कृष्ण सहस्रनामावली भगवान श्रीकृष्ण के 1000 पावन नामों की दिव्य नाममाला है। श्रीकृष्ण का प्रत्येक नाम उनके किसी सुंदर स्वरूप, गुण, लीला और भक्तों के प्रति उनके प्रेम का स्मरण कराता है। श्रद्धापूर्वक इन नामों का जप और स्मरण मन को श्रीकृष्ण की भक्ति में लगाता है। यहां भगवान श्रीकृष्ण के 1000 नाम सरल हिंदी अर्थ सहित दिए गए हैं, ताकि भक्तजन नामों के साथ उनके दिव्य भाव को भी समझ सकें।
1. ॐ कृष्णाय नमः।
सरल अर्थ: जो सबको अपनी ओर आकर्षित करने वाले और परम आनंदस्वरूप भगवान हैं।
2. ॐ श्रीवल्लभाय नमः।
सरल अर्थ: जो श्री अर्थात लक्ष्मीजी के प्रिय हैं।
3. ॐ शार्ङ्गिणे नमः।
सरल अर्थ: जो शार्ङ्ग नामक दिव्य धनुष धारण करते हैं।
4. ॐ विष्वक्सेनाय नमः।
सरल अर्थ: जो समस्त दिशाओं और सेनाओं के अधिपति हैं।
5. ॐ स्वसिद्धिदाय नमः।
सरल अर्थ: जो अपने भक्तों को सिद्धि और सफलता प्रदान करते हैं।
6. ॐ क्षीरोदधाम्ने नमः।
सरल अर्थ: जिनका दिव्य निवास क्षीरसागर से संबंधित है।
7. ॐ व्यूहेशाय नमः।
सरल अर्थ: जो दिव्य व्यूहों के स्वामी हैं।
8. ॐ शेषशायिने नमः।
सरल अर्थ: जो शेषनाग की शय्या पर शयन करते हैं।
9. ॐ जगन्मयाय नमः।
सरल अर्थ: जो संपूर्ण जगत में व्याप्त हैं।
10. ॐ भक्तिगम्याय नमः।
सरल अर्थ: जिन्हें भक्ति के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।
11. ॐ त्रयीमूर्तये नमः।
सरल अर्थ: जो तीनों वेदों के स्वरूप में प्रतिष्ठित हैं।
12. ॐ भारार्तवसुधास्तुताय नमः।
सरल अर्थ: पृथ्वी का भार दूर करने के लिए जिनकी स्तुति की गई।
13. ॐ देवदेवाय नमः।
सरल अर्थ: जो देवताओं के भी देवता हैं।
14. ॐ दयासिन्धवे नमः।
सरल अर्थ: जो दया और करुणा के अथाह सागर हैं।
15. ॐ देवाय नमः।
सरल अर्थ: जो स्वयं परम दिव्य भगवान हैं।
16. ॐ देवशिखामणये नमः।
सरल अर्थ: जो देवताओं में श्रेष्ठ और मुकुटमणि के समान हैं।
17. ॐ सुखभावाय नमः।
सरल अर्थ: जिनका स्वरूप आनंद और सुखमय है।
18. ॐ सुखाधाराय नमः।
सरल अर्थ: जो समस्त सुखों के आधार हैं।
19. ॐ मुकुन्दाय नमः।
सरल अर्थ: जो मुक्ति प्रदान करने वाले हैं।
20. ॐ मुदिताशयाय नमः।
सरल अर्थ: जिनका अंतःकरण सदा प्रसन्न रहता है।
21. ॐ अविक्रियाय नमः।
सरल अर्थ: जो परिवर्तन से रहित और स्थिर हैं।
22. ॐ क्रियामूर्तये नमः।
सरल अर्थ: जो दिव्य कर्म और क्रिया के स्वरूप हैं।
23. ॐ अध्यात्मस्वस्वरूपवते नमः।
सरल अर्थ: जो अध्यात्म के वास्तविक स्वरूप हैं।
24. ॐ शिष्टाभिलक्ष्याय नमः।
सरल अर्थ: जिन्हें सज्जन और धर्मनिष्ठ लोग अपना लक्ष्य मानते हैं।
25. ॐ भूतात्मने नमः।
सरल अर्थ: जो सभी प्राणियों के भीतर आत्मरूप से स्थित हैं।
26. ॐ धर्मत्राणार्थचेष्टिताय नमः।
सरल अर्थ: जो धर्म की रक्षा के लिए कार्य करते हैं।
27. ॐ अन्तर्यामिणे नमः।
सरल अर्थ: जो सबके हृदय में अंतर्यामी रूप से स्थित हैं।
28. ॐ कालरूपाय नमः।
सरल अर्थ: जो काल के स्वरूप हैं।
29. ॐ कालावयवसाक्षिकाय नमः।
सरल अर्थ: जो काल के प्रत्येक विभाग के साक्षी हैं।
30. ॐ वसुधायासहरणाय नमः।
सरल अर्थ: जो पृथ्वी का भार और कष्ट दूर करने वाले हैं।
31. ॐ नारदप्रेरणोन्मुखाय नमः।
सरल अर्थ: जो नारदजी की प्रेरणा से अवतार-कार्य के लिए तत्पर हुए।
32. ॐ प्रभूष्णवे नमः।
सरल अर्थ: जो अत्यंत शक्तिशाली और समर्थ प्रभु हैं।
33. ॐ नारदोद्गीताय नमः।
सरल अर्थ: जिनका गुणगान नारदजी करते हैं।
34. ॐ लोकरक्षापरायणाय नमः।
सरल अर्थ: जो संसार की रक्षा के लिए सदैव तत्पर हैं।
35. ॐ रौहिणेयकृतानन्दाय नमः।
सरल अर्थ: जो बलरामजी के कारण और उनके साथ आनंद प्रदान करते हैं।
36. ॐ योगज्ञाननियोजकाय नमः।
सरल अर्थ: जो योग और ज्ञान के मार्ग में जीवों को प्रेरित करते हैं।
37. ॐ महागुहान्तर्निक्षिप्ताय नमः।
सरल अर्थ: जो महान रहस्य के भीतर स्थित दिव्य स्वरूप हैं।
38. ॐ पुराणवपुषे नमः।
सरल अर्थ: जिनका स्वरूप सनातन और पुरातन है।
39. ॐ आत्मवते नमः।
सरल अर्थ: जो पूर्ण आत्मस्वरूप और आत्मज्ञान से युक्त हैं।
40. ॐ शूरवंशैकधिये नमः।
सरल अर्थ: जिनकी विशेष महिमा शूरवंश से संबंधित है।
41. ॐ शौरये नमः।
सरल अर्थ: जो शूरवंश में प्रकट हुए और वीरता से युक्त हैं।
42. ॐ कंसशङ्काविषादकृते नमः।
सरल अर्थ: जिनके जन्म से कंस को भय और चिंता हुई।
43. ॐ वसुदेवोल्लसच्छक्तये नमः।
सरल अर्थ: जिनकी दिव्य शक्ति से वसुदेवजी का हृदय आनंदित हुआ।
44. ॐ देवक्यष्टमगर्भगाय नमः।
सरल अर्थ: जो देवकीजी के आठवें गर्भ में प्रकट हुए।
45. ॐ वसुदेवस्तुताय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी स्तुति वसुदेवजी ने की।
46. ॐ श्रीमते नमः।
सरल अर्थ: जो दिव्य श्री और ऐश्वर्य से संपन्न हैं।
47. ॐ देवकीनन्दनाय नमः।
सरल अर्थ: जो माता देवकी के आनंदस्वरूप पुत्र हैं।
48. ॐ हरये नमः।
सरल अर्थ: जो दुख, पाप और बंधनों को हर लेते हैं।
49. ॐ आश्चर्यबालाय नमः।
सरल अर्थ: जो अद्भुत दिव्य बालस्वरूप में प्रकट हुए।
50. ॐ श्रीवत्सलक्ष्मवक्षसे नमः।
सरल अर्थ: जिनके वक्षस्थल पर श्रीवत्स का दिव्य चिह्न है।
51. ॐ चतुर्भुजाय नमः।
सरल अर्थ: जो चार भुजाओं वाले दिव्य स्वरूप में प्रकट हुए।
52. ॐ स्वभावोत्कृष्टसद्भावाय नमः।
सरल अर्थ: जिनका स्वभाव श्रेष्ठ और कल्याणकारी है।
53. ॐ कृष्णाष्टम्यन्तसम्भवाय नमः।
सरल अर्थ: जो कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में प्रकट हुए।
54. ॐ प्राजापत्यर्क्षसम्भूताय नमः।
सरल अर्थ: जो प्राजापत्य नक्षत्र से संबंधित समय में प्रकट हुए।
55. ॐ निशीथसमयोदिताय नमः।
सरल अर्थ: जो आधी रात के समय प्रकट हुए।
56. ॐ शङ्खचक्रगदा नमः।
सरल अर्थ: जो शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले हैं।
57. ॐ पद्मपाणये नमः।
सरल अर्थ: जिनके हाथ में कमल है।
58. ॐ पद्मनिभेक्षणाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके नेत्र कमल के समान सुंदर हैं।
59. ॐ किरीटिने नमः।
सरल अर्थ: जो दिव्य मुकुट धारण करते हैं।
60. ॐ कौस्तुभोरस्काय नमः।
सरल अर्थ: जिनके वक्षस्थल पर कौस्तुभ मणि सुशोभित है।
61. ॐ स्फुरन्मकरकुण्डलाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके कानों में चमकते हुए मकराकृति कुंडल हैं।
62. ॐ पीतवाससे नमः।
सरल अर्थ: जो पीले वस्त्र धारण करते हैं।
63. ॐ घनश्यामाय नमः।
सरल अर्थ: जिनका वर्ण घने मेघ के समान श्याम है।
64. ॐ कुञ्चिताञ्चितकुन्तलाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके घुंघराले केश अत्यंत सुंदर हैं।
65. ॐ सुव्यक्तव्यक्ताभरणाय नमः।
सरल अर्थ: जो स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले सुंदर आभूषणों से अलंकृत हैं।
66. ॐ सूतिकागृहभूषणाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने जन्मस्थान को अपनी उपस्थिति से पवित्र और शोभायमान किया।
67. ॐ कारागारान्धकारघ्नाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने कारागार के अंधकार को अपनी दिव्य ज्योति से दूर किया।
68. ॐ पितृप्राग्जन्मसूचकाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने वसुदेवजी को अपने पूर्वजन्मों का स्मरण कराया।
69. ॐ वसुदेवस्तुताय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी वसुदेवजी ने स्तुति की।
70. ॐ स्तोत्राय नमः।
सरल अर्थ: जो स्वयं स्तुति और स्तुत्य स्वरूप हैं।
71. ॐ तापत्रयनिवारणाय नमः।
सरल अर्थ: जो तीन प्रकार के दुखों का निवारण करते हैं।
72. ॐ निरवद्याय नमः।
सरल अर्थ: जो पूर्णतः निर्दोष और निष्कलंक हैं।
73. ॐ क्रियामूर्तये नमः।
सरल अर्थ: जो दिव्य कर्म के स्वरूप हैं।
74. ॐ न्यायवाक्यनियोजकाय नमः।
सरल अर्थ: जो उचित और न्यायपूर्ण वाणी का मार्ग दिखाते हैं।
75. ॐ अदृष्टचेष्टाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी दिव्य लीलाएँ सामान्य दृष्टि से समझना कठिन हैं।
76. ॐ कूटस्थाय नमः।
सरल अर्थ: जो अचल, स्थिर और अविकार हैं।
77. ॐ धृतलौकिकविग्रहाय नमः।
सरल अर्थ: जो लोककल्याण के लिए मानव रूप धारण करते हैं।
78. ॐ महर्षिमानसोल्लसाय नमः।
सरल अर्थ: जो महर्षियों के मन को आनंदित करते हैं।
79. ॐ महीमङ्गलदायकाय नमः।
सरल अर्थ: जो पृथ्वी को मंगल और कल्याण प्रदान करते हैं।
80. ॐ सन्तोषितसुरव्राताय नमः।
सरल अर्थ: जो देवताओं के समूह को संतुष्ट करने वाले हैं।
81. ॐ साधुचित्तप्रसादकाय नमः।
सरल अर्थ: जो साधुजनों के हृदय को प्रसन्न करते हैं।
82. ॐ जनकोपायनिर्देष्ट्रे नमः।
सरल अर्थ: जो अपने पिता को उचित उपाय और मार्ग बताते हैं।
83. ॐ देवकीनयनोत्सवाय नमः।
सरल अर्थ: जिनका दर्शन माता देवकी के नेत्रों के लिए उत्सव के समान है।
84. ॐ पितृपाणिपरिष्काराय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने अपने पिता के हाथों को पवित्र और गौरवान्वित किया।
85. ॐ मोहितागाररक्षकाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने अपनी योगमाया से मोहित किए गए कारागार की रक्षा की।
86. ॐ स्वशक्त्युद्धाटिताशेषकवाटाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी शक्ति से सभी बंद द्वार खुल गए।
87. ॐ पितृवाहकाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्हें उनके पिता वसुदेवजी अपने साथ लेकर चले।
88. ॐ शेषोरगफणाच्छत्राय नमः।
सरल अर्थ: जिनके ऊपर शेषनाग ने अपने फणों से छत्र बनाया।
89. ॐ शेषोक्ताख्यासहस्रकाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी सहस्र नामों से शेषनाग ने स्तुति की।
90. ॐ यमुनापूरविध्वंसिने नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने यमुना के प्रबल प्रवाह को शांत किया।
91. ॐ स्वभासोद्भासितव्रजाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी दिव्य आभा से व्रज प्रकाशित हुआ।
92. ॐ कृतात्मविद्याविन्यासाय नमः।
सरल अर्थ: जो आत्मविद्या के दिव्य ज्ञान को प्रकट करने वाले हैं।
93. ॐ योगमायाग्रसम्भवाय नमः।
सरल अर्थ: जो योगमाया की दिव्य लीला से प्रकट हुए।
94. ॐ दुर्गानिवेदितोद्भावाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके प्राकट्य का संदेश देवी दुर्गा द्वारा बताया गया।
95. ॐ यशोदातल्पशायकाय नमः।
सरल अर्थ: जो माता यशोदा की शय्या पर जाकर शयन करने वाले बालक बने।
96. ॐ नन्दगोपोत्सवस्फूर्तये नमः।
सरल अर्थ: जिनके जन्म से नंदगोप के घर महान उत्सव हुआ।
97. ॐ व्रजानन्दकरोदयाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके प्राकट्य से पूरे व्रज में आनंद फैल गया।
98. ॐ सुजातजातकर्मश्रिये नमः।
सरल अर्थ: जिनके जन्म के संस्कार अत्यंत शुभ और मंगलमय हैं।
99. ॐ गोपीभद्रोक्तिनिर्वृताय नमः।
सरल अर्थ: गोपियों के मंगलमय वचनों से जो प्रसन्न हुए।
100. ॐ अलीकनिद्रोपगमाय नमः।
सरल अर्थ: जो लीला के लिए निद्रा का अभिनय करते हैं।
101 से 200
101. ॐ पूतनास्तनपीडनाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने पूतना के स्तनपान के माध्यम से उसका अंत किया।
102. ॐ स्तन्यात्तपूतनाप्राणाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने पूतना का जीवन उसके विषैले स्तनपान के साथ ही हर लिया।
103. ॐ पूतनाक्रोशकारकाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने पूतना को पीड़ा से पुकारने के लिए विवश किया।
104. ॐ विन्यस्तरक्षागोधूलये नमः।
सरल अर्थ: जिनकी रक्षा के लिए गोधूलि और गो-संबंधित मंगल भावों का प्रयोग किया गया।
105. ॐ यशोदाकरलालिताय नमः।
सरल अर्थ: जिन्हें माता यशोदा अपने हाथों से प्रेमपूर्वक लाड़ करती हैं।
106. ॐ नन्दाघ्रातशिरोमध्याय नमः।
सरल अर्थ: जिनके मस्तक को नंदबाबा ने प्रेमपूर्वक सूंघकर आशीष दिया।
107. ॐ पूतनासुगतिप्रदाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने पूतना को भी परम गति प्रदान की।
108. ॐ बालाय नमः।
सरल अर्थ: जो दिव्य बालस्वरूप धारण करने वाले हैं।
109. ॐ पर्यङ्कनिद्रालवे नमः।
सरल अर्थ: जो शय्या पर बालक की तरह निद्रा करने वाले हैं।
110. ॐ मुखार्पितपदाङ्गुलये नमः।
सरल अर्थ: जो अपने चरण की अंगुली को मुख में रखने वाली बाललीला करते हैं।
111. ॐ अञ्जनस्निग्धनयनाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके नेत्र अंजन लगे हुए सुंदर और चमकदार हैं।
112. ॐ पर्यायाङ्कुरितस्मिताय नमः।
सरल अर्थ: जिनके मुख पर बार-बार सुंदर मुस्कान खिलती है।
113. ॐ लीलाक्षाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी दृष्टि भी दिव्य लीला से पूर्ण है।
