ पशुपतये नमः।
Om Pashupataye Namah।
जो समस्त प्राणियों के पालक हैं।
545. पशुपाशविमोचक
ॐ पशुपाशविमोचकाय नमः।
Om Pashupashavimochakaya Namah।
जो जीवों को विभिन्न बन्धनों से मुक्त करने वाले हैं।
546. पूर्णानन्द
ॐ पूर्णानन्दाय नमः।
Om Purnanandaya Namah।
जो आनन्द की वर्षा करने वाले हैं।
547. परानन्द
ॐ परानन्दाय नमः।
Om Paranandaya Namah।
जो सदैव परम आनन्द प्रदान करने वाले हैं।
548. पुराणपुरुषोत्तम
ॐ पुराणपुरुषोत्तमाय नमः।
Om Puranapurushottamaya Namah।
जो समस्त देवगणों में सर्वोच्च हैं।
549. पद्मप्रसन्ननयन
ॐ पद्मप्रसन्ननयनाय नमः।
Om Padmaprasannanayanaya Namah।
जो खिले हुए कमलपुष्पों के समान प्रसन्न नेत्रों वाले हैं।
550. प्रणताज्ञानमोचन
ॐ प्रणताज्ञानमोचनाय नमः।
Om Pranatajnanamochanaya Namah।
जो भक्त के समस्त अज्ञान का नाश करने वाले हैं।
551. प्रमाणप्रत्ययातीत
ॐ प्रमाणप्रत्ययातीताय नमः।
Om Pramanapratyayatitaya Namah।
जो विभिन्न प्रमाणों की प्रतीति से परे नित्य ज्ञान स्वरूप हैं।
552. प्रणतार्तिनिवारण
ॐ प्रणतार्तिनिवारणाय नमः।
Om Pranatartinivaranaya Namah।
जो भक्तों के कष्ट का निवारण करने वाले हैं।
553. फलहस्त
ॐ फलहस्ताय नमः।
Om Phalahastaya Namah।
जो भक्तों को अविलम्ब फल प्रदान करने वाले हैं।
554. फणिपति
ॐ फणिपतये नमः।
Om Phanipataye Namah।
जो शेष और वासुकि नाग के भी स्वामी हैं।
555. फेत्कार
ॐ फेत्काराय नमः।
Om Phetkaraya Namah।
जो स्वयं तन्त्र स्वरूप हैं।
556. फाणितप्रिय
ॐ फाणितप्रियाय नमः।
Om Phanitapriyaya Namah।
जो गन्ने के रस के प्रेमी हैं।
557. बाणार्चिताङ्घ्रियुगल
ॐ बाणार्चिताङ्घ्रियुगलाय नमः।
Om Banarchitanghriyugalaya Namah।
जिनके चरण कमलों का पूजन बाणासुर करता है।
558. बालकेलिकुतूहली
ॐ बालकेलिकुतूहलिने नमः।
Om Balakelikutuhaline Namah।
जो बाल क्रीड़ा का आनन्द लेने वाले हैं।
559. ब्रह्म
ॐ ब्रह्मणे नमः।
Om Brahmane Namah।
जो स्वयं ब्रह्म स्वरूप हैं।
560. ब्रह्मार्चितपद
ॐ ब्रह्मार्चितपदाय नमः।
Om Brahmarchitapadaya Namah।
जिनके चरण कमलों का पूजन ब्रह्मा जी करते हैं।
561. ब्रह्मचारी
ॐ ब्रह्मचारिणे नमः।
Om Brahmacharine Namah।
जो ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने वाले हैं।
562. बृहस्पति
ॐ बृहस्पतये नमः।
Om Brihaspataye Namah।
जो स्वयं देवगुरु बृहस्पति स्वरूप हैं।
563. बृहत्तम
ॐ बृहत्तमाय नमः।
Om Brihattamaya Namah।
जो अत्यधिक विशालकाय हैं।
564. ब्रह्मपर
ॐ ब्रह्मपराय नमः।
Om Brahmaparaya Namah।
जो ब्रह्मा जी से भी श्रेष्ठ हैं।
565. ब्रह्मण्य
ॐ ब्रह्मण्याय नमः।
Om Brahmanyaya Namah।
जो ब्राह्मणों पर श्रद्धा रखने वाले हैं।
566. ब्रह्मवित्प्रिय
ॐ ब्रह्मवित्प्रियाय नमः।
Om Brahmavitpriyaya Namah।
जो विद्यार्थियों को प्रिय हैं।
567. बृहन्नादाग्र्यचीत्कार
ॐ बृहन्नादाग्र्यचीत्काराय नमः।
Om Brihannadagryachitkaraya Namah।
जो मेघों से भी अधिक उच्चस्वर से गर्जना करने वाले हैं।
568. ब्रह्माण्डावलिमेखल
ॐ ब्रह्माण्डावलिमेखलाय नमः।
Om Brahmandavalimekhalaya Namah।
जो ब्रह्माण्ड को अपनी कटिसूत्र के रूप में धारण करने वाले हैं।
569. भ्रूक्षेपदत्तलक्ष्मीक
ॐ भ्रूक्षेपदत्तलक्ष्मीकाय नमः।
Om Bhrukshepadattalakshmikaya Namah।
जो पलक झपकते ही भक्तों पर धनवर्षा करने वाले हैं।
570. भर्ग
ॐ भर्गाय नमः।
Om Bhargaya Namah।
जो सूर्य के समान तेज वाले हैं।
571. भद्र
ॐ भद्राय नमः।
Om Bhadraya Namah।
जो सर्वोत्तम एवं सभ्य हैं।
572. भयापह
ॐ भयापहाय नमः।
Om Bhayapahaya Namah।
जो भक्तों के ज्ञात-अज्ञात भय नष्ट करने वाले हैं।
573. भगवान्
ॐ भगवते नमः।
Om Bhagavate Namah।
जो षड्विध ऐश्वर्य से सम्पन्न हैं।
574. भक्तिसुलभ
ॐ भक्तिसुलभाय नमः।
Om Bhaktisulabhaya Namah।
जो भक्ति द्वारा सुगमता से प्राप्त किए जा सकते हैं।
575. भूतिद
ॐ भूतिदाय नमः।
Om Bhutidaya Namah।
जो अष्ट सिद्धियों के दाता हैं।
576. भूतिभूषण
ॐ भूतिभूषणाय नमः।
Om Bhutibhushanaya Namah।
जो भस्म धारण करने वाले हैं।
577. भव्य
ॐ भव्याय नमः।
Om Bhavyaya Namah।
जो कल्याणस्वरूप हैं।
578. भूतालय
ॐ भूतालयाय नमः।
Om Bhutalayaya Namah।
जो पञ्चभूत आदि समस्त भूत प्राणियों के आश्रय हैं।
579. भोगदाता
ॐ भोगदात्रे नमः।
Om Bhogadatre Namah।
जो जीवों को कर्मानुसार फल प्रदान करने वाले हैं।
580. भ्रूमध्यगोचर
ॐ भ्रूमध्यगोचराय नमः।
Om Bhrumadhyagocharaya Namah।
जो ध्यान काल में दोनों भौंहों के मध्य अनुभूत होने वाले हैं।
581. मन्त्र
ॐ मन्त्राय नमः।
Om Mantraya Namah।
जो स्वयं मन्त्र स्वरूप हैं।
582. मन्त्रपति
ॐ मन्त्रपतये नमः।
Om Mantrapataye Namah।
जो समस्त मन्त्रणाओं के अधिपति हैं।
583. मन्त्री
ॐ मन्त्रिणे नमः।
Om Mantrine Namah।
जो राज्य सञ्चालन हेतु समस्त मन्त्रशक्ति के अधिष्ठाता हैं।
584. मदमत्तमनोरम
ॐ मदमत्तमनोरमाय नमः।
Om Madamattamanoramaya Namah।
जो आनन्द-उत्साह में लीन हैं।
585. मेखलावान्
ॐ मेखलावते नमः।
Om Mekhalavate Namah।
जो कमरबन्ध धारण करने वाले हैं।
586. मन्दगति
ॐ मन्दगतये नमः।
Om Mandagataye Namah।
जो अल्प बुद्धियों के भी आश्रय दाता हैं।
587. मतिमत्कमलेक्षण
ॐ मतिमत्कमलेक्षणाय नमः।
Om Matimatkamalekshanaya Namah।
जो सद्बुद्धि देने वाले हैं।
588. महाबल
ॐ महाबलाय नमः।
Om Mahabalaya Namah।
जो अत्यन्त बलशाली हैं।
589. महावीर्य
ॐ महावीर्याय नमः।
Om Mahaviryaya Namah।
जो महापराक्रमी एवं साहसी हैं।
590. महाप्राण
ॐ महाप्राणाय नमः।
Om Mahapranaya Namah।
जो समस्त जीवात्माओं के प्राण हैं।
591. महामना
ॐ महामनसे नमः।
Om Mahamanase Namah।
जो श्रेष्ठ विचारों वाले हैं।
592. यज्ञ
ॐ यज्ञाय नमः।
Om Yajnaya Namah।
जो स्वयं यज्ञस्वरूप हैं।
593. यज्ञपति
ॐ यज्ञपतये नमः।
Om Yajnapataye Namah।
जो यज्ञों के स्वामी हैं।
594. यज्ञगोप्ता
ॐ यज्ञगोप्त्रे नमः।
Om Yajnagoptre Namah।
जो यज्ञों के रक्षक हैं।
595. यज्ञफलप्रद
ॐ यज्ञफलप्रदाय नमः।
Om Yajnaphalapradaya Namah।
जो यज्ञों का फल प्रदान करने वाले हैं।
596. यशस्कर
ॐ यशस्कराय नमः।
Om Yashaskaraya Namah।
जो यश एवं प्रसिद्धि प्रदान करने वाले हैं।
597. योगगम्य
ॐ योगगम्याय नमः।
Om Yogagamyaya Namah।
जो योग द्वारा प्राप्त होने वाले हैं।
598. याज्ञिक
ॐ याज्ञिकाय नमः।
Om Yajnikaya Namah।
जो यज्ञकर्ता हैं।
599. याजकप्रिय
ॐ याजकप्रियाय नमः।
Om Yajakapriyaya Namah।
जो यज्ञ कराने वालों के प्रिय हैं।
600. रस
ॐ रसाय नमः।
Om Rasaya Namah।
जो परम आनन्दस्वरूप हैं।
601. रसप्रिय
ॐ रसप्रियाय नमः।
Om Rasapriyaya Namah।
जो मधुर आदि रसों में अधिक प्रीति रखने वाले हैं।
602. रस्य
ॐ रस्याय नमः।
Om Rasyaya Namah।
जो आस्वाद के विषय हैं।
603. रञ्जक
ॐ रञ्जकाय नमः।
Om Ranjakaya Namah।
जो हर्ष एवं आनन्द प्रदान करने वाले हैं।
604. रावणार्चित
ॐ रावणार्चिताय नमः।
Om Ravanarchitaya Namah।
जो रावण द्वारा पूजे जाने वाले हैं।
605. रक्षोरक्षाकर
ॐ रक्षोरक्षाकराय नमः।
Om Rakshorakshakaraya Namah।
जो राक्षसों की जलाकर राख कर देने वाले हैं।
606. रत्नगर्भ
ॐ रत्नगर्भाय नमः।
Om Ratnagarbhaya Namah।
जो पृथ्वी के आश्रय हैं।
607. राजसुखप्रद
ॐ राजसुखप्रदाय नमः।
