त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा।
त्रिगुणी अवतार त्रैलोक्यराणा।
नेती नेती शब्द न ये अनुमाना।
सुरवर मुनिजन योगी समाधी न ये ध्याना ।।
जय देव जय देव जय श्री गुरुदत्ता।
आरती ओवाळीतां हरली भवचिन्ता ।।
सबाह्य अभ्यंतरी तू एक दत्त।
अभाग्यासी कैसी न कळे ही मात।
पराही परतली तेथे कैचा हेत।
जन्ममरणाचा पुरलासे अन्त ॥
जय देव जय देव जय श्री गुरुदत्ता।
आरती ओवाळीतां हरली भवचिन्ता ।।
दत्त येऊनिया उभा ठाकला।
सद्भावे साष्टांगे प्रणिपात केला।
प्रसन्न होऊनी आशीर्वाद दिधला।
जन्ममरणाचा फेरा चुकविला ।।
जय देव जय देव जय श्री गुरुदत्ता।
आरती ओवाळीतां हरली भवचिन्ता ।।
दत्त दत्त ऐसे लागले ध्यान। हरपले मन झाले उन्मन।
मी तू पणाची झाली बोळवण । एका जनार्दनी श्रीदत्तध्यान ।।
जय देव जय देव जय श्री गुरुदत्ता।
आरती ओवाळीतां हरली भवचिन्ता ।।
श्री दत्तात्रेय जी की आरती: लिरिक्स, महत्व और सरल पूजा विधि
भगवान दत्तात्रेय को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का संयुक्त स्वरूप माना जाता है। वे ज्ञान, वैराग्य और आध्यात्मिक शक्ति के प्रतीक हैं। भगवान दत्तात्रेय की आरती का पाठ करने से मन को शांति, आत्मबल और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यदि आप जीवन में सुख, शांति और गुरु कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो प्रतिदिन श्रद्धा और विश्वास के साथ श्री दत्तात्रेय जी की आरती का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
श्री दत्तात्रेय जी की आरती का महत्व
हिंदू धर्म में भगवान दत्तात्रेय को आदिगुरु माना गया है। वे त्रिदेवों के संयुक्त अवतार हैं और अपने भक्तों को ज्ञान, विवेक तथा आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उनकी आरती केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि ईश्वर और गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक माध्यम भी है।
भगवान दत्तात्रेय की आराधना करने से व्यक्ति के मन में सकारात्मक विचारों का विकास होता है और जीवन की परेशानियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। उनकी कृपा से मनुष्य के भीतर विनम्रता, धैर्य और आत्मविश्वास का संचार होता है।
विशेष रूप से गुरुवार और दत्त जयंती के दिन भगवान दत्तात्रेय की पूजा और आरती का विशेष महत्व माना जाता है। इन अवसरों पर श्रद्धा के साथ आरती करने से भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
श्री दत्तात्रेय जी की आरती करने के लाभ
मानसिक शांति प्राप्त होती है
भगवान दत्तात्रेय की आरती करने से मन शांत और स्थिर होता है। इससे तनाव और चिंता कम होती है तथा सकारात्मक सोच विकसित होती है।
आध्यात्मिक उन्नति होती है
दत्तात्रेय जी की भक्ति से व्यक्ति का मन ईश्वर की ओर आकर्षित होता है और आत्मिक शांति की अनुभूति होती है।
गुरु कृपा प्राप्त होती है
भगवान दत्तात्रेय को आदिगुरु माना जाता है। उनकी आराधना से ज्ञान, विवेक और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त होती है।
नकारात्मकता दूर होती है
श्रद्धा और विश्वास के साथ आरती करने से मन और वातावरण में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है।
सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है
भगवान दत्तात्रेय की कृपा से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है तथा जीवन में आने वाली अनेक बाधाएं दूर होती हैं।
आत्मविश्वास और धैर्य बढ़ता है
दत्तात्रेय जी की भक्ति व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और साहस के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
श्री दत्तात्रेय जी की आरती करने की विधि
स्नान करके शुद्ध होकर पूजा करें
प्रातःकाल या संध्या के समय स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मन को शांत रखें।
पूजा स्थान तैयार करें
पूजा स्थल को साफ करें और वहां भगवान दत्तात्रेय की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
दीपक और धूप जलाएं
घी का दीपक जलाकर धूप या अगरबत्ती अर्पित करें, जिससे वातावरण पवित्र और भक्तिमय बनता है।
भगवान दत्तात्रेय को भोग अर्पित करें
भगवान को फूल, फल, मिठाई और अन्य प्रिय सामग्री श्रद्धा के साथ अर्पित करें।
आरती की थाली तैयार करें
आरती की थाली में घी का दीपक, कपूर, फूल, अक्षत और घंटी रखें।
श्रद्धा के साथ आरती गाएं
दीपक को भगवान के समक्ष घुमाते हुए श्रद्धा और भक्ति के साथ श्री दत्तात्रेय जी की आरती गाएं।
सबसे प्रसिद्ध पंक्ति है:
“जय देव जय देव जय श्री गुरुदत्ता, आरती ओवाळिता हरली भवचिंता।”
अंत में प्रार्थना करें
आरती पूर्ण होने के बाद भगवान दत्तात्रेय से अपने परिवार के सुख, शांति और कल्याण की प्रार्थना करें तथा अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगें।
कब करें श्री दत्तात्रेय जी की आरती
भगवान दत्तात्रेय की आरती प्रतिदिन की जा सकती है, लेकिन कुछ विशेष अवसरों पर इसका महत्व अधिक माना जाता है।
गुरुवार के दिन
गुरुवार भगवान दत्तात्रेय और गुरु की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन आरती करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
दत्त जयंती के अवसर पर
दत्त जयंती भगवान दत्तात्रेय के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस दिन उनकी पूजा और आरती करने का विशेष महत्व है।
प्रातःकाल और संध्या के समय
सुबह और शाम के समय भगवान दत्तात्रेय की आरती करने से मन को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
भक्ति संदेश
भगवान दत्तात्रेय अपने भक्तों को ज्ञान, धैर्य और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। जो व्यक्ति सच्चे मन से उनकी शरण में आता है, उसके जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
“जहां गुरु और भगवान दत्तात्रेय की कृपा होती है, वहां अज्ञान का अंधकार दूर होकर ज्ञान और शांति का प्रकाश फैलता है।”