114. ॐ तरलालोकाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी चंचल और कोमल दृष्टि अत्यंत मनोहर है।
115. ॐ शकटासुरभञ्जनाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने शकटासुर का विनाश किया।
116. ॐ द्विजोदितस्वस्त्ययनाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके लिए ब्राह्मणों ने मंगलमय स्वस्तिवाचन किया।
117. ॐ मन्त्रपूतजलाप्लुताय नमः।
सरल अर्थ: जो मंत्रों से पवित्र किए गए जल से स्नान कराए गए।
118. ॐ यशोदोत्सङ्गपर्यङ्काय नमः।
सरल अर्थ: जो यशोदा की गोद और शय्या में आनंदपूर्वक रहते हैं।
119. ॐ यशोदामुखवीक्षकाय नमः।
सरल अर्थ: जो माता यशोदा के मुख की ओर प्रेम से देखते हैं।
120. ॐ यशोदास्तन्यमुदिताय नमः।
सरल अर्थ: जो यशोदा के दूध से प्रसन्न होते हैं।
121. ॐ तृणावर्तादिदुस्सहाय नमः।
सरल अर्थ: जो तृणावर्त जैसे भयंकर असुरों के लिए असहनीय शक्ति वाले हैं।
122. ॐ तृणावर्तासुरध्वंसिने नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने तृणावर्त असुर का विनाश किया।
123. ॐ मातृविस्मयकारकाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने अपनी बाल लीलाओं से माता को आश्चर्यचकित किया।
124. ॐ प्रशस्तनामकरणाय नमः।
सरल अर्थ: जिनका शुभ और मंगलमय नामकरण संस्कार हुआ।
125. ॐ जानुचङ्क्रमणोत्सुकाय नमः।
सरल अर्थ: जो घुटनों के बल चलने के लिए उत्सुक बालक हैं।
126. ॐ व्यालम्बिचूलिकारत्नाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी लटों में लटकता हुआ सुंदर अलंकार शोभित है।
127. ॐ घोषगोपप्रहर्षणाय नमः।
सरल अर्थ: जो गोकुल के गोपों को अत्यंत प्रसन्न करते हैं।
128. ॐ स्वमुखप्रतिबिम्बार्थिने नमः।
सरल अर्थ: जो अपने ही मुख के प्रतिबिंब को देखकर आनंदित होते हैं।
129. ॐ ग्रीवाव्याघ्रनखोज्ज्वलाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके गले में व्याघ्रनख का सुंदर आभूषण चमकता है।
130. ॐ पङ्कानुलेपरुचिराय नमः।
सरल अर्थ: जो मिट्टी के लेप से भी बालरूप में सुंदर दिखाई देते हैं।
131. ॐ मांसलोरुकटीतटाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी जंघाएँ और कटि बालरूप में पुष्ट और सुंदर हैं।
132. ॐ घृष्टजानुकरद्वन्द्वाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके घुटने और हाथ रेंगने के कारण धूल से स्पर्शित होते हैं।
133. ॐ प्रतिबिम्बानुकारकृते नमः।
सरल अर्थ: जो अपने प्रतिबिंब की गतिविधियों की नकल करने वाली बाललीला करते हैं।
134. ॐ अव्यक्तवर्णवाग्वृत्तये नमः।
सरल अर्थ: जिनकी बालवाणी अभी स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं हुई।
135. ॐ चङ्क्रमाय नमः।
सरल अर्थ: जो धीरे-धीरे चलने वाली बाललीला करते हैं।
136. ॐ अनुरूपवयस्याढ्याय नमः।
सरल अर्थ: जो अपनी आयु के अनुरूप बालसखाओं से घिरे रहते हैं।
137. ॐ चारुकौमारचापलाय नमः।
सरल अर्थ: जो बाल्यावस्था की सुंदर और चंचल लीलाएँ करते हैं।
138. ॐ वत्सपुच्छसमाकृष्टाय नमः।
सरल अर्थ: जो बछड़े की पूंछ पकड़कर खिंचने वाली बाललीला करते हैं।
139. ॐ वत्सपुच्छविकर्षणाय नमः।
सरल अर्थ: जो बछड़े की पूंछ खींचकर क्रीड़ा करते हैं।
140. ॐ विस्मारितान्यव्यापाराय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी बाललीला में सब अपने अन्य कार्य भूल जाते हैं।
141. ॐ गोपगोपीमुदावहाय नमः।
सरल अर्थ: जो गोपों और गोपियों को आनंद प्रदान करते हैं।
142. ॐ अकालवत्सनिर्मोक्त्रे नमः।
सरल अर्थ: जो समय से पहले बछड़ों को मुक्त करने वाली लीला करते हैं।
143. ॐ वज्रव्याक्रोशसुस्मिताय नमः।
सरल अर्थ: जो डांट या पुकार सुनकर भी सुंदर मुस्कान बिखेरते हैं।
144. ॐ नवनीतमहाचोराय नमः।
सरल अर्थ: जो माखन चुराने वाली मधुर बाललीला करते हैं।
145. ॐ दारकाहारदायकाय नमः।
सरल अर्थ: जो बालसखाओं को भोजन और आनंद प्रदान करते हैं।
146. ॐ पीठोलूखलसोपानाय नमः।
सरल अर्थ: जो ऊंचे स्थान से माखन लेने के लिए ओखली को सीढ़ी की तरह उपयोग करते हैं।
147. ॐ क्षीरभाण्डविभेदनाय नमः।
सरल अर्थ: जो दूध-दही के बर्तनों को तोड़ने वाली बाललीला करते हैं।
148. ॐ शिक्यभाण्डसमाकर्षिणे नमः।
सरल अर्थ: जो लटकते हुए बर्तनों को अपनी ओर खींच लेते हैं।
149. ॐ ध्वान्तागारप्रवेशकृते नमः।
सरल अर्थ: जो अंधेरे घरों में प्रवेश कर माखन की लीला करते हैं।
150. ॐ भूषारत्नप्रकाशाढ्याय नमः।
सरल अर्थ: जिनके आभूषणों की चमक से अंधकार भी प्रकाशित हो जाता है।
151. ॐ गोप्युपालम्भभर्त्सिताय नमः।
सरल अर्थ: जिन्हें गोपियाँ माखन चोरी के लिए उलाहना देती हैं।
152. ॐ परागधूसराकाराय नमः।
सरल अर्थ: जिनका शरीर धूल और पराग से धूसर हो जाता है।
153. ॐ मृद्भक्षणकृतेक्षणाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी मिट्टी खाने की बाललीला को माता ने देखा।
154. ॐ बालोक्तमृत्कथारम्भाय नमः।
सरल अर्थ: जो मिट्टी खाने की बात पर बालसुलभ बातें करते हैं।
155. ॐ मित्रान्तर्गूढविग्रहाय नमः।
सरल अर्थ: जो अपने मित्रों के बीच बाललीला में अपना रहस्य छिपाए रखते हैं।
156. ॐ कृतसन्त्रासलोलाक्षाय नमः।
सरल अर्थ: जो भय का अभिनय करते हुए चंचल नेत्रों से देखते हैं।
157. ॐ जननीप्रत्ययावहाय नमः।
सरल अर्थ: जो अपनी माता को अपनी बात पर विश्वास दिलाने वाली लीला करते हैं।
158. ॐ मातृदृश्यात्तवदनाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने माता के देखने पर अपना मुख दिखाया।
159. ॐ वक्त्रलक्ष्यचराचराय नमः।
सरल अर्थ: जिनके मुख में माता को संपूर्ण चर-अचर जगत दिखाई दिया।
160. ॐ यशोदालालितस्वात्मने नमः।
सरल अर्थ: जो माता यशोदा के प्रेम और लाड़ से पले।
161. ॐ स्वयं स्वाच्छन्द्यमोहनाय नमः।
सरल अर्थ: जो अपनी सहज और स्वतंत्र बाललीला से सबको मोहित करते हैं।
162. ॐ सवित्रीस्नेहसंश्लिष्टाय नमः।
सरल अर्थ: जो माता के स्नेह से प्रेमपूर्वक जुड़े हुए हैं।
163. ॐ सवित्रीस्तनलोपाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी बाललीला में माता के स्तनपान से संबंधित भाव प्रकट होता है।
164. ॐ नवनीतार्थनाप्रह्वाय नमः।
सरल अर्थ: जो माखन मांगने के लिए प्रेमपूर्वक विनम्र होते हैं।
165. ॐ नवनीतमहाशनाय नमः।
सरल अर्थ: जो माखन को बड़े प्रेम से खाने वाले हैं।
166. ॐ मृषाकोपप्रकम्पोष्ठाय नमः।
सरल अर्थ: जो झूठे क्रोध का अभिनय करते हुए अपने होंठ कंपाते हैं।
167. ॐ गोष्ठाङ्गणविलोकनाय नमः।
सरल अर्थ: जो गोष्ठ के आंगन में चारों ओर देखते हुए बाललीला करते हैं।
168. ॐ दधिमन्थघटीभेत्त्रे नमः।
सरल अर्थ: जो दही मथने के पात्र को तोड़ने वाली लीला करते हैं।
169. ॐ किङ्किणीक्वाणसूचिताय नमः।
सरल अर्थ: जिनके आने का संकेत कमर की घंटियों की मधुर ध्वनि से मिलता है।
170. ॐ हैयङ्गवीनासिकाय नमः।
सरल अर्थ: जो माखन और घी की सुगंध से आकर्षित होते हैं।
171. ॐ मृषाश्रवे नमः।
सरल अर्थ: जो बाललीला में झूठी शिकायत या बात सुनने वाले हैं।
172. ॐ चौर्यशङ्किताय नमः।
सरल अर्थ: जिन पर माखन चोरी का संदेह किया जाता है।
173. ॐ जननीश्रमविज्ञात्रे नमः।
सरल अर्थ: जो अपनी माता के परिश्रम को समझने वाले हैं।
174. ॐ दामबन्धनियन्त्रिताय नमः।
सरल अर्थ: जो माता यशोदा द्वारा रस्सी से बांधे गए।
175. ॐ दामाकल्पाय नमः।
सरल अर्थ: जो दाम अर्थात रस्सी से बंधने वाली दिव्य लीला के आधार हैं।
176. ॐ चलापाङ्गाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी चंचल और मनोहर दृष्टि है।
177. ॐ गाढोलूखलबन्धनाय नमः।
सरल अर्थ: जो ओखली से मजबूती से बांधे गए।
178. ॐ आकृष्टोलूखलाय नमः।
सरल अर्थ: जो बंधी हुई ओखली को खींचते हुए चले।
179. ॐ अनन्ताय नमः।
सरल अर्थ: जिनका न कोई अंत है, न सीमा।
180. ॐ कुबेरसुतशापविदे नमः।
सरल अर्थ: जो कुबेर के पुत्रों को मिले शाप और उसकी मुक्ति की कथा से संबंधित हैं।
181. ॐ नारदोक्तिपरामर्शिने नमः।
सरल अर्थ: जो नारदजी के वचनों के अनुसार लीला करते हैं।
182. ॐ यमलार्जुनभञ्जनाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने यमल-अर्जुन वृक्षों का उद्धार किया।
183. ॐ धनदात्मजसङ्घुष्टाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी स्तुति धनद अर्थात कुबेर के पुत्रों ने की।
184. ॐ नन्दमोचितबन्धनाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके बंधन को नंदबाबा ने खोल दिया।
185. ॐ बालकोद्गीतनिरताय नमः।
सरल अर्थ: जो बालकों के गीत और क्रीड़ा में आनंद लेते हैं।
186. ॐ बाहुक्षेपोदितप्रियाय नमः।
सरल अर्थ: जो अपनी भुजाओं की चंचल गतिविधियों से प्रिय लगते हैं।
187. ॐ आत्मज्ञाय नमः।
सरल अर्थ: जो अपने वास्तविक स्वरूप को पूर्णतः जानने वाले हैं।
188. ॐ मित्रवश्याय नमः।
सरल अर्थ: जो प्रेम के कारण अपने मित्रों के वश में हो जाते हैं।
189. ॐ गोपीगीतगुणोदयाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके गुण गोपियों के गीतों में प्रकट होते हैं।
190. ॐ प्रस्थानशकटारूढाय नमः।
सरल अर्थ: जो प्रस्थान के समय शकट पर आरूढ़ हुए।
191. ॐ वृन्दावनकृतालयाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने वृंदावन को अपना निवास बनाया।
192. ॐ गोवत्सपालनैकाग्राय नमः।
सरल अर्थ: जो बछड़ों की देखभाल में पूरी तरह लगे रहते हैं।
193. ॐ नानाक्रीडापरिच्छदाय नमः।
सरल अर्थ: जो अनेक प्रकार की बालक्रीड़ाओं से युक्त हैं।
194. ॐ क्षेपणीक्षेपणप्रीताय नमः।
सरल अर्थ: जिन्हें खेल में वस्तु फेंकने की क्रीड़ा प्रिय है।
195. ॐ वेणुवाद्यविशारदाय नमः।
सरल अर्थ: जो बांसुरी बजाने में अत्यंत कुशल हैं।
196. ॐ वृषवत्सानुकरणाय नमः।
सरल अर्थ: जो बछड़ों और पशुओं की चाल-ढाल की नकल करते हैं।
197. ॐ वृषध्वानविडम्बनाय नमः।
सरल अर्थ: जो पशुओं की ध्वनियों की नकल करके बाललीला करते हैं।
198. ॐ नियुद्धलीलासंहृष्टाय नमः।
सरल अर्थ: जो मित्रों के साथ कुश्ती की क्रीड़ा में आनंदित होते हैं।
199. ॐ कूजानुकृतकोकिलाय नमः।
सरल अर्थ: जो कोयल की मधुर आवाज की नकल करते हैं।
200. ॐ उपात्तहंसगमनाय नमः।
सरल अर्थ: जो हंस की सुंदर चाल का अनुकरण करते हैं।
201 से 300
201. ॐ सर्वजन्तुरुतानुकृते नमः।
सरल अर्थ: जो अनेक जीव-जंतुओं की आवाजों की नकल करने वाली लीला करते हैं।
202. ॐ भृङ्गानुकारिणे नमः।
सरल अर्थ: जो भौंरे की ध्वनि और गति की नकल करते हैं।
203. ॐ दध्यन्नचोराय नमः।
सरल अर्थ: जो दही और अन्न चुराने वाली बाललीला करते हैं।
204. ॐ वत्सपुरस्सराय नमः।
सरल अर्थ: जो बछड़ों को आगे रखते हुए चलते हैं।
205. ॐ बलिने नमः।
सरल अर्थ: जो अत्यंत शक्तिशाली हैं।
206. ॐ बकासुरग्राहिणे नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने बकासुर का सामना किया और उसे पकड़ लिया।
207. ॐ बकतालुप्रदाहकाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने बकासुर के तालु को अपनी शक्ति से जला दिया।
208. ॐ भीतगोपार्भकाहूताय नमः।
सरल अर्थ: जिन्हें भयभीत गोपबालकों ने सहायता के लिए पुकारा।
209. ॐ बकचञ्चुविदारणाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने बकासुर की चोंच को विदीर्ण कर दिया।
210. ॐ बकासुरारये नमः।
सरल अर्थ: जो बकासुर के शत्रु और उसके संहारक हैं।
211. ॐ गोपालाय नमः।
सरल अर्थ: जो गौ और गोपों की रक्षा करने वाले हैं।
212. ॐ बालाय नमः।
सरल अर्थ: जो सुंदर बालस्वरूप धारण करते हैं।
213. ॐ बालाद्भुतावहाय नमः।
सरल अर्थ: जो बालरूप में भी अद्भुत लीलाएँ करते हैं।
214. ॐ बलभद्रसमाश्लिष्टाय नमः।
सरल अर्थ: जो बलभद्रजी के साथ प्रेमपूर्वक रहते हैं।
215. ॐ कृतक्रीडानिलायनाय नमः।
सरल अर्थ: जो खेल के स्थान को अपना आनंदमय निवास बनाते हैं।
216. ॐ क्रीडासेतुविधानज्ञाय नमः।
सरल अर्थ: जो खेल के लिए सेतु और अन्य साधन बनाने की कला जानते हैं।
217. ॐ प्लवङ्गोत्प्लवनाय नमः।
सरल अर्थ: जो कूदने-फांदने की बालक्रीड़ा करते हैं।
218. ॐ अद्भुताय नमः।
सरल अर्थ: जो स्वयं अद्भुत और आश्चर्यमय हैं।
219. ॐ कन्दुकक्रीडनाय नमः।
सरल अर्थ: जो गेंद से खेलने वाली क्रीड़ा करते हैं।
220. ॐ लुप्तनन्दादिभववेदनाय नमः।
सरल अर्थ: जो नंद आदि की स्थिति और भावों को जानने वाले हैं।
221. ॐ सुमनोऽलङ्कृतशिरसे नमः।
सरल अर्थ: जिनके मस्तक को सुंदर पुष्पों से सजाया गया है।
222. ॐ स्वादुस्निग्धान्नशिक्यभृते नमः।
सरल अर्थ: जो स्वादिष्ट और स्नेहपूर्वक दिए गए भोजन की पोटली धारण करते हैं।
223. ॐ गुञ्जाप्रालम्बनच्छन्नाय नमः।
सरल अर्थ: जो गुंजा की मालाओं से अलंकृत रहते हैं।
