भगवान विष्णु जी की आरती सनातन धर्म में भगवान श्रीहरि विष्णु की उपासना का एक महत्वपूर्ण अंग मानी जाती है। श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान विष्णु जी की आरती करने से भगवान श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उनकी सभी उचित मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। विशेष रूप से गुरुवार, एकादशी, वैकुण्ठ एकादशी, देवउठनी एकादशी, श्रीहरि विष्णु से जुड़े व्रत-पूजन तथा अन्य शुभ अवसरों पर भगवान विष्णु जी की आरती का पाठ और गायन अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है।
ओम जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट, दासजनो के संकट, क्षण में दूर करे॥
ओम जय जगदीश हरे…
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥
ओम जय जगदीश हरे…
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ओम जय जगदीश हरे…
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करू जिसकी॥
ओम जय जगदीश हरे…
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ओम जय जगदीश हरे…
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥
ओम जय जगदीश हरे…
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ओम जय जगदीश हरे…
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
ओम जय जगदीश हरे…
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा॥
ओम जय जगदीश हरे…
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
ओम जय जगदीश हरे…
भगवान विष्णु जी की आरती: ॐ जय जगदीश हरे (लिरिक्स, विधि और लाभ)
भगवान विष्णु, जिन्हें सृष्टि का पालनहार माना जाता है, उनकी आराधना के बिना कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है। भगवान विष्णु जी की आरती “ॐ जय जगदीश हरे” का गान करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। इस लेख में हम आपको विष्णु जी की आरती के संपूर्ण लिरिक्स, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में विस्तार से बताएंगे।
भगवान विष्णु जी की आरती का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, भगवान विष्णु सत्य और धर्म के प्रतीक हैं। “ॐ जय जगदीश हरे” आरती की रचना पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी जी ने की थी। यह आरती न केवल भगवान विष्णु को प्रसन्न करती है, बल्कि यह मनुष्य को समर्पण और भक्ति का भाव भी सिखाती है।
जब हम कहते हैं “तेरा तुझको अर्पण”, तो हम अपने अहंकार को त्यागकर ईश्वर के प्रति पूर्ण श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करते हैं। नियमित रूप से विष्णु जी की आरती करने से जीवन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
भगवान विष्णु जी की आरती करने के लाभ
सकारात्मक ऊर्जा
विष्णु जी की आरती करने से घर से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
पापों से मुक्ति
भक्ति और श्रद्धा के साथ आरती करने से अनजाने में हुए पापों और मानसिक विकारों से मुक्ति प्राप्त होती है।
आर्थिक समृद्धि
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है।
मानसिक शांति
आरती के नियमित पाठ से मन के क्लेश दूर होते हैं और एकाग्रता तथा मानसिक शांति प्राप्त होती है।
भगवान विष्णु जी की आरती करने की विधि
समय
भगवान विष्णु जी की आरती प्रातःकाल और संध्या के समय करना श्रेष्ठ माना जाता है। विशेष रूप से गुरुवार और एकादशी के दिन इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
तैयारी
स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें और पूजा के लिए स्वच्छ स्थान पर आसन ग्रहण करें। घी का दीपक या कपूर जलाकर पूजा प्रारंभ करें।
पूजा
आरती से पहले भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले वस्त्र और तुलसी दल अर्पित करें। इससे भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
आरती का तरीका
आरती की थाली में दीपक लेकर भगवान की प्रतिमा या चित्र के सामने श्रद्धा और भक्ति के साथ गोलाकार घुमाते हुए ऊंचे स्वर में आरती गाएं।
प्रसाद
आरती पूर्ण होने के बाद चरणामृत और पंजीरी का प्रसाद भक्तों में वितरित करें।
भगवान विष्णु जी की आरती का आध्यात्मिक संदेश
भगवान विष्णु की भक्ति हमें सत्य, धैर्य, करुणा और समर्पण का मार्ग दिखाती है। जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान विष्णु की शरण में आता है, उसकी सभी चिंताओं का निवारण होता है और जीवन में सुख-शांति का वास होता है।
भक्ति संदेश
“सत्य ही विष्णु है और विष्णु ही सत्य है। जो प्रभु की शरण में आता है, भगवान उसका हाथ थाम लेते हैं और उसे सही मार्ग दिखाते हैं।”
