आरती कुंजबिहारी की

!!आरती कुंजबिहारी की!!

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दरसन को तरसें ।
गगन सों सुमन रासि बरसै ।
बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
जहां ते प्रकट भई गंगा,
सकल मन हारिणि श्री गंगा।
स्मरन ते होत मोह
भंगा बसी शिव सीस,
जटा के बीच, हरे अघ कीच,
चरन छवि श्रीबनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद,
चांदनी चंद,
कटत भव फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

🌟 आरती कुंजबिहारी का महत्व

आरती कुंजबिहारी की भगवान कृष्ण की लीला और भक्तों के प्रति उनकी अनन्य करुणा को दर्शाती है।

यह आरती विशेष रूप से गुरुवार और कृष्ण जन्माष्टमी के दिन अधिक प्रभावशाली मानी जाती है।

इसे करने से मन में भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

यह आरती घर में सुख-समृद्धि और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देती है।

नियमित रूप से इसका पाठ करने से आध्यात्मिक ज्ञान और आत्म-शुद्धि प्राप्त होती है।

भक्तों का मन हर प्रकार के भय, चिंता और दुख से मुक्त होता है।

“अपनी भक्ति और शांति के लिए प्रतिदिन आरती कुंजबिहारी की करें। 🙏”


🌿 आरती कुंजबिहारी करने के लाभ

• घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है
• मानसिक तनाव और चिंता दूर होती है
• आत्मविश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है
• भगवान कृष्ण की कृपा सदैव बनी रहती है
• बच्चों और परिवार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है


🪔 आरती कुंजबिहारी करने की विधि

1. स्थान की तैयारी:
साफ और स्वच्छ स्थान पर भगवान कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

2. पूजन सामग्री:
दीपक, अगरबत्ती और फूल अर्पित करें।

3. मंत्र जाप:
“ॐ श्री कृष्णाय नमः” मंत्र का श्रद्धा पूर्वक जाप करें।

4. आरती गान:
आरती गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और भक्ति रखें।

5. प्रसाद वितरण:
आरती समाप्त होने के बाद प्रसाद बांटें।

6. नियमित अभ्यास:
आप चाहें तो प्रतिदिन सुबह या शाम इसका पाठ कर सकते हैं।

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