224. ॐ पिञ्छैरलकवेषकृते नमः।
सरल अर्थ: जो मोरपंख से अपने केशों को सजाते हैं।
225. ॐ वन्याशनप्रियाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्हें वन में उपलब्ध सरल भोजन प्रिय है।
226. ॐ शृङ्गरवाकारितवत्सकाय नमः।
सरल अर्थ: जो सींग की ध्वनि से बछड़ों को बुलाते हैं।
227. ॐ मनोज्ञपल्लवोत्तंसपुष्पस्वेच्छात्तषट्पदाय नमः।
सरल अर्थ: जो मनोहर पत्तों और फूलों से सजते हैं तथा जिनसे भौंरे भी आकर्षित होते हैं।
228. ॐ मञ्जुशिञ्जितमञ्जीरचरणाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके चरणों में मधुर ध्वनि करने वाली पायल सुशोभित है।
229. ॐ करकङ्कणाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके हाथों में सुंदर कंगन हैं।
230. ॐ अन्योन्यशासनाय नमः।
सरल अर्थ: जो सखाओं के साथ प्रेमपूर्वक एक-दूसरे को निर्देश देते हैं।
231. ॐ क्रीडापटवे नमः।
सरल अर्थ: जो खेल और क्रीड़ा में अत्यंत कुशल हैं।
232. ॐ परमकैतवाय नमः।
सरल अर्थ: जो अपनी मधुर लीलाओं में अद्भुत चतुराई दिखाते हैं।
233. ॐ प्रतिध्वानप्रमुदिताय नमः।
सरल अर्थ: जो प्रतिध्वनि सुनकर प्रसन्न होते हैं।
234. ॐ शाखाचतुरचङ्क्रमाय नमः।
सरल अर्थ: जो वृक्षों की शाखाओं के बीच कुशलतापूर्वक विचरण करते हैं।
235. ॐ अघदानवसंहर्त्रे नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने अघासुर का संहार किया।
236. ॐ वज्रविघ्नविनाशनाय नमः।
सरल अर्थ: जो वज्र के समान शक्तिशाली बाधाओं का नाश करते हैं।
237. ॐ व्रजसञ्जीवनाय नमः।
सरल अर्थ: जो व्रजवासियों के जीवन और आनंद के आधार हैं।
238. ॐ श्रेयोनिधये नमः।
सरल अर्थ: जो परम कल्याण के भंडार हैं।
239. ॐ दानवमुक्तिदाय नमः।
सरल अर्थ: जो दैत्यों को भी मुक्ति प्रदान करने वाले हैं।
240. ॐ कालिन्दीपुलिनासीनाय नमः।
सरल अर्थ: जो यमुना के तट पर बैठकर लीला करते हैं।
241. ॐ सहभुक्तव्रजार्भकाय नमः।
सरल अर्थ: जो व्रज के बालकों के साथ मिलकर भोजन करते हैं।
242. ॐ कक्षाजठरविन्यस्तवेणवे नमः।
सरल अर्थ: जो बगल में बांसुरी रखकर विचरण करते हैं।
243. ॐ वल्लवचेष्टिताय नमः।
सरल अर्थ: जो गोपबालक के समान सुंदर लीलाएँ करते हैं।
244. ॐ भुजसन्ध्यन्तरन्यस्तशृङ्गवेत्राय नमः।
सरल अर्थ: जो भुजा के बीच सींग और छड़ी धारण करते हैं।
245. ॐ शुचिस्मिताय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी मुस्कान निर्मल और पवित्र है।
246. ॐ वामपाणिस्थदध्यन्नकबलाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके बाएं हाथ में दही-चावल का निवाला रहता है।
247. ॐ कलभाषणाय नमः।
सरल अर्थ: जो मधुर और कोमल वाणी बोलते हैं।
248. ॐ अङ्गुल्यन्तरविन्यस्तफलाय नमः।
सरल अर्थ: जो उंगलियों के बीच फल धारण करते हैं।
249. ॐ परमपावनाय नमः।
सरल अर्थ: जो परम पवित्र और पवित्र करने वाले हैं।
250. ॐ अदृश्यतर्णकान्वेषिणे नमः।
सरल अर्थ: जो अदृश्य हुए बछड़ों की खोज करते हैं।
251. ॐ वल्लवार्भकभीतिघ्ने नमः।
सरल अर्थ: जो गोपबालकों का भय दूर करते हैं।
252. ॐ अदृष्टवत्सपव्राताय नमः।
सरल अर्थ: जो अदृश्य हुए बछड़ों के समूह को खोजने वाले हैं।
253. ॐ ब्रह्मविज्ञातवैभवाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी महिमा को ब्रह्माजी ने भी जाना।
254. ॐ गोवत्सवत्सपान्वेषिणे नमः।
सरल अर्थ: जो गायों, बछड़ों और गोपबालकों की खोज करते हैं।
255. ॐ विराट्पुरुषविग्रहाय नमः।
सरल अर्थ: जो विराट पुरुष के दिव्य स्वरूप वाले हैं।
256. ॐ स्वसङ्कल्पानुरूपार्थवत्सवत्सपरूपधृते नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने अपने संकल्प के अनुसार बछड़ों और गोपबालकों के रूप धारण किए।
257. ॐ यथावत्सक्रियारूपाय नमः।
सरल अर्थ: जो प्रत्येक बछड़े के अनुरूप उसकी क्रियाओं को धारण करने वाले हैं।
258. ॐ यथास्थाननिवेशनाय नमः।
सरल अर्थ: जो सभी को उनके उचित स्थान पर स्थापित करते हैं।
259. ॐ यथाव्रजार्भकाकाराय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने व्रज के बालकों के समान ही रूप धारण किया।
260. ॐ गोगोपीस्तन्यपाय नमः।
सरल अर्थ: जो गायों और गोपियों के मातृस्नेह को स्वीकार करते हैं।
261. ॐ सुखिने नमः।
सरल अर्थ: जो स्वयं परम सुखस्वरूप हैं।
262. ॐ चिराद्बलोहिताय नमः।
सरल अर्थ: जो दीर्घकाल से स्थित दिव्य शक्ति और तेज से युक्त हैं।
263. ॐ दान्ताय नमः।
सरल अर्थ: जो इंद्रियों को वश में रखने वाले हैं।
264. ॐ ब्रह्मविज्ञातवैभवाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी दिव्य महिमा को ब्रह्माजी ने जाना।
265. ॐ विचित्रशक्तये नमः।
सरल अर्थ: जिनकी शक्तियाँ अद्भुत और विविध हैं।
266. ॐ व्यालीनसृष्टगोवत्सवत्सपाय नमः।
सरल अर्थ: जो अपनी दिव्य लीला से सृष्ट किए गए बछड़ों और गोपबालकों के रूप में स्थित हुए।
267. ॐ धातृस्तुताय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी स्तुति धाता अर्थात ब्रह्माजी ने की।
268. ॐ सर्वार्थसाधकाय नमः।
सरल अर्थ: जो सभी शुभ उद्देश्यों को पूर्ण करने वाले हैं।
269. ॐ ब्रह्मणे नमः।
सरल अर्थ: जो परम ब्रह्मस्वरूप हैं।
270. ॐ ब्रह्ममयाय नमः।
सरल अर्थ: जो पूर्णतः ब्रह्मस्वरूप हैं।
271. ॐ अव्यक्ताय नमः।
सरल अर्थ: जो इंद्रियों से परे और अव्यक्त स्वरूप हैं।
272. ॐ तेजोरूपाय नमः।
सरल अर्थ: जो दिव्य प्रकाश और तेज के स्वरूप हैं।
273. ॐ सुखात्मकाय नमः।
सरल अर्थ: जिनका वास्तविक स्वरूप परम आनंद है।
274. ॐ निरुक्ताय नमः।
सरल अर्थ: जिनके स्वरूप और नाम का शास्त्रीय विवेचन किया जा सकता है।
275. ॐ व्याकृतये नमः।
सरल अर्थ: जो प्रकट और व्यवस्थित रूप में जगत के आधार हैं।
276. ॐ व्यक्ताय नमः।
सरल अर्थ: जो संसार में प्रकट रूप से विद्यमान हैं।
277. ॐ निरालम्बनभावनाय नमः।
सरल अर्थ: जो किसी बाहरी आधार पर निर्भर नहीं हैं और जिनका ध्यान निरालंब भाव से किया जाता है।
278. ॐ प्रभविष्णवे नमः।
सरल अर्थ: जो सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापक प्रभु हैं।
279. ॐ अतन्त्रीकाय नमः।
सरल अर्थ: जो किसी बाहरी नियंत्रण या बंधन से रहित हैं।
280. ॐ देवपक्षार्थरूपधृते नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने देवताओं के पक्ष और धर्म की रक्षा के लिए रूप धारण किया।
281. ॐ अकामाय नमः।
सरल अर्थ: जो किसी सांसारिक इच्छा से रहित हैं।
282. ॐ सर्ववेदादये नमः।
सरल अर्थ: जो समस्त वेदों के मूल और आदि हैं।
283. ॐ अणीयसे नमः।
सरल अर्थ: जो अत्यंत सूक्ष्म से भी सूक्ष्म हैं।
284. ॐ स्थूलरूपवते नमः।
सरल अर्थ: जो विराट और स्थूल रूप में भी प्रकट हो सकते हैं।
285. ॐ व्यापिने नमः।
सरल अर्थ: जो सब जगह व्याप्त हैं।
286. ॐ व्याप्याय नमः।
सरल अर्थ: जिनसे यह संपूर्ण जगत व्याप्त है।
287. ॐ कृपाकर्त्रे नमः।
सरल अर्थ: जो अपने भक्तों पर कृपा करने वाले हैं।
288. ॐ विचित्राचारसम्मताय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी विविध दिव्य लीलाएँ और आचरण अद्भुत हैं।
289. ॐ छन्दोमयाय नमः।
सरल अर्थ: जो वेदों के छंदों में व्याप्त हैं।
290. ॐ प्रधानात्मने नमः।
सरल अर्थ: जो प्रकृति के मूल आधारस्वरूप हैं।
291. ॐ मूर्तामूर्तद्वयाकृतये नमः।
सरल अर्थ: जो मूर्त और अमूर्त दोनों रूपों में विद्यमान हैं।
292. ॐ अनेकमूर्तये नमः।
सरल अर्थ: जो अनेक दिव्य रूप धारण करने वाले हैं।
293. ॐ अक्रोधाय नमः।
सरल अर्थ: जो क्रोध से रहित हैं।
294. ॐ परस्मै नमः।
सरल अर्थ: जो सर्वोच्च परम सत्ता हैं।
295. ॐ प्रकृतये नमः।
सरल अर्थ: जो प्रकृति के मूल कारण और आधार हैं।
296. ॐ अक्रमाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके लिए कोई क्रम या सीमा बंधनकारी नहीं है।
297. ॐ सकलावरणोपेताय नमः।
सरल अर्थ: जो समस्त आवरणों और शक्तियों से युक्त होकर भी उनसे परे हैं।
298. ॐ सर्वदेवाय नमः।
सरल अर्थ: जो सभी देवताओं के मूल स्वरूप हैं।
299. ॐ महेश्वराय नमः।
सरल अर्थ: जो महान ईश्वर और परम प्रभु हैं।
300. ॐ महाप्रभावनाय नमः।
सरल अर्थ: जिनका प्रभाव और तेज अत्यंत महान है।
301 से 400
301. ॐ पूर्ववत्सवत्सपदर्शकाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने पहले जैसे बछड़ों और गोपबालकों का दर्शन कराया।
302. ॐ कृष्णयादवगोपालाय नमः।
सरल अर्थ: जो कृष्ण, यादव और गोपाल—इन स्वरूपों से प्रसिद्ध हैं।
303. ॐ गोपालोकनहर्षिताय नमः।
सरल अर्थ: जो गोपालों को देखकर प्रसन्न होते हैं।
304. ॐ स्मितेक्षाहर्षितब्रह्मणे नमः।
सरल अर्थ: जिनकी मुस्कान और दृष्टि से ब्रह्माजी आनंदित हुए।
305. ॐ भक्तवत्सलवाक्प्रियाय नमः।
सरल अर्थ: जो भक्तों से प्रेम करते हैं और उनकी प्रेमपूर्ण वाणी प्रिय मानते हैं।
306. ॐ ब्रह्मानन्दाश्रुधौताङ्घ्रये नमः।
सरल अर्थ: जिनके चरण ब्रह्माजी के आनंदाश्रुओं से धुल गए।
307. ॐ लीलावैचित्र्यकोविदाय नमः।
सरल अर्थ: जो विविध और अद्भुत दिव्य लीलाओं में कुशल हैं।
308. ॐ बलभद्रैकहृदयाय नमः।
सरल अर्थ: जिनका हृदय बलभद्रजी के साथ प्रेम से जुड़ा है।
309. ॐ नामाकारितगोकुलाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके नाम-स्मरण और पुकार से गोकुल आनंदित होता है।
310. ॐ गोपालबालकाय नमः।
सरल अर्थ: जो गोपाल बालक के रूप में लीला करते हैं।
311. ॐ भव्याय नमः।
सरल अर्थ: जो अत्यंत मंगलमय, दिव्य और कल्याणकारी हैं।
312. ॐ रज्जुयज्ञेपवीतवते नमः।
सरल अर्थ: जो रस्सी को यज्ञोपवीत के समान धारण करने वाली बाललीला करते हैं।
313. ॐ वृक्षच्छायाहताशान्तये नमः।
सरल अर्थ: जो वृक्षों की छाया में अपनी थकान और तपन दूर करते हैं।
314. ॐ गोपोत्सङ्गोपबर्हिणाय नमः।
सरल अर्थ: जो गोपों की गोद को तकिए के समान मानकर विश्राम करते हैं।
315. ॐ गोपसंवाहितपदाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके चरण गोपबालक प्रेमपूर्वक दबाते हैं।
316. ॐ गोपव्यजनवीजिताय नमः।
सरल अर्थ: जिन पर गोपबालक पंखे से हवा करते हैं।
317. ॐ गोपगानसुखोन्निद्राय नमः।
सरल अर्थ: जो गोपों के मधुर गीत सुनकर सुखपूर्वक निद्रा करते हैं।
318. ॐ श्रीदामार्जितसौहृदाय नमः।
सरल अर्थ: जो श्रीदामा के साथ गहरी मित्रता रखने वाले हैं।
319. ॐ सुनन्दसुहृदे नमः।
सरल अर्थ: जो सुनंद के प्रिय मित्र हैं।
320. ॐ एकात्मने नमः।
सरल अर्थ: जो सबके भीतर एक ही आत्मस्वरूप से स्थित हैं।
321. ॐ सुबलप्राणरञ्जनाय नमः।
सरल अर्थ: जो सुबल के प्राणों को आनंदित करते हैं।
322. ॐ तालीवनकृतक्रीडाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने तालीवन में क्रीड़ा की।
323. ॐ बलपातितधेनुकाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी लीला में बलरामजी ने धेनुकासुर का वध किया।
324. ॐ गोपीसौभाग्यसम्भाव्याय नमः।
सरल अर्थ: जो गोपियों के सौभाग्य और प्रेम के परम आश्रय हैं।
325. ॐ गोधूलिच्छुरितालकाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके केश गोधूलि से सुंदर दिखाई देते हैं।
326. ॐ गोपीविरहसन्तप्ताय नमः।
सरल अर्थ: जो गोपियों के विरह-भाव से जुड़े प्रेम को अनुभव करते हैं।
327. ॐ गोपिकाकृतमज्जनाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके साथ गोपिकाएँ प्रेमपूर्ण जलक्रीड़ा करती हैं।
328. ॐ प्रलम्बबाहवे नमः।
सरल अर्थ: जिनकी भुजाएँ लंबी और शक्तिशाली हैं।
329. ॐ उत्फुल्लपुण्डरीकावतंसकाय नमः।
सरल अर्थ: जो खिले हुए कमल जैसे सुंदर पुष्पों से अलंकृत हैं।
330. ॐ विलासललितस्मेरगर्भलीलावलोकनाय नमः।
सरल अर्थ: जो मधुर मुस्कान और चंचल दृष्टि से मनोहर लीलाएँ करते हैं।
331. ॐ स्रग्भूषणानुलेपाढ्याय नमः।
सरल अर्थ: जो मालाओं, आभूषणों और चंदन आदि से अलंकृत हैं।
332. ॐ जनन्युपहृतान्नभुजे नमः।
सरल अर्थ: जो माता द्वारा प्रेम से दिए गए भोजन को ग्रहण करते हैं।
333. ॐ वरशय्याशयाय नमः।
सरल अर्थ: जो सुंदर और श्रेष्ठ शय्या पर विश्राम करते हैं।
334. ॐ राधाप्रेमसल्लापनिर्वृताय नमः।
सरल अर्थ: जो राधाजी के प्रेमपूर्ण संवाद से आनंदित होते हैं।
335. ॐ यमुनातटसञ्चारिणे नमः।
सरल अर्थ: जो यमुना के तट पर विचरण करते हैं।
336. ॐ विषार्तव्रजहर्षदाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने विष के प्रभाव से पीड़ित व्रजवासियों को आनंद और राहत दी।
337. ॐ कालियक्रोधजनकाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने कालिय नाग के अहंकार और क्रोध को प्रकट कराया।
338. ॐ वृद्धाहिकुलवेष्टिताय नमः।
