कन्या पूजन विधि (Kanya Pujan Vidhi): नवरात्रि में कन्या पूजा की संपूर्ण विधि, सामग्री, मंत्र और महत्व
परिचय
नवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख धार्मिक पर्व है, जो मां दुर्गा की उपासना और शक्ति आराधना को समर्पित होता है। नौ दिनों तक भक्त माता के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और व्रत, मंत्र जाप तथा साधना करते हैं। नवरात्रि के अंतिम दिनों में किया जाने वाला कन्या पूजन (Kanya Pujan) इस पूरे पर्व का सबसे महत्वपूर्ण और भावपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
कन्या पूजन में छोटी कन्याओं को मां दुर्गा के स्वरूप के रूप में सम्मान दिया जाता है। सनातन परंपरा में नारी शक्ति को आदिशक्ति का रूप माना गया है, इसलिए कन्याओं का पूजन करके भक्त मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।
अष्टमी और नवमी तिथि को घर में कन्याओं को आमंत्रित करके उनका स्वागत करना, चरण धोना, तिलक लगाना, भोजन कराना और उपहार देना कन्या पूजन की मुख्य विधि है।
कन्या पूजन क्या है? (What is Kanya Pujan)
कन्या पूजन नवरात्रि में की जाने वाली एक विशेष धार्मिक पूजा है, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है।
इसे अलग-अलग स्थानों पर कई नामों से जाना जाता है:
- कन्या पूजा
- कंजक पूजा
- कुमारी पूजा
- कन्या भोज
- अष्टमी कन्या पूजन
- नवमी कन्या पूजन
इस परंपरा में सामान्य रूप से नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक माना जाता है। साथ ही एक छोटे बालक को भैरव स्वरूप मानकर पूजा करने की भी परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है।
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कन्या पूजन का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में शक्ति को संसार की मूल ऊर्जा माना गया है। मां दुर्गा को आदिशक्ति कहा जाता है, जो सृष्टि के संचालन की शक्ति हैं। कन्या पूजन के माध्यम से भक्त उसी शक्ति स्वरूप का सम्मान करते हैं।
शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:
- कन्या पूजन से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं।
- घर में सुख और शांति का वातावरण बनता है।
- परिवार पर देवी की कृपा बनी रहती है।
- जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
- मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए यह पूजा शुभ मानी जाती है।
कन्या पूजन हमें यह संदेश भी देता है कि समाज में बेटियों और महिलाओं का सम्मान करना चाहिए।
नवरात्रि में कन्या पूजन कब किया जाता है?
कन्या पूजन मुख्य रूप से नवरात्रि की इन तिथियों में किया जाता है:
दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन
नवरात्रि की अष्टमी तिथि को कन्या पूजन करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन मां महागौरी की पूजा के साथ कन्याओं का पूजन किया जाता है।
महानवमी पर कन्या पूजन
नवमी तिथि को भी कन्या पूजन और कन्या भोज की परंपरा है। कई भक्त नवमी के दिन नवरात्रि व्रत का समापन करते हुए कन्याओं को भोजन कराते हैं।
कुछ परिवार अपनी कुल परंपरा के अनुसार अष्टमी या नवमी में से किसी एक दिन कन्या पूजन करते हैं।
नौ कन्याओं का महत्व और देवी स्वरूप
नवरात्रि में नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है।
| कन्या की आयु | देवी स्वरूप |
|---|---|
| 2 वर्ष | कुमारी |
| 3 वर्ष | त्रिमूर्ति |
| 4 वर्ष | कल्याणी |
| 5 वर्ष | रोहिणी |
| 6 वर्ष | कालिका |
| 7 वर्ष | चंडिका |
| 8 वर्ष | शांभवी |
| 9 वर्ष | दुर्गा |
| 10 वर्ष | सुभद्रा |
धार्मिक मान्यता के अनुसार इन कन्याओं की पूजा करने से मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की कृपा प्राप्त होती है।

कन्या पूजन के लिए आवश्यक सामग्री (Kanya Pujan Samagri)
कन्या पूजन को विधि-विधान से करने के लिए पहले से पूजा सामग्री तैयार कर लेनी चाहिए।
