चन्द्रशेखराष्टकम् का परिचय
चन्द्रशेखराष्टकम् (Chandrashekara Ashtakam) भगवान शिव के चन्द्रशेखर स्वरूप को समर्पित एक अत्यंत भक्तिपूर्ण स्तोत्र है। इसमें भगवान शिव को चंद्रमा को मस्तक पर धारण करने वाले, त्रिपुर का संहार करने वाले, भक्तवत्सल और मृत्यु के भय का नाश करने वाले भगवान के रूप में स्तुति की गई है।
इस स्तोत्र में भगवान शिव की महिमा, उनके दिव्य स्वरूप, करुणा, शक्ति और भक्तों की रक्षा करने वाले स्वरूप का सुंदर वर्णन मिलता है। इसके प्रत्येक श्लोक में “चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः” की भावना भगवान की शरणागति और मृत्यु-भय से मुक्ति का संदेश देती है।
चन्द्रशेखर कौन हैं?
भगवान शिव के मस्तक पर सुशोभित चंद्रमा के कारण उन्हें चन्द्रशेखर कहा जाता है। “चन्द्र” का अर्थ चंद्रमा और “शेखर” का अर्थ मस्तक का आभूषण होता है।
चन्द्रशेखर स्वरूप भगवान शिव की शांति, करुणा और दिव्य शक्ति का प्रतीक है। वे भक्तों के संकट दूर करने वाले तथा मृत्यु के भय से मुक्ति प्रदान करने वाले देवता के रूप में पूजित हैं।
चन्द्रशेखराष्टकम् के रचयिता
चन्द्रशेखराष्टकम् को परंपरागत रूप से ऋषि मृकण्डु के पुत्र मार्कण्डेय से संबंधित माना जाता है। कथा के अनुसार मार्कण्डेय ने अल्पायु के संकट से बचने के लिए भगवान शिव की आराधना की और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें मृत्यु के भय से मुक्त किया।
इसी कारण चन्द्रशेखराष्टकम् में भगवान शिव की शरण लेने वाले भक्त के लिए यमराज के भय का न रहना विशेष रूप से व्यक्त किया गया है।
चन्द्रशेखराष्टकम् का शुद्ध पाठ
चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर
चन्द्रशेखर पाहि माम्।
चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर
चन्द्रशेखर रक्ष माम्॥1॥
सरल हिंदी अर्थ:
हे चन्द्रशेखर भगवान! हे चन्द्रशेखर! मेरी रक्षा कीजिए। हे भगवान शिव! मुझे सभी संकटों और भय से बचाइए। मैं आपकी शरण में हूँ, आप ही मेरे रक्षक हैं।
रत्नसानुशरासनं रजताद्रिशृङ्गनिकेतनं
सिञ्जिनीकृतपन्नगेश्वरमच्युताननसायकम्।
क्षिप्रदग्धपुरत्रयं त्रिदिवालयैरभिवन्दितं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥2॥
सरल हिंदी अर्थ:
मैं भगवान चन्द्रशेखर की शरण लेता हूँ, जो रत्नमय पर्वत पर धनुष धारण किए विराजमान हैं और जिनका निवास कैलास पर्वत के रजत शिखर पर है। जिनके धनुष की प्रत्यंचा के रूप में सर्पराज शोभित हैं और जिनके बाण ने त्रिपुर के तीनों नगरों को शीघ्र ही भस्म कर दिया। देवताओं द्वारा पूजित उन भगवान चन्द्रशेखर की शरण में रहने वाले भक्त का यमराज क्या कर सकता है?
पञ्चपादपपुष्पगन्धिपदाम्बुजद्वयशोभितं
भाललोचनजातपावकदग्धमन्मथविग्रहम्।
भस्मदिग्धकलेबरं भव नाशनं भवमव्ययं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥3॥
सरल हिंदी अर्थ:
मैं भगवान चन्द्रशेखर की शरण लेता हूँ, जिनके चरणकमल दिव्य सुगंध से सुशोभित हैं। जिनके मस्तक के तीसरे नेत्र से निकली अग्नि ने कामदेव के शरीर को भस्म कर दिया। जो अपने शरीर पर भस्म धारण करते हैं, संसार के बंधनों और जन्म-मरण के दुःख का नाश करने वाले तथा अविनाशी हैं। ऐसे भगवान की शरण में रहने वाले भक्त का यमराज क्या कर सकता है?