सरल अर्थ: जो विशाल सर्प के परिवार से घिरे हुए दिखाई दिए।
339. ॐ कालियाहिफणारङ्गनटाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने कालिय नाग के फणों पर नृत्य किया।
340. ॐ कालियमर्दनाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने कालिय नाग का दमन किया।
341. ॐ नागपत्नीस्तुतिप्रीताय नमः।
सरल अर्थ: जो नागपत्नियों की स्तुति से प्रसन्न हुए।
342. ॐ नानावेषसमृद्धिकृते नमः।
सरल अर्थ: जो अनेक सुंदर रूपों और वेशों से अपनी लीलाओं को समृद्ध करते हैं।
343. ॐ अविष्वक्तदृशे नमः।
सरल अर्थ: जिनकी दृष्टि आसक्ति से रहित और सर्वव्यापक है।
344. ॐ आत्मेशाय नमः।
सरल अर्थ: जो आत्माओं के स्वामी हैं।
345. ॐ स्वदृशे नमः।
सरल अर्थ: जो स्वयं को और सबको देखने वाले परम साक्षी हैं।
346. ॐ आत्मस्तुतिप्रियाय नमः।
सरल अर्थ: जो अपने वास्तविक स्वरूप की भक्तिपूर्ण स्तुति से प्रसन्न होते हैं।
347. ॐ सर्वेश्वराय नमः।
सरल अर्थ: जो सभी के परम ईश्वर हैं।
348. ॐ सर्वगुणाय नमः।
सरल अर्थ: जो सभी दिव्य गुणों से संपन्न हैं।
349. ॐ प्रसिद्धाय नमः।
सरल अर्थ: जो समस्त संसार में प्रसिद्ध हैं।
350. ॐ सर्वसात्वताय नमः।
सरल अर्थ: जो सात्वत वंश और भक्त समुदाय के परम आश्रय हैं।
351. ॐ अकुण्ठधाम्ने नमः।
सरल अर्थ: जिनका दिव्य धाम कभी क्षीण या सीमित नहीं होता।
352. ॐ चन्द्रार्कदृष्टये नमः।
सरल अर्थ: जिनकी दृष्टि चंद्रमा और सूर्य के समान प्रकाश देने वाली है।
353. ॐ आकाशनिर्मलाय नमः।
सरल अर्थ: जो आकाश के समान निर्मल और निष्कलंक हैं।
354. ॐ अनिर्देश्यगतये नमः।
सरल अर्थ: जिनकी गति और स्वरूप का पूर्ण वर्णन करना संभव नहीं।
355. ॐ नागवनितापतिभैक्षदाय नमः।
सरल अर्थ: जो नागपत्नियों के पति के जीवन और स्थिति के प्रति कृपा करने वाले हैं।
356. ॐ स्वाङ्घ्रिमुद्राङ्कनागेन्द्रमूर्ध्ने नमः।
सरल अर्थ: जिनके चरणचिह्न नागराज के मस्तक पर अंकित हुए।
357. ॐ कालियसंस्तुताय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी कालिय नाग ने स्तुति की।
358. ॐ अभयाय नमः।
सरल अर्थ: जो भय से रहित और भय दूर करने वाले हैं।
359. ॐ विश्वतश्चक्षुषे नमः।
सरल अर्थ: जिनकी दृष्टि समस्त विश्व में व्याप्त है।
360. ॐ स्तुतोत्तमगुणाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके श्रेष्ठ गुणों की स्तुति की जाती है।
361. ॐ प्रभवे नमः।
सरल अर्थ: जो समस्त शक्तियों के मूल प्रभु हैं।
362. ॐ मह्यम् नमः।
सरल अर्थ: जो महान और पूजनीय परम सत्ता हैं।
363. ॐ आत्मने नमः।
सरल अर्थ: जो समस्त जीवों के परम आत्मस्वरूप हैं।
364. ॐ मरुते नमः।
सरल अर्थ: जो वायु के समान सर्वत्र गतिशील और व्यापक हैं।
365. ॐ प्राणाय नमः।
सरल अर्थ: जो सभी प्राणियों के जीवन और प्राणशक्ति के आधार हैं।
366. ॐ परमात्मने नमः।
सरल अर्थ: जो सभी जीवों के परम आत्मा हैं।
367. ॐ द्युशीर्षवते नमः।
सरल अर्थ: जिनका दिव्य स्वरूप आकाश और उच्च लोकों तक व्याप्त है।
368. ॐ नागोपायनहृष्टात्मने नमः।
सरल अर्थ: जो नागराज द्वारा अर्पित भेंट से प्रसन्न हुए।
369. ॐ हृदोत्सारितकालियाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने कालिय को यमुना के हृदयस्थ स्थान से दूर किया।
370. ॐ बलभद्रसुखालापाय नमः।
सरल अर्थ: जो बलभद्रजी के साथ सुखद और प्रेमपूर्ण वार्ता करते हैं।
371. ॐ गोपालिङ्गननिर्वृताय नमः।
सरल अर्थ: जो गोपों के आलिंगन से आनंदित होते हैं।
372. ॐ दावाग्निभीतगोपालगोप्त्रे नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने दावानल से भयभीत गोपों की रक्षा की।
373. ॐ दावाग्निनाशनाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने वन की भयंकर अग्नि का नाश किया।
374. ॐ नयनाच्छादनक्रीडालम्पटाय नमः।
सरल अर्थ: जो आंखें बंद करके पहचानने जैसी बालक्रीड़ा में आनंद लेते हैं।
375. ॐ नृपचेष्टिताय नमः।
सरल अर्थ: जो राजाओं के समान प्रभावशाली आचरण करने वाले हैं।
376. ॐ काकपक्षधराय नमः।
सरल अर्थ: जो काकपक्ष के समान बालों की विशेष शैली धारण करते हैं।
377. ॐ सौम्याय नमः।
सरल अर्थ: जो अत्यंत शांत, कोमल और मनोहर हैं।
378. ॐ बलवाहककेलिमते नमः।
सरल अर्थ: जो बलरामजी के साथ खेल-क्रीड़ा करते हैं।
379. ॐ बलघातितदुर्धर्षप्रलम्बाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी लीला में बलरामजी ने दुर्धर्ष प्रलम्बासुर का वध किया।
380. ॐ बलवत्सलाय नमः।
सरल अर्थ: जो बलरामजी से अत्यंत प्रेम करते हैं।
381. ॐ मुञ्जाटव्यग्निशमनाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने मुंजवन की अग्नि से गोपों की रक्षा की।
382. ॐ प्रावृट्कालविनोदवते नमः।
सरल अर्थ: जो वर्षा ऋतु में सुंदर लीलाओं और विनोद से आनंदित होते हैं।
383. ॐ शिलान्यस्तान्नभृते नमः।
सरल अर्थ: जो शिला पर रखा भोजन ग्रहण करने वाली वनलीला करते हैं।
384. ॐ दैत्यसंहर्त्रे नमः।
सरल अर्थ: जो दैत्यों और असुरों का संहार करते हैं।
385. ॐ शाद्वलासनाय नमः।
सरल अर्थ: जो हरी घास पर बैठकर विश्राम करते हैं।
386. ॐ सदाप्तगोपिकोद्गीताय नमः।
सरल अर्थ: जिनका निरंतर गोपियाँ गीतों द्वारा गुणगान करती हैं।
387. ॐ कर्णिकारावतंसकाय नमः।
सरल अर्थ: जो कानों में कर्णिकार पुष्प धारण करते हैं।
388. ॐ नटवेषधराय नमः।
सरल अर्थ: जो नट के समान सुंदर वेश धारण करते हैं।
389. ॐ पद्ममालाङ्काय नमः।
सरल अर्थ: जो कमल की माला से अलंकृत हैं।
390. ॐ गोपिकावृताय नमः।
सरल अर्थ: जो गोपिकाओं से घिरे हुए हैं।
391. ॐ गोपीमनोहरापाङ्गाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी एक चंचल दृष्टि गोपियों के मन को मोह लेती है।
392. ॐ वेणुवादनतत्पराय नमः।
सरल अर्थ: जो बांसुरी बजाने में सदैव तल्लीन रहते हैं।
393. ॐ विन्यस्तवदनाम्भोजाय नमः।
सरल अर्थ: जो अपने कमल के समान मुख पर बांसुरी रखते हैं।
394. ॐ चारुशब्दकृताननाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके मुख से निकलने वाली मधुर ध्वनि मन को मोह लेती है।
395. ॐ बिम्बाधरार्पितोदारवेणवे नमः।
सरल अर्थ: जो अपने बिंबफल जैसे अधरों पर सुंदर बांसुरी रखते हैं।
396. ॐ विश्वविमोहनाय नमः।
सरल अर्थ: जो अपने दिव्य स्वरूप से पूरे संसार को मोहित करते हैं।
397. ॐ व्रजसंवर्णिताय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी महिमा का व्रज में प्रेमपूर्वक वर्णन किया जाता है।
398. ॐ श्राव्यवेणुनादाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी बांसुरी की ध्वनि अत्यंत मधुर और सुनने योग्य है।
399. ॐ श्रुतिप्रियाय नमः।
सरल अर्थ: जो वेद और मधुर भक्तिपूर्ण श्रवण के प्रिय हैं।
400. ॐ गोगोपगोपीजन्मेप्सु ब्रह्मेन्द्राद्यभिवन्दिताय नमः।
सरल अर्थ: जिनके गो, गोप और गोपियों के बीच प्रकट होने की इच्छा से ब्रह्मा, इंद्र आदि देवता भी वंदना करते हैं।
401 से 500
401. ॐ गीतस्रुतिसरित्पूराय नमः।
सरल अर्थ: जिनके गीत और मधुर ध्वनि से श्रवण की धारा भर जाती है।
402. ॐ नादनर्तितबर्हिणाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी मधुर ध्वनि सुनकर मोर नृत्य करने लगते हैं।
403. ॐ रागपल्लवितस्थाणवे नमः।
सरल अर्थ: जिनके संगीत से स्थिर वृक्ष और प्रकृति भी मानो भावविभोर हो उठती है।
404. ॐ गीतानमितपादपाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके गीत की मधुरता से वृक्ष भी झुकते हुए प्रतीत होते हैं।
405. ॐ विस्मारिततृणग्रासमृगाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी मधुर ध्वनि सुनकर पशु भी अपना भोजन भूल जाते हैं।
406. ॐ मृगविलोभिताय नमः।
सरल अर्थ: जो अपनी मधुरता से वन के मृगों को भी आकर्षित करते हैं।
407. ॐ व्याघ्रादिहिंस्रसहजवैरहर्त्रे नमः।
सरल अर्थ: जो हिंसक पशुओं के स्वाभाविक वैर को भी शांत कर देते हैं।
408. ॐ सुगायनाय नमः।
सरल अर्थ: जो अत्यंत मधुर स्वर में गान करने वाले हैं।
409. ॐ गाढोदीरितगोवृन्द नमः।
सरल अर्थ: जिनकी पुकार से गौओं का समूह प्रेमपूर्वक एकत्र हो जाता है।
410. ॐ प्रेमोत्कर्णिततर्णकाय नमः।
सरल अर्थ: जो प्रेम से अपने कान खड़े किए हुए बछड़ों को आकर्षित करते हैं।
411. ॐ निष्पन्दयानब्रह्मादिवीक्षिताय नमः।
सरल अर्थ: जिनका दर्शन करने के लिए ब्रह्मा आदि भी स्थिर होकर देखते हैं।
412. ॐ विश्ववन्दिताय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी समस्त विश्व वंदना करता है।
413. ॐ शाखोत्कर्णशकुन्तौघाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी मधुर ध्वनि सुनकर वृक्षों पर बैठे पक्षी भी ध्यानपूर्वक सुनते हैं।
414. ॐ छत्रायितबलाहकाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके ऊपर बादल छत्र के समान छाया करते हैं।
415. ॐ प्रसन्नाय नमः।
सरल अर्थ: जो सदा प्रसन्न और कृपालु हैं।
416. ॐ परमानन्दाय नमः।
सरल अर्थ: जो परम आनंद के स्वरूप हैं।
417. ॐ चित्रायितचराचराय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी लीला से समस्त चर-अचर जगत अद्भुत रूप धारण करता है।
418. ॐ गोपिकामदनाय नमः।
सरल अर्थ: जो गोपियों के प्रेम को अत्यंत आकर्षित करने वाले हैं।
419. ॐ गोपीकुचकुङ्कुममुद्रिताय नमः।
सरल अर्थ: जो गोपियों के प्रेम में उनके कुंकुम से अंकित होते हैं।
420. ॐ गोपकन्याजलक्रीडाहृष्टाय नमः।
सरल अर्थ: जो गोपकन्याओं के साथ जलक्रीड़ा में आनंदित होते हैं।
421. ॐ गोप्यंशुकापहृते नमः।
सरल अर्थ: जो गोपियों के वस्त्रों से संबंधित प्रसिद्ध लीला करते हैं।
422. ॐ स्कन्धारोपितगोपस्त्रीवाससे नमः।
सरल अर्थ: जो गोपियों के वस्त्रों को अपने कंधे पर धारण करने वाली लीला करते हैं।
423. ॐ कुन्दनिभस्मिताय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी मुस्कान कुंद पुष्प के समान उज्ज्वल है।
424. ॐ गोपीनेत्रोत्पलशशिने नमः।
सरल अर्थ: जो गोपियों के कमल जैसे नेत्रों के लिए चंद्रमा के समान हैं।
425. ॐ गोपिकायाचितांशुकाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्हें गोपिकाओं ने वस्त्र के लिए प्रार्थना की।
426. ॐ गोपीनमस्किरयादेष्ट्रे नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने गोपियों को नमस्कार करने और उचित आचरण का मार्ग बताया।
427. ॐ गोप्येककरवन्दिताय नमः।
सरल अर्थ: जिन्हें गोपिकाएँ एक हाथ जोड़कर प्रणाम करती हैं।
428. ॐ गोप्यञ्जलिविशेषार्थिने नमः।
सरल अर्थ: जो गोपियों की अंजलि और प्रेमपूर्ण समर्पण को स्वीकार करते हैं।
429. ॐ गोपीक्रीडाविलोभिताय नमः।
सरल अर्थ: जो गोपियों की प्रेमपूर्ण क्रीड़ाओं से आकर्षित होते हैं।
430. ॐ शान्तवासस्फुरद्गोपीकृताञ्जलये नमः।
सरल अर्थ: जिनके सामने गोपियाँ शांत और विनम्र भाव से अंजलि जोड़ती हैं।
431. ॐ अघापहाय नमः।
सरल अर्थ: जो पाप और दोषों को दूर करने वाले हैं।
432. ॐ गोपीकेलिविलासार्थिने नमः।
सरल अर्थ: जो गोपियों के साथ प्रेमपूर्ण क्रीड़ा और विलास की लीलाएँ करते हैं।
433. ॐ गोपीसम्पूर्णकामदाय नमः।
सरल अर्थ: जो गोपियों की शुद्ध और भक्तिपूर्ण इच्छाओं को पूर्ण करने वाले हैं।
434. ॐ गोपस्त्रीवस्त्रदाय नमः।
सरल अर्थ: जो गोपियों को उनके वस्त्र प्रदान करने वाले हैं।
435. ॐ गोपीचित्तचोराय नमः।
सरल अर्थ: जो गोपियों के हृदय को अपने प्रेम से चुरा लेते हैं।
436. ॐ कुतूहलिने नमः।
सरल अर्थ: जो अद्भुत लीलाओं में उत्सुक और जिज्ञासापूर्ण हैं।
437. ॐ वृन्दावनप्रियाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्हें वृंदावन अत्यंत प्रिय है।
438. ॐ गोपबन्धवे नमः।
सरल अर्थ: जो गोपों के सच्चे मित्र और बंधु हैं।
439. ॐ यज्वान्नयाचित्रे नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने यज्ञ करने वालों से अन्न मांगने की लीला की।
440. ॐ यज्ञेशाय नमः।
सरल अर्थ: जो यज्ञों के परम स्वामी हैं।
441. ॐ यज्ञभावज्ञाय नमः।
सरल अर्थ: जो यज्ञ के वास्तविक भाव और उद्देश्य को जानने वाले हैं।
442. ॐ यज्ञपत्न्यभिवाञ्छिताय नमः।
सरल अर्थ: जो यज्ञ करने वाले ब्राह्मणों की पत्नियों की भक्ति और इच्छा के प्रिय हैं।
443. ॐ मुनिपत्नीवितीर्णान्नतृप्ताय नमः।
सरल अर्थ: जो मुनियों की पत्नियों द्वारा प्रेम से अर्पित भोजन से संतुष्ट हुए।
444. ॐ मुनिवधूप्रियाय नमः।
सरल अर्थ: जो मुनियों की पत्नियों की सरल और भक्तिपूर्ण भावना से प्रसन्न होते हैं।
445. ॐ द्विजपत्न्यभिभावज्ञाय नमः।
सरल अर्थ: जो ब्राह्मण-पत्नियों के सच्चे प्रेम और भाव को समझते हैं।
446. ॐ द्विजपत्नीवरप्रदाय नमः।
