परिचय
नवरात्रि पूजा विधि (Navratri Puja Vidhi) सनातन धर्म में माँ आदिशक्ति की उपासना का सबसे पवित्र पर्व माना जाता है। नवरात्रि का अर्थ है — नौ रातें, जिनमें भक्त माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
नवरात्रि केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, साधना, संयम और भक्ति का समय भी माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखते हैं, देवी मंत्रों का जाप करते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और माँ भगवती से सुख, शांति एवं समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।
हिंदू धर्म में नवरात्रि वर्ष में मुख्य रूप से दो बार विशेष रूप से मनाई जाती है — चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि। दोनों नवरात्रियों में माँ दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व होता है।
इस लेख में आप जानेंगे कि नवरात्रि पूजा कैसे करें, कलश स्थापना की सही विधि क्या है, पूजा सामग्री क्या चाहिए, नौ दिनों में कौन-सी देवी की पूजा की जाती है और नवरात्रि व्रत के नियम क्या हैं।
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इस लेख में आप क्या जानेंगे?
इस विस्तृत लेख में आप पढ़ेंगे—
- नवरात्रि पूजा विधि क्या है?
- नवरात्रि का महत्व
- कलश स्थापना विधि
- पूजा सामग्री की पूरी सूची
- नौ दिनों की देवी पूजा
- दुर्गा मंत्र और आरती
- नवरात्रि व्रत के नियम
- कन्या पूजन विधि
- नवरात्रि पूजा के लाभ
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
नवरात्रि पूजा विधि क्या है?
नवरात्रि पूजा माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की नौ दिनों तक की जाने वाली साधना है। इस दौरान भक्त माँ भगवती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करके पूजा, मंत्र जाप, आरती और भजन करते हैं।
नवरात्रि पूजा की शुरुआत कलश स्थापना (घट स्थापना) से होती है। कलश को शुभता और देवी शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
पूजा में मुख्य रूप से शामिल होते हैं—
- माँ दुर्गा का आवाहन
- कलश स्थापना
- दीप प्रज्वलन
- पुष्प अर्पण
- देवी मंत्र जाप
- दुर्गा सप्तशती पाठ
- दुर्गा आरती
- प्रसाद अर्पण
नवरात्रि का धार्मिक महत्व
नवरात्रि को शक्ति की आराधना का पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन दिनों माँ दुर्गा पृथ्वी लोक पर आकर अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
नवरात्रि का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि—
- यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
- यह आत्मशुद्धि और साधना का समय है।
- माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है।
- भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
देवी उपासना में नवरात्रि का स्थान अत्यंत विशेष माना गया है।
नवरात्रि पूजा सामग्री सूची
नवरात्रि पूजा के लिए आवश्यक सामग्री:
कलश स्थापना सामग्री
- मिट्टी का पात्र
- जौ (जवारे)
- कलश
- जल
- आम के पत्ते
- नारियल
- लाल कपड़ा
- मौली (कलावा)
- रोली
- अक्षत
माँ दुर्गा पूजा सामग्री
- माँ दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर
- लाल फूल
- माला
- धूप
- दीपक
- घी
- अगरबत्ती
- फल
- मिठाई
- पंचामृत
कलश स्थापना (घट स्थापना) की संपूर्ण विधि
नवरात्रि पूजा की शुरुआत कलश स्थापना से होती है। इसे घट स्थापना भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कलश में सभी देवी-देवताओं का वास माना जाता है और यह शुभता, समृद्धि तथा ऊर्जा का प्रतीक होता है।
कलश स्थापना नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में की जाती है।
कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री
कलश स्थापना के लिए निम्न सामग्री की आवश्यकता होती है—
