आरती कुंजबिहारी की भगवान श्रीकृष्ण के कुंजबिहारी स्वरूप की महिमा का गुणगान करने वाली अत्यंत लोकप्रिय और श्रद्धापूर्ण आरती है। सनातन धर्म में भगवान श्रीकृष्ण को प्रेम, करुणा, धर्म और भक्ति के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ आरती कुंजबिहारी की का पाठ या गायन करने से भक्तों के मन में शांति, प्रेम, सकारात्मक ऊर्जा और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट आस्था का भाव जागृत होता है। विशेष रूप से जन्माष्टमी, राधाष्टमी, एकादशी, श्रीकृष्ण पूजा, मंदिर आरती तथा अन्य शुभ अवसरों पर आरती कुंजबिहारी की का गायन अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
!! आरती कुंजबिहारी की !!
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दरसन को तरसें ।
गगन सों सुमन रासि बरसै ।
बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
जहां ते प्रकट भई गंगा,
सकल मन हारिणि श्री गंगा।
स्मरन ते होत मोह
भंगा बसी शिव सीस,
जटा के बीच, हरे अघ कीच,
चरन छवि श्रीबनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद,
चांदनी चंद,
कटत भव फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी का महत्व
आरती कुंजबिहारी भगवान श्रीकृष्ण की महिमा, उनकी दिव्य लीलाओं और भक्तों के प्रति उनके प्रेम को प्रकट करती है। भगवान श्रीकृष्ण को प्रेम, करुणा और धर्म का प्रतीक माना जाता है। उनकी आरती करने से मन में भक्ति का भाव जागृत होता है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।
यह आरती विशेष रूप से गुरुवार, एकादशी और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर अत्यंत शुभ मानी जाती है। श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करने से मन को शांति मिलती है और जीवन की परेशानियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।
नियमित रूप से आरती कुंजबिहारी का पाठ करने से व्यक्ति का मन भगवान की भक्ति में लगने लगता है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। यह आरती परिवार में प्रेम, सुख और आपसी सद्भाव को बढ़ाने में भी सहायक मानी जाती है।
जो भक्त सच्चे मन से भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हैं, उन पर उनकी कृपा सदैव बनी रहती है। इसलिए अपने जीवन में शांति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए प्रतिदिन आरती कुंजबिहारी का पाठ करना लाभकारी माना जाता है।
आरती कुंजबिहारी करने के लाभ
घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है
भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से परिवार में प्रेम और सौहार्द बना रहता है तथा घर में सुख और समृद्धि का वातावरण बना रहता है।
मानसिक तनाव और चिंता दूर होती है
नियमित रूप से आरती करने से मन शांत होता है और तनाव तथा चिंता कम होने लगती है। इससे व्यक्ति को मानसिक शांति और संतुलन प्राप्त होता है।
आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है
भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से मन में उत्साह और आत्मविश्वास का संचार होता है। व्यक्ति कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से मजबूत बनता है।
भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है
श्रद्धा और विश्वास के साथ आरती करने से भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की शक्ति मिलती है।
परिवार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है
आरती और भक्ति का वातावरण बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों में अच्छे संस्कार, प्रेम और धार्मिक भावना को बढ़ावा देता है।
आध्यात्मिक उन्नति होती है
नियमित रूप से भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण और आरती करने से व्यक्ति का मन पवित्र होता है और उसे आध्यात्मिक शांति तथा आत्मिक संतोष की अनुभूति होती है।
आरती कुंजबिहारी करने की विधि
स्थान की तैयारी करें
सबसे पहले पूजा के लिए एक साफ और शांत स्थान चुनें। वहां भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और पूजा स्थान को स्वच्छ रखें।
दीपक और धूप जलाएं
पूजा आरंभ करने से पहले घी का दीपक जलाएं और धूप या अगरबत्ती अर्पित करें। इससे वातावरण पवित्र और भक्तिमय बनता है।
भगवान श्रीकृष्ण को भोग अर्पित करें
भगवान श्रीकृष्ण को फूल, तुलसी दल, माखन, मिश्री, फल या अन्य प्रिय भोग श्रद्धा के साथ अर्पित करें।
मंत्र का जाप करें
आरती से पहले या बाद में श्रद्धा के साथ “ॐ श्री कृष्णाय नमः” मंत्र का जाप करें। इससे मन एकाग्र होता है और भगवान के प्रति भक्ति बढ़ती है।
श्रद्धा के साथ आरती गाएं
आरती गाते समय मन को शांत रखें और पूर्ण श्रद्धा तथा विश्वास के साथ भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करें। यदि संभव हो तो घंटी बजाकर आरती करें।
प्रसाद वितरित करें
आरती समाप्त होने के बाद भगवान को अर्पित किया गया प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांटें।
नियमित रूप से आरती करें
आप प्रतिदिन सुबह या शाम भगवान श्रीकृष्ण की आरती कर सकते हैं। नियमित भक्ति और आराधना से मन में शांति, सुख और आध्यात्मिक संतोष की प्राप्ति होती है।
भक्ति संदेश
भगवान श्रीकृष्ण प्रेम, दया और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। जो व्यक्ति सच्चे मन से उनका स्मरण करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
“जहां भगवान श्रीकृष्ण का नाम लिया जाता है, वहां प्रेम, आनंद और भक्ति का प्रकाश सदैव बना रहता है।”
