भगवान विष्णु जी की आरती

!!भगवान विष्णु जी की आरती!!

ओम जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट, दासजनो के संकट, क्षण में दूर करे॥
ओम जय जगदीश हरे…

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥
ओम जय जगदीश हरे…

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ओम जय जगदीश हरे…

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करू जिसकी॥
ओम जय जगदीश हरे…

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ओम जय जगदीश हरे…

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥
ओम जय जगदीश हरे…

दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ओम जय जगदीश हरे…

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
ओम जय जगदीश हरे…

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा॥
ओम जय जगदीश हरे…

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
ओम जय जगदीश हरे…

भगवान विष्णु जी की आरती: ॐ जय जगदीश हरे (Lyrics, विधि और लाभ) 🙏

भगवान विष्णु, जिन्हें सृष्टि का पालनहार माना जाता है, उनकी आराधना के बिना कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है।
भगवान विष्णु जी की आरती “ॐ जय जगदीश हरे” का गान करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
इस लेख में हम आपको विष्णु जी की आरती के संपूर्ण लिरिक्स, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में विस्तार से बताएंगे।


भगवान विष्णु जी की आरती का महत्व 🔱

शास्त्रों के अनुसार, भगवान विष्णु सत्य के प्रतीक हैं। “ॐ जय जगदीश हरे” आरती की रचना पंडित श्रद्धा राम फिल्लौरी जी ने की थी।
यह आरती न केवल विष्णु जी को प्रसन्न करती है, बल्कि यह मनुष्य को समर्पण का भाव सिखाती है।
जब हम कहते हैं “तेरा तुझको अर्पण”, तो हम अपने अहंकार को त्याग कर ईश्वर के प्रति पूर्ण श्रद्धा प्रकट करते हैं।


भगवान विष्णु जी की आरती करने के लाभ 🌟

सकारात्मक ऊर्जा: घर से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और सकारात्मकता का संचार होता है।

पापों से मुक्ति: अनजाने में हुए पापों और मानसिक विकारों से मुक्ति मिलती है।

आर्थिक समृद्धि: विष्णु जी और माता लक्ष्मी की कृपा से धन-धान्य की कमी नहीं रहती।

मानसिक शांति: मन के क्लेश दूर होते हैं और एकाग्रता बढ़ती है।


भगवान विष्णु जी की आरती करने की विधि 🕯️

समय: विष्णु जी की आरती सुबह और शाम (संध्या काल) में करना सर्वोत्तम है। विशेष रूप से गुरुवार और एकादशी के दिन इसका महत्व बढ़ जाता है।

तैयारी: शुद्ध वस्त्र पहनकर आसन पर बैठें। एक दीपक में घी या कपूर जलाएं।

पूजा: आरती से पहले विष्णु जी को पीले फूल, पीले वस्त्र और तुलसी दल अर्पित करें।

आरती का तरीका: आरती के दीपक को भगवान की प्रतिमा के सामने गोल घुमाते हुए ऊंचे स्वर में गायन करें।

प्रसाद: अंत में चरणामृत और पंजीरी का प्रसाद वितरित करें।


भक्ति संदेश ✨

“सत्य ही विष्णु है और विष्णु ही सत्य है। जो शरण में आता है, प्रभु उसका हाथ थाम लेते हैं।”

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