पूजा सामग्री:
- मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति
- दीपक
- घी या तेल
- धूप और अगरबत्ती
- फूल और माला
- रोली
- अक्षत (चावल)
- कलावा
- जल
- आसन
- चुनरी
कन्या भोज सामग्री:
- पूरी
- सूजी का हलवा
- काले चने
- फल
- मिठाई
- प्रसाद
उपहार सामग्री:
- दक्षिणा
- फल
- कपड़े
- चुनरी
- स्टेशनरी या उपयोगी वस्तुएं

कन्या पूजन विधि (Step By Step Kanya Pujan Vidhi)
1. घर और पूजा स्थान की सफाई करें
कन्या पूजन के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को साफ करके मां दुर्गा के सामने दीपक जलाएं।
सबसे पहले माता का ध्यान करें और उनसे पूजा सफल होने की प्रार्थना करें।
2. कन्याओं का स्वागत करें
कन्याओं को सम्मानपूर्वक घर में बुलाएं। उन्हें देवी का स्वरूप मानकर प्रेम और आदर के साथ बैठाएं।
कन्याओं के बैठने के लिए स्वच्छ स्थान या आसन की व्यवस्था करें।
3. कन्याओं के चरण धोएं
परंपरा के अनुसार कन्याओं के चरण जल से धोए जाते हैं।
यह कार्य देवी के प्रति सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है।
चरण धोने के बाद उन्हें साफ कपड़े से पोंछ सकते हैं।
4. तिलक लगाकर पूजन करें
इसके बाद कन्याओं के माथे पर रोली और अक्षत लगाएं।
उनके हाथ में कलावा बांधें और फूल अर्पित करें।
इस दौरान मां दुर्गा का स्मरण करते हुए पूजा करें।
5. कन्याओं को भोजन कराएं
कन्याओं को प्रेम और श्रद्धा से भोजन कराया जाता है।
परंपरागत रूप से:
- पूरी
- हलवा
- काले चने
का भोजन विशेष रूप से बनाया जाता है।
भोजन कराते समय मन में मां दुर्गा के प्रति भक्ति भाव रखना चाहिए।

6. दक्षिणा और उपहार दें
भोजन के बाद कन्याओं को दक्षिणा, फल या उपहार दिए जाते हैं।
इसके बाद कन्याओं से आशीर्वाद लेकर उन्हें सम्मानपूर्वक विदा किया जाता है।
कन्या पूजन मंत्र (Kanya Pujan Mantra)
कन्या पूजन करते समय मां दुर्गा का ध्यान करते हुए मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। मंत्रों के उच्चारण से पूजा में आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति भाव बढ़ता है।
1. देवी मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
अर्थ:
जो देवी सभी प्राणियों में माता के रूप में स्थित हैं, उन देवी को बार-बार नमस्कार है।
2. मां दुर्गा ध्यान मंत्र
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥
अर्थ:
हे माता नारायणी! आप सभी मंगलों को प्रदान करने वाली, कल्याणकारी और शरण देने वाली हैं। आपको मेरा प्रणाम है।
3. कन्या पूजन के समय बोलने वाला मंत्र
कुमारस्य च तत्त्वेन कुमारी पूजयाम्यहम्।
सिद्धि बुद्धि प्रदां देवीं नमामि वरदायिनीम्॥
अर्थ:
मैं कुमारी रूप में स्थित देवी की पूजा करता हूं, जो सिद्धि और बुद्धि प्रदान करने वाली हैं।
कन्या पूजन की कथा (Kanya Pujan Katha)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा ने संसार की रक्षा के लिए अनेक रूप धारण किए। जब-जब धरती पर अधर्म और अत्याचार बढ़ा, तब देवी ने शक्ति स्वरूप में प्रकट होकर दुष्टों का संहार किया।
नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों की साधना के बाद अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है।
मान्यता है कि कन्याएं स्वयं देवी शक्ति का स्वरूप होती हैं। इसलिए जब भक्त छोटी कन्याओं का सम्मान करते हैं, तो वह मां भगवती की आराधना के समान माना जाता है।
एक अन्य धार्मिक कथा के अनुसार, एक भक्त ने सच्ची श्रद्धा से मां दुर्गा की उपासना की। माता उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर कन्या रूप में उसके घर आईं। भक्त ने उनका आदर और पूजन किया, जिससे उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हुए।
इस कथा का संदेश है कि ईश्वर की शक्ति किसी भी रूप में हमारे सामने आ सकती है, इसलिए हर कन्या और नारी का सम्मान करना चाहिए।
कन्या पूजन में कन्याओं की संख्या कितनी होनी चाहिए?