मत्तवारणमुख्यचर्मकृतोत्तरीयमनोहरं
पङ्कजासनपद्मलोचनपूजिताङ्घ्रिसरोरुहम्।
देवसिन्धुतरङ्गसीकरसिक्तशुभ्रजटाधरं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥4॥
सरल हिंदी अर्थ:
मैं भगवान चन्द्रशेखर की शरण लेता हूँ, जो मदमस्त हाथी की खाल को वस्त्र के रूप में धारण करके अत्यंत मनोहर दिखाई देते हैं। जिनके चरणकमलों की ब्रह्मा और विष्णु जैसे देवताओं द्वारा पूजा की जाती है। जिनकी शुभ्र जटाएँ गंगा की लहरों से गिरने वाली जल की बूंदों से पवित्र और शोभायमान हैं। ऐसे भगवान की शरण में रहने वाले भक्त का यमराज क्या कर सकता है?
यक्षराजसखं भगाक्षहरं भुजङ्गविभूषणं
शैलराजसुतापरिष्कृतचारुवामकलेबरम्।
क्ष्वेडनीलगलं परश्वधधारिणं मृगधारिणं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥5॥
सरल हिंदी अर्थ:
मैं भगवान चन्द्रशेखर की शरण लेता हूँ, जो यक्षराज कुबेर के मित्र हैं, जिन्होंने दक्ष का अभिमान नष्ट किया और सर्पों को आभूषण के रूप में धारण किया है। जिनके शरीर के बाएँ भाग को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माता पार्वती ने सुशोभित किया है। समुद्र मंथन से निकले विष को धारण करने के कारण जिनका कंठ नीला हो गया और जो हाथ में परशु तथा मृग धारण करते हैं। ऐसे भगवान की शरण में रहने वाले भक्त का यमराज क्या कर सकता है?
कुण्डलीकृतकुण्डलेश्वरकुण्डलं वृषवाहनं
नारदादिमुनीश्वरस्तुतवैभवं भुवनेश्वरम्।
अन्धकान्तकमाश्रितामरपादपं शमनान्तकं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥6॥
सरल हिंदी अर्थ:
मैं भगवान चन्द्रशेखर की शरण लेता हूँ, जिनके कानों में सर्पाकार कुंडल शोभायमान हैं और जो नंदी बैल पर सवार होते हैं। जिनकी महिमा नारद आदि महान ऋषि-मुनि गाते हैं और जो समस्त संसार के स्वामी हैं। जिन्होंने अंधकासुर का संहार किया तथा देवताओं के लिए कल्पवृक्ष के समान आश्रय प्रदान किया। जो स्वयं मृत्यु के भी अंत करने वाले हैं। ऐसे भगवान की शरण में रहने वाले भक्त का यमराज क्या कर सकता है?
भेषजं भवरोगिणामखिलापदामपहारिणं
दक्षयज्ञविनाशनं त्रिगुणात्मकं त्रिविलोचनम्।
भुक्तिमुक्तिफलप्रदं सकलाघसङ्घनिबर्हणं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥7॥
सरल हिंदी अर्थ:
मैं भगवान चन्द्रशेखर की शरण लेता हूँ, जो संसाररूपी रोग से पीड़ित जीवों के लिए औषधि के समान हैं और सभी प्रकार के संकटों को दूर करने वाले हैं। जिन्होंने दक्ष के यज्ञ का विनाश किया और जो त्रिगुणात्मक तथा तीन नेत्रों वाले हैं। जो भक्तों को भौतिक सुख और मोक्ष का फल प्रदान करते हैं तथा सभी पापों का नाश करते हैं। ऐसे भगवान की शरण में रहने वाले भक्त का यमराज क्या कर सकता है?
भक्तवत्सलमर्चितं निधिमक्षयं हरिदम्बरं
सर्वभूतपतिं परात्परमप्रमेयमनुत्तमम्।
सोमवारिदभूहुताशनसोमपानिलखाकृतिं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥8॥
सरल हिंदी अर्थ:
मैं भगवान चन्द्रशेखर की शरण लेता हूँ, जो भक्तों से अत्यंत प्रेम करने वाले, सभी के द्वारा पूजित और अक्षय निधि के समान हैं। जो समस्त प्राणियों के स्वामी, परम से भी परे, अगम्य और सर्वोत्तम हैं। जो चंद्रमा, जल, पृथ्वी, अग्नि, सोम, वायु और आकाश आदि समस्त तत्वों में व्याप्त हैं। ऐसे भगवान की शरण में रहने वाले भक्त का यमराज क्या कर सकता है?
विश्वसृष्टिविधायिनं पुनरेव पालनतत्परं
संहरन्तमपि प्रपञ्चमशेषलोकनिवासिनम्।
क्रीडयन्तमहर्निशं गणनाथयूथसमन्वितं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः॥9॥
सरल हिंदी अर्थ:
मैं भगवान चन्द्रशेखर की शरण लेता हूँ, जो संपूर्ण विश्व की सृष्टि करने वाले, फिर उसका पालन करने में तत्पर और समय आने पर संपूर्ण संसार का संहार करने वाले हैं। जो सभी लोकों में निवास करते हैं और दिन-रात गणों के समूह के साथ अपनी दिव्य लीला करते हैं। ऐसे भगवान की शरण में रहने वाले भक्त का यमराज क्या कर सकता है?