Om Rajasukhapradaya Namah।
जो राजसुख प्रदान करने वाले हैं।
608. लक्ष्य
ॐ लक्ष्याय नमः।
Om Lakshyaya Namah।
जो समस्त प्राणियों के उद्देश्य हैं।
609. लक्ष्यप्रद
ॐ लक्ष्यप्रदाय नमः।
Om Lakshyapradaya Namah।
जो सफलतापूर्वक लक्ष्य प्रदान करने वाले हैं।
610. लक्ष्य
ॐ लक्ष्याय नमः।
Om Lakshyaya Namah।
जो स्वयं परम लक्ष्य हैं।
611. लयस्थ
ॐ लयस्थाय नमः।
Om Layasthaya Namah।
जो प्रलय काल में भी विद्यमान रहने वाले हैं।
612. लड्डुकप्रिय
ॐ लड्डुकप्रियाय नमः।
Om Laddukapriyaya Namah।
जो लड्डुओं से अत्यन्त प्रसन्न रहने वाले हैं।
613. लानप्रिय
ॐ लानप्रियाय नमः।
Om Lanapriyaya Namah।
जो गजशाला में प्रीति रखने वाले हैं।
614. लास्यपर
ॐ लास्यपराय नमः।
Om Lasyaparaya Namah।
जो विलास योग्य परम धाम वाले हैं।
615. लाभकृल्लोकविश्रुत
ॐ लाभकृल्लोकविश्रुताय नमः।
Om Labhakrillokavishrutaya Namah।
जो भक्तों को शीघ्र वर प्रदान करने वाले हैं।
616. वरेण्य
ॐ वरेण्याय नमः।
Om Varenyaya Namah।
जो गणपति भक्त राजा वरेण्य के समान हैं।
617. वह्निवदन
ॐ वह्निवदनाय नमः।
Om Vahnivadanaya Namah।
जो अग्नि के समान तेज धारण करने वाले हैं।
618. वन्द्य
ॐ वन्द्याय नमः।
Om Vandyaya Namah।
जो हम सभी के आराध्य हैं।
619. वेदान्तगोचर
ॐ वेदान्तगोचराय नमः।
Om Vedantagocharaya Namah।
जो उपनिषदों के द्वारा जानने योग्य हैं।
620. विकर्ता
ॐ विकर्त्रे नमः।
Om Vikartre Namah।
जो जन्म आदि छः भावविकारों के प्रवर्तक हैं।
621. विश्वतश्चक्षु
ॐ विश्वतश्चक्षुषे नमः।
Om Vishvatashchakshushe Namah।
जो संसार को अपने नेत्रों के रूप में धारण करने वाले हैं।
622. विधाता
ॐ विधात्रे नमः।
Om Vidhatre Namah।
जो सृष्टि की उत्पत्ति करने वाले हैं।
623. विश्वतोमुख
ॐ विश्वतोमुखाय नमः।
Om Vishvatomukhaya Namah।
जो स्वयं ब्रह्मा स्वरूप में विराजमान हैं।
624. वामदेव
ॐ वामदेवाय नमः।
Om Vamadevaya Namah।
जो स्वयं शिव स्वरूप हैं।
625. विश्वनेता
ॐ विश्वनेत्रे नमः।
Om Vishvanetre Namah।
जो सम्पूर्ण विश्व का नेतृत्व करने वाले हैं।
626. वज्रिवज्रनिवारण
ॐ वज्रिवज्रनिवारणाय नमः।
Om Vajrivajranivaranaya Namah।
जो इन्द्र के वज्र को स्तम्भित करने वाले हैं।
627. विश्वबन्धनविष्कम्भाधार
ॐ विश्वबन्धनविष्कम्भाधाराय नमः।
Om Vishvabandhanavishkambhadharaya Namah।
जो सम्पूर्ण जगत की सृष्टि के आधार के आधार हैं।
628. विश्वेश्वरप्रभु
ॐ विश्वेश्वरप्रभवे नमः।
Om Vishveshvaraprabhave Namah।
जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड और उनके स्वामियों के स्वामी हैं।
629. शब्दब्रह्म
ॐ शब्दब्रह्मणे नमः।
Om Shabdabrahmane Namah।
जो परा नामक वाणी से अतीत नादरूपधारी हैं।
630. शमप्राप्य
ॐ शमप्राप्याय नमः।
Om Shamaprapyaya Namah।
जो मन के निग्रह द्वारा प्राप्त किये जा सकते हैं।
631. शम्भुशक्तिगणेश्वर
ॐ शम्भुशक्तिगणेश्वराय नमः।
Om Shambhushaktiganeshvaraya Namah।
जो शिव एवं शक्ति के गणों के स्वामी हैं।
632. शास्ता
ॐ शास्त्रे नमः।
Om Shastre Namah।
जो शास्ता नामक देवता के स्वरूप हैं।
633. शिखाग्रनिलय
ॐ शिखाग्रनिलयाय नमः।
Om Shikhagranilayaya Namah।
जो शिखा के अग्रभाग में वास करने वाले हैं।
634. शरण्य
ॐ शरण्याय नमः।
Om Sharanyaya Namah।
जो हम सभी के रक्षक हैं।
635. शिखरीश्वर
ॐ शिखरीश्वराय नमः।
Om Shikharishvaraya Namah।
जो हिमालय के समान हैं।
636. षड्ऋतुकुसुमस्रग्वी
ॐ षड्ऋतुकुसुमस्रग्विणे नमः।
Om Shadritukusumasragvine Namah।
जो छहों ऋतुओं में खिलने वाले पुष्पों की मालाओं से सुशोभित हैं।
637. षडाधार
ॐ षडाधाराय नमः।
Om Shadadharaya Namah।
जो छहों चक्रों के आधारभूत मूलाधार चक्र के समान हैं।
638. षडक्षर
ॐ षडक्षराय नमः।
Om Shadaksharaya Namah।
जो छः अक्षरों वाले ‘गणेशाय नमः’ मन्त्र स्वरूप हैं।
639. संसारवैद्य
ॐ संसारवैद्याय नमः।
Om Samsaravaidyaya Namah।
जो समस्त सृष्टि के चिकित्सक हैं।
640. सर्वज्ञ
ॐ सर्वज्ञाय नमः।
Om Sarvajnaya Namah।
जो सब कुछ जानने वाले हैं।
641. सर्वभेषजभेषज
ॐ सर्वभेषजभेषजाय नमः।
Om Sarvabheshajabheshajaya Namah।
जो समस्त औषधियों की औषधि हैं।
642. सृष्टिस्थितिलयक्रीड
ॐ सृष्टिस्थितिलयक्रीडाय नमः।
Om Srishtisthitilayakridaya Namah।
जगत की सृष्टि, पालन तथा उसका संहार करना जिनकी लीलायें हैं।
643. सुरकुञ्जरभेदन
ॐ सुरकुञ्जरभेदनाय नमः।
Om Surakunjarabhedanaya Namah।
जो दानवों से पूजित होकर देवताओं में भेद उत्पन्न करने वाले हैं।
644. सिन्दूरितमहाकुम्भ
ॐ सिन्दूरितमहाकुम्भाय नमः।
Om Sinduritamahakumbhaya Namah।
जो विशाल मस्तक पर सिन्दूर धारण करने वाले हैं।
645. सदसद्व्यक्तिदायक
ॐ सदसद्व्यक्तिदायकाय नमः।
Om Sadasadvyaktidayakaya Namah।
जो भक्तों को सद्बुद्धि प्रदान करने वाले हैं।
646. साक्षी
ॐ साक्षिणे नमः।
Om Sakshine Namah।
जो सृष्टि की समस्त गतिविधियों के साक्षी हैं।
647. समुद्रमथन
ॐ समुद्रमथनाय नमः।
Om Samudramathanaya Namah।
जो समुद्र मन्थन काल में देवताओं द्वारा सर्वप्रथम पूजित हैं।
648. स्वसंवेद्य
ॐ स्वसंवेद्याय नमः।
Om Svasamvedyaya Namah।
जो स्वयं परम ज्योति स्वरूप हैं।
649. स्वदक्षिण
ॐ स्वदक्षिणाय नमः।
Om Svadakshinaya Namah।
जो स्वयं सब कुछ करने में समर्थ हैं।
650. स्वतन्त्र
ॐ स्वतन्त्राय नमः।
Om Svatantraya Namah।
जो स्वतन्त्र हैं।
651. सत्यसङ्कल्प
ॐ सत्यसङ्कल्पाय नमः।
Om Satyasankalpaya Namah।
जो परम सत्य स्वरूप हैं।
652. सामगानरत
ॐ सामगानरताय नमः।
Om Samaganarataya Namah।
जो सामगान में तल्लीन रहने वाले हैं।
653. सुखी
ॐ सुखिने नमः।
Om Sukhine Namah।
जो परम सुखी हैं।
654. हंस
ॐ हंसाय नमः।
Om Hamsaya Namah।
जो सूर्य के समान हैं।
655. हस्तिपिशाचीश
ॐ हस्तिपिशाचीशाय नमः।
Om Hastipishachishaya Namah।
जो हस्तिपिशाचीश नामक नवाक्षर मन्त्र के देवता हैं।
656. हवन
ॐ हवनाय नमः।
Om Havanaya Namah।
जो आहुतिस्वरूप हैं।
657. हव्यकव्यभुक्
ॐ हव्यकव्यभुजे नमः।
Om Havyakavyabhuje Namah।
जो देवताओं और पितरों को दी जाने वाली आहुति ग्रहण करने वाले हैं।
658. हव्य
ॐ हव्याय नमः।
Om Havyaya Namah।
जो हव्य अर्थात् यज्ञ की आहुति के समान हैं।
659. हुतप्रिय
ॐ हुतप्रियाय नमः।
Om Hutapriyaya Namah।
जो यज्ञाहुति में दिये गये द्रव्य के प्रेमी हैं।
660. हर्ष
ॐ हर्षाय नमः।
Om Harshaya Namah।
जो सदैव प्रसन्नचित्त रहने वाले हैं।
661. हृल्लेखामन्त्रमध्यग
ॐ हृल्लेखामन्त्रमध्यगाय नमः।
Om Hrillekhamantramadhyagaya Namah।
जो हृल्लेखा बीज मन्त्र के अर्थात् ह्रीं के मध्य वास करने वाले हैं।
662. क्षेत्राधिप
ॐ क्षेत्राधिपाय नमः।
Om Kshetradhipaya Namah।
जो प्रयाग आदि तीर्थक्षेत्रों के अथवा शरीर आदि के स्वामी हैं।
663. क्षमाभर्ता
ॐ क्षमाभर्त्रे नमः।
Om Kshamabhartre Namah।
जो पृथ्वी के आधार हैं।
664. क्षमापरपरायण
ॐ क्षमापरपरायणाय नमः।
Om Kshamaparaparayanaya Namah।
जो क्षमाशील मुनियों द्वारा प्राप्य हैं।
665. क्षिप्रक्षेमकर
ॐ क्षिप्रक्षेमकराय नमः।
Om Kshiprakshemakaraya Namah।
जो तत्क्षण कल्याण करने वाले हैं।
666. क्षेमानन्द
ॐ क्षेमानन्दाय नमः।
Om Kshemanandaya Namah।
जो मंगलकर एवं आनन्द स्वरूप हैं।
667. क्षोणीसुरद्रुम
