Author name: bhaktimarg2018

कथा

राम-सीता विवाह कथा / Ram Sita Vivah Katha

राम-सीता विवाह कथा हिंदू धर्म की अत्यंत पवित्र और मंगलकारी कथाओं में से एक मानी जाती है। यह कथा भगवान श्री राम और माता सीता के दिव्य विवाह का वर्णन करती है। भक्तजन इसे विशेष रूप से विवाह, सौभाग्य और गृहस्थ सुख की कामना से पढ़ते और सुनते हैं।

राम-सीता विवाह कथा / Ram Sita Vivah Katha Read Post »

कथा

राम जन्म कथा / Ram Janam Katha

राम जन्म कथा हिंदू धर्म की अत्यंत पवित्र और प्रसिद्ध पौराणिक कथा है, जो भगवान राम के दिव्य अवतार से जुड़ी है। यह कथा मुख्य रूप से राम नवमी के दिन श्रद्धा से पढ़ी और सुनी जाती है।

राम जन्म कथा / Ram Janam Katha Read Post »

कथा

संतोषी माता व्रत कथा / Santoshi Mata Vrat Katha

सनातन धर्म में कहा गया है कि मनुष्य के जीवन का सबसे बड़ा धन “संतोष” है। धन, वैभव, पद और प्रतिष्ठा तो समय के साथ आते-जाते रहते हैं, परंतु जो व्यक्ति संतोष का मार्ग अपनाता है, उसके जीवन में शांति और सुख स्थायी हो जाते हैं। इसी दिव्य सत्य को समझाने के लिए संतोष की अधिष्ठात्री देवी — संतोषी माता — की पूजा का विधान प्राचीन लोकपरंपराओं में बताया गया है।

संतोषी माता व्रत कथा / Santoshi Mata Vrat Katha Read Post »

आरती

भगवान विष्णु जी की आरती

भगवान विष्णु, जिन्हें सृष्टि का पालनहार माना जाता है, उनकी आराधना के बिना कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है।
भगवान विष्णु जी की आरती “ॐ जय जगदीश हरे” का गान करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

भगवान विष्णु जी की आरती Read Post »

आरती

श्री गणेश जी की आरती

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान श्री गणेश की आराधना से होती है। श्री गणेश जी की आरती का गान करने से न केवल कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, बल्कि घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।

श्री गणेश जी की आरती Read Post »

आरती

माँ काली की आरती

माँ काली शक्ति का साक्षात स्वरूप हैं। उनकी भक्ति न केवल नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करती है, बल्कि जीवन में साहस और मानसिक शांति भी प्रदान करती है।

माँ काली की आरती Read Post »

आरती

आरती श्री दुर्गा जी

शास्त्रों के अनुसार, मां दुर्गा आद्याशक्ति हैं। आरती श्री दुर्गा जी का गान केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की सर्वोच्च शक्ति से जुड़ने का माध्यम है।

आरती श्री दुर्गा जी Read Post »

आरती

आरती कुंजबिहारी की

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥

आरती कुंजबिहारी की Read Post »

आरती

शिव जी की आरती

ॐ जय शिव ओंकारा स्वामी जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे ।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥

शिव जी की आरती Read Post »

Scroll to Top