श्री हनुमान सहस्त्रनाम (Shri Hanuman Sahasranama)

हनुमान सहस्रनाम संपूर्ण पाठ और 1000 नामों का हिंदी अर्थ

श्री हनुमान सहस्त्रनाम (Shri Hanuman Sahasranama)

हनुमान सहस्रनाम (Hanuman Sahasranama) – संपूर्ण पाठ, अर्थ, महत्व, पाठ विधि और चमत्कारी लाभ

हनुमान सहस्रनाम भगवान श्रीहनुमान के एक हजार दिव्य नामों का अद्भुत स्तोत्र है। इन प्रत्येक नामों में उनकी शक्ति, भक्ति, ज्ञान, पराक्रम, करुणा, निर्भयता और परमात्म स्वरूप का वर्णन मिलता है। शास्त्रों के अनुसार जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान सहस्रनाम का पाठ करता है, उसके जीवन से भय, रोग, शत्रु बाधा, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक अशांति दूर होती है तथा उसे श्रीराम और हनुमानजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। हनुमानजी केवल बल और पराक्रम के प्रतीक ही नहीं हैं, बल्कि वे अटूट भक्ति, विनम्रता, सेवा, ज्ञान और धर्म के सर्वोच्च आदर्श भी हैं। यही कारण है कि कलियुग में उन्हें शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवताओं में सर्वोपरि माना गया है। इस लेख में आप हनुमान सहस्रनाम का संपूर्ण पाठ, प्रत्येक नाम का सरल हिंदी अर्थ, पाठ करने की विधि, नियम, धार्मिक महत्व, लाभ तथा इससे जुड़े सामान्य प्रश्नों के उत्तर विस्तार से जानेंगे।

हनुमान सहस्रनाम क्या है?

हनुमान सहस्रनाम एक ऐसा पवित्र स्तोत्र है जिसमें भगवान श्रीहनुमान के 1000 दिव्य नामों का वर्णन मिलता है। प्रत्येक नाम उनके किसी विशेष गुण, स्वरूप, शक्ति, लीला, भक्ति, ज्ञान या दिव्य कार्य का प्रतिनिधित्व करता है। जिस प्रकार भगवान विष्णु का विष्णु सहस्रनाम, भगवान शिव का शिव सहस्रनाम और देवी का ललिता सहस्रनाम प्रसिद्ध है, उसी प्रकार भगवान हनुमान का हनुमान सहस्रनाम भी अत्यंत प्रभावशाली और पुण्यदायक माना जाता है। इन एक हजार नामों में हनुमानजी को : 

  • श्रीराम के परम भक्त
  • रुद्रावतार
  • पवनपुत्र
  • संकटमोचन
  • महायोगी
  • ब्रह्मज्ञानी
  • धर्मरक्षक
  • असुर संहारक
  • भक्तवत्सल
  • कलियुग के रक्षक

जैसे अनेक दिव्य रूपों में प्रणाम किया गया है।

हनुमान सहस्रनाम का संपूर्ण पाठ : हिंदी अर्थ सहित

1. ॐ हनुमते नमः — भगवान हनुमान को नमस्कार।

2. ॐ श्रीप्रदाय नमः — जो धन, ऐश्वर्य, समृद्धि और मंगल प्रदान करते हैं।

3. ॐ वायुपुत्राय नमः — जो पवनदेव के दिव्य पुत्र हैं।

4. ॐ रुद्राय नमः — जो भगवान शिव (रुद्र) के अंशावतार हैं।

5. ॐ अनघाय नमः — जो पाप, दोष और कलंक से रहित हैं।

6. ॐ अजराय नमः — जो कभी वृद्ध नहीं होते।

7. ॐ अमृत्यवे नमः — जो मृत्यु से परे, अमर और चिरंजीवी हैं।

8. ॐ वीरवीराय नमः — जो वीरों में भी सबसे श्रेष्ठ महावीर हैं।

9. ॐ ग्रामवासाय नमः — जो प्रत्येक स्थान पर अपने भक्तों के साथ निवास करते हैं।

10. ॐ जनाश्रयाय नमः — जो सभी प्राणियों के आश्रयदाता हैं।

11. ॐ धनदाय नमः — जो धन और समृद्धि प्रदान करते हैं।

12. ॐ निर्गुणाय नमः — जो सत्त्व, रज और तम तीनों गुणों से परे हैं।

13. ॐ अकायाय नमः — जो स्थूल शरीर के बंधन से परे दिव्य स्वरूप वाले हैं।

14. ॐ वीराय नमः — जो अतुलनीय पराक्रम वाले हैं।

15. ॐ निधिपतये नमः — जो समस्त दिव्य निधियों के स्वामी हैं।

16. ॐ मुनये नमः — जो महान ज्ञानी, तपस्वी और मननशील हैं।

17. ॐ पिङ्गालक्षाय नमः — जिनकी आँखें सुनहरे-भूरे वर्ण की हैं।

18. ॐ वरदाय नमः — जो भक्तों को इच्छित वरदान प्रदान करते हैं।

19. ॐ वाग्मिने नमः — जो मधुर, प्रभावशाली और ज्ञानपूर्ण वाणी वाले हैं।

20. ॐ सीताशोकविनाशनाय नमः — जिन्होंने माता सीता का शोक दूर किया।

21. ॐ शिवाय नमः — जो कल्याणस्वरूप और मंगलकारी हैं।

22. ॐ सर्वस्मै नमः — जो सम्पूर्ण सृष्टि में विद्यमान हैं।

23. ॐ परस्मै नमः — जो सर्वोच्च परम तत्व हैं।

24. ॐ अव्यक्ताय नमः — जो इंद्रियों से परे और अदृश्य हैं।

25. ॐ व्यक्ताव्यक्ताय नमः — जो व्यक्त और अव्यक्त दोनों रूपों में विद्यमान हैं।

26. ॐ रसाधराय नमः — जो आनंद, प्रेम और जीवनरस के आधार हैं।

27. ॐ पिङ्गकेशाय नमः — जिनके केश सुनहरे-भूरे वर्ण के हैं।

28. ॐ पिङ्गरोम्णे नमः — जिनके रोम सुनहरे-भूरे रंग के हैं।

29. ॐ श्रुतिगम्याय नमः — जिन्हें वेद और शास्त्रों के ज्ञान से जाना जा सकता है।

30. ॐ सनातनाय नमः — जो शाश्वत और अनादि हैं।

31. ॐ अनादये नमः — जिनका कोई आदि नहीं है।

32. ॐ भगवते नमः — जो समस्त दिव्य ऐश्वर्यों से संपन्न हैं।

33. ॐ देवाय नमः — जो दिव्य स्वरूप वाले हैं।

34. ॐ विश्वहेतवे नमः — जो सम्पूर्ण सृष्टि के कारण हैं।

35. ॐ निरामयाय नमः — जो रोग, दुःख और विकारों से रहित हैं।

36. ॐ आरोग्यकर्त्रे नमः — जो उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करते हैं।

37. ॐ विश्वेशाय नमः — जो सम्पूर्ण विश्व के स्वामी हैं।

38. ॐ विश्वनाथाय नमः — जो सम्पूर्ण जगत के नाथ हैं।

39. ॐ हरीश्वराय नमः — जो भगवान विष्णु के कार्यों के महान सहयोगी हैं।

40. ॐ भर्गाय नमः — जो पापों का नाश करने वाले तेजस्वी हैं।

41. ॐ रामाय नमः — जो सदैव श्रीराम में लीन रहते हैं।

42. ॐ रामभक्ताय नमः — जो श्रीराम के परम भक्त हैं।

43. ॐ कल्याणप्रकृतये नमः — जिनका स्वभाव सदैव कल्याणकारी है।

44. ॐ स्थिराय नमः — जो अटल, दृढ़ और अडिग हैं।

45. ॐ विश्वम्भराय नमः — जो सम्पूर्ण जगत का पालन करने वाले हैं।

46. ॐ विश्वमूर्तये नमः — जिनका स्वरूप सम्पूर्ण विश्व के समान व्यापक है।

47. ॐ विश्वाकाराय नमः — जिनका रूप सम्पूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है।

48. ॐ विश्वपाय नमः — जो सम्पूर्ण संसार की रक्षा करते हैं।

49. ॐ विश्वात्मने नमः — जो समस्त सृष्टि की आत्मा हैं।

50. ॐ विश्वसेव्याय नमः — जिनकी देवता और भक्त सभी सेवा करते हैं।

51. ॐ विश्वस्मै नमः — जो स्वयं सम्पूर्ण विश्वस्वरूप हैं।

52. ॐ विश्वहराय नमः — जो संसार के कष्टों और पापों का नाश करते हैं।

53. ॐ रवये नमः — जो सूर्य के समान तेजस्वी हैं।

54. ॐ विश्वचेष्टाय नमः — जो सम्पूर्ण सृष्टि की गतिविधियों के प्रेरक हैं।

55. ॐ विश्वगम्याय नमः — जिन्हें सभी प्राप्त करना चाहते हैं।

56. ॐ विश्वध्येयाय नमः — जो सभी के ध्यान के योग्य हैं।

57. ॐ कलाधराय नमः — जो समस्त कलाओं के धारणकर्ता हैं।

58. ॐ प्लवङ्गमाय नमः — जो महान वानर और तीव्र गति से चलने वाले हैं।

59. ॐ कपिश्रेष्ठाय नमः — जो वानरों में सर्वश्रेष्ठ हैं।

60. ॐ ज्येष्ठाय नमः — जो श्रेष्ठ और महान हैं।

61. ॐ वैद्याय नमः — जो रोगों का नाश कर स्वास्थ्य प्रदान करते हैं।

62. ॐ वनेचराय नमः — जो वनों में विचरण करने वाले हैं।

63. ॐ बालाय नमः — जो निष्कपट, सरल और निर्मल स्वभाव वाले हैं।

64. ॐ वृद्धाय नमः — जो परम अनुभवी और ज्ञानवान हैं।

65. ॐ यूने नमः — जो सदैव युवा और ऊर्जावान हैं।

66. ॐ तत्त्वाय नमः — जो स्वयं परम सत्य हैं।

67. ॐ तत्त्वगम्याय नमः — जिन्हें तत्वज्ञान द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

68. ॐ सख्ये नमः — जो सच्चे मित्र और हितैषी हैं।

69. ॐ अजाय नमः — जो जन्म-मरण से परे हैं।

70. ॐ अञ्जनासूनवे नमः — जो माता अंजना के पुत्र हैं।

71. ॐ अव्यग्राय नमः — जो कभी विचलित नहीं होते।

72. ॐ ग्रामख्याताय नमः — जिनकी कीर्ति हर स्थान पर फैली हुई है।

73. ॐ धराधराय नमः — जो पर्वत उठाने में समर्थ हैं।

74. ॐ भूर्लोकाय नमः — जो भूरलोक में पूजनीय हैं।

75. ॐ भुवर्लोकाय नमः — जो भुवर्लोक में प्रतिष्ठित हैं।

76. ॐ स्वर्लोकाय नमः — जो स्वर्गलोक में भी पूजित हैं।

77. ॐ महर्लोकाय नमः — जो महर्लोक में पूजनीय हैं।

78. ॐ जनलोकाय नमः — जो जनलोक में भी सम्मानित हैं।

79. ॐ तपोलोकाय नमः — जो तपोलोक में भी पूजनीय हैं।

80. ॐ अव्ययाय नमः — जिनका कभी नाश नहीं होता।

81. ॐ सत्याय नमः — जो सत्यस्वरूप हैं।

82. ॐ ओंकारगम्याय नमः — जिन्हें ‘ॐ’ के ध्यान द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

83. ॐ प्रणवाय नमः — जो स्वयं प्रणव (ॐ) स्वरूप हैं।

84. ॐ व्यापकाय नमः — जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त हैं।

85. ॐ अमलाय नमः — जो पूर्णतः निर्मल और निष्कलंक हैं।

86. ॐ शिवधर्मप्रतिष्ठात्रे नमः — जो धर्म और कल्याण की स्थापना करने वाले हैं।

87. ॐ रामेष्टाय नमः — जिन्हें श्रीराम सबसे अधिक प्रिय हैं।

88. ॐ फाल्गुनप्रियाय नमः — जो अर्जुन (फाल्गुन) के प्रिय सहायक और ध्वज पर विराजमान थे।

89. ॐ गोष्पदीकृतवारीशाय नमः — जिन्होंने अपने पराक्रम से विशाल समुद्र को गौ के खुर के समान तुच्छ बना दिया।

90. ॐ पूर्णकामाय नमः — जिनकी सभी दिव्य इच्छाएँ पूर्ण हैं।

91. ॐ धरापतये नमः — जो पृथ्वी के रक्षक और स्वामी स्वरूप हैं।

92. ॐ रक्षोघ्नाय नमः — जो राक्षसों का संहार करने वाले हैं।

93. ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः — जिनकी दृष्टि कमल के समान पवित्र और सुंदर है।

94. ॐ शरणागतवत्सलाय नमः — जो शरण में आए भक्तों पर सदैव कृपा करते हैं।

95. ॐ जानकीप्राणदात्रे नमः — जिन्होंने माता जानकी को आशा, साहस और जीवन का संदेश दिया।

96. ॐ रक्षःप्राणापहारकाय नमः — जो राक्षसों के प्राण हरने वाले हैं।

97. ॐ पूर्णाय नमः — जो सभी दिव्य गुणों से पूर्ण हैं।

98. ॐ सत्याय नमः — जो सदैव सत्य के स्वरूप हैं।

99. ॐ पीतवाससे नमः — जो पीतवर्ण वस्त्र धारण करते हैं।

100. ॐ दिवाकरसमप्रभाय नमः — जिनका तेज सूर्य के समान प्रखर और प्रकाशमान है।

101. ॐ देवोद्यानविहारिणे नमः — जो दिव्य उपवनों में विहार करने वाले हैं।

102. ॐ देवताभयभञ्जनाय नमः — जो देवताओं के भय का नाश करने वाले हैं।

103. ॐ भक्तोदयाय नमः — जो भक्तों का उत्थान और कल्याण करते हैं।

104. ॐ भक्तलब्धाय नमः — जो सच्ची भक्ति से सहज ही प्राप्त हो जाते हैं।

105. ॐ भक्तपालनतत्पराय नमः — जो सदैव भक्तों की रक्षा और पालन में तत्पर रहते हैं।

106. ॐ द्रोणहर्त्रे नमः — जो द्रोणगिरि पर्वत को उठा लाने वाले हैं।

107. ॐ शक्तिनेत्रे नमः — जो दिव्य शक्ति के मार्गदर्शक और धारक हैं।

108. ॐ शक्तिराक्षसमारकाय नमः — जो अपनी शक्ति से राक्षसों का संहार करते हैं।

109. ॐ अक्षघ्नाय नमः — जिन्होंने रावण के पुत्र अक्षयकुमार का वध किया।

110. ॐ रामदूताय नमः — जो भगवान श्रीराम के दिव्य दूत हैं।

111. ॐ शाकिनीजीवहारकाय नमः — जो शाकिनी आदि दुष्ट शक्तियों का नाश करते हैं।

112. ॐ बुबुकारहतारातये नमः — जिनकी गर्जना मात्र से शत्रु भयभीत हो जाते हैं।

113. ॐ गर्वपर्वतप्रमर्दनाय नमः — जो अहंकार रूपी पर्वत को चूर-चूर कर देते हैं।

114. ॐ हेतवे नमः — जो समस्त सृष्टि के कारण हैं।

115. ॐ अहेतवे नमः — जो स्वयं किसी कारण पर निर्भर नहीं हैं।

116. ॐ प्रांशवे नमः — जिनका स्वरूप अत्यंत विशाल और ऊँचा है।

117. ॐ विश्वभर्त्रे नमः — जो सम्पूर्ण विश्व का पालन करते हैं।

118. ॐ जगद्गुरवे नमः — जो समस्त संसार के गुरु हैं।

119. ॐ जगन्नेत्रे नमः — जो संसार का मार्गदर्शन करने वाले हैं।

120. ॐ जगन्नाथाय नमः — जो सम्पूर्ण जगत के स्वामी हैं।

121. ॐ जगदीशाय नमः — जो सम्पूर्ण सृष्टि के ईश्वर हैं।

122. ॐ जनेश्वराय नमः — जो सभी प्राणियों के स्वामी हैं।

123. ॐ जगद्धिताय नमः — जो सम्पूर्ण जगत का कल्याण करते हैं।

124. ॐ हरये नमः — जो दुःख, पाप और संकटों का हरण करते हैं।

125. ॐ श्रीशाय नमः — जो ऐश्वर्य और मंगल के स्वामी हैं।

126. ॐ गरुडस्मयभञ्जनाय नमः — जिन्होंने गरुड़ के अभिमान का नाश किया।

127. ॐ पार्थध्वजाय नमः — जो महाभारत में अर्जुन के ध्वज पर विराजमान थे।

128. ॐ वायुपुत्राय नमः — जो पवनदेव के पुत्र हैं।

129. ॐ अमितपुच्छाय नमः — जिनकी पूँछ अत्यंत विशाल और दिव्य है।

130. ॐ अमितविक्रमाय नमः — जिनका पराक्रम असीम है।

131. ॐ ब्रह्मपुच्छाय नमः — जिनकी पूँछ ब्रह्मतेज से युक्त है।

132. ॐ परब्रह्मपुच्छाय नमः — जिनकी शक्ति परमब्रह्म के समान दिव्य है।

133. ॐ रामेष्टकारकाय नमः — जो श्रीराम के प्रिय कार्यों को पूर्ण करने वाले हैं।

134. ॐ सुग्रीवादियुताय नमः — जो सुग्रीव आदि वानरों के साथ रहने वाले हैं।

135. ॐ ज्ञानिने नमः — जो परम ज्ञानी हैं।

136. ॐ वानराय नमः — जो वानर रूप में अवतरित हुए।

137. ॐ वानरेश्वराय नमः — जो वानरों में श्रेष्ठ और स्वामी हैं।

138. ॐ कल्पस्थायिने नमः — जो कल्पों तक विद्यमान रहते हैं।

139. ॐ चिरञ्जीविने नमः — जो अमर और चिरंजीवी हैं।

140. ॐ तपनाय नमः — जो शत्रुओं का दमन करने वाले हैं।

141. ॐ सदाशिवाय नमः — जो सदैव कल्याणकारी और शिवस्वरूप हैं।

142. ॐ सन्नतये नमः — जो विनम्र और सभी द्वारा वंदनीय हैं।

143. ॐ सद्गतये नमः — जो मोक्ष और शुभ गति प्रदान करते हैं।

144. ॐ भुक्तिमुक्तिदाय नमः — जो भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करते हैं।