परंपरा के अनुसार कन्या पूजन में:
- 9 कन्याओं का पूजन सबसे शुभ माना जाता है।
- साथ में 1 बालक को भैरव स्वरूप मानकर पूजा की जाती है।
लेकिन यदि किसी कारण से नौ कन्याएं उपलब्ध न हों तो:
- 2 कन्याएं
- 5 कन्याएं
- 7 कन्याएं
या श्रद्धा अनुसार किसी भी संख्या में कन्याओं का पूजन किया जा सकता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा में संख्या से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा और भाव होता है।
कन्या पूजन में उम्र का महत्व
धार्मिक ग्रंथों में अलग-अलग उम्र की कन्याओं को देवी के अलग-अलग स्वरूपों से जोड़ा गया है।
2 वर्ष की कन्या – कुमारी
इसे शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।
3 वर्ष की कन्या – त्रिमूर्ति
यह देवी के तीनों शक्तियों के स्वरूप का प्रतीक मानी जाती है।
4 वर्ष की कन्या – कल्याणी
कल्याण और शुभता प्रदान करने वाली मानी जाती है।
5 वर्ष की कन्या – रोहिणी
स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
6 वर्ष की कन्या – कालिका
शक्ति और साहस का स्वरूप मानी जाती है।
7 वर्ष की कन्या – चंडिका
दुष्ट शक्तियों के नाश करने वाली शक्ति का प्रतीक है।
8 वर्ष की कन्या – शांभवी
मां दुर्गा के विशेष स्वरूप का प्रतीक मानी जाती है।
9 वर्ष की कन्या – दुर्गा
स्वयं मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है।
कन्या पूजन में क्या भोजन बनाना चाहिए?
नवरात्रि कन्या पूजन में सात्विक भोजन बनाया जाता है।
परंपरागत रूप से:
1. हलवा
सूजी का हलवा सबसे लोकप्रिय प्रसाद माना जाता है।
यह मिठास और शुभता का प्रतीक है।
2. पूरी
पूरी को पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
3. काले चने
काले चने शक्ति और पोषण का प्रतीक माने जाते हैं।
इसके अलावा:
- फल
- मिठाई
- खीर
- नारियल
भी प्रसाद के रूप में दिए जा सकते हैं।
कन्या पूजन के विशेष नियम
कन्या पूजन करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
1. कन्याओं का सम्मान करें
कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर प्रेम और सम्मान देना चाहिए।
2. भोजन सात्विक होना चाहिए
भोजन शुद्ध और स्वच्छ तरीके से बनाया जाना चाहिए।
3. मन में श्रद्धा रखें
पूजा केवल परंपरा निभाने के लिए नहीं बल्कि भक्ति भाव से करनी चाहिए।
4. कन्याओं को प्रसन्न रखें
भोजन के साथ प्रेम और सम्मान देना भी जरूरी है।
5. अपनी क्षमता अनुसार दान करें
दक्षिणा या उपहार अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार देना चाहिए।
कन्या पूजन में कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?