ॐ क्षोणीसुरद्रुमाय नमः।
Om Kshonisuradrumaya Namah।
जो पृथ्वी पर कल्पवृक्ष के समान समस्त मनोरथों को पूर्ण करने वाले हैं।
668. धर्मप्रद
ॐ धर्मप्रदाय नमः।
Om Dharmapradaya Namah।
जो धर्म प्रदान करने वाले हैं।
669. अर्थद
ॐ अर्थदाय नमः।
Om Arthadaya Namah।
जो धन-सम्पदा प्रदान करने वाले हैं।
670. कामदाता
ॐ कामदात्रे नमः।
Om Kamadatre Namah।
जो समस्त इच्छाओं की पूर्ति करने वाले हैं।
671. सौभाग्यवर्धन
ॐ सौभाग्यवर्धनाय नमः।
Om Saubhagyavardhanaya Namah।
जो स्त्रियों को सौभाग्य वृद्धि का वर देने वाले हैं।
672. विद्याप्रद
ॐ विद्याप्रदाय नमः।
Om Vidyapradaya Namah।
जो विद्या प्रदान करने वाले हैं।
673. विभवद
ॐ विभवदाय नमः।
Om Vibhavadaya Namah।
जो सम्पत्ति प्रदान करने वाले हैं।
674. भुक्तिमुक्तिफलप्रद
ॐ भुक्तिमुक्तिफलप्रदाय नमः।
Om Bhuktimuktiphalapradaya Namah।
जो सांसारिक सुख एवं मोक्ष प्रदान करने वाले हैं।
675. आभिरूप्यकर
ॐ आभिरूप्यकराय नमः।
Om Abhirupyakaraya Namah।
जो विद्वत्ता और सुन्दरता प्रदान करने वाले हैं।
676. वीरश्रीप्रद
ॐ वीरश्रीप्रदाय नमः।
Om Virashripradaya Namah।
जो लक्ष्मी प्रदान करने वाले हैं।
677. विजयप्रद
ॐ विजयप्रदाय नमः।
Om Vijayapradaya Namah।
जो विजय प्रदान करने वाले हैं।
678. सर्ववश्यकर
ॐ सर्ववश्यकराय नमः।
Om Sarvavashyakaraya Namah।
जो सभी को भक्त के वश में कर देने वाले हैं।
679. गर्भदोषहा
ॐ गर्भदोषघ्ने नमः।
Om Garbhadoshaghne Namah।
जो गर्भ की रक्षा अथवा गर्भपात आदि दोषों को दूर करने वाले हैं।
680. पुत्रपौत्रद
ॐ पुत्रपौत्रदाय नमः।
Om Putrapautradaya Namah।
जो पुत्र और पौत्र प्रदान करने वाले हैं।
681. मेधाद
ॐ मेधादाय नमः।
Om Medhadaya Namah।
जो विशिष्ट बुद्धि प्रदान करने वाले हैं।
682. कीर्तिद
ॐ कीर्तिदाय नमः।
Om Kirtidaya Namah।
जो लोक में प्रसिद्धि प्रदान करने वाले हैं।
683. शोकहारी
ॐ शोकहारिणे नमः।
Om Shokaharine Namah।
जो दुख का नाश करने वाले हैं।
684. दौर्भाग्यनाशन
ॐ दौर्भाग्यनाशनाय नमः।
Om Daurbhagyanashanaya Namah।
जो स्त्रियों के विधवापन आदि दुर्भाग्यसूचक दोषों का नाश करने वाले हैं।
685. प्रतिवादिमुखस्तम्भ
ॐ प्रतिवादिमुखस्तम्भाय नमः।
Om Prativadimukhastambhaya Namah।
जो शत्रुओं का दमन करने वाले हैं।
686. रुष्टचित्तप्रसादन
ॐ रुष्टचित्तप्रसादनाय नमः।
Om Rushtachittaprasadanaya Namah।
जो क्रोधित राजा आदि को शान्त एवं प्रसन्न करने वाले हैं।
687. पराभिचारशमन
ॐ पराभिचारशमनाय नमः।
Om Parabhicharashamanaya Namah।
जो दूसरों द्वारा किये गये मारण, मोहन आदि उपायों को नष्ट करने वाले हैं।
688. दुःखभञ्जनकारक
ॐ दुःखभञ्जनकारकाय नमः।
Om Duhkhabhanjanakarakaya Namah।
जो समस्त दुखों का नाश करने वाले हैं।
689. लव
ॐ लवाय नमः।
Om Lavaya Namah।
जो अति सूक्ष्म हैं।
690. त्रुटि
ॐ त्रुटये नमः।
Om Trutaye Namah।
जो काल गणना के अनुसार एक हजार लव के काल के समान हैं।
691. कला
ॐ कलायै नमः।
Om Kalayai Namah।
जो काल गणना के अनुसार तीस काष्ठाओं के काल के समान हैं।
692. काष्ठा
ॐ काष्ठायै नमः।
Om Kashthayai Namah।
जो काल गणना के अनुसार अठारह निमेष के समान समय वाले हैं।
693. निमेष
ॐ निमेषाय नमः।
Om Nimeshaya Namah।
जो काल गणना के अनुसार तीस तत्पर काल के समान समय वाले हैं।
694. तत्पर
ॐ तत्पराय नमः।
Om Tatparaya Namah।
जो काल गणना के अनुसार सौ त्रुटियों के समय के बराबर हैं।
695. क्षण
ॐ क्षणाय नमः।
Om Kshanaya Namah।
जो काल गणनानुसार क्षण स्वरूप अर्थात् तीस कलाओं के समय के बराबर हैं।
696. घटी
ॐ घट्यै नमः।
Om Ghatyai Namah।
जो काल गणनानुसार घटी स्वरूप अर्थात् छः क्षण के समान समय वाले हैं।
697. मुहूर्त
ॐ मुहूर्ताय नमः।
Om Muhurtaya Namah।
जो काल गणनानुसार दो घटी के समान समय वाले हैं।
698. प्रहर
ॐ प्रहराय नमः।
Om Praharaya Namah।
जो काल गणनानुसार चार मुहूर्त के समय के समान हैं।
699. दिवानक्त
ॐ दिवानक्ताय नमः।
Om Divanaktaya Namah।
जो काल गणनानुसार रात्रि स्वरूप हैं।
700. अहर्निश
ॐ अहर्निशाय नमः।
Om Aharnishaya Namah।
जो काल गणनानुसार दिन और रात के समय के समान समय वाले हैं।
701. पक्ष
ॐ पक्षाय नमः।
Om Pakshaya Namah।
जो पन्द्रह दिन अर्थात् एक पक्ष स्वरूप हैं।
702. मास
ॐ मासाय नमः।
Om Masaya Namah।
जो दो पक्ष अर्थात् एक माह स्वरूप हैं।
703. अयन
ॐ अयनाय नमः।
Om Ayanaya Namah।
जो छः माह अर्थात् एक अयन स्वरूप हैं।
704. वर्ष
ॐ वर्षाय नमः।
Om Varshaya Namah।
जो दो अयन (उत्तरायण और दक्षिणायन) अर्थात् वर्ष स्वरूप हैं।
705. युग
ॐ युगाय नमः।
Om Yugaya Namah।
जो युग स्वरूप अर्थात् बारह हजार दिव्य वर्षों के समान हैं।
706. कल्प
ॐ कल्पाय नमः।
Om Kalpaya Namah।
जो कल्प (ब्रह्मा जी का एक दिन) स्वरूप अर्थात् एक हजार चतुर्युग के समान हैं।
707. महालय
ॐ महालयाय नमः।
Om Mahalayaya Namah।
जो बहत्तर हजार कल्प अर्थात् महाप्रलय (ब्रह्मा जी का भी जब लय हो जाता है) स्वरूप हैं।
708. राशि
ॐ राशये नमः।
Om Rashaye Namah।
जो मेष आदि बारह राशिस्वरूप हैं।
709. तारा
ॐ तारायै नमः।
Om Tarayai Namah।
जो कृत्तिका आदि नक्षत्रस्वरूप हैं।
710. तिथि
ॐ तिथये नमः।
Om Tithaye Namah।
जो पंचाङ्ग में चन्द्रमा की पन्द्रह कलाओं में से एक तिथि स्वरूप हैं।
711. योग
ॐ योगाय नमः।
Om Yogaya Namah।
जो पंचाङ्ग में अमृतसिद्धि एवं आनन्द आदि योग के रूप में विद्यमान हैं।
712. वार
ॐ वाराय नमः।
Om Varaya Namah।
जो सप्ताह के सात वार के स्वरूप में विद्यमान हैं।
713. करण
ॐ करणाय नमः।
Om Karanaya Namah।
जो पंचाङ्ग में बव आदि करण के रूप में विद्यमान हैं।
714. अंशक
ॐ अंशकाय नमः।
Om Amshakaya Namah।
जो ज्योतिष में समस्त अंशों के रूप में रहने वाले हैं।
715. लग्न
ॐ लग्नाय नमः।
Om Lagnaya Namah।
जो ज्योतिष में मेष आदि राशियों के उदय करने वाले लग्नस्वरूप हैं।
716. होरा
ॐ होरायै नमः।
Om Horayai Namah।
जो ज्योतिष में होरा चक्र के रूप में विद्यमान रहने वाले हैं।
717. कालचक्र
ॐ कालचक्राय नमः।
Om Kalachakraya Namah।
जो स्वयं काल के स्वरूप हैं।
718. मेरु
ॐ मेरवे नमः।
Om Merave Namah।
जो मेरु के पर्वत रूप में विद्यमान हैं।
719. सप्तर्षि
ॐ सप्तर्षिभ्यो नमः।
Om Saptarshibhyo Namah।
जो कश्यप आदि सप्तऋषि स्वरूप हैं।
720. ध्रुव
ॐ ध्रुवाय नमः।
Om Dhruvaya Namah।
जो उत्तानपाद के पुत्रस्वरूप हैं।
721. राहु
ॐ राहवे नमः।
Om Rahave Namah।
जो राहु ग्रह स्वरूप हैं।
722. मन्द
ॐ मन्दाय नमः।
Om Mandaya Namah।
जो शनि ग्रह स्वरूप हैं।
723. कवि
ॐ कवये नमः।
Om Kavaye Namah।
जो शुक्र ग्रह स्वरूप हैं।
724. जीव
ॐ जीवाय नमः।
Om Jivaya Namah।
जो बृहस्पति ग्रह स्वरूप हैं।
725. बुध
ॐ बुधाय नमः।
Om Budhaya Namah।
जो बुध ग्रह स्वरूप हैं।
726. भौम
ॐ भौमाय नमः।
Om Bhaumaya Namah।
जो मङ्गल ग्रह स्वरूप हैं।
727. शशी
ॐ शशिने नमः।
Om Shashine Namah।
जो चन्द्र ग्रह स्वरूप हैं।
728. रवि
ॐ रवये नमः।
Om Ravaye Namah।
जो सूर्य ग्रह स्वरूप हैं।
729. काल
ॐ कालाय नमः।
Om Kalaya Namah।
जो जगत का संहार करने वाले हैं।
730. सृष्टि
ॐ सृष्टये नमः।
Om Srishtaye Namah।
जो सृष्टि की रचना करने वाले हैं।
731. स्थिति
ॐ स्थितये नमः।