145. ॐ कीर्तिदायकाय नमः — जो यश और सम्मान प्रदान करते हैं।

146. ॐ कीर्तये नमः — जो स्वयं यशस्वी हैं।

147. ॐ कीर्तिप्रदाय नमः — जो कीर्ति और प्रतिष्ठा प्रदान करते हैं।

148. ॐ समुद्राय नमः — जो समुद्र के समान गंभीर और विशाल हैं।

149. ॐ श्रीप्रदाय नमः — जो सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य प्रदान करते हैं।

150. ॐ शिवाय नमः — जो कल्याणस्वरूप हैं।

151. ॐ भक्तोदयाय नमः — जो भक्तों के जीवन में उन्नति लाते हैं।

152. ॐ भक्तगम्याय नमः — जो केवल सच्ची भक्ति से प्राप्त होते हैं।

153. ॐ भक्तभाग्यप्रदायकाय नमः — जो भक्तों का सौभाग्य बढ़ाते हैं।

154. ॐ उदधिक्रमणाय नमः — जिन्होंने समुद्र लाँघा।

155. ॐ देवाय नमः — जो दिव्य स्वरूप वाले हैं।

156. ॐ संसारभयनाशनाय नमः — जो संसार के भय का नाश करते हैं।

157. ॐ वार्धिबन्धनकृते नमः — जिन्होंने समुद्र पर सेतु निर्माण में सहायता की।

158. ॐ विश्वजेत्रे नमः — जो सम्पूर्ण विश्व को जीतने वाले हैं।

159. ॐ विश्वप्रतिष्ठिताय नमः — जो सम्पूर्ण विश्व में प्रतिष्ठित हैं।

160. ॐ लङ्कारये नमः — जिन्होंने लंका पर विजय प्राप्त की।

161. ॐ कालपुरुषाय नमः — जो समय से भी श्रेष्ठ पुरुष हैं।

162. ॐ लङ्केशगृहभञ्जनाय नमः — जिन्होंने रावण के महलों को ध्वस्त किया।

163. ॐ भूतावासाय नमः — जो समस्त प्राणियों के हृदय में निवास करते हैं।

164. ॐ वासुदेवाय नमः — जो भगवान विष्णु के स्वरूप का सम्मान करने वाले हैं।

165. ॐ वसवे नमः — जो सबके भीतर निवास करते हैं।

166. ॐ त्रिभुवनेश्वराय नमः — जो तीनों लोकों के स्वामी हैं।

167. ॐ श्रीरामरूपाय नमः — जिनका जीवन श्रीराममय है।

168. ॐ कृष्णाय नमः — जो आकर्षक और सर्वप्रिय हैं।

169. ॐ लङ्काप्रासादभञ्जकाय नमः — जिन्होंने लंका के महलों का विध्वंस किया।

170. ॐ कृष्णाय नमः — जो अत्यंत मनोहर स्वरूप वाले हैं।

171. ॐ कृष्णस्तुताय नमः — जिनकी भगवान श्रीकृष्ण ने भी स्तुति की।

172. ॐ शान्ताय नमः — जो शांत और संयमी हैं।

173. ॐ शान्तिदाय नमः — जो शांति प्रदान करते हैं।

174. ॐ विश्वपावनाय नमः — जो सम्पूर्ण संसार को पवित्र करने वाले हैं।

175. ॐ विश्वभोक्त्रे नमः — जो सम्पूर्ण जगत के पालनकर्ता और स्वीकारकर्ता हैं।

176. ॐ मारघ्नाय नमः — जो दुष्टों और पापों का नाश करते हैं।

177. ॐ ब्रह्मचारिणे नमः — जो अखंड ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं।

178. ॐ जितेन्द्रियाय नमः — जिन्होंने अपनी सभी इन्द्रियों पर विजय प्राप्त की है।

179. ॐ ऊर्ध्वगाय नमः — जो सदैव उच्च मार्ग पर चलने वाले हैं।

180. ॐ लाङ्गुलिने नमः — जिनकी दिव्य पूँछ अद्भुत है।

181. ॐ मालिने नमः — जो दिव्य मालाओं से सुशोभित हैं।

182. ॐ लाङ्गूलाहतराक्षसाय नमः — जिन्होंने अपनी पूँछ से राक्षसों का विनाश किया।

183. ॐ समीरतनुजाय नमः — जो पवनदेव के पुत्र हैं।

184. ॐ वीराय नमः — जो परम पराक्रमी हैं।

185. ॐ वीरताराय नमः — जो वीरों में सर्वश्रेष्ठ हैं।

186. ॐ जयप्रदाय नमः — जो विजय प्रदान करते हैं।

187. ॐ जगन्मङ्गलदाय नमः — जो सम्पूर्ण संसार का मंगल करते हैं।

188. ॐ पुण्याय नमः — जो स्वयं पुण्यस्वरूप हैं।

189. ॐ पुण्यश्रवणकीर्तनाय नमः — जिनका नाम सुनना और कीर्तन करना महान पुण्य देता है।

190. ॐ पुण्यकीर्तये नमः — जिनकी कीर्ति पवित्र और पुण्यमयी है।

191. ॐ पुण्यगतये नमः — जो शुभ गति और मोक्ष प्रदान करते हैं।

192. ॐ जगत्पावनापावनाय नमः — जो पवित्रों को भी पवित्र करने वाले हैं।

193. ॐ देवेशाय नमः — जो देवताओं के भी स्वामी हैं।

194. ॐ जितमाराय नमः — जिन्होंने काम और शत्रुओं पर विजय प्राप्त की है।

195. ॐ रामभक्तिविधायकाय नमः — जो श्रीराम के प्रति भक्ति उत्पन्न करते हैं।

196. ॐ ध्यात्रे नमः — जो ध्यान करने योग्य हैं।

197. ॐ ध्येयाय नमः — जो साधकों के ध्यान का परम लक्ष्य हैं।

198. ॐ लयाय नमः — जो अंततः सबको अपने में समाहित कर लेते हैं।

199. ॐ साक्षिणे नमः — जो सबके कर्मों के साक्षी हैं।

200. ॐ चेतसे नमः — जो चेतना और ज्ञान के मूल स्रोत हैं।

201. ॐ चैतन्यविग्रहाय नमः — जो साक्षात् चेतना के स्वरूप हैं।

202. ॐ ज्ञानदाय नमः — जो ज्ञान प्रदान करने वाले हैं।

203. ॐ प्राणदाय नमः — जो प्राण और जीवनशक्ति प्रदान करते हैं।

204. ॐ प्राणाय नमः — जो स्वयं प्राणस्वरूप हैं।

205. ॐ जगत्प्राणाय नमः — जो सम्पूर्ण जगत के जीवनाधार हैं।

206. ॐ समीरणाय नमः — जो पवन के समान तीव्र गति वाले हैं।

207. ॐ विभीषणप्रियाय नमः — जो विभीषण के प्रिय हितैषी हैं।

208. ॐ शूराय नमः — जो महान वीर और साहसी हैं।

209. ॐ पिप्पलाश्रयसिद्धिदाय नमः — जो पीपल वृक्ष के समीप उपासना करने वालों को सिद्धि प्रदान करते हैं।

210. ॐ सिद्धाय नमः — जो स्वयं सिद्ध और पूर्ण हैं।

211. ॐ सिद्धाश्रयाय नमः — जो सिद्ध पुरुषों के आश्रय हैं।

212. ॐ कालाय नमः — जो समय के भी स्वामी हैं।

213. ॐ महोक्षाय नमः — जो महान और अद्भुत बल के स्वामी हैं।

214. ॐ कालाजान्तकाय नमः — जो काल और मृत्यु के भय का अंत करने वाले हैं।

215. ॐ लङ्केशनिधनाय नमः — जिन्होंने लंकेश रावण के विनाश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

216. ॐ स्थायिने नमः — जो सदैव अटल और स्थिर हैं।

217. ॐ लङ्कादाहकाय नमः — जिन्होंने लंका का दहन किया।

218. ॐ ईश्वराय नमः — जो समर्थ, प्रभु और स्वामी हैं।

219. ॐ चन्द्रसूर्याग्निनेत्राय नमः — जिनके नेत्र चन्द्र, सूर्य और अग्नि के समान तेजस्वी हैं।

220. ॐ कालाग्नये नमः — जो प्रलयकालीन अग्नि के समान प्रचंड हैं।

221. ॐ प्रलयान्तकाय नमः — जो प्रलयकारी शक्तियों का भी अंत करने वाले हैं।

222. ॐ कपिलाय नमः — जिनका वर्ण कपिल (ताम्र/भूरा) है।

223. ॐ कपिशाय नमः — जो वानरों के स्वामी हैं।

224. ॐ पुण्यराशये नमः — जो असीम पुण्य के भंडार हैं।

225. ॐ द्वादशराशिगाय नमः — जो बारहों राशियों में व्यापक प्रभाव रखने वाले हैं।

226. ॐ सर्वाश्रयाय नमः — जो सभी का आश्रय हैं।

227. ॐ अप्रमेयात्मने नमः — जिनकी महिमा का माप नहीं किया जा सकता।

228. ॐ रेवत्यादिनिवारकाय नमः — जो ग्रह-नक्षत्रों से उत्पन्न दोषों का निवारण करते हैं।

229. ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः — जिन्होंने संजीवनी लाकर लक्ष्मणजी के प्राण बचाए।

230. ॐ सीताजीवनहेतुकाय नमः — जिन्होंने माता सीता को आशा और जीवन का संदेश दिया।

231. ॐ रामध्येयाय नमः — जिनका ध्यान स्वयं श्रीराम करते हैं, अथवा जो श्रीराम के ध्यान में सदैव लीन रहते हैं।

232. ॐ हृषिकेशाय नमः — जो इन्द्रियों के स्वामी हैं।

233. ॐ विष्णुभक्ताय नमः — जो भगवान विष्णु (श्रीराम) के परम भक्त हैं।

234. ॐ जटिने नमः — जो जटाधारी स्वरूप धारण करने वाले हैं।

235. ॐ बलिने नमः — जो अतुलनीय बल के स्वामी हैं।

236. ॐ देवारिदर्पघ्ने नमः — जो देवताओं के शत्रुओं के अभिमान का नाश करते हैं।

237. ॐ होत्रे नमः — जो यज्ञ को स्वीकार करने वाले हैं।

238. ॐ धात्रे नमः — जो पालन-पोषण करने वाले हैं।

239. ॐ कर्त्रे नमः — जो समस्त कार्यों के कर्ता हैं।

240. ॐ जगत्प्रभवे नमः — जो सम्पूर्ण जगत के प्रभु हैं।

241. ॐ नगरग्रामपालाय नमः — जो नगरों और गाँवों की रक्षा करने वाले हैं।

242. ॐ शुद्धाय नमः — जो पूर्णतः पवित्र हैं।

243. ॐ बुद्धाय नमः — जो परम बुद्धिमान हैं।

244. ॐ निरत्रपाय नमः — जो धर्मकार्य में कभी संकोच नहीं करते।

245. ॐ निरञ्जनाय नमः — जो माया और दोषों से रहित हैं।

246. ॐ निर्विकल्पाय नमः — जो सभी विकल्पों और द्वैत से परे हैं।

247. ॐ गुणातीताय नमः — जो प्रकृति के तीनों गुणों से परे हैं।

248. ॐ भयङ्कराय नमः — जो दुष्टों के लिए अत्यंत भय उत्पन्न करने वाले हैं।

249. ॐ हनुमते नमः — भगवान हनुमान को बार-बार प्रणाम।

250. ॐ दुराराध्याय नमः — जो निष्कपट भक्ति से ही प्रसन्न होते हैं।

251. ॐ तपःसाध्याय नमः — जो तपस्या द्वारा प्राप्त किए जा सकते हैं।

252. ॐ महेश्वराय नमः — जो महान ईश्वरतुल्य सामर्थ्य वाले हैं।

253. ॐ जानकीधनशोकोत्थतापहर्त्रे नमः — जिन्होंने माता जानकी के हृदय का संताप दूर किया।

254. ॐ परात्परस्मै नमः — जो परम से भी परम श्रेष्ठ हैं।

255. ॐ वाङ्मयाय नमः — जो समस्त ज्ञान और वाणी के स्वरूप हैं।

256. ॐ सदसद्रूपाय नमः — जो सत और असत दोनों के तत्त्व को जानने वाले हैं।

257. ॐ कारणाय नमः — जो समस्त सृष्टि के कारण हैं।

258. ॐ प्रकृतेः परस्मै नमः — जो प्रकृति से भी परे परम तत्त्व हैं।

259. ॐ भाग्यदाय नमः — जो सौभाग्य प्रदान करते हैं।

260. ॐ निर्मलाय नमः — जो पूर्णतः पवित्र और निष्कलंक हैं।

261. ॐ नेत्रे नमः — जो सभी का मार्गदर्शन करने वाले हैं।

262. ॐ पुच्छलङ्काविदाहकाय नमः — जिन्होंने अपनी पूँछ से लंका को जलाया।

263. ॐ पुच्छबद्धयातुधानाय नमः — जिनकी पूँछ बाँधकर राक्षस उन्हें अपमानित करना चाहते थे।

264. ॐ यातुधानरिपुप्रियाय नमः — जो राक्षसों के शत्रुओं के प्रिय हैं।

265. ॐ छायापहारिणे नमः — जो सभी प्रकार के भय और अशुभ प्रभावों को दूर करते हैं।

266. ॐ भूतेशाय नमः — जो समस्त प्राणियों के स्वामी हैं।

267. ॐ लोकेशाय नमः — जो सभी लोकों के ईश्वर हैं।

268. ॐ सद्गतिप्रदाय नमः — जो शुभ गति और मोक्ष प्रदान करते हैं।

269. ॐ प्लवङ्गमेश्वराय नमः — जो समस्त वानरों के स्वामी हैं।

270. ॐ क्रोधाय नमः — जो अधर्म के प्रति उचित क्रोध धारण करते हैं।

271. ॐ क्रोधसंरक्तलोचनाय नमः — जिनकी आँखें धर्मयुक्त क्रोध में लाल हो जाती हैं।

272. ॐ सौम्याय नमः — जो स्वभाव से अत्यंत शांत और कोमल हैं।

273. ॐ गुरवे नमः — जो ज्ञान देने वाले गुरु हैं।

274. ॐ काव्यकर्त्रे नमः — जो श्रेष्ठ वाणी और काव्य के ज्ञाता हैं।

275. ॐ भक्तानां वरप्रदाय नमः — जो भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।