सरल अर्थ: जो ब्राह्मण-पत्नियों को वर और कृपा प्रदान करते हैं।
447. ॐ प्रतिरुद्धसतीमोक्षप्रदाय नमः।
सरल अर्थ: जो बाधित और पीड़ित भक्तों को मुक्ति प्रदान करते हैं।
448. ॐ द्विजविमोहित्रे नमः।
सरल अर्थ: जो यज्ञ में लगे द्विजों को अपनी लीला से मोहित करते हैं।
449. ॐ मुनिज्ञानप्रदाय नमः।
सरल अर्थ: जो मुनियों को परम ज्ञान प्रदान करते हैं।
450. ॐ यज्वस्तुताय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी यज्ञ करने वाले भक्त स्तुति करते हैं।
451. ॐ वासवयागविदे नमः।
सरल अर्थ: जो इंद्र अर्थात वासव से संबंधित यज्ञ की व्यवस्था और उसके भाव को जानते हैं।
452. ॐ पितृप्रोक्तक्रियारूपशक्रयागनिवारणाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने पिता नंद द्वारा बताई गई परंपरा के अनुसार इंद्र-यज्ञ को रोककर नई धार्मिक भावना स्थापित की।
453. ॐ शक्रामर्षकराय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी लीला से इंद्र को क्रोध आया।
454. ॐ शक्रवृष्टिप्रशमनोन्मुखाय नमः।
सरल अर्थ: जो इंद्र की प्रचंड वर्षा को शांत करने के लिए तत्पर हुए।
455. ॐ गोवर्धनधराय नमः।
सरल अर्थ: जो गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले हैं।
456. ॐ गोपगोवृन्दत्राणतत्पराय नमः।
सरल अर्थ: जो गोपों और गौओं की रक्षा के लिए सदैव तत्पर हैं।
457. ॐ गोवर्धनगिरिच्छात्रचण्डदण्डभुजार्गलाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी शक्तिशाली भुजा गोवर्धन पर्वत को छत्र की तरह धारण करती है।
458. ॐ सप्ताहविधृताद्रीन्द्राय नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत धारण किया।
459. ॐ मेघवाहनगर्वघ्ने नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने मेघों के स्वामी इंद्र के गर्व को दूर किया।
460. ॐ भुजाग्रोपरिविन्यस्तक्ष्माधरक्ष्माभृते नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने अपनी भुजा के अग्रभाग पर पृथ्वीधारी पर्वत को धारण किया।
461. ॐ अच्युताय नमः।
सरल अर्थ: जो कभी अपने स्वरूप और सत्य से विचलित नहीं होते।
462. ॐ स्वस्थानस्थापितगिरये नमः।
सरल अर्थ: जिन्होंने गोवर्धन पर्वत को उसके स्थान पर पुनः स्थापित किया।
463. ॐ गोपीदध्यक्षतार्चिताय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी गोपियों ने दही और अक्षत आदि से पूजा की।
464. ॐ सुमनसे नमः।
सरल अर्थ: जिनका मन निर्मल, शुभ और प्रसन्न है।
465. ॐ सुमनोवृष्टिहृष्टाय नमः।
सरल अर्थ: जिन पर देवताओं द्वारा पुष्पवृष्टि होने से वे प्रसन्न हुए।
466. ॐ वासववन्दिताय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी इंद्र ने भी वंदना की।
467. ॐ कामधेनुपयःपूराभिषिक्ताय नमः।
सरल अर्थ: जिनका कामधेनु के दूध से अभिषेक किया गया।
468. ॐ सुरभिस्तुताय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी सुरभि गाय ने स्तुति की।
469. ॐ धराङ्घ्रये नमः।
सरल अर्थ: जिनके चरण पृथ्वी के आधार और कल्याण का कारण हैं।
470. ॐ ओषधीरोम्णे नमः।
सरल अर्थ: जिनसे पृथ्वी की औषधियाँ और वनस्पतियाँ संबंधित मानी जाती हैं।
471. ॐ धर्मगोप्त्रे नमः।
सरल अर्थ: जो धर्म की रक्षा करने वाले हैं।
472. ॐ मनोमयाय नमः।
सरल अर्थ: जो मन की सूक्ष्म सत्ता में भी व्याप्त हैं।
473. ॐ ज्ञानयज्ञप्रियाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्हें ज्ञानरूप यज्ञ अत्यंत प्रिय है।
474. ॐ शास्त्रनेत्राय नमः।
सरल अर्थ: जो शास्त्रों को जीवन का मार्गदर्शक नेत्र मानने वाले और स्वयं शास्त्रस्वरूप हैं।
475. ॐ सर्वार्थसारथये नमः।
सरल अर्थ: जो सभी उद्देश्यों को सही दिशा देने वाले सारथी हैं।
476. ॐ ऐरावतकरानीतवियद्गङ्गाप्लुताय नमः।
सरल अर्थ: जिनका दिव्य अभिषेक ऐरावत द्वारा लाई गई आकाशगंगा के जल से किया गया।
477. ॐ विभवे नमः।
सरल अर्थ: जो सर्वशक्तिमान और महान ऐश्वर्य से संपन्न हैं।
478. ॐ ब्रह्माभिषिक्ताय नमः।
सरल अर्थ: जिनका ब्रह्माजी ने अभिषेक किया।
479. ॐ गोगोप्त्रे नमः।
सरल अर्थ: जो गौओं और गोपों की रक्षा करने वाले हैं।
480. ॐ सर्वलोकशुभङ्कराय नमः।
सरल अर्थ: जो सभी लोकों का मंगल करने वाले हैं।
481. ॐ सर्ववेदमयाय नमः।
सरल अर्थ: जिनमें समस्त वेदों का सार और स्वरूप विद्यमान है।
482. ॐ मग्ननन्दान्वेषिणे नमः।
सरल अर्थ: जो जल में अदृश्य हुए नंदबाबा की खोज करने वाले हैं।
483. ॐ पितृप्रियाय नमः।
सरल अर्थ: जो अपने पिता को अत्यंत प्रिय हैं।
484. ॐ वरुणोदीरितात्मेक्षाकौतुकाय नमः।
सरल अर्थ: जो वरुणदेव द्वारा अपने दिव्य स्वरूप का परिचय दिए जाने पर उस लीला को देखने के लिए उत्सुक हुए।
485. ॐ वरुणार्चिताय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी वरुणदेव ने पूजा की।
486. ॐ वरुणानीतजनकाय नमः।
सरल अर्थ: जिन्हें वरुणदेव ने नंदबाबा से मिलवाया और उनके पिता को वापस लाया।
487. ॐ गोपज्ञातात्मवैभवाय नमः।
सरल अर्थ: जिनकी दिव्य महिमा को गोपों ने जाना।
488. ॐ स्वर्लोकालोकसंहृष्टगोपवर्गाय नमः।
सरल अर्थ: जिनके कारण गोपों ने दिव्य लोकों का दर्शन करके आनंद अनुभव किया।
489. ॐ त्रिवर्गदाय नमः।
सरल अर्थ: जो धर्म, अर्थ और काम—इन तीन पुरुषार्थों को प्रदान करने वाले हैं।
490. ॐ ब्रह्महृद्गोपिताय नमः।
सरल अर्थ: जो ब्रह्माजी के हृदय में गुप्त और पूजनीय रूप से स्थित हैं।
491. ॐ गोपद्रष्ट्रे नमः।
सरल अर्थ: जो गोपों पर कृपापूर्ण दृष्टि रखने वाले हैं।
492. ॐ ब्रह्मपदप्रदाय नमः।
सरल अर्थ: जो परम ब्रह्म की प्राप्ति का पद प्रदान करते हैं।
493. ॐ शरच्चन्द्रविहारोत्काय नमः।
सरल अर्थ: जो शरद पूर्णिमा के चंद्रमा के समान सुंदर समय में विहार करने के लिए उत्सुक हैं।
494. ॐ श्रीपतये नमः।
सरल अर्थ: जो श्री अर्थात लक्ष्मीजी के पति और परम आश्रय हैं।
495. ॐ वशकाय नमः।
सरल अर्थ: जो प्रेम और भक्ति से अपने भक्तों के वश में हो जाते हैं।
496. ॐ क्षमाय नमः।
सरल अर्थ: जो क्षमा के स्वरूप और क्षमाशील हैं।
497. ॐ भयापहाय नमः।
सरल अर्थ: जो भक्तों के सभी भय दूर करते हैं।
498. ॐ भर्तृरुद्धगोपिकाध्यानगोचराय नमः।
सरल अर्थ: जो अपने पतियों द्वारा रोकी गई गोपियों के ध्यान में भी सुलभ होते हैं।
499. ॐ गोपिकानयनास्वाद्याय नमः।
सरल अर्थ: जिनके दिव्य स्वरूप का आनंद गोपियाँ अपने नेत्रों से लेती हैं।
500. ॐ गोपीनर्मोक्तिनिवृताय नमः।
सरल अर्थ: जो गोपियों के प्रेमपूर्ण और विनोदपूर्ण वचनों से आनंदित होते हैं।
501. ॐ गोपिकामानहरणाय नमः।
अर्थ: गोपिकाओं के मान को दूर करने वाले।
502. ॐ गोपिकाशतयूथपाय नमः।
अर्थ: सैकड़ों गोपिका-समूहों के स्वामी।
503. ॐ वैजयन्तीस्रगाकल्पाय नमः।
अर्थ: वैजयंती माला से सुशोभित रहने वाले।
504. ॐ गोपिकामानवर्धनाय नमः।
अर्थ: गोपिकाओं के प्रेम और सम्मान को बढ़ाने वाले।
505. ॐ गोपकान्तासुनिर्देष्ट्रे नमः।
अर्थ: गोपियों को उचित मार्ग का निर्देश देने वाले प्रियतम।
506. ॐ कान्ताय नमः।
अर्थ: अत्यंत प्रिय और सुंदर स्वरूप वाले।
507. ॐ मन्मथमन्मथाय नमः।
अर्थ: कामदेव को भी मोहित करने वाले।
508. ॐ स्वात्मास्यदत्तताम्बूलाय नमः।
अर्थ: अपने मुख से ताम्बूल अर्पित करने वाले।
509. ॐ फलितोत्कृष्टयौवनाय नमः।
अर्थ: पूर्ण विकसित और दिव्य यौवन से युक्त।
510. ॐ वल्लभीस्तनसक्ताक्षाय नमः।
अर्थ: अपनी प्रिय गोपियों के प्रति प्रेमपूर्ण दृष्टि रखने वाले।
511. ॐ वल्लबीप्रेमचालिताय नमः।
अर्थ: गोपियों के प्रेम से प्रेमपूर्वक प्रभावित होने वाले।
512. ॐ गोपीचेलाञ्चलासीनाय नमः।
अर्थ: गोपियों के वस्त्र के आँचल के समीप स्थित होने वाले।
513. ॐ गोपीनेत्राब्जषट्पदाय नमः।
अर्थ: गोपियों के कमल जैसे नेत्रों के लिए भ्रमर के समान।
514. ॐ रासक्रीडासमासक्ताय नमः।
अर्थ: रासलीला में पूर्ण रूप से आसक्त रहने वाले।
515. ॐ गोपीमण्डलमण्डनाय नमः।
अर्थ: गोपियों के समूह की शोभा बढ़ाने वाले।
516. ॐ गोपीहेममणिश्रेणिमध्येन्द्रमणये नमः।
अर्थ: स्वर्ण और रत्नों से सजी गोपियों के बीच इन्द्रमणि के समान चमकने वाले।
517. ॐ उज्ज्वलाय नमः।
अर्थ: अत्यंत तेजस्वी और प्रकाशमान।
518. ॐ विद्याधरेन्दुशापघ्नाय नमः।
अर्थ: विद्याधर को मिले शाप का निवारण करने वाले।
519. ॐ शङ्खचूडशिरोहराय नमः।
अर्थ: शंखचूड़ का सिर काटने वाले।
520. ॐ शङ्खचूडशिरोरत्नसम्प्रीणितबलाय नमः।
अर्थ: शंखचूड़ के सिर से प्राप्त रत्न द्वारा बलराम को प्रसन्न करने वाले।
521. ॐ अनघाय नमः।
अर्थ: निष्पाप और पापरहित।
522. ॐ अरिष्टारिष्टकृते नमः।
अर्थ: अरिष्टासुर का विनाश करने वाले।
523. ॐ दुष्टकेशिदैत्यनिषूदनाय नमः।
अर्थ: दुष्ट केशी नामक दैत्य का संहार करने वाले।
524. ॐ सरसाय नमः।
अर्थ: मधुर, रसपूर्ण और आनंददायक स्वरूप वाले।
525. ॐ सस्मितमुखाय नमः।
अर्थ: मंद मुस्कान से सुशोभित मुख वाले।
526. ॐ सुस्थिराय नमः।
अर्थ: स्थिर और अचल स्वरूप वाले।
527. ॐ विरहाकुलाय नमः।
अर्थ: प्रेम-विरह की भावना से व्याकुल होने वाले।
528. ॐ सङ्कर्षणार्पितप्रीतये नमः।
अर्थ: बलराम के प्रति प्रेम रखने वाले।
529. ॐ अक्रूरध्यानगोचराय नमः।
अर्थ: अक्रूर के ध्यान में प्रकट होने वाले।
530. ॐ अक्रूरसंस्तुताय नमः।
अर्थ: अक्रूर द्वारा स्तुति किए गए।
531. ॐ गूढाय नमः।
अर्थ: रहस्यमय और गूढ़ स्वरूप वाले।
532. ॐ गुणवृत्त्युपलक्षिताय नमः।
अर्थ: अपने गुणों और दिव्य आचरण से पहचाने जाने वाले।
533. ॐ प्रमाणगम्याय नमः।
अर्थ: प्रमाणों और शास्त्रों के द्वारा जाने जा सकने वाले।
534. ॐ तन्मात्रावयविने नमः।
अर्थ: सूक्ष्म तन्मात्राओं में भी विद्यमान रहने वाले।
535. ॐ बुद्धितत्पराय नमः।
अर्थ: बुद्धि और ज्ञान के आधार स्वरूप।
536. ॐ सर्वप्रमाणप्रमथिने नमः।
अर्थ: सभी प्रमाणों की सीमाओं से परे रहने वाले।
537. ॐ सर्वप्रत्ययसाधकाय नमः।
अर्थ: सभी ज्ञान और अनुभूतियों के आधार बनने वाले।
538. ॐ पुरुषाय नमः।
अर्थ: परम पुरुष।
539. ॐ प्रधानात्मने नमः।
अर्थ: प्रकृति के मूल आधार और आत्मस्वरूप।
540. ॐ विपर्यासविलोचनाय नमः।
अर्थ: भ्रम और गलत ज्ञान को दूर करने वाले।
541. ॐ मधुराजनसंवीक्ष्याय नमः।
अर्थ: मथुरा के लोगों द्वारा दर्शन किए जाने वाले।
542. ॐ रजकप्रतिघातकाय नमः।
अर्थ: अहंकारी रजक का प्रतिरोध करने वाले।
543. ॐ विचित्राम्बरसंवीताय नमः।
अर्थ: सुंदर और विविध प्रकार के वस्त्र धारण करने वाले।
544. ॐ मालाकारवरप्रदाय नमः।
अर्थ: मालाकार को वरदान देने वाले।
545. ॐ कुब्जावक्रत्वनिर्मोक्त्रे नमः।
अर्थ: कुब्जा के शरीर के कूबड़ और टेढ़ेपन को दूर करने वाले।
546. ॐ कुब्जायौवनदायकाय नमः।
अर्थ: कुब्जा को सुंदर यौवन प्रदान करने वाले।
547. ॐ कुब्जाङ्गरागसुरभये नमः।
अर्थ: कुब्जा द्वारा लगाए गए सुगंधित अंगराग से सुगंधित होने वाले।
548. ॐ कंसकोदण्डखण्डनाय नमः।
अर्थ: कंस के धनुष को तोड़ने वाले।
549. ॐ धीराय नमः।
अर्थ: धैर्यवान और गंभीर।
550. ॐ कुवलयापीडमर्दनाय नमः।
अर्थ: कुवलयापीड नामक हाथी का दमन करने वाले।
551–600
551. ॐ कंसभीतिकृते नमः।
अर्थ: कंस के मन में भय उत्पन्न करने वाले।
552. ॐ दन्तिदन्तायुधाय नमः।
अर्थ: हाथी के दाँत को ही अपना अस्त्र बनाने वाले।
553. ॐ रङ्गत्रासकाय नमः।
अर्थ: युद्धभूमि में शत्रुओं के लिए भय उत्पन्न करने वाले।
554. ॐ मल्लयुद्धविदे नमः।
अर्थ: मल्लयुद्ध की कला में निपुण।
555. ॐ चाणूरहन्त्रे नमः।
अर्थ: चाणूर मल्ल का वध करने वाले।
556. ॐ कंसारये नमः।
अर्थ: कंस के शत्रु और उसका वध करने वाले।
557. ॐ देवकीहर्षदायकाय नमः।
अर्थ: माता देवकी को आनंद देने वाले।
558. ॐ वसुदेवपदानम्राय नमः।
अर्थ: पिता वसुदेव के चरणों में विनम्र होने वाले।
559. ॐ पितृबन्धविमोचनाय नमः।
अर्थ: अपने माता-पिता को बंधन से मुक्त करने वाले।
560. ॐ उर्वीभयापहाय नमः।
अर्थ: पृथ्वी का भय दूर करने वाले।
561. ॐ भूपाय नमः।
अर्थ: पृथ्वी के स्वामी।
562. ॐ उग्रसेनाधिपत्यदाय नमः।
अर्थ: उग्रसेन को राज्य का अधिकार प्रदान करने वाले।
563. ॐ आज्ञास्थितशचीनाथाय नमः।
अर्थ: इन्द्र की आज्ञा के अनुरूप कार्य करने वाले।
564. ॐ सुधर्मानयनक्षमाय नमः।
अर्थ: सुधर्मा सभा को लाने में समर्थ।
565. ॐ आद्याय नमः।
अर्थ: आदि और सबसे प्रथम।
566. ॐ द्विजातिसत्कर्त्रे नमः।
अर्थ: ब्राह्मणों का सम्मान करने वाले।
567. ॐ शिष्टाचारप्रदर्शकाय नमः।
अर्थ: श्रेष्ठ आचरण का उदाहरण प्रस्तुत करने वाले।
568. ॐ सान्दीपनिकृताभ्यस्तविद्याभ्यासैकधिये नमः।