Om Sthitaye Namah।
जो सृष्टि का पालन करने वाले हैं।
732. विश्व स्थावर जङ्गम
ॐ विश्वस्मै स्थावराय जङ्गमाय नमः।
Om Vishvasmai Sthavaraya Jangamaya Namah।
जो चराचर जगत स्वरूप हैं।
733. भू
ॐ भुवे नमः।
Om Bhuve Namah।
जो पृथ्वी स्वरूप हैं।
734. आप
ॐ अद्भ्यो नमः।
Om Adbhyo Namah।
जो जल स्वरूप हैं।
735. अग्नि
ॐ अग्नये नमः।
Om Agnaye Namah।
जो अग्नि स्वरूप हैं।
736. मरुत्
ॐ मरुते नमः।
Om Marute Namah।
जो वायु स्वरूप हैं।
737. व्योम
ॐ व्योम्ने नमः।
Om Vyomne Namah।
जो आकाश स्वरूप हैं।
738. अहङ्कृति
ॐ अहंकृतये नमः।
Om Ahamkritaye Namah।
जो अहंकार स्वरूप हैं।
739. प्रकृति
ॐ प्रकृतये नमः।
Om Prakritaye Namah।
जो जगत के मूल कारण प्रकृति स्वरूप हैं।
740. पुमान्
ॐ पुंसे नमः।
Om Pumse Namah।
जो पुरुष स्वरूप हैं।
741. ब्रह्मा
ॐ ब्रह्मणे नमः।
Om Brahmane Namah।
जो ब्रह्मा स्वरूप अर्थात् सृष्टि के सृजनकर्ता हैं।
742. विष्णु
ॐ विष्णवे नमः।
Om Vishnave Namah।
जो विष्णु स्वरूप अर्थात् सृष्टि के पालनकर्ता हैं।
743. शिव
ॐ शिवाय नमः।
Om Shivaya Namah।
जो शिव स्वरूप अर्थात् सृष्टि के संहारकर्ता हैं।
744. रुद्र
ॐ रुद्राय नमः।
Om Rudraya Namah।
जो रुद्र स्वरूप हैं।
745. ईश
ॐ ईशाय नमः।
Om Ishaya Namah।
जो ईश्वर स्वरूप हैं।
746. शक्ति
ॐ शक्तये नमः।
Om Shaktaye Namah।
जो शक्ति स्वरूप हैं।
747. सदाशिव
ॐ सदाशिवाय नमः।
Om Sadashivaya Namah।
जो सदैव कल्याण करने वाले हैं।
748. त्रिदश
ॐ त्रिदशेभ्यो नमः।
Om Tridashebhyo Namah।
जो देवगणों के समान हैं।
749. पितृ
ॐ पितृभ्यो नमः।
Om Pitribhyo Namah।
जो पितरों के समान हैं।
750. सिद्ध
ॐ सिद्धेभ्यो नमः।
Om Siddhebhyo Namah।
जो समस्त सिद्धियों के समान हैं।
श्री गणेश सहस्रनाम स्तोत्र — नाम 751 से 999
751. यक्ष
ॐ यक्षेभ्यो नमः।
Om Yakshebhyo Namah।
जो यक्षगणों के समान हैं।
752. रक्ष
ॐ रक्षोभ्यो नमः।
Om Rakshobhyo Namah।
जो राक्षसगणों के समान हैं।
753. किन्नर
ॐ किन्नरेभ्यो नमः।
Om Kinnarebhyo Namah।
जो किन्नरवर्ग के समान हैं।
754. साध्य
ॐ साध्येभ्यो नमः।
Om Sadhyebhyo Namah।
जो साधकजनों के समान हैं।
755. विद्याधर
ॐ विद्याधरेभ्यो नमः।
Om Vidyadharebhyo Namah।
जो विद्याधारण करने वाले गणों के समान हैं।
756. भूत
ॐ भूतेभ्यो नमः।
Om Bhutebhyo Namah।
जो स्वयं भूतगणों के रूप में हैं।
757. मनुष्य
ॐ मनुष्येभ्यो नमः।
Om Manushyebhyo Namah।
जो मनुष्यगणों के रूप में हैं।
758. पशु
ॐ पशुभ्यो नमः।
Om Pashubhyo Namah।
जो पशुगणों के समान हैं।
759. खग
ॐ खगेभ्यो नमः।
Om Khagebhyo Namah।
जो पक्षिगण स्वरूप हैं।
760. समुद्र
ॐ समुद्रेभ्यो नमः।
Om Samudrebhyo Namah।
जो विभिन्न समुद्रों के रूप में विद्यमान हैं।
761. सरित्
ॐ सरिद्भ्यो नमः।
Om Saridbhyo Namah।
जो नदियों के रूप में प्रवाहित होते हैं।
762. शैल
ॐ शैलेभ्यो नमः।
Om Shailebhyo Namah।
जो पर्वतों के रूप में विद्यमान हैं।
763. भूत
ॐ भूताय नमः।
Om Bhutaya Namah।
जो भूतकाल स्वरूप हैं।
764. भव्य
ॐ भव्याय नमः।
Om Bhavyaya Namah।
जो भविष्यकाल स्वरूप हैं।
765. भवोद्भव
ॐ भवोद्भवाय नमः।
Om Bhavodbhavaya Namah।
जो जगत की उत्पत्ति के कारण हैं।
766. साङ्ख्य
ॐ साङ्ख्याय नमः।
Om Sankhyaya Namah।
जो कपिल मुनि प्रणीत साङ्ख्य दर्शन स्वरूप हैं।
767. पातञ्जल
ॐ पातञ्जलाय नमः।
Om Patanjalaya Namah।
जो पतञ्जलि मुनि प्रणीत योगसूत्र रूप में विद्यमान हैं।
768. योग
ॐ योगाय नमः।
Om Yogaya Namah।
जो नागराज शेष द्वारा प्रतिपादित योग रूप हैं।
769. पुराण
ॐ पुराणेभ्यो नमः।
Om Puranebhyo Namah।
जो समस्त पुराणों के रूप में हैं।
770. श्रुति
ॐ श्रुत्यै नमः।
Om Shrutyai Namah।
जो स्वयं वेदस्वरूप हैं।
771. स्मृति
ॐ स्मृत्यै नमः।
Om Smrityai Namah।
जो मनुस्मृति आदि धर्मशास्त्र स्वरूप हैं।
772. वेदाङ्ग
ॐ वेदाङ्गेभ्यो नमः।
Om Vedangebhyo Namah।
जो छः वेदाङ्गों के रूप में विराजमान हैं।
773. सदाचार
ॐ सदाचाराय नमः।
Om Sadacharaya Namah।
जो सदाचार संग्रहात्मक ग्रन्थ स्वरूप हैं।
774. मीमांसा
ॐ मीमांसायै नमः।
Om Mimamsayai Namah।
जो जैमिनि मुनि प्रणीत मीमांसा दर्शन के रूप में अवस्थित हैं।
775. न्यायविस्तर
ॐ न्यायविस्तराय नमः।
Om Nyayavistaraya Namah।
जो गौतम मुनि द्वारा वर्णित न्याय दर्शन स्वरूप हैं।
776. आयुर्वेद
ॐ आयुर्वेदाय नमः।
Om Ayurvedaya Namah।
जो आयुर्वेद के रूप में विद्यमान हैं।
777. धनुर्वेद
ॐ धनुर्वेदाय नमः।
Om Dhanurvedaya Namah।
जो स्वयं अस्त्रविद्या अर्थात् धनुर्वेद के रूप में विराजमान हैं।
778. गान्धर्व
ॐ गान्धर्वाय नमः।
Om Gandharvaya Namah।
जो संगीत शास्त्र अर्थात् गन्धर्व वेद स्वरूप हैं।
779. काव्यनाटक
ॐ काव्यनाटकाय नमः।
Om Kavyanatakaya Namah।
जो साहित्य शास्त्र में वर्णित काव्य एवं नाटक के रूप में विद्यमान हैं।
780. वैखानस
ॐ वैखानसाय नमः।
Om Vaikhanasaya Namah।
जो भगवान विष्णु द्वारा कथित वैखानस तन्त्र स्वरूप हैं।
781. भागवत
ॐ भागवताय नमः।
Om Bhagavataya Namah।
जो स्वयं वैष्णवशास्त्र अर्थात् भागवत स्वरूप में अवस्थित हैं।
782. सात्वत
ॐ सात्वताय नमः।
Om Satvataya Namah।
जो सात्वत तन्त्र स्वरूप हैं।
783. पाञ्चरात्रक
ॐ पाञ्चरात्रकाय नमः।
Om Pancharatrakaya Namah।
जो पाञ्चरात्र आगम स्वरूप अर्थात् चारों वैष्णव तन्त्र स्वरूप हैं।
784. शैव
ॐ शैवाय नमः।
Om Shaivaya Namah।
जो शैव तन्त्र हैं।
785. पाशुपत
ॐ पाशुपताय नमः।
Om Pashupataya Namah।
जो पाशुपत शास्त्र हैं।
786. कालामुख
ॐ कालामुखाय नमः।
Om Kalamukhaya Namah।
जो कालामुख नामक प्रसिद्ध तन्त्र अथवा सम्प्रदाय के स्वरूप हैं।
787. भैरवशासन
ॐ भैरवशासनाय नमः।
Om Bhairavashasanaya Namah।
जो भैरव कथित चारों शैव तन्त्र के रूप में विद्यमान हैं।
788. शाक्त
ॐ शाक्ताय नमः।
Om Shaktaya Namah।
जो शक्तितन्त्र हैं।
789. वैनायक
ॐ वैनायकाय नमः।
Om Vainayakaya Namah।
जो विनायकतन्त्र स्वरूप हैं।
790. सौर
ॐ सौराय नमः।
Om Sauraya Namah।
जो भगवान सूर्य द्वारा कथित तन्त्र स्वरूप हैं।
791. जैन
ॐ जैनाय नमः।
Om Jainaya Namah।
जो स्वयं जैन शास्त्र के रूप में विद्यमान हैं।
792. आर्हतसंहिता
ॐ आर्हतसंहितायै नमः।
Om Arhatasamhitayai Namah।
जो आर्हतशास्त्र अर्थात् जैन धर्म के विशिष्ट ग्रन्थ के रूप में अवस्थित हैं।
793. सत्
ॐ सते नमः।
Om Sate Namah।
जो सभी के कारण के रूप में स्थित हैं।
794. असत्
ॐ असते नमः।
Om Asate Namah।
जो सभी के कार्य के रूप में विद्यमान हैं।
795. व्यक्त
ॐ व्यक्ताय नमः।
Om Vyaktaya Namah।
जो कार्य रूप में व्यक्त अर्थात् प्रत्यक्ष हैं।
796. अव्यक्त
ॐ अव्यक्ताय नमः।
Om Avyaktaya Namah।
जो कार्य के कारण रूप में अर्थात् अप्रत्यक्ष हैं।
797. सचेतन
ॐ सचेतनाय नमः।
Om Sachetanaya Namah।
जो सजीव अर्थात् चेतना से युक्त हैं।
798. अचेतन
ॐ अचेतनाय नमः।
Om Achetanaya Namah।
जो निर्जीव अर्थात् चेतना से रहित हैं।
799. बन्ध
ॐ बन्धाय नमः।
Om Bandhaya Namah।
जो स्वयं भ्रमरूपी बन्धन हैं।
800. मोक्ष
ॐ मोक्षाय नमः।
Om Mokshaya Namah।
जो मोक्षस्वरूप हैं।
801. सुख
ॐ सुखाय नमः।
Om Sukhaya Namah।
जो विशुद्ध आनन्द स्वरूप हैं।
802. भोग
ॐ भोगाय नमः।
Om Bhogaya Namah।