276. ॐ भक्तानुकम्पिने नमः — जो भक्तों पर सदैव दया करते हैं।

277. ॐ विश्वेशाय नमः — जो सम्पूर्ण विश्व के स्वामी हैं।

278. ॐ पुरुहूताय नमः — जो देवताओं द्वारा पूजित हैं।

279. ॐ पुरन्दराय नमः — जो दुष्ट शक्तियों के दुर्गों का विनाश करने वाले हैं।

280. ॐ क्रोधहर्त्रे नमः — जो अनुचित क्रोध का नाश करते हैं।

281. ॐ तमोहर्त्रे नमः — जो अज्ञानरूपी अंधकार को दूर करते हैं।

282. ॐ भक्ताभयवरप्रदाय नमः — जो भक्तों को भयमुक्त कर वरदान प्रदान करते हैं।

283. ॐ अग्नये नमः — जो अग्नि के समान तेजस्वी हैं।

284. ॐ विभावसवे नमः — जो प्रकाश और तेज के स्रोत हैं।

285. ॐ भास्वते नमः — जो अत्यंत प्रकाशमान हैं।

286. ॐ यमाय नमः — जो न्याय और अनुशासन के प्रतीक हैं।

287. ॐ निर्ॠतये नमः — जो समस्त अनिष्टों का नाश करते हैं।

288. ॐ वरुणाय नमः — जो जलतत्त्व के समान गंभीर और पवित्र हैं।

289. ॐ वायुगतिमते नमः — जिनकी गति वायु के समान तीव्र है।

290. ॐ वायवे नमः — जो पवन के समान सर्वव्यापक और शक्तिशाली हैं।

291. ॐ कौबेराय नमः — जो धन और ऐश्वर्य के दाता हैं।

292. ॐ ईश्वराय नमः — जो समर्थ और सर्वशक्तिमान हैं।

293. ॐ रवये नमः — जो सूर्य के समान तेजस्वी हैं।

294. ॐ चन्द्राय नमः — जो चन्द्रमा के समान शीतलता प्रदान करते हैं।

295. ॐ कुजाय नमः — जो मंगल ग्रह के समान पराक्रमी हैं।

296. ॐ सौम्याय नमः — जो सरल, शांत और दयालु स्वभाव वाले हैं।

297. ॐ गुरवे नमः — जो सद्गुरु स्वरूप हैं।

298. ॐ काव्याय नमः — जो ज्ञान और साहित्य के आधार हैं।

299. ॐ शनैश्चराय नमः — जो शनिदेव के भी आदरणीय हैं और उनके कष्टों से रक्षा करते हैं।

300. ॐ राहवे नमः — जो राहु आदि ग्रहों के दुष्प्रभावों का नाश करने की सामर्थ्य रखते हैं।

301. ॐ केतवे नमः — जो केतु के समान तेजस्वी और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करने वाले हैं।

302. ॐ मरुते नमः — जो पवनस्वरूप और अत्यंत वेगवान हैं।

303. ॐ होत्रे नमः — जो यज्ञ में अर्पित आहुति को स्वीकार करने वाले हैं।

304. ॐ दात्रे नमः — जो उदारतापूर्वक सब कुछ प्रदान करने वाले हैं।

305. ॐ हर्त्रे नमः — जो पाप, दुःख और संकटों का हरण करते हैं।

306. ॐ समीरजाय नमः — जो पवनदेव से उत्पन्न हुए हैं।

307. ॐ मशकीकृतदेवारये नमः — जिन्होंने देवताओं के शत्रुओं को तुच्छ बना दिया।

308. ॐ दैत्यारये नमः — जो दैत्यों के शत्रु हैं।

309. ॐ मधुसूदनाय नमः — जो मधु नामक दैत्य का नाश करने वाले भगवान विष्णु के स्वरूप का सम्मान करते हैं तथा अधर्म का विनाश करते हैं।

310. ॐ कामाय नमः — जो भक्तों की शुभ इच्छाओं को पूर्ण करते हैं।

311. ॐ कपये नमः — जो वानरश्रेष्ठ हैं।

312. ॐ कामपालाय नमः — जो भक्तों की उचित कामनाओं की रक्षा और पूर्ति करते हैं।

313. ॐ कपिलाय नमः — जिनका वर्ण कपिल (भूरा-ताम्र) है।

314. ॐ विश्वजीवनाय नमः — जो सम्पूर्ण जगत के जीवन का आधार हैं।

315. ॐ भागीरथीपदाम्भोजाय नमः — जिनके चरण गंगाजी के समान पवित्र हैं।

316. ॐ सेतुबन्धविशारदाय नमः — जो श्रीराम सेतु के निर्माण में निपुण और सहायक थे।

317. ॐ स्वाहायै नमः — जो यज्ञ की स्वाहा शक्ति के स्वरूप हैं।

318. ॐ स्वधायै नमः — जो पितरों को अर्पित स्वधा के स्वरूप हैं।

319. ॐ हविषे नमः — जो यज्ञ में अर्पित होने वाले हव्यस्वरूप हैं।

320. ॐ कव्याय नमः — जो पितरों को अर्पित कव्य के स्वरूप हैं।

321. ॐ हव्यवाहप्रकाशकाय नमः — जो यज्ञाग्नि की दिव्य शक्ति को प्रकाशित करने वाले हैं।

322. ॐ स्वप्रकाशाय नमः — जो स्वयं प्रकाशस्वरूप हैं।

323. ॐ महावीराय नमः — जो अतुलनीय पराक्रम वाले महावीर हैं।

324. ॐ लघवे नमः — जो आवश्यकता अनुसार अत्यंत सूक्ष्म रूप धारण कर सकते हैं।

325. ॐ ऊर्जितविक्रमाय नमः — जिनका पराक्रम अद्भुत और शक्तिशाली है।

326. ॐ उड्डीनोड्डीनगतिमते नमः — जो आकाश में अत्यंत तीव्र गति से विचरण करने वाले हैं।

327. ॐ सद्गतये नमः — जो उत्तम गति और मोक्ष प्रदान करते हैं।

328. ॐ पुरुषोत्तमाय नमः — जो श्रेष्ठ पुरुषों में भी उत्तम हैं।

329. ॐ जगदात्मने नमः — जो सम्पूर्ण जगत की आत्मा हैं।

330. ॐ जगद्योनये नमः — जो समस्त सृष्टि के मूल कारण हैं।

331. ॐ जगदन्ताय नमः — जो प्रलयकाल में भी विद्यमान रहते हैं।

332. ॐ अनन्तकाय नमः — जिनका स्वरूप अनंत है।

333. ॐ विपाप्मने नमः — जो सभी पापों से रहित हैं।

334. ॐ निष्कलङ्काय नमः — जो निष्कलंक और निर्मल हैं।

335. ॐ महते नमः — जो महान हैं।

336. ॐ महदहङ्कृतये नमः — जो महान शक्ति और दिव्य प्रभाव से युक्त हैं।

337. ॐ खाय नमः — जो आकाशतत्त्व के स्वरूप हैं।

338. ॐ वायवे नमः — जो वायु के समान सर्वव्यापक और तीव्र हैं।

339. ॐ पृथिव्यै नमः — जो पृथ्वी के समान धैर्यवान और स्थिर हैं।

340. ॐ अद्भ्यो नमः — जो जलतत्त्व के समान जीवनदायी हैं।

341. ॐ वह्नये नमः — जो अग्नि के समान तेजस्वी हैं।

342. ॐ दिक्पालाय नमः — जो सभी दिशाओं की रक्षा करने वाले हैं।

343. ॐ क्षेत्रज्ञाय नमः — जो शरीर और आत्मा के रहस्य को जानने वाले हैं।

344. ॐ क्षेत्रहर्त्रे नमः — जो शरीरजनित बंधनों का नाश करते हैं।

345. ॐ पल्वलीकृतसागराय नमः — जिन्होंने समुद्र को छोटे जलाशय के समान तुच्छ बना दिया।

346. ॐ हिरण्मयाय नमः — जो स्वर्ण के समान तेजस्वी हैं।

347. ॐ पुराणाय नमः — जो सनातन और अनादि हैं।

348. ॐ खेचराय नमः — जो आकाश में विचरण करने वाले हैं।

349. ॐ भूचराय नमः — जो पृथ्वी पर स्वतंत्रतापूर्वक विचरण करते हैं।

350. ॐ अमराय नमः — जो अमर और चिरंजीवी हैं।

351. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः — जो दिव्य सृष्टिशक्ति से युक्त हैं।

352. ॐ सूत्रात्मने नमः — जो सम्पूर्ण जगत को एक सूत्र में बाँधने वाले हैं।

353. ॐ राजराजाय नमः — जो राजाओं के भी राजा हैं।

354. ॐ विशाम्पतये नमः — जो समस्त प्रजा के स्वामी हैं।

355. ॐ वेदान्तवेद्याय नमः — जिन्हें वेदान्त द्वारा जाना जा सकता है।

356. ॐ उद्गीथाय नमः — जो वेदों के दिव्य ‘ॐ’ स्वरूप हैं।

357. ॐ वेदवेदाङ्गपारगाय नमः — जो वेद और वेदांगों के पूर्ण ज्ञाता हैं।

358. ॐ प्रतिग्रामस्थितये नमः — जो प्रत्येक स्थान पर अपने भक्तों के साथ विराजमान हैं।

359. ॐ सद्यःस्फूर्तिदात्रे नमः — जो तुरंत उत्साह, शक्ति और प्रेरणा प्रदान करते हैं।

360. ॐ गुणाकराय नमः — जो अनंत सद्गुणों के भंडार हैं।

361. ॐ नक्षत्रमालिने नमः — जो नक्षत्रों के समान तेजस्वी हैं।

362. ॐ भूतात्मने नमः — जो सभी प्राणियों में आत्मरूप से विद्यमान हैं।

363. ॐ सुरभये नमः — जो मंगल और पवित्रता फैलाने वाले हैं।

364. ॐ कल्पपादपाय नमः — जो कल्पवृक्ष के समान भक्तों की इच्छाएँ पूर्ण करते हैं।

365. ॐ चिन्तामणये नमः — जो चिंतामणि के समान सभी शुभ इच्छाएँ पूर्ण करते हैं।

366. ॐ गुणनिधये नमः — जो सद्गुणों के अथाह भंडार हैं।

367. ॐ प्रजाधाराय नमः — जो समस्त प्राणियों का आधार हैं।

368. ॐ अनुत्तमाय नमः — जिनसे श्रेष्ठ कोई नहीं है।

369. ॐ पुण्यश्लोकाय नमः — जिनकी महिमा का गान करना महान पुण्य देता है।

370. ॐ पुरारातये नमः — जो भगवान शिव के प्रिय हैं।

371. ॐ ज्योतिष्मते नमः — जो दिव्य प्रकाश से युक्त हैं।

372. ॐ शर्वरीपतये नमः — जो अंधकार का नाश करने वाले हैं।

373. ॐ किल्किलारावसन्त्रस्तभूतप्रेतपिशाचकाय नमः — जिनकी गर्जना से भूत, प्रेत और पिशाच भयभीत होकर भाग जाते हैं।

374. ॐ ऋणत्रयहराय नमः — जो देवऋण, ऋषिऋण और पितृऋण से मुक्ति दिलाने वाले हैं।

375. ॐ सूक्ष्माय नमः — जो आवश्यकता पड़ने पर अत्यंत सूक्ष्म रूप धारण करते हैं।

376. ॐ स्थूलाय नमः — जो आवश्यकता पड़ने पर विराट स्वरूप धारण करते हैं।

377. ॐ सर्वगतये नमः — जो सर्वत्र विद्यमान हैं।

378. ॐ पुंसे नमः — जो परम पुरुष हैं।

379. ॐ अपस्मारहराय नमः — जो मानसिक विकारों और रोगों का नाश करते हैं।

380. ॐ स्मर्त्रे नमः — जो स्मरण करने योग्य हैं।

381. ॐ श्रुतये नमः — जो वेदस्वरूप हैं।

382. ॐ गाथायै नमः — जिनकी दिव्य कथाएँ सदैव गाई जाती हैं।

383. ॐ स्मृतये नमः — जो स्मृति और ज्ञान के आधार हैं।

384. ॐ मनवे नमः — जो बुद्धिमान और मननशील हैं।

385. ॐ स्वर्गद्वाराय नमः — जो स्वर्ग का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

386. ॐ प्रजाद्वाराय नमः — जो लोककल्याण का मार्ग खोलते हैं।

387. ॐ मोक्षद्वाराय नमः — जो मोक्ष का द्वार खोलने वाले हैं।

388. ॐ यतीश्वराय नमः — जो योगियों और संन्यासियों के भी स्वामी हैं।

389. ॐ नादरूपाय नमः — जो दिव्य नाद (ॐ) के स्वरूप हैं।

390. ॐ परस्मै ब्रह्मणे नमः — जो परमब्रह्म स्वरूप हैं।

391. ॐ ब्रह्मणे नमः — जो ब्रह्मस्वरूप हैं।

392. ॐ ब्रह्मपुरातनाय नमः — जो अनादि और सनातन ब्रह्म हैं।

393. ॐ एकस्मै नमः — जो अद्वितीय और एकमात्र परम सत्य हैं।

394. ॐ अनेकाय नमः — जो अनेक रूपों में प्रकट होते हैं।

395. ॐ जनाय नमः — जो समस्त प्राणियों के हितकारी हैं।

396. ॐ शुक्लाय नमः — जो पवित्र और निर्मल हैं।

397. ॐ स्वयंज्योतिषे नमः — जो स्वयं प्रकाशस्वरूप हैं।

398. ॐ अनाकुलाय नमः — जो किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होते।

399. ॐ ज्योतिर्ज्योतिषे नमः — जो समस्त प्रकाशों के भी परम प्रकाश हैं।

400. ॐ अनादये नमः — जिनका कोई आदि नहीं है।

401. ॐ सात्त्विकाय नमः — जो सात्त्विक गुणों से युक्त हैं।

402. ॐ राजसाय नमः — जो आवश्यक होने पर रजोगुण का भी सदुपयोग करते हैं।

403. ॐ तमाय नमः — जो तमोगुण के भी नियंता हैं।

404. ॐ तमोहर्त्रे नमः — जो अज्ञानरूपी अंधकार का नाश करते हैं।

405. ॐ निरालम्बाय नमः — जो किसी के आश्रित नहीं हैं।

406. ॐ निराकाराय नमः — जो निराकार ब्रह्मस्वरूप हैं।

407. ॐ गुणाकराय नमः — जो समस्त सद्गुणों के भंडार हैं।

408. ॐ गुणाश्रयाय नमः — जो सभी गुणों के आधार हैं।

409. ॐ गुणमयाय नमः — जो दिव्य गुणों से परिपूर्ण हैं।

410. ॐ बृहत्कर्मणे नमः — जो महान और लोककल्याणकारी कार्य करने वाले हैं।

411. ॐ बृहद्यशसे नमः — जिनकी कीर्ति अत्यंत महान है।

412. ॐ बृहद्धनवे नमः — जो आध्यात्मिक एवं दिव्य संपदा से सम्पन्न हैं।

413. ॐ बृहत्पादाय नमः — जिनके चरण अत्यंत विशाल और पूजनीय हैं।

414. ॐ बृहन्मूर्ध्ने नमः — जिनका मस्तक महान तेज से युक्त है।

415. ॐ बृहत्स्वनाय नमः — जिनकी गर्जना अत्यंत प्रबल है।

416. ॐ बृहत्कर्णाय नमः — जिनके कान विशाल और सबकी पुकार सुनने वाले हैं।

417. ॐ बृहन्नासाय नमः — जिनकी नासिका विशाल और प्रभावशाली है।

418. ॐ बृहद्बाहवे नमः — जिनकी भुजाएँ अत्यंत विशाल और शक्तिशाली हैं।

419. ॐ बृहत्तनवे नमः — जिनका शरीर विशाल और दिव्य है।

420. ॐ बृहज्जानवे नमः — जिनके घुटने अत्यंत बलशाली हैं।

421. ॐ बृहत्कार्याय नमः — जो महान कार्यों को सम्पन्न करने वाले हैं।

422. ॐ बृहत्पुच्छाय नमः — जिनकी पूँछ अत्यंत विशाल और पराक्रमी है।

423. ॐ बृहत्कराय नमः — जिनके हाथ विशाल और सामर्थ्यवान हैं।

424. ॐ बृहद्गतये नमः — जिनकी गति अत्यंत तीव्र और व्यापक है।

425. ॐ बृहत्सेव्याय नमः — जिनकी देवता और भक्त सभी सेवा करते हैं।

426. ॐ बृहल्लोकफलप्रदाय नमः — जो इस लोक और परलोक का श्रेष्ठ फल प्रदान करते हैं।

427. ॐ बृहच्छक्तये नमः — जो असीम शक्ति के स्वामी हैं।

428. ॐ बृहद्वाञ्छाफलदाय नमः — जो भक्तों की महान मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।