- मिट्टी का पात्र
- स्वच्छ मिट्टी
- जौ (जवारे)
- तांबे या मिट्टी का कलश
- शुद्ध जल
- आम के पत्ते
- नारियल
- लाल कपड़ा
- मौली (कलावा)
- रोली
- अक्षत (चावल)
- फूल
- सुपारी
- सिक्का
- गंगाजल
कलश स्थापना की विधि
1. पूजा स्थान की सफाई करें
नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान करके पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें। माँ दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर को एक साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर स्थापित करें।
इसके बाद दीपक जलाकर माँ भगवती का ध्यान करें।
2. जौ बोने की विधि
एक मिट्टी के पात्र में साफ मिट्टी भरें और उसमें जौ के बीज बोएं।
जौ को जीवन, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में उगने वाले जौ (जवारे) को माँ दुर्गा की कृपा का प्रतीक माना जाता है।
3. कलश तैयार करें
कलश में स्वच्छ जल भरें। उसमें गंगाजल, सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें।
कलश के मुख पर आम के पत्ते लगाएं और ऊपर नारियल रखें।
नारियल को लाल कपड़े या मौली से बांधकर कलश पर स्थापित करें।
4. माँ दुर्गा का आवाहन करें
कलश स्थापना के बाद माँ दुर्गा का ध्यान करते हुए प्रार्थना करें—
“हे माँ भगवती! मैं श्रद्धा और भक्ति के साथ आपकी पूजा कर रहा/रही हूँ। कृपया मेरे घर में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें।”
नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा
नवरात्रि के प्रत्येक दिन माँ दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है। देवी के ये नौ स्वरूप नवदुर्गा कहलाते हैं।
प्रथम दिन – माँ शैलपुत्री पूजा
देवी शैलपुत्री का महत्व
नवरात्रि के पहले दिन माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
माँ शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। इन्हें शक्ति, धैर्य और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
पूजा विधि
- माँ शैलपुत्री को सफेद फूल अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाएं।
- देवी मंत्र का जाप करें।
मंत्र:
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
द्वितीय दिन – माँ ब्रह्मचारिणी पूजा
देवी ब्रह्मचारिणी का महत्व
दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। यह देवी तपस्या, संयम और साधना की शक्ति का प्रतीक हैं।
पूजा विधि
- सफेद वस्त्र धारण करें।
- माँ को शक्कर और फल अर्पित करें।
- ध्यान और मंत्र जाप करें।
मंत्र:
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
तृतीय दिन – माँ चंद्रघंटा पूजा
देवी चंद्रघंटा का महत्व
तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित होता है।
माँ चंद्रघंटा साहस, शक्ति और भय को दूर करने वाली देवी मानी जाती हैं।
पूजा विधि
- माँ को दूध से बनी मिठाई अर्पित करें।
- लाल फूल चढ़ाएं।
- देवी मंत्र का जाप करें।
मंत्र:
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
चतुर्थ दिन – माँ कूष्मांडा पूजा
देवी कूष्मांडा का महत्व
माँ कूष्मांडा को सृष्टि की आदि शक्ति माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, उन्होंने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की।
पूजा विधि
- मालपुए का भोग लगाएं।
- हरे फूल अर्पित करें।
- माँ का ध्यान करें।
मंत्र:
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
पंचम दिन – माँ स्कंदमाता पूजा
देवी स्कंदमाता का महत्व
माँ स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं। इन्हें प्रेम, ममता और संतान सुख प्रदान करने वाली देवी माना जाता है।
पूजा विधि
- केले का भोग लगाएं।
- पीले फूल अर्पित करें।
- श्रद्धा से पूजा करें।
मंत्र:
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥

