काल भैरव अष्टमी पूजा मंत्र (Kaal Bhairav ​​Ashtami Puja Mantra)

काल भैरव अष्टमी पूजा मंत्र (Kaal Bhairav ​​Ashtami Puja Mantra)

काल भैरव अष्टमी पूजा मंत्र

॥ ॐ काल भैरवाय नमः ॥

काल भैरव अष्टमी भगवान काल भैरव को समर्पित एक विशेष धार्मिक पर्व माना जाता है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप भगवान काल भैरव की पूजा, मंत्र जाप और आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान काल भैरव अपने भक्तों की रक्षा करने वाले, भय को दूर करने वाले और जीवन में आने वाली बाधाओं को समाप्त करने वाले देवता हैं।

काल भैरव अष्टमी के दिन भगवान काल भैरव के मंत्रों का जाप करने से आध्यात्मिक ऊर्जा, मानसिक शांति और भगवान की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।


भगवान काल भैरव कौन हैं?

भगवान काल भैरव भगवान शिव का एक शक्तिशाली स्वरूप माने जाते हैं। शिव पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में भगवान भैरव की महिमा का वर्णन मिलता है।

“काल” का अर्थ समय और “भैरव” का अर्थ भय का नाश करने वाला माना जाता है। भगवान काल भैरव को समय के स्वामी और धर्म की रक्षा करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है।

भगवान काल भैरव को काशी का रक्षक भी कहा जाता है। मान्यता है कि काशी नगरी की रक्षा का दायित्व भगवान काल भैरव संभालते हैं।


काल भैरव अष्टमी क्या है?

काल भैरव अष्टमी भगवान काल भैरव के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। इसे भैरव अष्टमी या कालाष्टमी भी कहा जाता है।

यह पर्व मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को विशेष रूप से मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान काल भैरव की पूजा करते हैं और उनके मंत्रों का जाप करते हैं।

इस दिन भगवान काल भैरव की आराधना करने से जीवन के भय, संकट और परेशानियों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।


काल भैरव अष्टमी पूजा मंत्र

1. काल भैरव मूल मंत्र

॥ ॐ काल भैरवाय नमः ॥

यह सबसे सरल और प्रसिद्ध काल भैरव मंत्र माना जाता है।

अर्थ:

“मैं भगवान काल भैरव को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूं।”


2. काल भैरव बीज मंत्र

॥ ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ फट् ॥

यह मंत्र भगवान बटुक भैरव की उपासना में भी प्रयोग किया जाता है।


3. काल भैरव गायत्री मंत्र

ॐ कालकालाय विद्महे
कालातीताय धीमहि
तन्नो भैरवः प्रचोदयात्॥

इस मंत्र के द्वारा भगवान काल भैरव का ध्यान और स्मरण किया जाता है।


काल भैरव अष्टमी पूजा विधि

काल भैरव अष्टमी के दिन भक्त श्रद्धा और नियम के साथ भगवान काल भैरव की पूजा करते हैं।

1. सुबह स्नान करें

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।


2. पूजा स्थान तैयार करें

घर के पूजा स्थान को साफ करें और भगवान काल भैरव की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।


3. दीपक जलाएं

भगवान काल भैरव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।


4. पूजा सामग्री अर्पित करें

भगवान को अपनी श्रद्धा अनुसार:

  • फूल
  • फल
  • मिठाई
  • धूप
  • दीप

अर्पित करें।


5. मंत्र जाप करें

पूजा के बाद भगवान काल भैरव के मंत्र का जाप करें।

मुख्य मंत्र:

ॐ काल भैरवाय नमः॥

108 बार जाप करना शुभ माना जाता है।


काल भैरव अष्टमी पूजा का महत्व

काल भैरव अष्टमी का धार्मिक महत्व बहुत अधिक माना जाता है।

इस दिन पूजा करने से:

  • भगवान काल भैरव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
  • भय और चिंता कम होने में सहायता मिलती है।
  • जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
  • मन को शांति प्राप्त होती है।
  • कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।

काल भैरव अष्टमी व्रत विधि

कई भक्त इस दिन व्रत भी रखते हैं।

व्रत के दौरान:

  • भगवान काल भैरव का स्मरण किया जाता है।
  • मंत्र जाप किया जाता है।
  • सात्विक भोजन किया जाता है।
  • भगवान की कथा सुनी जाती है।

व्रत का उद्देश्य भगवान के प्रति भक्ति और आत्मिक शुद्धि माना जाता है।


काल भैरव अष्टमी पूजा में कुत्ते को भोजन कराने का महत्व

भगवान काल भैरव का वाहन काला कुत्ता माना जाता है। इसलिए इस दिन कुत्तों को भोजन कराने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है।

भक्त इसे भगवान काल भैरव के प्रति श्रद्धा और सेवा का प्रतीक मानते हैं।


काल भैरव अष्टमी मंत्र जाप के लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:

1. भय का नाश

भगवान काल भैरव को भय दूर करने वाला देवता माना जाता है।


2. सुरक्षा की भावना

भक्त भगवान काल भैरव से जीवन की रक्षा और कल्याण की प्रार्थना करते हैं।


3. बाधाओं से मुक्ति

मंत्र जाप को जीवन की परेशानियों में मानसिक शक्ति देने वाला माना जाता है।


4. मन की एकाग्रता

मंत्र जाप ध्यान और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक हो सकता है।


5. आध्यात्मिक विकास

भगवान की भक्ति व्यक्ति को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।


काल भैरव अष्टमी की रात पूजा का महत्व

कई परंपराओं में काल भैरव की पूजा रात्रि के समय भी की जाती है। माना जाता है कि इस समय भगवान का ध्यान और मंत्र जाप विशेष रूप से किया जाता है।

भक्त दीपक जलाकर, मंत्र जाप करके और भगवान का स्मरण करके पूजा करते हैं।


काल भैरव अष्टमी पूजा के नियम

पूजा करते समय:

  • मन को शांत रखें।
  • श्रद्धा के साथ मंत्र जाप करें।
  • किसी के प्रति गलत भावना न रखें।
  • स्वच्छता का ध्यान रखें।
  • नियमित पूजा का प्रयास करें।

काल भैरव अष्टमी कथा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी में अहंकार उत्पन्न हुआ। तब भगवान शिव ने अपने तेज से भैरव स्वरूप धारण किया।

भगवान भैरव ने अहंकार का नाश किया और धर्म की रक्षा की। इसी स्वरूप को काल भैरव कहा गया।

भगवान काल भैरव को न्याय और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।


काल भैरव अष्टमी और काशी

भगवान काल भैरव का काशी से विशेष संबंध माना जाता है। काशी में स्थित काल भैरव मंदिर भगवान काल भैरव के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है।

यहां भक्त भगवान काल भैरव के दर्शन और पूजा करके आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।


काल भैरव अष्टमी पर कौन से मंत्र पढ़ें?

इस दिन भक्त इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं:

काल भैरव मंत्र

ॐ काल भैरवाय नमः॥

भैरव मंत्र

ॐ भैरवाय नमः॥

बटुक भैरव मंत्र

ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ फट्॥


काल भैरव अष्टमी पूजा का निष्कर्ष

काल भैरव अष्टमी भगवान काल भैरव की आराधना का विशेष दिन माना जाता है। इस दिन भगवान काल भैरव के मंत्रों का जाप, पूजा और ध्यान करने से भक्त आध्यात्मिक शांति और सुरक्षा की कामना करते हैं।

॥ ॐ काल भैरवाय नमः ॥

भगवान काल भैरव अपने भक्तों को साहस, धैर्य और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करें।

॥ जय काल भैरव स्वामी ॥

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