429. ॐ बृहदीश्वराय नमः — जो महान ईश्वरतुल्य सामर्थ्य वाले हैं।

430. ॐ बृहल्लोकनुताय नमः — जिनकी तीनों लोकों में स्तुति की जाती है।

431. ॐ द्रष्ट्रे नमः — जो सब कुछ देखने वाले और साक्षी हैं।

432. ॐ विद्यादात्रे नमः — जो विद्या और ज्ञान प्रदान करते हैं।

433. ॐ जगद्गुरवे नमः — जो सम्पूर्ण जगत के गुरु हैं।

434. ॐ देवाचार्याय नमः — जो देवताओं के भी आचार्य समान हैं।

435. ॐ सत्यवादिने नमः — जो सदैव सत्य बोलने वाले हैं।

436. ॐ ब्रह्मवादिने नमः — जो ब्रह्मज्ञान का उपदेश देने वाले हैं।

437. ॐ कलाधराय नमः — जो सभी कलाओं के धारणकर्ता हैं।

438. ॐ सप्तपातालगामिने नमः — जो सातों पातालों तक पहुँचने में समर्थ हैं।

439. ॐ मलयाचलसंश्रयाय नमः — जिनका संबंध मलय पर्वत से माना गया है और जो वहाँ भी पूजित हैं।

440. ॐ उत्तराशास्थिताय नमः — जो उत्तर दिशा में भी विराजमान और रक्षक हैं।

441. ॐ श्रीदाय नमः — जो ऐश्वर्य, समृद्धि और मंगल प्रदान करते हैं।

442. ॐ दिव्यौषधिवशाय नमः — जो दिव्य औषधियों और उनके प्रभाव के ज्ञाता हैं।

443. ॐ खगाय नमः — जो पक्षी के समान आकाश में विचरण करने वाले हैं।

444. ॐ शाखामृगाय नमः — जो वानरस्वरूप हैं।

445. ॐ कपीन्द्राय नमः — जो वानरों में श्रेष्ठ और स्वामी हैं।

446. ॐ पुराणश्रुतिचञ्चुराय नमः — जो पुराणों और वेदों के गहन ज्ञाता हैं।

447. ॐ चतुरब्राह्मणाय नमः — जो अत्यंत बुद्धिमान और वेदविद् हैं।

448. ॐ योगिने नमः — जो महान योगी हैं।

449. ॐ योगगम्याय नमः — जो योग के माध्यम से प्राप्त होते हैं।

450. ॐ परस्मै नमः — जो परम और सर्वोच्च तत्त्व हैं।

451. ॐ अवरस्मै नमः — जो विनम्र भक्तों पर विशेष कृपा करने वाले हैं।

452. ॐ अनादिनिधनाय नमः — जिनका न आदि है और न अंत।

453. ॐ व्यासाय नमः — जो वेदव्यास के समान महान ज्ञानस्वरूप हैं।

454. ॐ वैकुण्ठाय नमः — जो वैकुण्ठ के समान दिव्य और परम धामस्वरूप हैं।

455. ॐ पृथिवीपतये नमः — जो समस्त पृथ्वी के रक्षक और स्वामी हैं।

456. ॐ अपराजिताय नमः — जिन्हें कोई पराजित नहीं कर सकता।

457. ॐ जितारातये नमः — जिन्होंने सभी शत्रुओं पर विजय प्राप्त की है।

458. ॐ सदानन्दाय नमः — जो सदैव आनंदस्वरूप हैं।

459. ॐ दयायुताय नमः — जो असीम दया और करुणा से परिपूर्ण हैं।

460. ॐ गोपालाय नमः — जो समस्त प्राणियों का पालन करने वाले हैं।

461. ॐ गोपतये नमः — जो गौओं और समस्त जीवों के स्वामी एवं रक्षक हैं।

462. ॐ गोप्त्रे नमः — जो सभी भक्तों की रक्षा करने वाले हैं।

463. ॐ कलिकालपराशराय नमः — जो कलियुग के दोषों का नाश करने वाले महान ऋषि पराशर के समान ज्ञानवान हैं।

464. ॐ मनोवेगिने नमः — जिनकी गति मन से भी अधिक तीव्र है।

465. ॐ सदायोगिने नमः — जो सदैव योगयुक्त और आत्मस्थित रहते हैं।

466. ॐ संसारभयनाशनाय नमः — जो संसार के सभी भय दूर करते हैं।

467. ॐ तत्त्वदात्रे नमः — जो परम तत्त्व का ज्ञान प्रदान करते हैं।

468. ॐ तत्त्वज्ञाय नमः — जो परम सत्य के पूर्ण ज्ञाता हैं।

469. ॐ तत्त्वाय नमः — जो स्वयं परम तत्त्व हैं।

470. ॐ तत्त्वप्रकाशकाय नमः — जो परम सत्य का प्रकाश करने वाले हैं।

471. ॐ शुद्धाय नमः — जो पूर्णतः पवित्र और निष्कलंक हैं।

472. ॐ बुद्धाय नमः — जो परम बुद्धिमान हैं।

473. ॐ नित्यमुक्ताय नमः — जो सदा से मुक्त और बंधनरहित हैं।

474. ॐ भक्तराजाय नमः — जो भक्तों में श्रेष्ठ हैं।

475. ॐ जयद्रथाय नमः — जो सदैव विजय का मार्ग प्रशस्त करने वाले हैं।

476. ॐ प्रलयाय नमः — जो प्रलयकाल में भी विद्यमान रहते हैं।

477. ॐ अमितमायाय नमः — जिनकी दिव्य शक्ति और माया असीम है।

478. ॐ मायातीताय नमः — जो माया से सर्वथा परे हैं।

479. ॐ विमत्सराय नमः — जो ईर्ष्या और द्वेष से रहित हैं।

480. ॐ मायाभर्जितरक्षसे नमः — जिन्होंने मायावी राक्षसों का संहार किया।

481. ॐ मायानिर्मितविष्टपाय नमः — जो माया से निर्मित लोकों के भी स्वामी हैं।

482. ॐ मायाश्रयाय नमः — जिनकी शक्ति से माया कार्य करती है।

483. ॐ निर्लेपाय नमः — जो संसार में रहते हुए भी उससे सर्वथा अलिप्त हैं।

484. ॐ मायानिर्वर्तकाय नमः — जो माया का संचालन करने वाले हैं।

485. ॐ सुखाय नमः — जो सुखस्वरूप हैं।

486. ॐ सुखिने नमः — जो सदैव आनंदमय रहते हैं।

487. ॐ सुखप्रदाय नमः — जो भक्तों को सुख प्रदान करते हैं।

488. ॐ नागाय नमः — जो महान, शक्तिशाली और पूजनीय हैं।

489. ॐ महेशकृतसंस्तवाय नमः — जिनकी स्वयं भगवान महेश (शिव) ने स्तुति की है।

490. ॐ महेश्वराय नमः — जो महान ईश्वरतुल्य सामर्थ्य वाले हैं।

491. ॐ सत्यसन्धाय नमः — जो अपने वचन और संकल्प के प्रति सदैव अटल रहते हैं।

492. ॐ शरभाय नमः — जो अत्यंत पराक्रमी और दुर्जेय हैं।

493. ॐ कलिपावनाय नमः — जो कलियुग में भी भक्तों का उद्धार करने वाले हैं।

494. ॐ सहस्रकन्धरबलविध्वंसनविचक्षणाय नमः — जो सहस्रबाहु अथवा अत्यंत बलशाली शत्रुओं के सामर्थ्य का भी नाश करने में समर्थ हैं।

495. ॐ सहस्रबाहवे नमः — जिनकी शक्ति सहस्र भुजाओं के समान असीम है।

496. ॐ सहजाय नमः — जो स्वाभाविक रूप से दिव्य गुणों से सम्पन्न हैं।

497. ॐ द्विबाहवे नमः — जो द्विभुज स्वरूप धारण करने वाले हैं।

498. ॐ द्विभुजाय नमः — जिनका दो भुजाओं वाला दिव्य स्वरूप है।

499. ॐ अमराय नमः — जो अमर और चिरंजीवी हैं।

500. ॐ चतुर्भुजाय नमः — जो आवश्यकता अनुसार चार भुजाओं वाला दिव्य स्वरूप भी धारण करते हैं।

501. ॐ दशभुजाय नमः — जो आवश्यकता पड़ने पर दस भुजाओं वाला दिव्य स्वरूप धारण करते हैं।

502. ॐ हयग्रीवाय नमः — जो हयग्रीव के समान ज्ञानस्वरूप और दिव्य तेज से युक्त हैं।

503. ॐ खगाननाय नमः — जो पक्षीरूप मुख धारण करने में समर्थ हैं।

504. ॐ कपिवक्त्राय नमः — जिनका मुख वानर के समान दिव्य और तेजस्वी है।

505. ॐ कपिपतये नमः — जो समस्त वानरों के स्वामी हैं।

506. ॐ नरसिंहाय नमः — जो नरसिंह के समान उग्र और भक्तरक्षक हैं।

507. ॐ महाद्युतये नमः — जिनका तेज अत्यंत प्रखर और दिव्य है।

508. ॐ भीषणाय नमः — जो दुष्टों के लिए अत्यंत भयावह हैं।

509. ॐ भावगाय नमः — जो भक्तों के भाव को भली-भाँति जानते हैं।

510. ॐ वन्द्याय नमः — जो सभी के द्वारा वंदनीय और पूजनीय हैं।

511. ॐ वराहाय नमः — जो वराह स्वरूप धारण करने में समर्थ हैं।

512. ॐ वायुरूपधृषे नमः — जो वायु के समान वेगवान स्वरूप धारण करते हैं।

513. ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः — जिन्होंने संजीवनी लाकर लक्ष्मणजी के प्राण बचाए।

514. ॐ पराजितदशाननाय नमः — जिन्होंने दशानन रावण की पराजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

515. ॐ पारिजातनिवासिने नमः — जो दिव्य पारिजात के समान पवित्र लोकों में निवास करते हैं।

516. ॐ वटवे नमः — जो ब्रह्मचारी और तपस्वी स्वरूप वाले हैं।

517. ॐ वचनकोविदाय नमः — जो वाणी और नीति में अत्यंत निपुण हैं।

518. ॐ सुरसास्यविनिर्मुक्ताय नमः — जिन्होंने सुरसा के मुख से कुशलतापूर्वक निकलकर अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय दिया।

519. ॐ सिंहिकाप्राणहारकाय नमः — जिन्होंने सिंहिका राक्षसी का वध किया।

520. ॐ लङ्कालङ्कारविध्वंसिने नमः — जिन्होंने लंका के वैभव और अहंकार का विनाश किया।

521. ॐ वृषदंशकरूपधृषे नमः — जो आवश्यकता अनुसार अत्यंत सूक्ष्म और शक्तिशाली रूप धारण करते हैं।

522. ॐ रात्रिसंचारकुशलाय नमः — जो रात्रि में भी निर्भय होकर कार्य करने में कुशल हैं।

523. ॐ रात्रिंचरगृहाग्निदाय नमः — जिन्होंने राक्षसों की लंका में अग्नि प्रज्वलित की।

524. ॐ किङ्करान्तकराय नमः — जिन्होंने रावण के किंकरों का संहार किया।

525. ॐ जम्बुमालिहन्त्रे नमः — जिन्होंने जम्बुमाली राक्षस का वध किया।

526. ॐ उग्ररूपधृषे नमः — जिन्होंने आवश्यकता पड़ने पर उग्र स्वरूप धारण किया।

527. ॐ आकाशचारिणे नमः — जो आकाश में स्वतंत्र रूप से विचरण करने वाले हैं।

528. ॐ हरिगाय नमः — जो भगवान श्रीहरि के गुणों का गान करने वाले हैं।

529. ॐ मेघनादरणोत्सुकाय नमः — जो मेघनाद का सामना करने के लिए सदैव तत्पर रहे।

530. ॐ मेघगम्भीरनिनदाय नमः — जिनकी गर्जना मेघों के समान गंभीर है।

531. ॐ महारावणकुलान्तकाय नमः — जिन्होंने रावण के कुल के विनाश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

532. ॐ कालनेमिप्राणहारिणे नमः — जिन्होंने कालनेमि राक्षस का वध किया।

533. ॐ मकरीशापमोक्षदाय नमः — जिन्होंने मकरी को शाप से मुक्त किया।

534. ॐ रसाय नमः — जो आनंद और दिव्य रस के स्वरूप हैं।

535. ॐ रसज्ञाय नमः — जो सभी रसों और भावों के ज्ञाता हैं।

536. ॐ सम्मानाय नमः — जो सम्मान के योग्य हैं और भक्तों को सम्मान प्रदान करते हैं।

537. ॐ रूपाय नमः — जो सुंदर और दिव्य स्वरूप वाले हैं।

538. ॐ चक्षुषे नमः — जो समस्त प्राणियों को सही दृष्टि प्रदान करते हैं।

539. ॐ श्रुतये नमः — जो वेदस्वरूप और श्रुति के ज्ञाता हैं।

540. ॐ वचसे नमः — जो सत्य और मधुर वचन बोलने वाले हैं।

541. ॐ घ्राणाय नमः — जो सूक्ष्म से सूक्ष्म संकेत को जानने वाले हैं।

542. ॐ गन्धाय नमः — जो दिव्य सुगंध के समान पवित्र हैं।

543. ॐ स्पर्शनाय नमः — जिनका स्पर्श कल्याणकारी है।

544. ॐ स्पर्शाय नमः — जो दिव्य स्पर्शस्वरूप हैं।

545. ॐ अहङ्कारमानगाय नमः — जो अहंकार और अभिमान का नाश करने वाले हैं।

546. ॐ नेतिनेतीतिगम्याय नमः — जो ‘नेति-नेति’ के द्वारा जानने योग्य परम तत्त्व हैं।

547. ॐ वैकुण्ठभजनप्रियाय नमः — जिन्हें भगवान विष्णु (श्रीराम) का भजन अत्यंत प्रिय है।

548. ॐ गिरीशाय नमः — जो भगवान शिव के प्रिय हैं।

549. ॐ गिरिजाकान्ताय नमः — जो माता पार्वती के प्रिय भगवान शिव के अनन्य भक्त हैं।

550. ॐ दुर्वाससे नमः — जो महर्षि दुर्वासा के समान महान तपस्वी और तेजस्वी हैं।

551. ॐ कवये नमः — जो महान ज्ञानी, दूरदर्शी और विद्वान हैं।

552. ॐ अङ्गिरसे नमः — जो महर्षि अंगिरा के समान तेजस्वी और ज्ञानस्वरूप हैं।

553. ॐ भृगवे नमः — जो महर्षि भृगु के समान तपस्वी और ज्ञानी हैं।

554. ॐ वसिष्ठाय नमः — जो महर्षि वसिष्ठ के समान ब्रह्मज्ञानी हैं।

555. ॐ च्यवनाय नमः — जो महर्षि च्यवन के समान तप और संयम से युक्त हैं।

556. ॐ नारदाय नमः — जो देवर्षि नारद के समान भगवान के गुणों का गान करने वाले हैं।

557. ॐ तुम्बराय नमः — जो गंधर्व तुम्बुरु के समान मधुर स्तुति करने वाले हैं।

558. ॐ अमलाय नमः — जो पूर्णतः निर्मल और निष्पाप हैं।

559. ॐ विश्वक्षेत्राय नमः — जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त हैं।

