श्री हनुमान जी की आरती
हिंदू धर्म में साहस, शक्ति और भक्ति के प्रतीक भगवान हनुमान की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। हनुमान जी की आरती का गान करने से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं
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हिंदू धर्म में साहस, शक्ति और भक्ति के प्रतीक भगवान हनुमान की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। हनुमान जी की आरती का गान करने से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं
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भगवान विष्णु, जिन्हें सृष्टि का पालनहार माना जाता है, उनकी आराधना के बिना कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है।
भगवान विष्णु जी की आरती “ॐ जय जगदीश हरे” का गान करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
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हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान श्री गणेश की आराधना से होती है। श्री गणेश जी की आरती का गान करने से न केवल कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, बल्कि घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।
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माँ काली शक्ति का साक्षात स्वरूप हैं। उनकी भक्ति न केवल नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करती है, बल्कि जीवन में साहस और मानसिक शांति भी प्रदान करती है।
शास्त्रों के अनुसार, मां दुर्गा आद्याशक्ति हैं। आरती श्री दुर्गा जी का गान केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की सर्वोच्च शक्ति से जुड़ने का माध्यम है।
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आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
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ॐ जय शिव ओंकारा स्वामी जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे ।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