जो अनुभव योग्य हैं।
803. अयोग
ॐ अयोगाय नमः।
Om Ayogaya Namah।
जो आसक्ति रहित हैं।
804. सत्य
ॐ सत्याय नमः।
Om Satyaya Namah।
जिनका तीनों कालों में निर्बाध रूप से संचार हैं।
805. अणु
ॐ अणवे नमः।
Om Anave Namah।
जो मन आदि इन्द्रियों के अगोचर हैं।
806. महान्
ॐ महते नमः।
Om Mahate Namah।
जो परम आनन्द स्वरूप हैं।
807. स्वस्ति
ॐ स्वस्तये नमः।
Om Svastaye Namah।
जो कल्याण स्वरूप अथवा सत्ताधारी हैं।
808. हुं
ॐ हुं नमः।
Om Hum Namah।
जो हुं बीज मन्त्र में विद्यमान हैं।
809. फट्
ॐ फट् नमः।
Om Phat Namah।
जो बीज मन्त्र स्वरूप हैं।
810. स्वधा
ॐ स्वधा नमः।
Om Svadha Namah।
जो सर्वशक्तिशाली मन्त्र अथवा श्राद्ध कर्म स्वरूप हैं।
811. स्वाहा
ॐ स्वाहा नमः।
Om Svaha Namah।
जो यज्ञ कर्म स्वरूप हैं।
812. श्रौषट्
ॐ श्रौषट् नमः।
Om Shraushat Namah।
जो श्रौषट् मन्त्र स्वरूप हैं।
813. वौषट्
ॐ वौषट् नमः।
Om Vaushat Namah।
जो वौषट् मन्त्र स्वरूप हैं।
814. वषण्णमः
ॐ वषट् नमः।
Om Vashat Namah।
जो वषट् मन्त्र स्वरूप हैं।
815. नमो नमः
ॐ नमो नमः।
Om Namo Namah।
जो अभिवादन स्वरूप हैं।
816. ज्ञान
ॐ ज्ञानाय नमः।
Om Jnanaya Namah।
जो मोक्षविषयक ज्ञानस्वरूप हैं।
817. विज्ञान
ॐ विज्ञानाय नमः।
Om Vijnanaya Namah।
जो विज्ञान स्वरूप में विद्यमान हैं।
818. आनन्द
ॐ आनन्दाय नमः।
Om Anandaya Namah।
जो आत्मानन्द स्वरूप हैं।
819. बोध
ॐ बोधाय नमः।
Om Bodhaya Namah।
जो अन्तर्बोध स्वरूप अर्थात् अन्तरिन्द्रिय द्वारा जानने योग्य हैं।
820. संविद
ॐ संविदे नमः।
Om Samvide Namah।
जो बाह्य वृत्तियों द्वारा दुष्प्राप्य हैं।
821. शम
ॐ शमाय नमः।
Om Shamaya Namah।
जो मन के निग्रह स्वरूप हैं।
822. यम
ॐ यमाय नमः।
Om Yamaya Namah।
जो इन्द्रियों पर संयम रखने वाले हैं।
823. एक
ॐ एकस्मै नमः।
Om Ekasmai Namah।
जो एकमात्र अद्वितीय ब्रह्म हैं।
824. एकाक्षराधार
ॐ एकाक्षराधाराय नमः।
Om Ekaksharadharaya Namah।
जो एकाक्षर गं बीजमात्र में स्थित रहने वाले हैं।
825. एकाक्षरपरायण
ॐ एकाक्षरपरायणाय नमः।
Om Ekaksharaparayanaya Namah।
जो ॐ एकाक्षर में स्थित रहने वाले हैं।
826. एकाग्रधी
ॐ एकाग्रधिये नमः।
Om Ekagradhiye Namah।
जो अत्यन्त एकाग्र रहने वाले हैं।
827. एकवीर
ॐ एकवीराय नमः।
Om Ekaviraya Namah।
जो सर्वशक्तिमान एकमात्र वीर स्वरूप हैं।
828. एकानेकस्वरूपधृश्
ॐ एकानेकस्वरूपधृषे नमः।
Om Ekanekasvarupadhrishe Namah।
जो एक होते हुए भी अनेक रूपों को धारण करने वाले हैं।
829. द्विरूप
ॐ द्विरूपाय नमः।
Om Dvirupaya Namah।
जो सगुण और निर्गुण दोनों रूपों में स्थित हैं।
830. द्विभुज
ॐ द्विभुजाय नमः।
Om Dvibhujaya Namah।
जो दो भुजाओं वाले हैं।
831. द्व्यक्ष
ॐ द्व्यक्षाय नमः।
Om Dvyakshaya Namah।
जो दो नेत्रों वाले हैं।
832. द्विरद
ॐ द्विरदाय नमः।
Om Dviradaya Namah।
जो दो दाँत वाले अर्थात् गज के रूप में रहने वाले हैं।
833. द्वीपरक्षक
ॐ द्वीपरक्षकाय नमः।
Om Dviparakshakaya Namah।
जो सातों द्वीपों के रक्षक हैं।
834. द्वैमातुर
ॐ द्वैमातुराय नमः।
Om Dvaimaturaya Namah।
जो माता उमा और गङ्गा के पुत्र हैं।
835. द्विवदन
ॐ द्विवदनाय नमः।
Om Dvivadanaya Namah।
जो दो मुख अर्थात् अग्निमुख और गजमुख वाले हैं।
836. द्वन्द्वातीत
ॐ द्वन्द्वातीताय नमः।
Om Dvandvatitaya Namah।
जो शीत उष्ण आदि द्वन्द दुःखों से रहित हैं।
837. द्व्यातिग
ॐ द्वयातिगाय नमः।
Om Dvayatigaya Namah।
जो रजोगुण और तमोगुण से परे हैं।
838. त्रिधामा
ॐ त्रिधाम्ने नमः।
Om Tridhamne Namah।
जो सूर्य, चन्द्र और अग्नि इन तीनों तेजों से युक्त हैं।
839. त्रिकर
ॐ त्रिकराय नमः।
Om Trikaraya Namah।
जो तीनों लोकों के कर्ता हैं।
840. त्रेतात्रिवर्गफलदायक
ॐ त्रेतात्रिवर्गफलदायकाय नमः।
Om Tretatrivargaphaladayakaya Namah।
जो धर्म, अर्थ और काम रूपी फल प्रदान करने वाले हैं।
841. त्रिगुणात्मा
ॐ त्रिगुणात्मने नमः।
Om Trigunatmane Namah।
जो सत्त्व, रज और तम तीनों गुणों से युक्त प्रकृति के आधार हैं।
842. त्रिलोकादि
ॐ त्रिलोकादये नमः।
Om Trilokadaye Namah।
जो तीनों लोकों के आदि कारण हैं।
843. त्रिशक्तीश
ॐ त्रिशक्तीशाय नमः।
Om Trishaktishaya Namah।
जो प्रभुशक्ति, उत्साहशक्ति और मन्त्रशक्ति नामक त्रिशक्तियों के स्वामी हैं।
844. त्रिलोचन
ॐ त्रिलोचनाय नमः।
Om Trilochanaya Namah।
जो तीन नेत्र वाले हैं।
845. चतुर्बाहु
ॐ चतुर्बाहवे नमः।
Om Chaturbahave Namah।
जो चार भुजाओं वाले हैं।
846. चतुर्दन्त
ॐ चतुर्दन्ताय नमः।
Om Chaturdantaya Namah।
जो चार दातों वाले हैं।
847. चतुरात्मा
ॐ चतुरात्मने नमः।
Om Chaturatmane Namah।
जो आत्मा, अन्तरात्मा, ज्ञानात्मा और परमात्मा नामक चार आत्माओं वाले हैं।
848. चतुर्मुख
ॐ चतुर्मुखाय नमः।
Om Chaturmukhaya Namah।
जो चार मुख वाले हैं।
849. चतुर्विधोपायमय
ॐ चतुर्विधोपायमयाय नमः।
Om Chaturvidhopayamayaya Namah।
जो साम, दाम, दण्ड, भेद चार उपायों से उत्पन्न फल के साधक हैं।
850. चतुर्वर्णाश्रमाश्रय
ॐ चतुर्वर्णाश्रमाश्रयाय नमः।
Om Chaturvarnashramashrayaya Namah।
जो चारों वर्णों और चारों आश्रमों के आधार हैं।
851. चतुर्विधवचोवृत्तिपरिवृत्तिप्रवर्तक
ॐ चतुर्विधवचोवृत्तिपरिवृत्तिप्रवर्तकाय नमः।
Om Chaturvidhavachovrittiparivrittipravartakaya Namah।
जो चार प्रकार की वाणी (परा, पश्यन्ति, मध्यमा, बैखरी) के अधिपति हैं।
852. चतुर्थीपूजनप्रीत
ॐ चतुर्थीपूजनप्रीताय नमः।
Om Chaturthipujanapritaya Namah।
जो चतुर्थी पर पूजन से प्रसन्न होने वाले हैं।
853. चतुर्थीतिथिसम्भव
ॐ चतुर्थीतिथिसम्भवाय नमः।
Om Chaturthitithisambhavaya Namah।
जो चतुर्थी तिथि पर प्रकट होने वाले हैं।
854. पञ्चाक्षरात्मा
ॐ पञ्चाक्षरात्मने नमः।
Om Panchaksharatmane Namah।
जो अकार, उकार, मकार, नाद और बिन्दु (पञ्चाक्षर ॐ) में निवास करने वाले हैं।
855. पञ्चात्मा
ॐ पञ्चात्मने नमः।
Om Panchatmane Namah।
जो पञ्चात्मा ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, ईश्वर और सदाशिव इन पाँच विग्रहों से युक्त हैं।
856. पञ्चास्य
ॐ पञ्चास्याय नमः।
Om Panchasyaya Namah।
जो पाँच मुख वाले हैं।
857. पञ्चकृत्यकृत्
ॐ पञ्चकृत्यकृते नमः।
Om Panchakrityakrite Namah।
जो सृष्टि, पालन, संहार, तिरोभाव और अनुग्रह करने वाले हैं।
858. पञ्चाधार
ॐ पञ्चाधाराय नमः।
Om Panchadharaya Namah।
जो प्रकृति के पञ्चतत्वों को धारण करने वाले हैं।
859. पञ्चवर्ण
ॐ पञ्चवर्णाय नमः।
Om Panchavarnaya Namah।
जो पाँच वर्ण वाले हैं।
860. पञ्चाक्षरपरायण
ॐ पञ्चाक्षरपरायणाय नमः।
Om Panchaksharaparayanaya Namah।
जो नित्य शिव पञ्चाक्षर मन्त्र (नमः शिवाय) का जाप करने वाले हैं।
861. पञ्चताल
ॐ पञ्चतालाय नमः।
Om Panchatalaya Namah।
जो पाँच ताल के बराबर शरीरवाले अर्थात् वामनरूपी हैं।
862. पञ्चकर
ॐ पञ्चकराय नमः।
Om Panchakaraya Namah।
जो पाँच हाथों वाले होने के कारण पञ्चकर कहे जाने जाने वाले हैं।
863. पञ्चप्रणवभावित
ॐ पञ्चप्रणवभाविताय नमः।
Om Panchapranavabhavitaya Namah।
जिन्हें पञ्च प्रणव द्वारा अनुभव किया जा सकता है।
864. पञ्चब्रह्ममयस्फूर्ति
ॐ पञ्चब्रह्ममयस्फूर्तये नमः।
Om Panchabrahmamayasphurtaye Namah।
