श्री दत्तात्रेय चालीसा
(Shri Dattatreya Chalisa)
श्री नर्मदा चालीसा / Shri Narmada Chalisa
॥ दोहा ॥
जय गुरुदत्त अत्रेय, त्रिगुण अवतार।
सकल जनम हित करन को, धरयो भव पार॥
॥ चालीसा ॥
जय दिगम्बर दत्त दयाला। कृपा सिन्धु सुख सागर नाला॥
त्रिमूर्ति रूप तुम्हारो भारी। ब्रह्मा विष्णु शंकर अवतारी॥
जय दत्त गुरु अद्भुत स्वामी। पारब्रह्म परमानन्द धामी॥
अज जन्म अज योगीश्वर राजा। मायापति जग के त्राता॥
गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु साखी। गुरु देवो महेश्वर राखी॥
गुरु साक्षात परब्रह्म दयाला। दत्तात्रेय करहु निहाला॥
अनसूया घर जन्म तुम्हारा। तीनों लोक भयो उजियारा॥
अत्रि ऋषि के घर अवतारी। दत्तात्रेय नाम विख्याती॥
जय दिगम्बर दिगनिवासा। भक्त जनन के कष्ट निवासा॥
योगीश्वर जगपाल दयाला। भव बंधन से मुक्त कराला॥
नवद्वार पुर सुशोभित तनु। त्रिनेत्र त्रिशूल ध्वजा गनु॥
गाय, कुत्ता साथ सदा रक्षक। दत्त प्रभु सब दुखहारी व्रतक॥
भक्त करत जब ध्यान तुम्हारा। मिटत सकल संतान हमारा॥
सुख सम्पत्ति वृद्धि भई। संकट सब बिनसत समय वही॥
जपे दत्त नाम मन लागी। मिटे क्लेश भव दुख भागी॥
भवसागर से तरन करावो। निज चरणन में भक्त बसावो॥
जो कोई श्रद्धा भाव चित लाई। दत्त कृपा से मुक्ति पाई॥
संतन के तुम संत दयाला। त्रिपुरारि जग जीवन डाला॥
तुम्हरी महिमा पार न पावे। शेष सहस्त्र मुख गुण गावे॥
दीनदयाल भक्त हितकारी। जय जय जय दत्त मुरारी॥
॥ दोहा ॥
दत्तात्रेय कृपा करहु, रखहु भक्तन मान।
सकल मनोरथ सिद्ध हो, मिटे सकल अज्ञान॥
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श्री दत्तात्रेय चालीसा पाठ विधि
श्री दत्तात्रेय चालीसा का पाठ श्रद्धा, भक्ति और शांत मन से करने पर भगवान दत्तात्रेय की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह पाठ आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और गुरु कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
पाठ करने की विधि
- प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- भगवान दत्तात्रेय की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें
- दीपक और धूप जलाएँ
- फूल, चंदन और प्रसाद अर्पित करें
- शांत मन से श्री दत्तात्रेय चालीसा का पाठ करें
- पाठ के बाद आरती और प्रार्थना करें
पूजा सामग्री
- दीपक
- धूप / अगरबत्ती
- फूल
- चंदन
- प्रसाद (फल, मिठाई या पंचामृत)
- जल का पात्र
- भगवान दत्तात्रेय की तस्वीर या प्रतिमा
श्री दत्तात्रेय चालीसा पढ़ने का शुभ समय
शुभ समय
- प्रातःकाल
- संध्या समय
- गुरुवार
- पूर्णिमा
- दत्तात्रेय जयंती
विशेष पूजा एवं पर्व
- दत्तात्रेय जयंती
- गुरु पूर्णिमा
- गुरुवार की विशेष पूजा
श्री दत्तात्रेय चालीसा पाठ के लाभ
चालीसा पाठ के लाभ
- मन को शांति प्राप्त होती है
- गुरु कृपा और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है
- नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
- आत्मविश्वास और धैर्य बढ़ता है
- जीवन में सुख और समृद्धि बनी रहती है
- मानसिक तनाव कम होता है
- भगवान दत्तात्रेय का आशीर्वाद प्राप्त होता है
श्री दत्तात्रेय भगवान की आरती
आरती के माध्यम से भक्त भगवान दत्तात्रेय के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करते हैं। चालीसा पाठ के बाद आरती करना शुभ माना जाता है।
भगवान दत्तात्रेय मंत्र
मंत्र
॥ ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः ॥
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. श्री दत्तात्रेय चालीसा कब पढ़ना चाहिए?
श्री दत्तात्रेय चालीसा का पाठ सुबह और शाम के समय करना शुभ माना जाता है। विशेष रूप से गुरुवार और दत्तात्रेय जयंती पर इसका महत्व अधिक होता है।
2. क्या दत्तात्रेय चालीसा रोज पढ़ सकते हैं?
हाँ, श्रद्धा और भक्ति के साथ प्रतिदिन दत्तात्रेय चालीसा का पाठ किया जा सकता है।
3. दत्तात्रेय चालीसा पढ़ने के क्या लाभ हैं?
दत्तात्रेय चालीसा का पाठ करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक शक्ति, गुरु कृपा और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
4. क्या महिलाएँ दत्तात्रेय चालीसा पढ़ सकती हैं?
हाँ, महिलाएँ और पुरुष दोनों श्रद्धा और भक्ति के साथ श्री दत्तात्रेय चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
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