षष्ठी दिन – माँ कात्यायनी पूजा
देवी कात्यायनी का महत्व
नवरात्रि के छठे दिन माँ दुर्गा के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माँ कात्यायनी ऋषि कात्यायन की पुत्री के रूप में प्रकट हुई थीं।
माँ कात्यायनी को शक्ति, साहस और विजय की देवी माना जाता है। इनकी आराधना करने से जीवन की बाधाओं को दूर करने और आत्मविश्वास बढ़ाने की मान्यता है।
विशेष रूप से विवाह संबंधी मनोकामना के लिए भी भक्त माँ कात्यायनी की पूजा करते हैं।
माँ कात्यायनी पूजा विधि
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- माँ दुर्गा के सामने दीपक जलाएं।
- लाल या पीले फूल अर्पित करें।
- देवी को शहद का भोग लगाएं।
- श्रद्धा से मंत्र जाप करें।
मंत्र:
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
सप्तमी दिन – माँ कालरात्रि पूजा
देवी कालरात्रि का महत्व
नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है। माँ कालरात्रि को नकारात्मक शक्तियों, भय और बाधाओं को नष्ट करने वाली देवी माना जाता है।
इनका स्वरूप भले ही उग्र दिखाई देता है, लेकिन वे अपने भक्तों के लिए अत्यंत शुभ और कल्याणकारी हैं। इसी कारण इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है।
माँ कालरात्रि पूजा विधि
- माँ को गुड़ का भोग लगाएं।
- काले या नीले रंग के वस्त्र अर्पित करें।
- सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
- माँ के मंत्र का जाप करें।
मंत्र:
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
अष्टमी दिन – माँ महागौरी पूजा
देवी महागौरी का महत्व
नवरात्रि के आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है। माँ महागौरी को शुद्धता, शांति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक कथाओं के अनुसार, कठोर तपस्या के बाद माँ पार्वती का स्वरूप अत्यंत गौर वर्ण का हो गया, इसलिए उन्हें महागौरी कहा गया।
माँ महागौरी पूजा विधि
- माँ को सफेद फूल अर्पित करें।
- नारियल का भोग लगाएं।
- सफेद वस्त्र पहनकर पूजा करना शुभ माना जाता है।
- कन्या पूजन भी इसी दिन किया जाता है।
मंत्र:
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
नवमी दिन – माँ सिद्धिदात्री पूजा
देवी सिद्धिदात्री का महत्व
नवरात्रि के नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इन्हें सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी माना जाता है।
माँ सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान रहती हैं और भक्तों को ज्ञान, शक्ति और सफलता का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
माँ सिद्धिदात्री पूजा विधि
- माँ को नौ प्रकार के फल अर्पित करें।
- धूप, दीप और पुष्प से पूजा करें।
- देवी मंत्र का जाप करें।
- कन्या पूजन करें।
मंत्र:
ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥
नवरात्रि व्रत के नियम (Navratri Vrat Niyam)
नवरात्रि में व्रत रखना माँ दुर्गा की भक्ति और आत्मसंयम का प्रतीक माना जाता है। व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
1. सात्विक जीवन अपनाएं
नवरात्रि के दिनों में सात्विक भोजन करना चाहिए।
व्रत रखने वाले भक्त सामान्यतः इन चीजों का सेवन करते हैं—
- फल
- दूध
- दही
- मखाना
- सिंघाड़े का आटा
- कुट्टू का आटा
- साबूदाना
- सेंधा नमक
2. नकारात्मक विचारों से बचें
नवरात्रि केवल भोजन का व्रत नहीं है, बल्कि विचारों की शुद्धता का भी समय है।
इन दिनों—
- क्रोध से बचें।
- झूठ न बोलें।
- किसी का अपमान न करें।
- मन को शांत रखें।
3. नियमित पूजा और मंत्र जाप करें
नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन माँ दुर्गा की पूजा, आरती और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है।
माँ दुर्गा मंत्र:
ॐ दुं दुर्गायै नमः॥
