शिव जी की आरती

!! शिव जी की आरती !!

ॐ जय शिव ओंकारा स्वामी जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे ।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥

 

🌺 श्री शिव जी की आरती: लिरिक्स, महत्व और सरल पूजा विधि

हिंदू धर्म में भगवान शिव को सृष्टि के संहारक और पुनर्निर्माता माना जाता है। वे त्रिदेवों में से एक हैं और ‘महादेव’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। शिव जी की आरती का गान करने से पापों का नाश होता है, मन को शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यदि आप भी अपने जीवन में शांति, शक्ति और मोक्ष की प्राप्ति चाहते हैं, तो प्रतिदिन भगवान शिव की इस पावन आरती का पाठ अवश्य करें।



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अपनी भक्ति और मानसिक शांति के लिए प्रतिदिन श्री शिव जी की आरती (Shiv Ji Ki Aarti) पूरी श्रद्धा के साथ करें।



✨ श्री शिव जी की आरती का महत्व

भगवान शिव को ‘भोलेनाथ’ कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार शिव जी की आराधना से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। उनकी आरती करने से मन शुद्ध होता है, अहंकार कम होता है और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।



📖 शिव जी की आरती का अर्थ

भगवान शिव की यह आरती उनके दिव्य स्वरूप, शक्ति और करुणा का वर्णन करती है। इसमें भगवान शिव को सृष्टि के संहारक, पालनकर्ता और भक्तों के दुखों को दूर करने वाले बताया गया है।

इस आरती में शिव जी के विभिन्न रूपों का उल्लेख मिलता है—जटाधारी, गंगाधर, नीलकंठ, त्रिनेत्रधारी आदि। साथ ही उनके आभूषण, जैसे सर्पमाला, रुद्राक्ष और वाहन नंदी का भी वर्णन किया गया है।



🔥 श्री शिव जी की आरती करने के लाभ

1️⃣ पापों का नाश होता है
शिव जी की आरती करने से पापों का क्षय होता है।

2️⃣ मानसिक शांति प्राप्त होती है
मन शांत और स्थिर होता है, जिससे तनाव कम होता है।

3️⃣ भय और नकारात्मकता दूर होती है
जीवन के भय और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

4️⃣ स्वास्थ्य और ऊर्जा में वृद्धि
शिव जी की कृपा से शरीर और मन स्वस्थ रहते हैं।

5️⃣ वैवाहिक जीवन में सुख
शिव-पार्वती की कृपा से दांपत्य जीवन सुखमय होता है।

6️⃣ मोक्ष की प्राप्ति
भक्ति से जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति का मार्ग मिलता है।



🙏 शिव आरती के लाभ

भगवान शिव की आरती का नियमित गान करने से:

✅ मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
✅ भय और तनाव दूर होता है
✅ जीवन में शांति आती है
✅ भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है
✅ आत्मबल और धैर्य बढ़ता है



🪔 श्री शिव जी की आरती करने की विधि (Step-by-Step)

1️⃣ स्नान करके शुद्ध होकर पूजा करें
सुबह या संध्या समय स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2️⃣ पूजा स्थान को साफ करें
पूजा स्थान को साफ करके वहाँ भगवान शिव की मूर्ति, चित्र या शिवलिंग स्थापित करें।

3️⃣ दीपक और धूप जलाएं
घी का दीपक और धूप/अगरबत्ती जलाएं।

4️⃣ शिव जी को भोग अर्पित करें
बेलपत्र, धतूरा, गंगाजल, दूध, फल आदि अर्पित करें।

5️⃣ आरती की थाली तैयार करें
थाली में रखें:
• घी का दीपक
• कपूर
• फूल
• अक्षत (चावल)
• घंटी

6️⃣ आरती गाएं और दीपक घुमाएं
दीपक को घुमाते हुए आरती गाएं:
“ॐ जय शिव ओंकारा…”

7️⃣ अंत में प्रार्थना करें
हाथ जोड़कर अपनी मनोकामना कहें और आशीर्वाद प्राप्त करें।



⭐ कब गाएं शिव जी की आरती

भगवान शिव की आरती इन समयों पर विशेष फलदायी मानी जाती है:

📌 सुबह और शाम पूजा के समय
📌 सोमवार के दिन
📌 महाशिवरात्रि पर
📌 सावन (श्रावण) मास में



❤️ भक्ति संदेश

“जहाँ शिव का वास है, वहाँ हर दुख का नाश है।
महादेव की कृपा से जीवन में सुख और विश्वास है।”



🎥 YouTube Video: श्री शिव जी की आरती

Title: Om Jai Shiv Omkara | Shiv Aarti | Powerful Shiv Bhajan
Description: सुनिए भगवान शिव की यह अत्यंत पावन आरती और अपने जीवन में शांति, सुख और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करें।

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