560. ॐ विश्वबीजाय नमः — जो सम्पूर्ण सृष्टि के मूल बीजस्वरूप हैं।

561. ॐ विश्वनेत्राय नमः — जो सम्पूर्ण संसार का मार्गदर्शन करने वाले हैं।

562. ॐ विश्वपाय नमः — जो सम्पूर्ण विश्व की रक्षा करने वाले हैं।

563. ॐ याजकाय नमः — जो यज्ञ सम्पन्न कराने वाले हैं।

564. ॐ यजमानाय नमः — जो यज्ञ के कर्ता और संरक्षक हैं।

565. ॐ पावकाय नमः — जो अग्नि के समान पवित्र करने वाले हैं।

566. ॐ पितृभ्यो नमः — जो पितरों के भी आदरणीय हैं।

567. ॐ श्रद्धायै नमः — जो श्रद्धा के स्वरूप हैं।

568. ॐ बुद्धयै नमः — जो बुद्धि और विवेक प्रदान करने वाले हैं।

569. ॐ क्षमायै नमः — जो क्षमाशीलता के स्वरूप हैं।

570. ॐ तन्द्रायै नमः — जो आलस्य और प्रमाद पर नियंत्रण रखने वाले हैं।

571. ॐ मन्त्राय नमः — जो स्वयं दिव्य मंत्रस्वरूप हैं।

572. ॐ मन्त्रयित्रे नमः — जो श्रेष्ठ परामर्श देने वाले हैं।

573. ॐ स्वराय नमः — जो दिव्य नाद और स्वर के स्वरूप हैं।

574. ॐ राजेन्द्राय नमः — जो राजाओं में श्रेष्ठ हैं।

575. ॐ भूपतये नमः — जो पृथ्वी के स्वामी और रक्षक हैं।

576. ॐ रुण्डमालिने नमः — जो वीरता और दुष्टों के संहार के प्रतीक स्वरूप धारण करते हैं।

577. ॐ संसारसारथये नमः — जो संसार रूपी जीवनरथ के सारथी और मार्गदर्शक हैं।

578. ॐ नित्यसम्पूर्णकामाय नमः — जिनकी सभी दिव्य इच्छाएँ सदैव पूर्ण रहती हैं।

579. ॐ भक्तकामदुहे नमः — जो भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।

580. ॐ उत्तमाय नमः — जो सर्वोत्तम और श्रेष्ठ हैं।

581. ॐ गणपाय नमः — जो दिव्य गणों के स्वामी हैं।

582. ॐ केशवाय नमः — जो भगवान केशव (विष्णु) के परम भक्त हैं और उनके गुणों से युक्त हैं।

583. ॐ भ्रात्रे नमः — जो भाई के समान स्नेह और संरक्षण देने वाले हैं।

584. ॐ पित्रे नमः — जो पिता के समान पालन और मार्गदर्शन करते हैं।

585. ॐ मात्रे नमः — जो माता के समान वात्सल्य रखने वाले हैं।

586. ॐ मारुतये नमः — जो पवनदेव के पुत्र हैं।

587. ॐ सहस्रमूर्ध्ने नमः — जिनके अनंत मस्तक स्वरूप का वर्णन किया गया है।

588. ॐ अनेकास्याय नमः — जो अनेक मुखों वाले विराट स्वरूप धारण करने में समर्थ हैं।

589. ॐ सहस्राक्षाय नमः — जिनकी दृष्टि हजारों नेत्रों के समान सर्वव्यापी है।

590. ॐ सहस्रपादे नमः — जिनके चरण सर्वत्र विद्यमान हैं।

591. ॐ कामजिते नमः — जिन्होंने काम (इन्द्रिय-विकार) पर विजय प्राप्त की है।

592. ॐ कामदहनाय नमः — जो अशुद्ध कामनाओं का नाश करते हैं।

593. ॐ कामाय नमः — जो भक्तों की शुभ इच्छाओं को पूर्ण करने वाले हैं।

594. ॐ कामफलप्रदाय नमः — जो धर्मसम्मत इच्छाओं का फल प्रदान करते हैं।

595. ॐ मुद्रापहारिणे नमः — जिन्होंने श्रीराम की मुद्रिका लेकर माता सीता तक पहुँचाई और उनके शोक का निवारण किया।

596. ॐ रक्षोघ्नाय नमः — जो राक्षसों का संहार करने वाले हैं।

597. ॐ क्षितिभारहराय नमः — जो पृथ्वी का भार कम करने वाले हैं।

598. ॐ बलाय नमः — जो अतुलनीय बल के स्वामी हैं।

599. ॐ नखदंष्ट्रायुधाय नमः — जिनके नख और दाँत भी दिव्य अस्त्र-शस्त्र के समान हैं।

600. ॐ विष्णवे नमः — जो भगवान विष्णु (श्रीराम) के परम भक्त हैं तथा विष्णुतत्त्व से अभिन्न माने जाते हैं।

601. ॐ भक्ताभयवरप्रदाय नमः — जो भक्तों का भय दूर करके उन्हें इच्छित वरदान प्रदान करते हैं।

602. ॐ दर्पघ्ने नमः — जो अहंकार का नाश करने वाले हैं।

603. ॐ दर्पदाय नमः — जो धर्मात्माओं को आत्मविश्वास और गौरव प्रदान करते हैं।

604. ॐ दंष्ट्राशतमूर्तये नमः — जो अनेक भयंकर दाँतों वाले दिव्य स्वरूप धारण करने में समर्थ हैं।

605. ॐ अमूर्तिमते नमः — जो निराकार एवं अमूर्त ब्रह्मस्वरूप हैं।

606. ॐ महानिधये नमः — जो समस्त दिव्य गुणों और शक्तियों के महान भंडार हैं।

607. ॐ महाभागाय नमः — जो अत्यंत सौभाग्यशाली एवं पूजनीय हैं।

608. ॐ महाभर्गाय नमः — जो महान तेज और दिव्य प्रकाश से युक्त हैं।

609. ॐ महार्द्धिदाय नमः — जो महान ऐश्वर्य और समृद्धि प्रदान करते हैं।

610. ॐ महाकाराय नमः — जो विशाल एवं विराट स्वरूप धारण करने वाले हैं।

611. ॐ महायोगिने नमः — जो परम योगी हैं।

612. ॐ महातेजसे नमः — जिनका तेज अतुलनीय है।

613. ॐ महाद्युतये नमः — जिनकी दिव्य आभा अत्यंत प्रखर है।

614. ॐ महासनाय नमः — जो महान आसन पर विराजमान होने योग्य हैं।

615. ॐ महानादाय नमः — जिनकी गर्जना अत्यंत प्रभावशाली है।

616. ॐ महामन्त्राय नमः — जो स्वयं महान मंत्रस्वरूप हैं।

617. ॐ महामतये नमः — जो महान बुद्धि और विवेक से सम्पन्न हैं।

618. ॐ महागमाय नमः — जो समस्त आगमों और दिव्य ज्ञान के ज्ञाता हैं।

619. ॐ महोदाराय नमः — जो अत्यंत उदार और दयालु हैं।

620. ॐ महादेवात्मकाय नमः — जिनमें भगवान शिव का दिव्य अंश विद्यमान है।

621. ॐ विभवे नमः — जो सर्वशक्तिमान एवं सर्वव्यापक हैं।

622. ॐ रौद्रकर्मणे नमः — जो दुष्टों के विनाश हेतु रौद्र कर्म करने वाले हैं।

623. ॐ क्रूरकर्मणे नमः — जो अधर्मियों के प्रति कठोर दंड देने वाले हैं।

624. ॐ रत्नाभाय नमः — जिनकी आभा रत्नों के समान चमकदार है।

625. ॐ कृतागमाय नमः — जो आगम शास्त्रों के ज्ञाता और पालनकर्ता हैं।

626. ॐ अम्भोधिलङ्घनाय नमः — जिन्होंने समुद्र का लंघन किया।

627. ॐ सिंहाय नमः — जो सिंह के समान पराक्रमी हैं।

628. ॐ सत्यधर्मप्रमोदनाय नमः — जो सत्य और धर्म की स्थापना में आनंदित रहते हैं।

629. ॐ जितामित्राय नमः — जिन्होंने सभी शत्रुओं को पराजित किया है।

630. ॐ जयाय नमः — जो सदैव विजयी हैं।

631. ॐ सोमाय नमः — जो चन्द्रमा के समान शीतल और शांत हैं।

632. ॐ विजयाय नमः — जो हर कार्य में विजय प्रदान करते हैं।

633. ॐ वायुनन्दनाय नमः — जो पवनदेव के प्रिय पुत्र हैं।

634. ॐ जीवदात्रे नमः — जो जीवनदान देने वाले हैं।

635. ॐ सहस्रांशवे नमः — जो हजारों सूर्य के समान तेजस्वी हैं।

636. ॐ मुकुन्दाय नमः — जो मुक्ति और आनंद प्रदान करने वाले हैं।

637. ॐ भूरिदक्षिणाय नमः — जो अत्यंत उदार और दानशील हैं।

638. ॐ सिद्धार्थाय नमः — जिनका प्रत्येक उद्देश्य सिद्ध होता है।

639. ॐ सिद्धिदाय नमः — जो सिद्धियाँ प्रदान करते हैं।

640. ॐ सिद्धसङ्कल्पाय नमः — जिनका प्रत्येक संकल्प पूर्ण होता है।

641. ॐ सिद्धिहेतुकाय नमः — जो सिद्धि प्राप्ति का कारण हैं।

642. ॐ सप्तपातालचरणाय नमः — जिनके चरण सातों पाताल तक व्याप्त हैं।

643. ॐ सप्तर्षिगणवन्दिताय नमः — जिनकी सप्तर्षि भी वंदना करते हैं।

644. ॐ सप्ताब्धिलङ्घनाय नमः — जो सातों समुद्रों को भी लाँघने में समर्थ हैं।

645. ॐ वीराय नमः — जो महान वीर हैं।

646. ॐ सप्तद्वीपोरुमण्डलाय नमः — जिनकी महिमा सातों द्वीपों में फैली हुई है।

647. ॐ सप्ताङ्गराज्यसुखदाय नमः — जो राज्य के सातों अंगों में सुख और समृद्धि प्रदान करते हैं।

648. ॐ सप्तमातृनिषेविताय नमः — जिनकी सप्तमातृकाएँ भी सेवा करती हैं।

649. ॐ सप्तस्वर्लोकमुकुटाय नमः — जो सातों स्वर्गलोकों के मुकुट समान पूजनीय हैं।

650. ॐ सप्तहोत्रे नमः — जो सात प्रकार के यज्ञों के ज्ञाता और अधिकारी हैं।

651. ॐ स्वाराश्रयाय नमः — जो स्वर्गलोक का आश्रय हैं।

652. ॐ सप्तच्छन्दोनिधये नमः — जो वेदों के सात प्रमुख छंदों के भंडार हैं।

653. ॐ सप्तच्छन्दसे नमः — जो सातों वैदिक छंदों के स्वरूप हैं।

654. ॐ सप्तजनाश्रयाय नमः — जो समस्त प्राणियों के आश्रय हैं।

655. ॐ सप्तसामोपगीताय नमः — जिनकी महिमा सामवेद के गीतों में गाई जाती है।

656. ॐ सप्तपातालसंश्रयाय नमः — जिनका प्रभाव सातों पातालों तक व्याप्त है।

657. ॐ मेधादाय नमः — जो मेधा और बुद्धि प्रदान करते हैं।

658. ॐ कीर्तिदाय नमः — जो यश और कीर्ति प्रदान करते हैं।

659. ॐ शोकहारिणे नमः — जो समस्त शोक दूर करते हैं।

660. ॐ दौर्भाग्यनाशनाय नमः — जो दुर्भाग्य का नाश करते हैं।

661. ॐ सर्वरक्षाकराय नमः — जो हर प्रकार की रक्षा करते हैं।

662. ॐ गर्भदोषघ्ने नमः — जो गर्भ संबंधी दोषों का नाश करते हैं।

663. ॐ पुत्रपौत्रदाय नमः — जो संतान एवं पौत्र का सुख प्रदान करते हैं।

664. ॐ प्रतिवादिमुखस्तम्भाय नमः — जो विरोधियों की वाणी को स्तब्ध कर देते हैं।

665. ॐ रुष्टचित्तप्रसादनाय नमः — जो क्रोधित व्यक्ति के मन को शांत कर देते हैं।

666. ॐ पराभिचारशमनाय नमः — जो तंत्र-मंत्र एवं अभिचार के दुष्प्रभावों को समाप्त करते हैं।

667. ॐ दुःखघ्ने नमः — जो समस्त दुःखों का नाश करते हैं।

668. ॐ बन्धमोक्षदाय नमः — जो सभी प्रकार के बंधनों से मुक्ति प्रदान करते हैं।

669. ॐ नवद्वारपुराधाराय नमः — जो नौ द्वारों वाले शरीर के आधार हैं।

670. ॐ नवद्वारनिकेतनाय नमः — जो शरीररूपी नवद्वार नगर में आत्मरूप से स्थित हैं।

671. ॐ नरनारायणस्तुत्याय नमः — जिनकी नर और नारायण दोनों स्तुति करते हैं।

672. ॐ नवनाथमहेश्वराय नमः — जो नवनाथों के भी पूजनीय महेश्वरस्वरूप हैं।

673. ॐ मेखलिने नमः — जो मेखला (करधनी) धारण करते हैं।

674. ॐ कवचिने नमः — जो दिव्य कवच धारण करने वाले हैं।

675. ॐ खड्गिने नमः — जो खड्ग धारण करने में समर्थ हैं।

676. ॐ भ्राजिष्णवे नमः — जो अत्यंत तेजस्वी और प्रकाशमान हैं।

677. ॐ जिष्णुसारथये नमः — जो विजयी वीरों के मार्गदर्शक हैं।

678. ॐ बहुयोजनविस्तीर्णपुच्छाय नमः — जिनकी पूँछ अनेक योजन तक विस्तृत होने में समर्थ है।

679. ॐ पुच्छहतासुराय नमः — जिन्होंने अपनी पूँछ से असुरों का संहार किया।

680. ॐ दुष्टग्रहनिहन्त्रे नमः — जो दुष्ट ग्रहों के प्रभाव का नाश करते हैं।

681. ॐ पिशाचग्रहघातकाय नमः — जो पिशाचादि बाधाओं का विनाश करते हैं।

682. ॐ बालग्रहविनाशिने नमः — जो बच्चों पर आने वाली ग्रहबाधाओं का नाश करते हैं।

683. ॐ धर्मनेत्रे नमः — जो धर्म का मार्ग दिखाने वाले हैं।

684. ॐ कृपाकराय नमः — जो सदैव कृपा करने वाले हैं।

685. ॐ उग्रकृत्याय नमः — जो आवश्यक होने पर उग्र कार्य करने वाले हैं।

686. ॐ उग्रवेगाय नमः — जिनका वेग अत्यंत प्रचंड है।

687. ॐ उग्रनेत्राय नमः — जिनके नेत्र दुष्टों के लिए अत्यंत भयावह हैं।

688. ॐ शतक्रतवे नमः — जो इन्द्र के समान महान यश वाले हैं।

689. ॐ शतमन्युनुताय नमः — जिनकी स्वयं इन्द्र भी स्तुति करते हैं।

690. ॐ स्तुत्याय नमः — जो स्तुति के योग्य हैं।

691. ॐ स्तुतये नमः — जो स्वयं स्तुतिस्वरूप हैं।

692. ॐ स्तोत्रे नमः — जो समस्त स्तोत्रों के आधार हैं।

693. ॐ महाबलाय नमः — जो अतुलनीय बल के स्वामी हैं।

694. ॐ समग्रगुणशालिने नमः — जो सभी सद्गुणों से सम्पन्न हैं।

695. ॐ व्यग्राय नमः — जो धर्मकार्य में सदैव तत्पर रहते हैं।

696. ॐ रक्षोविनाशकाय नमः — जो राक्षसों का विनाश करने वाले हैं।

697. ॐ रक्षोऽग्निदाहाय नमः — जिन्होंने राक्षसों की लंका को अग्नि से दग्ध किया।

698. ॐ ब्रह्मेशाय नमः — जो ब्रह्मा और ईश्वर द्वारा पूजनीय हैं।

699. ॐ श्रीधराय नमः — जो श्री (लक्ष्मी/समृद्धि) को धारण करने वाले भगवान के प्रिय हैं।

700. ॐ भक्तवत्सलाय नमः — जो अपने भक्तों से अत्यंत प्रेम करने वाले हैं।

701. ॐ मेघनादाय नमः — जो मेघ के समान गंभीर गर्जना करने वाले हैं।

702. ॐ मेघरूपाय नमः — जो मेघ के समान विशाल और प्रभावशाली स्वरूप वाले हैं।

703. ॐ मेघवृष्टिनिवारकाय नमः — जो विपत्तिरूपी वर्षा और संकटों का निवारण करते हैं।