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती पाठ का महत्व
नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati) का पाठ विशेष महत्व रखता है।
दुर्गा सप्तशती में माँ भगवती की महिमा, महिषासुर वध, शुम्भ-निशुम्भ वध और देवी की दिव्य शक्तियों का वर्णन मिलता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा से दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से—
- माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है।
- भय और बाधाएं दूर होती हैं।
- मन में आत्मविश्वास बढ़ता है।
- आध्यात्मिक ऊर्जा का विकास होता है।
नवरात्रि में चंडी पाठ का महत्व
चंडी पाठ (Chandi Path) माँ दुर्गा की उपासना का एक शक्तिशाली पाठ माना जाता है।
नवरात्रि में चंडी पाठ करने से भक्त माँ भगवती के उग्र और रक्षा करने वाले स्वरूप का ध्यान करते हैं।
चंडी पाठ में माँ दुर्गा द्वारा असुरों के विनाश और धर्म की स्थापना का वर्णन मिलता है।
नवरात्रि पूजा में पढ़े जाने वाले प्रमुख मंत्र
1. दुर्गा मंत्र
ॐ दुं दुर्गायै नमः॥
अर्थ:
हे माँ दुर्गा! आपको नमस्कार है। मुझे अपनी कृपा और शक्ति प्रदान करें।
2. देवी नमस्कार मंत्र
सर्वमंगल मांगल्ये
शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी
नारायणि नमोऽस्तुते॥
अर्थ:
हे माँ नारायणी! आप सभी मंगलों को प्रदान करने वाली, कल्याणकारी और शरण देने वाली हैं। आपको मेरा नमस्कार है।

नवरात्रि में क्या करें और क्या न करें
नवरात्रि माँ दुर्गा की साधना और आत्मशुद्धि का पवित्र समय माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्तों को कुछ विशेष नियमों का पालन करने की परंपरा है। सही विधि और श्रद्धा से की गई पूजा से मन में सकारात्मक ऊर्जा और भक्ति भाव बढ़ता है।
नवरात्रि में क्या करें? (Navratri Do’s)
1. प्रतिदिन माँ दुर्गा की पूजा करें
नवरात्रि के नौ दिनों में सुबह स्नान करके माँ दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। दीपक जलाकर, पुष्प अर्पित करके और आरती करके देवी का स्मरण करें।
2. देवी मंत्रों का जाप करें
नवरात्रि में माँ दुर्गा के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है।
मंत्र:
ॐ दुं दुर्गायै नमः॥
इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से मन को शांति और आत्मबल प्राप्त होने की मान्यता है।
3. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती, देवी महात्म्य या चंडी पाठ का विशेष महत्व माना जाता है।
जो भक्त पूरा पाठ नहीं कर सकते, वे श्रद्धा से देवी के मंत्र, स्तोत्र या आरती का पाठ कर सकते हैं।
4. सात्विक भोजन करें
नवरात्रि के दिनों में सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए।
व्रत में सामान्यतः सेवन किया जाता है—
- फल
- दूध
- दही
- मखाने
- साबूदाना
- कुट्टू का आटा
- सिंघाड़े का आटा
- सेंधा नमक
5. जरूरतमंदों की सहायता करें
नवरात्रि में दान और सेवा का विशेष महत्व माना जाता है।
भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने से पुण्य प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है।
नवरात्रि में क्या नहीं करना चाहिए? (Navratri Don’ts)
1. तामसिक भोजन से बचें
नवरात्रि में सात्विक जीवन अपनाने की परंपरा है। इसलिए इन दिनों मांसाहार, शराब और नशीली वस्तुओं से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
2. क्रोध और नकारात्मक विचारों से बचें
नवरात्रि केवल बाहरी पूजा नहीं बल्कि मन की शुद्धि का भी समय है।
इन दिनों—
- क्रोध न करें।
- किसी का अपमान न करें।
- झूठ बोलने से बचें।
- ईर्ष्या और द्वेष को त्यागने का प्रयास करें।
3. पूजा स्थान को अशुद्ध न रखें
जहाँ माँ दुर्गा की पूजा होती है, उस स्थान को साफ और पवित्र रखना चाहिए।
प्रतिदिन दीपक और पूजा सामग्री की व्यवस्था सही रखें।