मृत्युभीतमृकण्डुसूनुकृतस्तवं शिवसन्निधौ
यत्र कुत्र च यः पठेन्न हि तस्य मृत्युभयं भवेत्।
पूर्णमायुररोगतामखिलार्थसम्पदमादरात्
चन्द्रशेखर एव तस्य ददाति मुक्तिमयत्नतः॥10॥
सरल हिंदी अर्थ:
मृत्यु से भयभीत मृकण्डु ऋषि के पुत्र मार्कण्डेय ने भगवान शिव की उपस्थिति में इस स्तोत्र की स्तुति की थी। जो व्यक्ति कहीं भी इसका श्रद्धापूर्वक पाठ करता है, उसे मृत्यु का भय नहीं रहता। भगवान चन्द्रशेखर उसे पूर्ण आयु, आरोग्य और सभी प्रकार की संपत्ति प्रदान करते हैं तथा अंततः सहज रूप से मुक्ति का मार्ग प्रदान करते हैं।
इति श्रीचन्द्रशेखराष्टकस्तोत्रं संपूर्णम्॥
सरल हिंदी अर्थ:
इस प्रकार भगवान चन्द्रशेखर को समर्पित श्री चन्द्रशेखराष्टक स्तोत्र संपूर्ण हुआ।
चन्द्रशेखराष्टकम् का आध्यात्मिक महत्व
चन्द्रशेखराष्टकम् भगवान शिव की शरणागति और भक्ति का सुंदर स्तोत्र है। इसमें भगवान शिव के विभिन्न दिव्य स्वरूपों का वर्णन करते हुए यह भाव प्रकट किया गया है कि जो भक्त सच्ची श्रद्धा से भगवान चन्द्रशेखर की शरण में रहता है, उसे मृत्यु और भय से विचलित होने की आवश्यकता नहीं है।
इस स्तोत्र में शिव को त्रिपुरांतक, नीलकंठ, त्रिलोचन, भक्तवत्सल, भवरोग की औषधि और मृत्यु के भी अंत करने वाले भगवान के रूप में स्मरण किया गया है।
चन्द्रशेखराष्टकम् का पाठ करने के लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चन्द्रशेखराष्टकम् का श्रद्धापूर्वक पाठ भगवान शिव की भक्ति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक साधना को मजबूत करने वाला माना जाता है।
1. मृत्यु के भय से मुक्ति की भावना
इस स्तोत्र में बार-बार भगवान शिव की शरण लेने और यमराज के भय से मुक्त होने का संदेश मिलता है।
2. संकटों से रक्षा की प्रार्थना
भगवान चन्द्रशेखर को सभी प्रकार के संकटों को दूर करने वाला माना गया है। इसलिए भक्त कठिन परिस्थितियों में इस स्तोत्र का पाठ करते हैं।
3. भगवान शिव की भक्ति
नियमित पाठ शिव के प्रति श्रद्धा और समर्पण की भावना को गहरा करने में सहायक हो सकता है।
4. मानसिक शांति
श्रद्धापूर्वक स्तोत्र-पाठ मन को स्थिर करने और सकारात्मक आध्यात्मिक वातावरण बनाने में सहायक हो सकता है।
5. आरोग्य और मंगल की कामना
स्तोत्र के अंतिम श्लोक में पूर्ण आयु, आरोग्य और संपदा की प्राप्ति की प्रार्थना की गई है।
चन्द्रशेखराष्टकम् का पाठ कब करें?
चन्द्रशेखराष्टकम् का पाठ प्रातःकाल स्नान के बाद भगवान शिव के सामने करना शुभ माना जाता है। सोमवार, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि तथा अन्य शिव-उपासना के अवसरों पर भी इसका पाठ किया जा सकता है।
हालाँकि भगवान शिव की भक्ति के लिए किसी विशेष दिन की अनिवार्यता नहीं है। श्रद्धा और नियमितता के साथ इसका पाठ किया जा सकता है।
चन्द्रशेखराष्टकम् का पाठ कैसे करें?