704. ॐ मेघजीवनहेतवे नमः — जो वर्षा और जीवन के पालन के हेतु हैं।

705. ॐ मेघश्यामाय नमः — जिनका दिव्य स्वरूप मेघ के समान श्यामल है।

706. ॐ परात्मकाय नमः — जो परमात्मा स्वरूप हैं।

707. ॐ समीरतनयाय नमः — जो पवनदेव के पुत्र हैं।

708. ॐ योद्ध्रे नमः — जो महान योद्धा हैं।

709. ॐ नृत्यविद्याविशारदाय नमः — जो नृत्य एवं कलाओं में भी पारंगत हैं।

710. ॐ अमोघाय नमः — जिनका कोई भी कार्य कभी निष्फल नहीं होता।

711. ॐ अमोघदृष्टये नमः — जिनकी कृपादृष्टि कभी व्यर्थ नहीं जाती।

712. ॐ इष्टदाय नमः — जो भक्तों की इच्छित कामनाएँ पूर्ण करते हैं।

713. ॐ अरिष्टनाशनाय नमः — जो समस्त अनिष्ट और विपत्तियों का नाश करते हैं।

714. ॐ अर्थाय नमः — जो जीवन के सच्चे उद्देश्य और अर्थस्वरूप हैं।

715. ॐ अनर्थापहारिणे नमः — जो सभी अनर्थ और संकटों को दूर करते हैं।

716. ॐ समर्थाय नमः — जो हर कार्य में पूर्ण समर्थ हैं।

717. ॐ रामसेवकाय नमः — जो श्रीराम के परम सेवक हैं।

718. ॐ अर्थिवन्द्याय नमः — जिनकी याचक और भक्त श्रद्धापूर्वक वंदना करते हैं।

719. ॐ असुरारातये नमः — जो असुरों के शत्रु हैं।

720. ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः — जिनकी दृष्टि कमल के समान निर्मल है।

721. ॐ आत्मभुवे नमः — जो आत्मस्वरूप एवं स्वयं प्रकाशित हैं।

722. ॐ सङ्कर्षणाय नमः — जो भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करने वाले हैं।

723. ॐ विशुद्धात्मने नमः — जिनकी आत्मा पूर्णतः निर्मल है।

724. ॐ विद्याराशये नमः — जो समस्त विद्याओं के भंडार हैं।

725. ॐ सुरेश्वराय नमः — जो देवताओं के भी आदरणीय हैं।

726. ॐ अचलोद्धारकाय नमः — जिन्होंने पर्वत उठाकर लोककल्याण किया।

727. ॐ नित्याय नमः — जो सनातन और नित्य हैं।

728. ॐ सेतुकृते नमः — जिन्होंने श्रीराम सेतु के निर्माण में योगदान दिया।

729. ॐ रामसारथये नमः — जो श्रीराम के कार्यों के प्रमुख सहयोगी और मार्गदर्शक हैं।

730. ॐ आनन्दाय नमः — जो आनंदस्वरूप हैं।

731. ॐ परमानन्दाय नमः — जो परम आनंद प्रदान करते हैं।

732. ॐ मत्स्याय नमः — जो मत्स्यावतार के दिव्य गुणों से युक्त हैं।

733. ॐ कूर्माय नमः — जो कूर्मावतार के समान धैर्यवान और स्थिर हैं।

734. ॐ निराश्रयाय नमः — जो किसी पर आश्रित नहीं हैं।

735. ॐ वाराहाय नमः — जो वराहावतार के समान पृथ्वी के रक्षक हैं।

736. ॐ नारसिंहाय नमः — जो नरसिंह के समान भक्तों के रक्षक और दुष्टों के संहारक हैं।

737. ॐ वामनाय नमः — जो वामनावतार के समान विनम्र और दिव्य हैं।

738. ॐ जमदग्निजाय नमः — जो परशुरामावतार के तेज से युक्त हैं।

739. ॐ रामाय नमः — जो श्रीराम के स्वरूप में लीन हैं।

740. ॐ कृष्णाय नमः — जो श्रीकृष्ण के दिव्य गुणों से युक्त हैं।

741. ॐ शिवाय नमः — जो कल्याणस्वरूप एवं शिवांश हैं।

742. ॐ बुद्धाय नमः — जो परम बुद्धिमान हैं।

743. ॐ कल्किने नमः — जो कल्कि के समान अधर्म का नाश करने वाले हैं।

744. ॐ रामाश्रयाय नमः — जिनका एकमात्र आश्रय श्रीराम हैं।

745. ॐ हरये नमः — जो पाप और दुःखों का हरण करते हैं।

746. ॐ नन्दिने नमः — जो आनंद देने वाले हैं।

747. ॐ भृङ्गिणे नमः — जो भगवान शिव के प्रिय गण भृंगी के समान भक्तिभाव वाले हैं।

748. ॐ चण्डिने नमः — जो दुष्टों के प्रति उग्र हैं।

749. ॐ गणेशाय नमः — जो गणों के स्वामी स्वरूप हैं।

750. ॐ गणसेविताय नमः — जिनकी दिव्य गण सेवा करते हैं।

751. ॐ कर्माध्यक्षाय नमः — जो समस्त कर्मों के अध्यक्ष और साक्षी हैं।

752. ॐ सुराध्यक्षाय नमः — जो देवगणों के अधिपति हैं।

753. ॐ विश्रामाय नमः — जो परम शांति और विश्राम के स्वरूप हैं।

754. ॐ जगतीपतये नमः — जो सम्पूर्ण जगत के स्वामी हैं।

755. ॐ जगन्नाथाय नमः — जो सम्पूर्ण विश्व के नाथ हैं।

756. ॐ कपीशाय नमः — जो वानरों के स्वामी हैं।

757. ॐ सर्वावासाय नमः — जो सभी के हृदय में निवास करते हैं।

758. ॐ सदाश्रयाय नमः — जो सभी भक्तों के शाश्वत आश्रय हैं।

759. ॐ सुग्रीवादिस्तुताय नमः — जिनकी सुग्रीव आदि वानरवीरों ने स्तुति की।

760. ॐ दान्ताय नमः — जो इन्द्रियों को पूर्णतः वश में रखने वाले हैं।

761. ॐ सर्वकर्मणे नमः — जो सभी कार्यों को पूर्ण करने में समर्थ हैं।

762. ॐ प्लवङ्गमाय नमः — जो वानरश्रेष्ठ हैं।

763. ॐ नखदारितरक्षसे नमः — जिन्होंने अपने नखों से राक्षसों का संहार किया।

764. ॐ नखयुद्धविशारदाय नमः — जो नखों से युद्ध करने में भी अत्यंत निपुण हैं।

765. ॐ कुशलाय नमः — जो अत्यंत कुशल और दक्ष हैं।

766. ॐ सुधनाय नमः — जो श्रेष्ठ आध्यात्मिक धन के स्वामी हैं।

767. ॐ शेषाय नमः — जो अनंत शेष के समान समर्थ हैं।

768. ॐ वासुकये नमः — जो वासुकि नाग के समान प्रभावशाली हैं।

769. ॐ तक्षकाय नमः — जो तक्षक के समान सामर्थ्यवान हैं।

770. ॐ स्वर्णवर्णाय नमः — जिनका वर्ण स्वर्ण के समान तेजस्वी है।

771. ॐ बलाढ्याय नमः — जो अपार बल से सम्पन्न हैं।

772. ॐ पुरुजेत्रे नमः — जो अनेक शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाले हैं।

773. ॐ अघनाशनाय नमः — जो पापों का नाश करते हैं।

774. ॐ कैवल्यरूपाय नमः — जो मोक्षस्वरूप हैं।

775. ॐ कैवल्याय नमः — जो परम मुक्ति प्रदान करते हैं।

776. ॐ गरुडाय नमः — जो गरुड़ के समान तीव्रगामी और शक्तिशाली हैं।

777. ॐ पन्नगोरगाय नमः — जो नागों और विषैले जीवों पर विजय पाने वाले हैं।

778. ॐ किल्किलरावहतारातये नमः — जिनकी गर्जना से शत्रु भयभीत हो जाते हैं।

779. ॐ गर्वपर्वतभेदनाय नमः — जो अहंकार रूपी पर्वत का भेदन करने वाले हैं।

780. ॐ वज्राङ्गाय नमः — जिनका शरीर वज्र के समान दृढ़ है।

781. ॐ वज्रदंष्ट्राय नमः — जिनके दाँत वज्र के समान कठोर हैं।

782. ॐ भक्तवज्रनिवारकाय नमः — जो भक्तों पर आने वाले कठोर संकटों को दूर करते हैं।

783. ॐ नखायुधाय नमः — जिनके नख ही दिव्य अस्त्र हैं।

784. ॐ मणिग्रीवाय नमः — जिनका कंठ मणियों के समान शोभायमान है।

785. ॐ ज्वालामालिने नमः — जो अग्निज्वालाओं के समान तेजस्वी हैं।

786. ॐ भास्कराय नमः — जो सूर्य के समान प्रकाशमान हैं।

787. ॐ प्रौढप्रतापाय नमः — जिनका प्रताप अत्यंत महान है।

788. ॐ तपनाय नमः — जो दुष्टों को संतप्त करने वाले हैं।

789. ॐ भक्ततापनिवारकाय नमः — जो भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं।

790. ॐ शरणाय नमः — जो सभी का शरणस्थान हैं।

791. ॐ जीवनाय नमः — जो जीवनस्वरूप हैं।

792. ॐ भोक्त्रे नमः — जो समस्त यज्ञ और भक्ति के फल को स्वीकार करने वाले हैं।

793. ॐ नानाचेष्टाय नमः — जो अनेक दिव्य लीलाएँ करने वाले हैं।

794. ॐ अचञ्चलाय नमः — जो कभी विचलित नहीं होते।

795. ॐ स्वस्तिमते नमः — जो कल्याणस्वरूप हैं।

796. ॐ स्वास्तिदाय नमः — जो मंगल और कल्याण प्रदान करते हैं।

797. ॐ दुःखशातनाय नमः — जो समस्त दुःखों का नाश करते हैं।

798. ॐ पवनात्मजाय नमः — जो पवनदेव के पुत्र हैं।

799. ॐ पावनाय नमः — जो सबको पवित्र करने वाले हैं।

800. ॐ पवनाय नमः — जो स्वयं पवन के समान सर्वव्यापक और जीवनदायी हैं।

801. ॐ कान्ताय नमः — जो अत्यंत मनोहर एवं आकर्षक स्वरूप वाले हैं।

802. ॐ भक्तागःसहनाय नमः — जो भक्तों के अपराधों को क्षमा करने वाले हैं।

803. ॐ बलिने नमः — जो अतुलनीय बल के स्वामी हैं।

804. ॐ मेघनादरिपवे नमः — जो मेघनाद के शत्रु और विजेता हैं।

805. ॐ मेघनादसंहतराक्षसाय नमः — जिन्होंने मेघनाद सहित अनेक राक्षसों का संहार किया।

806. ॐ क्षराय नमः — जो नश्वर जगत में भी व्याप्त हैं।

807. ॐ अक्षराय नमः — जो अविनाशी और सनातन हैं।

808. ॐ विनीतात्मने नमः — जिनका स्वभाव अत्यंत विनम्र है।

809. ॐ वानरेशाय नमः — जो वानरों के श्रेष्ठ स्वामी हैं।

810. ॐ सताङ्गतये नमः — जो सज्जनों की परम गति हैं।

811. ॐ श्रीकण्ठाय नमः — जो भगवान शिव के श्रीकण्ठ स्वरूप से अभिन्न माने जाते हैं।

812. ॐ शितिकण्ठाय नमः — जो नीलकण्ठ शिव के समान दिव्य तेज वाले हैं।

813. ॐ सहायाय नमः — जो सदैव सहायता करने वाले हैं।

814. ॐ सहनायकाय नमः — जो श्रेष्ठ मार्गदर्शक और सेनानायक हैं।

815. ॐ अस्थूलाय नमः — जो स्थूल शरीर से परे सूक्ष्म स्वरूप वाले हैं।

816. ॐ अनणवे नमः — जो अत्यंत सूक्ष्म एवं अविभाज्य हैं।

817. ॐ भर्गाय नमः — जो परम तेजस्वी एवं पापों का नाश करने वाले हैं।

818. ॐ दिव्याय नमः — जो दिव्य स्वरूप वाले हैं।

819. ॐ संसृतिनाशनाय नमः — जो जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति प्रदान करते हैं।

820. ॐ अध्यात्मविद्यासाराय नमः — जो अध्यात्म विद्या का सारस्वरूप हैं।

821. ॐ अध्यात्मकुशलाय नमः — जो आध्यात्मिक ज्ञान में पूर्ण निपुण हैं।

822. ॐ सुधिये नमः — जो महान बुद्धिमान हैं।

823. ॐ अकल्मषाय नमः — जो निष्पाप और निर्मल हैं।

824. ॐ सत्यहेतवे नमः — जो सत्य की स्थापना का कारण हैं।

825. ॐ सत्यदाय नमः — जो सत्य का ज्ञान प्रदान करते हैं।

826. ॐ सत्यगोचराय नमः — जो सत्य के द्वारा ही प्राप्त किए जा सकते हैं।

827. ॐ सत्यगर्भाय नमः — जिनके भीतर केवल सत्य ही स्थित है।

828. ॐ सत्यरूपाय नमः — जो सत्यस्वरूप हैं।

829. ॐ सत्याय नमः — जो स्वयं परम सत्य हैं।

830. ॐ सत्यपराक्रमाय नमः — जिनका पराक्रम सदैव सत्य और धर्म के लिए है।

831. ॐ अञ्जनाप्राणलिङ्गाय नमः — जो माता अंजना के प्राणों के समान प्रिय हैं।

832. ॐ वायुवंशोद्भवाय नमः — जो पवनदेव के दिव्य वंश में उत्पन्न हुए।

833. ॐ शुभाय नमः — जो मंगलमय हैं।

834. ॐ भद्ररूपाय नमः — जिनका स्वरूप कल्याणकारी है।

835. ॐ रुद्ररूपाय नमः — जो रुद्र के समान उग्र स्वरूप धारण करते हैं।

836. ॐ सुरूपाय नमः — जो अत्यंत सुंदर एवं मनोहर हैं।

837. ॐ चित्ररूपधृषे नमः — जो आवश्यकता अनुसार अनेक दिव्य रूप धारण करते हैं।

838. ॐ मैनाकवन्दिताय नमः — जिनका मैनाक पर्वत ने सम्मानपूर्वक स्वागत किया।

839. ॐ सूक्ष्मदर्शनाय नमः — जो सूक्ष्म से सूक्ष्म तत्व को देखने वाले हैं।

840. ॐ विजयाय नमः — जो सदैव विजयी हैं।

841. ॐ जयाय नमः — जो विजय प्रदान करने वाले हैं।

842. ॐ क्रान्तदिङ्मण्डलाय नमः — जिनकी कीर्ति समस्त दिशाओं में फैली हुई है।

843. ॐ रुद्राय नमः — जो रुद्रांश स्वरूप हैं।

844. ॐ प्रकटीकृतविक्रमाय नमः — जिन्होंने समय-समय पर अपना अद्भुत पराक्रम प्रकट किया।

845. ॐ कम्बुकण्ठाय नमः — जिनका कंठ शंख के समान सुंदर है।

846. ॐ प्रसन्नात्मने नमः — जिनका स्वभाव सदैव प्रसन्न रहता है।

847. ॐ ह्रस्वनासाय नमः — जिनकी नासिका सुडौल और सुंदर है।

848. ॐ वृकोदराय नमः — जिनका उदर बलशाली और विशाल है।

849. ॐ लम्बौष्ठाय नमः — जिनके ओष्ठ सुडौल और सुंदर हैं।

850. ॐ कुण्डलिने नमः — जो दिव्य कुण्डल धारण करते हैं।

851. ॐ चित्रमालिने नमः — जो विविध सुंदर मालाओं से विभूषित हैं।

852. ॐ योगविदां वराय नमः — जो योगविदों में श्रेष्ठ हैं।

853. ॐ विपश्चिते नमः — जो अत्यंत दूरदर्शी और ज्ञानी हैं।

854. ॐ कवये नमः — जो महान विद्वान और तत्वदर्शी हैं।

855. ॐ आनन्दविग्रहाय नमः — जिनका स्वरूप ही आनंदमय है।

856. ॐ अनल्पशासनाय नमः — जिनकी आज्ञा अटल और प्रभावशाली है।

857. ॐ फाल्गुनीसूनवे नमः — जो अर्जुन (फाल्गुन) के प्रिय सहायक और रक्षक हैं।

858. ॐ अव्यग्राय नमः — जो कभी विचलित नहीं होते।

859. ॐ योगात्मने नमः — जो योगस्वरूप हैं।

860. ॐ योगतत्पराय नमः — जो योग में सदैव लीन रहते हैं।

861. ॐ योगविदे नमः — जो योग के पूर्ण ज्ञाता हैं।

862. ॐ योगकर्त्रे नमः — जो योगमार्ग का उपदेश देने वाले हैं।

863. ॐ योगयोनये नमः — जो योग की मूल शक्ति हैं।

864. ॐ दिगम्बराय नमः — जो समस्त दिशाओं में व्याप्त हैं तथा सांसारिक बंधनों से मुक्त हैं।