कन्या पूजन विधि (Kanya Puja Vidhi)
नवरात्रि के अष्टमी या नवमी दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। इसे कंजक पूजन भी कहा जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, छोटी कन्याओं में माँ दुर्गा के स्वरूप का दर्शन किया जाता है।
कन्या पूजन के लिए आवश्यक सामग्री
- कन्याओं के लिए भोजन
- हलवा
- पूरी
- चना
- फल
- मिठाई
- जल
- रोली
- अक्षत
- मौली
- उपहार या दक्षिणा
कन्या पूजन की विधि
1. कन्याओं को आमंत्रित करें
नवरात्रि की अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्याओं को घर बुलाएं।
परंपरा के अनुसार नौ कन्याओं और एक बालक (लांगूर) को आमंत्रित किया जाता है।
2. चरण पूजन करें
कन्याओं के चरण धोकर उन्हें सम्मानपूर्वक आसन दें।
उनके माथे पर रोली और अक्षत लगाएं।
3. भोजन कराएं
कन्याओं को श्रद्धा से हलवा, पूरी और चने का प्रसाद खिलाएं।
भोजन के बाद उन्हें उपहार और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें।
नवरात्रि पूजा के लाभ (Navratri Puja Benefits)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान और श्रद्धा से नवरात्रि पूजा करने से अनेक आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।
1. माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है
नवरात्रि में देवी आराधना करने से भक्त माँ भगवती का आशीर्वाद प्राप्त करने की भावना रखते हैं।
2. मन की शांति मिलती है
मंत्र जाप, ध्यान और पूजा से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक विचारों का विकास होता है।
3. आत्मविश्वास और शक्ति बढ़ती है
माँ दुर्गा शक्ति और साहस की प्रतीक हैं। उनकी उपासना से व्यक्ति के अंदर आत्मबल बढ़ने की मान्यता है।
4. नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा
धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी उपासना जीवन की बाधाओं और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा करने में सहायक मानी जाती है।
5. परिवार में सुख-समृद्धि आती है
भक्ति और पूजा से घर में सकारात्मक वातावरण बनता है तथा परिवार में प्रेम और शांति बढ़ती है।
नवरात्रि पूजा में पढ़ी जाने वाली आरती
जय अम्बे गौरी आरती
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
नवरात्रि में माँ दुर्गा की आरती करना पूजा का महत्वपूर्ण भाग माना जाता है।
आरती के बाद माँ को प्रसाद अर्पित करके परिवार के सभी सदस्यों में बांटना शुभ माना जाता है।
नवरात्रि पूजा का आध्यात्मिक महत्व
नवरात्रि केवल बाहरी पूजा और व्रत का पर्व नहीं है, बल्कि यह अपने अंदर की नकारात्मक शक्तियों पर विजय प्राप्त करने का अवसर भी है।
माँ दुर्गा के नौ स्वरूप हमें जीवन के नौ महत्वपूर्ण गुणों की शिक्षा देते हैं—
- शैलपुत्री — स्थिरता और धैर्य
- ब्रह्मचारिणी — तपस्या और संयम
- चंद्रघंटा — साहस
- कूष्मांडा — सृजन शक्ति
- स्कंदमाता — प्रेम और ममता
- कात्यायनी — शक्ति और विजय
- कालरात्रि — भय पर नियंत्रण
- महागौरी — पवित्रता
- सिद्धिदात्री — ज्ञान और सिद्धि

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: नवरात्रि पूजा विधि क्या है?
उत्तर:
नवरात्रि पूजा विधि माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की नौ दिनों तक की जाने वाली विशेष आराधना है। इसमें कलश स्थापना, देवी पूजन, मंत्र जाप, दुर्गा सप्तशती पाठ, आरती और कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है।
प्रश्न 2: नवरात्रि में कलश स्थापना क्यों की जाती है?
उत्तर:
कलश स्थापना को नवरात्रि पूजा का शुभ आरंभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कलश में देवी-देवताओं का वास होता है और यह सुख, समृद्धि, शुभता तथा सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
प्रश्न 3: नवरात्रि पूजा कितने दिनों तक की जाती है?