जो सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष और ईश्वर इन पाँच ब्रह्मस्वरूपों की शक्ति से युक्त हैं।
865. पञ्चावरणवारित
ॐ पञ्चावरणवारिताय नमः।
Om Panchavaranavaritaya Namah।
जो अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनन्दमय इन पाँच कोषों से युक्त हैं।
866. पञ्चभक्ष्यप्रिय
ॐ पञ्चभक्ष्यप्रियाय नमः।
Om Panchabhakshyapriyaya Namah।
जो पाँच प्रकार के भक्ष्य पदार्थों के प्रेमी हैं।
867. पञ्चबाण
ॐ पञ्चबाणाय नमः।
Om Panchabanaya Namah।
जो कामेश्वरी उमा और कामेश्वर शिव के पाँच बीजों से युक्त हैं।
868. पञ्चशिवात्मक
ॐ पञ्चशिवात्मकाय नमः।
Om Panchashivatmakaya Namah।
जो शिव के पाँच रूपों में स्थित रहने वाले हैं।
869. षट्कोणपीठ
ॐ षट्कोणपीठाय नमः।
Om Shatkonapithaya Namah।
जो षट्भुज आसन पर विराजमान होने वाले हैं।
870. षट्चक्रधामा
ॐ षट्चक्रधाम्ने नमः।
Om Shatchakradhamne Namah।
जो मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपूर, अनाहत, विशुद्धि एवं आज्ञा इन छः चक्रों में रहने वाले हैं।
871. षड्ग्रन्थिभेदक
ॐ षड्ग्रन्थिभेदकाय नमः।
Om Shadgranthibhedakaya Namah।
जो छः प्रकार की ग्रन्थियों को भेदकर मुक्ति प्रदान करने वाले हैं।
872. षडध्वध्वान्तविध्वंसी
ॐ षडध्वध्वान्तविध्वंसिने नमः।
Om Shadadhvadhvantavidhvamsine Namah।
जो छः प्रकार के अंधकारों को नष्ट करने वाले हैं।
873. षडङ्गुलमहाह्रद
ॐ षडङ्गुलमहाह्रदाय नमः।
Om Shadangulamahahradaya Namah।
जो छः अंगुल गहरे नाभि वाले हैं।
874. षण्मुख
ॐ षण्मुखाय नमः।
Om Shanmukhaya Namah।
जो छः शास्त्रों को मुख में धारण करने वाले हैं।
875. षण्मुखभ्राता
ॐ षण्मुखभ्रात्रे नमः।
Om Shanmukhabhratre Namah।
जो छः मुख वाले कार्तिकेय के भ्राता हैं।
876. षट्शक्तिपरिवारित
ॐ षट्शक्तिपरिवारिताय नमः।
Om Shatshaktiparivaritaya Namah।
जो छः प्रकार की शक्तियों से घिरे हुये हैं।
877. षड्वैरिवर्गविध्वंसी
ॐ षड्वैरिवर्गविध्वंसिने नमः।
Om Shadvairivargavidhvamsine Namah।
जो काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर इन छः शत्रुओं का नाश करने वाले हैं।
878. षडूर्मिभयभञ्जन
ॐ षडूर्मिभयभञ्जनाय नमः।
Om Shadurmibhayabhanjanaya Namah।
जो भूख, प्यास, शोक, मोह, जरा और मृत्यु इन छः ऊर्मियों के भय का निवारण करने वाले हैं।
879. षट्तर्कदूर
ॐ षट्तर्कदूराय नमः।
Om Shattarkaduraya Namah।
जो छः शास्त्रों के परे हैं।
880. षट्कर्मनिरत
ॐ षट्कर्मनिरताय नमः।
Om Shatkarmanirataya Namah।
जो षट्कर्म (यजन, याजन, अध्ययन, अध्यापन, दान, प्रतिग्रह) में लीन हैं।
881. षड्रसाश्रय
ॐ षड्रसाश्रयाय नमः।
Om Shadrasashrayaya Namah।
जो छः रस (मधुर, अम्ल, लवण, कटु, कषाय तथा तिक्त) में स्थित हैं।
882. सप्तपातालचरण
ॐ सप्तपातालचरणाय नमः।
Om Saptapatalacharanaya Namah।
तल, अतल, आदि नीचे के सात लोक जिनके चरणों के आश्रित हैं।
883. सप्तद्वीपोरुमण्डल
ॐ सप्तद्वीपोरुमण्डलाय नमः।
Om Saptadviporumandalaya Namah।
जम्बू आदि सात द्वीप जिनकी जङ्घाओं के रूप में स्थित हैं।
884. सप्तस्वर्लोकमुकुट
ॐ सप्तस्वर्लोकमुकुटाय नमः।
Om Saptasvarlokamukutaya Namah।
जो भू लोक से लेकर गोलोक पर्यन्त सात स्वर्लोक जिनके मुकुट हैं।
885. सप्तसप्तिवरप्रद
ॐ सप्तसप्तिवरप्रदाय नमः।
Om Saptasaptivarapradaya Namah।
जो सूर्य को वर प्रदान करने वाले हैं।
886. सप्ताङ्गराज्यसुखद
ॐ सप्ताङ्गराज्यसुखदाय नमः।
Om Saptangarajyasukhadaya Namah।
जो सप्तांग राज्य सुख प्रदान करने वाले हैं।
887. सप्तर्षिगणमण्डित
ॐ सप्तर्षिगणमण्डिताय नमः।
Om Saptarshiganamanditaya Namah।
जो कश्यप आदि सात ऋषियों तथा गण-देवताओं से सुशोभित हैं।
888. सप्तछन्दोनिधि
ॐ सप्तछन्दोनिधये नमः।
Om Saptachhandonidhaye Namah।
जो गायत्री से लेकर जगती पर्यन्त सात वैदिक छन्दों के आश्रय हैं।
889. सप्तहोता
ॐ सप्तहोत्रे नमः।
Om Saptahotre Namah।
जो होता से लेकर उद्गाता पर्यन्त सात होतृगण स्वरूप हैं।
890. सप्तस्वराश्रय
ॐ सप्तस्वराश्रयाय नमः।
Om Saptasvarashrayaya Namah।
जो सात स्वरों (षड्ज, ऋषभ, गान्धार, मध्यम, पञ्चम, धैवत, निषाद) के आधार हैं।
891. सप्ताब्धिकेलिकासार
ॐ सप्ताब्धिकेलिकासाराय नमः।
Om Saptabdhikelikasaraya Namah।
सातों समुद्र जिनके क्रीड़ा-सरोवर हैं।
892. सप्तमातृनिषेवित
ॐ सप्तमातृनिषेविताय नमः।
Om Saptamatrinishevitaya Namah।
जो ब्राह्मी, माहेश्वरी आदि सात मातृकाओं से सेवित हैं।
893. सप्तच्छन्दोमोदमद
ॐ सप्तच्छन्दोमोदमदाय नमः।
Om Saptachchhandomodamadaya Namah।
जो पथ्य नामक सात छन्दों से उत्पन्न आनन्द में लीन हैं।
894. सप्तच्छन्दोमखप्रभु
ॐ सप्तच्छन्दोमखप्रभवे नमः।
Om Saptachchhandomakhaprabhave Namah।
जो सप्त छन्दों की ऊर्जा के स्रोत हैं।
895. अष्टमूर्तिध्येयमूर्ति
ॐ अष्टमूर्तिध्येयमूर्तये नमः।
Om Ashtamurtidhyeyamurtaye Namah।
जो भगवान् शिव के द्वारा भी पूजनीय हैं।
896. अष्टप्रकृतिकारण
ॐ अष्टप्रकृतिकारणाय नमः।
Om Ashtaprakritikaranaya Namah।
जो पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश, मन, बुद्धि और अहंकार इन आठ प्रकृतियों की उत्पत्ति के कारण हैं।
897. अष्टाङ्गयोगफलभू
ॐ अष्टाङ्गयोगफलभुवे नमः।
Om Ashtangayogaphalabhuve Namah।
जो अष्टाङ्गयोग के माध्यम फल प्रदान करने वाले हैं।
898. अष्टपत्राम्बुजासन
ॐ अष्टपत्राम्बुजासनाय नमः।
Om Ashtapatrambujasanaya Namah।
जो अष्टदल कमल पुष्प के आसन पर विराजमान रहने वाले हैं।
899. अष्टशक्तिसमृद्धिश्री
ॐ अष्टशक्तिसमृद्धिश्रिये नमः।
Om Ashtashaktisamriddhishriye Namah।
जो तीव्रा, ज्वालिनी आदि अष्ट शक्तियों द्वारा पूजित होने के कारण श्रीसम्पन्न हैं।
900. अष्टैश्वर्यप्रदायक
ॐ अष्टैश्वर्यप्रदायकाय नमः।
Om Ashtaishvaryapradayakaya Namah।
जो अणिमा आदि आठ सिद्धियों के दाता हैं।
901. अष्टपीठोपपीठश्री
ॐ अष्टपीठोपपीठश्रिये नमः।
Om Ashtapithopapithashriye Namah।
जो अष्टपीठ एवं उपपीठों को ऐश्वर्य युक्त करने वाले हैं।
902. अष्टमातृसमावृत
ॐ अष्टमातृसमावृताय नमः।
Om Ashtamatrisamavritaya Namah।
सप्त मातृका एवं महालक्ष्मी जिनके आवरण देव के रूप में विराजमान हैं।
903. अष्टभैरवसेव्य
ॐ अष्टभैरवसेव्याय नमः।
Om Ashtabhairavasevyaya Namah।
जो बटुक आदि अष्ट भैरवों द्वारा पूजे जाने वाले हैं।
904. अष्टवसुवन्द्य
ॐ अष्टवसुवन्द्याय नमः।
Om Ashtavasuvandyaya Namah।
जो धर से लेकर प्रभास तक आठ वसुओं द्वारा पूजे जाने वाले हैं।
905. अष्टमूर्तिभृत्
ॐ अष्टमूर्तिभृते नमः।
Om Ashtamurtibhrite Namah।
जो अष्टमूर्ति रूप धारण करने वाले हैं।
906. अष्टचक्रस्फुरन्मूर्ति
ॐ अष्टचक्रस्फुरन्मूर्तये नमः।
Om Ashtachakrasphuranmurtaye Namah।
जो अष्ट चक्र यन्त्र स्वरूप हैं।
907. अष्टद्रव्यहविःप्रिय
ॐ अष्टद्रव्यहविःप्रियाय नमः।
Om Ashtadravyahavihpriyaya Namah।
जो ईख, सत्तू आदि अष्टद्रव्यों से प्रसन्न होने वाले हैं।
908. नवनागासनाध्यासी
ॐ नवनागासनाध्यासिने नमः।
Om Navanagasanadhyasine Namah।
जो वासुकी, तक्षक, कुलक, कर्कोटक आदि नौ नागों के आसन पर बैठने वाले हैं।
909. नवनिध्यनुशासिता
ॐ नवनिध्यनुशासित्रे नमः।
Om Navanidhyanushasitre Namah।
जो नौ निधियों पर शासन करने वाले हैं।