865. ॐ अकारादिहकारान्तवर्णनिर्मितविग्रहाय नमः — जिनका स्वरूप सम्पूर्ण वर्णमाला और समस्त ध्वनियों का आधार है।

866. ॐ उलूखलमुखाय नमः — जिनका मुख विशाल और प्रभावशाली है।

867. ॐ सिद्धसंस्तुताय नमः — जिनकी सिद्ध पुरुष भी स्तुति करते हैं।

868. ॐ प्रमथेश्वराय नमः — जो शिवगणों के भी आदरणीय हैं।

869. ॐ श्लिष्टजङ्घाय नमः — जिनकी जंघाएँ अत्यंत सुदृढ़ और सुडौल हैं।

870. ॐ श्लिष्टजानवे नमः — जिनके घुटने अत्यंत सुदृढ़ हैं।

871. ॐ श्लिष्टपाणये नमः — जिनके हाथ बलशाली और सुंदर हैं।

872. ॐ शिखाधराय नमः — जो दिव्य शिखा धारण करते हैं।

873. ॐ सुशर्मणे नमः — जो परम कल्याण और शांति देने वाले हैं।

874. ॐ अमितशर्मणे नमः — जो असीम सुख और कल्याण प्रदान करते हैं।

875. ॐ नारायणपरायणाय नमः — जो सदैव भगवान नारायण (श्रीराम) की भक्ति में लीन रहते हैं।

876. ॐ जिष्णवे नमः — जो सदैव विजयी हैं।

877. ॐ भविष्णवे नमः — जो भविष्य का ज्ञान रखने वाले हैं।

878. ॐ रोचिष्णवे नमः — जो अत्यंत प्रकाशमान हैं।

879. ॐ ग्रसिष्णवे नमः — जो दुष्टता और अधर्म का नाश करने वाले हैं।

880. ॐ स्थाणवे नमः — जो अचल और स्थिर हैं।

881. ॐ हरिरुद्रानुसेकाय नमः — जो हरि और रुद्र दोनों के दिव्य तेज से युक्त हैं।

882. ॐ कम्पनाय नमः — जिनके पराक्रम से शत्रु काँप उठते हैं।

883. ॐ भूमिकम्पनाय नमः — जिनके वेग से पृथ्वी भी कंपित हो उठती है।

884. ॐ गुणप्रवाहाय नमः — जो अनंत सद्गुणों की धारा हैं।

885. ॐ सूत्रात्मने नमः — जो समस्त जगत को सूत्र में पिरोने वाले परमात्मा हैं।

886. ॐ वीतरागस्तुतिप्रियाय नमः — जिन्हें निष्काम भक्तों की स्तुति प्रिय है।

887. ॐ नागकन्याभयध्वंसिने नमः — जो नागकन्याओं के भय का नाश करने वाले हैं।

888. ॐ रुक्मवर्णाय नमः — जिनका वर्ण स्वर्ण के समान है।

889. ॐ कपालभृते नमः — जो दिव्य कपाल धारण करने में समर्थ हैं।

890. ॐ अनाकुलाय नमः — जो किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होते।

891. ॐ भवोपायाय नमः — जो संसार-सागर से पार होने का उपाय हैं।

892. ॐ अनपायाय नमः — जो कभी नष्ट नहीं होते।

893. ॐ वेदपारगाय नमः — जो चारों वेदों के पूर्ण ज्ञाता हैं।

894. ॐ अक्षराय नमः — जो अविनाशी हैं।

895. ॐ पुरुषाय नमः — जो परम पुरुष हैं।

896. ॐ लोकनाथाय नमः — जो समस्त लोकों के स्वामी हैं।

897. ॐ ऋक्षःप्रभवे नमः — जो वानर एवं ऋक्ष (भालू) सेना के प्रेरणास्रोत हैं।

898. ॐ दृढाय नमः — जो अटल और दृढ़ संकल्प वाले हैं।

899. ॐ अष्टाङ्गयोगफलभुजे नमः — जो अष्टांग योग के परम फलस्वरूप हैं।

900. ॐ सत्यसन्धाय नमः — जो सदैव सत्यप्रतिज्ञ और वचन के पक्के हैं।

901. ॐ पुरुष्टुताय नमः — जिनकी श्रेष्ठ पुरुषों और देवताओं द्वारा स्तुति की जाती है।

902. ॐ श्मशानस्थाननिलयाय नमः — जो निर्भय होकर प्रत्येक स्थान में निवास करने वाले हैं।

903. ॐ प्रेतविद्रावणक्षमाय नमः — जो प्रेत, पिशाच और समस्त दुष्ट शक्तियों को दूर करने में समर्थ हैं।

904. ॐ पञ्चाक्षरपराय नमः — जो पंचाक्षर मंत्र के परम ज्ञाता हैं।

905. ॐ पञ्चमातृकाय नमः — जो पंचमातृकाओं द्वारा पूजनीय हैं।

906. ॐ रञ्जनध्वजाय नमः — जिनकी विजयपताका सबका हृदय प्रसन्न करती है।

907. ॐ योगिनीवृन्दवन्द्यश्रियै नमः — जिनकी योगिनियाँ भी श्रद्धापूर्वक वंदना करती हैं।

908. ॐ शत्रुघ्नाय नमः — जो शत्रुओं का संहार करने वाले हैं।

909. ॐ अनन्तविक्रमाय नमः — जिनका पराक्रम अनंत है।

910. ॐ ब्रह्मचारिणे नमः — जो अखंड ब्रह्मचारी हैं।

911. ॐ इन्द्रियरिपवे नमः — जिन्होंने इन्द्रियों पर पूर्ण विजय प्राप्त की है।

912. ॐ धृतदण्डाय नमः — जो अनुशासन और धर्म का दण्ड धारण करते हैं।

913. ॐ दशात्मकाय नमः — जो अनेक दिव्य स्वरूपों में प्रकट होने वाले हैं।

914. ॐ अप्रपञ्चाय नमः — जो संसार के मायिक प्रपंच से परे हैं।

915. ॐ सदाचाराय नमः — जो सदाचार के आदर्श हैं।

916. ॐ शूरसेनाविदारकाय नमः — जो शत्रु सेनाओं का विनाश करने वाले हैं।

917. ॐ वृद्धाय नमः — जो ज्ञान और अनुभव में महान हैं।

918. ॐ प्रमोदाय नमः — जो आनंद प्रदान करने वाले हैं।

919. ॐ आनन्दाय नमः — जो आनंदस्वरूप हैं।

920. ॐ सप्तद्वीपपतिन्धराय नमः — जो सातों द्वीपों के रक्षकों द्वारा पूजनीय हैं।

921. ॐ नवद्वारपुराधाराय नमः — जो शरीररूपी नवद्वार नगर के आधार हैं।

922. ॐ प्रत्यग्राय नमः — जो अंतःकरण में प्रकाशित होने वाले परमात्मा हैं।

923. ॐ सामगायकाय नमः — जो सामवेद के गान में निपुण हैं।

924. ॐ षट्चक्रधाम्ने नमः — जो शरीर के षट्चक्रों में विराजमान हैं।

925. ॐ स्वर्लोकाभयकृते नमः — जो स्वर्गलोक तक में अभय प्रदान करते हैं।

926. ॐ मानदाय नमः — जो सम्मान और प्रतिष्ठा प्रदान करते हैं।

927. ॐ मदाय नमः — जो दिव्य आनंद और उत्साह प्रदान करते हैं।

928. ॐ सर्ववश्यकराय नमः — जो सबको अपने प्रेम और भक्ति से वश में कर लेते हैं।

929. ॐ शक्तये नमः — जो शक्ति के स्वरूप हैं।

930. ॐ अनन्ताय नमः — जो अनंत और असीम हैं।

931. ॐ अनन्तमङ्गलाय नमः — जो अनंत मंगल प्रदान करने वाले हैं।

932. ॐ अष्टमूर्तये नमः — जो आठ दिव्य स्वरूपों में प्रकट होने वाले हैं।

933. ॐ नयोपेताय नमः — जो नीति और धर्म से युक्त हैं।

934. ॐ विरूपाय नमः — जो आवश्यकता अनुसार विविध रूप धारण करते हैं।

935. ॐ सुरसुन्दराय नमः — जो देवताओं के समान सुंदर हैं।

936. ॐ धूमकेतवे नमः — जो धूमकेतु के समान तेजस्वी और प्रभावशाली हैं।

937. ॐ महाकेतवे नमः — जो महान ध्वज और विजय के प्रतीक हैं।

938. ॐ सत्यकेतवे नमः — जो सत्य की पताका धारण करने वाले हैं।

939. ॐ महारथाय नमः — जो महान योद्धा हैं।

940. ॐ नन्दिप्रियाय नमः — जो नंदी और शिवभक्तों के प्रिय हैं।

941. ॐ स्वतन्त्राय नमः — जो पूर्णतः स्वतंत्र हैं।

942. ॐ मेखलिने नमः — जो करधनी धारण करते हैं।

943. ॐ डमरुप्रियाय नमः — जिन्हें डमरू का दिव्य नाद प्रिय है।

944. ॐ लौहाङ्गाय नमः — जिनका शरीर लोहे के समान दृढ़ है।

945. ॐ सर्वविदे नमः — जो सब कुछ जानने वाले हैं।

946. ॐ धन्विने नमः — जो धनुष धारण करने में समर्थ हैं।

947. ॐ खण्डलाय नमः — जो शत्रुओं का खण्डन करने वाले हैं।

948. ॐ शर्वाय नमः — जो भगवान शिव के स्वरूप हैं।

949. ॐ ईश्वराय नमः — जो सर्वशक्तिमान प्रभु हैं।

950. ॐ फलभुजे नमः — जो कर्मों के फल के भोक्ता हैं।

951. ॐ फलहस्ताय नमः — जिनके हाथों में कर्मफल प्रदान करने की शक्ति है।

952. ॐ सर्वकर्मफलप्रदाय नमः — जो सभी कर्मों का उचित फल प्रदान करते हैं।

953. ॐ धर्माध्यक्षाय नमः — जो धर्म के अध्यक्ष और रक्षक हैं।

954. ॐ धर्मपालाय नमः — जो धर्म की रक्षा करने वाले हैं।

955. ॐ धर्माय नमः — जो स्वयं धर्मस्वरूप हैं।

956. ॐ धर्मप्रदाय नमः — जो धर्म का ज्ञान और पालन कराने वाले हैं।

957. ॐ अर्थदाय नमः — जो धन, समृद्धि और जीवन का उद्देश्य प्रदान करते हैं।

958. ॐ पञ्चविंशतितत्त्वज्ञाय नमः — जो पच्चीस तत्त्वों के पूर्ण ज्ञाता हैं।

959. ॐ तारकाय नमः — जो संसार-सागर से पार उतारने वाले हैं।

960. ॐ ब्रह्मतत्पराय नमः — जो ब्रह्मज्ञान में सदैव लीन रहते हैं।

961. ॐ त्रिमार्गवसतये नमः — जो ज्ञान, कर्म और भक्ति—तीनों मार्गों में विराजमान हैं।

962. ॐ भीमाय नमः — जो अत्यंत पराक्रमी और बलशाली हैं।

963. ॐ सर्वदुःखनिबर्हणाय नमः — जो सभी दुःखों का नाश करते हैं।

964. ॐ ऊर्जस्वते नमः — जो ऊर्जा और सामर्थ्य से परिपूर्ण हैं।

965. ॐ निष्कलाय नमः — जो अविभाज्य और निष्कल ब्रह्म हैं।

966. ॐ शूलिने नमः — जो त्रिशूल धारण करने में समर्थ हैं।

967. ॐ मौलिने नमः — जो दिव्य मुकुट धारण करते हैं।

968. ॐ गर्जन्निशाचराय नमः — जिनकी गर्जना से राक्षस भयभीत हो जाते हैं।

969. ॐ रक्ताम्बरधराय नमः — जो लाल वस्त्र धारण करते हैं।

970. ॐ रक्ताय नमः — जिनका वर्ण अरुण आभा से युक्त है।

971. ॐ रक्तमाल्याय नमः — जो लाल पुष्पमाला धारण करते हैं।

972. ॐ विभूषणाय नमः — जो दिव्य आभूषणों से अलंकृत हैं।

973. ॐ वनमालिने नमः — जो वनमाला धारण करते हैं।

974. ॐ शुभाङ्गाय नमः — जिनका प्रत्येक अंग शुभ और मंगलमय है।

975. ॐ श्वेताय नमः — जो श्वेत प्रकाश के समान निर्मल हैं।

976. ॐ श्वेताम्बराय नमः — जो श्वेत वस्त्र धारण करते हैं।

977. ॐ यूने नमः — जो सदैव युवा और उत्साहपूर्ण हैं।

978. ॐ जयाय नमः — जो सदा विजय प्रदान करते हैं।

979. ॐ अजयपरीवाराय नमः — जिनका दिव्य परिवार अजेय है।

980. ॐ सहस्रवदनाय नमः — जो सहस्र मुखों वाले विराट स्वरूप धारण करने में समर्थ हैं।

981. ॐ कपये नमः — जो वानरश्रेष्ठ हैं।

982. ॐ शाकिनीडाकिनीयक्षरक्षोभूतप्रभञ्जकाय नमः — जो शाकिनी, डाकिनी, यक्ष, राक्षस और भूत-प्रेत आदि सभी दुष्ट शक्तियों का नाश करते हैं।

983. ॐ सद्योजाताय नमः — जो सदैव नवीन दिव्य स्वरूप में प्रकट होते हैं।

984. ॐ कामगतये नमः — जो इच्छानुसार कहीं भी पहुँचने में समर्थ हैं।

985. ॐ ज्ञानमूर्तये नमः — जो ज्ञान की साक्षात् मूर्ति हैं।

986. ॐ यशस्कराय नमः — जो यश और कीर्ति प्रदान करते हैं।

987. ॐ शम्भुतेजसे नमः — जो भगवान शिव के तेज से युक्त हैं।

988. ॐ सार्वभौमाय नमः — जो समस्त लोकों में सर्वोच्च हैं।

989. ॐ विष्णुभक्ताय नमः — जो भगवान विष्णु (श्रीराम) के परम भक्त हैं।

990. ॐ प्लवङ्गमाय नमः — जो वानरश्रेष्ठ हैं।

991. ॐ चतुर्नवतिमन्त्रज्ञाय नमः — जो अनेक दिव्य मंत्रों के ज्ञाता हैं।

992. ॐ पौलस्त्यबलदर्पघ्ने नमः — जिन्होंने रावण (पुलस्त्य वंश) के बल और अहंकार का नाश किया।

993. ॐ सर्वलक्ष्मीप्रदाय नमः — जो समस्त प्रकार की समृद्धि प्रदान करते हैं।

994. ॐ श्रीमते नमः — जो ऐश्वर्य और दिव्य श्री से सम्पन्न हैं।

995. ॐ अङ्गदप्रियाय नमः — जो अंगद के प्रिय और हितैषी हैं।

996. ॐ ईडिताय नमः — जिनकी सभी देवता और ऋषि स्तुति करते हैं।

997. ॐ स्मृतिबीजाय नमः — जो स्मरण शक्ति और ज्ञान के मूल स्रोत हैं।

998. ॐ सुरेशानाय नमः — जो देवताओं के भी ईश्वरस्वरूप हैं।

999. ॐ संसारभयनाशनाय नमः — जो संसार के भय और बंधनों का नाश करते हैं।

1000. ॐ उत्तमाय नमः — जो सर्वोत्तम, परम श्रेष्ठ और समस्त गुणों से सम्पन्न हैं।

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हनुमान सहस्रनाम की उत्पत्ति

हनुमान सहस्रनाम का उल्लेख विभिन्न प्राचीन ग्रंथों और पुराणों में मिलता है। यह केवल नामों का संग्रह नहीं है, बल्कि भगवान हनुमान के दिव्य स्वरूप का विस्तृत वर्णन है।