अर्थ: गुरु सान्दीपनि से विद्या सीखने में पूर्ण मन लगाने वाले।
569. ॐ सुधये नमः।
अर्थ: अमृत के समान पवित्र और कल्याणकारी।
570. ॐ गुर्वभीष्टक्रियादक्षाय नमः।
अर्थ: गुरु की इच्छा पूरी करने में कुशल।
571. ॐ पश्चिमोदधिपूजिताय नमः।
अर्थ: पश्चिमी समुद्र द्वारा पूजित और सम्मानित।
572. ॐ हतपञ्चजनप्राप्तपाञ्चजन्याय नमः।
अर्थ: पंचजन दैत्य का वध करके पाञ्चजन्य शंख प्राप्त करने वाले।
573. ॐ यमार्चिताय नमः।
अर्थ: यमराज द्वारा पूजित।
574. ॐ धर्मराजजयानीतगुरुपुत्राय नमः।
अर्थ: धर्मराज पर विजय प्राप्त कर गुरु के पुत्र को वापस लाने वाले।
575. ॐ उरुक्रमाय नमः।
अर्थ: महान और अद्भुत कर्म करने वाले।
576. ॐ गुरुपुत्रप्रदाय नमः।
अर्थ: गुरु को उनके पुत्र की प्राप्ति कराने वाले।
577. ॐ शास्त्रे नमः।
अर्थ: शासन करने और मार्गदर्शन करने वाले।
578. ॐ मधुराजनमानदाय नमः।
अर्थ: मथुरा के राजा का सम्मान बढ़ाने वाले।
579. ॐ जामदग्न्यसमभ्यर्च्याय नमः।
अर्थ: परशुराम द्वारा पूजित।
580. ॐ गोमन्तगिरिसञ्चराय नमः।
अर्थ: गोमन्त पर्वत पर विचरण करने वाले।
581. ॐ गोमन्तदावशमनाय नमः।
अर्थ: गोमन्त पर्वत की वनाग्नि को शांत करने वाले।
582. ॐ गरुडानीतभूषणाय नमः।
अर्थ: गरुड़ द्वारा लाए गए दिव्य आभूषण धारण करने वाले।
583. ॐ चक्राद्यायुधसंशोभिने नमः।
अर्थ: चक्र आदि दिव्य अस्त्रों से सुशोभित।
584. ॐ जरासन्धमदापहाय नमः।
अर्थ: जरासंध के अहंकार को दूर करने वाले।
585. ॐ सृगालावनिपालघ्नाय नमः।
अर्थ: सृगाल नामक राजा का वध करने वाले।
586. ॐ सृगालात्मजराज्यदाय नमः।
अर्थ: सृगाल के पुत्र को राज्य प्रदान करने वाले।
587. ॐ विध्वस्तकालयवनाय नमः।
अर्थ: कालयवन का विनाश करने वाले।
588. ॐ मुचुकुन्दवरप्रदाय नमः।
अर्थ: मुचुकुन्द को वरदान देने वाले।
589. ॐ आज्ञापितमहाम्भोधये नमः।
अर्थ: महान समुद्र को अपनी आज्ञा के अधीन करने वाले।
590. ॐ द्वारकापुरकल्पनाय नमः।
अर्थ: द्वारका नगरी की स्थापना करने वाले।
591. ॐ द्वारकानिलयाय नमः।
अर्थ: द्वारका को अपना निवास बनाने वाले।
592. ॐ रुक्मिमानहन्त्रे नमः।
अर्थ: रुक्मी के अहंकार को नष्ट करने वाले।
593. ॐ यदूद्वहाय नमः।
अर्थ: यदुवंश को गौरव देने वाले।
594. ॐ रुचिराय नमः।
अर्थ: अत्यंत सुंदर और मनोहर।
595. ॐ रुक्मिणीजानये नमः।
अर्थ: रुक्मिणी के पति।
596. ॐ प्रद्युम्नजनकाय नमः।
अर्थ: प्रद्युम्न के पिता।
597. ॐ प्रभवे नमः।
अर्थ: सर्वशक्तिमान प्रभु।
598. ॐ अपाकृतत्रिलोकार्तये नमः।
अर्थ: तीनों लोकों के दुःख दूर करने वाले।
599. ॐ अनिरुद्धपितामहाय नमः।
अर्थ: अनिरुद्ध के पितामह।
600. ॐ अनिरुद्धपदान्वेषिणे नमः।
अर्थ: अनिरुद्ध की खोज करने वाले।
601–650
601. ॐ चक्रिणे नमः।
अर्थ: सुदर्शन चक्र धारण करने वाले।
602. ॐ गरुडवाहनाय नमः।
अर्थ: गरुड़ को अपना वाहन बनाने वाले।
603. ॐ बाणासुरपुरीरोद्ध्रे नमः।
अर्थ: बाणासुर की नगरी को घेरने वाले।
604. ॐ रक्षाज्वलनयन्त्रजिते नमः।
अर्थ: रक्षा के लिए प्रज्वलित अग्नि-शक्ति को जीतने वाले।
605. ॐ धूतप्रमथसंरम्भाय नमः।
अर्थ: प्रमथगण के उग्र आक्रमण को शांत करने वाले।
606. ॐ जितमाहेश्वरज्वराय नमः।
अर्थ: माहेश्वर ज्वर को पराजित करने वाले।
607. ॐ षट्चक्रशक्तिनिर्जेत्रे नमः।
अर्थ: छह चक्रों की शक्तियों पर विजय पाने वाले।
608. ॐ भूतभेतालमोहकृते नमः।
अर्थ: भूत-प्रेत आदि को मोहित करने वाले।
609. ॐ शम्भुत्रिशूलजिते नमः।
अर्थ: शम्भु के त्रिशूल को जीतने वाले।
610. ॐ शम्भुजृम्भणाय नमः।
अर्थ: शम्भु को अपनी दिव्य शक्ति का अनुभव कराने वाले।
611. ॐ शम्भुसंस्तुताय नमः।
अर्थ: भगवान शम्भु द्वारा स्तुति किए गए।
612. ॐ इन्दिरयात्मने नमः।
अर्थ: लक्ष्मीजी के आत्मस्वरूप और प्रिय।
613. ॐ इन्दुहृदयाय नमः।
अर्थ: चन्द्रमा के समान शीतल हृदय वाले।
614. ॐ सर्वयोगेश्वरेश्वराय नमः।
अर्थ: सभी योगेश्वरों के भी ईश्वर।
615. ॐ हिरण्यगर्भहृदयाय नमः।
अर्थ: हिरण्यगर्भ के हृदय में स्थित परमात्मा।
616. ॐ मोहावर्तनिवर्तनाय नमः।
अर्थ: मोह के चक्र से जीवों को बाहर निकालने वाले।
617. ॐ आत्मज्ञाननिधये नमः।
अर्थ: आत्मज्ञान के भंडार।
618. ॐ मेधाकोशाय नमः।
अर्थ: बुद्धि और मेधा के आधार।
619. ॐ तन्मात्ररूपवते नमः।
अर्थ: सूक्ष्म तन्मात्राओं के स्वरूप में स्थित।
620. ॐ इन्द्राय नमः।
अर्थ: इन्द्र के रूप में भी विद्यमान।
621. ॐ अग्निवदनाय नमः।
अर्थ: अग्नि के समान तेजस्वी मुख वाले।
622. ॐ कालनाभाय नमः।
अर्थ: काल के केंद्र और आधार स्वरूप।
623. ॐ सर्वागमाध्वगाय नमः।
अर्थ: सभी आगम और शास्त्रों के मार्ग को जानने वाले।
624. ॐ तुरीयाय नमः।
अर्थ: जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति से परे चौथे परम चेतन स्वरूप।
625. ॐ सर्वधीसाक्षिणे नमः।
अर्थ: सभी बुद्धियों के साक्षी।
626. ॐ द्वन्द्वारामात्मदूरगाय नमः।
अर्थ: द्वंद्वों में रमने वाले मन से दूर परम आत्मस्वरूप।
627. ॐ अज्ञातपाराय नमः।
अर्थ: जिनकी सीमा को कोई नहीं जान सकता।
628. ॐ वश्यश्रियै नमः।
अर्थ: जिनकी दिव्य श्री और शक्ति सबको आकर्षित करती है।
629. ॐ अव्याकृतविहारवते नमः।
अर्थ: अव्यक्त और दिव्य स्वरूप में विचरण करने वाले।
630. ॐ आत्मप्रदीपाय नमः।
अर्थ: स्वयं प्रकाशमान और आत्मज्ञान का दीपक।
631. ॐ विज्ञानमात्रात्मने नमः।
अर्थ: शुद्ध दिव्य ज्ञानस्वरूप।
632. ॐ श्रीनिकेतनाय नमः।
अर्थ: श्री अर्थात लक्ष्मी का निवासस्थान।
633. ॐ बाणबाहुवनच्छेत्रे नमः।
अर्थ: बाणासुर की अनेक भुजाओं को काटने वाले।
634. ॐ महेन्द्रप्रीतिवर्धनाय नमः।
अर्थ: इन्द्र को प्रसन्न करने वाले और उनका आनंद बढ़ाने वाले।
635. ॐ अनिरुद्धनिरोधज्ञाय नमः।
अर्थ: अनिरुद्ध के बंधन और स्थिति को जानने वाले।
636. ॐ जलेशाहृतगोकुलाय नमः।
अर्थ: जल के अधिपति द्वारा ले जाए गए गोकुलवासियों को वापस लाने वाले।
637. ॐ जलेशविजयिने नमः।
अर्थ: जल के अधिपति पर विजय पाने वाले।
638. ॐ वीराय नमः।
अर्थ: महान वीर और पराक्रमी।
639. ॐ सत्राजिद्रत्नयाचकाय नमः।
अर्थ: सत्राजित से रत्न माँगने वाले।
640. ॐ प्रसेनान्वेषणोद्युक्ताय नमः।
अर्थ: प्रसेन की खोज में तत्पर होने वाले।
641. ॐ जाम्बवद्धृतरत्नदाय नमः।
अर्थ: जाम्बवान से प्राप्त रत्न को वापस देने वाले।
642. ॐ जितर्क्षराजतनयाहर्त्रे नमः।
अर्थ: ऋक्षराज की पुत्री जाम्बवती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने वाले।
643. ॐ जाम्बवतीप्रियाय नमः।
अर्थ: जाम्बवती के प्रिय।
644. ॐ सत्यभामाप्रियाय नमः।
अर्थ: सत्यभामा के प्रिय।
645. ॐ कामाय नमः।
अर्थ: प्रेम और कामना के परम स्वरूप।
646. ॐ शतधन्वशिरोहराय नमः।
अर्थ: शतधन्वा का सिर काटने वाले।
647. ॐ कालिन्दीपतये नमः।
अर्थ: कालिंदी के पति।
648. ॐ अक्रूरबन्धवे नमः।
अर्थ: अक्रूर के प्रिय संबंधी और मित्र।
649. ॐ अक्रूररत्नदाय नमः।
अर्थ: अक्रूर को रत्न प्रदान करने वाले।
650. ॐ कैकयीरमणाय नमः।
अर्थ: कैकेयी-कुल की राजकुमारी के प्रिय पति।
651–700
651. ॐ भद्राभर्त्रे नमः।
अर्थ: भद्रा के पति।
652. ॐ नाग्नजितीधवाय नमः।
अर्थ: नाग्नजिती के पति।
653. ॐ माद्रीमनोहराय नमः।
अर्थ: माद्री के मन को मोहित करने वाले।
654. ॐ शब्याप्राणबन्धवे नमः।
अर्थ: शैब्या के अत्यंत प्रिय और जीवन के आधार।
655. ॐ उरुक्रमाय नमः।
अर्थ: महान कर्म करने वाले।
656. ॐ सुशीलादयिताय नमः।
अर्थ: सुशीला के प्रिय।
657. ॐ मित्रविन्दानेत्रमहोत्सवाय नमः।
अर्थ: मित्रविंदा के नेत्रों के लिए महान आनंद का कारण।
658. ॐ लक्ष्मणावल्लभाय नमः।
अर्थ: लक्ष्मणा के प्रिय पति।
659. ॐ रुद्धप्राग्ज्योतिषमहापुराय नमः।
अर्थ: प्राग्ज्योतिषपुर को घेरने और जीतने वाले।
660. ॐ सुरपाशावृतिच्छेदिने नमः।
अर्थ: देवताओं को बाँधने वाले बंधनों को काटने वाले।
661. ॐ मुरारये नमः।
अर्थ: मुर नामक दैत्य के शत्रु और वधकर्ता।
662. ॐ क्रूरयुद्धविदे नमः।
अर्थ: कठिन और भयंकर युद्ध में निपुण।
663. ॐ हयग्रीवशिरोहर्त्रे नमः।
अर्थ: हयग्रीव का सिर काटने वाले।
664. ॐ सर्वात्मने नमः।
अर्थ: सभी प्राणियों के आत्मस्वरूप।
665. ॐ सर्वदर्शनाय नमः।
अर्थ: सबको देखने वाले और सर्वत्र दर्शन देने वाले।
666. ॐ नरकासुरविच्छेत्रे नमः।
अर्थ: नरकासुर का वध करने वाले।
667. ॐ नरकात्मजराज्यदाय नमः।
अर्थ: नरकासुर के पुत्र को राज्य प्रदान करने वाले।
668. ॐ पृथ्वीस्तुताय नमः।
अर्थ: पृथ्वी देवी द्वारा स्तुति किए गए।
669. ॐ प्रकाशात्मने नमः।
अर्थ: प्रकाश और चेतना के स्वरूप।
670. ॐ हृद्याय नमः।
अर्थ: हृदय को प्रिय लगने वाले।
671. ॐ यज्ञफलप्रदाय नमः।
अर्थ: यज्ञ का फल प्रदान करने वाले।
672. ॐ गुणग्राहिणे नमः।
अर्थ: भक्तों के गुणों को स्वीकार करने वाले।
673. ॐ गुणद्रष्ट्रे नमः।
अर्थ: सभी गुणों को देखने और जानने वाले।
674. ॐ गूढस्वात्मने नमः।
अर्थ: जिनका आत्मस्वरूप अत्यंत गूढ़ है।
675. ॐ विभूतिमते नमः।
अर्थ: अनंत दिव्य विभूतियों से युक्त।
676. ॐ कवये नमः।
अर्थ: सर्वज्ञ और दूरदर्शी।
677. ॐ जगदुपद्रष्ट्रे नमः।
अर्थ: पूरे जगत के साक्षी और निरीक्षक।
678. ॐ परमाक्षरविग्रहाय नमः।
अर्थ: परम अक्षर ब्रह्म के स्वरूप।
679. ॐ प्रपन्नपालनाय नमः।
अर्थ: शरण में आए भक्तों की रक्षा करने वाले।
680. ॐ मालिने नमः।
अर्थ: दिव्य माला धारण करने वाले।
681. ॐ महते नमः।
अर्थ: महान और सर्वोच्च।
682. ॐ ब्रह्मविवर्धनाय नमः।
अर्थ: ब्रह्मज्ञान और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ाने वाले।
683. ॐ वाच्यवाचकशक्त्यर्थाय नमः।
अर्थ: शब्द और उसके अर्थ की शक्ति के मूल आधार।
684. ॐ सर्वव्याकृतसिद्धिदाय नमः।
अर्थ: सभी प्रकट शक्तियों और कार्यों की सिद्धि देने वाले।
685. ॐ स्वयम्प्रभवे नमः।
अर्थ: स्वयं प्रकाशमान और स्वयं सिद्ध प्रभु।
686. ॐ अनिर्वेद्याय नमः।
अर्थ: जिनमें कभी निराशा या खिन्नता नहीं होती।
687. ॐ स्वप्रकाशाय नमः।
अर्थ: स्वयं प्रकाशित रहने वाले।
688. ॐ चिरन्तनाय नमः।
अर्थ: सनातन और अनादि-अनंत।
689. ॐ नादात्मने नमः।
अर्थ: दिव्य नाद के स्वरूप।
690. ॐ मन्त्रकोटीशाय नमः।
अर्थ: करोड़ों मंत्रों के अधिपति।
691. ॐ नानावादनिरोधकाय नमः।
अर्थ: अनेक प्रकार के विवाद और मतभेदों को शांत करने वाले।
692. ॐ कन्दर्पकोटिलावण्याय नमः।
अर्थ: करोड़ों कामदेवों के समान अनुपम सुंदर।
693. ॐ परार्थैकप्रयोजकाय नमः।
अर्थ: दूसरों के कल्याण के लिए ही कार्य करने वाले।
694. ॐ अमरीकृतदेवौघाय नमः।
अर्थ: देवताओं के समूह को अमरत्व प्रदान करने वाले।
695. ॐ कन्यकाबन्धमोचनाय नमः।
अर्थ: कन्याओं को बंधन से मुक्त करने वाले।
696. ॐ षोडशस्त्रीसहस्रेशाय नमः।
अर्थ: सोलह हजार स्त्रियों के स्वामी।
697. ॐ कान्ताय नमः।
अर्थ: अत्यंत सुंदर और प्रिय।
698. ॐ कान्तामनोभवाय नमः।
अर्थ: अपनी प्रियाओं के मन में प्रेम उत्पन्न करने वाले।
699. ॐ क्रीडारत्नाचलाहर्त्रे नमः।
अर्थ: क्रीड़ा के लिए रत्नों से युक्त पर्वत को लाने वाले।
700. ॐ वरुणच्छत्रशोभिताय नमः।
अर्थ: वरुण के दिव्य छत्र से सुशोभित।
701–750
701. ॐ शक्राभिवन्दिताय नमः।
अर्थ: इन्द्र द्वारा वंदित।
702. ॐ शक्रजननीकुण्डलप्रदाय नमः।
अर्थ: इन्द्र की माता अदिति को उनके कुंडल वापस देने वाले।
703. ॐ अदितिप्रस्तुतस्तोत्राय नमः।
अर्थ: अदिति द्वारा स्तुति किए गए।
704. ॐ ब्राह्मणोद्घुष्टचेष्टनाय नमः।
अर्थ: ब्राह्मणों द्वारा प्रशंसित और घोषित दिव्य कर्मों वाले।
705. ॐ पुराणाय नमः।
अर्थ: सनातन और प्राचीन परम पुरुष।
706. ॐ संयमिने नमः।
अर्थ: पूर्ण संयम रखने वाले।
707. ॐ जन्मालिप्ताय नमः।
अर्थ: जन्म लेने पर भी जन्म के बंधन से अछूते रहने वाले।
708. ॐ षड्विंशकाय नमः।
अर्थ: छब्बीसवें तत्त्व के रूप में वर्णित परम तत्त्व।
709. ॐ अर्थदाय नमः।
अर्थ: जीवन के उद्देश्य और आवश्यक फल प्रदान करने वाले।
710. ॐ यशस्यनीतये नमः।
अर्थ: यश और सदाचार के मार्ग को स्थापित करने वाले।
711. ॐ आद्यन्तरहिताय नमः।
अर्थ: जिनका न आदि है न अंत।
712. ॐ सत्कथाप्रियाय नमः।
अर्थ: भगवान की पवित्र कथाओं को प्रिय मानने वाले।
713. ॐ ब्रह्मबोधाय नमः।
अर्थ: ब्रह्मज्ञान प्रदान करने वाले।
714. ॐ परानन्दाय नमः।
अर्थ: परम आनंद के स्वरूप।
715. ॐ पारिजातापहारकाय नमः।
अर्थ: पारिजात वृक्ष को लाने वाले।
716. ॐ पौण्ड्रकप्राणहरणाय नमः।
अर्थ: पौण्ड्रक का वध करने वाले।
717. ॐ काशिराजनिषूदनाय नमः।
अर्थ: काशी के राजा का संहार करने वाले।
718. ॐ कृत्यागर्वप्रशमनाय नमः।
अर्थ: कृत्या की शक्ति और अहंकार को शांत करने वाले।