910. नवद्वारपुराधार
ॐ नवद्वारपुराधाराय नमः।
Om Navadvarapuradharaya Namah।
जो नौ द्वारों वाली मानव देह के आधार हैं।
911. नवाधारनिकेतन
ॐ नवाधारनिकेतनाय नमः।
Om Navadharaniketanaya Namah।
जो कुलाकुल, सहस्रार, मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपूर, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा और लम्बिका इन नौ आधारों में निवास करने वाले हैं।
912. नवनारायणस्तुत्य
ॐ नवनारायणस्तुत्याय नमः।
Om Navanarayanastutyaya Namah।
जो धर्म, आदि, अनन्त, बदरी, रूप, शंकर, सुन्दर, लक्ष्मी और साध्य इन नौ नारायणों द्वारा पूजित हैं।
913. नवदुर्गानिषेवित
ॐ नवदुर्गानिषेविताय नमः।
Om Navadurganishevitaya Namah।
नौदुर्गा जिनकी उपासना करती हैं।
914. नवनाथमहानाथ
ॐ नवनाथमहानाथाय नमः।
Om Navanathamahanathaya Namah।
जो नौ नाथों (ज्ञान, प्रकाश, सत्य, आनन्द, विमर्श, स्वभाव, सुभग, प्रतिभ और पूर्ण) के महानाथ हैं।
915. नवनागविभूषण
ॐ नवनागविभूषणाय नमः।
Om Navanagavibhushanaya Namah।
जो कर्कोटक आदि नौ नागों को आभूषण के रूप में धारण करने वाले हैं।
916. नवरत्नविचित्राङ्ग
ॐ नवरत्नविचित्राङ्गाय नमः।
Om Navaratnavichitrangaya Namah।
जो नौ प्रकार के रत्नों से सुशोभित हैं।
917. नवशक्तिशिरोधृत
ॐ नवशक्तिशिरोधृताय नमः।
Om Navashaktishirodhritaya Namah।
नवशक्तियाँ जिन्हें अपने मस्तक पर धारण करती हैं।
918. दशात्मक
ॐ दशात्मकाय नमः।
Om Dashatmakaya Namah।
जो दसों दिशाओं में व्याप्त हैं।
919. दशभुज
ॐ दशभुजाय नमः।
Om Dashabhujaya Namah।
जो दस भुजाओं वाले हैं।
920. दशदिक्पतिवन्दित
ॐ दशदिक्पतिवन्दिताय नमः।
Om Dashadikpativanditaya Namah।
जो इन्द्र आदि दसों दिशाओं के दिक्पालों द्वारा पूजे जाने वाले हैं।
921. दशाध्याय
ॐ दशाध्यायाय नमः।
Om Dashadhyayaya Namah।
जो चार वेद और छः अंगों के अध्येता हैं।
922. दशप्राण
ॐ दशप्राणाय नमः।
Om Dashapranaya Namah।
जो प्राण, अपान, व्यान आदि दस प्रकार के प्राणों से युक्त हैं।
923. दशेन्द्रियनियामक
ॐ दशेन्द्रियनियामकाय नमः।
Om Dashendriyaniyamakaya Namah।
जो पाँच ज्ञानेन्द्रियों एवं पाँच कर्मेन्द्रियों को वश में रखने वाले हैं।
924. दशाक्षरमहामन्त्र
ॐ दशाक्षरमहामन्त्राय नमः।
Om Dashaksharamahamantraya Namah।
जो दस अक्षरवाले (ॐ हस्तिपिशाचिनी हुं स्वाहा) महामन्त्रस्वरूप स्वरूप हैं।
925. दशाशाव्यापिविग्रह
ॐ दशाशाव्यापिविग्रहाय नमः।
Om Dashashavyapivigrahaya Namah।
जो दशों दिशाओं में व्याप्त शरीर वाले हैं।
926. एकादशादि रुद्र स्तुत
ॐ एकदशादिभिः रुद्रैः स्तुताय नमः।
Om Ekadashadibhih Rudraih Stutaya Namah।
जो ग्यारह से लेकर एक हजार तक रुद्रों द्वारा पूजित हैं।
927. एकादशाक्षर
ॐ एकादशाक्षराय नमः।
Om Ekadashaksharaya Namah।
जो ग्यारह अक्षर मन्त्र स्वरूप हैं।
928. द्वादशोद्दण्डदोर्दण्ड
ॐ द्वादशोद्दण्डदोर्दण्डाय नमः।
Om Dvadashoddandadordandaya Namah।
जो बारह भुजाओं वाले दण्डधारी स्वरूप में विराजमान हैं।
929. द्वादशान्तनिकेतन
ॐ द्वादशान्तनिकेतनाय नमः।
Om Dvadashantaniketanaya Namah।
जो ललाट से लेकर ब्रह्मरन्ध्र तक अर्थात् द्वादशान्त में निवास करने हैं।
930. त्रयोदशभिदाभिन्नविश्वेदेवाधिदैवत
ॐ त्रयोदशभिदाभिन्नविश्वेदेवाधिदैवताय नमः।
Om Trayodashabhidabhinnavishvedevadhidaivataya Namah।
जो तेरह विश्वेदेवों के अधिदेवता हैं।
931. चतुर्दशेन्द्रवरद
ॐ चतुर्दशेन्द्रवरदाय नमः।
Om Chaturdashendravaradaya Namah।
जो चौदह प्रकार के इन्द्रों को वर प्रदान करने वाले हैं।
932. चतुर्दशमनुप्रभु
ॐ चतुर्दशमनुप्रभवे नमः।
Om Chaturdashamanuprabhave Namah।
जो चौदह प्रकार के मनुओं के अधिपति हैं।
933. चतुर्दशादिविद्याढ्य
ॐ चतुर्दशादिविद्याढ्याय नमः।
Om Chaturdashadividyadhyaya Namah।
जो चौदह प्रकार की विद्याओं में पारंगत हैं।
934. चतुर्दशजगत्प्रभु
ॐ चतुर्दशजगत्प्रभवे नमः।
Om Chaturdashajagatprabhave Namah।
जो चौदह भुवनों (सप्त ऊर्ध्वलोक एवं सप्त पाताल लोक) के स्वामी हैं।
935. सामपञ्चदश
ॐ सामपञ्चदशाय नमः।
Om Samapanchadashaya Namah।
जो सामवेद के पन्द्रह भागों के रूप में विद्यमान हैं।
936. पञ्चदशीशीतांशुनिर्मल
ॐ पञ्चदशीशीतांशुनिर्मलाय नमः।
Om Panchadashishitamshunirmalaya Namah।
जो पूर्णिमा के चन्द्रमा के समान शीतल एवं निर्मल हैं।
937. षोडशाधारनिलय
ॐ षोडशाधारनिलयाय नमः।
Om Shodashadharanilayaya Namah।
जो मानव शरीर के सोलह आधारों के रूप में स्थित रहने वाले हैं।
938. षोडशस्वरमातृक
ॐ षोडशस्वरमातृकाय नमः।
Om Shodashasvaramatrikaya Namah।
जो सोलह स्वर अक्षर स्वरूप हैं।
939. षोडशान्तपदावास
ॐ षोडशान्तपदावासाय नमः।
Om Shodashantapadavasaya Namah।
जो षोडशान्त (ब्रह्मरन्ध्र अन्तर्गत) में निवास करने वाले हैं।
940. षोडशेन्दुकलात्मक
ॐ षोडशेन्दुकलात्मकाय नमः।
Om Shodashendukalatmakaya Namah।
जो अमृता और मानिनी आदि सोलह कलाओं से युक्त चन्द्र के समान हैं।
941. कलासप्तदशी
ॐ कलासप्तदश्यै नमः।
Om Kalasaptadashyai Namah।
जो त्रिपुरागम में प्रसिद्ध सप्तदशी नामक कलास्वरूप हैं।
942. सप्तदश
ॐ सप्तदशाय नमः।
Om Saptadashaya Namah।
जो सत्रह यज्ञों के स्वरूप हैं।
943. सप्तदशाक्षर
ॐ सप्तदशाक्षराय नमः।
Om Saptadashaksharaya Namah।
जो सत्रह अक्षर वाले मन्त्र में स्थित हैं।
944. अष्टादशद्वीपपति
ॐ अष्टादशद्वीपपतये नमः।
Om Ashtadashadvipapataye Namah।
जो अठारह द्वीपों के अधिपति हैं।
945. अष्टादशपुराणकृत्
ॐ अष्टादशपुराणकृते नमः।
Om Ashtadashapuranakrite Namah।
जो अठारह पुराणों के रचीयता हैं।
946. अष्टादशौषधीसृष्टि
ॐ अष्टादशौषधीसृष्टये नमः।
Om Ashtadashaushadhisrishtaye Namah।
जो अठारह प्रकार की औषधियों के उत्पत्तिकर्ता हैं।
947. अष्टादशविधिस्मृत
ॐ अष्टादशविधिस्मृताय नमः।
Om Ashtadashavidhismritaya Namah।
जो मीमांसा दर्शन द्वारा प्रतिपादित अठारह प्रकार की विधियों के समान हैं।
948. अष्टादशलिपिव्यष्टिसमष्टिज्ञानकोविद
ॐ अष्टादशलिपिव्यष्टिसमष्टिज्ञानकोविदाय नमः।
Om Ashtadashalipivyashtisamashtijnanakovidaya Namah।
जो अठारह प्रकार की लिपियों का ज्ञान रखने वाले हैं।
949. एकविंश पुमान्
ॐ एकविंशाय पुंसे नमः।
Om Ekavimshaya Pumse Namah।
जो पञ्च ज्ञानेन्द्रिय आदि से परे इक्कीसवे तत्त्व हैं।
950. एकविंशत्यङ्गुलिपल्लव
ॐ एकविंशत्यङ्गुलिपल्लवाय नमः।
Om Ekavimshatyangulipallavaya Namah।
जो इक्कीस कोमल अंगुलियों एवं एक सूँड वाले हैं।
951. चतुर्विंशतितत्त्वात्मा
ॐ चतुर्विंशतितत्त्वात्मने नमः।
Om Chaturvimshatitattvatmane Namah।
जो चौबीस तत्व वाले हैं।
952. पञ्चविंशाख्यपूरुष
ॐ पञ्चविंशाख्यपूरुषाय नमः।
Om Panchavimshakhyapurushaya Namah।
जो चौबीस तत्वों से परे पच्चीसवें पुरुष हैं।
953. सप्तविंशतितारेश
ॐ सप्तविंशतितारेशाय नमः।
Om Saptavimshatitareshaya Namah।
जो अश्विनी आदि सत्ताईस नक्षत्रों के स्वामी हैं।
954. सप्तविंशतियोगकृत्
ॐ सप्तविंशतियोगकृते नमः।
Om Saptavimshatiyogakrite Namah।
जो सत्ताईस योगों के कर्ता हैं।
955. द्वात्रिंशद्भैरवाधीश
ॐ द्वात्रिंशद्भैरवाधीशाय नमः।
Om Dvatrimshadbhairavadhishaya Namah।
जो बत्तीस प्रकार के भैरवों के स्वामी हैं।
956. चतुस्त्रिंशन्महाह्रद