मान्यता है कि देवताओं, ऋषियों और महान भक्तों ने भगवान हनुमान की महिमा का अनुभव करने के बाद उनके विभिन्न गुणों के आधार पर इन दिव्य नामों का वर्णन किया। प्रत्येक नाम अपने भीतर एक विशेष आध्यात्मिक शक्ति और गूढ़ अर्थ समेटे हुए है।

हनुमानजी स्वयं भगवान शिव के रुद्रावतार माने जाते हैं। इसलिए उनके सहस्रनाम में शिव, विष्णु, ब्रह्मा, रामभक्ति, योग, वेद, धर्म और मोक्ष से जुड़े अनेक नाम सम्मिलित हैं।


हनुमान सहस्रनाम का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में किसी भी देवता के सहस्रनाम का जाप अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। हनुमान सहस्रनाम का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि इसमें केवल स्तुति ही नहीं, बल्कि भगवान हनुमान के संपूर्ण दिव्य व्यक्तित्व का दर्शन होता है।

हनुमान सहस्रनाम का नियमित पाठ करने से भक्त के मन में श्रद्धा, साहस, संयम और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह पाठ व्यक्ति को श्रीराम की भक्ति की ओर प्रेरित करता है और जीवन में धर्म का पालन करने की शक्ति देता है।

ऐसा माना जाता है कि जहाँ हनुमानजी का स्मरण होता है, वहाँ नकारात्मक शक्तियाँ टिक नहीं पातीं। इसलिए हनुमान सहस्रनाम का पाठ आध्यात्मिक सुरक्षा कवच के समान माना जाता है।


हनुमान सहस्रनाम के प्रत्येक नाम का महत्व

हनुमानजी के प्रत्येक नाम के पीछे एक विशेष अर्थ और आध्यात्मिक संदेश छिपा है।

उदाहरण के लिए—

  • पवनपुत्र — असीम ऊर्जा और गति के प्रतीक।
  • रामदूत — सेवा, समर्पण और निष्ठा का आदर्श।
  • संकटमोचन — भक्तों के संकट दूर करने वाले।
  • महाबली — अद्भुत शक्ति और साहस के प्रतीक।
  • भक्तवत्सल — अपने भक्तों पर असीम कृपा करने वाले।
  • रुद्रावतार — भगवान शिव के दिव्य अंश।
  • ज्ञानगुणसागर — ज्ञान और सद्गुणों का अथाह भंडार।
  • लक्ष्मणप्राणदाता — संजीवनी लाकर जीवनदाता बनने वाले।

इसी प्रकार सहस्रनाम के एक-एक नाम में भगवान हनुमान के किसी न किसी दिव्य गुण का वर्णन किया गया है। जब भक्त श्रद्धापूर्वक इन नामों का उच्चारण करता है, तब वह केवल नाम नहीं बोलता, बल्कि उन दिव्य गुणों का भी स्मरण और चिंतन करता है।


हनुमान सहस्रनाम का पाठ क्यों करना चाहिए?

आज के समय में मानसिक तनाव, भय, असफलता, नकारात्मकता और आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याएँ बहुत सामान्य हो गई हैं। ऐसे समय में हनुमान सहस्रनाम का पाठ व्यक्ति को केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी मजबूत बनाता है।

नियमित पाठ करने से—

  • मन भगवान श्रीराम की भक्ति में स्थिर होता है।
  • नकारात्मक विचार कम होते हैं।
  • आत्मबल और साहस बढ़ता है।
  • कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।
  • जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है।
  • धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।

यह केवल मनोकामना पूर्ति का साधन नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और चरित्र निर्माण का भी श्रेष्ठ मार्ग है।

हनुमान सहस्रनाम पाठ करने की सही विधि

हनुमान सहस्रनाम का पाठ केवल नामों का उच्चारण भर नहीं है, बल्कि यह भगवान श्रीहनुमान के प्रति श्रद्धा, समर्पण और भक्ति व्यक्त करने का एक श्रेष्ठ माध्यम है। यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक इसका पाठ किया जाए तो इसका आध्यात्मिक प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है। हालांकि शास्त्रों में सबसे अधिक महत्व भावना (भक्ति) को दिया गया है, इसलिए यदि सभी नियमों का पालन संभव न हो तो भी सच्चे मन से किया गया पाठ फलदायी माना जाता है।

1. प्रातःकाल या संध्या समय का चयन करें

हनुमान सहस्रनाम का पाठ ब्रह्ममुहूर्त, सूर्योदय के बाद अथवा संध्या के समय करना श्रेष्ठ माना जाता है। यदि इन समयों में संभव न हो तो दिन के किसी भी शांत समय में श्रद्धापूर्वक पाठ किया जा सकता है।

2. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें

पाठ से पहले स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें। लाल, केसरिया या पीले रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण मन और विचारों की पवित्रता है।

3. पूजा स्थान को स्वच्छ रखें

भगवान हनुमान की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक और धूप जलाकर पूजा करें। यदि संभव हो तो चमेली के तेल का दीपक जलाएँ और लाल फूल या सिंदूर अर्पित करें।

4. श्रीराम का स्मरण करें

हनुमानजी श्रीराम के परम भक्त हैं, इसलिए सहस्रनाम पाठ प्रारंभ करने से पहले भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मणजी का स्मरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

5. शांत मन से पाठ करें

पाठ करते समय जल्दबाजी न करें। प्रत्येक नाम का स्पष्ट उच्चारण करें और उसके भाव का मनन करें। यदि पूरा सहस्रनाम एक साथ पढ़ना कठिन लगे तो प्रतिदिन कुछ भाग पढ़कर भी पूरा किया जा सकता है।

6. अंत में प्रार्थना करें

पाठ समाप्त होने के बाद भगवान हनुमान से अपने और समस्त संसार के कल्याण की प्रार्थना करें। अंत में श्रीराम नाम का स्मरण और हनुमानजी की आरती करना भी शुभ माना जाता है।


हनुमान सहस्रनाम पाठ के नियम

हनुमान सहस्रनाम के लिए कोई कठोर नियम अनिवार्य नहीं हैं, फिर भी कुछ बातों का ध्यान रखने से साधना अधिक प्रभावी मानी जाती है।

  • पाठ श्रद्धा और विश्वास के साथ करें।
  • उच्चारण यथासंभव शुद्ध रखने का प्रयास करें।
  • क्रोध, ईर्ष्या और कटु वाणी से बचें।
  • सात्त्विक भोजन और सात्त्विक जीवनशैली अपनाने का प्रयास करें।
  • मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से पाठ करना शुभ माना जाता है।
  • यदि किसी कारण से एक दिन पाठ न हो सके तो अपराधबोध न रखें, अगले दिन पुनः नियमित रूप से आरंभ करें।
  • पाठ के दौरान मोबाइल, बातचीत या अन्य व्यवधानों से बचें।

हनुमान सहस्रनाम का पाठ कब करना चाहिए?

यद्यपि इसका पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है, फिर भी कुछ अवसर विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।

  • प्रत्येक मंगलवार
  • प्रत्येक शनिवार
  • हनुमान जयंती
  • राम नवमी
  • पूर्णिमा
  • अमावस्या
  • नवरात्रि
  • दीपावली के बाद का समय
  • किसी महत्वपूर्ण कार्य के प्रारंभ से पहले
  • संकट, रोग, भय या मानसिक अशांति के समय

हनुमान सहस्रनाम कितनी बार पढ़ना चाहिए?

यह पूरी तरह भक्त की सुविधा और समय पर निर्भर करता है।

  • प्रतिदिन एक बार पाठ करना उत्तम है।
  • यदि समय कम हो तो सप्ताह में मंगलवार और शनिवार को करें।
  • विशेष मनोकामना के लिए 11, 21 या 40 दिनों तक नियमित पाठ किया जा सकता है।
  • कुछ साधक प्रतिदिन सहस्रनाम के केवल 108 नाम भी पढ़ते हैं और समय मिलने पर पूरा पाठ करते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पाठ नियमित और श्रद्धापूर्वक किया जाए।


हनुमान सहस्रनाम पाठ के प्रमुख लाभ

शास्त्रों और भक्तों की मान्यता के अनुसार हनुमान सहस्रनाम का नियमित पाठ अनेक प्रकार के आध्यात्मिक और मानसिक लाभ प्रदान करता है।

1. भय से मुक्ति

हनुमानजी को अभयदाता कहा गया है। उनके नामों का स्मरण मन से भय, असुरक्षा और नकारात्मक विचारों को दूर करने में सहायक माना जाता है।

2. आत्मविश्वास में वृद्धि

हनुमानजी का जीवन साहस, पराक्रम और आत्मविश्वास का प्रतीक है। सहस्रनाम का पाठ व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

3. मानसिक शांति

नियमित पाठ मन को स्थिर करता है और तनाव, चिंता तथा बेचैनी को कम करने में सहायता करता है।

4. आध्यात्मिक उन्नति

प्रत्येक नाम भगवान हनुमान के किसी दिव्य गुण का स्मरण कराता है, जिससे भक्त के भीतर भी वे गुण विकसित होने लगते हैं।

5. नकारात्मक शक्तियों से रक्षा

धार्मिक मान्यता है कि हनुमानजी का स्मरण दुष्प्रभाव, भय और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करता है।

6. श्रीराम भक्ति की प्राप्ति

हनुमानजी का सबसे बड़ा संदेश श्रीराम की भक्ति है। सहस्रनाम का नियमित पाठ भक्त को भगवान श्रीराम के और अधिक निकट ले जाता है।

7. कठिन समय में धैर्य

जीवन की चुनौतियों के समय हनुमानजी के नाम व्यक्ति को साहस, धैर्य और सही निर्णय लेने की प्रेरणा देते हैं।


क्या महिलाएँ हनुमान सहस्रनाम का पाठ कर सकती हैं?

हाँ। हनुमान सहस्रनाम का पाठ स्त्री और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक कर सकते हैं। भगवान हनुमान सभी भक्तों पर समान कृपा करते हैं। पाठ के संबंध में सबसे महत्वपूर्ण बात शुद्ध भावना, श्रद्धा और भगवान के प्रति समर्पण है, न कि केवल बाहरी औपचारिकताएँ।


हनुमान सहस्रनाम का आध्यात्मिक महत्व

हनुमान सहस्रनाम केवल एक स्तोत्र नहीं, बल्कि भगवान श्रीहनुमान के एक हजार दिव्य गुणों का आध्यात्मिक चिंतन है। प्रत्येक नाम साधक को किसी न किसी श्रेष्ठ गुण को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।

जब भक्त श्रद्धा से इन नामों का जप करता है, तो उसका मन धीरे-धीरे संसार की नकारात्मकता से हटकर ईश्वर की ओर केंद्रित होने लगता है। सहस्रनाम का नियमित पाठ मन को स्थिर करता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है और व्यक्ति को धर्म, सेवा तथा भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान हनुमान केवल बल के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे ज्ञान, विनम्रता, ब्रह्मचर्य, सेवा, त्याग, गुरु-भक्ति, सत्य और निस्वार्थ कर्म के सर्वोच्च आदर्श भी हैं। इसलिए सहस्रनाम का प्रत्येक नाम केवल स्तुति नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक शिक्षा भी है।

हनुमान सहस्रनाम के 1000 नाम हमें क्या सिखाते हैं?

यदि पूरे सहस्रनाम का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया जाए तो यह केवल भगवान की स्तुति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक संपूर्ण शिक्षा भी है।

इन नामों से हमें सीख मिलती है कि—

  • सच्ची शक्ति हमेशा विनम्रता के साथ होनी चाहिए।
  • ज्ञान का उद्देश्य केवल विद्वत्ता नहीं, बल्कि सेवा होना चाहिए।
  • अहंकार व्यक्ति को पतन की ओर ले जाता है।
  • गुरु और ईश्वर के प्रति समर्पण ही वास्तविक सफलता का मार्ग है।
  • धर्म के लिए संघर्ष करना भी भक्ति का एक रूप है।
  • संकट आने पर घबराने के बजाय धैर्य और विश्वास बनाए रखना चाहिए।
  • निस्वार्थ सेवा सबसे बड़ा धर्म है।
  • श्रीराम के आदर्शों पर चलना ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य होना चाहिए।

किन लोगों को हनुमान सहस्रनाम का पाठ अवश्य करना चाहिए?

यद्यपि प्रत्येक भक्त इसका पाठ कर सकता है, फिर भी कुछ परिस्थितियों में इसे विशेष रूप से लाभकारी माना गया है।

  • जो मानसिक तनाव या भय से परेशान हों।
  • जिनका आत्मविश्वास कम हो।
  • विद्यार्थी जो एकाग्रता बढ़ाना चाहते हों।
  • नौकरी या व्यवसाय में कठिनाइयों का सामना कर रहे लोग।
  • आध्यात्मिक साधना करने वाले साधक।
  • जो श्रीराम और हनुमानजी की भक्ति को गहरा करना चाहते हों।
  • परिवार की सुख-शांति और मंगल की कामना करने वाले भक्त।

हनुमान सहस्रनाम पढ़ते समय होने वाली सामान्य गलतियाँ

सहस्रनाम का पाठ करते समय कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • केवल जल्दी समाप्त करने के उद्देश्य से पाठ न करें।
  • नामों का जानबूझकर गलत उच्चारण न करें।
  • पाठ करते समय मन को इधर-उधर भटकने न दें।
  • क्रोध, अहंकार और कटु व्यवहार के साथ की गई साधना का प्रभाव कम हो जाता है।
  • केवल मनोकामना के लिए ही नहीं, बल्कि भगवान की भक्ति और आत्मिक उन्नति के लिए भी पाठ करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या हनुमान सहस्रनाम का पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है?

हाँ, प्रतिदिन श्रद्धा और भक्ति के साथ इसका पाठ किया जा सकता है। यदि समय कम हो तो मंगलवार और शनिवार को अवश्य करें।

क्या बिना दीक्षा के हनुमान सहस्रनाम पढ़ सकते हैं?

हाँ। सामान्य श्रद्धालु बिना किसी विशेष दीक्षा के भी श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ कर सकते हैं।

क्या हनुमान सहस्रनाम का पाठ घर में किया जा सकता है?

हाँ, घर के पूजा स्थान पर स्वच्छ वातावरण में इसका पाठ करना पूर्णतः शुभ माना जाता है।

क्या सहस्रनाम का पूरा पाठ एक ही दिन में करना आवश्यक है?

नहीं। यदि समय कम हो तो इसे भागों में भी पढ़ा जा सकता है। महत्वपूर्ण बात नियमितता और श्रद्धा है।

क्या महिलाएँ हनुमान सहस्रनाम का पाठ कर सकती हैं?

हाँ, स्त्री और पुरुष दोनों समान श्रद्धा से इसका पाठ कर सकते हैं।

क्या हनुमान सहस्रनाम पढ़ने से सभी समस्याएँ समाप्त हो जाती हैं?

धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका पाठ भक्त को साहस, मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और ईश्वर की कृपा प्राप्त करने में सहायता करता है। जीवन की समस्याओं का समाधान उचित कर्म, विवेक और ईश्वर में विश्वास—इन सभी के संतुलन से होता है।


निष्कर्ष

हनुमान सहस्रनाम भगवान श्रीहनुमान की महिमा का अद्भुत स्तोत्र है। इसमें वर्णित प्रत्येक नाम भक्त को शक्ति, भक्ति, ज्ञान, साहस, विनम्रता और धर्म का संदेश देता है। जो व्यक्ति श्रद्धा, विश्वास और नियमितता के साथ इसका पाठ करता है, उसके जीवन में आध्यात्मिक जागृति, आत्मबल और सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं।

याद रखें कि सहस्रनाम का वास्तविक उद्देश्य केवल मनोकामना पूर्ण करना नहीं, बल्कि भगवान श्रीहनुमान के दिव्य गुणों को अपने जीवन में उतारना है। जब हम उनके आदर्शों—सेवा, समर्पण, सत्य, निष्ठा और श्रीराम भक्ति—को अपनाते हैं, तभी इस पवित्र स्तोत्र का वास्तविक फल प्राप्त होता है।

🌐 संदर्भ (External References)

मंत्र / Mantra

चालीसा / Chalisa

कथा / Katha

भजन / Bhajan

आरती/ Aarti

भगवान / God

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