719. ॐ विचक्रवधदीक्षिताय नमः।
अर्थ: विचक्र के वध के लिए संकल्पित होने वाले।
720. ॐ हंसविध्वंसनाय नमः।
अर्थ: हंस नामक शत्रु का विनाश करने वाले।
721. ॐ साम्बजनकाय नमः।
अर्थ: साम्ब के पिता।
722. ॐ डिम्भकार्दनाय नमः।
अर्थ: डिम्भक आदि शत्रुओं का दमन करने वाले।
723. ॐ मुनये नमः।
अर्थ: मुनियों के समान शांत और मननशील।
724. ॐ गोप्त्रे नमः।
अर्थ: सभी की रक्षा करने वाले।
725. ॐ पितृवरप्रदाय नमः।
अर्थ: अपने पिता को वर प्रदान करने वाले।
726. ॐ सवनदीक्षिताय नमः।
अर्थ: यज्ञीय अनुष्ठान में दीक्षित होने वाले।
727. ॐ रथिने नमः।
अर्थ: रथ पर आरूढ़ रहने वाले।
728. ॐ सारथ्यनिर्देष्ट्रे नमः।
अर्थ: सारथी को उचित दिशा और निर्देश देने वाले।
729. ॐ फाल्गुनाय नमः।
अर्थ: अर्जुन के प्रिय और फाल्गुन से संबंधित।
730. ॐ फाल्गुनिप्रियाय नमः।
अर्थ: अर्जुन को प्रिय मानने वाले।
731. ॐ सप्ताब्धिस्तम्भनोद्भूताय नमः।
अर्थ: सातों समुद्रों की शक्ति को रोकने वाले।
732. ॐ हरये नमः।
अर्थ: दुःख और पाप हरने वाले।
733. ॐ सप्ताब्धिभेदनाय नमः।
अर्थ: सात समुद्रों को पार या भेद करने वाले।
734. ॐ आत्मप्रकाशाय नमः।
अर्थ: आत्मज्ञान का प्रकाश देने वाले।
735. ॐ पूर्णश्रिये नमः।
अर्थ: पूर्ण ऐश्वर्य और दिव्य श्री से युक्त।
736. ॐ आदिनारायणेक्षिताय नमः।
अर्थ: आदि नारायण के रूप में पूजित और दृष्टिगोचर होने वाले।
737. ॐ विप्रपुत्रप्रदाय नमः।
अर्थ: ब्राह्मण के पुत्र को वापस प्रदान करने वाले।
738. ॐ सर्वमातृसुतप्रदाय नमः।
अर्थ: माताओं को उनके पुत्र प्रदान करने वाले।
739. ॐ पार्थविस्मयकृते नमः।
अर्थ: अर्जुन को आश्चर्यचकित करने वाले।
740. ॐ पार्थप्रणवार्थप्रबोधनाय नमः।
अर्थ: अर्जुन को प्रणव और उसके परम अर्थ का ज्ञान कराने वाले।
741. ॐ कैलासयात्रासुमुखाय नमः।
अर्थ: कैलास यात्रा के लिए प्रसन्नतापूर्वक जाने वाले।
742. ॐ बदर्याश्रमभूषणाय नमः।
अर्थ: बदरिकाश्रम की शोभा बढ़ाने वाले।
743. ॐ घण्टाकर्णक्रियामौढ्यात्तेषिताय नमः।
अर्थ: घण्टाकर्ण की भक्ति और साधना से प्रसन्न होकर उसके द्वारा चाही गई कृपा करने वाले।
744. ॐ भक्तवत्सलाय नमः।
अर्थ: भक्तों से अत्यंत प्रेम करने वाले।
745. ॐ मुनिवृन्दादिभिर्ध्येयाय नमः।
अर्थ: मुनियों के समूह द्वारा ध्यान किए जाने वाले।
746. ॐ घण्टाकर्णवरप्रदाय नमः।
अर्थ: घण्टाकर्ण को वरदान देने वाले।
747. ॐ तपश्चर्यापराय नमः।
अर्थ: तप और साधना में स्थित रहने वाले।
748. ॐ चीरवाससे नमः।
अर्थ: तपस्वी के समान साधारण वस्त्र धारण करने वाले।
749. ॐ पिङ्गजटाधराय नमः।
अर्थ: पिंगल वर्ण की जटाएँ धारण करने वाले।
750. ॐ प्रत्यक्षीकृतभूतेशाय नमः।
अर्थ: भगवान शिव को प्रत्यक्ष दर्शन देने वाले।
751–800
751. ॐ शिवस्तोत्रे नमः।
अर्थ: शिव की स्तुति करने वाले।
752. ॐ शिवस्तुताय नमः।
अर्थ: भगवान शिव द्वारा स्तुति किए गए।
753. ॐ कृष्णास्वयंवरालोककौतुकिने नमः।
अर्थ: कृष्णा अर्थात द्रौपदी के स्वयंवर को देखने में उत्सुक रहने वाले।
754. ॐ सर्वसम्मताय नमः।
अर्थ: सभी के द्वारा स्वीकार और सम्मानित।
755. ॐ बलसंरम्भशमनाय नमः।
अर्थ: बलराम के क्रोध या उग्रता को शांत करने वाले।
756. ॐ बलदर्शितपाण्डवाय नमः।
अर्थ: बलराम को पाण्डवों का परिचय कराने वाले।
757. ॐ यतिवेषार्जुनाभीष्टदायिने नमः।
अर्थ: यति का वेश धारण किए अर्जुन की इच्छा पूरी करने वाले।
758. ॐ सर्वात्मगोचराय नमः।
अर्थ: सभी आत्माओं के लिए ज्ञात और अनुभव किए जा सकने वाले।
759. ॐ सुभद्राफाल्गुनोद्वाहकर्त्रे नमः।
अर्थ: सुभद्रा और अर्जुन के विवाह में सहायक बनने वाले।
760. ॐ प्रीणितफाल्गुनाय नमः।
अर्थ: अर्जुन को प्रसन्न करने वाले।
761. ॐ खाण्डवप्रीणीतार्चिष्मते नमः।
अर्थ: खाण्डव वन की अग्नि को संतुष्ट करने में सहायक बनने वाले।
762. ॐ मयदानवमोचनाय नमः।
अर्थ: मय दानव को संकट से मुक्त करने वाले।
763. ॐ सुलभाय नमः।
अर्थ: सच्ची भक्ति से सहज ही प्राप्त होने वाले।
764. ॐ राजसूयार्हयुधिष्ठिरनियोजकाय नमः।
अर्थ: युधिष्ठिर को राजसूय यज्ञ के योग्य कार्यों के लिए प्रेरित करने वाले।
765. ॐ भीमार्दितजरासन्धाय नमः।
अर्थ: भीम के द्वारा जरासंध का वध कराने वाले।
766. ॐ मागधात्मजराज्यदाय नमः।
अर्थ: मगधराज जरासंध के पुत्र को राज्य प्रदान करने वाले।
767. ॐ राजबन्धननिर्मोक्त्रे नमः।
अर्थ: राजाओं को बंधन से मुक्त करने वाले।
768. ॐ राजसूयाग्रपूजनाय नमः।
अर्थ: राजसूय यज्ञ में अग्रपूजा प्राप्त करने वाले।
769. ॐ चैद्याद्यसहनाय नमः।
अर्थ: शिशुपाल आदि विरोधियों के अपमान को सहन करने वाले।
770. ॐ भीष्मस्तुताय नमः।
अर्थ: भीष्म द्वारा स्तुति किए गए।
771. ॐ सात्वतपूर्वजाय नमः।
अर्थ: सात्वत वंश के अग्रज और प्रमुख।
772. ॐ सर्वात्मने नमः।
अर्थ: सभी प्राणियों के आत्मस्वरूप।
773. ॐ अर्थसमाहर्त्रे नमः।
अर्थ: सभी उद्देश्यों और प्रयोजनों को पूर्ण करने वाले।
774. ॐ मन्दराचलधारकाय नमः।
अर्थ: मंदराचल पर्वत को धारण करने वाले।
775. ॐ यज्ञावताराय नमः।
अर्थ: यज्ञ के रूप में प्रकट होने वाले।
776. ॐ प्रह्लादप्रतिज्ञापरिपालकाय नमः।
अर्थ: प्रह्लाद की रक्षा की प्रतिज्ञा का पालन करने वाले।
777. ॐ बलियज्ञसभाध्वंसिने नमः।
अर्थ: बलि की यज्ञसभा से संबंधित बाधा को दूर करने वाले।
778. ॐ दृप्तक्षत्रकुलान्तकाय नमः।
अर्थ: अत्याचारी और अहंकारी क्षत्रिय कुलों का अंत करने वाले।
779. ॐ दशग्रीवान्तकाय नमः।
अर्थ: दस सिर वाले रावण का अंत करने वाले।
780. ॐ ओञ्जेत्रे नमः।
अर्थ: विजय प्राप्त करने वाले।
781. ॐ रेवतीप्रेमवल्लभाय नमः।
अर्थ: रेवती के प्रिय।
782. ॐ सर्वावताराधिष्ठात्रे नमः।
अर्थ: सभी अवतारों के मूल अधिष्ठाता।
783. ॐ वेदबाह्यविमोहनाय नमः।
अर्थ: वेदमार्ग से बाहर गए लोगों को मोहित कर उचित मार्ग की ओर ले जाने वाले।
784. ॐ कलिदोषनिराकर्त्रे नमः।
अर्थ: कलियुग के दोषों को दूर करने वाले।
785. ॐ दशनाम्ने नमः।
अर्थ: दसों दिशाओं में प्रसिद्ध नाम और यश वाले।
786. ॐ दृढव्रताय नमः।
अर्थ: दृढ़ संकल्प और व्रत वाले।
787. ॐ अमेयात्मने नमः।
अर्थ: जिनके स्वरूप को मापा नहीं जा सकता।
788. ॐ जगत्स्वामिने नमः।
अर्थ: पूरे जगत के स्वामी।
789. ॐ वाग्मिने नमः।
अर्थ: मधुर और प्रभावशाली वाणी वाले।
790. ॐ चैद्यशिरोहराय नमः।
अर्थ: चेदिराज शिशुपाल का सिर काटने वाले।
791. ॐ द्रौपदीरचितस्तोत्राय नमः।
अर्थ: द्रौपदी द्वारा स्तुति किए गए।
792. ॐ केशवाय नमः।
अर्थ: केशी दैत्य का वध करने वाले तथा सुंदर केश वाले भगवान।
793. ॐ पुरुषोत्तमाय नमः।
अर्थ: सभी पुरुषों में सर्वोत्तम परम पुरुष।
794. ॐ नारायणाय नमः।
अर्थ: समस्त जीवों के आधार और परम आश्रय।
795. ॐ मधुपतये नमः।
अर्थ: मधु के स्वामी और मधुर स्वरूप वाले।
796. ॐ माधवाय नमः।
अर्थ: लक्ष्मीपति और ज्ञानस्वरूप भगवान।
797. ॐ दोषवर्जिताय नमः।
अर्थ: सभी दोषों से रहित।
798. ॐ गोविन्दाय नमः।
अर्थ: गौ, इंद्रियों और पृथ्वी को आनंद देने वाले।
799. ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः।
अर्थ: कमल के समान सुंदर नेत्रों वाले।
800. ॐ विष्णवे नमः।
अर्थ: सर्वव्यापक भगवान।
801–850
801. ॐ मधुसूदनाय नमः।
अर्थ: मधु दैत्य का वध करने वाले।
802. ॐ त्रिविक्रमाय नमः।
अर्थ: तीनों लोकों में महान चरण रखने वाले।
803. ॐ त्रिलोकेशाय नमः।
अर्थ: तीनों लोकों के स्वामी।
804. ॐ वामनाय नमः।
अर्थ: वामन रूप धारण करने वाले।
805. ॐ श्रीधराय नमः।
अर्थ: श्री अर्थात लक्ष्मी को धारण करने वाले।
806. ॐ पुंसे नमः।
अर्थ: परम पुरुष।
807. ॐ हृषीकेशाय नमः।
अर्थ: सभी इंद्रियों के स्वामी।
808. ॐ वासुदेवाय नमः।
अर्थ: वसुदेव के पुत्र और सर्वव्यापक परमात्मा।
809. ॐ पद्मनाभाय नमः।
अर्थ: जिनकी नाभि से कमल प्रकट हुआ।
810. ॐ महाह्रदाय नमः।
अर्थ: महान और अथाह गहराई वाले।
811. ॐ दामोदराय नमः।
अर्थ: जिनका उदर रस्सी से बाँधा गया।
812. ॐ चतुर्व्यूहाय नमः।
अर्थ: चार दिव्य व्यूहों के स्वरूप।
813. ॐ पाञ्चालीमानरक्षणाय नमः।
अर्थ: द्रौपदी के सम्मान की रक्षा करने वाले।
814. ॐ साल्वघ्नाय नमः।
अर्थ: साल्व का वध करने वाले।
815. ॐ समरश्लाधिने नमः।
अर्थ: युद्धभूमि में अपने पराक्रम से प्रशंसित होने वाले।
816. ॐ दन्तवक्त्रनिबर्हणाय नमः।
अर्थ: दन्तवक्र का वध करने वाले।
817. ॐ दामोदरप्रियसखाय नमः।
अर्थ: दामोदर के प्रिय सखा और मित्र।
818. ॐ पृथुकास्वादनप्रियाय नमः।
अर्थ: भक्त द्वारा प्रेम से अर्पित चिवड़ा/पृथुक को प्रेमपूर्वक स्वीकार करने वाले।
819. ॐ घृणीने नमः।
अर्थ: तेजस्वी और करुणामय।
820. ॐ दामोदराय नमः।
अर्थ: माता यशोदा द्वारा उदर में रस्सी से बाँधे गए भगवान।
821. ॐ श्रीदाय नमः।
अर्थ: धन, ऐश्वर्य और श्री प्रदान करने वाले।
822. ॐ गोपीपुनरवेक्षकाय नमः।
अर्थ: गोपियों की ओर पुनः प्रेमपूर्वक देखने वाले।
823. ॐ गोपिकामुक्तिदाय नमः।
अर्थ: गोपियों को मुक्ति प्रदान करने वाले।
824. ॐ योगिने नमः।
अर्थ: परम योगी।
825. ॐ दुर्वासस्तृप्तिकारकाय नमः।
अर्थ: दुर्वासा मुनि को तृप्त करने वाले।
826. ॐ अविज्ञातव्रजाकीर्णपाण्डवालोकनाय नमः।
अर्थ: गुप्त रूप से व्रज और पाण्डवों की स्थिति को देखने वाले।
827. ॐ जयिने नमः।
अर्थ: सदा विजय प्राप्त करने वाले।
828. ॐ पार्थसारथ्यनिरताय नमः।
अर्थ: अर्जुन के सारथी के रूप में समर्पित रहने वाले।
829. ॐ प्राज्ञाय नमः।
अर्थ: परम बुद्धिमान और ज्ञानी।
830. ॐ पाण्डवदौत्यकृते नमः।
अर्थ: पाण्डवों के दूत बनकर कार्य करने वाले।
831. ॐ विदुरातिथ्यसन्तुष्टाय नमः।
अर्थ: विदुर के आतिथ्य से प्रसन्न होने वाले।
832. ॐ कुन्तीसन्तोषदायकाय नमः।
अर्थ: माता कुंती को संतोष और आनंद देने वाले।
833. ॐ सुयोधनतिरस्कर्त्रे नमः।
अर्थ: सुयोधन अर्थात दुर्योधन के अनुचित व्यवहार को अस्वीकार करने वाले।
834. ॐ दुर्योधनविकारविदे नमः।
अर्थ: दुर्योधन के दोषपूर्ण स्वभाव को जानने वाले।
835. ॐ विदुराभिष्टुताय नमः।
अर्थ: विदुर द्वारा स्तुति किए गए।
836. ॐ नित्याय नमः।
अर्थ: शाश्वत और नित्य।
837. ॐ वार्ष्णेयाय नमः।
अर्थ: वृष्णिवंश में जन्म लेने वाले।
838. ॐ मङ्गलात्मकाय नमः।
अर्थ: मंगलमय स्वरूप वाले।
839. ॐ पञ्चविंशतितत्त्वेशाय नमः।
अर्थ: पच्चीस तत्त्वों के अधीश्वर।
840. ॐ चतुर्विंशतिदेहभाजे नमः।
अर्थ: चौबीस तत्त्वों से बने शरीर में भी स्थित परमात्मा।
841. ॐ सर्वानुग्राहकाय नमः।
अर्थ: सभी पर कृपा करने वाले।
842. ॐ सर्वदाशार्हसततार्चिताय नमः।
अर्थ: दशार्ह/यादव वंश द्वारा सदा पूजित।
843. ॐ अचिन्त्याय नमः।
अर्थ: जिनका स्वरूप मन और बुद्धि से परे है।
844. ॐ मधुरालापाय नमः।
अर्थ: मधुर वाणी बोलने वाले।
845. ॐ साधुदर्शिने नमः।
अर्थ: संतों और सज्जनों के प्रति कृपादृष्टि रखने वाले।
846. ॐ दुरासदाय नमः।
अर्थ: दुष्टों के लिए जिन्हें प्राप्त करना कठिन है।
847. ॐ मनुष्यधर्मानुगताय नमः।
अर्थ: मनुष्य रूप में रहते हुए मानव जीवन के धर्मों का पालन करने वाले।
848. ॐ कौरवेन्द्रक्षयेक्षित्रे नमः।
अर्थ: कौरवों के विनाश को देखने वाले।
849. ॐ उपेन्द्राय नमः।
अर्थ: इन्द्र के छोटे भाई के रूप में प्रकट होने वाले।
850. ॐ दानवारातये नमः।
अर्थ: दानवों के शत्रु और उनका विनाश करने वाले।
851–900
851. ॐ उरुगीताय नमः।
अर्थ: जिनकी महान महिमा का गान किया जाता है।
852. ॐ महाद्युतये नमः।
अर्थ: महान तेज से युक्त।
853. ॐ ब्रह्मण्यदेवाय नमः।
अर्थ: ब्राह्मणों और धर्म के रक्षक भगवान।
854. ॐ श्रुतिमते नमः।
अर्थ: वेदों और दिव्य ज्ञान से युक्त।
855. ॐ गोब्राह्मणहिताशयाय नमः।
अर्थ: गौ और ब्राह्मणों के कल्याण की भावना रखने वाले।
856. ॐ वरशीलाय नमः।
अर्थ: श्रेष्ठ चरित्र और आचरण वाले।
857. ॐ शिवारम्भाय नमः।
अर्थ: मंगलमय कार्यों का शुभ आरंभ करने वाले।
858. ॐ सुविज्ञानविमूर्तिमते नमः।
अर्थ: श्रेष्ठ दिव्य ज्ञान के साकार स्वरूप।
859. ॐ स्वभावशुद्धाय नमः।
अर्थ: जिनका स्वभाव पूर्णतः शुद्ध है।
860. ॐ सन्मित्राय नमः।
अर्थ: सच्चे और कल्याणकारी मित्र।
861. ॐ सुशरण्याय नमः।
अर्थ: उत्तम और सुरक्षित शरण देने वाले।
862. ॐ सुलक्षणाय नमः।
अर्थ: शुभ लक्षणों से युक्त।
863. ॐ धृतराष्ट्रगताय नमः।
अर्थ: धृतराष्ट्र के पास जाने वाले।
864. ॐ दृष्टिप्रदाय नमः।
अर्थ: दिव्य दृष्टि प्रदान करने वाले।
865. ॐ कर्णविभेदनाय नमः।
अर्थ: कर्ण के कवच-कुंडल से संबंधित रहस्य को भेदने वाले।
866. ॐ प्रतोदधृते नमः।