ॐ चतुस्त्रिंशन्महाह्रदाय नमः।
Om Chatustrimshanmahahradaya Namah।
जो चौंतीस सरोवरों से भी विशाल सरोवर स्वरूप हैं।
957. षट्त्रिंशत्तत्त्वसम्भूति
ॐ षट्त्रिंशत्तत्त्वसम्भूतये नमः।
Om Shattrimshattattvasambhutaye Namah।
जो छत्तीस तत्वों (सिद्धान्तों) के स्वामी हैं।
958. अष्टात्रिंशत्कलातनु
ॐ अष्टात्रिंशत्कलातनवे नमः।
Om Ashtatrimshatkalatanave Namah।
जो अड़तीस कलाओं से युक्त हैं।
959. नमदेकोनपञ्चाशन्मरुद्वर्गनिरर्गल
ॐ नमदेकोनपञ्चाशन्मरुद्वर्गनिरर्गलाय नमः।
Om Namadekonapanchashanmarudvarganirargalaya Namah।
जो उनचास प्रकार के मरुत गणों के विघ्न दूर करने वाले हैं।
960. पञ्चाशदक्षरश्रेणि
ॐ पञ्चाशदक्षरश्रेण्यै नमः।
Om Panchashadaksharashrenyai Namah।
जो संस्कृत वर्णमाला में पचास अक्षर की श्रृंखला हैं।
961. पञ्चाशद्रुद्रविग्रह
ॐ पञ्चाशद्रुद्रविग्रहाय नमः।
Om Panchashadrudravigrahaya Namah।
जो पचास प्रकार के रुद्रों के रूप में स्थित हैं।
962. पञ्चाशद्विष्णुशक्तीश
ॐ पञ्चाशद्विष्णुशक्तीशाय नमः।
Om Panchashadvishnushaktishaya Namah।
जो पचास प्रकार की विष्णु शक्तियों के स्वामी हैं।
963. पञ्चाशन्मातृकालय
ॐ पञ्चाशन्मातृकालयाय नमः।
Om Panchashanmatrikalayaya Namah।
जो पचास प्रकार के मातृका वर्ण के रूप में स्थित हैं।
964. द्विपञ्चाशद्वपुःश्रेणि
ॐ द्विपञ्चाशद्वपुःश्रेण्यै नमः।
Om Dvipanchashadvapuhshrenyai Namah।
जो लिङ्गपुराण कथित बावन प्रकार की शारीरिक संरचना के स्वामी हैं।
965. त्रिषष्ट्यक्षरसंश्रय
ॐ त्रिषष्ट्यक्षरसंश्रयाय नमः।
Om Trishashtyaksharasamshrayaya Namah।
जो तिरसठ अक्षरों के आधार हैं।
966. चतुष्षष्ट्यर्णनिर्णेता
ॐ चतुष्षष्ट्यर्णनिर्णेत्रे नमः।
Om Chatushshashtyarnanirnetre Namah।
जो चौंसठ अक्षरों के निर्णायक हैं।
967. चतुःषष्टिकलानिधि
ॐ चतुःषष्टिकलानिधये नमः।
Om Chatuhshashtikalanidhaye Namah।
जो चौंसठ कलाओं के ज्ञाता हैं।
968. चतुष्षष्टिमहासिद्धयोगिनीवृन्दवन्दित
ॐ चतुष्षष्टिमहासिद्धयोगिनीवृन्दवन्दिताय नमः।
Om Chatushshashtimahasiddhayoginivrindavanditaya Namah।
जो अक्षोभ्य आदि चौंसठ महासिद्धों और उतनी ही योगिनियों द्वारा पूजित हैं।
969. अष्टषष्टिमहातीर्थक्षेत्रभैरवभावन
ॐ अष्टषष्टिमहातीर्थक्षेत्रभैरवभावनाय नमः।
Om Ashtashashtimahatirthakshetrabhairavabhavanaya Namah।
जो शिव के अड़सठ महतीर्थों में स्थित भैरव द्वारा पूजे जाने वाले हैं।
970. चतुर्नवतिमन्त्रात्मा
ॐ चतुर्नवतिमन्त्रात्मने नमः।
Om Chaturnavatimantratmane Namah।
जो चौरानबे मूल मन्त्रों के रूप में स्थित हैं।
971. षण्णवत्यधिकप्रभु
ॐ षण्णवत्यधिकप्रभवे नमः।
Om Shannavatyadhikaprabhave Namah।
जो तन्त्रराज तन्त्र में वर्णित छियानबे से अधिक देवताओं के अधिपति हैं।
972. शतानन्द
ॐ शतानन्दाय नमः।
Om Shatanandaya Namah।
जो मानुष आदि से सेकड़ों गुना प्रसन्न रहने वाले हैं।
973. शतधृति
ॐ शतधृतये नमः।
Om Shatadhritaye Namah।
जो अनन्त ब्रह्माण्ड को धारण करने वाले हैं।
974. शतपत्रायतेक्षण
ॐ शतपत्रायतेक्षणाय नमः।
Om Shatapatrayatekshanaya Namah।
जो कमल के समान विशाल नयनों वाले हैं।
975. शतानीक
ॐ शतानीकाय नमः।
Om Shatanikaya Namah।
जो अनन्त सैनिकों के स्वामी हैं।
976. शतमख
ॐ शतमखाय नमः।
Om Shatamakhaya Namah।
जो सौ यज्ञों का अनुष्ठान करने वाले इन्द्रस्वरूप हैं।
977. शतधारावरायुध
ॐ शतधारावरायुधाय नमः।
Om Shatadharavarayudhaya Namah।
जो सौ धारों से युक्त तीक्ष्ण वज्र धारण करने वाले हैं।
978. सहस्रपत्रनिलय
ॐ सहस्रपत्रनिलयाय नमः।
Om Sahasrapatranilayaya Namah।
जो सहस्रार चक्र में स्थित रहने वाले हैं।
979. सहस्रफणभूषण
ॐ सहस्रफणभूषणाय नमः।
Om Sahasraphanabhushanaya Namah।
जो सहस्र फन वाले नाग से सुशोभित हैं।
980. सहस्रशीर्षा पुरुष
ॐ सहस्रशीर्ष्णे पुरुषाय नमः।
Om Sahasrashirshne Purushaya Namah।
जो असंख्य मस्तक वाले हैं।
981. सहस्राक्ष
ॐ सहस्राक्षाय नमः।
Om Sahasrakshaya Namah।
जो सहस्र नेत्रों वाले हैं।
982. सहस्रपात्
ॐ सहस्रपदे नमः।
Om Sahasrapade Namah।
जो सहस्र पैरों वाले हैं।
983. सहस्रनामसंस्तुत्य
ॐ सहस्रनामसंस्तुत्याय नमः।
Om Sahasranamasamstutyaya Namah।
जिनकी स्तुति सहस्र नामों द्वारा की जाती है।
984. सहस्राक्षबलापह
ॐ सहस्राक्षबलापहाय नमः।
Om Sahasrakshabalapahaya Namah।
जो इन्द्र के बल को भी विध्वस्त कर देने वाले हैं।
985. दशसहस्रफणिभृत्फणिराजकृतासन
ॐ दशसाहस्रफणिभृत्फणिराजकृतासनाय नमः।
Om Dashasahasraphanibhritphanirajakritasanaya Namah।
जो दस हजार फण धारण करने वाले नागराज वासुकि के ऊपर आसीन हैं।
986. अष्टाशीतिसहस्रौघमहर्षिस्तोत्रयन्त्रित
ॐ अष्टाशीतिसहस्राद्यमहर्षिस्तोत्रयन्त्रिताय नमः।
Om Ashtashitisahasradyamaharshistotrayantritaya Namah।
जो अट्ठासी हजार आद्य महर्षियों की स्तुति एवं श्रद्धा के बन्धन में हैं।
987. लक्षाधीशप्रियाधार
ॐ लक्षाधीशप्रियाधाराय नमः।
Om Lakshadhishapriyadharaya Namah।
जो लक्षपतियों के प्रिय आधार हैं।
988. लक्षाधीशमनोमय
ॐ लक्षाधीशमनोमयाय नमः।
Om Lakshadhishamanomayaya Namah।
जो एकाग्रचित्त एवं सत्पुरुष स्वरूप हैं।
989. चतुर्लक्षजपप्रीत
ॐ चतुर्लक्षजपप्रीताय नमः।
Om Chaturlakshajapapritaya Namah।
जो चार लाख मन्त्र जप द्वारा प्रसन्न होने वाले हैं।
990. चतुर्लक्षप्रकाशित
ॐ चतुर्लक्षप्रकाशिताय नमः।
Om Chaturlakshaprakashitaya Namah।
जो अठारह पुराणों में वर्णित चार लाख श्लोकों द्वारा वर्णित रूप वाले हैं।
991. चतुरशीतिलक्षाणां जीवानां देहसंस्थित
ॐ चतुरशीतिलक्षाणां जीवानां देहसंस्थिताय नमः।
Om Chaturashitilakshanam Jivanam Dehasamsthitaya Namah।
जो चौरासी लाख जीवों के शरीर में विराजमान हैं।
992. कोटिसूर्यप्रतीकाश
ॐ कोटिसूर्यप्रतीकाशाय नमः।
Om Kotisuryapratikashaya Namah।
जो करोड़ों सूर्य के समान तेज वाले हैं।
993. कोटिचन्द्रांशुनिर्मल
ॐ कोटिचन्द्रांशुनिर्मलाय नमः।
Om Kotichandramshunirmalaya Namah।
जो करोड़ों चन्द्रमा के समान निर्मल हैं।
994. शिवाभवाध्युष्टकोटिविनायकधुरन्धर
ॐ शिवाभवाध्युष्टकोटिविनायकधुरन्धराय नमः।
Om Shivabhavadhyushtakotivinayakadhurandharaya Namah।
जो करोड़ो विनायकों का नेतृत्व करने वाले हैं।
995. सप्तकोटिमहामन्त्रमन्त्रितावयवद्युति
ॐ सप्तकोटिमहामन्त्रमन्त्रितावयवद्युतये नमः।
Om Saptakotimahamantramantritavayavadyutaye Namah।
जो सात करोड़ मन्त्रों का तेज धारण करने वाले हैं।
996. त्रयस्त्रिंशत्कोटिसुरश्रेणीप्रणतपादुक
ॐ त्रयस्त्रिंशत्कोटिसुरश्रेणीप्रणतपादुकाय नमः।
Om Trayastrimshatkotisurashrenipranatapadukaya Namah।
तैंतीस कोटि देव जिनकी चरण पादुकाओं को प्रणाम करते हैं।
997. अनन्तनाम
ॐ अनन्तनाम्ने नमः।
Om Anantanamne Namah।
जो अनन्त नामों वाले हैं।
998. अनन्तश्री
ॐ अनन्तश्रिये नमः।
Om Anantashriye Namah।
जो अनन्त विद्या एवं सम्पत्ति वाले हैं।
999.ॐ अनन्तदेवतासेव्याय नमः।
Om Anantadevata-sevyaya Namah।
अर्थ: जो अनन्त देवताओं द्वारा सेवित एवं पूजित हैं।
1000. अनन्तानन्तसौख्यद
ॐ अनन्तानन्तसौख्यदाय नमः।
Om Anantanantasaukhyadaya Namah।
जो अनन्त प्रकार की धन-सम्पदा एवं सुख-सौभाग्य प्रदान करने वाले हैं।