कन्या पूजन करते समय इन बातों से बचना चाहिए:
❌ केवल दिखावे के लिए पूजा करना
कन्या पूजन का उद्देश्य भक्ति और सम्मान है, दिखावा नहीं।
❌ कन्याओं को इंतजार करवाना
बच्चों को लंबे समय तक इंतजार नहीं करवाना चाहिए।
❌ भोजन में अशुद्धि रखना
भोजन बनाते समय साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए।
❌ कन्याओं का अनादर करना
कन्याओं को देवी स्वरूप माना गया है, इसलिए उनका सम्मान करना चाहिए।
कन्या पूजन के लाभ (Benefits of Kanya Pujan)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कन्या पूजन करने से कई शुभ फल प्राप्त होते हैं।
1. मां दुर्गा की कृपा
भक्तों को माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
2. घर में सुख-शांति
कन्या पूजन से घर में सकारात्मक वातावरण बनने की मान्यता है।
3. मनोकामना पूर्ति
श्रद्धा से की गई पूजा से इच्छाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।
4. नकारात्मक ऊर्जा दूर होना
धार्मिक मान्यता है कि देवी पूजा से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।
5. जीवन में शुभता
कन्या पूजन जीवन में मंगल और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
कन्या पूजन का सामाजिक संदेश
कन्या पूजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।
यह हमें सिखाता है कि:
- बेटियों का सम्मान करें।
- नारी शक्ति को महत्व दें।
- महिलाओं के प्रति आदर का भाव रखें।
- समाज में समानता और सम्मान बनाए रखें।
मां दुर्गा स्वयं शक्ति का स्वरूप हैं और कन्या पूजन उसी शक्ति के सम्मान का प्रतीक है।
कन्या पूजन के बाद क्या करना चाहिए?
कन्या पूजन पूर्ण होने के बाद भी कुछ धार्मिक नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है। पूजा के बाद भक्तों को मां दुर्गा का स्मरण करते हुए आभार प्रकट करना चाहिए।
1. मां दुर्गा को धन्यवाद दें
कन्या पूजन के बाद मां दुर्गा के सामने बैठकर प्रार्थना करें और माता से परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करें।
आप बोल सकते हैं:
“हे मां दुर्गा! जिस प्रकार आपने अपनी कृपा से मेरी पूजा स्वीकार की, उसी प्रकार मेरे परिवार पर अपना आशीर्वाद बनाए रखें।”
2. कन्याओं का आशीर्वाद लें
कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनके चरण स्पर्श करें और उनका आशीर्वाद लें।
बच्चियों के प्रति प्रेम और सम्मान का भाव रखना ही कन्या पूजन की सबसे बड़ी भावना मानी जाती है।
3. पूजा स्थान की सफाई करें
कन्या पूजन समाप्त होने के बाद पूजा स्थान को व्यवस्थित करें।
मां दुर्गा के सामने जलता हुआ दीपक अपनी परंपरा के अनुसार कुछ समय तक जलने दें।
4. व्रत का पारण करें
यदि आपने नवरात्रि व्रत रखा है तो कन्या पूजन के बाद उचित समय पर व्रत का पारण किया जाता है।
पारण करते समय सात्विक भोजन ग्रहण करना शुभ माना जाता है।
कन्या पूजन में भैरव पूजा का महत्व
कई स्थानों पर कन्या पूजन के साथ एक छोटे बालक को भी भोजन कराया जाता है।
इस बालक को भैरव स्वरूप माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार मां दुर्गा की पूजा भगवान भैरव के बिना पूर्ण नहीं मानी जाती।
इसलिए कन्या पूजन में कन्याओं के साथ बालक को भी सम्मान दिया जाता है।
क्या कन्या पूजन में केवल कन्याओं को भोजन कराना जरूरी है?
कन्या पूजन की मुख्य भावना कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर सम्मान देना है।
यदि किसी कारण से बालक उपलब्ध न हो तो केवल कन्याओं का पूजन भी किया जा सकता है।
पूजा में सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा, सम्मान और भक्ति भाव है।
कन्या पूजन से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. कन्या पूजन कब करना चाहिए?