उत्तर:
नवरात्रि पूजा मुख्य रूप से नौ दिनों तक की जाती है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और दसवें दिन विजयादशमी या दशहरा मनाया जाता है।
प्रश्न 4: नवरात्रि में कौन-कौन सी देवियों की पूजा की जाती है?
उत्तर:
नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है—
- माँ शैलपुत्री
- माँ ब्रह्मचारिणी
- माँ चंद्रघंटा
- माँ कूष्मांडा
- माँ स्कंदमाता
- माँ कात्यायनी
- माँ कालरात्रि
- माँ महागौरी
- माँ सिद्धिदात्री
प्रश्न 5: नवरात्रि में कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए?
उत्तर:
नवरात्रि में माँ दुर्गा के कई मंत्रों का जाप किया जाता है। इनमें सबसे सरल और प्रभावशाली मंत्र माना जाता है—
ॐ दुं दुर्गायै नमः॥
इसके अलावा—
सर्वमंगल मांगल्ये
शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी
नारायणि नमोऽस्तुते॥
का पाठ भी शुभ माना जाता है।
प्रश्न 6: क्या घर पर नवरात्रि पूजा कर सकते हैं?
उत्तर:
हाँ, श्रद्धा और भक्ति भाव से घर पर नवरात्रि पूजा की जा सकती है। इसके लिए पूजा स्थान को स्वच्छ रखना, माँ दुर्गा की स्थापना करना, दीपक जलाना और नियमित पूजा करना शुभ माना जाता है।
प्रश्न 7: नवरात्रि में व्रत रखने के क्या नियम हैं?
उत्तर:
नवरात्रि व्रत में सात्विक भोजन, मन की शुद्धता और संयम का पालन किया जाता है। भक्त फलाहार, दूध, कुट्टू, सिंघाड़ा, साबूदाना और सेंधा नमक जैसे व्रत के भोजन का सेवन करते हैं।
प्रश्न 8: नवरात्रि में कन्या पूजन कब किया जाता है?
उत्तर:
कन्या पूजन सामान्य रूप से अष्टमी या नवमी तिथि को किया जाता है। इसमें छोटी कन्याओं को माँ दुर्गा के स्वरूप के रूप में सम्मान देकर भोजन कराया जाता है और उपहार दिए जाते हैं।
नवरात्रि पूजा का संदेश
नवरात्रि हमें यह शिक्षा देती है कि जीवन में अच्छाई, धैर्य, साहस और सकारात्मक विचारों को अपनाना चाहिए।
माँ दुर्गा के नौ स्वरूप केवल देवी के रूप नहीं हैं, बल्कि जीवन के नौ महत्वपूर्ण गुणों के प्रतीक भी हैं।
- कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखना — माँ शैलपुत्री की शिक्षा है।
- तप और संयम रखना — माँ ब्रह्मचारिणी का संदेश है।
- भय का सामना करना — माँ चंद्रघंटा और कालरात्रि की प्रेरणा है।
- प्रेम और करुणा रखना — माँ स्कंदमाता का स्वरूप है।
- ज्ञान और सफलता प्राप्त करना — माँ सिद्धिदात्री की कृपा है।
निष्कर्ष (Conclusion)
नवरात्रि पूजा विधि (Navratri Puja Vidhi) माँ दुर्गा की आराधना का एक पवित्र मार्ग है, जिसमें भक्त नौ दिनों तक श्रद्धा, भक्ति और नियमों के साथ देवी की पूजा करते हैं।
कलश स्थापना से शुरू होकर नवमी के कन्या पूजन तक नवरात्रि की प्रत्येक विधि का अपना धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है।
नवरात्रि हमें यह संदेश देती है कि सत्य, धर्म और सकारात्मक ऊर्जा की हमेशा विजय होती है। माँ दुर्गा की उपासना से व्यक्ति के अंदर साहस, आत्मविश्वास और भक्ति का विकास होता है।
श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई नवरात्रि पूजा से माँ भगवती अपने भक्तों पर कृपा बनाए रखती हैं।
॥ या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