अर्थ: सारथी के हाथ में रहने वाला चाबुक धारण करने वाले।
867. ॐ विश्वरूपविस्मारितधनञ्जयाय नमः।
अर्थ: विश्वरूप दर्शन से अर्जुन को आश्चर्य और विस्मय में डालने वाले।
868. ॐ सामगानप्रियाय नमः।
अर्थ: सामवेद के मधुर गान को प्रिय मानने वाले।
869. ॐ धर्मधेनवे नमः।
अर्थ: धर्मरूपी कामधेनु के समान सभी कल्याण देने वाले।
870. ॐ वर्णोत्तमाय नमः।
अर्थ: सभी गुणों में श्रेष्ठ और उत्तम।
871. ॐ अव्ययाय नमः।
अर्थ: जिनका कभी क्षय नहीं होता।
872. ॐ चतुर्युगक्रियाकर्त्रे नमः।
अर्थ: चारों युगों के धर्म और कार्यों को संचालित करने वाले।
873. ॐ विश्वरूपप्रदर्शकाय नमः।
अर्थ: अर्जुन को अपना विराट विश्वरूप दिखाने वाले।
874. ॐ ब्रह्मबोधपरित्रातपार्थाय नमः।
अर्थ: ब्रह्मज्ञान देकर अर्जुन की रक्षा करने वाले।
875. ॐ भीष्मार्थचक्रभृते नमः।
अर्थ: भीष्म की प्रतिज्ञा के प्रसंग में चक्र उठाने वाले।
876. ॐ अर्जुनायासविध्वंसिने नमः।
अर्थ: अर्जुन की कठिनाइयों और थकान को दूर करने वाले।
877. ॐ कालदंष्ट्राविभूषणाय नमः।
अर्थ: काल की दंष्ट्राओं के समान प्रचंड शक्ति वाले।
878. ॐ सुजातानन्तमहिम्ने नमः।
अर्थ: जिनकी अनंत महिमा दिव्य रूप से प्रकट है।
879. ॐ स्वप्नव्यापारितार्जुनाय नमः।
अर्थ: स्वप्न में भी अर्जुन के कार्यों में सहायक रहने वाले।
880. ॐ अकालसन्ध्याघटनाय नमः।
अर्थ: समय से पहले संध्या जैसा वातावरण उत्पन्न करने वाले।
881. ॐ चक्रान्तरितभास्कराय नमः।
अर्थ: अपने चक्र से सूर्य को ढक देने वाले।
882. ॐ दुष्टप्रमथनाय नमः।
अर्थ: दुष्टों का दमन करने वाले।
883. ॐ पार्थप्रतिज्ञापरिपालकाय नमः।
अर्थ: अर्जुन की प्रतिज्ञा की रक्षा करने वाले।
884. ॐ सिन्धुराजशिरःपातस्थानवक्त्रे नमः।
अर्थ: जयद्रथ के सिर के गिरने का उचित स्थान बताने वाले।
885. ॐ विवेकदृशे नमः।
अर्थ: विवेकपूर्ण दृष्टि रखने वाले।
886. ॐ सुभद्राशोकहरणाय नमः।
अर्थ: सुभद्रा का शोक दूर करने वाले।
887. ॐ द्रोणोत्सेकादिविस्मिताय नमः।
अर्थ: द्रोण आदि के पराक्रम और घटनाओं से संबंधित प्रसंगों में विस्मयकारी शक्ति दिखाने वाले।
888. ॐ पार्थमन्युनिराकर्त्रे नमः।
अर्थ: अर्जुन के क्रोध को शांत करने वाले।
889. ॐ पाण्डवोत्सवदायकाय नमः।
अर्थ: पाण्डवों को आनंद और विजय प्रदान करने वाले।
890. ॐ अङ्गुष्ठाक्रान्तकौन्तेयरथाय नमः।
अर्थ: अपने पैर के अंगूठे से अर्जुन के रथ को स्थिर रखने वाले।
891. ॐ शक्ताय नमः।
अर्थ: सर्वशक्तिमान।
892. ॐ अहिशीर्षजिते नमः।
अर्थ: सर्प के फन के समान प्रचंड शत्रु पर विजय पाने वाले।
893. ॐ कालकोपप्रशमनाय नमः।
अर्थ: काल के समान प्रचंड क्रोध को शांत करने वाले।
894. ॐ भीमसेनजयप्रदाय नमः।
अर्थ: भीमसेन को विजय दिलाने वाले।
895. ॐ अश्वत्थामवधायासत्रातपाण्डुसुताय नमः।
अर्थ: अश्वत्थामा से उत्पन्न संकट में पाण्डव पुत्रों की रक्षा करने वाले।
896. ॐ कृतिने नमः।
अर्थ: सभी कार्यों को कुशलता से करने वाले।
897. ॐ इषीकास्त्रप्रशमनाय नमः।
अर्थ: इषीका अस्त्र की शक्ति को शांत करने वाले।
898. ॐ द्रौणिरक्षाविचक्षणाय नमः।
अर्थ: द्रोणपुत्र से संबंधित संकट में रक्षा करने में कुशल।
899. ॐ पार्थापहारितद्रौणिचूडामणये नमः।
अर्थ: अर्जुन द्वारा द्रोणपुत्र की चूड़ामणि प्राप्त कराने वाले।
900. ॐ अभङ्गुराय नमः।
अर्थ: जिन्हें कभी नष्ट या विचलित नहीं किया जा सकता।
901–950
901. ॐ धृतराष्ट्रपरामृष्टाभीमप्रतिकृतिस्मयाय नमः।
अर्थ: धृतराष्ट्र द्वारा भीम को पकड़ने के प्रसंग में उनकी माया देखकर आश्चर्य करने वाले।
902. ॐ भीष्मबुद्धिप्रदाय नमः।
अर्थ: भीष्म को दिव्य ज्ञान और बुद्धि प्रदान करने वाले।
903. ॐ शान्ताय नमः।
अर्थ: पूर्णतः शांत स्वरूप वाले।
904. ॐ शरच्चन्द्रनिभाननाय नमः।
अर्थ: शरद पूर्णिमा के चंद्रमा के समान सुंदर मुख वाले।
905. ॐ गदाग्रजन्मने नमः।
अर्थ: गदा के बड़े भाई, अर्थात बलराम के छोटे भाई।
906. ॐ पाञ्चालीप्रतिज्ञापालकाय नमः।
अर्थ: द्रौपदी की प्रतिज्ञा की रक्षा करने वाले।
907. ॐ गान्धारीकोपदृग्गुप्तधर्मसूनवे नमः।
अर्थ: गांधारी के क्रोध से धर्मपुत्र युधिष्ठिर की रक्षा करने वाले।
908. ॐ अनामयाय नमः।
अर्थ: रोग और दुःख से रहित।
909. ॐ प्रपन्नार्तिभयच्छेत्त्रे नमः।
अर्थ: शरणागत के दुःख और भय को दूर करने वाले।
910. ॐ भीष्मशल्यव्यथापहाय नमः।
अर्थ: भीष्म के शरीर में लगे बाणों की पीड़ा को दूर करने वाले।
911. ॐ शान्ताय नमः।
अर्थ: परम शांत स्वरूप वाले।
912. ॐ शान्तनवोदीर्णसर्वधर्मसमाहिताय नमः।
अर्थ: शांतनुपुत्र भीष्म द्वारा बताए गए सभी धर्मों को धारण करने वाले।
913. ॐ स्मारितब्रह्माविद्यार्थप्रीतपार्थाय नमः।
अर्थ: अर्जुन को ब्रह्मविद्या का ज्ञान स्मरण कराने वाले और उन्हें प्रसन्न करने वाले।
914. ॐ महास्त्रविदे नमः।
अर्थ: दिव्य और महान अस्त्रों के ज्ञाता।
915. ॐ प्रसादपरमोदाराय नमः।
अर्थ: अत्यंत उदार और कृपालु।
916. ॐ गाङ्गेयसुगतिप्रदाय नमः।
अर्थ: गंगापुत्र भीष्म को श्रेष्ठ गति प्रदान करने वाले।
917. ॐ विपक्षपक्षक्षयकृते नमः।
अर्थ: अधर्म के पक्ष का नाश करने वाले।
918. ॐ परीक्षित्प्राणरक्षणाय नमः।
अर्थ: राजा परीक्षित के प्राणों की रक्षा करने वाले।
919. ॐ जगद्गुरवे नमः।
अर्थ: पूरे जगत के गुरु।
920. ॐ धर्मसूनोर्वाजिमेधप्रवर्तकाय नमः।
अर्थ: धर्मपुत्र युधिष्ठिर के अश्वमेध यज्ञ को संपन्न कराने में सहायक बनने वाले।
921. ॐ विहितार्थाप्तसत्काराय नमः।
अर्थ: उचित कार्य पूरा होने पर योग्य सम्मान देने वाले।
922. ॐ मासकात्परिवर्तदाय नमः।
अर्थ: समय और अवधि के परिवर्तन का विधान करने वाले।
923. ॐ उत्तङ्कहर्षदाय नमः।
अर्थ: उत्तंक मुनि को प्रसन्न करने वाले।
924. ॐ आत्मीयदिव्यरूपप्रदर्शकाय नमः।
अर्थ: अपना दिव्य और आत्मीय स्वरूप दिखाने वाले।
925. ॐ जनकावगतस्वोक्तभारताय नमः।
अर्थ: अपने द्वारा कही गई भारत-कथा का ज्ञान कराने वाले।
926. ॐ सर्वभावनाय नमः।
अर्थ: सभी का पालन-पोषण और कल्याण करने वाले।
927. ॐ असोढयादवोद्रेकाय नमः।
अर्थ: यादवों की बढ़ती उग्रता को सहन न करने वाले।
928. ॐ विहिताप्तादिपूजनाय नमः।
अर्थ: योग्य अतिथियों और संबंधियों की पूजा-सम्मान की व्यवस्था करने वाले।
929. ॐ समुद्रस्थापिताश्चर्यमुसलाय नमः।
अर्थ: समुद्र में अद्भुत मूसल स्थापित करने वाले।
930. ॐ वृष्णिवाहकाय नमः।
अर्थ: वृष्णिवंशियों का भार संभालने वाले।
931. ॐ मुनिशापायुधाय नमः।
अर्थ: मुनियों के शाप को भी एक दिव्य साधन के रूप में स्वीकार करने वाले।
932. ॐ पद्मासनादित्रिदशार्थिताय नमः।
अर्थ: ब्रह्मा आदि देवताओं द्वारा प्रार्थना किए गए।
933. ॐ सृष्टिप्रत्यवहारोत्काय नमः।
अर्थ: सृष्टि के पुनः अपने मूल में लौटने की प्रक्रिया के लिए तत्पर होने वाले।
934. ॐ स्वधामगमनोत्सुकाय नमः।
अर्थ: अपने दिव्य धाम लौटने के लिए उत्सुक होने वाले।
935. ॐ प्रभासालोकनोद्युक्ताय नमः।
अर्थ: प्रभास क्षेत्र की ओर जाने के लिए तत्पर होने वाले।
936. ॐ नानाविधनिमित्तकृते नमः।
अर्थ: विभिन्न घटनाओं और संकेतों के कारण बनने वाले।
937. ॐ सर्वयादवसंसेव्याय नमः।
अर्थ: सभी यादवों द्वारा सेवा और सम्मान किए जाने वाले।
938. ॐ सर्वोत्कृष्टपरिच्छदाय नमः।
अर्थ: सर्वोत्तम दिव्य सामग्री और ऐश्वर्य से युक्त।
939. ॐ वेलाकाननसञ्चारिणे नमः।
अर्थ: समुद्र तट के वन में विचरण करने वाले।
940. ॐ वेलानिलहृतश्रमाय नमः।
अर्थ: समुद्र की शीतल वायु से अपनी थकान दूर करने वाले।
941. ॐ कालात्मने नमः।
अर्थ: काल के स्वरूप।
942. ॐ यादवाय नमः।
अर्थ: यदुवंश में प्रकट होने वाले।
943. ॐ अनन्ताय नमः।
अर्थ: अनंत और असीम।
944. ॐ स्तुतिसन्तुष्टमानसाय नमः।
अर्थ: भक्तों की स्तुति से प्रसन्न होने वाले।
945. ॐ द्विजालोकनसन्तुष्टाय नमः।
अर्थ: ब्राह्मणों के दर्शन से प्रसन्न होने वाले।
946. ॐ पुण्यतीर्थमहोत्सवाय नमः।
अर्थ: पवित्र तीर्थों को महान उत्सव और पुण्य से युक्त करने वाले।
947. ॐ सत्काराह्लादिताशेषभूसुराय नमः।
अर्थ: सम्मान पाकर सभी ब्राह्मणों को प्रसन्न करने वाले।
948. ॐ सुरवल्लभाय नमः।
अर्थ: देवताओं के प्रिय।
949. ॐ पुण्यतीर्थाप्लुताय नमः।
अर्थ: पवित्र तीर्थों में स्नान करने वाले।
950. ॐ पुण्याय नमः।
अर्थ: स्वयं पुण्यस्वरूप।
951–1000
951. ॐ पुण्यदाय नमः।
अर्थ: पुण्य प्रदान करने वाले।
952. ॐ तीर्थपावनाय नमः।
अर्थ: तीर्थों को भी पवित्र करने वाले।
953. ॐ विप्रसात्कृतगोकोटये नमः।
अर्थ: ब्राह्मणों को करोड़ों गौएँ दान करने वाले।
954. ॐ शतकोटिसुवर्णदाय नमः।
अर्थ: करोड़ों स्वर्ण मुद्राओं के समान महान दान देने वाले।
955. ॐ स्वमायामोहिताशेषवृष्णिवीराय नमः।
अर्थ: अपनी माया से समस्त वृष्णिवीरों को मोहित करने वाले।
956. ॐ विशेषविदे नमः।
अर्थ: सभी विशेष और गूढ़ तत्त्वों को जानने वाले।
957. ॐ जलजायुधनिर्देष्ट्रे नमः।
अर्थ: शंख रूपी जलज अस्त्र का उचित प्रयोग करने वाले।
958. ॐ स्वात्मावेशितयादवाय नमः।
अर्थ: यादवों को अपने दिव्य स्वरूप में समाहित करने वाले।
959. ॐ देवताभीष्टवरदाय नमः।
अर्थ: देवताओं की मनोकामना के अनुसार वर देने वाले।
960. ॐ कृतकृत्याय नमः।
अर्थ: जिनके सभी दिव्य कार्य पूर्ण हो चुके हैं।
961. ॐ प्रसन्नधिये नमः।
अर्थ: प्रसन्न और निर्मल बुद्धि वाले।
962. ॐ स्थिरशेषायुतबलाय नमः।
अर्थ: अनंत और अचल शक्ति से युक्त।
963. ॐ सहस्रफणिवीक्षणाय नमः।
अर्थ: सहस्र फनों वाले शेषनाग द्वारा देखे और पूजित।
964. ॐ ब्रह्मवृक्षवरच्छायासीनाय नमः।
अर्थ: दिव्य ब्रह्मवृक्ष की उत्तम छाया में विराजमान होने वाले।
965. ॐ पद्मासनस्थिताय नमः।
अर्थ: पद्मासन में स्थित होने वाले।
966. ॐ प्रत्यगात्मने नमः।
अर्थ: प्रत्येक जीव के भीतर स्थित अंतरात्मा।
967. ॐ स्वभावार्थाय नमः।
अर्थ: अपने शुद्ध स्वभाव में स्थित परम तत्त्व।
968. ॐ प्रणिधानपरायणाय नमः।
अर्थ: ध्यान और पूर्ण समर्पण में स्थित रहने वाले।
969. ॐ व्याधेषुविद्धपूज्याङ्घ्रये नमः।
अर्थ: व्याध के बाण से विद्ध होने पर भी जिनके चरण पूजनीय रहे।
970. ॐ निषादभयमोचनाय नमः।
अर्थ: निषाद अर्थात शिकारी का भय दूर करने वाले।
971. ॐ पुलिन्दस्तुतिसन्तुष्टाय नमः।
अर्थ: पुलिंद द्वारा की गई स्तुति से प्रसन्न होने वाले।
972. ॐ पुलिन्दसुगतिप्रदाय नमः।
अर्थ: पुलिंद को उत्तम गति प्रदान करने वाले।
973. ॐ दारुकार्पितपार्थादिकरणीयोक्तये नमः।
अर्थ: दारुक को अर्जुन आदि के लिए आवश्यक कार्यों का निर्देश देने वाले।
974. ॐ ईशित्रे नमः।
अर्थ: सबके शासक और स्वामी।
975. ॐ दिव्यदुन्दुभिसंयुक्ताय नमः।
अर्थ: दिव्य दुंदुभियों के नाद से सुशोभित।
976. ॐ पुष्पवृष्टिप्रपूजिताय नमः।
अर्थ: देवताओं द्वारा पुष्पवर्षा से पूजित।
977. ॐ पुराणाय नमः।
अर्थ: सनातन और अनादि भगवान।
978. ॐ परमेशानाय नमः।
अर्थ: परम ईश्वर और सर्वोच्च स्वामी।
979. ॐ पूर्णभूम्ने नमः।
अर्थ: पूर्ण और अनंत सत्ता से युक्त।
980. ॐ परिष्टुताय नमः।
अर्थ: सभी ओर से स्तुति किए गए।
981. ॐ शुकवागमृताब्धीन्दवे नमः।
अर्थ: शुकदेव की अमृतमयी वाणी के समुद्र में चंद्रमा के समान प्रकाशित होने वाले।
982. ॐ गोविन्दाय नमः।
अर्थ: गौ, इंद्रियों और पृथ्वी को आनंद देने वाले।
983. ॐ योगिनां पतये नमः।
अर्थ: सभी योगियों के स्वामी।
984. ॐ वसुदेवात्मजाय नमः।
अर्थ: वसुदेव के पुत्र।
985. ॐ पुण्याय नमः।
अर्थ: स्वयं पवित्र और पुण्यस्वरूप।
986. ॐ लीलामानुषविग्रहाय नमः।
अर्थ: अपनी दिव्य लीला के लिए मानव रूप धारण करने वाले।
987. ॐ जगद्गुरवे नमः।
अर्थ: समस्त जगत के गुरु।
988. ॐ जगन्नाथाय नमः।
अर्थ: पूरे जगत के नाथ।
989. ॐ गीतामृतमहोदधये नमः।
अर्थ: श्रीमद्भगवद्गीता के अमृतमय ज्ञान के विशाल समुद्र।
990. ॐ पुण्यश्लोकाय नमः।
अर्थ: जिनका यश और नाम पवित्र श्लोकों में गाया जाता है।
991. ॐ तीर्थपादाय नमः।
अर्थ: जिनके चरण स्वयं तीर्थ के समान पवित्र हैं।
992. ॐ वेदवेद्याय नमः।
अर्थ: जिन्हें वेदों के द्वारा जाना जा सकता है।
993. ॐ दयानिधये नमः।
अर्थ: दया के भंडार।
994. ॐ नारायणाय नमः।
अर्थ: समस्त जीवों के परम आश्रय और परमात्मा।
995. ॐ यज्ञमूर्तये नमः।
अर्थ: यज्ञ के साक्षात स्वरूप।
996. ॐ पन्नगाशनवाहनाय नमः।
अर्थ: सर्पभक्षी गरुड़ को वाहन बनाने वाले।
997. ॐ आद्याय पतये नमः।
अर्थ: आदि और परम स्वामी।
998. ॐ परस्मै ब्रह्मणे नमः।
अर्थ: परम ब्रह्म को नमस्कार।
999. ॐ परमात्मने नमः।
अर्थ: सभी जीवों के परम आत्मस्वरूप।
1000. ॐ परात्पराय नमः।
अर्थ: जो परम से भी परे, सर्वोच्च परम तत्त्व हैं।