1. शुद्ध होकर बैठें
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शांत स्थान पर बैठें।
2. भगवान शिव का ध्यान करें
भगवान शिव के चन्द्रशेखर स्वरूप का ध्यान करें, जिनके मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित है।
3. दीपक जलाएँ
भगवान शिव के सामने दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक प्रणाम करें।
4. स्तोत्र का पाठ करें
धीरे और स्पष्ट उच्चारण के साथ चन्द्रशेखराष्टकम् का पाठ करें।
5. भावपूर्वक अर्थ समझें
पाठ के साथ प्रत्येक श्लोक के भाव और भगवान शिव की महिमा को समझने का प्रयास करें।
6. प्रार्थना करें
अंत में भगवान चन्द्रशेखर से अपने और अपने परिवार की रक्षा, आरोग्य, शांति और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।
चन्द्रशेखराष्टकम् और मार्कण्डेय ऋषि
चन्द्रशेखराष्टकम् का संबंध भक्त मार्कण्डेय की प्रसिद्ध कथा से जोड़ा जाता है। मार्कण्डेय ऋषि को अल्पायु का वर प्राप्त था। जब उनकी निर्धारित आयु पूरी होने लगी, तब उन्होंने भगवान शिव की शरण ली।
मार्कण्डेय की अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें मृत्यु के बंधन से मुक्त किया। इसी कारण चन्द्रशेखराष्टकम् में भगवान शिव को मृत्यु के भय से रक्षा करने वाले भगवान के रूप में बार-बार स्मरण किया गया है।
चन्द्रशेखर स्वरूप का महत्व
भगवान शिव के चन्द्रशेखर स्वरूप में उनके मस्तक पर चंद्रमा दिखाई देता है। चंद्रमा शीतलता, शांति और मन का प्रतीक माना जाता है।
शिव के मस्तक पर चंद्रमा का विराजमान होना यह संदेश देता है कि भगवान शिव मन की चंचलता को नियंत्रित करने और उसे शांति प्रदान करने वाले हैं।
चन्द्रशेखराष्टकम् का मुख्य संदेश
इस पूरे स्तोत्र का मुख्य संदेश भगवान शिव की शरणागति और निर्भयता है।
जब मनुष्य स्वयं को भगवान की शरण में समर्पित करता है, तब उसके भीतर भय के स्थान पर विश्वास और चिंता के स्थान पर भक्ति की भावना विकसित होती है।
चन्द्रशेखराष्टकम् हमें यह प्रेरणा देता है कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में भगवान शिव का स्मरण करते हुए धैर्य, श्रद्धा और विश्वास बनाए रखना चाहिए।
निष्कर्ष
चन्द्रशेखराष्टकम् (Chandrashekara Ashtakam) भगवान शिव के चन्द्रशेखर स्वरूप की अत्यंत भक्तिपूर्ण स्तुति है। इसमें भगवान शिव की महिमा, उनके दिव्य स्वरूप और भक्तों के प्रति उनकी करुणा का सुंदर वर्णन मिलता है।
इस स्तोत्र का सबसे महत्वपूर्ण संदेश भगवान शिव की शरण में जाकर भय से मुक्त होने और ईश्वर के प्रति पूर्ण विश्वास रखने का है।
श्रद्धा और भक्ति के साथ चन्द्रशेखराष्टकम् का पाठ भगवान शिव के स्मरण और आध्यात्मिक साधना का सुंदर माध्यम बन सकता है।
ॐ चन्द्रशेखराय नमः।
ॐ नमः शिवाय।
चन्द्रशेखराष्टकम् FAQ
1. चन्द्रशेखराष्टकम् किस भगवान को समर्पित है?
चन्द्रशेखराष्टकम् भगवान शिव के चन्द्रशेखर स्वरूप को समर्पित है।
2. चन्द्रशेखराष्टकम् के रचयिता कौन हैं?
चन्द्रशेखराष्टकम् को परंपरागत रूप से भक्त मार्कण्डेय से संबंधित माना जाता है।
3. चन्द्रशेखराष्टकम् का पाठ क्यों किया जाता है?
इसका पाठ भगवान शिव की भक्ति, संकटों से रक्षा, मृत्यु के भय से मुक्ति की भावना और आध्यात्मिक शांति के लिए किया जाता है।
4. चन्द्रशेखराष्टकम् कब पढ़ना चाहिए?
इसे प्रातःकाल, सोमवार, प्रदोष और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर पढ़ा जा सकता है। श्रद्धा के साथ किसी भी समय इसका पाठ किया जा सकता है।
5. क्या चन्द्रशेखराष्टकम् का पाठ रोज कर सकते हैं?
हाँ, श्रद्धा और नियमितता के साथ इसका दैनिक पाठ किया जा सकता है।
6. चन्द्रशेखराष्टकम् में यमराज का उल्लेख क्यों है?
स्तोत्र में भगवान शिव की ऐसी शरण का वर्णन है जिसमें भक्त मृत्यु के भय से मुक्त होने का आध्यात्मिक संदेश प्राप्त करता है। इसी भाव को “मम किं करिष्यति वै यमः” के माध्यम से व्यक्त किया गया है।
7. चन्द्रशेखराष्टकम् का मुख्य संदेश क्या है?
इसका मुख्य संदेश भगवान शिव की शरणागति, भक्ति, निर्भयता और ईश्वर पर पूर्ण विश्वास है।