कन्या पूजन मुख्य रूप से नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि को किया जाता है। भक्त अपनी परंपरा के अनुसार किसी एक दिन पूजा कर सकते हैं।
2. कन्या पूजन में कितनी कन्याओं को बुलाना चाहिए?
परंपरा के अनुसार नौ कन्याओं का पूजन शुभ माना जाता है। हालांकि श्रद्धा अनुसार कम संख्या में भी कन्या पूजन किया जा सकता है।
3. कन्या पूजन में कितनी उम्र की कन्याओं को बुलाना चाहिए?
सामान्य रूप से 2 वर्ष से 10 वर्ष तक की कन्याओं का पूजन किया जाता है।
4. क्या 1 कन्या का पूजन कर सकते हैं?
हां, यदि अधिक कन्याएं उपलब्ध नहीं हैं तो श्रद्धा भाव से एक कन्या का पूजन भी किया जा सकता है।
5. कन्या पूजन में क्या खिलाना चाहिए?
कन्या पूजन में मुख्य रूप से:
- पूरी
- हलवा
- काले चने
का प्रसाद बनाया जाता है।
6. क्या कन्या पूजन में उपहार देना जरूरी है?
उपहार या दक्षिणा देना शुभ माना जाता है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण कन्याओं का सम्मान करना है।
7. कन्या पूजन में कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए?
कन्या पूजन के समय मां दुर्गा के मंत्रों का जाप किया जा सकता है।
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
8. कन्या पूजन में काले चने क्यों बनाए जाते हैं?
धार्मिक परंपरा में काले चने को शक्ति और पोषण का प्रतीक माना जाता है। इसलिए यह कन्या भोज का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
9. कन्या पूजन में कौन सी गलती नहीं करनी चाहिए?
कन्याओं का अपमान, भोजन में अशुद्धि और केवल दिखावे के लिए पूजा करना उचित नहीं माना जाता।
10. क्या कन्या पूजन घर पर कर सकते हैं?
हां, श्रद्धा और विधि के अनुसार घर पर कन्या पूजन करना शुभ माना जाता है।
11. क्या कन्या पूजन के लिए विशेष मुहूर्त जरूरी है?
अष्टमी या नवमी तिथि में शुभ समय देखकर पूजा करना अच्छा माना जाता है।
12. क्या नवरात्रि व्रत रखने वाले को कन्या पूजन करना चाहिए?
नवरात्रि व्रत रखने वाले अनेक भक्त अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन करके व्रत का समापन करते हैं।
13. कन्या पूजन में कौन सा रंग शुभ माना जाता है?
लाल, पीला और गुलाबी रंग शुभ माने जाते हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा होती है।
14. क्या कन्या पूजन में कपड़े दे सकते हैं?
हां, श्रद्धा अनुसार कपड़े, चुनरी या उपयोगी वस्तुएं उपहार में दी जा सकती हैं।
15. कन्या पूजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
कन्या पूजन का मुख्य उद्देश्य देवी शक्ति का सम्मान और नारी शक्ति के प्रति आदर भाव प्रकट करना है।
निष्कर्ष
कन्या पूजन विधि (Kanya Pujan Vidhi) नवरात्रि की एक पवित्र और भावनात्मक परंपरा है, जिसमें मां दुर्गा की शक्ति का सम्मान किया जाता है। यह पूजा हमें केवल धार्मिक आस्था ही नहीं बल्कि कन्याओं और नारी शक्ति के सम्मान का संदेश भी देती है।
श्रद्धा, प्रेम और भक्ति से किया गया कन्या पूजन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख और शांति का मार्ग खोलता है। मां दुर्गा सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें।
जय माता दी। 🙏
🌐 संदर्भ (External References)
🌐 श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) – संस्कृत ग्रंथ संदर्भ
🌐 गीता प्रेस, गोरखपुर – धार्मिक साहित्य और देवी उपासना ग्रंथ
🌐 देवी भागवत पुराण – देवी उपासना एवं शक्ति परंपरा संदर्भ
🌐 नवरात्रि और देवी उपासना – भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय (Indian Culture Portal)
